यूपी-केन्द्र की बैठक: एनसीआर से जुड़े 8 जिलों में प्रदूषण नियंत्रण के लिए ठोस योजना

NCR air pollution action plan: UP-Centre meet on 8 key districts — diagram

यूपी-केन्द्र की बैठक: एनसीआर से जुड़े 8 जिलों में प्रदूषण नियंत्रण के लिए ठोस योजना

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NCR air pollution control plan

✎ NCR में वायु प्रदूषण एक बहुआयामी समस्या है जिसके समाधान के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वित प्रयासों, सख्त नियमों के कार्यान्वयन और जनभागीदारी की आवश्यकता है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — पर्यावरण और पारिस्थितिकी  |  GS Paper I — भूगोल (पर्यावरण भूगोल)  |  GS Paper II — शासन और नीतियाँ
  • Prelims: वायु प्रदूषण, NCR, CAQM, वाहनों से होने वाला उत्सर्जन, औद्योगिक प्रदूषण, धूल प्रदूषण, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, निर्माण और विध्वंस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम
  • Essay: पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास, शहरीकरण और पर्यावरणीय चुनौतियाँ: समाधान की दिशा में कदम

त्वरित पुनरावृत्ति: NCR में वायु प्रदूषण एक बहुआयामी समस्या है जिसके समाधान के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वित प्रयासों, सख्त नियमों के कार्यान्वयन और जनभागीदारी की आवश्यकता है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेन्द्र यादव ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) से जुड़े उत्तर प्रदेश के आठ जिलों में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए एक समन्वित कार्य योजना पर चर्चा की है। इस बैठक में वाहनों से होने वाले उत्सर्जन, औद्योगिक प्रदूषण, धूल और अपशिष्ट प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया गया, जो NCR में वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के बीच सहयोग को दर्शाता है।

पृष्ठभूमि

  • NCR में वायु प्रदूषण एक गंभीर और लगातार बनी रहने वाली समस्या है, जो विशेष रूप से सर्दियों के महीनों में बिगड़ जाती है।
  • इस प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों में वाहनों से होने वाला उत्सर्जन, औद्योगिक गतिविधियाँ, निर्माण कार्य से उत्पन्न धूल, फसल अवशेष जलाना (पराली जलाना) और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की कमी शामिल हैं।
  • वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (Commission for Air Quality Management – CAQM) को NCR और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए समन्वय, अनुसंधान, पहचान और समस्याओं के समाधान के लिए स्थापित किया गया है।
  • केंद्र सरकार NCR के सभी राज्यों — उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, पंजाब और दिल्ली — के साथ मिलकर प्रदूषण नियंत्रण उपायों को मजबूत करने के लिए काम कर रही है।
  • विभिन्न मंत्रालयों, राज्य सरकारों और स्थानीय निकायों के बीच समन्वय की कमी अक्सर प्रदूषण नियंत्रण प्रयासों में बाधा डालती है, इसलिए ऐसे समन्वित प्रयास महत्वपूर्ण हैं।
  • वायु प्रदूषण का मानव स्वास्थ्य, अर्थव्यवस्था और पर्यावरण पर गंभीर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है, जिससे यह एक प्रमुख सार्वजनिक नीति चिंता का विषय बन जाता है।

वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए प्रमुख उपाय और नीतियाँ

  • वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को कम करने के लिए पुरानी गाड़ियों पर कार्रवाई, नई EV (इलेक्ट्रिक वाहन) नीति का कार्यान्वयन, इलेक्ट्रिक बसों की तैनाती और प्रदूषण प्रमाण-पत्रों को अनिवार्य करना शामिल है।
  • औद्योगिक प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए उद्योगों में ऑनलाइन सतत उत्सर्जन निगरानी प्रणाली (Online Continuous Emission Monitoring Systems – OCEMS) और वायु प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों की स्थापना को बढ़ावा दिया जा रहा है।
  • धूल प्रदूषण को कम करने के लिए मशीनीकृत और गहन सफाई (mechanised and deep cleaning) की विस्तृत कार्य योजना तैयार की गई है, विशेषकर निर्माण और विध्वंस स्थलों पर।
  • ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम (Solid Waste Management Rules) और निर्माण और विध्वंस अपशिष्ट प्रबंधन नियम (Construction and Demolition Waste Management Rules) का प्रभावी कार्यान्वयन प्रदूषण नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
  • पराली प्रबंधन (stubble management) के लिए कृषि विभागों के साथ समन्वय स्थापित किया जा रहा है ताकि किसानों को फसल अवशेष जलाने के बजाय वैकल्पिक तरीकों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके।
  • CAQM स्थानीय निकायों और जन प्रतिनिधियों के साथ बैठकें आयोजित कर रहा है और उन्हें प्रदूषण नियंत्रण के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त करने का निर्देश दे रहा है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
NCR में वायु प्रदूषण राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में वायु प्रदूषण एक गंभीर पर्यावरणीय और स्वास्थ्य चुनौती है, जिससे लाखों लोग प्रभावित होते हैं।
समन्वित कार्य योजना उत्तर प्रदेश और केंद्र सरकार के बीच समन्वित कार्य योजना प्रदूषण के विभिन्न स्रोतों से निपटने के लिए एक एकीकृत दृष्टिकोण सुनिश्चित करती है।
प्रमुख प्रदूषक स्रोत वाहनों से होने वाला उत्सर्जन, औद्योगिक प्रदूषण, धूल और अपशिष्ट प्रबंधन प्रदूषण के प्रमुख स्रोत हैं जिन पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।
आठ NCR-संबद्ध जिले उत्तर प्रदेश के आठ NCR-संबद्ध जिलों (जैसे नोएडा, गाजियाबाद, हापुड़, मेरठ, बुलंदशहर) पर विशेष ध्यान केंद्रित करना समस्या के स्थानीय समाधान के लिए महत्वपूर्ण है।
प्रौद्योगिकी का उपयोग ऑनलाइन कंटीन्यूअस एमिशन मॉनिटरिंग सिस्टम (OCEMS) और मशीनीकृत सफाई जैसी प्रौद्योगिकियों का उपयोग प्रदूषण नियंत्रण में दक्षता बढ़ाता है।

महत्व

पर्यावरणीय महत्व

  • वायु गुणवत्ता में सुधार: यह योजना NCR में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) को बेहतर बनाने में मदद करेगी, जिससे नागरिकों के स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
  • सतत विकास लक्ष्य (SDG): स्वच्छ वायु सुनिश्चित करना संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (SDG) के अनुरूप है, विशेष रूप से SDG 3 (अच्छा स्वास्थ्य और कल्याण) और SDG 11 (सतत शहर और समुदाय) से संबंधित है।

सामाजिक महत्व

  • जन स्वास्थ्य में सुधार: वायु प्रदूषण से संबंधित श्वसन और हृदय रोगों में कमी आएगी, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य पर बोझ कम होगा।
  • जीवन की गुणवत्ता: स्वच्छ हवा से नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार होगा, जिससे वे स्वस्थ और अधिक उत्पादक जीवन जी सकेंगे।

आर्थिक महत्व

  • उत्पादकता में वृद्धि: स्वस्थ कार्यबल और कम बीमारी के कारण आर्थिक उत्पादकता में वृद्धि होगी।
  • पर्यटन और निवेश: बेहतर पर्यावरणीय स्थिति NCR को निवेश और पर्यटन के लिए अधिक आकर्षक बना सकती है।

शासन और अंतर-राज्यीय सहयोग

  • संघवाद का उदाहरण: केंद्र और राज्य सरकारों के बीच यह सहयोग भारतीय संघवाद (Federalism) का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जहां साझा समस्याओं के समाधान के लिए मिलकर काम किया जाता है।
  • नीतिगत समन्वय: विभिन्न राज्यों (उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान, पंजाब) के मुख्यमंत्रियों के साथ समन्वय प्रदूषण नियंत्रण के लिए एक व्यापक और प्रभावी नीतिगत ढाँचा तैयार करता है।

चुनौतियाँ

1. वाहनों से होने वाला प्रदूषण

  • पुराने वाहनों पर कार्रवाई और नई EV नीति का प्रभावी क्रियान्वयन एक चुनौती है।
  • वाहनों की बढ़ती संख्या और प्रदूषण प्रमाण पत्रों का अनुपालन सुनिश्चित करना।

2. औद्योगिक उत्सर्जन

  • सभी उद्योगों में ऑनलाइन कंटीन्यूअस एमिशन मॉनिटरिंग सिस्टम (OCEMS) और प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों की स्थापना सुनिश्चित करना।
  • छोटे और मध्यम उद्योगों (MSMEs) में अनुपालन सुनिश्चित करना।

3. धूल प्रदूषण

  • निर्माण और विध्वंस गतिविधियों से उत्पन्न धूल को नियंत्रित करना।
  • सड़कों की मशीनीकृत और गहरी सफाई का नियमित और प्रभावी संचालन।

4. अपशिष्ट प्रबंधन

  • ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम और निर्माण एवं विध्वंस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों का प्रभावी क्रियान्वयन।
  • अपशिष्ट पृथक्करण और प्रसंस्करण की चुनौती।

5. पराली जलाना

  • NCR के आसपास के कृषि राज्यों में पराली जलाने की समस्या का स्थायी समाधान खोजना।
  • किसानों को वैकल्पिक तरीकों के लिए प्रोत्साहित करना और आवश्यक सहायता प्रदान करना।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
वाहनों का उत्सर्जन पुराने वाहनों पर प्रभावी कार्रवाई और इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को अपनाने में धीमी गति।
औद्योगिक प्रदूषण सभी उद्योगों में प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों की स्थापना और निगरानी में अंतराल।
धूल प्रदूषण निर्माण गतिविधियों और सड़कों से उत्पन्न होने वाली धूल का अपर्याप्त प्रबंधन।
अपशिष्ट प्रबंधन ठोस और निर्माण/विध्वंस अपशिष्ट नियमों के क्रियान्वयन में चुनौतियाँ।
अंतर-राज्यीय समन्वय विभिन्न राज्यों के बीच नीतियों और क्रियान्वयन में एकरूपता की कमी।
जागरूकता और भागीदारी नागरिकों और हितधारकों के बीच प्रदूषण नियंत्रण के प्रति जागरूकता और सक्रिय भागीदारी की कमी।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • ई-वाहन नीति (EV Policy)

आगे की राह

  • वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए पुराने वाहनों को चरणबद्ध तरीके से हटाने और इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन प्रदान करना।
  • सभी उद्योगों में ऑनलाइन कंटीन्यूअस एमिशन मॉनिटरिंग सिस्टम (OCEMS) और प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों की स्थापना और उनके प्रभावी संचालन को सुनिश्चित करना।
  • निर्माण और विध्वंस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करना और धूल प्रदूषण को कम करने के लिए मशीनीकृत और गहरी सफाई को नियमित करना।
  • ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना, जिसमें अपशिष्ट पृथक्करण, प्रसंस्करण और निपटान शामिल है।
  • पराली जलाने की समस्या से निपटने के लिए किसानों को वैकल्पिक फसल अवशेष प्रबंधन तकनीकों के लिए वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान करना।
  • राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के सभी संबद्ध राज्यों के बीच बेहतर समन्वय और साझा कार्य योजना के लिए नियमित बैठकों और निगरानी तंत्र को मजबूत करना।
  • जन जागरूकता अभियान चलाकर नागरिकों को प्रदूषण नियंत्रण उपायों में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

वायु प्रदूषण · राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) · समन्वित कार्य योजना · वाहनों से होने वाला उत्सर्जन · औद्योगिक प्रदूषण · धूल प्रदूषण · ठोस अपशिष्ट प्रबंधन · निर्माण और विध्वंस अपशिष्ट प्रबंधन · वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) · सतत उत्सर्जन निगरानी प्रणाली (OCEMS) · अंतर-राज्यीय समन्वय · पराली जलाना

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 48A’, ‘note’: ‘पर्यावरण का संरक्षण और सुधार’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 51A (g)’, ‘note’: ‘पर्यावरण की रक्षा और सुधार नागरिक का कर्तव्य’}

अवधारणा प्रवाह

NCR में बढ़ता वायु प्रदूषण  →  केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा समन्वित कार्य योजना  →  वाहनों, उद्योगों, धूल और अपशिष्ट पर नियंत्रण  →  प्रौद्योगिकी और नियमों का प्रभावी क्रियान्वयन  →  वायु गुणवत्ता में सुधार  →  जन स्वास्थ्य और पर्यावरण को लाभ

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय आवश्यक है।
2. वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) NCR में वायु प्रदूषण से संबंधित मामलों के लिए एक वैधानिक निकाय है।
3. पराली जलाना NCR में वायु प्रदूषण के प्रमुख कारणों में से एक है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि वायु प्रदूषण एक अंतर-राज्यीय समस्या है और इसके समाधान के लिए केंद्र तथा राज्य सरकारों के बीच समन्वय महत्वपूर्ण है। कथन 2 सही है क्योंकि CAQM को वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग अधिनियम, 2021 के तहत स्थापित किया गया है, जो इसे एक वैधानिक निकाय बनाता है। कथन 3 सही है क्योंकि पराली जलाना विशेष रूप से सर्दियों के महीनों में NCR में वायु प्रदूषण में महत्वपूर्ण योगदान देता है।

Q2. राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में वायु प्रदूषण के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-से उपाय किए जा सकते हैं?
1. पुराने वाहनों पर कार्रवाई और नई EV (इलेक्ट्रिक वाहन) नीति का कार्यान्वयन।
2. उद्योगों में ऑनलाइन सतत उत्सर्जन निगरानी प्रणाली (OCEMS) का अनिवार्य उपयोग।
3. मशीनीकृत और गहरी सफाई के माध्यम से धूल प्रदूषण को कम करना।
4. ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम और निर्माण एवं विध्वंस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों का प्रभावी कार्यान्वयन।
सही विकल्प का चयन कीजिए:

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 2, 3 और 4
  3. केवल 1, 3 और 4
  4. 1, 2, 3 और 4

उत्तर: 1, 2, 3 और 4 — दिए गए सभी कथन NCR में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए महत्वपूर्ण उपाय हैं। पुराने वाहनों पर कार्रवाई और EV नीति से वाहन उत्सर्जन कम होगा। OCEMS उद्योगों से होने वाले प्रदूषण की निगरानी में मदद करता है। मशीनीकृत सफाई धूल प्रदूषण को कम करती है, और अपशिष्ट प्रबंधन नियम ठोस तथा निर्माण अपशिष्ट से होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करते हैं।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में वायु प्रदूषण एक गंभीर पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संबंधी चुनौती बनी हुई है। इस समस्या के समाधान हेतु केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वित प्रयासों के महत्व का परीक्षण कीजिए। साथ ही, इस दिशा में किए जा रहे प्रमुख उपायों और उनकी प्रभावशीलता पर भी चर्चा कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** NCR में वायु प्रदूषण की गंभीरता और इसके बहुआयामी प्रभावों का संक्षिप्त उल्लेख।
2. **समन्वित प्रयासों का महत्व:**
* वायु प्रदूषण की अंतर-राज्यीय प्रकृति (जैसे पराली जलाना, वाहनों का आवागमन)।
* विभिन्न स्रोतों (उद्योग, निर्माण, अपशिष्ट) पर नियंत्रण के लिए साझा रणनीति की आवश्यकता।
* संसाधनों का प्रभावी उपयोग और नीतियों में एकरूपता।
* वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) जैसी संस्थाओं की भूमिका।
3. **प्रमुख उपाय:**
* **वाहनों से होने वाले उत्सर्जन पर नियंत्रण:** पुरानी गाड़ियों पर कार्रवाई, EV नीति, इलेक्ट्रिक बसों का उपयोग, प्रदूषण प्रमाण पत्र।
* **औद्योगिक प्रदूषण नियंत्रण:** ऑनलाइन सतत उत्सर्जन निगरानी प्रणाली (OCEMS) का अनिवार्य उपयोग, प्रदूषण नियंत्रण उपकरण।
* **धूल प्रदूषण नियंत्रण:** मशीनीकृत और गहरी सफाई, निर्माण एवं विध्वंस अपशिष्ट प्रबंधन नियम।
* **अपशिष्ट प्रबंधन:** ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, अपशिष्ट से ऊर्जा संयंत्र।
* **पराली प्रबंधन:** वैकल्पिक फसलें, इन-सीटू और एक्स-सीटू प्रबंधन।
* **अंतर-राज्यीय समन्वय:** विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों और कृषि विभागों के साथ बैठकें।
4. **उपायों की प्रभावशीलता और चुनौतियाँ:**
* कुछ क्षेत्रों में सुधार, लेकिन समग्र स्थिति में निरंतरता का अभाव।
* कार्यान्वयन में अंतराल और निगरानी की चुनौतियाँ।
* जन जागरूकता और भागीदारी की कमी।
* मौसम संबंधी कारक और शहरीकरण का दबाव।
5. **निष्कर्ष:** दीर्घकालिक समाधान के लिए सतत समन्वय, प्रौद्योगिकी का उपयोग और जनभागीदारी के साथ कठोर कार्यान्वयन की आवश्यकता पर बल।

स्रोत: The Indian Express


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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