महिला आरक्षण विधेयक: शिअद के समर्थन से केंद्र पर दबाव बढ़ा, जानिए पूरा मामला

महिला आरक्षण विधेयक को अकाली दल का समर्थन: शिअद ने केंद्र से की ये मांग, BJP से गठबंधन पर क्या बोले गुलजार? — concept mind map

महिला आरक्षण विधेयक: शिअद के समर्थन से केंद्र पर दबाव बढ़ा, जानिए पूरा मामला

महिला आरक्षण विधेयक: शिअद के समर्थन से केंद्र पर दबाव बढ़ा, जानिए पूरा मामला — Women Reservation Bill & SAD's Demands Timeline
आरेख: Women Reservation Bill & SAD’s Demands Timeline

✎ महिला आरक्षण विधेयक और परिसीमन दोनों ही भारतीय लोकतंत्र में प्रतिनिधित्व और समानता सुनिश्चित करने के महत्वपूर्ण संवैधानिक उपकरण हैं, जिनका कार्यान्वयन आगामी जनगणना और उसके बाद होने वाले परिसीमन पर निर्भर करेगा।

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — भारतीय संविधान: ऐतिहासिक आधार, विकास, विशेषताएँ, संशोधन, महत्त्वपूर्ण प्रावधान और मूल संरचना  |  GS Paper II — संघ एवं राज्यों के कार्य तथा उत्तरदायित्व, संघीय ढाँचा  |  GS Paper II — संसद और राज्य विधायिकाएँ — संरचना, कार्यपद्धति, कार्य-संचालन, शक्तियाँ एवं विशेषाधिकार और इनसे उत्पन्न होने वाले विषय
  • Prelims: महिला आरक्षण विधेयक, नारी शक्ति वंदन अधिनियम, संविधान संशोधन, परिसीमन आयोग, अनुच्छेद 82, अनुच्छेद 330A, अनुच्छेद 332A
  • Essay: भारत में लैंगिक समानता की दिशा में विधायी प्रयास, प्रतिनिधित्व का संकट और लोकतांत्रिक सुधार

त्वरित पुनरावृत्ति: महिला आरक्षण विधेयक और परिसीमन दोनों ही भारतीय लोकतंत्र में प्रतिनिधित्व और समानता सुनिश्चित करने के महत्वपूर्ण संवैधानिक उपकरण हैं, जिनका कार्यान्वयन आगामी जनगणना और उसके बाद होने वाले परिसीमन पर निर्भर करेगा।

यह खबर चर्चा में क्यों?

शिरोमणि अकाली दल (SAD) ने केंद्र सरकार से महिला आरक्षण विधेयक (Women Reservation Bill) को तत्काल लागू करने की मांग की है। पार्टी ने सभी राज्यों में संसदीय सीटों की संख्या में 50 प्रतिशत बढ़ोतरी के केंद्र के प्रस्ताव का भी समर्थन किया है, जिसे परिसीमन (Delimitation) प्रक्रिया के माध्यम से लागू किया जाएगा। अकाली दल के अनुसार, ये दोनों विधेयक पंजाब के हित, शांति और समृद्धि के लिए हैं, और पार्टी सिख गुरुओं की शिक्षाओं से प्रेरणा लेते हुए महिलाओं की गरिमा और समान अधिकारों का समर्थन करती है।

पृष्ठभूमि

  • महिला आरक्षण विधेयक, जिसे ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023’ के नाम से जाना जाता है, सितंबर 2023 में संसद द्वारा पारित किया गया था। यह अधिनियम लोकसभा (Lok Sabha) और राज्य विधानसभाओं (State Assemblies) में महिलाओं के लिए एक-तिहाई (33 प्रतिशत) सीटें आरक्षित करने का प्रावधान करता है।
  • यह विधेयक संविधान के अनुच्छेद 330A और 332A को जोड़कर महिलाओं के लिए सीटों के आरक्षण का प्रावधान करता है।
  • विधेयक में यह भी कहा गया है कि आरक्षण जनगणना के बाद होने वाले परिसीमन के आधार पर लागू होगा, जिससे इसके कार्यान्वयन में देरी हो सकती है।
  • परिसीमन का अर्थ है किसी देश या एक विधायी निकाय वाले प्रांत में क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्रों (लोकसभा या विधानसभा) की सीमाओं का निर्धारण या पुन:निर्धारण करना।
  • भारत में परिसीमन का कार्य एक उच्च-शक्ति वाले निकाय, परिसीमन आयोग (Delimitation Commission) द्वारा किया जाता है, जिसका गठन संसद के एक अधिनियम द्वारा किया जाता है।
  • पिछला परिसीमन 2002 में हुआ था, और वर्तमान में लोकसभा और विधानसभा सीटों की संख्या 2026 तक स्थिर है, जिसके बाद अगला परिसीमन होना है।

महिला आरक्षण विधेयक और परिसीमन क्या है?

  • महिला आरक्षण विधेयक (नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023) एक संवैधानिक संशोधन अधिनियम है जो लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और दिल्ली विधानसभा में महिलाओं के लिए कुल सीटों का एक-तिहाई (33%) आरक्षित करता है।
  • यह आरक्षण अनुसूचित जाति (Scheduled Castes) और अनुसूचित जनजाति (Scheduled Tribes) के लिए आरक्षित सीटों के भीतर भी लागू होगा, जिससे इन वर्गों की महिलाओं को भी प्रतिनिधित्व मिलेगा।
  • यह अधिनियम संविधान के अनुच्छेद 82 के तहत होने वाले अगले परिसीमन के बाद ही लागू होगा, जो जनगणना के आंकड़ों पर आधारित होगा।
  • परिसीमन का उद्देश्य जनसंख्या के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं को फिर से खींचना है ताकि सभी नागरिकों को समान प्रतिनिधित्व मिल सके।
  • भारत में, परिसीमन आयोग का गठन संविधान के अनुच्छेद 82 के तहत संसद द्वारा पारित एक अधिनियम के माध्यम से किया जाता है।
  • आयोग के आदेश अंतिम होते हैं और उन्हें किसी भी न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती, जिससे इसकी निष्पक्षता सुनिश्चित होती है।
  • परिसीमन प्रक्रिया यह सुनिश्चित करती है कि प्रत्येक राज्य में सीटों का आवंटन और प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र का आकार जनसंख्या के अनुपात में हो, जिससे ‘एक व्यक्ति, एक वोट, एक मूल्य’ का सिद्धांत बना रहे।
  • अकाली दल ने केंद्र सरकार के उस प्रस्ताव का भी समर्थन किया है जिसमें सभी राज्यों में संसदीय सीटों की संख्या में 50 प्रतिशत बढ़ोतरी की बात कही गई है, जो आगामी परिसीमन का एक हिस्सा हो सकता है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
महिला आरक्षण विधेयक महिलाओं को राजनीतिक क्षेत्र में अधिक प्रतिनिधित्व प्रदान करता है, जिससे लैंगिक समानता और समावेशी शासन को बढ़ावा मिलता है।
परिसीमन (Delimitation) प्रक्रिया संसदीय और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाओं का पुनर्गठन करता है, जिससे जनसंख्या के आधार पर समान प्रतिनिधित्व सुनिश्चित होता है और ‘एक व्यक्ति, एक वोट, एक मूल्य’ के सिद्धांत को बल मिलता है।
संसदीय सीटों में 50% वृद्धि का प्रस्ताव राज्यों के प्रतिनिधित्व को बढ़ाता है, जिससे विभिन्न क्षेत्रों की आवाज़ को राष्ट्रीय स्तर पर अधिक प्रभावी ढंग से सुना जा सके।
तत्काल कार्यान्वयन की मांग नीतिगत निर्णयों में महिलाओं की भागीदारी को शीघ्रता से सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर ज़ोर देती है।

महत्व

सामाजिक महत्व

  • महिला आरक्षण विधेयक महिलाओं को निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में शामिल करके सामाजिक समानता और सशक्तिकरण को बढ़ावा देता है।
  • यह महिलाओं के प्रति समाज के दृष्टिकोण में सकारात्मक बदलाव लाने में सहायक हो सकता है, जिससे लैंगिक रूढ़िवादिताएँ कम होंगी।

राजनीतिक महत्व

  • महिला आरक्षण से संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की संख्या बढ़ेगी, जिससे नीति निर्माण में महिलाओं के मुद्दों को प्राथमिकता मिलेगी।
  • परिसीमन प्रक्रिया के माध्यम से सीटों का पुनर्गठन विभिन्न क्षेत्रों और समुदायों को उचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करेगा, जिससे राजनीतिक स्थिरता और समावेशिता बढ़ेगी।

शासनिक महत्व

  • महिलाओं की भागीदारी से शासन में संवेदनशीलता, पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ने की संभावना है।
  • परिसीमन और सीटों में वृद्धि से प्रतिनिधित्व का संतुलन बेहतर होगा, जिससे संघीय ढांचे को मजबूती मिलेगी।

चुनौतियाँ

1. परिसीमन की निष्पक्षता

  • परिसीमन प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से संचालित करना एक चुनौती हो सकती है, ताकि किसी भी राज्य या समुदाय के साथ अन्याय न हो।
  • राजनीतिक हस्तक्षेप से बचने और जनसांख्यिकीय परिवर्तनों को सटीक रूप से प्रतिबिंबित करने की आवश्यकता है।

2. आरक्षण के कार्यान्वयन में देरी

  • महिला आरक्षण विधेयक को तत्काल लागू करने की मांग के बावजूद, इसके कार्यान्वयन में संभावित देरी राजनीतिक इच्छाशक्ति और प्रक्रियात्मक बाधाओं के कारण हो सकती है।
  • आरक्षण के लिए आवश्यक संवैधानिक संशोधनों और अन्य कानूनी औपचारिकताओं को पूरा करने में समय लग सकता है।

3. राजनीतिक सहमति का अभाव

  • विधेयक और परिसीमन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर सभी राजनीतिक दलों के बीच पूर्ण सहमति बनाना एक चुनौती हो सकती है, जिससे कार्यान्वयन में बाधा आ सकती है।
  • विभिन्न दलों के अपने-अपने राजनीतिक हित और दृष्टिकोण हो सकते हैं।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
परिसीमन का आधार जनसंख्या के आंकड़ों में असंतुलन और राज्यों के बीच प्रतिनिधित्व को लेकर विवाद की संभावना।
महिला आरक्षण का स्वरूप आरक्षण के भीतर उप-आरक्षण (जैसे SC/ST/OBC महिलाओं के लिए) की मांग और उसके कार्यान्वयन की जटिलता।
राजनीतिक ध्रुवीकरण विधेयकों के समर्थन या विरोध में राजनीतिक दलों के बीच मतभेद, जिससे राष्ट्रीय सहमति का अभाव हो सकता है।
कार्यान्वयन की समय-सीमा विधेयक को कानून बनाने और फिर इसे प्रभावी ढंग से लागू करने में लगने वाला समय और उससे उत्पन्न होने वाली चुनौतियाँ।

आगे की राह

  • महिला आरक्षण विधेयक को शीघ्रता से कानून में परिवर्तित करने के लिए राजनीतिक दलों के बीच व्यापक सहमति बनाई जाए।
  • परिसीमन प्रक्रिया को निष्पक्ष, पारदर्शी और जनसांख्यिकीय परिवर्तनों के अनुरूप सुनिश्चित करने के लिए एक स्वतंत्र आयोग का गठन किया जाए।
  • संसदीय सीटों में वृद्धि के प्रस्ताव पर सभी राज्यों के साथ परामर्श किया जाए ताकि उनके हितों का ध्यान रखा जा सके।
  • महिलाओं को राजनीतिक भागीदारी के लिए प्रोत्साहित करने हेतु जागरूकता अभियान चलाए जाएं और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएं।
  • आरक्षण के कार्यान्वयन के बाद महिलाओं के लिए क्षमता निर्माण और नेतृत्व विकास के अवसर प्रदान किए जाएं।
  • परिसीमन और आरक्षण के संबंध में किसी भी विवाद को सुलझाने के लिए एक प्रभावी विवाद समाधान तंत्र स्थापित किया जाए।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

महिला आरक्षण विधेयक · नारी शक्ति वंदन अधिनियम · संवैधानिक संशोधन · परिसीमन · स्थानीय निकायों में महिला आरक्षण · समान प्रतिनिधित्व · संघवाद · राजनीतिक सशक्तिकरण · लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण · संसदीय सीटें

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 82’, ‘note’: ‘परिसीमन के संबंध में प्रावधान’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 330’, ‘note’: ‘लोकसभा में SC/ST के लिए सीटों का आरक्षण’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 332’, ‘note’: ‘विधानसभाओं में SC/ST के लिए सीटों का आरक्षण’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 334’, ‘note’: ‘आरक्षण के प्रावधानों की अवधि’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 368’, ‘note’: ‘संविधान संशोधन की प्रक्रिया’}

अवधारणा प्रवाह

महिला आरक्षण विधेयक का प्रस्ताव  →  राजनीतिक दलों द्वारा समर्थन/विरोध  →  संसद में विधेयक पर चर्चा और पारित होना  →  परिसीमन प्रक्रिया का आरंभ  →  संसदीय सीटों का पुनर्गठन और वृद्धि  →  राजनीतिक निकायों में महिलाओं का बढ़ा हुआ प्रतिनिधित्व

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. महिला आरक्षण विधेयक, जिसे अब ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के नाम से जाना जाता है, लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित करने का प्रावधान करता है।
2. यह अधिनियम तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है और इसके लिए किसी परिसीमन प्रक्रिया की आवश्यकता नहीं होगी।
3. यह विधेयक संविधान के अनुच्छेद 334ए में संशोधन का प्रस्ताव करता है, जो आरक्षण के लागू होने की अवधि से संबंधित है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल एक — कथन 1 सही है। यह विधेयक लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित करता है। कथन 2 गलत है। यह अधिनियम परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही लागू होगा। कथन 3 गलत है। यह विधेयक संविधान में नए अनुच्छेद 330ए, 332ए और 334ए जोड़ता है, जिसमें 334ए आरक्षण के लागू होने की अवधि और परिसीमन के बाद इसके प्रभावी होने से संबंधित है।

Q2. अभिकथन (A): महिला आरक्षण विधेयक का उद्देश्य महिलाओं को राजनीतिक रूप से सशक्त बनाना और उन्हें निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में अधिक भागीदारी सुनिश्चित करना है।
कारण (R): भारत में महिलाओं का राजनीतिक प्रतिनिधित्व ऐतिहासिक रूप से कम रहा है, जो लैंगिक समानता के सिद्धांतों के विपरीत है।

  1. A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
  2. A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
  3. A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
  4. A असत्य है, लेकिन R सत्य है।

उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि विधेयक का मुख्य लक्ष्य महिलाओं का राजनीतिक सशक्तिकरण है। कारण (R) भी सही है क्योंकि भारत में महिलाओं का प्रतिनिधित्व कम रहा है, जो इस विधेयक की आवश्यकता का एक प्रमुख कारण है। कारण (R) अभिकथन (A) की सही व्याख्या भी करता है, क्योंकि कम प्रतिनिधित्व को दूर करने के लिए ही सशक्तिकरण की आवश्यकता है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ महिला आरक्षण विधेयक (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) भारत में महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस कथन का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए और चर्चा कीजिए कि इसके प्रभावी कार्यान्वयन में क्या चुनौतियाँ हो सकती हैं। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: महिला आरक्षण विधेयक (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) का संक्षिप्त परिचय, इसके मुख्य प्रावधान (लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33% आरक्षण) और उद्देश्य (राजनीतिक सशक्तिकरण) का उल्लेख।
2. विधेयक का महत्व (सकारात्मक पक्ष):
– राजनीतिक प्रतिनिधित्व में वृद्धि: महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना।
– निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में सुधार: महिलाओं के मुद्दों को प्राथमिकता मिलना।
– लैंगिक समानता को बढ़ावा: संवैधानिक आदर्शों के अनुरूप।
– सामाजिक परिवर्तन: महिलाओं की स्थिति में सुधार का उत्प्रेरक।
3. आलोचनात्मक परीक्षण (चुनौतियाँ और चिंताएँ):
– कार्यान्वयन में देरी: परिसीमन और जनगणना पर निर्भरता।
– ‘रोटेशन’ का मुद्दा: सीटों के रोटेशन से निरंतरता की कमी और ‘डमी’ उम्मीदवारों की संभावना।
– ‘आरक्षण के भीतर आरक्षण’ की मांग: SC/ST और OBC महिलाओं के लिए अलग आरक्षण की बहस।
– योग्यता बनाम प्रतिनिधित्व: क्या आरक्षण से योग्य उम्मीदवारों का चयन प्रभावित होगा?
– पितृसत्तात्मक मानसिकता: केवल सीटों के आरक्षण से वास्तविक सशक्तिकरण की गारंटी नहीं।
– राजनीतिक इच्छाशक्ति: विधेयक के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए राजनीतिक दलों की प्रतिबद्धता।
4. निष्कर्ष: विधेयक के महत्व को स्वीकार करते हुए, चुनौतियों का समाधान करने और वास्तविक लैंगिक समानता सुनिश्चित करने के लिए व्यापक दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल।

स्रोत: amarujala.com


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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