23 Feb भारत–फ्राँस संबंध : ‘थर्ड वे’ की रणनीतिक रूपरेखा और वैश्विक साझेदारी का विस्तार
मुख्य परीक्षा के सामान्य अध्ययन के अंतर्गत
GS–2 : भारत के अन्य देशों के साथ संबंध, द्विपक्षीय/बहुपक्षीय समझौते, वैश्विक शासन
GS–3 : रक्षा, आंतरिक सुरक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, ऊर्जा सुरक्षा, अंतरिक्ष, समुद्री सुरक्षा
GS–1 : वैश्वीकरण और विश्व व्यवस्था का प्रभाव
प्रारंभिक परीक्षा के लिये : IR
स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR), डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम (DPDP Act), तृष्णा उपग्रह मिशन, स्कॉर्पीन पनडुब्बी परियोजना, अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA)
चर्चा में क्यों?
फरवरी 2026 में Emmanuel Macron की भारत यात्रा ने भारत–फ्राँस संबंधों को “विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी” (Special Global Strategic Partnership) के स्तर तक उन्नत कर दिया। यह यात्रा केवल राजनयिक शिष्टाचार नहीं थी, बल्कि वैश्विक शक्ति-संतुलन के बदलते परिदृश्य में एक वैकल्पिक रणनीतिक धुरी के उद्भव का संकेत थी। अमेरिका–चीन प्रतिस्पर्द्धा से विभाजित वैश्विक व्यवस्था में भारत और फ्राँस रणनीतिक स्वायत्तता, बहुध्रुवीयता और नियम-आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था पर आधारित एक व्यावहारिक ‘थर्ड वे’ विकसित कर रहे हैं। रक्षा, प्रौद्योगिकी, हिंद-प्रशांत सहयोग, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक शासन सुधार के क्षेत्रों में यह साझेदारी निरंतर गहराती जा रही है।

समय के साथ भारत–फ्राँस संबंधों का विकास
चरण 1 : स्वतंत्रता के बाद और उपनिवेशवाद से मुक्ति (1947–1962) : भारत की स्वतंत्रता के पश्चात प्राथमिक ध्यान फ्राँसीसी औपनिवेशिक क्षेत्रों के शांतिपूर्ण विलय पर केंद्रित रहा। 1947 में औपचारिक राजनयिक संबंध स्थापित हुए। 1956 की संधि और 1962 तक पुदुचेरी, कराईकल, माहे और यानम का भारत में विधिवत विलय हुआ। प्रारंभिक रक्षा सहयोग के अंतर्गत भारत ने Ouragan और Mystère जैसे लड़ाकू विमान प्राप्त किये। यह काल “औपनिवेशोत्तर व्यावहारिकता” का चरण था, जिसने भविष्य की रणनीतिक निकटता की आधारशिला रखी।
चरण 2 : शीत युद्ध और रणनीतिक स्वायत्तता (1963–1997) : शीत युद्ध के ध्रुवीकृत वातावरण में भारत और फ्राँस ने ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ की समान दृष्टि साझा की। यह चरण विश्वास-आधारित तकनीकी सहयोग का प्रतीक था।
(1) अंतरिक्ष सहयोग : ISRO और CNES के बीच सहयोग – वाइकिंग इंजन तकनीक ने आगे चलकर भारत के PSLV और GSLV कार्यक्रमों की नींव रखी।
(2) परमाणु समर्थन : 1982 में अमेरिका द्वारा तारापुर संयंत्र की ईंधन आपूर्ति रोकने के बाद फ्राँस ने भारत को समृद्ध यूरेनियम उपलब्ध कराया।
(3) रक्षा विविधीकरण : Mirage 2000 विमानों की खरीद, जो कारगिल युद्ध के दौरान निर्णायक सिद्ध हुए।
चरण 3 : औपचारिक रणनीतिक साझेदारी (1998–2022) : 1998 के पोखरण-II परीक्षणों के बाद जब पश्चिमी देशों ने प्रतिबंध लगाए, तब फ्राँस ने भारत पर प्रतिबंध लगाने से इनकार किया।
1. 1998 में फ्राँस पहला पश्चिमी देश बना जिसके साथ भारत ने औपचारिक रणनीतिक साझेदारी स्थापित की।
2. 36 Rafale लड़ाकू विमानों का सौदा।
3. P-75 स्कॉर्पीन पनडुब्बी परियोजना (मुंबई में निर्माण)।
4. 2015 में पेरिस COP21 के दौरान भारत और फ्राँस द्वारा International Solar Alliance की स्थापना।
चरण 4 : होराइज़न 2047 और विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी : हिंद-प्रशांत आयाम (2023–वर्तमान ) :
1. 2023 में “Horizon 2047” रोडमैप प्रारंभ किया गया, जिसका उद्देश्य हरित ऊर्जा, रक्षा तकनीक और उन्नत विनिर्माण में दीर्घकालिक सहयोग है।
2. संयुक्त नौसैनिक अभ्यास “Varuna”
3. 26 Rafale-M जेट की खरीद।
4. सह-विकास मॉडल की ओर संक्रमण।
17 फरवरी 2026 को Emmanuel Macron की मुंबई यात्रा के बाद संबंधों को औपचारिक रूप से उन्नत किया गया।
प्रमुख उपलब्धियाँ (2026):
A. कर्नाटक में H125 हेलीकॉप्टर असेंबली लाइन।
B. भारत–फ्राँस नवाचार वर्ष 2026।
C. हैमर मिसाइलों का संयुक्त उत्पादन।
D. स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) पर सह-विकास।
प्रमुख सहयोग के क्षेत्र
1. रक्षा औद्योगिक एकीकरण :
A. सह-विकास और सह-उत्पादन मॉडल।
B. स्कॉर्पीन पनडुब्बियाँ।
C. 110kN एयरो-इंजन पर संभावित सहयोग।
D. यह साझेदारी भारत की “रणनीतिक स्वायत्तता” को सुदृढ़ करती है।
2. अंतरिक्ष सहयोग :
A. ISRO–CNES साझेदारी।
B. तृष्णा पृथ्वी अवलोकन मिशन।
C. गगनयान मिशन हेतु मानव अंतरिक्ष उड़ान विशेषज्ञता।
3. डिजिटल सॉवरेनिटी और AI शासन :
A. सुरक्षित एवं नैतिक AI ढाँचा।
B. DPDP अधिनियम और यूरोपीय डेटा मानकों का सामंजस्य।
C. AI Impact Summit 2026 में सहयोग : यह अमेरिका–चीन तकनीकी मॉडल से अलग एक “मानव-केंद्रित AI” दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है।
4. स्वच्छ ऊर्जा और परमाणु सहयोग :
A. SMR सह-विकास।
B. जैतापुर परमाणु परियोजना (6 EPR रिएक्टर प्रस्तावित)।
C. 2047 तक 100 GW परमाणु क्षमता का लक्ष्य।
5. हिंद-प्रशांत सुरक्षा :
A. मुक्त और खुले हिंद-प्रशांत का समर्थन।
B. संयुक्त नौसैनिक गश्त।
C. समुद्री जागरूकता प्रणाली।
6. आतंकवाद-रोध एवं खुफिया साझेदारी :
A. FATF और संयुक्त राष्ट्र में सहयोग।
B. साइबर आतंकवाद से निपटने हेतु तंत्र।
C. मई 2026 में पेरिस में प्रस्तावित “No Money for Terror” सम्मेलन।
7. वैश्विक शासन सुधार :
A. UNSC सुधार में फ्राँस का भारत को समर्थन।
B. बहुध्रुवीय व्यवस्था की वकालत।
8. शिक्षा और जन-संपर्क :
A. 2030 तक 30,000 भारतीय छात्रों का लक्ष्य।
B. बहुवर्षीय वीज़ा व्यवस्था।
C. AIIMS में शैक्षिक अभियान की घोषणा।
मतभेद और चुनौतियाँ
(1) जैतापुर परियोजना गतिरोध :
a. लागत और दायित्व संबंधी प्रश्न।
b. EPR डिज़ाइन विवाद।
(2) व्यापार अस्थिरता :
a. एयरोस्पेस व पेट्रोलियम पर निर्भरता।
b. कृषि व वस्त्र में बाज़ार पहुँच की माँग।
(3) रूस–यूक्रेन मुद्दा : फ्राँस का कठोर रुख Vsभारत की बहु-संबद्ध नीति।
(4) रक्षा ToT में विलंब :
a. बौद्धिक संपदा साझा करने में संकोच।
b. नौकरशाही अड़चनें।
(5) डिजिटल कर और डेटा स्थानीयकरण : OECD बनाम इक्वलाइजेशन लेवी दृष्टिकोण।
(6) ग्लोबल साउथ में प्रतिस्पर्द्धा : अफ्रीका में प्रभाव का ओवरलैप।
(7) ब्रेन ड्रेन आशंकाएँ : भारतीय प्रतिभा का स्थायी प्रवास।
आगे की राह
1. संयुक्त IP ढाँचा और सह-विकास क्षेत्र।
2. हिंद-प्रशांत में त्रिपक्षीय सुरक्षा संरचना।
3. SMR पर त्वरित प्रूफ-ऑफ-कॉन्सेप्ट।
4. डिजिटल मानक बोर्ड की स्थापना।
5. स्थायी ‘नवाचार सेतु’ और संयुक्त टेक्नोलॉजी फंड।
6. संयुक्त साइबर-रक्षा कमान।
7. ग्लोबल साउथ लचीला अवसंरचना कोष।
निष्कर्ष
भारत–फ्राँस संबंध विश्वास, रणनीतिक स्वायत्तता और दीर्घकालिक नीतिगत समन्वय पर आधारित हैं। अमेरिका–चीन प्रतिस्पर्द्धा के युग में दोनों राष्ट्र एक व्यावहारिक ‘थर्ड वे’ का निर्माण कर रहे हैं, जो संप्रभुता, बहुध्रुवीयता और नियम-आधारित व्यवस्था को प्राथमिकता देता है। यद्यपि व्यापार, परमाणु ऊर्जा और प्रौद्योगिकी अंतरण में संरचनात्मक चुनौतियाँ विद्यमान हैं, फिर भी राजनीतिक इच्छाशक्ति और संस्थागत ढाँचा मजबूत है। Horizon 2047 के माध्यम से निरंतर सहयोग इस साझेदारी को बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था का स्थिर स्तंभ बना सकता है।
# प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :
Q. भारत–फ्राँस संबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए-
1. भारत और फ्राँस के बीच औपचारिक रणनीतिक साझेदारी की स्थापना वर्ष 1998 में हुई थी।
2. International Solar Alliance की स्थापना भारत और फ्राँस की संयुक्त पहल पर की गई थी।
3. फ्राँस हिंद-प्रशांत क्षेत्र में कोई क्षेत्रीय उपस्थिति नहीं रखता है।
4.भारत और फ्राँस के बीच ‘Horizon 2047’ रोडमैप दीर्घकालिक सहयोग के लिये तैयार किया गया है।
उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 1, 2 और 4
(c) केवल 2 और 3
(d) 1, 2, 3 और 4
उत्तर: (b)
# मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :
“भारत–फ्राँस संबंध पारंपरिक ‘क्रेता–विक्रेता’ मॉडल से आगे बढ़कर रणनीतिक स्वायत्तता एवं सह-विकास आधारित साझेदारी में परिवर्तित हो रहे हैं।” समकालीन वैश्विक परिप्रेक्ष्य में इस कथन का विश्लेषण कीजिए। प्रमुख सहयोग क्षेत्रों, विद्यमान चुनौतियों तथा आगे की रणनीतिक दिशा पर चर्चा कीजिए।
(शब्द सीमा – 250, अंक – 15)

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