26 Jul यूपीएससी तैयारी: केंद्र ने फास्ट ट्रैक कोर्ट योजना को सितंबर 2026 तक बढ़ाया, जानिए पूरी जानकारी
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — भारतीय संविधान, शासन प्रणाली, सामाजिक न्याय | GS Paper III — आंतरिक सुरक्षा (महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध अपराध)
- Prelims: फास्ट ट्रैक विशेष अदालतें (FTSC), पॉक्सो अधिनियम, 2012, केंद्र प्रायोजित योजना, अनुच्छेद 233, 234, 309, न्यायिक अधिकारियों की भर्ती, अदालती बुनियादी ढांचा
- Essay: भारत में त्वरित न्याय की चुनौतियाँ और समाधान, महिलाओं और बच्चों के अधिकारों का संरक्षण: विधायी और न्यायिक पहलें
त्वरित पुनरावृत्ति: फास्ट ट्रैक विशेष अदालतें (FTSC) बलात्कार और पॉक्सो अधिनियम के तहत अपराधों के त्वरित निपटारे के लिए एक केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसका उद्देश्य संवेदनशील मामलों में पीड़ितों को समय पर न्याय दिलाना है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
केंद्र सरकार ने बलात्कार और बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम, 2012 (POCSO Act, 2012) के तहत अपराधों से जुड़े लंबित मामलों की तेजी से सुनवाई और निपटारे के लिए शुरू की गई फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (FTSC) योजना को सितंबर 2026 तक बढ़ा दिया है। वर्तमान में, 29 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में 775 FTSC कार्यरत हैं, जिनमें 398 विशेष पॉक्सो अदालतें शामिल हैं। इस विस्तार का उद्देश्य इन संवेदनशील मामलों में त्वरित और प्रभावी न्याय सुनिश्चित करना है।
पृष्ठभूमि
- अक्टूबर 2019 में बलात्कार और पॉक्सो अधिनियम के तहत अपराधों के त्वरित निपटारे के लिए फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (FTSC) योजना शुरू की गई थी।
- इस योजना में विशेष पॉक्सो (ePOCSO) अदालतें भी शामिल हैं, जो विशेष रूप से बच्चों के यौन अपराधों से संबंधित मामलों को देखती हैं।
- योजना को पहले दो बार बढ़ाया जा चुका है और अब इसे 30 सितंबर, 2026 तक के लिए अस्थायी रूप से विस्तारित किया गया है।
- FTSC योजना एक केंद्र प्रायोजित योजना (Centrally Sponsored Scheme) है, जिसमें केंद्र और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के बीच 60:40 या 90:10 के अनुपात में फंड साझा किया जाता है।
- इस योजना के तहत, प्रत्येक FTSC के लिए एक न्यायिक अधिकारी और सात सहायक कर्मचारियों के वेतन तथा रोजमर्रा के खर्चों के लिए ‘फ्लेक्सी ग्रांट’ प्रदान किया जाता है।
- न्यायपालिका के लिए बुनियादी ढांचे के विकास हेतु केंद्र सरकार 1993-94 से एक अलग केंद्र प्रायोजित योजना भी चला रही है।
फास्ट ट्रैक विशेष अदालतें (FTSC) क्या हैं?
- फास्ट ट्रैक विशेष अदालतें (FTSC) विशेष रूप से बलात्कार और पॉक्सो अधिनियम, 2012 के तहत यौन अपराधों से संबंधित मामलों की त्वरित सुनवाई और निपटारे के लिए स्थापित की गई हैं।
- इन अदालतों का मुख्य उद्देश्य संवेदनशील मामलों में पीड़ितों को समय पर न्याय सुनिश्चित करना और न्यायिक प्रक्रिया में लगने वाले समय को कम करना है।
- योजना के तहत, विशेष पॉक्सो (ePOCSO) अदालतें भी स्थापित की गई हैं, जो विशेष रूप से बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों पर केंद्रित हैं।
- FTSC योजना केंद्र प्रायोजित है, जिसका अर्थ है कि इसके कार्यान्वयन की लागत केंद्र और राज्य/केंद्र शासित प्रदेश सरकारों द्वारा साझा की जाती है।
- इन अदालतों को न्यायिक अधिकारियों और सहायक कर्मचारियों के वेतन के साथ-साथ परिचालन खर्चों के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
- न्यायिक अधिकारियों की भर्ती और नियुक्ति राज्य/केंद्र शासित प्रदेश की सरकारों और संबंधित उच्च न्यायालयों की जिम्मेदारी है, जो संविधान के अनुच्छेद 233, 234 और 309 के तहत नियमों का पालन करते हैं।
- FTSC के कामकाज की नियमित समीक्षा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और अंतर-राज्यीय क्षेत्रीय परिषद की बैठकों के माध्यम से की जाती है ताकि दक्षता सुनिश्चित की जा सके।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (FTSC) योजना | बलात्कार और पॉक्सो (POCSO) अधिनियम के तहत लंबित मामलों के त्वरित निपटान हेतु स्थापित केंद्र प्रायोजित योजना। |
| योजना का विस्तार | अक्टूबर 2019 में शुरू हुई योजना को सितंबर 2026 तक बढ़ाया गया, जो न्याय तक पहुंच सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता दर्शाता है। |
| वर्तमान स्थिति | 29 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में 775 FTSC (जिनमें 398 विशेष पॉक्सो अदालतें शामिल हैं) कार्यरत हैं। |
| वित्तपोषण पैटर्न | केंद्र प्रायोजित योजना के तहत केंद्र और राज्य के बीच 60:40 (सामान्य राज्यों के लिए) या 90:10 (विशेष राज्यों के लिए) के अनुपात में फंड जारी किया जाता है। |
| न्यायिक अवसंरचना विकास | केंद्र सरकार जिला और अधीनस्थ अदालतों के लिए अवसंरचना सुविधाओं के विकास हेतु 1993-94 से केंद्र प्रायोजित योजना चला रही है। |
महत्व
सामाजिक महत्व
- यौन अपराधों के पीड़ितों, विशेषकर बच्चों को त्वरित न्याय सुनिश्चित करता है, जिससे समाज में विश्वास और सुरक्षा की भावना बढ़ती है।
- लंबित मामलों को कम करके न्यायपालिका पर बोझ कम करता है और न्याय प्रणाली की दक्षता बढ़ाता है।
शासनिक महत्व
- केंद्र और राज्यों के बीच सहयोग को बढ़ावा देता है, जो संघीय ढांचे में न्याय वितरण को मजबूत करता है।
- कानून के शासन को बनाए रखने और नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा में सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
न्यायिक महत्व
- विशेष अदालतों के माध्यम से विशिष्ट प्रकार के अपराधों पर ध्यान केंद्रित करने से विशेषज्ञता और संवेदनशीलता बढ़ती है।
- मामलों के शीघ्र निपटान से गवाहों और पीड़ितों पर पड़ने वाले मानसिक दबाव को कम करने में मदद मिलती है।
चुनौतियाँ
1. न्यायिक रिक्तियां
- FTSC सहित जिला और अधीनस्थ अदालतों में न्यायिक अधिकारियों और सहायक कर्मचारियों के पद रिक्त पड़े हैं।
- रिक्तियों के कारण मामलों के निपटान में देरी होती है और अदालतों पर काम का बोझ बढ़ता है।
यूपीएससी लिंक: शासन, न्यायिक सुधार
2. बुनियादी ढांचा
- अदालत कक्ष, आवासीय इकाइयों और डिजिटल कंप्यूटर कक्षों जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी या अपर्याप्तता FTSC के सुचारू संचालन में बाधा डालती है।
- आधुनिक तकनीक और सुविधाओं की कमी से न्याय प्रक्रिया की गति प्रभावित होती है।
यूपीएससी लिंक: शासन, अवसंरचना
3. फंड का उपयोग
- राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा जारी किए गए फंड का समय पर और प्रभावी ढंग से उपयोग न करना एक चुनौती है।
- खर्च का ब्यौरा समय पर न मिलने से केंद्र द्वारा फंड की प्रतिपूर्ति में देरी होती है।
यूपीएससी लिंक: संघवाद, वित्तीय प्रशासन
4. जागरूकता और संवेदनशीलता
- यौन अपराधों से संबंधित मामलों में पुलिस, अभियोजन पक्ष और न्यायिक अधिकारियों के बीच संवेदनशीलता और विशेष प्रशिक्षण की कमी।
- पीड़ितों और गवाहों के लिए अनुकूल वातावरण बनाने में चुनौतियाँ।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय, मानवाधिकार
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| लंबित मामलों की संख्या | वर्ष 2025 तक लंबित मामलों की संख्या 2.45 लाख से अधिक हो गई है, जो त्वरित न्याय के लक्ष्य को चुनौती देती है। |
| न्यायिक अधिकारियों की कमी | FTSC में न्यायाधीशों और सहायक कर्मचारियों के रिक्त पद मामलों के त्वरित निपटान में बाधा डालते हैं। |
| राज्यों द्वारा फंड का उपयोग | राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा जारी केंद्रीय फंड का प्रभावी और समय पर उपयोग सुनिश्चित करना। |
| बुनियादी ढांचागत अंतराल | अदालतों के लिए पर्याप्त कोर्ट हॉल, आवासीय इकाइयां और डिजिटल सुविधाएं उपलब्ध कराना। |
| अंतर-राज्यीय समन्वय | विभिन्न राज्यों और उच्च न्यायालयों के बीच FTSC के कामकाज में एकरूपता और बेहतर समन्वय स्थापित करना। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (FTSC) योजना
- न्यायपालिका के लिए अवसंरचना सुविधाओं के विकास की केंद्र प्रायोजित योजना
आगे की राह
- न्यायिक अधिकारियों और सहायक कर्मचारियों की रिक्तियों को भरने के लिए त्वरित और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया अपनाई जाए।
- FTSC के लिए आधुनिक बुनियादी ढांचे, जैसे डिजिटल कोर्ट रूम और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधाओं का विस्तार किया जाए।
- राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को जारी फंड के प्रभावी और समय पर उपयोग के लिए मजबूत निगरानी तंत्र स्थापित किया जाए।
- पुलिस, अभियोजन पक्ष और न्यायिक अधिकारियों के लिए यौन अपराधों से संबंधित मामलों में विशेष प्रशिक्षण और संवेदनशीलता कार्यक्रम आयोजित किए जाएं।
- पीड़ितों और गवाहों के लिए अनुकूल वातावरण बनाने हेतु विशेष सहायता सेवाओं और सुरक्षा उपायों को मजबूत किया जाए।
- अंतर-राज्यीय क्षेत्रीय परिषदों की बैठकों में FTSC के प्रदर्शन की नियमित समीक्षा और सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा किया जाए।
- पॉक्सो अधिनियम और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 के तहत निर्धारित समय-सीमा का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
फास्ट ट्रैक विशेष अदालतें · पॉक्सो अधिनियम · केंद्र प्रायोजित योजना · न्यायिक सुधार · न्याय तक पहुंच · लंबित मामले · महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा · न्यायिक अवसंरचना · अनुच्छेद 309 · अनुच्छेद 233 और 234
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 309: राज्य सेवाओं की भर्ती और सेवा शर्तें।
- अनुच्छेद 233: जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति।
- अनुच्छेद 234: न्यायिक सेवा में व्यक्तियों की नियुक्ति।
अवधारणा प्रवाह
यौन अपराधों में वृद्धि → मामलों का लंबित होना → FTSC योजना का शुभारंभ → त्वरित सुनवाई और निपटान → पीड़ितों को न्याय की प्राप्ति
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. फास्ट ट्रैक विशेष अदालतों (FTSCs) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. FTSC योजना अक्टूबर 2019 में बलात्कार और पॉक्सो अधिनियम के तहत अपराधों से संबंधित मामलों के त्वरित निपटान के लिए शुरू की गई थी।
2. यह एक केंद्र प्रायोजित योजना है जिसमें केंद्र और राज्यों के बीच 60:40 का फंड-शेयरिंग पैटर्न होता है, जो कुछ विशेष राज्यों के लिए 90:10 भी हो सकता है।
3. FTSCs में न्यायिक अधिकारियों की भर्ती और नियुक्ति पूरी तरह से केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है।
उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- केवल 1
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 2
- 1, 2 और 3
उत्तर: केवल 1 और 2 — कथन 1 और 2 सही हैं। FTSC योजना अक्टूबर 2019 में बलात्कार और पॉक्सो अधिनियम के तहत अपराधों के त्वरित निपटान के लिए शुरू की गई थी। यह एक केंद्र प्रायोजित योजना है जिसमें केंद्र और राज्यों के बीच 60:40 का फंड-शेयरिंग पैटर्न होता है, जो कुछ विशेष राज्यों के लिए 90:10 भी हो सकता है। कथन 3 गलत है क्योंकि न्यायिक अधिकारियों की भर्ती और नियुक्ति राज्य/केंद्र शासित प्रदेश सरकारों और संबंधित उच्च न्यायालयों की जिम्मेदारी है, संविधान के अनुच्छेद 233 और 234 के तहत।
Q2. भारत में जिला और अधीनस्थ अदालतों के लिए बुनियादी ढांचा सुविधाओं के विकास से संबंधित केंद्र प्रायोजित योजना के तहत निम्नलिखित में से कौन-सी मदें शामिल हैं?
1. अदालत कक्ष
2. आवासीय इकाइयां
3. अधिवक्ताओं के कक्ष
4. डिजिटल कंप्यूटर रूम
5. न्यायिक अधिकारियों का वेतन
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनें:
- केवल 1, 2 और 3
- केवल 1, 3, 4 और 5
- केवल 1, 2, 3 और 4
- 1, 2, 3, 4 और 5
उत्तर: केवल 1, 2, 3 और 4 — जिला और अधीनस्थ अदालतों के लिए बुनियादी ढांचा सुविधाओं के विकास की केंद्र प्रायोजित योजना में अदालत कक्ष, आवासीय इकाइयां, अधिवक्ताओं के कक्ष, शौचालय परिसर और डिजिटल कंप्यूटर रूम शामिल हैं। न्यायिक अधिकारियों का वेतन इस योजना के तहत बुनियादी ढांचा विकास का हिस्सा नहीं है, बल्कि FTSC योजना के तहत ‘फ्लेक्सी ग्रांट’ का हिस्सा है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ फास्ट ट्रैक विशेष अदालतों (FTSCs) की स्थापना और संचालन भारत में आपराधिक न्याय प्रणाली में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। बलात्कार और पॉक्सो अधिनियम से संबंधित मामलों के त्वरित निपटान में FTSCs की भूमिका का आलोचनात्मक मूल्यांकन करें। साथ ही, इन अदालतों के प्रभावी कामकाज में आने वाली चुनौतियों और उन्हें दूर करने के लिए आवश्यक उपायों पर भी चर्चा करें। (250 शब्द)
रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में, FTSCs की स्थापना के उद्देश्य और बलात्कार तथा पॉक्सो मामलों के त्वरित निपटान में उनकी सफलता का मूल्यांकन करें। लंबित मामलों की संख्या और निपटान दर जैसे आंकड़ों का उल्लेख करें। दूसरे भाग में, FTSCs के सामने आने वाली चुनौतियों पर प्रकाश डालें, जैसे कि न्यायाधीशों और कर्मचारियों की कमी, बुनियादी ढांचे का अभाव, धन का उपयोग और राज्यों के बीच समन्वय की कमी। अंत में, इन चुनौतियों का समाधान करने और FTSCs की प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए ठोस सुझाव दें, जिसमें नियमित समीक्षा, न्यायिक नियुक्तियों में तेजी और बेहतर वित्तीय प्रबंधन शामिल हों।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

No Comments