29 Jul मिशन कर्मयोगी: सरकारी अधिकारियों के लिए AI कौशल विकास की नई दिशा
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — शासन, पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्वपूर्ण पहलू, ई-गवर्नेंस अनुप्रयोग, मॉडल, सफलताएँ, सीमाएँ और संभावनाएँ; नागरिक चार्टर, पारदर्शिता एवं जवाबदेही एवं संस्थागत तथा अन्य उपाय। | GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी-विकास एवं उनके अनुप्रयोग और रोज़मर्रा के जीवन पर प्रभाव; सूचना प्रौद्योगिकी, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरूकता।
- Prelims: मिशन कर्मयोगी, iGOT कर्मयोगी प्लेटफॉर्म, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023, ई-गवर्नेंस, क्षमता निर्माण
- Essay: भारत में सुशासन के लिए प्रौद्योगिकी का लाभ उठाना: अवसर और चुनौतियाँ, भविष्य के लिए तैयार सिविल सेवा: कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल युग में क्षमता निर्माण
त्वरित पुनरावृत्ति: मिशन कर्मयोगी के तहत iGOT कर्मयोगी प्लेटफॉर्म पर सरकारी अधिकारियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उभरती प्रौद्योगिकियों में प्रशिक्षित किया जा रहा है, ताकि वे सुशासन में AI का प्रभावी ढंग से उपयोग कर सकें और डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम के प्रावधानों का पालन सुनिश्चित कर सकें।
यह खबर चर्चा में क्यों?
कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने हाल ही में लोकसभा में बताया कि सरकारी मंत्रालयों और विभागों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) तथा डिजिटल प्रौद्योगिकियों में प्रशासनिक अधिकारियों के क्षमता निर्माण को उच्च प्राथमिकता दी गई है। iGOT कर्मयोगी प्लेटफॉर्म पर AI और उभरती प्रौद्योगिकियों पर 218 पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं, जिनमें 3.3 करोड़ से अधिक शिक्षार्थियों ने पाठ्यक्रम पूर्ण किए हैं। यह जानकारी सरकारी कामकाज में AI के बढ़ते महत्व और इसके लिए मानव संसाधन को तैयार करने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
पृष्ठभूमि
- मिशन कर्मयोगी (Mission Karmayogi) भारत में प्रशासनिक अधिकारियों के क्षमता निर्माण का एक प्रमुख कार्यक्रम है।
- इसका उद्देश्य प्रशासनिक अधिकारियों को भविष्य के लिए तैयार करने हेतु कौशल प्रदान करना है, जिसमें डिजिटल प्रौद्योगिकियाँ और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
- iGOT कर्मयोगी प्लेटफॉर्म (Integrated Government Online Training – iGOT Karmayogi Platform) मिशन कर्मयोगी का एक डिजिटल मंच है, जो सरकारी कर्मचारियों को विभिन्न विषयों पर ऑनलाइन प्रशिक्षण प्रदान करता है।
- वर्तमान में, इस प्लेटफॉर्म पर भारत सरकार के सभी मंत्रालयों, विभागों और संगठनों के साथ-साथ राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारों के 1.70 करोड़ से अधिक सरकारी कर्मचारी जुड़े हुए हैं।
- AI के प्रशासनिक उपयोग को बढ़ावा देने के लिए सीधी लोकसभा क्षेत्र में कोई विशिष्ट परीक्षण नहीं किया गया है, लेकिन iGOT प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध AI पाठ्यक्रम सभी सरकारी कर्मचारियों के लिए सुलभ हैं।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और सुशासन
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence – AI) कंप्यूटर विज्ञान की एक शाखा है जो मशीनों को मानव जैसी बुद्धिमत्ता प्रदर्शित करने में सक्षम बनाती है, जिसमें सीखना, समस्या-समाधान और निर्णय लेना शामिल है।
- सुशासन (Good Governance) में AI का उपयोग सार्वजनिक सेवाओं की दक्षता, पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
- AI-संचालित उपकरण डेटा विश्लेषण, पैटर्न की पहचान और भविष्यवाणियों के माध्यम से नीति निर्माण और कार्यान्वयन में सहायता कर सकते हैं।
- यह नागरिकों को बेहतर और अधिक व्यक्तिगत सेवाएँ प्रदान करने में मदद कर सकता है, जैसे कि चैटबॉट-आधारित सहायता या स्मार्ट शिकायत निवारण प्रणालियाँ।
- AI सरकारी प्रक्रियाओं को स्वचालित करके मानव त्रुटि को कम कर सकता है और संसाधनों के बेहतर आवंटन में योगदान कर सकता है।
- हालांकि, AI के उपयोग से डेटा गोपनीयता, एल्गोरिथम पूर्वाग्रह और नैतिक विचारों से संबंधित चुनौतियाँ भी उत्पन्न होती हैं, जिन्हें डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम जैसे कानूनों के माध्यम से संबोधित किया जा रहा है।
- मिशन कर्मयोगी के तहत सरकारी अधिकारियों को AI में प्रशिक्षित करना उन्हें इन नई प्रौद्योगिकियों का प्रभावी ढंग से लाभ उठाने और संबंधित चुनौतियों का प्रबंधन करने के लिए तैयार करता है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| मिशन कर्मयोगी | प्रशासनिक अधिकारियों के क्षमता निर्माण का प्रमुख कार्यक्रम, भविष्य के लिए कौशल प्रदान करना। |
| आई-गोट कर्मयोगी प्लेटफॉर्म | भारत सरकार के मंत्रालयों, विभागों, संगठनों और राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों के 1.70 करोड़ से अधिक सरकारी कर्मचारियों को जोड़ता है। |
| AI और उभरती प्रौद्योगिकियों पर पाठ्यक्रम | प्लेटफॉर्म पर 218 पाठ्यक्रम उपलब्ध, 3.3 करोड़ से अधिक शिक्षार्थियों ने पूर्ण किए। |
| डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 | व्यक्तिगत डेटा के वैध प्रसंस्करण और सहमति सुनिश्चित करता है। |
| सार्वजनिक कार्यबल का सशक्तिकरण | AI और डिजिटल प्रौद्योगिकियों में कौशल और ज्ञान से लैस करना उच्च प्राथमिकता। |
महत्व
प्रशासनिक दक्षता में वृद्धि
- सरकारी अधिकारियों को AI और डिजिटल कौशल से लैस करके निर्णय लेने की प्रक्रिया में सुधार होगा।
- सार्वजनिक सेवाओं की डिलीवरी में गति और सटीकता आएगी, जिससे नागरिक केंद्रित शासन को बढ़ावा मिलेगा।
शासन में नवाचार
- AI के उपयोग से सरकारी कार्यों में नवीन समाधानों को अपनाया जा सकेगा, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी।
- डेटा विश्लेषण और पैटर्न की पहचान में AI की क्षमता का उपयोग करके नीति निर्माण को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।
डिजिटल साक्षरता और क्षमता निर्माण
- आई-गोट कर्मयोगी प्लेटफॉर्म के माध्यम से सरकारी कर्मचारियों में डिजिटल साक्षरता और तकनीकी कौशल का विकास होगा।
- यह भारत को वैश्विक डिजिटल अर्थव्यवस्था में एक मजबूत स्थिति में लाने में मदद करेगा।
डेटा सुरक्षा और गोपनीयता
- डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 के प्रावधान AI के उपयोग के साथ व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे।
- यह नागरिकों के विश्वास को बनाए रखने और डिजिटल शासन के नैतिक पहलुओं को मजबूत करने में महत्वपूर्ण है।
चुनौतियाँ
1. तकनीकी अवसंरचना का अभाव
- दूरदराज के क्षेत्रों और कुछ सरकारी विभागों में AI के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए आवश्यक तकनीकी अवसंरचना की कमी।
- उच्च गति इंटरनेट कनेक्टिविटी और उन्नत कंप्यूटिंग सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना एक चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही
2. डेटा की गुणवत्ता और उपलब्धता
- AI मॉडल को प्रशिक्षित करने के लिए उच्च गुणवत्ता वाले, विश्वसनीय और पर्याप्त डेटा की आवश्यकता होती है, जो हमेशा उपलब्ध नहीं होता।
- विभिन्न सरकारी विभागों में डेटा के मानकीकरण और एकीकरण की कमी।
यूपीएससी लिंक: ई-शासन: अनुप्रयोग, मॉडल, सफलताएँ, सीमाएँ और संभावनाएँ
3. नैतिक और गोपनीयता संबंधी चिंताएँ
- AI के उपयोग से व्यक्तिगत डेटा के दुरुपयोग, निगरानी और गोपनीयता के उल्लंघन का जोखिम।
- AI एल्गोरिदम में पूर्वाग्रह (bias) की संभावना, जिससे समाज के कुछ वर्गों के प्रति भेदभाव हो सकता है।
यूपीएससी लिंक: नैतिकता और मानवीय अंतरापृष्ठ
4. कौशल अंतराल और प्रतिरोध
- सरकारी कर्मचारियों में AI प्रौद्योगिकियों को अपनाने और उपयोग करने के लिए आवश्यक कौशल की कमी।
- नई प्रौद्योगिकियों को अपनाने में कर्मचारियों का प्रतिरोध और परिवर्तन प्रबंधन की चुनौती।
यूपीएससी लिंक: विकास प्रक्रियाएँ और विकास उद्योग
5. कानूनी और नियामक ढाँचा
- AI के तेजी से विकास के साथ तालमेल बिठाने के लिए एक मजबूत और गतिशील कानूनी तथा नियामक ढाँचे की आवश्यकता।
- AI के उपयोग से उत्पन्न होने वाली जवाबदेही और दायित्व के मुद्दों को स्पष्ट करना।
यूपीएससी लिंक: सरकार की नीतियाँ और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए हस्तक्षेप
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| तकनीकी अवसंरचना | AI के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए आवश्यक बुनियादी ढाँचे की कमी। |
| डेटा गुणवत्ता | AI मॉडल प्रशिक्षण के लिए उच्च गुणवत्ता वाले और मानकीकृत डेटा की अनुपलब्धता। |
| नैतिकता और गोपनीयता | व्यक्तिगत डेटा के दुरुपयोग और AI एल्गोरिदम में पूर्वाग्रह का जोखिम। |
| कौशल अंतराल | सरकारी कर्मचारियों में AI प्रौद्योगिकियों को अपनाने के लिए आवश्यक कौशल की कमी। |
| नियामक ढाँचा | AI के तेजी से विकास के साथ तालमेल बिठाने के लिए मजबूत कानूनी ढाँचे की आवश्यकता। |
आगे की राह
- AI के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए देश भर में मजबूत डिजिटल अवसंरचना का विकास करना।
- आई-गोट कर्मयोगी प्लेटफॉर्म पर AI और डिजिटल कौशल विकास पाठ्यक्रमों की संख्या और गुणवत्ता में निरंतर सुधार करना।
- सरकारी विभागों में डेटा संग्रह, मानकीकरण और साझाकरण के लिए एक एकीकृत नीति विकसित करना।
- AI के नैतिक उपयोग, डेटा गोपनीयता और एल्गोरिथम पूर्वाग्रह को संबोधित करने के लिए एक व्यापक नीति ढाँचा तैयार करना।
- AI प्रौद्योगिकियों को अपनाने में सरकारी कर्मचारियों के प्रतिरोध को कम करने के लिए प्रोत्साहन और जागरूकता कार्यक्रम चलाना।
- AI के उपयोग से उत्पन्न होने वाली जवाबदेही और दायित्व के मुद्दों को स्पष्ट करने के लिए कानूनी ढाँचे को अद्यतन करना।
- AI नवाचार को बढ़ावा देने के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) को प्रोत्साहित करना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
मिशन कर्मयोगी · कृत्रिम बुद्धिमत्ता · डिजिटल प्रौद्योगिकियाँ · क्षमता निर्माण · आई-गोट कर्मयोगी प्लेटफॉर्म · डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 · ई-शासन · लोक सेवा वितरण · प्रशासनिक सुधार · डेटा गोपनीयता · सार्वजनिक कार्यबल · भविष्य के लिए तैयार प्रशासन
अवधारणा प्रवाह
मिशन कर्मयोगी के तहत क्षमता निर्माण पर जोर → आई-गोट कर्मयोगी प्लेटफॉर्म पर AI पाठ्यक्रम उपलब्ध → सरकारी कर्मचारियों का AI और डिजिटल कौशल में सशक्तिकरण → शासन में AI का प्रभावी उपयोग और नवाचार → नागरिक केंद्रित सेवाओं की बेहतर डिलीवरी और दक्षता → डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 द्वारा डेटा सुरक्षा सुनिश्चित
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. मिशन कर्मयोगी का उद्देश्य भारत में प्रशासनिक अधिकारियों की क्षमता का निर्माण करना है।
2. आई-गोट कर्मयोगी प्लेटफॉर्म पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उभरती प्रौद्योगिकियों पर 218 पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं।
3. डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023, व्यक्तिगत डेटा के प्रसंस्करण के लिए व्यक्ति की सहमति को अनिवार्य करता है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि मिशन कर्मयोगी का मुख्य उद्देश्य प्रशासनिक अधिकारियों को भविष्य के लिए तैयार करने हेतु कौशल प्रदान करना है। कथन 2 सही है क्योंकि प्रेस विज्ञप्ति में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि आई-गोट कर्मयोगी प्लेटफॉर्म पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उभरती प्रौद्योगिकियों पर 218 पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं। कथन 3 सही है क्योंकि अधिनियम यह सुनिश्चित करता है कि व्यक्तिगत डेटा का प्रसंस्करण वैध उद्देश्य के लिए और व्यक्ति की स्वतंत्र, विशिष्ट, सूचित, बिना शर्त और स्पष्ट सहमति से किया जाए।
Q2. मिशन कर्मयोगी के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
1. यह केवल केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए है।
2. इसका उद्देश्य प्रशासनिक अधिकारियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल प्रौद्योगिकियों में प्रशिक्षित करना है।
3. आई-गोट कर्मयोगी प्लेटफॉर्म पर 1.70 करोड़ से अधिक सरकारी कर्मचारी जुड़े हुए हैं।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: केवल 2 और 3 — कथन 1 गलत है क्योंकि आई-गोट कर्मयोगी प्लेटफॉर्म पर भारत सरकार के सभी मंत्रालयों, विभागों और संगठनों के साथ-साथ राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारों के सरकारी कर्मचारी जुड़े हुए हैं। कथन 2 सही है क्योंकि मिशन कर्मयोगी का उद्देश्य प्रशासनिक अधिकारियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल प्रौद्योगिकियों में क्षमता निर्माण करना है। कथन 3 सही है क्योंकि प्रेस विज्ञप्ति में 1.70 करोड़ से अधिक सरकारी कर्मचारियों के जुड़े होने का उल्लेख है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ मिशन कर्मयोगी के तहत सरकारी मंत्रालयों/विभागों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के क्षमता निर्माण के प्रयासों का मूल्यांकन कीजिए। साथ ही, डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023, इन पहलों के लिए किस प्रकार एक महत्वपूर्ण नियामक ढाँचा प्रदान करता है, चर्चा कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर कंकाल:
1. **परिचय:** मिशन कर्मयोगी और सरकारी प्रशासन में AI के बढ़ते महत्व का संक्षिप्त परिचय।
2. **क्षमता निर्माण के प्रयास:**
* मिशन कर्मयोगी का उद्देश्य और लक्ष्य (भविष्य के लिए तैयार प्रशासन)।
* आई-गोट कर्मयोगी प्लेटफॉर्म की भूमिका (1.70 करोड़ से अधिक कर्मचारी, 218 AI/उभरती प्रौद्योगिकी पाठ्यक्रम)।
* पाठ्यक्रम पूर्ण करने वाले शिक्षार्थियों की संख्या (3.3 करोड़ से अधिक)।
* इन प्रयासों के लाभ (दक्षता, पारदर्शिता, बेहतर लोक सेवा वितरण)।
3. **डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 की भूमिका:**
* अधिनियम का उद्देश्य (व्यक्तिगत डेटा का संरक्षण)।
* मुख्य प्रावधान (वैध उद्देश्य, स्वतंत्र और सूचित सहमति)।
* AI-आधारित प्रणालियों में डेटा गोपनीयता का महत्व।
* अधिनियम कैसे AI पहलों के लिए एक नियामक ढाँचा प्रदान करता है (विश्वास निर्माण, दुरुपयोग की रोकथाम)।
* AI के उपयोग और डेटा संरक्षण के बीच संतुलन।
4. **चुनौतियाँ और आगे की राह:**
* तकनीकी अवसंरचना, डिजिटल साक्षरता में अंतर, डेटा सुरक्षा के मुद्दे।
* निरंतर प्रशिक्षण, नैतिक AI विकास, कानूनी ढाँचे का अनुपालन।
5. **निष्कर्ष:** AI और डेटा संरक्षण के समन्वित दृष्टिकोण के साथ एक कुशल, जवाबदेह और नागरिक-केंद्रित प्रशासन की दिशा में आगे बढ़ना।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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