महिला एवं बाल विकास मंत्रालय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता कार्यशाला: विशेष अभियान 6.0 के तहत

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता कार्यशाला: विशेष अभियान 6.0 के तहत

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता कार्यशाला: विशेष अभियान 6.0 के तहत

वरिष्ठ अधिकारियों के लिए AI प्रशिक्षण प्रक्रियाअभियान शुरू2-31 अक्टूबर 2026AI कार्यशाला17 अक्टूबर 2026उपकरण उपयोग70% व्यावहारिकक्षमता विकासनई तकनीक अपनानालंबित मामलों का निस्तास्वच्छता बढ़ाना
वरिष्ठ अधिकारियों के लिए AI प्रशिक्षण प्रक्रिया

✎ विशेष अभियान 6.0 (2–31 अक्टूबर, 2026) में राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस प्रभाग द्वारा प्रशिक्षण का उद्देश्य सरकारी अधिकारियों में व्यावहारिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता दक्षता, नैतिक उपयोग और स्वदेशी ढांचे की समझ विकसित करना है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — शासन (e-Governance, सिविल सेवा क्षमता निर्माण, लोक शिकायत निवारण)  |  GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्वदेशी तकनीक विकास)  |  GS Paper IV — नैतिकता (प्रौद्योगिकी का उत्तरदायी उपयोग, डेटा गोपनीयता और नैतिक दुविधाएं)
  • Prelims: विशेष अभियान 6.0 (Special Campaign 6.0): 2 से 31 अक्टूबर, 2026, राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस प्रभाग (National e-Governance Division) — इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के अधीन, इंडियाएआई मिशन (IndiaAI Mission) — स्वदेशी कृत्रिम बुद्धिमत्ता क्षमता विकास हेतु, मिशन कर्मयोगी (Mission Karmayogi) — सिविल सेवा क्षमता निर्माण की राष्ट्रीय कार्यक्रम संरचना, प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग (Prompt Engineering) — जेनरेटिव कृत्रिम बुद्धिमत्ता से निर्देश देने की विधि, जेनरेटिव कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Generative AI) और इसके नैतिक जोखिम, डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 (Digital Personal Data Protection Act, 2023), डिजिटल इंडिया (Digital India) — ई-गवर्नेंस का मूल आधार
  • Essay: प्रशासन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता: दक्षता के अवसर और उत्तरदायित्व की चुनौतियां, लोक सेवकों की क्षमता-वृद्धि और सुशासन का भविष्य

त्वरित पुनरावृत्ति: विशेष अभियान 6.0 (2–31 अक्टूबर, 2026) में राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस प्रभाग द्वारा प्रशिक्षण का उद्देश्य सरकारी अधिकारियों में व्यावहारिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता दक्षता, नैतिक उपयोग और स्वदेशी ढांचे की समझ विकसित करना है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय और उसके प्रशासनिक नियंत्रण वाले सभी स्वायत्तशासी एवं सांविधिक निकाय 2 से 31 अक्टूबर, 2026 के बीच विशेष अभियान 6.0 चला रहे हैं, जिसका उद्देश्य स्वच्छता को बढ़ावा देना और लंबित संदर्भों का निस्तारण करना है। इसी अभियान के अंतर्गत राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस प्रभाग ने 17 अक्टूबर, 2026 को मंत्रालय के अवर सचिव और उससे ऊपर के स्तर के 42 अधिकारियों के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता कार्यशाला आयोजित की। इस व्यावहारिक प्रशिक्षण में लगभग 70 प्रतिशत सत्र कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों के प्रत्यक्ष उपयोग पर केंद्रित थे। विषयों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का परिचय, प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग, कार्यालयी उत्पादकता के लिए उपकरण, नैतिक एवं उत्तरदायी उपयोग तथा देश के स्वदेशी कृत्रिम बुद्धिमत्ता ढांचे को शामिल किया गया। समाचार का महत्त्व इस बात में है कि सरकारी कामकाज में नई तकनीक को अपनाने से पहले वरिष्ठ अधिकारियों की क्षमता का विकास किया जा रहा है।

पृष्ठभूमि

  • विशेष अभियान श्रृंखला: सरकारी कार्यालयों में लंबित मामलों के निस्तारण और स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए प्रतिवर्ष 2 अक्टूबर से 31 अक्टूबर तक विशेष अभियान चलाए जाते हैं। यह 6.0 संस्करण है, जो पिछले पांच वर्षों के अभियानों के अनुरूप है।
  • दिशा-निर्देशों की भूमिका: सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों को अपनाने से संबंधित विशेष अभियान दिशा-निर्देश केंद्र सरकार के कार्यालयों के लिए कार्यान्वयन का ढांचा तय करते हैं। राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस प्रभाग इन्हीं दिशा-निर्देशों के अनुसार प्रशिक्षण आयोजित करता है।
  • सिविल सेवा क्षमता निर्माण: मिशन कर्मयोगी के अंतर्गत सरकारी कर्मचारियों के लिए सतत और तकनीक-आधारित प्रशिक्षण पर बल दिया गया है, जिसका उद्देश्य नौकरशाही को भविष्य की शासन-चुनौतियों के लिए तैयार करना है।
  • भारत में कृत्रिम बुद्धिमत्ता नीति: इंडियाएआई मिशन के अंतर्गत स्वदेशी कृत्रिम बुद्धिमत्ता क्षमता, कम्प्यूट संसाधनों की उपलब्धता और भारतीय भाषाओं के मॉडल विकसित करने पर काम हो रहा है।
  • उत्तरदायी कृत्रिम बुद्धिमत्ता की नीतिगत दिशा: नीति आयोग ने ‘उत्तरदायी कृत्रिम बुद्धिमत्ता’ (Responsible AI) के सिद्धांतों पर दस्तावेज़ जारी किया था, जिसमें पारदर्शिता, निष्पक्षता, गोपनीयता और जवाबदेही को केंद्र में रखा गया है।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) क्या है?

  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता ऐसी कंप्यूटर प्रणाली है जो मानव-बुद्धि से जुड़े कार्य, जैसे भाषा समझना, पैटर्न पहचानना, निर्णय सुझाना और सामग्री तैयार करना, कर सकती है।
  • जेनरेटिव कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Generative AI) विशाल डेटा पर प्रशिक्षित मॉडलों के माध्यम से पाठ, चित्र और सारांश जैसी नई सामग्री उत्पन्न करती है।
  • प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग (Prompt Engineering) में ऐसे निर्देश तैयार किए जाते हैं जिनसे मॉडल से अपेक्षित, स्पष्ट और सटीक उत्तर प्राप्त हो सके; इसकी गुणवत्ता सीधे परिणाम को प्रभावित करती है।
  • प्रशासन में उपयोग: पत्राचार का मसौदा तैयार करना, बड़े दस्तावेज़ों का सारांश, नीति-विश्लेषण, डेटा की व्याख्या और शिकायतों के वर्गीकरण में कृत्रिम बुद्धिमत्ता सहायक हो सकती है।
  • मुख्य जोखिम: मॉडल गलत या भ्रामक जानकारी दे सकते हैं, पूर्वाग्रह (Bias) दोहरा सकते हैं और गोपनीय डेटा की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकते हैं। इसलिए मानव-निगरानी आवश्यक है।
  • नैतिक एवं उत्तरदायी उपयोग के लिए पारदर्शिता, जवाबदेही, निष्पक्षता, गोपनीयता और सुरक्षा के सिद्धांत मार्गदर्शक माने जाते हैं।
  • भारत के संदर्भ में डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 व्यक्तिगत डेटा के प्रसंस्करण से जुड़े दायित्व तय करता है, जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग में भी प्रासंगिक है।

मुख्य विशेषताएँ

Feature Significance
आयोजक और स्तर राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस प्रभाग (NeGD) ने महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अवर सचिव तथा उससे ऊपर के अधिकारियों के लिए 17 अक्टूबर 2026 को यह कार्यशाला आयोजित की। यह नीति-निर्णय से जुड़े वरिष्ठ नौकरशाहों के लिए डिजिटल दक्षता का प्रशिक्षण है।
प्रशिक्षण का स्वरूप कार्यशाला व्यावहारिक थी और लगभग 70 प्रतिशत सत्र कृत्रिम बुद्धिमत्ता टूल्स के व्यावहारिक उपयोग पर केंद्रित थे। इससे सैद्धांतिक व्याख्यान के बजाय कार्यालयी कार्य में सीधे उपयोग पर बल दिया गया।
प्रतिभागी मंत्रालय के सचिव, अपर सचिव, संयुक्त सचिव और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों सहित कुल 42 प्रतिभागी शामिल हुए। शीर्ष स्तर की भागीदारी से नेतृत्व-स्तर पर तकनीक अपनाने का संदेश जाता है।
विषय-सूची कृत्रिम बुद्धिमत्ता का परिचय, प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग, कार्यालयी उत्पादकता हेतु टूल्स, नैतिक एवं उत्तरदायी उपयोग तथा स्वदेशी कृत्रिम बुद्धिमत्ता ढांचा शामिल थे। इसमें तकनीकी दक्षता, शासन-नैतिकता और आत्मनिर्भरता तीनों पहलू एक साथ रखे गए।
अभियान से संबंध यह कार्यशाला विशेष अभियान 6.0 (2 से 31 अक्टूबर 2026) के अंतर्गत सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों को अपनाने की पहल का हिस्सा है। अभियान का फोकस स्वच्छता को बढ़ावा देना और लंबित संदर्भों का निस्तारण है।

महत्व

प्रशासनिक सुधार

  • लंबित संदर्भों के निस्तारण में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित टूल्स से फाइल-प्रबंधन, सारांश लेखन और दस्तावेज़ खोज की गति बढ़ाई जा सकती है।
  • प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग की समझ से अधिकारी मसौदा लेखन और नीति-विश्लेषण में तकनीक का अधिक सटीक उपयोग कर सकते हैं।
  • कार्यालयी उत्पादकता बढ़ने से सेवा-वितरण और नागरिक-केंद्रित शासन की गुणवत्ता में सुधार की संभावना बनती है।

ई-गवर्नेंस और डिजिटल शासन

  • डिजिटल इंडिया के अंतर्गत ई-गवर्नेंस का अगला चरण सरकारी प्रक्रियाओं में बुद्धिमान और विश्लेषणात्मक उपकरणों के समावेश की ओर बढ़ रहा है।
  • वरिष्ठ अधिकारियों का प्रशिक्षण यह सुनिश्चित करता है कि तकनीक का निर्णय-प्रक्रिया में समझदारी से उपयोग हो, केवल उपकरण खरीदने तक सीमित न रहे।

सामाजिक और नीतिगत महत्व

  • महिला एवं बाल विकास मंत्रालय जैसे सामाजिक क्षेत्र के मंत्रालय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग लाभार्थी-डेटा के विश्लेषण और योजनाओं की निगरानी में सहायक हो सकता है।
  • नैतिक और उत्तरदायी उपयोग पर सत्र से यह संकेत मिलता है कि संवेदनशील सामाजिक डेटा के साथ सावधानी आवश्यक है।

आत्मनिर्भरता और रणनीतिक महत्व

  • स्वदेशी कृत्रिम बुद्धिमत्ता ढांचे पर चर्चा से तकनीकी संप्रभुता का मुद्दा नीति-विमर्श के केंद्र में आता है।
  • विदेशी प्लेटफ़ॉर्म पर अत्यधिक निर्भरता से डेटा सुरक्षा और रणनीतिक स्वायत्तता पर प्रश्न उठते हैं, इसलिए घरेलू क्षमता का विकास आवश्यक है।

चुनौतियाँ

1. डेटा गोपनीयता और सुरक्षा

  • सरकारी टूल्स में नागरिकों का व्यक्तिगत या संवेदनशील डेटा डालने से गोपनीयता भंग होने का खतरा रहता है।
  • व्यक्तिगत डेटा संरक्षण से जुड़े कानूनी ढांचे के साथ कार्यालयी उपयोग के नियम स्पष्ट होने चाहिए।

2. एल्गोरिदमिक पक्षपात और उत्तरदायित्व

  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता मॉडल प्रशिक्षण डेटा के पूर्वाग्रह अपना सकते हैं, जिससे लिंग या सामाजिक वर्ग के आधार पर असमान परिणाम आ सकते हैं।
  • एआई-जनित निर्णयों की जवाबदेही किसकी होगी, यह तय करना प्रशासनिक और कानूनी दोनों दृष्टि से चुनौतीपूर्ण है।

3. क्षमता निर्माण और डिजिटल विभाजन

  • प्रशिक्षण केवल वरिष्ठ अधिकारियों तक सीमित रहने से निचले स्तर के कर्मचारी इस बदलाव से पीछे रह सकते हैं।
  • तकनीकी दक्षता में अंतर से सेवा-वितरण के स्तर पर असमानता बढ़ सकती है।

4. स्वदेशी क्षमता और तकनीकी निर्भरता

  • अधिकांश उन्नत कृत्रिम बुद्धिमत्ता मॉडल और कंप्यूट संसाधन विदेशी कंपनियों के नियंत्रण में हैं।
  • स्वदेशी ढांचे के विकास के लिए पर्याप्त कंप्यूटिंग अवसंरचना, प्रतिभा और डेटा संसाधन आवश्यक हैं।

5. प्रशासनिक संस्कृति और परिवर्तन प्रतिरोध

  • पारंपरिक फ़ाइल-आधारित कार्यप्रणाली में नई तकनीक अपनाने के प्रति झिझक हो सकती है।
  • केवल एक दिन की कार्यशाला से दीर्घकालिक व्यवहार परिवर्तन सुनिश्चित नहीं होता, इसके लिए निरंतर अभ्यास चाहिए।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

Issue Concern
डेटा गोपनीयता सरकारी दस्तावेज़ या नागरिक डेटा को बाहरी कृत्रिम बुद्धिमत्ता टूल में डालने से सूचना-सुरक्षा का जोखिम
पक्षपात और जवाबदेही मॉडल के निर्णयों में अंतर्निहित पूर्वाग्रह और त्रुटि की स्थिति में उत्तरदायित्व तय करने की समस्या
डिजिटल विभाजन वरिष्ठ स्तर तक सीमित प्रशिक्षण से निचले स्तर पर दक्षता की खाई बने रहने की आशंका
तकनीकी निर्भरता विदेशी प्लेटफ़ॉर्म और कंप्यूट संसाधनों पर अत्यधिक निर्भरता से रणनीतिक स्वायत्तता पर प्रभाव
अभियान की निरंतरता विशेष अभियान की समय-सीमा समाप्त होने के बाद प्रशिक्षण का प्रयोग घटने का जोखिम

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • इंडिया एआई मिशन (IndiaAI Mission)

आगे की राह

  • संवेदनशील सरकारी और नागरिक डेटा के लिए सरकारी स्तर पर अनुमोदित, सुरक्षित कृत्रिम बुद्धिमत्ता टूल्स के उपयोग के स्पष्ट दिशा-निर्देश बनाए जाएं।
  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता के नैतिक और उत्तरदायी उपयोग के लिए प्रत्येक विभाग में आंतरिक आचार-संहिता और जवाबदेही-तंत्र तय किया जाए।
  • प्रशिक्षण को केवल वरिष्ठ अधिकारियों तक सीमित न रखकर फ़ील्ड और निचले स्तर के कर्मचारियों तक क्रमशः विस्तारित किया जाए।
  • विशेष अभियान के बाद भी नियमित अभ्यास-सत्र और व्यावहारिक कार्य-आधारित मूल्यांकन लागू किए जाएं ताकि दक्षता बनी रहे।
  • सामाजिक क्षेत्र की योजनाओं में लाभार्थी-डेटा विश्लेषण के लिए पूर्वाग्रह-परीक्षण और मानव-निगरानी को अनिवार्य किया जाए।
  • स्वदेशी कृत्रिम बुद्धिमत्ता ढांचे के लिए कंप्यूटिंग अवसंरचना, भाषाई और स्थानीय डेटासेट तथा कुशल मानव संसाधन में निवेश बढ़ाया जाए।
  • डेटा संरक्षण से जुड़े कानूनी प्रावधानों और सरकारी डिजिटल प्रक्रियाओं के बीच समन्वय सुनिश्चित कर अनुपालन की निगरानी की जाए।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) · ई-गवर्नेंस (e-Governance) · राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस प्रभाग (National e-Governance Division – NeGD) · भारत कृत्रिम बुद्धिमत्ता मिशन (IndiaAI Mission) · जिम्मेदार कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Responsible AI) · एल्गोरिदमिक पूर्वाग्रह (Algorithmic Bias) · निजता का अधिकार (Right to Privacy) · व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 (Digital Personal Data Protection Act, 2023) · प्रशासनिक क्षमता-निर्माण (Administrative Capacity Building) · डिजिटल विभाजन (Digital Divide) · स्वदेशी तकनीकी आत्मनिर्भरता (Technological Self-reliance) · लोक सेवा में उत्तरदायित्व (Accountability in Public Service)

अवधारणा प्रवाह

विशेष अभियान 6.0 में स्वच्छता और लंबित संदर्भों के निस्तारण का लक्ष्य तय किया गया।  →  इस लक्ष्य की पूर्ति के लिए सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों को अपनाने की रूपरेखा बनी।  →  राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस प्रभाग ने वरिष्ठ अधिकारियों के लिए व्यावहारिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता कार्यशाला आयोजित की।  →  प्रतिभागियों ने प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग और कार्यालयी टूल्स के उपयोग में दक्षता पाई।  →  दक्षता से फ़ाइल-निस्तारण और दस्तावेज़ प्रबंधन की गति बढ़ने की संभावना बनी।  →  नैतिक उपयोग और स्वदेशी ढांचे पर चर्चा से दीर्घकालिक नीति-दिशा का संकेत मिला।

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस प्रभाग (NeGD) इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के अंतर्गत कार्य करता है।
2. प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग से आशय जनरेटिव कृत्रिम बुद्धिमत्ता टूल से वांछित उत्तर पाने के लिए निर्देशों (inputs) को सुनियोजित ढंग से तैयार करने से है।
3. व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 केवल गैर-डिजिटल रूप में संगृहीत व्यक्तिगत डेटा पर लागू होता है।

उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. सभी

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है, क्योंकि NeGD MeitY के अंतर्गत डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के ई-गवर्नेंस घटक का क्रियान्वयन करता है। कथन 2 सही है, क्योंकि प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग में निर्देशों की संरचना से आउटपुट की गुणवत्ता नियंत्रित की जाती है। कथन 3 गलत है, क्योंकि DPDP अधिनियम, 2023 मुख्यतः डिजिटल व्यक्तिगत डेटा पर लागू होता है, न कि केवल गैर-डिजिटल डेटा पर।

Q2. निम्नलिखित दो कथनों (A और R) पर विचार कीजिए:
कथन (A): सरकारी प्रशासन में प्रयुक्त कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित प्रणालियों का पूर्वाग्रह (bias) जांच हेतु नियमित ऑडिट होना चाहिए।
कारण (R): संविधान के अनुच्छेद 14 के अंतर्गत राज्य की कार्रवाई में मनमानेपन का निषेध है, और स्वचालित निर्णय भी इस कसौटी से परे नहीं हैं।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:

  1. (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है
  2. (A) और (R) दोनों सही हैं, किंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है
  3. (A) सही है, किंतु (R) गलत है
  4. (A) गलत है, किंतु (R) सही है

उत्तर: (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है — अनुच्छेद 14 समानता और गैर-मनमानेपन की गारंटी देता है, इसलिए राज्य के स्वचालित निर्णयों में भी भेदभाव और पूर्वाग्रह की जांच आवश्यक है। इसी संवैधानिक दायित्व के कारण एल्गोरिदमिक ऑडिट का तर्क बनता है, अतः R, A की सही व्याख्या है।

Q3. निम्नलिखित स्तंभों का सुमेल कीजिए:
स्तंभ I (संस्था/अधिनियम/निर्णय)
1. व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023
2. के. एस. पुट्टस्वामी बनाम भारत संघ (2017)
3. नीति आयोग का ‘जिम्मेदार कृत्रिम बुद्धिमत्ता’ (Responsible AI) दस्तावेज़

स्तंभ II (संबंधित विषय)
a. निजता को अनुच्छेद 21 के अंतर्गत मौलिक अधिकार घोषित करना
b. कृत्रिम बुद्धिमत्ता के नैतिक और उत्तरदायी उपयोग के सिद्धांत
c. डेटा प्रिंसिपल और डेटा फिड्युशियरी की अवधारणा

सही सुमेल चुनिए:

  1. 1-c, 2-a, 3-b
  2. 1-a, 2-b, 3-c
  3. 1-b, 2-c, 3-a
  4. 1-c, 2-b, 3-a

उत्तर: 1-c, 2-a, 3-b — DPDP अधिनियम, 2023 में डेटा प्रिंसिपल और डेटा फिड्युशियरी जैसी अवधारणाएं हैं (1-c)। पुट्टस्वामी निर्णय (2017) ने निजता को अनुच्छेद 21 का अभिन्न अंग माना (2-a)। नीति आयोग का दस्तावेज़ जिम्मेदार AI के सिद्धांत प्रस्तुत करता है (3-b)।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ सरकारी कार्यालयों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) टूल्स के प्रशिक्षण को अब तक मुख्यतः क्षमता-निर्माण की गतिविधि माना गया है, जबकि इसे शासन-सुधार का साधन बनाने के लिए निर्णय-प्रक्रिया, डेटा संरक्षण और उत्तरदायित्व का स्पष्ट ढांचा आवश्यक है। सरकारी प्रशासन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही उत्तर दीजिए कि यदि स्वचालित निर्णय किसी नागरिक के अधिकारों को प्रभावित करते हैं, तो संवैधानिक दृष्टि से कौन-से उपाय अपेक्षित हैं। (15 Marks)

रूपरेखा: उत्तर की संरचना: (1) परिचय: विशेष अभियान 6.0 (2 से 31 अक्टूबर 2026) के अंतर्गत राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस प्रभाग द्वारा 17 अक्टूबर 2026 को अवर सचिव एवं उससे ऊपर के 42 प्रतिभागियों हेतु आयोजित कार्यशाला, जिसके लगभग 70 प्रतिशत सत्र व्यावहारिक थे; इसे डिजिटल इंडिया के ई-गवर्नेंस विस्तार से जोड़ें। (2) प्रशिक्षण-आधारित दृष्टिकोण का मूल्यांकन: प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग और कार्यालयी उत्पादकता से दक्षता बढ़ती है, परंतु केवल टूल-प्रशिक्षण से प्रक्रिया-सुधार नहीं होता; नीति आयोग के ‘जिम्मेदार AI’ दृष्टिकोण के सात सिद्धांत (सुरक्षा व विश्वसनीयता, समानता व समावेशन, निजता व सुरक्षा, पारदर्शिता, उत्तरदायित्व, मानवीय मूल्यों का संरक्षण आदि) व्यवहार में लाने की आवश्यकता। (3) संवैधानिक एवं विधिक आयाम: अनुच्छेद 14 (गैर-मनमानापन, एल्गोरिदमिक पूर्वाग्रह), अनुच्छेद 21 (निजता; के. एस. पुट्टस्वामी बनाम भारत संघ, 2017 में आनुपातिकता परीक्षण), अनुच्छेद 19(1)(g) के संदर्भ में तकनीकी नवाचार; व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 के डेटा प्रिंसिपल, डेटा फिड्युशियरी और सहमति-आधारित प्रावधान; न्यायिक समीक्षा द्वारा स्वचालित निर्णयों की जांच। (4) शासन-प्रशासनिक आयाम: सरकारी निर्णयों में मानवीय पर्यवेक्षण (human-in-the-loop), निर्णय-कारणों का अभिलेखन, शिकायत निवारण तंत्र; अधिकारी-स्तर पर उत्तरदायित्व के प्रश्न। (5) संतुलित दृष्टिकोण: दक्षता, सेवा-वितरण में तेजी और लंबित मामलों के निपटान के पक्ष में तर्क; बनाम निगरानी का खतरा, डिजिटल विभाजन, भाषायी बाधाएं और स्वदेशी क्षमता का प्रश्न, जिसमें भारत कृत्रिम बुद्धिमत्ता मिशन (IndiaAI Mission) की भूमिका का उल्लेख। (6) निष्कर्ष: कृत्रिम बुद्धिमत्ता को शासन-सुधार तभी माना जाएगा जब प्रशिक्षण के साथ विधिक-संवैधानिक सुरक्षा उपाय, ऑडिट-तंत्र और नागरिक-केंद्रित उत्तरदायित्व विकसित हों; सुझाव के रूप में स्वदेशी AI ढांचे और डेटा संरक्षण के सुसंगत क्रियान्वयन पर बल दें।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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