29 Sep भारत-यूएई उच्च स्तरीय संयुक्त कार्यबल की 14वीं बैठक: मुंबई में महत्वपूर्ण चर्चाएं
✎ भारत-यूएई उच्च स्तरीय संयुक्त कार्यबल और व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता (CEPA) दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को मजबूत करने और निवेश प्रवाह को बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण मंच हैं।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS पेपर II — अंतर्राष्ट्रीय संबंध | GS पेपर III — अर्थव्यवस्था
- Prelims: भारत-यूएई संबंध, उच्च स्तरीय संयुक्त कार्यबल (HLJTFI), व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता (CEPA), द्विपक्षीय निवेश संधि (BIT), गिफ्ट सिटी (GIFT City), स्थानीय मुद्रा में लेनदेन
- Essay: भारत की विदेश नीति में आर्थिक कूटनीति का महत्व, वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में भारत-यूएई साझेदारी की भूमिका
त्वरित पुनरावृत्ति: भारत-यूएई उच्च स्तरीय संयुक्त कार्यबल और व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता (CEPA) दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को मजबूत करने और निवेश प्रवाह को बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण मंच हैं।
यह खबर चर्चा में क्यों?
भारत-यूएई निवेश पर उच्च स्तरीय संयुक्त कार्यबल (HLJTFI) की 14वीं बैठक हाल ही में मुंबई में आयोजित हुई। इस बैठक की सह-अध्यक्षता भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री और अबू धाबी निवेश प्राधिकरण (ADIA) के प्रबंध निदेशक ने की। बैठक में दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और आर्थिक संबंधों को बढ़ावा देने के साथ-साथ व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता (CEPA) की प्रगति और संयुक्त निवेश परियोजनाओं पर विचार-विमर्श किया गया।
पृष्ठभूमि
- भारत-यूएई निवेश पर उच्च स्तरीय संयुक्त कार्यबल (HLJTFI) की स्थापना वर्ष 2013 में दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और आर्थिक संबंधों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई थी।
- यह कार्यबल दोनों देशों में निवेश के अवसरों और संभावनाओं पर चर्चा करने तथा निवेशकों के समक्ष आने वाली चुनौतियों के समाधान के लिए एक प्रभावी मंच के रूप में कार्य करता है।
- मई 2026 में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की यूएई यात्रा और सितंबर 2026 में अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान की भारत यात्रा ने द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक दिशा और नई गति प्रदान की है।
- वित्त वर्ष 2025-26 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 101.25 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया, जो व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता (CEPA) के प्रभाव को दर्शाता है।
- दोनों देशों ने वर्ष 2032 तक द्विपक्षीय व्यापार को 200 अरब अमेरिकी डॉलर तक ले जाने का साझा लक्ष्य निर्धारित किया है।
- ऊर्जा, बुनियादी ढांचा, प्रौद्योगिकी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे भविष्य के विकास को गति देने वाले क्षेत्रों में निवेश सहयोग का विस्तार किया जा रहा है।
भारत-यूएई व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता (CEPA) क्या है?
- व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता (Comprehensive Economic Partnership Agreement – CEPA) भारत और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच एक मुक्त व्यापार समझौता है।
- इस समझौते का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार को बढ़ावा देना, निवेश को सुगम बनाना और आर्थिक सहयोग के नए रास्ते खोलना है।
- CEPA के तहत, दोनों देश एक-दूसरे के उत्पादों पर सीमा शुल्क (Customs Duty) को कम या समाप्त करते हैं, जिससे व्यापार की लागत कम होती है और प्रतिस्पर्धा बढ़ती है।
- यह समझौता गैर-टैरिफ बाधाओं (Non-Tariff Barriers) को कम करने, व्यापार सुविधा उपायों को लागू करने और सीमा शुल्क प्रक्रियाओं को सरल बनाने पर भी केंद्रित है।
- CEPA में सेवाओं के व्यापार, निवेश, बौद्धिक संपदा अधिकार (Intellectual Property Rights), डिजिटल व्यापार और विवाद समाधान जैसे क्षेत्रों को भी शामिल किया गया है।
- यह समझौता भारत के लिए पश्चिम एशिया और अफ्रीका के बाजारों तक पहुंच बनाने का एक महत्वपूर्ण प्रवेश द्वार है, जबकि यूएई के लिए भारतीय बाजार में अपनी उपस्थिति बढ़ाने का अवसर प्रदान करता है।
- यह समझौता दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करता है तथा क्षेत्रीय और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में उनकी भूमिका को बढ़ाता है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| उच्च स्तरीय संयुक्त कार्यबल (HLJTFI) की स्थापना | वर्ष 2013 में भारत और यूएई के बीच व्यापार, निवेश तथा आर्थिक संबंधों को बढ़ावा देने के लिए स्थापित। |
| द्विपक्षीय व्यापार | वित्त वर्ष 2025-26 में 101.25 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचा, 2032 तक 200 अरब अमेरिकी डॉलर का लक्ष्य। |
| व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता (CEPA) | द्विपक्षीय व्यापार संबंधों को मजबूत करने और गैर-तेल व्यापार को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका। |
| निवेश सहयोग के उभरते क्षेत्र | ऊर्जा, बुनियादी ढांचा, प्रौद्योगिकी और AI जैसे भविष्य के विकास को गति देने वाले क्षेत्रों में विस्तार। |
| वित्तीय क्षेत्र में सहयोग | स्थानीय मुद्रा में लेन-देन, भुगतान प्रणालियों का एकीकरण और केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्राओं पर प्रगति। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- भारत और यूएई के बीच द्विपक्षीय व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि, जो 2025-26 में 101.25 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है, आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) को बढ़ावा देता है।
- व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता (CEPA) और द्विपक्षीय निवेश संधि (BIT) जैसे समझौतों से व्यापार और निवेश के लिए अनुकूल माहौल बनता है, जिससे दोनों देशों में आर्थिक अवसर बढ़ते हैं।
- ऊर्जा, बुनियादी ढांचा, प्रौद्योगिकी और AI जैसे प्रमुख क्षेत्रों में संयुक्त निवेश से नवाचार (Innovation) और रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलेगा, जो दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है।
सामरिक महत्व
- यूएई भारत के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक भागीदार है, विशेषकर पश्चिम एशिया (West Asia) में, जो क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षा में योगदान देता है।
- नियमित उच्च-स्तरीय आदान-प्रदान और संयुक्त कार्यबल की बैठकें दोनों देशों के बीच मजबूत होते द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक दिशा प्रदान करती हैं।
- ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) के क्षेत्र में सहयोग भारत की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण है, जबकि यूएई भारत के बढ़ते ऊर्जा बाजार में निवेश के अवसर देखता है।
भू-राजनीतिक महत्व
- तेजी से बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य में भारत-यूएई साझेदारी व्यापारिक सुदृढ़ता (Trade Resilience) को मजबूत करती है और आपूर्ति श्रृंखलाओं (Supply Chains) में विविधता लाती है।
- दोनों देशों के बीच वित्तीय क्षेत्र में सहयोग, जैसे स्थानीय मुद्रा में लेन-देन और भुगतान प्रणालियों का एकीकरण, अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करके वित्तीय स्वायत्तता को बढ़ावा देता है।
- गिफ्ट सिटी (GIFT City) में यूएई के बैंकों और बीमा कंपनियों की शाखाओं का खुलना भारत को एक वैश्विक वित्तीय केंद्र के रूप में स्थापित करने में मदद करता है।
चुनौतियाँ
1. भू-राजनीतिक अस्थिरता
- पश्चिम एशिया में लगातार बदलती भू-राजनीतिक स्थितियाँ और क्षेत्रीय संघर्ष निवेश और व्यापार प्रवाह को प्रभावित कर सकते हैं।
- वैश्विक आर्थिक मंदी और आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधान दोनों देशों के बीच व्यापारिक लक्ष्यों को प्राप्त करने में बाधा उत्पन्न कर सकते हैं।
यूपीएससी लिंक: अंतर्राष्ट्रीय संबंध, आर्थिक विकास
2. नियामक और कानूनी बाधाएँ
- दोनों देशों के बीच निवेश संधियों और कराधान समझौतों के बावजूद, निवेशकों को अभी भी नियामक प्रक्रियाओं और कानूनी ढांचे में अंतर का सामना करना पड़ सकता है।
- विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए प्रक्रियाओं का सरलीकरण और कानूनी स्पष्टता सुनिश्चित करना एक चुनौती बनी हुई है।
यूपीएससी लिंक: शासन, आर्थिक सुधार
3. प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और नवाचार
- उच्च प्रौद्योगिकी (High Technology) और AI जैसे क्षेत्रों में सहयोग के लिए प्रभावी प्रौद्योगिकी हस्तांतरण (Technology Transfer) तंत्र और बौद्धिक संपदा अधिकारों (Intellectual Property Rights) का संरक्षण सुनिश्चित करना आवश्यक है।
- संयुक्त अनुसंधान और विकास (R&D) परियोजनाओं को बढ़ावा देने के लिए पर्याप्त वित्तपोषण और संस्थागत समर्थन की आवश्यकता है।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, आर्थिक विकास
4. व्यापार असंतुलन
- हालांकि द्विपक्षीय व्यापार बढ़ रहा है, व्यापार असंतुलन (Trade Imbalance) को संबोधित करना महत्वपूर्ण है ताकि दोनों देशों के लिए साझेदारी अधिक टिकाऊ हो सके।
- गैर-तेल व्यापार को और बढ़ावा देने और नए उत्पादों तथा सेवाओं की पहचान करने की आवश्यकता है।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता | मुद्रास्फीति (Inflation), ब्याज दरों में वृद्धि और वैश्विक मंदी का जोखिम निवेश और व्यापार को प्रभावित कर सकता है। |
| गैर-टैरिफ बाधाएँ | सीमा शुल्क प्रक्रियाओं, गुणवत्ता मानकों और नियामक आवश्यकताओं में अंतर व्यापार प्रवाह में बाधा उत्पन्न कर सकते हैं। |
| कुशल कार्यबल की कमी | प्रौद्योगिकी और AI जैसे उभरते क्षेत्रों में संयुक्त परियोजनाओं के लिए कुशल कार्यबल की उपलब्धता एक चुनौती हो सकती है। |
| परियोजना कार्यान्वयन में देरी | बड़ी संयुक्त निवेश परियोजनाओं, जैसे ओडिशा में एल्युमिनियम परिसर, के कार्यान्वयन में नौकरशाही बाधाओं या वित्तपोषण संबंधी मुद्दों के कारण देरी हो सकती है। |
| साइबर सुरक्षा जोखिम | डिजिटल भुगतान प्रणालियों और डेटा साझाकरण में वृद्धि के साथ, साइबर सुरक्षा (Cyber Security) जोखिमों का प्रबंधन एक महत्वपूर्ण चिंता का विषय है। |
आगे की राह
- व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता (CEPA) के प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करना और व्यापार बाधाओं को कम करने के लिए नियमित समीक्षा करना।
- ऊर्जा, बुनियादी ढांचा, प्रौद्योगिकी और AI जैसे प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में संयुक्त निवेश परियोजनाओं की पहचान करना और उनके त्वरित कार्यान्वयन को सुविधाजनक बनाना।
- स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को बढ़ावा देने और भुगतान प्रणालियों के एकीकरण के लिए केंद्रीय बैंकों के बीच सहयोग को और मजबूत करना।
- निवेशकों के लिए नियामक प्रक्रियाओं को सरल बनाना और व्यापार करने में आसानी (Ease of Doing Business) में सुधार के लिए एक पारदर्शी और स्थिर नीति ढांचा प्रदान करना।
- गुजरात में फूड पार्क जैसी संयुक्त परियोजनाओं को समय पर पूरा करने पर ध्यान केंद्रित करना और कृषि तथा खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग का विस्तार करना।
- भारत के गिफ्ट सिटी में यूएई के वित्तीय संस्थानों की उपस्थिति को और बढ़ावा देना और वित्तीय सेवाओं में नवाचार को प्रोत्साहित करना।
- दोनों देशों के बीच कौशल विकास (Skill Development) और क्षमता निर्माण (Capacity Building) कार्यक्रमों को बढ़ावा देना ताकि उभरते क्षेत्रों में कुशल कार्यबल की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
भारत-यूएई संबंध · उच्च स्तरीय संयुक्त कार्यबल · व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता (CEPA) · द्विपक्षीय निवेश संधि (BIT) · आर्थिक कूटनीति · ऊर्जा सहयोग · वित्तीय क्षेत्र सहयोग · स्थानीय मुद्रा व्यापार · बुनियादी ढांचा निवेश · तकनीकी सहयोग
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 253’, ‘note’: ‘अंतर्राष्ट्रीय समझौतों को प्रभावी करने की शक्ति’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 282’, ‘note’: ‘संघ या राज्य द्वारा अनुदान’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 292’, ‘note’: ‘भारत सरकार द्वारा उधार लेना’}
अवधारणा प्रवाह
उच्च स्तरीय संयुक्त कार्यबल की बैठकें → व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता (CEPA) की समीक्षा → द्विपक्षीय व्यापार और निवेश में वृद्धि → ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, AI में संयुक्त परियोजनाएँ → आर्थिक संवृद्धि और सामरिक साझेदारी का सुदृढ़ीकरण
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. भारत-यूएई निवेश पर उच्च स्तरीय संयुक्त कार्यबल (HLJTFI) की स्थापना वर्ष 2013 में हुई थी।
2. व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता (CEPA) के तहत वर्ष 2032 तक द्विपक्षीय व्यापार को 200 अरब अमेरिकी डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
3. हाल ही में, एमिरेट्स एनबीडी ने भारत के आरबीएल बैंक में बहुलांश हिस्सेदारी का अधिग्रहण किया है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है। भारत-यूएई निवेश पर उच्च स्तरीय संयुक्त कार्यबल (HLJTFI) की स्थापना वर्ष 2013 में भारत और यूएई के बीच व्यापार, निवेश तथा आर्थिक संबंधों को बढ़ावा देने के लिए की गई थी। कथन 2 सही है। व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता (CEPA) के तहत वर्ष 2032 तक द्विपक्षीय व्यापार को 200 अरब अमेरिकी डॉलर तक ले जाने का साझा लक्ष्य है। कथन 3 सही है। एमिरेट्स एनबीडी द्वारा भारत के आरबीएल बैंक में बहुलांश हिस्सेदारी के लगभग 3 अरब अमेरिकी डॉलर के हालिया अधिग्रहण का उल्लेख किया गया है।
Q2. भारत और यूएई के केंद्रीय बैंकों द्वारा की गई पहलों में निम्नलिखित में से कौन-कौन से क्षेत्र शामिल हैं?
1. स्थानीय मुद्रा में लेन-देन
2. भुगतान और संदेश प्रणालियों का एकीकरण
3. केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्राओं से संबंधित पहल
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: 1, 2 और 3 — भारत और यूएई के केंद्रीय बैंकों ने स्थानीय मुद्रा में लेन-देन, भुगतान और संदेश प्रणालियों के एकीकरण तथा केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्राओं से संबंधित पहलों पर प्रगति की समीक्षा की है। अतः तीनों कथन सही हैं।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत-यूएई उच्च स्तरीय संयुक्त कार्यबल (HLJTFI) की भूमिका और महत्व पर चर्चा कीजिए। भारत-यूएई व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता (CEPA) द्विपक्षीय व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने में किस प्रकार सहायक रहा है? (15 Marks)
रूपरेखा: परिचय में भारत-यूएई संबंधों और HLJTFI की स्थापना का संक्षिप्त उल्लेख करें। HLJTFI की भूमिका और महत्व को बिंदुवार समझाएं, जिसमें व्यापार, निवेश और आर्थिक संबंधों को बढ़ावा देने तथा चुनौतियों के समाधान के लिए एक मंच के रूप में इसकी भूमिका शामिल हो। CEPA के उद्देश्यों, प्रमुख प्रावधानों और द्विपक्षीय व्यापार व निवेश पर इसके सकारात्मक प्रभावों का विश्लेषण करें। इसमें व्यापारिक आंकड़े (जैसे 101.25 अरब अमेरिकी डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार, 2032 तक 200 अरब अमेरिकी डॉलर का लक्ष्य) और निवेश परियोजनाओं (जैसे गुजरात में फूड पार्क, ओडिशा में एल्युमिनियम परिसर, वित्तीय क्षेत्र में निवेश) का उल्लेख करें। ऊर्जा, बुनियादी ढांचे, प्रौद्योगिकी और AI जैसे उभरते क्षेत्रों में सहयोग पर भी प्रकाश डालें। स्थानीय मुद्रा में लेन-देन और डिजिटल मुद्राओं जैसी केंद्रीय बैंक पहलों का भी जिक्र करें। निष्कर्ष में भारत-यूएई साझेदारी के रणनीतिक महत्व और भविष्य की संभावनाओं को रेखांकित करें।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
Maharashtra PCS (MPSC) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: भारत-यूएई उच्च स्तरीय संयुक्त कार्यबल की 14वीं बैठक मुंबई में आयोजित की गई। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य क्या था?
- A. व्यापार और निवेश को बढ़ावा देना तथा आर्थिक सहयोग को मजबूत करना
- B. सैन्य गठबंधन और सुरक्षा समझौतों पर हस्ताक्षर करना
- C. पर्यटन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करना
- D. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा पर ध्यान केंद्रित करना
उत्तर: A. व्यापार और निवेश को बढ़ावा देना तथा आर्थिक सहयोग को मजबूत करना — इस बैठक का मुख्य उद्देश्य भारत और यूएई के बीच व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देना था।
Mains: भारत-यूएई उच्च स्तरीय संयुक्त कार्यबल की 14वीं बैठक मुंबई में आयोजित की गई। इस बैठक के दौरान हुए प्रमुख समझौतों और महाराष्ट्र राज्य के लिए उनके संभावित आर्थिक लाभों का विश्लेषण कीजिए।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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