24 Oct ‘मेरा भारत’ अभियान: ग्रामीण युवाओं ने नशामुक्त समाज के लिए खेल और सेवा का संगम किया
✎ राष्ट्रीय सेवा योजना का आदर्श वाक्य “मैं नहीं, तुम” है और यह सामुदायिक सेवा के माध्यम से युवाओं में नशा मुक्ति व सामाजिक जिम्मेदारी को बढ़ावा देती है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र II — शासन: युवा कल्याण, सामाजिक क्षेत्र की योजनाएं, नीति-कार्यान्वयन में स्वयंसेवी संगठनों और स्थानीय निकायों की भूमिका | सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र II — शासन: पंचायती राज संस्थाएं और ग्रामीण विकास में ग्राम पंचायत की संवैधानिक भूमिका | सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र I — भारतीय समाज: परंपरागत खेल, सामुदायिक जीवन और युवाओं में सामाजिक उत्तरदायित्व | सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र IV — नैतिकता: सेवा भाव, सामूहिक दायित्व और सामाजिक जिम्मेदारी के मूल्य
- Prelims: राष्ट्रीय सेवा योजना (National Service Scheme) और इसका आदर्श वाक्य “मैं नहीं, तुम”, एमवाई भारत (MY Bharat) — युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय का युवा मंच, नशीले पदार्थों का दुरुपयोग रोकने हेतु नार्कोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्स्टांसेज़ अधिनियम, 1985 (NDPS Act, 1985), अनुच्छेद 47 — मादक पेयों और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक दवाओं के निषेध सहित पोषण और लोक स्वास्थ्य का स्तर उठाना (राज्य नीति का निदेशक तत्व), 73वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 और अनुच्छेद 243G (ग्यारहवीं अनुसूची के विषय), फिट इंडिया आंदोलन (Fit India Movement) — शारीरिक फिटनेस को जन-आंदोलन बनाने की पहल, कबड्डी, खो-खो, रस्साकशी और कुश्ती जैसे परंपरागत भारतीय खेल, युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय — राष्ट्रीय युवा नीति और खेल से संबंधित नोडल मंत्रालय
- Essay: नशा मुक्त युवा, विकसित भारत: जनभागीदारी से सामाजिक बुराइयों पर विजय, सेवा, खेल और समुदाय: युवा शक्ति से ग्रामीण परिवर्तन का मार्ग
त्वरित पुनरावृत्ति: राष्ट्रीय सेवा योजना का आदर्श वाक्य “मैं नहीं, तुम” है और यह सामुदायिक सेवा के माध्यम से युवाओं में नशा मुक्ति व सामाजिक जिम्मेदारी को बढ़ावा देती है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के अंतर्गत एमवाई भारत राष्ट्रीय सेवा योजना ने “नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत 100 सप्ताह संकल्प अभियान” के छठे सप्ताह में देशभर के गांवों में “ग्राम सेवा एवं परंपरागत खेल दिवस” मनाया। इस पहल को राष्ट्रीय सेवा योजना निदेशालय और 15 क्षेत्रीय निदेशालयों ने 160 से अधिक संस्थानों और उनके द्वारा गोद लिए गए गांवों में लागू किया। लगभग 80,000 प्रतिभागियों, जिनमें युवा, ग्राम पंचायत सदस्य, ग्रामीण बुजुर्ग और स्थानीय निवासी शामिल थे, ने इसमें भाग लिया। इस आयोजन में अभियान को शैक्षणिक संस्थानों से ग्रामीण समुदायों तक पहुंचाया गया। परंपरागत खेलों के टूर्नामेंट, गांवों में स्वच्छता और पौध रोपण जैसी सेवा गतिविधियां, नशा मुक्ति पर जागरूकता कार्यक्रम तथा 29,500 से अधिक युवा महिलाओं की भागीदारी इसकी प्रमुख विशेषताएं रहीं। यह घटना नशा मुक्ति को केवल प्रतिबंधात्मक उपायों तक सीमित न रखकर युवाओं की सक्रिय सामुदायिक भूमिका से जोड़ने के प्रयास को दर्शाती है।
पृष्ठभूमि
- राष्ट्रीय सेवा योजना की स्थापना वर्ष 1969 में हुई थी, जो महात्मा गांधी की जन्म शताब्दी से जुड़ी थी। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को समुदाय सेवा से जोड़ना है।
- एमवाई भारत युवाओं के लिए एक एकीकृत डिजिटल और संस्थागत मंच है, जिसके अंतर्गत राष्ट्रीय सेवा योजना जैसी युवा सहभागिता वाली योजनाएं चलाई जाती हैं।
- यह अभियान 100 सप्ताह की समयबद्ध योजना है, जिसमें हर माह के लिए अलग विषय तय किया गया है। इस सप्ताह का विषय “स्वस्थ युवा, नशामुक्त युवा (शक्ति एवं सेवा)” दूसरे माह से संबंधित था।
- संविधान के अनुच्छेद 47 के अंतर्गत राज्य से अपेक्षा की गई है कि वह लोक स्वास्थ्य सुधारे और मादक पेयों तथा स्वास्थ्य के लिए हानिकारक दवाओं के सेवन पर रोक लगाने का प्रयास करे।
- नशीले पदार्थों के उत्पादन, विक्रय और सेवन से संबंधित विधिक ढांचा नार्कोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्स्टांसेज़ अधिनियम, 1985 द्वारा निर्धारित है, जबकि इसकी रोकथाम में सामाजिक जागरूकता और सामुदायिक भागीदारी की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जाती है।
- 73वें संविधान संशोधन के बाद ग्राम पंचायतों को ग्यारहवीं अनुसूची में सूचीबद्ध विषयों, जैसे स्वास्थ्य, स्वच्छता और सामुदायिक परिसंपत्तियों के रखरखाव, में योजना और क्रियान्वयन की भूमिका मिली।
नशा मुक्त युवा अभियान और ग्राम सेवा एवं परंपरागत खेल दिवस क्या है?
- यह एमवाई भारत के अंतर्गत राष्ट्रीय सेवा योजना द्वारा चलाया जा रहा 100 सप्ताह का जन-जागरूकता और सहभागिता अभियान है, जिसका लक्ष्य नशा मुक्त और विकसित भारत के लिए युवाओं को प्रेरित करना है।
- अभियान में शारीरिक फिटनेस, सामुदायिक भागीदारी और सामाजिक जिम्मेदारी को नशा मुक्ति की व्यावहारिक नींव माना गया है।
- ग्राम सेवा कार्यक्रम के अंतर्गत राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवक ग्राम पंचायतों के साथ मिलकर गलियों की सफाई, जल स्रोतों के आसपास स्वच्छता और पौध रोपण जैसे कार्य करते हैं।
- परंपरागत खेल जैसे कबड्डी, खो-खो, रस्साकशी और कुश्ती ग्रामीण युवाओं में टीम भावना, अनुशासन और स्वस्थ मनोरंजन को बढ़ावा देते हैं।
- अभियान का उद्देश्य शैक्षणिक संस्थानों और गांवों के बीच स्थायी संबंध बनाना है, जिसमें संस्थान गांव गोद लेकर वहां नियमित सेवा कार्य करते हैं।
- सोशल मीडिया पर #NashaMuktYuva हैशटैग के उपयोग से अभियान की जानकारी को जमीनी स्तर तक पहुंचाने का प्रयास किया गया।
- नशा मुक्ति की दिशा में यह पहल प्रतिबंधात्मक कानूनों (जैसे एनडीपीएस अधिनियम, 1985) के साथ-साथ निवारक, सामाजिक और सहभागी दृष्टिकोण को जोड़ती है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| अभियान का ढांचा | ‘नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत 100 सप्ताह संकल्प अभियान’ (100-Week Resolve Campaign) के छठे सप्ताह का आयोजन, जिसका दूसरा मासिक विषय ‘स्वस्थ युवा, नशामुक्त युवा (शक्ति एवं सेवा)’ है |
| कार्यान्वयन संरचना | युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय के अंतर्गत ‘एमवाई भारत’ (MY Bharat) और राष्ट्रीय सेवा योजना (National Service Scheme – NSS) का एनएसएस निदेशालय तथा 15 क्षेत्रीय निदेशालय द्वारा संयुक्त कार्यान्वयन |
| कार्यक्षेत्र का विस्तार | अभियान को शैक्षणिक संस्थानों से ग्रामीण समुदायों तक ले जाना; 160 से अधिक संस्थान अपने गोद लिए गांवों में सक्रिय |
| पारंपरिक खेल | कबड्डी, खो-खो, रस्साकशी और कुश्ती जैसे स्थानीय टूर्नामेंट, जिनमें 21,500 से अधिक प्रतिभागी शामिल हुए |
| ग्राम सेवा गतिविधियां | गलियों की सफाई, सार्वजनिक कुओं और हैंडपंपों के आसपास स्वच्छता तथा पौध रोपण; इनमें 19,800 से अधिक प्रतिभागी और ग्राम पंचायत सदस्य सम्मिलित |
| सहभागिता और लैंगिक समावेशिता | कुल 80,000 से अधिक प्रतिभागी; खेल और सेवा गतिविधियों में 29,500 से अधिक युवा महिलाएं; #NashaMuktYuva हैशटैग से 4,000 से अधिक सोशल मीडिया पोस्ट |
महत्व
सामाजिक महत्व
- नशा मुक्त समाज के लिए व्यवहार परिवर्तन पर बल, जहां शारीरिक फिटनेस, सामुदायिक भागीदारी और सामाजिक जिम्मेदारी को एक साथ जोड़ा गया है
- पारंपरिक खेलों के माध्यम से स्वस्थ मनोरंजन, टीम वर्क और सकारात्मक सहभागिता को बढ़ावा, जिससे युवाओं का ध्यान नकारात्मक आदतों से हटता है
- युवाओं, बुजुर्गों और पंचायत सदस्यों के बीच संवाद से पीढ़ियों के बीच सहयोग का अवसर
शासन और प्रशासनिक महत्व
- ग्राम पंचायतों के साथ एनएसएस स्वयंसेवकों का तालमेल स्थानीय स्वशासन और सामुदायिक सेवा के बीच संस्थागत सेतु बनाता है
- शैक्षणिक संस्थानों द्वारा गोद लिए गए गांव मॉडल से ग्रामीण विकास में विश्वविद्यालयी और सामुदायिक संसाधनों के उपयोग का व्यावहारिक उदाहरण मिलता है
- केंद्रीय मंत्रालय, क्षेत्रीय निदेशालय और स्थानीय संस्थानों के बीच बहु-स्तरीय समन्वय का मॉडल
स्वास्थ्य और पर्यावरणीय महत्व
- सार्वजनिक कुओं और हैंडपंपों के आसपास स्वच्छता से जल-जनित रोगों की रोकथाम के सामुदायिक प्रयासों को बल मिलता है
- पौध रोपण गतिविधियां पर्यावरण संरक्षण की नागरिक जिम्मेदारी को व्यवहार में उतारती हैं
- स्वस्थ जीवन शैली पर जागरूकता कार्यक्रम सार्वजनिक स्वास्थ्य की निवारक दृष्टि को मजबूत करते हैं
चुनौतियाँ
1. नशा मुक्ति का दीर्घकालिक प्रभाव
- खेल और जागरूकता गतिविधियां प्रायः अल्पकालिक आयोजन होती हैं; नशे की आदत से मुक्ति के लिए निरंतर परामर्श, पुनर्वास और सहायता तंत्र आवश्यक होता है
- जागरूकता कार्यक्रमों की सफलता को प्रतिभागियों की संख्या से नहीं, बल्कि व्यवहारगत बदलाव से आंका जाना चाहिए
यूपीएससी लिंक: सामाजिक मुद्दे; सार्वजनिक स्वास्थ्य और नशा निवारण की नीतिगत चुनौतियां
2. प्रतिभागिता के आंकड़ों की गुणवत्ता
- अभियान की रिपोर्ट मुख्यतः प्रतिभागियों की संख्या, पोस्ट की संख्या और आयोजनों पर केंद्रित है; गांव-स्तर पर परिणाम मापने के सूचक अभी स्पष्ट नहीं हैं
- सोशल मीडिया पोस्ट से जागरूकता का प्रसार अनुमानित होता है, उसका वास्तविक प्रभाव सत्यापित करना कठिन है
यूपीएससी लिंक: शासन में निष्पादन मूल्यांकन और परिणाम-आधारित प्रशासन
3. शैक्षणिक संस्थानों से ग्रामीण स्तर तक संस्थागत निरंतरता
- गोद लिए गए गांवों की सहभागिता छात्रों की शैक्षणिक अवधि और स्वयंसेवकों की उपलब्धता पर निर्भर रहती है
- स्थानीय पंचायतों की क्षमता और संसाधनों के अभाव में सेवा गतिविधियों का रखरखाव कठिन हो सकता है
यूपीएससी लिंक: पंचायती राज संस्थाएं और ग्रामीण स्थानीय शासन
4. नशा निवारण के विधिक और प्रवर्तन पक्ष से समन्वय
- जागरूकता अभियान को प्रवर्तन और उपचार नीति से जोड़े बिना नशे की आपूर्ति और मांग दोनों पर प्रभाव सीमित रहता है
- नशीले पदार्थों से संबंधित विधिक ढांचे (जैसे NDPS अधिनियम, 1985) के साथ सामाजिक पहलों का समन्वय आवश्यक है
यूपीएससी लिंक: नशीले पदार्थों की रोकथाम से संबंधित विधि और प्रवर्तन तंत्र
5. ग्रामीण क्षेत्रों में अवसंरचना की कमी
- स्वच्छता अभियान के बाद जल स्रोतों और सार्वजनिक स्थानों के रखरखाव के लिए स्थायी बजट और स्थानीय जिम्मेदारी तय होना आवश्यक है
- खेल सुविधाओं के अभाव में पारंपरिक खेलों का नियमित अभ्यास सीमित रह सकता है
यूपीएससी लिंक: ग्रामीण अवसंरचना और सार्वजनिक स्वच्छता
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| अल्पकालिक आयोजन बनाम दीर्घकालिक परिवर्तन | एक सप्ताह के आयोजन से नशे की आदत में स्थायी कमी सुनिश्चित नहीं होती |
| आंकड़ों पर निर्भरता | प्रतिभागी संख्या को सफलता का मानदंड मानने से गुणात्मक प्रभाव की अनदेखी का खतरा |
| पंचायत स्तर पर क्षमता | सेवा गतिविधियों के रखरखाव हेतु ग्राम पंचायतों के पास सीमित वित्तीय और मानवीय संसाधन |
| उपचार और पुनर्वास का अभाव | जागरूकता के बाद नशे से प्रभावित व्यक्तियों के लिए परामर्श व उपचार सुविधाएं ग्रामीण क्षेत्रों में सीमित |
| प्रवर्तन से समन्वय | सामाजिक जागरूकता और विधिक प्रवर्तन के बीच तालमेल न होने पर प्रभाव अधूरा रहता है |
| स्वयंसेवक-आधारित मॉडल की निरंतरता | स्वयंसेवकों के शैक्षणिक चक्र के कारण गोद लिए गांवों से दीर्घकालिक जुड़ाव कठिन |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- राष्ट्रीय सेवा योजना (National Service Scheme – NSS)
आगे की राह
- नशा मुक्ति के लिए मापने योग्य सूचक (जैसे स्कूल और गांव स्तर पर व्यवहार परिवर्तन, परामर्श हेतु संपर्क) तय किए जाएं, ताकि अभियान का मूल्यांकन केवल प्रतिभागी संख्या तक सीमित न रहे
- जागरूकता अभियान को स्थानीय स्तर पर परामर्श, पुनर्वास और उपचार सेवाओं से जोड़ा जाए
- ग्राम पंचायतों को स्वच्छता और पौध रोपण गतिविधियों के रखरखाव हेतु योजना और संसाधन के साथ सहभागी बनाया जाए
- गोद लिए गए गांवों की सहभागिता को बहु-वर्षीय योजना का रूप दिया जाए, ताकि छात्र बदलने पर भी कार्य की निरंतरता बनी रहे
- पारंपरिक खेलों के लिए गांवों में खेल मैदान और प्रशिक्षित मार्गदर्शक की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए
- नशा निवारण के विधिक प्रवर्तन पक्ष, जैसे NDPS अधिनियम के अंतर्गत प्रवर्तन एजेंसियों, के साथ सूचना और समन्वय का तंत्र विकसित किया जाए
- महिला प्रतिभागिता की सफलता को अन्य सामुदायिक नेतृत्व भूमिकाओं तक विस्तारित किया जाए
- डिजिटल प्रचार को स्थानीय भाषाओं और ग्रामीण संचार माध्यमों से जोड़कर वास्तविक पहुंच का सत्यापन किया जाए
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
राष्ट्रीय सेवा योजना (National Service Scheme, NSS) · नशामुक्ति (Drug De-addiction) · राज्य के नीति निदेशक सिद्धांत (Directive Principles of State Policy) · अनुच्छेद 47 (Article 47) · पंचायती राज (Panchayati Raj) · अनुच्छेद 243G (Article 243G) · सामुदायिक भागीदारी (Community Participation) · युवा सहभागिता (Youth Participation) · स्वस्थ जीवनशैली (Healthy Lifestyle) · सामाजिक उत्तरदायित्व (Social Responsibility) · मादक पदार्थ और मनोदैहिक पदार्थ अधिनियम, 1985 (NDPS Act, 1985) · स्वैच्छिकता बनाम संस्थागत उत्तरदायित्व (Voluntarism versus Institutional Accountability)
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 47: पोषण, जनस्वास्थ्य और नशीले पदार्थों के निषेध का राज्य का कर्तव्य
- अनुच्छेद 40: ग्राम पंचायतों का संगठन और स्वशासन की इकाई के रूप में भूमिका
- अनुच्छेद 51A(छ): प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा और उसके संवर्धन का मूल कर्तव्य
- संविधान की ग्यारहवीं अनुसूची: स्वास्थ्य, स्वच्छता और सामुदायिक परिसंपत्तियों का पंचायतों को हस्तांतरित विषय
अवधारणा प्रवाह
नशे के दुष्प्रभाव और युवाओं की ऊर्जा का सकारात्मक दिशा में उपयोग की आवश्यकता पहचानी गई → अभियान के छठे सप्ताह में शैक्षणिक संस्थानों से आगे बढ़कर गोद लिए गांवों में आयोजन किए गए → एनएसएस इकाइयों और ग्राम पंचायतों के सहयोग से पारंपरिक खेल और स्वच्छता व पौध रोपण गतिविधियां संचालित हुईं → खेल, सेवा और जागरूकता के संयोजन से स्वस्थ जीवन शैली और सामुदायिक सहभागिता को बढ़ावा मिला → सामूहिक भागीदारी और सामाजिक जिम्मेदारी से व्यवहार परिवर्तन की दीर्घकालिक नींव तैयार होती है, जो नशा मुक्त विकसित भारत के लक्ष्य से जुड़ती है
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित मिलान कीजिए :
सूची I (संवैधानिक प्रावधान)
क. अनुच्छेद 40
ख. अनुच्छेद 47
ग. अनुच्छेद 243G
सूची II (विषय-वस्तु)
1. ग्राम पंचायतों को स्वशासन की इकाई के रूप में संगठित करना
2. पोषण स्तर और लोक स्वास्थ्य सुधारना तथा स्वास्थ्य के लिए हानिकारक मादक पेय और नशीली दवाओं के सेवन का प्रतिषेध करना
3. पंचायतों को आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय की योजनाओं के लिए शक्तियां और उत्तरदायित्व सौंपने की व्यवस्था करना
सही मिलान चुनिए।
- क-1, ख-2, ग-3
- क-2, ख-3, ग-1
- क-3, ख-1, ग-2
- क-1, ख-3, ग-2
उत्तर: क-1, ख-2, ग-3 — अनुच्छेद 40 ग्राम पंचायतों के संगठन से संबंधित है, इसलिए क-1 सही है। अनुच्छेद 47 राज्य पर पोषण स्तर, लोक स्वास्थ्य और हानिकारक मादक पेय व नशीली दवाओं के प्रतिषेध का नीति-निदेशक दायित्व डालता है, अतः ख-2 सही है। अनुच्छेद 243G (73वां संशोधन, 1992) पंचायतों को आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय की शक्तियां सौंपने का आधार देता है, अतः ग-3 सही है।
Q2. राष्ट्रीय सेवा योजना (National Service Scheme) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
1. इसकी शुरुआत वर्ष 1969 में महात्मा गांधी की जन्म शताब्दी के अवसर पर हुई थी।
2. इसका आदर्श वाक्य ‘मैं नहीं, तुम’ है।
3. यह शिक्षा मंत्रालय के अधीन कार्य करती है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- सभी
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है, क्योंकि राष्ट्रीय सेवा योजना की स्थापना 1969 में गांधी जन्म शताब्दी के अवसर पर हुई थी। कथन 2 सही है, क्योंकि ‘मैं नहीं, तुम’ इसका आदर्श वाक्य है। कथन 3 गलत है, क्योंकि यह वर्तमान में युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के अधीन है, न कि शिक्षा मंत्रालय के।
Q3. कथन (A) : भारत में ग्राम पंचायतें सामाजिक न्याय और स्वच्छता जैसे विषयों से संबंधित सामुदायिक सेवा कार्यक्रमों का स्थानीय स्तर पर क्रियान्वयन कर सकती हैं।
कारण (R) : संविधान के अनुच्छेद 243G के अंतर्गत राज्य विधानमंडल पंचायतों को ग्यारहवीं अनुसूची में सूचीबद्ध विषयों के संबंध में शक्तियां और उत्तरदायित्व सौंप सकता है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए :
- (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है
- (A) और (R) दोनों सही हैं, किंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है
- (A) सही है, किंतु (R) गलत है
- (A) गलत है, किंतु (R) सही है
उत्तर: (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है — अनुच्छेद 243G राज्य विधानमंडल को पंचायतों को आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय से जुड़े, ग्यारहवीं अनुसूची में सूचीबद्ध विषयों के लिए शक्तियां और उत्तरदायित्व सौंपने का अधिकार देता है। इसी संवैधानिक आधार पर पंचायतें स्थानीय सामुदायिक सेवा और सामाजिक न्याय के कार्यक्रमों में भाग ले सकती हैं, इसलिए (R) (A) की सही व्याख्या है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ युवाओं को नशामुक्ति और ग्रामीण सामुदायिक सेवा से जोड़ने के लिए राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) जैसे स्वैच्छिक मंच किस प्रकार प्रभावी हो सकते हैं, इसका परीक्षण कीजिए। क्या स्वैच्छिक भागीदारी पर आधारित ऐसे अभियान दीर्घकालिक सामाजिक परिवर्तन के लिए पर्याप्त हैं? संविधान के नीति-निदेशक सिद्धांतों की भूमिका और पंचायतों की संस्थागत क्षमता के संदर्भ में तर्क दीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: उत्तर की संरचना इस प्रकार हो :
(1) संवैधानिक आधार : अनुच्छेद 47 के अंतर्गत राज्य का दायित्व है कि वह पोषण स्तर, लोक स्वास्थ्य सुधारे तथा स्वास्थ्य के लिए हानिकारक मादक पेय और नशीली दवाओं के सेवन का प्रतिषेध करे। अनुच्छेद 51क (मौलिक कर्तव्य) के अंतर्गत मानवतावाद और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के विकास का संदर्भ भी जोड़ा जा सकता है। नीति-निदेशक सिद्धांत न्यायालय में अप्रवर्तनीय हैं (अनुच्छेद 37), इसलिए इनका क्रियान्वयन नीति और कार्यक्रमों पर निर्भर है।
(2) विधिक और नीतिगत ढांचा : मादक पदार्थ और मनोदैहिक पदार्थ अधिनियम, 1985 (NDPS Act, 1985) की धारा 27 के अंतर्गत उपभोग और धारा 27क के अंतर्गत तस्करी व वित्तपोषण से संबंधित दंड व्यवस्था; मांग-पक्ष में जागरूकता और उपचार (de-addiction) की भूमिका; सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय का नशामुक्त भारत अभियान (2020) और युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय सेवा योजना का अंतर-मंत्रालयी फर्क स्पष्ट करें।
(3) संस्थागत आधार : 73वें संविधान संशोधन (1992) के अंतर्गत अनुच्छेद 243G और ग्यारहवीं अनुसूची; ग्राम पंचायतों की सहभागिता से सामुदायिक सेवा का स्थानीय विस्तार; स्वच्छता (ग्रामीण) और खेलो इंडिया जैसे कार्यक्रमों के साथ तालमेल।
(4) विचारों का संतुलन : पक्ष में तर्क : स्वैच्छिकता से सामाजिक स्वामित्व, विश्वास और सहभागिता; गांधीवादी रचनात्मक कार्यक्रम की परंपरा; ‘मैं नहीं, तुम’ का सामूहिक दर्शन। विपक्ष में तर्क : स्वैच्छिक भागीदारी की सततता, प्रशिक्षित परामर्श और उपचार सेवाओं का अभाव, प्रभाव-मूल्यांकन के संकेतकों का कमजोर होना, प्रतिभागियों की संख्या और सोशल मीडिया पोस्ट जैसे आउटपुट बनाम वास्तविक व्यवहार-परिवर्तन (outcome) के बीच अंतर।
(5) निष्कर्ष : नशामुक्ति को जन-आंदोलन के साथ राज्य की संस्थागत जवाबदेही, स्थानीय स्वास्थ्य सेवाओं के साथ एकीकरण और दीर्घकालिक मूल्यांकन से जोड़ना आवश्यक है। स्वैच्छिक मंच सहायक हैं, पर अकेले पर्याप्त नहीं।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
Related guides on our sites
- Anthropology VS PSIR
- Best PSIR optional coaching
- Best PSIR optional coaching online
- Best PSIR optional teacher
- ‘मेरा भारत’ अभियान: ग्रामीण युवाओं ने नशामुक्त समाज के लिए खेल और सेवा का संगम किया - October 24, 2026
- Forex Rule Confusion Delays Service Payments: RBI Clarification Needed - October 24, 2026
- माई भारत अभियान: ग्राम सेवा एवं खेल दिवस के तहत गांवों में Nasha Mukt Yuva Abhiyan - October 24, 2026

No Comments