17 Sep मोदी ने सेमीकॉन इंडिया में 7.8% विकास और सेमीकंडक्टर क्रांति का ऐलान किया
✎ भारत अपनी मजबूत आर्थिक संवृद्धि और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में केंद्रित प्रयासों के माध्यम से वैश्विक विनिर्माण और नवाचार केंद्र के रूप में उभर रहा है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था और योजना, संसाधनों का संग्रहण, वृद्धि, विकास और रोजगार से संबंधित विषय | GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- विकास एवं अनुप्रयोग और रोजमर्रा के जीवन पर इसके प्रभाव
- Prelims: SEMICON इंडिया, सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र, आर्थिक संवृद्धि दर, विनिर्माण क्षेत्र, समर्पित फ्रेट कॉरिडोर, वैश्विक विश्वास
- Essay: भारत की आर्थिक संवृद्धि और वैश्विक अर्थव्यवस्था में इसकी भूमिका, तकनीकी आत्मनिर्भरता और राष्ट्रीय विकास
त्वरित पुनरावृत्ति: भारत अपनी मजबूत आर्थिक संवृद्धि और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में केंद्रित प्रयासों के माध्यम से वैश्विक विनिर्माण और नवाचार केंद्र के रूप में उभर रहा है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में SEMICON इंडिया 2026 का उद्घाटन किया, जहाँ उन्होंने भारत की 7.8 प्रतिशत की आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) दर और देश में सेमीकंडक्टर क्षेत्र में हो रही प्रगति पर प्रकाश डाला। उन्होंने वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत की आर्थिक मजबूती और विभिन्न क्षेत्रों, जैसे फिनटेक (FinTech) और लॉजिस्टिक्स (Logistics) में हो रहे विकास को रेखांकित किया, जो देश में बढ़ते वैश्विक विश्वास को दर्शाता है।
पृष्ठभूमि
- भारत सरकार देश को सेमीकंडक्टर विनिर्माण (Semiconductor Manufacturing) के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है, जिसके लिए विभिन्न प्रोत्साहन और नीतियां लागू की गई हैं।
- सेमीकंडक्टर चिप्स आधुनिक अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण हैं, जो इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल और संचार जैसे उद्योगों को शक्ति प्रदान करते हैं।
- वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Global Supply Chain) में व्यवधानों ने सेमीकंडक्टर क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के महत्व को उजागर किया है।
- भारत ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी आर्थिक संवृद्धि दर में निरंतरता बनाए रखी है, जो विभिन्न आर्थिक सुधारों और नीतिगत पहलों का परिणाम है।
- समर्पित फ्रेट कॉरिडोर (Dedicated Freight Corridors) जैसी अवसंरचना परियोजनाओं का उद्देश्य देश भर में माल ढुलाई को गति देना और लॉजिस्टिक्स दक्षता में सुधार करना है।
- भारत में सेमीकंडक्टर कार्यक्रम के तहत चिप डिजाइन स्टार्टअप्स (Chip Design Startups) और कंपनियों को समर्थन दिया जा रहा है, जिससे इस क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा मिल रहा है।
सेमीकंडक्टर क्षेत्र और भारत का दृष्टिकोण
- सेमीकंडक्टर (Semiconductor) वे पदार्थ होते हैं जिनकी विद्युत चालकता चालक और कुचालक के बीच होती है। इनका उपयोग इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, जैसे कंप्यूटर, स्मार्टफोन और अन्य डिजिटल उपकरणों में चिप्स बनाने के लिए किया जाता है।
- भारत का सेमीकंडक्टर कार्यक्रम (Semiconductor Programme) देश में एक मजबूत सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) के निर्माण पर केंद्रित है, जिसमें चिप डिजाइन, विनिर्माण (Fabs), उन्नत पैकेजिंग, अनुसंधान एवं विकास (Research and Development) और प्रतिभा विकास जैसे छह प्रमुख स्तंभ शामिल हैं।
- इस कार्यक्रम का लक्ष्य कम से कम 200 चिप-डिजाइन स्टार्टअप्स और कंपनियों को समर्थन देना है, जिससे स्वदेशी नवाचार और उत्पादन को बढ़ावा मिल सके।
- भारत ने पिछले चार वर्षों में 70,000 डिजाइन इंजीनियरों को प्रशिक्षित किया है, जो इस क्षेत्र में कुशल कार्यबल की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
- देश भर के 400 से अधिक विश्वविद्यालयों को इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन ऑटोमेशन (Electronic Design Automation – EDA) उपकरणों तक पहुंच प्रदान की गई है, जिससे छात्रों को अत्याधुनिक तकनीक सीखने का अवसर मिल रहा है।
- सेमीकंडक्टर क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने के लिए सरकार उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (Production-Linked Incentive – PLI) योजनाओं और अन्य वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है।
- भारत ‘भारत के चिप्स दुनिया में जाएंगे’ (India’s chips will go out to the world) के दृष्टिकोण के साथ वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला में एक प्रमुख खिलाड़ी बनने का लक्ष्य रखता है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| 7.8% आर्थिक संवृद्धि | वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत की मजबूत आर्थिक स्थिति और विकास की गति को दर्शाता है। |
| सेमीकंडक्टर क्षेत्र पर जोर | भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में स्थापित करने और आत्मनिर्भरता बढ़ाने का लक्ष्य। |
| समर्पित फ्रेट कॉरिडोर (Dedicated Freight Corridors) | लॉजिस्टिक्स दक्षता में सुधार, विनिर्माण को बढ़ावा और देश भर में माल ढुलाई की गति में तेजी। |
| सॉवरेन रेटिंग अपग्रेड | भारतीय अर्थव्यवस्था में बढ़ती वैश्विक विश्वसनीयता और निवेशकों के विश्वास का संकेत। |
| सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र के छह स्तंभ | चिप डिजाइन, मशीन और सामग्री, फैब, उन्नत पैकेजिंग, अनुसंधान एवं विकास और प्रतिभा विकास पर केंद्रित व्यापक रणनीति। |
| डिजाइन इंजीनियरों का प्रशिक्षण | सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए आवश्यक कुशल कार्यबल तैयार करने और नवाचार को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- उच्च आर्थिक संवृद्धि दर (7.8%) वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत की आर्थिक सुदृढ़ता और लचीलेपन को दर्शाती है।
- सेमीकंडक्टर क्षेत्र में निवेश और विकास ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने और उच्च-प्रौद्योगिकी विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण है।
- समर्पित फ्रेट कॉरिडोर लॉजिस्टिक्स लागत को कम करके और आपूर्ति श्रृंखला को सुव्यवस्थित करके विनिर्माण और निर्यात को बढ़ावा देंगे।
सामरिक महत्व
- सेमीकंडक्टर चिप्स आधुनिक अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं; इस क्षेत्र में आत्मनिर्भरता भू-राजनीतिक जोखिमों को कम करती है।
- भारत का सेमीकंडक्टर विनिर्माण केंद्र बनना वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को विविधता प्रदान करेगा और भारत की सामरिक स्वायत्तता को बढ़ाएगा।
- BRICS शिखर सम्मेलन में नई दिल्ली घोषणा को सर्वसम्मति से अपनाना वैश्विक मंच पर भारत के बढ़ते प्रभाव और विश्वसनीयता को दर्शाता है।
सामाजिक-तकनीकी महत्व
- सेमीकंडक्टर क्षेत्र में रोजगार सृजन और कौशल विकास, विशेष रूप से डिजाइन इंजीनियरों के प्रशिक्षण से युवा आबादी को लाभ होगा।
- उन्नत प्रौद्योगिकी जैसे एजेंटिक AI (Agentic AI), टोकनाइजेशन (Tokenisation) और क्वांटम प्रौद्योगिकी (Quantum Technology) में प्रगति वित्तीय समावेशन और डिजिटल परिवर्तन को बढ़ावा देगी।
- सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र का विकास भारत को डिजिटल नवाचार और तकनीकी नेतृत्व के लिए एक वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करेगा।
चुनौतियाँ
1. पूंजी-गहन निवेश
- सेमीकंडक्टर फैब (Fab) स्थापित करने के लिए भारी पूंजी निवेश की आवश्यकता होती है, जिसमें अरबों डॉलर का खर्च आता है।
- उच्च प्रारंभिक निवेश और लंबे समय तक रिटर्न की अनिश्चितता निजी क्षेत्र के लिए एक बाधा हो सकती है।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: औद्योगिक नीति, निवेश मॉडल
2. तकनीकी जटिलता और विशेषज्ञता
- सेमीकंडक्टर विनिर्माण अत्यधिक जटिल और तकनीकी रूप से उन्नत प्रक्रिया है, जिसके लिए विशिष्ट विशेषज्ञता और अनुसंधान एवं विकास की आवश्यकता होती है।
- भारत में इस क्षेत्र में अनुभवी पेशेवरों और शोधकर्ताओं की कमी एक चुनौती है, हालांकि प्रशिक्षण कार्यक्रम चल रहे हैं।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी: स्वदेशीकरण, सूचना प्रौद्योगिकी
3. वैश्विक प्रतिस्पर्धा और आपूर्ति श्रृंखला जोखिम
- सेमीकंडक्टर उद्योग में ताइवान, दक्षिण कोरिया और अमेरिका जैसे स्थापित खिलाड़ी हैं, जिनके साथ प्रतिस्पर्धा करना चुनौतीपूर्ण है।
- वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधान (जैसे COVID-19 महामारी के दौरान) कच्चे माल और उपकरणों की उपलब्धता को प्रभावित कर सकते हैं।
यूपीएससी लिंक: अंतर्राष्ट्रीय संबंध: वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएं, व्यापार
4. आधारभूत संरचना और पारिस्थितिकी तंत्र
- सेमीकंडक्टर फैब को निरंतर बिजली आपूर्ति, स्वच्छ जल और विशेष रसायनों सहित मजबूत बुनियादी ढांचे की आवश्यकता होती है।
- एक पूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने में समय लगता है, जिसमें डिजाइन हाउस, सामग्री आपूर्तिकर्ता और परीक्षण सुविधाएं शामिल हैं।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: बुनियादी ढांचा, औद्योगिक गलियारे
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| उच्च निवेश आवश्यकता | सेमीकंडक्टर विनिर्माण इकाइयों की स्थापना के लिए भारी वित्तीय संसाधनों की आवश्यकता। |
| तकनीकी विशेषज्ञता की कमी | उन्नत सेमीकंडक्टर डिजाइन और विनिर्माण के लिए पर्याप्त कुशल कार्यबल और अनुसंधान क्षमता का अभाव। |
| वैश्विक भू-राजनीतिक जोखिम | वैश्विक व्यापार तनाव और आपूर्ति श्रृंखला व्यवधान सेमीकंडक्टर उद्योग को प्रभावित कर सकते हैं। |
| पर्यावरणीय प्रभाव | सेमीकंडक्टर फैब के लिए बड़ी मात्रा में पानी और ऊर्जा की आवश्यकता होती है, जिससे पर्यावरणीय चिंताएं बढ़ सकती हैं। |
| अनुसंधान एवं विकास में निवेश | नवाचार और प्रतिस्पर्धात्मकता बनाए रखने के लिए निरंतर और पर्याप्त अनुसंधान एवं विकास निवेश की आवश्यकता। |
आगे की राह
- सेमीकंडक्टर विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए आकर्षक प्रोत्साहन और सब्सिडी के साथ एक स्थिर और दीर्घकालिक नीति ढांचा तैयार करना।
- सेमीकंडक्टर डिजाइन, फैब्रिकेशन और पैकेजिंग में अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देने के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी को मजबूत करना।
- विश्वविद्यालयों और उद्योग के बीच सहयोग के माध्यम से सेमीकंडक्टर क्षेत्र के लिए विशेष कौशल विकास कार्यक्रम और प्रतिभा पाइपलाइन बनाना।
- सेमीकंडक्टर फैब के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे, जैसे विश्वसनीय बिजली, जल आपूर्ति और लॉजिस्टिक्स कनेक्टिविटी में निवेश करना।
- वैश्विक सेमीकंडक्टर कंपनियों के साथ रणनीतिक साझेदारी स्थापित करना ताकि प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और निवेश को आकर्षित किया जा सके।
- सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र के सभी घटकों, जैसे सामग्री, उपकरण और परीक्षण सुविधाओं के स्वदेशीकरण को बढ़ावा देना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
सेमीकंडक्टर उद्योग · आर्थिक संवृद्धि · मेक इन इंडिया · डिजिटल इंडिया · विनिर्माण क्षेत्र · आत्मनिर्भर भारत · राजकोषीय नीति · वैश्विक विश्वास · बुनियादी ढाँचा · स्टार्टअप इकोसिस्टम · कौशल विकास · अनुसंधान एवं विकास
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 19(1)(g)’, ‘note’: ‘व्यापार और व्यवसाय की स्वतंत्रता’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 38’, ‘note’: ‘राज्य लोक कल्याण को बढ़ावा देगा’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 39’, ‘note’: ‘राज्य द्वारा अनुसरणीय नीति के कुछ सिद्धांत’}
अवधारणा प्रवाह
सरकार सेमीकंडक्टर क्षेत्र पर जोर देती है। → सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र के छह स्तंभों पर कार्य। → डिजाइन इंजीनियरों का प्रशिक्षण और स्टार्टअप को समर्थन। → घरेलू सेमीकंडक्टर विनिर्माण और डिजाइन क्षमता में वृद्धि। → भारत वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला में प्रमुख खिलाड़ी बनता है। → आर्थिक संवृद्धि, रोजगार सृजन और तकनीकी आत्मनिर्भरता में वृद्धि।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत ने हाल ही में वैश्विक चुनौतियों के बावजूद 7.8 प्रतिशत की आर्थिक संवृद्धि दर दर्ज की है।
2. सेमीकंडक्टर कार्यक्रम के तहत, सरकार का लक्ष्य कम से कम 200 चिप-डिज़ाइन स्टार्टअप और कंपनियों का समर्थन करना है।
3. समर्पित फ्रेट कॉरिडोर (Dedicated Freight Corridors) का उद्देश्य रसद (logistics) में सुधार करना और विनिर्माण को बढ़ावा देना है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है। प्रधानमंत्री ने SEMICON India 2026 के उद्घाटन के दौरान भारत की 7.8 प्रतिशत आर्थिक संवृद्धि दर का उल्लेख किया।
कथन 2 सही है। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि Semicon 2.0 के तहत सरकार का लक्ष्य कम से कम 200 चिप-डिज़ाइन स्टार्टअप और कंपनियों का समर्थन करना है।
कथन 3 सही है। प्रधानमंत्री ने समर्पित फ्रेट कॉरिडोर के परिचालन का उल्लेख करते हुए कहा कि वे देश भर में आवाजाही को तेज करेंगे, रसद में सुधार करेंगे और विनिर्माण को नई गति देंगे।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन ‘राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन’ के उद्देश्यों को सर्वोत्तम रूप से दर्शाता/दर्शाते है/हैं?
1. भारत को हरित हाइड्रोजन और उसके व्युत्पन्न के उत्पादन, उपयोग और निर्यात के लिए एक वैश्विक केंद्र बनाना।
2. जीवाश्म ईंधन के आयात पर निर्भरता कम करना।
3. देश में सेमीकंडक्टर विनिर्माण को बढ़ावा देना।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
- केवल 1
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 2
- 1, 2 और 3
उत्तर: केवल 1 और 2 — कथन 1 और 2 सही हैं। राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन का प्राथमिक उद्देश्य भारत को हरित हाइड्रोजन के उत्पादन और निर्यात का वैश्विक केंद्र बनाना तथा जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करना है।
कथन 3 गलत है। सेमीकंडक्टर विनिर्माण को बढ़ावा देना ‘राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन’ का उद्देश्य नहीं है, बल्कि यह ‘सेमीकॉन इंडिया’ जैसी पहलों का हिस्सा है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत के सेमीकंडक्टर उद्योग को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा की गई पहलों पर चर्चा कीजिए। यह उद्योग भारत की आर्थिक संवृद्धि और वैश्विक स्थिति को कैसे प्रभावित कर सकता है? (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: सेमीकंडक्टर उद्योग के महत्व और भारत के लिए इसकी रणनीतिक आवश्यकता का संक्षिप्त परिचय।
2. सरकारी पहलें: सेमीकंडक्टर उद्योग को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए प्रमुख कदमों का विस्तृत वर्णन। इसमें ‘सेमीकॉन इंडिया’ कार्यक्रम, उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजनाएँ, अनुसंधान एवं विकास (R&D) पर जोर, कौशल विकास कार्यक्रम (जैसे 70,000 डिज़ाइन इंजीनियरों का प्रशिक्षण), और स्टार्टअप इकोसिस्टम को समर्थन (जैसे 200 चिप-डिज़ाइन स्टार्टअप का लक्ष्य) शामिल होने चाहिए।
3. आर्थिक संवृद्धि पर प्रभाव: चर्चा करें कि कैसे सेमीकंडक्टर उद्योग भारत की आर्थिक संवृद्धि में योगदान कर सकता है। इसमें विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा, रोजगार सृजन, निर्यात में वृद्धि, डिजिटल अर्थव्यवस्था का सुदृढीकरण और नवाचार को प्रोत्साहन जैसे बिंदु शामिल होंगे।
4. वैश्विक स्थिति पर प्रभाव: विश्लेषण करें कि यह उद्योग भारत की वैश्विक स्थिति को कैसे मजबूत कर सकता है। इसमें वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में भारत की भूमिका, भू-राजनीतिक महत्व में वृद्धि, तकनीकी आत्मनिर्भरता और ‘भारत के चिप्स दुनिया में जाएंगे’ जैसे दृष्टिकोण शामिल होंगे।
5. चुनौतियाँ और आगे की राह: संक्षेप में इस क्षेत्र की कुछ चुनौतियों (जैसे उच्च पूंजी निवेश, तकनीकी विशेषज्ञता की आवश्यकता) और उन्हें दूर करने के लिए आवश्यक कदमों का उल्लेख करें।
6. निष्कर्ष: एक संतुलित निष्कर्ष जो भारत के सेमीकंडक्टर महत्वाकांक्षाओं के दीर्घकालिक दृष्टिकोण और क्षमता को उजागर करता है।
स्रोत: orissapost.com
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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