मिशन पोषण 2.0: जानिए क्या है ‘पोषण ट्रैकर’ एप और इसके लाभ

मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 के तहत डिजिटल एप्लिकेशन 'पोषण ट्रैकर' को सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी आधारित शासन उपकरण — concept mind map

मिशन पोषण 2.0: जानिए क्या है ‘पोषण ट्रैकर’ एप और इसके लाभ

✎ पोषण ट्रैकर मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 के तहत एक ICT-आधारित डिजिटल एप्लिकेशन है, जिसका उद्देश्य आंगनवाड़ी सेवाओं की निगरानी और कुपोषण से निपटने के लिए पोषण संबंधी परिणामों में सुधार करना है।

पोषण ट्रैकरICT आधारित निगरानीसेवाओं की ट्रैकिंगपारदर्शिता बढ़ानाडेटा संग्रहलाभार्थी पंजीकरणसेवा विवरणडेटा विश्लेषणकुपोषण पहचानरुझान मूल्यांकनलक्षित हस्तक्षेपपरामर्शपोषण सहायतापोषण परिणामबच्चे/महिलाओंसुधार
पोषण ट्रैकर

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — स्वास्थ्य, मानव संसाधन से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय; गरीबी और भूख से संबंधित विषय।
  • Prelims: पोषण ट्रैकर, मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013, पोषण माह, पोषण पखवाड़ा, गंभीर तीव्र कुपोषण (SAM), पोषण वाटिका
  • Essay: भारत में पोषण सुरक्षा: चुनौतियाँ और समाधान, डिजिटल इंडिया और सामाजिक कल्याण: एक transformative दृष्टिकोण

त्वरित पुनरावृत्ति: पोषण ट्रैकर मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 के तहत एक ICT-आधारित डिजिटल एप्लिकेशन है, जिसका उद्देश्य आंगनवाड़ी सेवाओं की निगरानी और कुपोषण से निपटने के लिए पोषण संबंधी परिणामों में सुधार करना है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 के तहत ‘पोषण ट्रैकर’ नामक एक डिजिटल एप्लिकेशन लॉन्च किया है। यह सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) आधारित शासन उपकरण आंगनवाड़ी केंद्रों (AWCs) में पंजीकृत लाभार्थियों को प्रदान की जा रही सेवाओं की निगरानी और ट्रैकिंग के लिए डिज़ाइन किया गया है, जिसका उद्देश्य पोषण संबंधी परिणामों में सुधार करना है।

पृष्ठभूमि

  • भारत में कुपोषण एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बनी हुई है, विशेषकर बच्चों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं में।
  • राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 (National Food Security Act, 2013) पूरक पोषण प्रदान करने के लिए एक कानूनी ढाँचा प्रदान करता है।
  • सरकार ने पोषण संबंधी परिणामों में सुधार के लिए विभिन्न योजनाएँ और कार्यक्रम शुरू किए हैं, जिनमें एकीकृत बाल विकास सेवा (ICDS) योजना भी शामिल है।
  • मिशन पोषण 2.0 (Mission Poshan 2.0) एक एकीकृत पोषण सहायता कार्यक्रम है, जो पोषण संबंधी चुनौतियों का समाधान करने के लिए एक समग्र दृष्टिकोण अपनाता है।
  • प्रौद्योगिकी का उपयोग शासन और सेवा वितरण में दक्षता लाने के लिए एक महत्वपूर्ण उपकरण के रूप में देखा जा रहा है।
  • पोषण माह (Poshan Maah) और पोषण पखवाड़ा (Poshan Pakhwada) जैसे जन आंदोलन पोषण के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए आयोजित किए जाते हैं।

पोषण ट्रैकर क्या है?

  • पोषण ट्रैकर एक डिजिटल एप्लिकेशन है जिसे मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 के तहत लॉन्च किया गया है।
  • यह आंगनवाड़ी केंद्रों में पंजीकृत लाभार्थियों, जैसे 6 महीने से 6 वर्ष तक के बच्चों, गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और किशोरियों को प्रदान की जा रही सभी सेवाओं की निगरानी और ट्रैकिंग के लिए एक ICT-आधारित उपकरण है।
  • यह एप्लिकेशन बच्चों में बौनापन (stunting), कुपोषण (malnutrition) और कम वजन (underweight) की व्यापकता की गतिशील पहचान के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग करता है।
  • पोषण ट्रैकर गुजरात सहित देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अपनाया गया है, और राज्यों के पास कार्यक्रम की डिजिटल निगरानी के लिए लॉगिन क्रेडेंशियल हैं।
  • यह अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ताओं (frontline workers) को स्मार्टफोन और डेटा रिचार्ज की सुविधा प्रदान करके सशक्त बनाता है।
  • प्रत्येक आंगनवाड़ी केंद्र में शिशुमापी (infantometer), स्टेडीमीटर (stadiometer), नवजात शिशु वजन मापने की मशीन और माता एवं शिशु वजन मापने की मशीन जैसे विकास निगरानी उपकरण (Growth Monitoring Devices – GMD) उपलब्ध कराए गए हैं, जिनके डेटा को ट्रैकर में दर्ज किया जाता है।
  • यह आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा नियोजित गृह मुलाकातों (home visits) को ट्रैक करने में भी मदद करता है, जो पोषण संबंधी परामर्श और प्रारंभिक बाल्यावस्था विकास को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण हैं।
  • महिला एवं बाल विकास मंत्रालय और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने बच्चों में गंभीर तीव्र कुपोषण (Severe Acute Malnutrition – SAM) के प्रबंधन के लिए प्रोटोकॉल जारी किए हैं, जिनकी निगरानी भी इस मंच के माध्यम से की जा सकती है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
पोषण ट्रैकर डिजिटल एप्लिकेशन आंगनवाड़ी केंद्रों (AWCs) में पंजीकृत लाभार्थियों को प्रदान की जा रही सेवाओं की निगरानी और ट्रैकिंग के लिए सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) आधारित शासन उपकरण।
स्मार्टफोन और डेटा रिचार्ज मिशन पोषण 2.0 के तहत अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ताओं (आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं) को सशक्त बनाना।
विकास निगरानी उपकरण (GMD) प्रत्येक आंगनवाड़ी केंद्र में शिशुमापी, स्टेडीमीटर आदि की उपलब्धता से पंजीकृत लाभार्थियों के नियमित विकास की निगरानी।
प्रौद्योगिकी का उपयोग बच्चों में बौनापन (Stunting), कुपोषण (Malnutrition) और कम वजन (Underweight) की व्यापकता की गतिशील पहचान।
नियोजित गृह मुलाकातें गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और छोटे बच्चों (0-3 वर्ष) को पोषण संबंधी परामर्श, देखभाल संबंधी मार्गदर्शन और प्रारंभिक बाल्यावस्था विकास को बढ़ावा देना।
पोषण वाटिकाएं/पोषक उद्यान आहार में विविधता लाने और पौष्टिक स्थानीय उत्पादों के सेवन को प्रोत्साहित करने के लिए आंगनवाड़ी केंद्रों में स्थापना।

महत्व

सामाजिक महत्व

  • यह एप्लिकेशन बच्चों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं के पोषण संबंधी परिणामों में सुधार लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, जिससे देश में कुपोषण की समस्या का समाधान होगा।
  • डिजिटल निगरानी से सेवाओं की गुणवत्ता और पहुंच में सुधार होगा, जिससे लक्षित लाभार्थियों तक लाभ सुनिश्चित हो सकेगा।
  • आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को सशक्त बनाने से जमीनी स्तर पर सेवा वितरण में दक्षता और प्रभावशीलता बढ़ेगी।

प्रशासनिक महत्व

  • पोषण ट्रैकर एक सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) आधारित शासन उपकरण के रूप में पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देगा।
  • यह डेटा-आधारित निर्णय लेने में सहायता करेगा, जिससे कार्यक्रमों की योजना और कार्यान्वयन अधिक प्रभावी हो सकेगा।
  • जिला और राज्य स्तर पर गठित समितियां अंतर-विभागीय समन्वय और रणनीतिक निगरानी को सुदृढ़ करेंगी।

आर्थिक महत्व

  • कुपोषण में कमी से भविष्य में स्वास्थ्य देखभाल पर होने वाले खर्च में कमी आएगी, जिससे राष्ट्रीय संसाधनों की बचत होगी।
  • स्वस्थ कार्यबल और जनसंख्या देश की आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) में अधिक योगदान दे सकेगी।

चुनौतियाँ

1. डिजिटल साक्षरता और कनेक्टिविटी

  • आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के बीच डिजिटल साक्षरता का स्तर भिन्न हो सकता है, जिससे एप्लिकेशन के प्रभावी उपयोग में बाधा आ सकती है।
  • ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी की कमी डेटा अपलोडिंग और वास्तविक समय की निगरानी को प्रभावित कर सकती है।

2. डेटा की गुणवत्ता और सटीकता

  • डेटा प्रविष्टि में त्रुटियां या अपूर्ण डेटा पोषण संबंधी हस्तक्षेपों की प्रभावशीलता का गलत आकलन कर सकता है।
  • डेटा की गोपनीयता और सुरक्षा सुनिश्चित करना एक महत्वपूर्ण चुनौती है।

3. बुनियादी ढांचे की कमी

  • सभी आंगनवाड़ी केंद्रों में पर्याप्त विकास निगरानी उपकरणों (GMD) की उपलब्धता सुनिश्चित करना एक चुनौती हो सकती है।
  • स्मार्टफोन और डेटा रिचार्ज की निरंतर उपलब्धता और रखरखाव भी आवश्यक है।

4. व्यवहारिक परिवर्तन

  • समुदाय में पोषण संबंधी आदतों और व्यवहार में परिवर्तन लाना एक लंबी और सतत प्रक्रिया है, जिसके लिए निरंतर जागरूकता अभियानों की आवश्यकता होती है।
  • स्थानीय और मौसमी फलों और सब्जियों के सेवन को बढ़ावा देने के लिए पोषण वाटिकाओं का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
डिजिटल डिवाइड ग्रामीण क्षेत्रों में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की तकनीकी पहुंच और कौशल में असमानता।
डेटा विश्वसनीयता प्रविष्ट किए गए डेटा की सटीकता और पूर्णता सुनिश्चित करने में संभावित चुनौतियां।
संसाधनों का अभाव सभी आंगनवाड़ी केंद्रों में आवश्यक उपकरणों (जैसे शिशुमापी) की पर्याप्त उपलब्धता।
व्यवहारिक परिवर्तन का प्रतिरोध समुदाय में पोषण संबंधी आदतों को बदलने में कठिनाई।
अंतर-विभागीय समन्वय विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के बीच प्रभावी समन्वय बनाए रखना।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0
  • पोषण माह
  • पोषण पखवाड़ा

आगे की राह

  • आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए नियमित और व्यापक डिजिटल साक्षरता प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएं।
  • दूरदराज के क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी और बिजली की आपूर्ति में सुधार के लिए बुनियादी ढांचे का विकास किया जाए।
  • डेटा प्रविष्टि में सटीकता सुनिश्चित करने के लिए मजबूत सत्यापन तंत्र और आवधिक ऑडिट प्रणाली विकसित की जाए।
  • पोषण वाटिकाओं के प्रभावी उपयोग को बढ़ावा देने के लिए स्थानीय समुदायों को शामिल किया जाए और उन्हें तकनीकी सहायता प्रदान की जाए।
  • जन आंदोलन और व्यवहार परिवर्तन संचार (BCC) रणनीतियों को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए स्थानीय भाषाओं और सांस्कृतिक संदर्भों का उपयोग किया जाए।
  • बच्चों में गंभीर तीव्र कुपोषण (SAM) के प्रबंधन के लिए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के साथ समन्वय को और मजबूत किया जाए।
  • जिला और राज्य स्तरीय पोषण समितियों को सशक्त बनाया जाए ताकि वे प्रभावी निगरानी और अंतर-विभागीय समन्वय सुनिश्चित कर सकें।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

पोषण ट्रैकर · मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 · सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) · पोषण संबंधी परिणाम · राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 · पूरक पोषण कार्यक्रम · गंभीर तीव्र कुपोषण (SAM) · पोषण वाटिकाएं · जन आंदोलन · व्यवहारिक परिवर्तन

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 39(f)’, ‘note’: ‘बच्चों के स्वस्थ विकास के अवसर’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 47’, ‘note’: ‘पोषाहार स्तर और जीवन स्तर में सुधार’}

अवधारणा प्रवाह

पोषण ट्रैकर लॉन्च  →  ICT आधारित निगरानी  →  डेटा संग्रह और विश्लेषण  →  कुपोषण की पहचान  →  लक्षित हस्तक्षेप और परामर्श  →  पोषण संबंधी परिणामों में सुधार

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ‘पोषण ट्रैकर’ डिजिटल एप्लिकेशन का उद्देश्य आंगनवाड़ी केंद्रों में पंजीकृत लाभार्थियों को प्रदान की जा रही सेवाओं की निगरानी और ट्रैकिंग करना है।
2. यह एप्लिकेशन केवल गुजरात राज्य में लागू किया गया है।
3. पोषण ट्रैकर के तहत प्रौद्योगिकी का उपयोग बच्चों में बौनापन, कुपोषण और कम वजन की व्यापकता की गतिशील पहचान के लिए किया जाता है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीनों
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है क्योंकि ‘पोषण ट्रैकर’ का मुख्य उद्देश्य आंगनवाड़ी सेवाओं की निगरानी और ट्रैकिंग है। कथन 2 गलत है क्योंकि यह एप्लिकेशन देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू किया गया है। कथन 3 सही है क्योंकि पोषण ट्रैकर बच्चों में बौनापन, कुपोषण और कम वजन की पहचान में सहायक है।

Q2. अभिकथन (A): महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने पोषण संबंधी परिणामों में सुधार के लिए विभिन्न उपाय किए हैं।
कारण (R): राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के तहत 6 महीने से 6 वर्ष तक के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को पूरक पोषण प्रदान किया जाता है।

  1. A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
  2. A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
  3. A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
  4. A असत्य है, लेकिन R सत्य है।

उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि मंत्रालय पोषण में सुधार के लिए सक्रिय है। कारण (R) भी सही है और यह अभिकथन की सही व्याख्या करता है, क्योंकि पूरक पोषण प्रदान करना मंत्रालय के उपायों में से एक है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 के तहत ‘पोषण ट्रैकर’ जैसे सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) आधारित उपकरणों का उपयोग कुपोषण से निपटने में कितना प्रभावी हो सकता है? विस्तार से चर्चा कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 तथा ‘पोषण ट्रैकर’ का संक्षिप्त परिचय, इसके उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए।
2. **ICT आधारित उपकरणों की प्रभावशीलता:**
* **डेटा संग्रह और निगरानी:** लाभार्थियों की वास्तविक समय पर ट्रैकिंग, सेवाओं की डिलीवरी और पोषण संबंधी स्थिति का डेटा संग्रह। (जैसे बच्चों में बौनापन, कुपोषण, कम वजन की पहचान)।
* **पारदर्शिता और जवाबदेही:** सेवाओं के वितरण में पारदर्शिता बढ़ाना और अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ताओं की जवाबदेही सुनिश्चित करना।
* **निर्णय लेने में सहायता:** एकत्रित डेटा के आधार पर नीति निर्माण और कार्यक्रम कार्यान्वयन में सुधार के लिए सूचित निर्णय लेना।
* **संसाधनों का कुशल उपयोग:** संसाधनों के बेहतर आवंटन और लीकेज को कम करने में मदद।
* **कार्यकर्ताओं का सशक्तिकरण:** स्मार्टफोन और डेटा रिचार्ज के माध्यम से आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को सशक्त बनाना।
3. **चुनौतियाँ और सीमाएँ:**
* **डिजिटल साक्षरता:** कार्यकर्ताओं और लाभार्थियों के बीच डिजिटल साक्षरता की कमी।
* **तकनीकी अवसंरचना:** दूरदराज के क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी और बिजली की उपलब्धता।
* **डेटा गोपनीयता और सुरक्षा:** संवेदनशील पोषण डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित करना।
* **मानवीय हस्तक्षेप का महत्व:** केवल प्रौद्योगिकी पर निर्भरता के बजाय मानवीय संपर्क और परामर्श की आवश्यकता।
4. **आगे की राह/सुझाव:** चुनौतियों का समाधान करने के लिए प्रशिक्षण, अवसंरचना विकास और सामुदायिक भागीदारी पर जोर।
5. **निष्कर्ष:** कुपोषण उन्मूलन में ICT की भूमिका को स्वीकार करते हुए, एक समग्र और बहु-आयामी दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

No Comments

Post A Comment