29 Sep भारत-फिजी रक्षा सहयोग: द्विपक्षीय संबंधों में नया मोड़
✎ भारत और फिजी के बीच संयुक्त कार्य समूह की बैठक ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सैन्य प्रशिक्षण, समुद्री सुरक्षा और रक्षा उद्योग में द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करने पर जोर दिया।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — अंतर्राष्ट्रीय संबंध: भारत की विदेश नीति, द्विपक्षीय संबंध, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत के हित | GS Paper III — आंतरिक सुरक्षा: समुद्री सुरक्षा, साइबर सुरक्षा
- Prelims: भारत-फिजी संबंध, संयुक्त कार्य समूह (JWG), हिंद-प्रशांत क्षेत्र, प्रशांत द्वीप समूह, रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा, आत्मनिर्भर भारत
- Essay: बदलती वैश्विक व्यवस्था में भारत की विदेश नीति और उसके पड़ोसी, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और सुरक्षा के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग का महत्व
त्वरित पुनरावृत्ति: भारत और फिजी के बीच संयुक्त कार्य समूह की बैठक ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सैन्य प्रशिक्षण, समुद्री सुरक्षा और रक्षा उद्योग में द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करने पर जोर दिया।
यह खबर चर्चा में क्यों?
भारत और फिजी के बीच द्विपक्षीय संयुक्त कार्य समूह (JWG) की दूसरी बैठक हाल ही में नई दिल्ली में आयोजित हुई। इस बैठक में दोनों देशों ने सैन्य प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण, समुद्री सुरक्षा, साइबर प्रशिक्षण और रक्षा उद्योग में सहयोग जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर चर्चा की, जो हिंद-प्रशांत क्षेत्र में दोनों देशों के रणनीतिक हितों को रेखांकित करता है।
पृष्ठभूमि
- भारत और फिजी के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और लोगों से लोगों के मजबूत संबंध हैं।
- दोनों देश हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समृद्धि के साझा दृष्टिकोण को बढ़ावा देते हैं।
- भारत ने हमेशा प्रशांत द्वीपीय देशों के विकास और सुरक्षा को महत्व दिया है, जिसमें फिजी एक महत्वपूर्ण भागीदार है।
- रक्षा सहयोग दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों का एक महत्वपूर्ण स्तंभ रहा है।
- यह बैठक भारत-फिजी रक्षा साझेदारी को और मजबूत करने तथा सहयोग के नए अवसर तलाशने के लिए एक मंच प्रदान करती है।
भारत-फिजी रक्षा सहयोग के प्रमुख आयाम
- सैन्य प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण: दोनों देश एक-दूसरे की सेनाओं के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों और क्षमता निर्माण पहलों को बढ़ावा दे रहे हैं।
- समुद्री सुरक्षा: हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सहयोग एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है, जिसमें सूचना साझाकरण और संयुक्त अभ्यास शामिल हो सकते हैं।
- साइबर प्रशिक्षण: आधुनिक युद्ध में साइबर सुरक्षा के बढ़ते महत्व को देखते हुए, दोनों देश साइबर प्रशिक्षण में सहयोग कर रहे हैं।
- रक्षा उद्योग में सहयोग: भारत ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के तहत अपनी स्वदेशी रक्षा विनिर्माण क्षमताओं को प्रदर्शित कर रहा है और फिजी के साथ रक्षा उद्योग में सहयोग के अवसर तलाश रहा है।
- संस्थागत सहयोग: दोनों देशों की सशस्त्र सेनाओं के बीच संस्थागत सहयोग को गहरा करना द्विपक्षीय रक्षा संबंधों को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण है।
- हिंद-प्रशांत क्षेत्र में महत्व: भारत फिजी और अन्य प्रशांत द्वीपीय देशों को एक स्वतंत्र, खुले, समावेशी और सुरक्षित हिंद-प्रशांत क्षेत्र के अपने दृष्टिकोण में महत्वपूर्ण भागीदार मानता है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| सैन्य प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण | दोनों देशों की सशस्त्र सेनाओं की परिचालन दक्षता और सामरिक क्षमताओं में वृद्धि। |
| समुद्री सुरक्षा | हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता और सुरक्षा सुनिश्चित करने में सहयोग। |
| साइबर प्रशिक्षण | साइबर खतरों का मुकाबला करने और डिजिटल बुनियादी ढांचे की सुरक्षा हेतु विशेषज्ञता का आदान-प्रदान। |
| रक्षा उद्योग में सहयोग | भारत की ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के तहत स्वदेशी रक्षा विनिर्माण क्षमताओं को बढ़ावा देना और निर्यात के अवसर तलाशना। |
| संस्थागत सहयोग को गहरा करना | नियमित संवाद और आदान-प्रदान के माध्यम से दीर्घकालिक रक्षा साझेदारी का निर्माण। |
| उन्नत नौसैनिक प्रशिक्षण | फिजी के नौसैनिक कर्मियों के लिए तकनीकी दक्षता और परिचालन समन्वय में सुधार। |
महत्व
सामरिक महत्व
- हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति और सुरक्षा प्रदाता की भूमिका को सुदृढ़ करना।
- फिजी जैसे प्रशांत द्वीपीय देशों के साथ संबंधों को गहरा करके क्षेत्रीय संतुलन और स्थिरता बनाए रखना।
- चीन के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला करने और नियम-आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था को बनाए रखने में योगदान।
रक्षा सहयोग
- सैन्य प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण और समुद्री सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को बढ़ावा देना।
- रक्षा उद्योग में सहयोग के माध्यम से भारत की स्वदेशी रक्षा विनिर्माण क्षमताओं को प्रदर्शित करना और निर्यात को प्रोत्साहन देना।
- दोनों देशों की सेनाओं के बीच अंतर-संचालनीयता (Interoperability) और विश्वास का निर्माण।
आर्थिक महत्व
- रक्षा उपकरणों और प्रौद्योगिकियों के निर्यात के माध्यम से भारत के रक्षा उद्योग को बढ़ावा देना।
- फिजी के साथ व्यापार और निवेश के नए अवसरों का सृजन, विशेषकर रक्षा क्षेत्र में।
- भारत की ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल को वैश्विक स्तर पर मान्यता दिलाना।
भू-राजनीतिक महत्व
- प्रशांत द्वीपीय देशों के साथ भारत के संबंधों को मजबूत करना, जो संयुक्त राष्ट्र और अन्य बहुपक्षीय मंचों पर महत्वपूर्ण भागीदार हैं।
- जलवायु परिवर्तन, आपदा प्रबंधन और समुद्री डकैती जैसी साझा चुनौतियों का मिलकर सामना करने के लिए मंच प्रदान करना।
- भारत की वैश्विक शक्ति के रूप में उभरती भूमिका को रेखांकित करना।
चुनौतियाँ
1. सीमित संसाधन
- फिजी जैसे छोटे द्वीपीय देशों के पास रक्षा व्यय और उन्नत सैन्य प्रशिक्षण सुविधाओं के लिए सीमित संसाधन होते हैं।
- भारत को अपनी क्षमता निर्माण पहलों को फिजी की विशिष्ट आवश्यकताओं और संसाधनों के अनुरूप ढालना होगा।
यूपीएससी लिंक: अंतर्राष्ट्रीय संबंध: भारत की विदेश नीति
2. भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा
- हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन जैसे अन्य प्रमुख खिलाड़ियों की बढ़ती उपस्थिति और प्रभाव।
- भारत को फिजी के साथ अपने संबंधों को मजबूत करते हुए भू-राजनीतिक संवेदनशीलता का ध्यान रखना होगा।
यूपीएससी लिंक: अंतर्राष्ट्रीय संबंध: क्षेत्रीय समूह
3. प्रौद्योगिकी हस्तांतरण
- रक्षा उद्योग में सहयोग के लिए संवेदनशील प्रौद्योगिकियों के हस्तांतरण से संबंधित चुनौतियाँ।
- दोनों देशों के बीच विश्वास और पारदर्शिता बनाए रखना महत्वपूर्ण है।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी: रक्षा प्रौद्योगिकी
4. जलवायु परिवर्तन के मुद्दे
- फिजी जैसे प्रशांत द्वीपीय देश जलवायु परिवर्तन के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हैं, जो उनकी सुरक्षा और स्थिरता को प्रभावित करता है।
- रक्षा सहयोग के साथ-साथ जलवायु लचीलेपन (Climate Resilience) पर भी ध्यान केंद्रित करना आवश्यक है।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण: जलवायु परिवर्तन
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| क्षेत्रीय शक्ति संतुलन | हिंद-प्रशांत क्षेत्र में विभिन्न शक्तियों के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा से क्षेत्रीय स्थिरता पर संभावित प्रभाव। |
| संसाधन आवंटन | रक्षा सहयोग पहलों के लिए पर्याप्त वित्तीय और तकनीकी संसाधनों का आवंटन सुनिश्चित करना। |
| मानव संसाधन विकास | सैन्य प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों के लिए योग्य कर्मियों की उपलब्धता और निरंतरता। |
| साइबर सुरक्षा जोखिम | बढ़ते डिजिटल एकीकरण के साथ साइबर हमलों और डेटा उल्लंघनों का खतरा। |
| प्रशासनिक बाधाएँ | द्विपक्षीय समझौतों और परियोजनाओं के कार्यान्वयन में नौकरशाही और प्रक्रियात्मक चुनौतियाँ। |
आगे की राह
- रक्षा उद्योग में ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत फिजी को स्वदेशी रक्षा उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देना।
- समुद्री डोमेन जागरूकता (Maritime Domain Awareness) बढ़ाने के लिए सूचना साझाकरण और संयुक्त गश्त को मजबूत करना।
- आपदा राहत और मानवीय सहायता (HADR) अभियानों में सहयोग के लिए संयुक्त अभ्यास आयोजित करना।
- साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रमों का विस्तार करना और साइबर खतरों से निपटने के लिए विशेषज्ञता साझा करना।
- फिजी के सैन्य कर्मियों के लिए भारत में उन्नत प्रशिक्षण स्लॉट बढ़ाना, विशेषकर नौसेना और विमानन क्षेत्रों में।
- नियमित उच्च-स्तरीय रक्षा संवाद और संयुक्त कार्य समूह की बैठकों को जारी रखना।
- जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने के लिए फिजी की क्षमताओं को मजबूत करने में सहायता करना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
भारत-फिजी संबंध · हिंद-प्रशांत क्षेत्र · रक्षा सहयोग · समुद्री सुरक्षा · क्षमता निर्माण · साइबर प्रशिक्षण · रक्षा उद्योग · आत्मनिर्भर भारत · प्रशांत द्वीप समूह · सैन्य प्रशिक्षण
अवधारणा प्रवाह
भारत-फिजी संयुक्त कार्य समूह की बैठक → सैन्य प्रशिक्षण, समुद्री सुरक्षा, रक्षा उद्योग पर चर्चा → हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग का महत्व → भारत की ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल का प्रदर्शन → द्विपक्षीय रक्षा सहयोग का सुदृढ़ीकरण → क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षा में योगदान
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. भारत-फिजी संयुक्त कार्य समूह (JWG) की दूसरी बैठक के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. इस बैठक का मुख्य उद्देश्य केवल सैन्य प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण पर चर्चा करना था।
2. भारत ने एक स्वतंत्र, खुले, समावेशी और सुरक्षित हिंद-प्रशांत क्षेत्र के अपने दृष्टिकोण में फिजी के महत्व पर जोर दिया।
3. फिजी के प्रतिनिधिमंडल ने भारत की स्वदेशी रक्षा विनिर्माण क्षमताओं का अवलोकन करने के लिए DPSU भवन का दौरा किया।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 गलत है क्योंकि बैठक में सैन्य प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण, समुद्री सुरक्षा, साइबर प्रशिक्षण और रक्षा उद्योग में सहयोग सहित कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर चर्चा हुई। कथन 2 सही है क्योंकि भारत ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में फिजी और प्रशांत द्वीपीय देशों के महत्व को दोहराया। कथन 3 सही है क्योंकि फिजी के प्रतिनिधिमंडल ने DPSU भवन का दौरा किया और ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के तहत भारत की स्वदेशी रक्षा विनिर्माण क्षमताओं की जानकारी प्राप्त की।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा/से क्षेत्र भारत और फिजी के बीच द्विपक्षीय रक्षा सहयोग के प्रमुख स्तंभ हैं?
1. सैन्य प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण
2. समुद्री सुरक्षा
3. साइबर प्रशिक्षण
4. रक्षा उद्योग में सहयोग
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
- केवल 1 और 2
- केवल 2, 3 और 4
- केवल 1, 3 और 4
- 1, 2, 3 और 4
उत्तर: 1, 2, 3 और 4 — भारत और फिजी के बीच द्विपक्षीय रक्षा सहयोग के प्रमुख स्तंभों में सैन्य प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण, समुद्री सुरक्षा, साइबर प्रशिक्षण और रक्षा उद्योग में सहयोग शामिल हैं। ये सभी क्षेत्र हालिया संयुक्त कार्य समूह की बैठक में चर्चा के मुख्य बिंदु थे।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत-फिजी द्विपक्षीय संबंधों में रक्षा सहयोग के बढ़ते महत्व का विश्लेषण करें। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करने में यह सहयोग किस प्रकार सहायक हो सकता है? (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** भारत और फिजी के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और नागरिक संबंधों का संक्षिप्त उल्लेख करते हुए रक्षा सहयोग के बढ़ते महत्व को रेखांकित करें।
2. **रक्षा सहयोग के प्रमुख आयाम:**
* सैन्य प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण (जैसे कोच्चि में नौसैनिक प्रशिक्षण)।
* समुद्री सुरक्षा (हिंद-प्रशांत क्षेत्र में साझा हित)।
* साइबर प्रशिक्षण।
* रक्षा उद्योग में सहयोग (भारत की ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल और स्वदेशी रक्षा विनिर्माण क्षमताओं का प्रदर्शन)।
* संस्थागत सहयोग को गहरा करना (संयुक्त कार्य समूह की भूमिका)।
3. **हिंद-प्रशांत क्षेत्र में क्षेत्रीय सुरक्षा में भूमिका:**
* **स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत का दृष्टिकोण:** भारत के इस दृष्टिकोण में फिजी और प्रशांत द्वीपीय देशों का महत्व।
* **चीन के बढ़ते प्रभाव का संतुलन:** क्षेत्र में चीन की बढ़ती सैन्य और आर्थिक उपस्थिति के संदर्भ में भारत-फिजी सहयोग का रणनीतिक महत्व।
* **आपदा राहत और मानवीय सहायता:** संयुक्त प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण से प्राकृतिक आपदाओं के दौरान त्वरित प्रतिक्रिया में सहायता।
* **समुद्री डकैती और अवैध मछली पकड़ना:** समुद्री सुरक्षा सहयोग से इन चुनौतियों का सामना करने में मदद।
* **नियम-आधारित व्यवस्था का सुदृढीकरण:** अंतरराष्ट्रीय कानूनों और मानदंडों के पालन को बढ़ावा देना।
4. **चुनौतियाँ और आगे की राह:** सहयोग को और गहरा करने के लिए संभावित चुनौतियों (संसाधन, दूरी) और अवसरों का संक्षिप्त उल्लेख।
5. **निष्कर्ष:** भारत-फिजी रक्षा सहयोग को दोनों देशों के साझा हितों और व्यापक क्षेत्रीय स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए निष्कर्ष दें।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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