11 Aug यूपीएससी के लिए महत्वपूर्ण: क्षरित वन भूमि पुनर्स्थापन में ग्रीन इंडिया मिशन की भूमिका
✎ ग्रीन इंडिया मिशन और नगर वन योजना भारत में वन आवरण बढ़ाने, क्षरित भूमि का पुनर्स्थापन करने और शहरी हरियाली में सुधार लाने के लिए महत्वपूर्ण सरकारी पहलें हैं, जो जलवायु परिवर्तन से निपटने और पर्यावरणीय स्थिरता प्राप्त करने में…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जैव-विविधता | GS Paper II — सरकारी नीतियाँ और हस्तक्षेप
- Prelims: ग्रीन इंडिया मिशन (GIM), जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्य योजना (NAPCC), नगर वन योजना (NVY), संयुक्त वन प्रबंधन समितियां (JFMC), भारतीय वन सर्वेक्षण (FSI), इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट (ISFR)
- Essay: पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास, जलवायु परिवर्तन: चुनौतियाँ और समाधान
त्वरित पुनरावृत्ति: ग्रीन इंडिया मिशन और नगर वन योजना भारत में वन आवरण बढ़ाने, क्षरित भूमि का पुनर्स्थापन करने और शहरी हरियाली में सुधार लाने के लिए महत्वपूर्ण सरकारी पहलें हैं, जो जलवायु परिवर्तन से निपटने और पर्यावरणीय स्थिरता प्राप्त करने में सहायक हैं।
यह खबर चर्चा में क्यों?
हाल ही में, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में क्षरित वन भूमि के पुनर्स्थापन और शहरी क्षेत्रों में हरियाली बढ़ाने के लिए चलाए जा रहे ‘ग्रीन इंडिया मिशन’ और ‘नगर वन योजना’ के कार्यान्वयन पर विस्तृत जानकारी प्रदान की। यह जानकारी इन योजनाओं के उद्देश्यों, प्रगति और निगरानी तंत्र पर प्रकाश डालती है।
पृष्ठभूमि
- भारत में वन क्षेत्र का संरक्षण और विस्तार पर्यावरणीय स्थिरता तथा जैव-विविधता के लिए महत्वपूर्ण है। वन कार्बन सिंक के रूप में कार्य करते हैं और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में मदद करते हैं।
- क्षरित वन भूमि का पुनर्स्थापन न केवल पारिस्थितिकीय संतुलन के लिए आवश्यक है, बल्कि स्थानीय समुदायों की आजीविका और जल सुरक्षा में भी सहायक होता है।
- शहरी क्षेत्रों में बढ़ती जनसंख्या और औद्योगीकरण के कारण हरियाली में कमी आई है, जिससे वायु गुणवत्ता और स्थानीय मौसम पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। ‘नगर वन योजना’ इसी समस्या का समाधान करने का प्रयास करती है।
- भारत सरकार विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों के माध्यम से वन आवरण बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है, जिसमें राज्यों और स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाती है।
- भारतीय वन सर्वेक्षण (FSI) द्वारा हर दो साल में जारी की जाने वाली इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट (ISFR) देश में वन और वृक्ष आवरण की स्थिति का आकलन करती है, जो इन प्रयासों की प्रभावशीलता का मूल्यांकन करने में महत्वपूर्ण है।
ग्रीन इंडिया मिशन (GIM) और नगर वन योजना (NVY) क्या हैं?
- ग्रीन इंडिया मिशन (GIM) जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्य योजना (NAPCC) के तहत नौ मिशनों में से एक है, जिसे 2015-16 से कार्यान्वित किया जा रहा है।
- इसका मुख्य उद्देश्य एक एकीकृत भूदृश्य दृष्टिकोण (Integrated Landscape Approach) के माध्यम से क्षरित वन और गैर-वन वाले स्थलों की पुनर्स्थापना करना है।
- GIM के तहत, 2015-16 से 17 राज्यों और एक केंद्र-शासित प्रदेश में कुल 1,84,467 हेक्टेयर भूमि पर पारिस्थितिकीय पुनर्स्थापन का कार्य किया गया है।
- इस मिशन के तहत वृक्षारोपण और वृक्षों की देखभाल का कार्य संयुक्त वन प्रबंधन समितियों (JFMC), ग्राम वन समितियों (VFC) और अन्य समुदाय-आधारित संगठनों जैसी स्थानीय संस्थाओं के माध्यम से किया जाता है।
- नगर वन योजना (NVY) को 2020-21 से 2026-27 के दौरान शहरी क्षेत्रों में हरियाली बढ़ाने और पर्यावरणीय लाभ प्रदान करने के उद्देश्य से 600 नगर वनों और 400 नगर वाटिकाओं को विकसित करने के लिए कार्यान्वित किया जा रहा है।
- NVY का लक्ष्य शहरी हरियाली में उल्लेखनीय वृद्धि करना और ऐसी पर्यावरणीय परिसंपत्तियाँ बनाना है जो वायु गुणवत्ता तथा स्थानीय मौसम (Micro-climate) में सुधार कर सकें।
- GIM और NVY दोनों के तहत वृक्षारोपण कार्यों की निगरानी के लिए केंद्र और राज्य दोनों स्तरों पर बहु-स्तरीय व्यवस्था अपनाई जाती है, जिसमें जियो-टैगिंग, GIS-आधारित मैपिंग और GIM के लिए ड्रोन-आधारित निगरानी जैसी तकनीकें शामिल हैं।
- भारतीय वन सर्वेक्षण (FSI) प्रत्येक दो वर्ष में रिमोट सेंसिंग और जमीनी स्तर पर जांच का उपयोग करके वन क्षेत्र का आकलन करता है, जिसके निष्कर्ष इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट (ISFR) में प्रकाशित होते हैं।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| एकीकृत भूदृश्य दृष्टिकोण | वन और गैर-वन दोनों प्रकार की क्षरित भूमि का पुनर्स्थापन सुनिश्चित करता है। |
| समुदाय आधारित कार्यान्वयन | स्थानीय समुदायों, जैसे जेएफएमसी और स्वयं-सहायता समूहों को शामिल कर सहभागिता और आजीविका के अवसर बढ़ाता है। |
| बहु-स्तरीय निगरानी प्रणाली | जियो-टैगिंग, जीआईएस मैपिंग और ड्रोन जैसी तकनीकों का उपयोग कर पारदर्शिता और प्रभावशीलता सुनिश्चित करता है। |
| जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्य योजना का हिस्सा | भारत की जलवायु परिवर्तन शमन रणनीतियों के साथ संरेखित है। |
| शहरी हरियाली पर ध्यान | नगर वन योजना के माध्यम से शहरी क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता और सूक्ष्म-जलवायु में सुधार का लक्ष्य रखता है। |
महत्व
पर्यावरणीय महत्व
- क्षरित वन भूमि का पुनर्स्थापन जैव विविधता (Biodiversity) के संरक्षण और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में सहायक है।
- वृक्षारोपण से कार्बन पृथक्करण (Carbon Sequestration) में वृद्धि होती है, जो जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में महत्वपूर्ण है।
- शहरी क्षेत्रों में हरियाली बढ़ने से वायु गुणवत्ता में सुधार होता है और शहरी ताप द्वीप (Urban Heat Island) प्रभाव कम होता है।
सामाजिक महत्व
- स्थानीय समुदायों, विशेषकर संयुक्त वन प्रबंधन समितियों (Joint Forest Management Committees – JFMC) और स्वयं-सहायता समूहों (Self-Help Groups – SHG) को शामिल करने से आजीविका के अवसर पैदा होते हैं।
- वन आधारित समुदायों की निर्भरता को कम करने और उन्हें वैकल्पिक आय के स्रोत प्रदान करने में मदद करता है।
- समुदाय की भागीदारी से वनों के संरक्षण और प्रबंधन में स्वामित्व की भावना बढ़ती है।
आर्थिक महत्व
- वन उत्पादों और पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं (Ecosystem Services) में वृद्धि से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है।
- पर्यटन और संबंधित गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है, जिससे स्थानीय रोजगार सृजित होते हैं।
- स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र कृषि उत्पादकता और जल सुरक्षा में सुधार के लिए महत्वपूर्ण हैं।
चुनौतियाँ
1. भूमि उपलब्धता और अतिक्रमण
- वृक्षारोपण के लिए उपयुक्त भूमि की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती है, खासकर बढ़ती जनसंख्या और शहरीकरण के कारण।
- वन भूमि पर अतिक्रमण और अवैध गतिविधियों से पुनर्स्थापन प्रयासों में बाधा आती है।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण संरक्षण, भूमि सुधार
2. निगरानी और मूल्यांकन की प्रभावशीलता
- तकनीकी निगरानी प्रणालियों के बावजूद, जमीनी स्तर पर पौधों के जीवित रहने की दर और वास्तविक प्रभाव का सटीक मूल्यांकन चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
- तीसरे पक्ष (Third Party) की निगरानी की गुणवत्ता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है।
यूपीएससी लिंक: शासन, जवाबदेही
3. जलवायु परिवर्तन के प्रभाव
- बदलते मौसम पैटर्न, सूखे और बाढ़ जैसी चरम मौसमी घटनाओं से नए लगाए गए पौधों के जीवित रहने की दर प्रभावित हो सकती है।
- जलवायु-लचीली प्रजातियों का चयन और अनुकूलन रणनीतियाँ आवश्यक हैं।
यूपीएससी लिंक: जलवायु परिवर्तन, आपदा प्रबंधन
4. वित्तपोषण और संसाधनों का आवंटन
- मिशन के व्यापक लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए पर्याप्त और समय पर वित्तपोषण सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है।
- राज्यों के बीच संसाधनों का समान और प्रभावी आवंटन एक चुनौती हो सकता है।
यूपीएससी लिंक: राजकोषीय नीति, पर्यावरण शासन
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| दीर्घकालिक रखरखाव | वृक्षारोपण के बाद पौधों की निरंतर देखभाल और सुरक्षा सुनिश्चित करना। |
| प्रजाति चयन | स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र के अनुकूल और जलवायु परिवर्तन के प्रति प्रतिरोधी प्रजातियों का चुनाव। |
| अंतर-विभागीय समन्वय | वन, कृषि, ग्रामीण विकास और शहरी विकास जैसे विभिन्न विभागों के बीच प्रभावी समन्वय की कमी। |
| समुदाय की निरंतर भागीदारी | परियोजना की पूरी अवधि के दौरान स्थानीय समुदायों की सक्रिय और सार्थक भागीदारी बनाए रखना। |
| डेटा की सटीकता | जियो-टैगिंग और रिमोट सेंसिंग डेटा की सटीकता और उसकी जमीनी हकीकत से मेल खाने की चुनौती। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- ग्रीन इंडिया मिशन (Green India Mission – GIM)
- नगर वन योजना (Nagar Van Yojana – NVY)
आगे की राह
- क्षरित भूमि की पहचान और पुनर्स्थापन के लिए वैज्ञानिक और तकनीकी दृष्टिकोण को और मजबूत करना।
- स्थानीय समुदायों की भागीदारी को और गहरा करना और उन्हें स्थायी आजीविका के अवसरों से जोड़ना।
- जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का सामना करने के लिए जलवायु-लचीली प्रजातियों और अनुकूलन रणनीतियों को अपनाना।
- मिशन के तहत वित्तपोषण और संसाधनों के आवंटन में पारदर्शिता और दक्षता सुनिश्चित करना।
- तकनीकी निगरानी प्रणालियों को जमीनी स्तर की सत्यापन प्रक्रियाओं के साथ एकीकृत कर प्रभावशीलता बढ़ाना।
- शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में जन जागरूकता और शिक्षा कार्यक्रमों को बढ़ावा देना।
- विभिन्न सरकारी विभागों और गैर-सरकारी संगठनों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
ग्रीन इंडिया मिशन · जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्य योजना · क्षरित वन भूमि · पारिस्थितिकीय पुनर्स्थापन · नगर वन योजना · सामुदायिक भागीदारी · रिमोट सेंसिंग · भारतीय वन सर्वेक्षण · इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट · वन आवरण
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 48क’, ‘note’: ‘पर्यावरण का संरक्षण और संवर्धन’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 51क (छ)’, ‘note’: ‘प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा और सुधार’}
अवधारणा प्रवाह
जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण क्षरण की चुनौती → सरकार द्वारा राष्ट्रीय कार्य योजना (एनएपीसीसी) का निर्माण → ग्रीन इंडिया मिशन (जीआईएम) का कार्यान्वयन → क्षरित वन/गैर-वन भूमि का पारिस्थितिकीय पुनर्स्थापन → पर्यावरणीय लाभ (कार्बन पृथक्करण, जैव विविधता) और सामाजिक-आर्थिक लाभ
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ग्रीन इंडिया मिशन (GIM) जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्य योजना (NAPCC) के तहत नौ मिशनों में से एक है।
2. GIM का मुख्य उद्देश्य केवल वन क्षेत्रों में वृक्षारोपण के माध्यम से क्षरित भूमि का पुनर्स्थापन करना है।
3. नगर वन योजना (NVY) का उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में हरियाली बढ़ाना है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है। ग्रीन इंडिया मिशन NAPCC के नौ मिशनों में से एक है। कथन 2 गलत है क्योंकि GIM का उद्देश्य क्षरित वन और गैर-वन दोनों स्थलों की पुनर्स्थापना करना है। कथन 3 सही है। नगर वन योजना शहरी क्षेत्रों में हरियाली बढ़ाने पर केंद्रित है।
Q2. ग्रीन इंडिया मिशन (GIM) के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है?
- यह 2015-16 से कार्यान्वित किया जा रहा है।
- इसका उद्देश्य एकीकृत भूदृश्य दृष्टिकोण के माध्यम से क्षरित वन और गैर-वन स्थलों की पुनर्स्थापना करना है।
- वृक्षारोपण कार्यों की निगरानी केवल केंद्र सरकार की प्रणालियों द्वारा की जाती है।
- इसमें संयुक्त वन प्रबंधन समितियों (JFMCs) और स्वयं-सहायता समूहों (SHGs) जैसी स्थानीय संस्थाओं को शामिल किया जाता है।
उत्तर: वृक्षारोपण कार्यों की निगरानी केवल केंद्र सरकार की प्रणालियों द्वारा की जाती है। — GIM के तहत वृक्षारोपण कार्यों की निगरानी के लिए केंद्र और राज्य दोनों की प्रणालियों सहित कई स्तरों वाली व्यवस्था अपनाई जाती है, जिसमें जियो-टैगिंग और रिमोट सेंसिंग जैसी तकनीकें भी शामिल हैं। अतः, यह कहना कि निगरानी केवल केंद्र सरकार द्वारा की जाती है, सही नहीं है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ ग्रीन इंडिया मिशन (GIM) के उद्देश्यों और कार्यान्वयन रणनीति पर चर्चा कीजिए। भारत में वन आवरण बढ़ाने तथा जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में यह मिशन किस प्रकार सहायक है? (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: ग्रीन इंडिया मिशन (GIM) का संक्षिप्त परिचय, जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्य योजना (NAPCC) के तहत इसकी स्थिति और इसके कार्यान्वयन की शुरुआत (2015-16)।
2. उद्देश्य: GIM के मुख्य उद्देश्यों का विस्तृत वर्णन – क्षरित वन और गैर-वन स्थलों का एकीकृत भूदृश्य दृष्टिकोण के माध्यम से पुनर्स्थापन, वन आवरण में वृद्धि, पारिस्थितिकीय सेवाओं में सुधार, और स्थानीय समुदायों की आजीविका में वृद्धि।
3. कार्यान्वयन रणनीति: GIM के कार्यान्वयन के प्रमुख पहलुओं को रेखांकित करें –
क. भौगोलिक विस्तार (राज्यों/केंद्र-शासित प्रदेशों की संख्या और हेक्टेयर में पुनर्स्थापित भूमि का उल्लेख)।
ख. सामुदायिक भागीदारी (संयुक्त वन प्रबंधन समितियां, ग्राम वन समितियां, स्वयं-सहायता समूह आदि की भूमिका)।
ग. निगरानी प्रणाली (बहु-स्तरीय व्यवस्था, जियो-टैगिंग, जीआईएस-आधारित मैपिंग, भारतीय वन सर्वेक्षण (FSI) द्वारा रिमोट सेंसिंग और इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट (ISFR) का उल्लेख)।
घ. वित्तपोषण तंत्र (राष्ट्रीय प्राधिकरण CAMPA से फंड जारी करना)।
ङ. संबंधित योजनाएँ (नगर वन योजना का उल्लेख, शहरी हरियाली पर इसका ध्यान)।
4. सहायक भूमिका: भारत में वन आवरण बढ़ाने और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में GIM की भूमिका का विश्लेषण करें –
क. कार्बन पृथक्करण (Carbon Sequestration) में वृद्धि।
ख. जैव विविधता संरक्षण।
ग. स्थानीय जलवायु (Micro-climate) में सुधार।
घ. जल संसाधनों का संरक्षण।
ङ. ग्रामीण आजीविका को सशक्त बनाना।
5. निष्कर्ष: GIM की समग्र सफलता और भविष्य की चुनौतियों पर संक्षिप्त टिप्पणी, सतत् विकास लक्ष्यों के साथ इसका संबंध।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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