रक्षा सचिव ने सेना भवन में ‘ज्ञानदीप’ हिंदी पुस्तकालय का उद्घाटन किया

रक्षा सचिव ने सेना भवन में 'ज्ञानदीप' हिंदी पुस्तकालय का उद्घाटन किया

रक्षा सचिव ने सेना भवन में ‘ज्ञानदीप’ हिंदी पुस्तकालय का उद्घाटन किया

विशेष अभियान 6 प्रक्रियाअभियान अवधि02-31 अक्टूबर 2026स्थान खाली35,000 वर्ग फुटहिंदी पुस्तकालयज्ञानदीप उद्घाटनफाइलें बंद1,361 ई-फाइलेंफाइलें हटाई1,746 फाइलेंराजस्व प्राप्त4.22 लाख रुपये
विशेष अभियान 6 प्रक्रिया

✎ अनुच्छेद 343 संघ की राजभाषा को देवनागरी लिपि में हिंदी घोषित करता है, जबकि राजभाषा अधिनियम, 1963 और राजभाषा नियम, 1976 उसके व्यावहारिक प्रयोग का ढाँचा तय करते हैं।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — शासन व्यवस्था (राजभाषा नीति, संवैधानिक प्रावधान, ई-गवर्नेंस और लोक प्रशासन में सुधार)  |  GS Paper III — पर्यावरण (ई-कचरा प्रबंधन और विस्तारित उत्पादक दायित्व)
  • Prelims: अनुच्छेद 343 (संघ की राजभाषा), अनुच्छेद 344 (राजभाषा आयोग), अनुच्छेद 351 (हिंदी के विकास का निर्देश), राजभाषा अधिनियम, 1963 (Official Languages Act, 1963), राजभाषा नियम, 1976 (क्षेत्र A, B और C का वर्गीकरण), गृह मंत्रालय का राजभाषा विभाग (Department of Official Language), ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, 2022 (E-Waste (Management) Rules, 2022), ई-ऑफिस (e-Office) प्रणाली
  • Essay: भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, प्रशासनिक दक्षता और सांस्कृतिक आत्मविश्वास का साधन भी है, सुशासन में अभिलेख प्रबंधन: पुराने कागज़ से डिजिटल फाइल तक की यात्रा

त्वरित पुनरावृत्ति: अनुच्छेद 343 संघ की राजभाषा को देवनागरी लिपि में हिंदी घोषित करता है, जबकि राजभाषा अधिनियम, 1963 और राजभाषा नियम, 1976 उसके व्यावहारिक प्रयोग का ढाँचा तय करते हैं।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

रक्षा मंत्रालय 02 से 31 अक्टूबर, 2026 तक विशेष अभियान 6 चला रहा है। इसी अभियान के अंतर्गत रक्षा सचिव ने नई दिल्ली स्थित सेना भवन में हिंदी पुस्तकालय ‘ज्ञानदीप’ का उद्घाटन किया। इस पहल का उद्देश्य हिंदी पुस्तकों और साहित्य को बढ़ावा देना, आधिकारिक कामकाज में हिंदी के प्रयोग को प्रोत्साहित करना और राजभाषा के कार्यान्वयन में उत्कृष्टता प्राप्त करना है। अभियान में पुराने अभिलेखों की सफाई और निपटान से साउथ ब्लॉक में लगभग 35,000 वर्ग फुट जगह खाली कराई गई, जिसे प्रोजेक्ट युग युगीन भारत संग्रहालय (वाईवाईबीएम) को सौंपा गया। 1,361 ई-फाइलें बंद की गईं, 1,746 फाइलें हटाई गईं और ई-कचरे व अप्रचलित वस्तुओं के निपटान से 4.22 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। यह खबर सरकारी कार्यालयों में राजभाषा के व्यावहारिक प्रयोग और अभिलेख प्रबंधन के संयुक्त प्रयास को दर्शाती है।

पृष्ठभूमि

  • संविधान के भाग XVII में संघ की राजभाषा और राजकीय कामकाज से जुड़े प्रावधान हैं। अनुच्छेद 343 के अनुसार संघ की राजभाषा देवनागरी लिपि में हिंदी है, परंतु अंग्रेज़ी का प्रयोग संविधान लागू होने के समय से 15 वर्षों तक जारी रखने की व्यवस्था की गई थी।
  • राजभाषा अधिनियम, 1963 ने अंग्रेज़ी के प्रयोग को कुछ प्रयोजनों के लिए बनाए रखने का प्रावधान किया और कुछ दस्तावेज़ों को द्विभाषी रूप में जारी करने की अनिवार्यता रखी।
  • राजभाषा नियम, 1976 के अंतर्गत देश को तीन क्षेत्रों में बाँटा गया है: क्षेत्र A (हिंदी भाषी राज्य), क्षेत्र B (आंशिक हिंदी भाषी राज्य) और क्षेत्र C (शेष राज्य), जिनके आधार पर पत्राचार की भाषा तय होती है।
  • सरकारी कार्यालयों में फाइलों और अभिलेखों के लंबे समय तक जमा रहने की समस्या को सुलझाने के लिए समय-समय पर विशेष अभियान चलाए जाते हैं, जिनमें स्वच्छता, अभिलेखों का निपटान और हिंदी में कामकाज को एक साथ जोड़ा जाता है।
  • ई-कचरे के प्रबंधन के लिए ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, 2022 लागू हैं, जिनमें उत्पादकों, उपभोक्ताओं और अधिकृत पुनर्चक्रणकर्ताओं की ज़िम्मेदारी तय की गई है। सरकारी कार्यालयों में इन नियमों का पालन निपटान की प्रक्रिया का अनिवार्य हिस्सा है।

राजभाषा नीति क्या है?

  • राजभाषा नीति का मूल आधार संविधान के भाग XVII (अनुच्छेद 343 से 351) है। अनुच्छेद 351 संघ पर हिंदी के प्रसार और विकास का दायित्व डालता है, ताकि वह भारत की सामासिक संस्कृति के सभी तत्वों की अभिव्यक्ति का माध्यम बन सके।
  • अनुच्छेद 344 के अंतर्गत राष्ट्रपति द्वारा राजभाषा आयोग गठित किया जाता है, जो संघ के राजकीय प्रयोजनों के लिए हिंदी के प्रगामी प्रयोग के बारे में सिफारिश करता है। इसकी सिफारिशों की समीक्षा संसद की एक समिति करती है।
  • राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय के अधीन, राजभाषा नीति के कार्यान्वयन, निरीक्षण और प्रोत्साहन का कार्य करता है। विभिन्न मंत्रालयों में राजभाषा कार्यान्वयन समितियाँ इसी नीति के अनुसार काम करती हैं।
  • राजभाषा अधिनियम, 1963 और राजभाषा नियम, 1976 मिलकर सरकारी कामकाज में हिंदी के प्रयोग की व्यावहारिक रूपरेखा तय करते हैं। क्षेत्र-आधारित वर्गीकरण से पत्राचार की भाषा का निर्धारण होता है।
  • अभिलेख प्रबंधन में भौतिक फाइलों की सफाई, अप्रासंगिक रिकॉर्ड का निपटान और महत्वपूर्ण अभिलेखों का संरक्षण शामिल है। ई-ऑफिस जैसी प्रणालियाँ फाइलों के डिजिटल प्रबंधन और समयबद्ध निपटान में सहायक होती हैं।
  • ई-कचरे का पृथक्करण और अधिकृत निपटान पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से आवश्यक है। विस्तारित उत्पादक दायित्व (Extended Producer Responsibility) के सिद्धांत के अनुसार उत्पादक अपने उत्पाद के जीवन-चक्र के अंत तक उत्तरदायी रहते हैं।

मुख्य विशेषताएँ

Feature Significance
हिंदी पुस्तकालय ‘ज्ञानदीप’ सेना भवन, नई दिल्ली में नव स्थापित। इसका उद्देश्य हिंदी पुस्तकों और साहित्य को बढ़ावा देना तथा कार्यालयी कामकाज में हिंदी के उपयोग को प्रोत्साहित करना है।
विशेष अभियान 6 रक्षा मंत्रालय द्वारा 02 से 31 अक्टूबर, 2026 तक चलाया जा रहा समयबद्ध अभियान। इसमें स्थान की मुक्ति, अभिलेखों की सफाई और राजभाषा को बढ़ावा देने जैसे कार्य एक साथ शामिल हैं।
स्थान की मुक्ति पुराने अभिलेखों की सफाई और निपटान से साउथ ब्लॉक में लगभग 35,000 वर्ग फुट जगह खाली की गई। यह जगह प्रोजेक्ट युग युगीन भारत संग्रहालय (YYBM) को सौंपी गई है।
ई-फाइलों और भौतिक फाइलों का निपटान 1,361 ई-फाइलें बंद की गईं और 1,746 फाइलें हटाई गईं। इससे अभिलेख प्रबंधन में अनुशासन और कार्यालयी दक्षता बढ़ती है।
ई-कचरे का निपटान और राजस्व ई-कचरे और अन्य अप्रचलित वस्तुओं के निपटान से 4.22 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। यह गैर-कर राजस्व (Non-Tax Revenue) का एक उदाहरण है।
स्वच्छता वीरों का सम्मान इस अभियान में विशेष योगदान देने वाले आठ कर्मियों को सम्मानित किया गया। इससे सहभागिता और सतत कार्य-संस्कृति को प्रोत्साहन मिलता है।

महत्व

राजभाषा और प्रशासनिक कार्यान्वयन

  • संविधान के अनुच्छेद 343 के अनुसार संघ की राजभाषा हिंदी (देवनागरी लिपि में) है और अनुच्छेद 351 संघ पर हिंदी के प्रसार और विकास का दायित्व डालता है।
  • राजभाषा अधिनियम, 1963 के अंतर्गत सरकारी कामकाज में हिंदी और अंग्रेज़ी के प्रयोग की व्यवस्था है। हिंदी में कार्य करने की संस्कृति इसी व्यवस्था के व्यवहारिक कार्यान्वयन को मज़बूत करती है।
  • पुस्तकालय जैसी संस्थागत पहल से हिंदी में पढ़ने-लिखने और नीति-निर्णय की भाषा को दैनिक कार्य से जोड़ने का प्रयास होता है।

प्रशासनिक दक्षता और अभिलेख प्रबंधन

  • पुराने अभिलेखों और अप्रचलित फाइलों के निपटान से कार्यालयों में स्थान और संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव होता है।
  • ई-फाइलों को बंद करना ई-ऑफिस (e-Office) जैसी डिजिटल प्रणालियों में कार्य-प्रवाह को व्यवस्थित रखने का तरीका है।
  • नियमित सफाई और रखरखाव से कार्यालयों की कार्यकुशलता और नागरिक-सेवा की गुणवत्ता पर अप्रत्यक्ष सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

पर्यावरणीय महत्व

  • ई-कचरे का पृथक्करण और वैज्ञानिक निपटान ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, 2022 की भावना के अनुरूप है, जो पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत बनाए गए हैं।
  • अनुच्छेद 51A(छ) में प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा और सुधार करने का मौलिक कर्तव्य निहित है, जबकि अनुच्छेद 48A राज्य को पर्यावरण संरक्षण का निर्देश देता है।
  • सरकारी कार्यालय स्वयं ई-कचरे के उचित प्रबंधन का उदाहरण प्रस्तुत करें तो नागरिक व्यवहार पर भी प्रभाव पड़ता है।

सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व

  • खाली हुई जगह को संग्रहालय परियोजना को सौंपने से सरकारी भवनों के सांस्कृतिक और सार्वजनिक उपयोग का एक नया मार्ग खुलता है।
  • अभिलेखों के चयनात्मक निपटान में यह सावधानी आवश्यक है कि ऐतिहासिक महत्व के दस्तावेज़ सुरक्षित रहें।

वित्तीय पहलू

  • 4.22 लाख रुपये का राजस्व राशि की दृष्टि से सीमित है, परंतु यह दिखाता है कि अप्रचलित सामग्री के निपटान से राजस्व संग्रह संभव है।
  • इससे संसाधन प्रबंधन और सार्वजनिक संपत्ति के उचित निपटान की प्रक्रिया पर ध्यान जाता है।

चुनौतियाँ

1. तकनीकी और प्रशासनिक शब्दावली की उपलब्धता

  • रक्षा और प्रशासन की शब्दावली में बड़ी संख्या में तकनीकी अंग्रेज़ी शब्द प्रचलित हैं। मानक हिंदी पर्याय न होने से हिंदी में कार्य करना कठिन होता है।
  • वैज्ञानिक और तकनीकी शब्दावली आयोग जैसी संस्थाएँ पर्याय तैयार करती हैं, परंतु उनका व्यापक उपयोग सुनिश्चित करना चुनौती है।

2. ई-फाइलों का डिजिटल अभिलेख और दीर्घकालिक संरक्षण

  • ई-फाइलें बंद करते समय यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि महत्वपूर्ण निर्णय और अभिलेख सुरक्षित रहें तथा उनकी प्रामाणिकता बनी रहे।
  • डिजिटल अभिलेखों के संरक्षण और पहुँच के लिए राष्ट्रीय अभिलेखागार (National Archives of India) जैसी संस्थाओं के मानकों का पालन ज़रूरी है।

3. ई-कचरे का सुरक्षित और उत्तरदायी निपटान

  • ई-कचरे में सीसा, पारा और कैडमियम जैसे विषैले तत्व होते हैं। असुरक्षित निपटान से मिट्टी, जल और वायु प्रदूषित होते हैं।
  • उत्पादक उत्तरदायित्व (Extended Producer Responsibility) और अधिकृत पुनर्चक्रणकर्ताओं के माध्यम से निपटान की व्यवस्था को कार्यान्वित करना एक चुनौती है।

4. मौसमी अभियान बनाम सतत कार्य-संस्कृति

  • निर्धारित अवधि के विशेष अभियानों से तत्काल परिणाम मिलते हैं, परंतु उनके बाद भी नियमित अनुशासन बनाए रखना कठिन होता है।
  • कर्मचारियों की प्रेरणा और जवाबदेही को स्थायी व्यवस्था में बदलना प्रशासनिक सुधार की मुख्य चुनौती है।

5. पुस्तकालय की वास्तविक पहुँच और उपयोग

  • पुस्तकालय की स्थापना के बाद उसका उपयोग कितने कर्मचारी और नागरिक करते हैं, यह मापना आवश्यक है।
  • हिंदी पुस्तकों के संग्रह को नियमित रूप से अद्यतन करना और उसे कार्यालयी प्रशिक्षण से जोड़ना एक चुनौती है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

Issue Concern
राजभाषा में तकनीकी शब्दावली मानक हिंदी पर्यायों की कमी और उनका सीमित उपयोग कार्यालयी हिंदी को कठिन बनाता है।
डिजिटल अभिलेखों की प्रामाणिकता ई-फाइलें बंद करते समय महत्वपूर्ण रिकॉर्ड के खो जाने या अधूरे संरक्षण का जोखिम रहता है।
ई-कचरे में विषैले तत्व असुरक्षित निपटान से मिट्टी, जल और वायु प्रदूषण तथा स्वास्थ्य पर खतरा बढ़ता है।
अभियान-आधारित कार्य-पद्धति विशेष अभियान समाप्त होने के बाद सफाई और अनुशासन में गिरावट का खतरा रहता है।
पुस्तकालय के उपयोग का मूल्यांकन उपयोगकर्ताओं और संग्रह की नियमित समीक्षा के अभाव में पहल का वास्तविक प्रभाव मापना कठिन है।

आगे की राह

  • कार्यालयी उपयोग के लिए हिंदी पर्यायों की एक केंद्रीकृत और सुलभ शब्दावली तैयार कर उसे नियमित रूप से अद्यतन किया जाए।
  • ई-फाइलें बंद करने से पहले अभिलेख-मूल्यांकन की स्पष्ट प्रक्रिया बनाई जाए, ताकि ऐतिहासिक महत्व के दस्तावेज़ सुरक्षित रहें।
  • ई-कचरे के पृथक्करण और निपटान को अधिकृत पुनर्चक्रणकर्ताओं के माध्यम से दर्ज प्रक्रिया के अंतर्गत किया जाए।
  • विशेष अभियानों की उपलब्धियों को नियमित प्रशासनिक व्यवस्था में शामिल कर उनकी निरंतरता सुनिश्चित की जाए।
  • पुस्तकालय के उपयोग, संग्रह और पाठक-संख्या का त्रैमासिक मूल्यांकन कर उसके प्रभाव को मापा जाए।
  • हिंदी में कार्य करने वाले कर्मचारियों के लिए प्रशिक्षण और प्रोत्साहन की व्यवस्था को कार्यालयी मूल्यांकन से जोड़ा जाए।
  • सरकारी कार्यालयों में ई-कचरे और अप्रचलित सामग्री के निपटान से प्राप्त राजस्व का पारदर्शी लेखा रखा जाए।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

राजभाषा · अनुच्छेद 343 (Article 343) · अनुच्छेद 344 (Article 344) · अनुच्छेद 351 (Article 351) · राजभाषा अधिनियम, 1963 (Official Languages Act, 1963) · संघवाद (Federalism) · बहुभाषिकता (Multilingualism) · आठवीं अनुसूची (Eighth Schedule) · सार्वजनिक अभिलेख अधिनियम, 1993 (Public Records Act, 1993) · ई-कचरा प्रबंधन नियम, 2022 (E-Waste (Management) Rules, 2022) · प्रशासनिक सुधार · डिजिटल अभिलेख प्रबंधन

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 343: संघ की राजभाषा हिंदी (देवनागरी)
  • अनुच्छेद 351: संघ का हिंदी प्रसार का दायित्व
  • अनुच्छेद 48A: राज्य का पर्यावरण संरक्षण निर्देश
  • अनुच्छेद 51A(छ): नागरिकों का पर्यावरण-रक्षा कर्तव्य

अवधारणा प्रवाह

विशेष अभियान 6 (02 से 31 अक्टूबर, 2026) के तहत रक्षा मंत्रालय ने कार्यालयों में अभिलेख और स्थान की सफाई शुरू की।  →  पुराने अभिलेखों और अप्रचलित वस्तुओं के निपटान से साउथ ब्लॉक में लगभग 35,000 वर्ग फुट जगह खाली हुई।  →  खाली जगह संग्रहालय परियोजना (YYBM) को सौंपी गई, जिससे सांस्कृतिक उपयोग का मार्ग खुला।  →  1,361 ई-फाइलें बंद और 1,746 फाइलें हटाकर अभिलेख प्रबंधन व्यवस्थित किया गया।  →  ई-कचरे के निपटान से 4.22 लाख रुपये का गैर-कर राजस्व प्राप्त हुआ।  →  इसी क्रम में हिंदी पुस्तकालय ‘ज्ञानदीप’ का उद्घाटन हुआ, जिससे राजभाषा के कार्यान्वयन और हिंदी में कार्य-संस्कृति को बल मिला।

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान का अनुच्छेद 343 देवनागरी लिपि में लिखित हिंदी को संघ की राजभाषा घोषित करता है।
2. संविधान का अनुच्छेद 344 राजभाषा पर आयोग और संसदीय समिति के गठन का प्रावधान करता है।
3. राजभाषा अधिनियम, 1963 के अंतर्गत संघ के राजकीय प्रयोजनों के लिए अंग्रेज़ी का प्रयोग हिंदी के साथ अनिश्चित काल तक जारी रखा जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. उपर्युक्त में से कोई नहीं

उत्तर: उपर्युक्त में से कोई नहीं — कथन 1 सही है: अनुच्छेद 343(1) देवनागरी लिपि में हिंदी को संघ की राजभाषा घोषित करता है। कथन 2 सही है: अनुच्छेद 344 के अंतर्गत राष्ट्रपति आयोग गठित करते हैं और अनुच्छेद 344(4) संसदीय समिति का प्रावधान करता है। कथन 3 भी सही है: राजभाषा अधिनियम, 1963 की धारा 3(1) के अनुसार अंग्रेज़ी का प्रयोग सहायक रूप में जारी रह सकता है। अतः तीनों कथन सही हैं।

Q2. अभिकथन (A) और कारण (R) पर विचार कीजिए:
अभिकथन (A): केंद्र सरकार के कार्यालयों में हिंदी के प्रयोग की समीक्षा के लिए संसद की एक समिति कार्यरत है।
कारण (R): राजभाषा अधिनियम, 1963 की धारा 4 में संसद की राजभाषा समिति के गठन का प्रावधान है।
दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:
(a) (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।
(b) (A) और (R) दोनों सही हैं, किंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
(c) (A) सही है, किंतु (R) गलत है।
(d) (A) गलत है, किंतु (R) सही है।

  1. (a) (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।
  2. (b) (A) और (R) दोनों सही हैं, किंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
  3. (c) (A) सही है, किंतु (R) गलत है।
  4. (d) (A) गलत है, किंतु (R) सही है।

उत्तर: (a) (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है। — राजभाषा अधिनियम, 1963 की धारा 4 के अंतर्गत संसद की राजभाषा समिति गठित होती है, जो राजभाषा के प्रयोग की प्रगति की समीक्षा करती है। इसलिए कारण (R) अभिकथन (A) की सही व्याख्या है। दोनों कथन सही हैं।

Q3. निम्नलिखित स्तंभों का मिलान कीजिए:
स्तंभ I (संवैधानिक अनुच्छेद):
1. अनुच्छेद 343
2. अनुच्छेद 344
3. अनुच्छेद 348
4. अनुच्छेद 351

स्तंभ II (प्रावधान):
A. हिंदी के प्रसार को बढ़ावा देना संघ का कर्तव्य
B. संघ की राजभाषा का निर्धारण
C. राजभाषा पर आयोग का गठन
D. उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों की कार्यभाषा

सही मिलान चुनिए:

  1. 1-B, 2-C, 3-D, 4-A
  2. 1-C, 2-B, 3-A, 4-D
  3. 1-B, 2-A, 3-C, 4-D
  4. 1-D, 2-C, 3-B, 4-A

उत्तर: 1-B, 2-C, 3-D, 4-A — अनुच्छेद 343 संघ की राजभाषा निर्धारित करता है (B)। अनुच्छेद 344 आयोग के गठन से संबंधित है (C)। अनुच्छेद 348 उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों की भाषा तय करता है (D)। अनुच्छेद 351 हिंदी के प्रसार को संघ का कर्तव्य बनाता है (A)।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ राजभाषा हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए कार्यालयों में पुस्तकालय, अभिलेखों की सफाई और हिंदी में कार्य-संस्कृति जैसी प्रशासनिक पहलें संवैधानिक लक्ष्यों और प्रशासनिक कुशलता, दोनों को साधने का प्रयास करती हैं। अनुच्छेद 343, 344 और 351 के परिप्रेक्ष्य में इन पहलों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही बताइए कि राजभाषा अधिनियम, 1963 की धारा 3(3) के अंतर्गत द्विभाषी दस्तावेज़ों की अनिवार्यता सुनिश्चित करने के लिए कौन-से प्रशासनिक तंत्र उपलब्ध हैं और उनकी सीमाएँ क्या हैं। (15 Marks)

रूपरेखा: 1. संवैधानिक ढांचा: अनुच्छेद 343(1) (देवनागरी लिपि में हिंदी संघ की राजभाषा), अनुच्छेद 343(2) (15 वर्षों तक अंग्रेज़ी का सतत प्रयोग), अनुच्छेद 344(1) और 344(4) (आयोग और संसदीय समिति), अनुच्छेद 351 (हिंदी के प्रसार का संघ का कर्तव्य; यह भी कि हिंदी ‘मिश्रित संस्कृति’ की अभिव्यक्ति का माध्यम बने, बिना अन्य भाषाओं के स्वरूप को विस्थापित किए), आठवीं अनुसूची (वर्तमान में 22 भाषाएँ, 92वें संशोधन, 2003 से इसमें बोडो, डोगरी, मैथिली और संथाली सम्मिलित)।
2. विधिक ढांचा: राजभाषा अधिनियम, 1963 (धारा 3(1) अंग्रेज़ी का सहायक प्रयोग; धारा 3(3) द्विभाषी दस्तावेज़; धारा 4 संसदीय राजभाषा समिति); राजभाषा (संघ के शासकीय प्रयोजनों के लिए प्रयोग) नियम, 1976 (क, ख, ग क्षेत्र विभाजन)।
3. ऐतिहासिक आयोग: खेर आयोग (1955) और गोविंद बल्लभ पंत समिति (1957) की सिफारिशें; इनसे राजभाषा नीति के क्रमिक विकास और राज्यों की आपत्तियों का संदर्भ।
4. समकालीन प्रशासनिक पहलें: कार्यालयों में हिंदी पुस्तकालय, अभिलेखों की सफाई और ई-कचरा निपटान (ई-कचरा प्रबंधन नियम, 2022); सार्वजनिक अभिलेख अधिनियम, 1993 के अंतर्गत अभिलेखों के निपटान की वैधानिक प्रक्रिया का उल्लेख।
5. समर्थक दृष्टिकोण: प्रशासनिक एकरूपता, जन-संपर्क में सुगमता, भाषाई गौरव और कार्य-संस्कृति में परिवर्तन; पुराने अभिलेखों के निपटान से दक्षता तथा संसाधन-बचत।
6. आलोचनात्मक दृष्टिकोण: प्रतीकात्मक या मात्रात्मक उपलब्धियों (फाइलों की संख्या, स्थान) और वास्तविक कार्यान्वयन में अंतर; अहिंदी-भाषी क्षेत्रों की संवेदनशीलता; संघवाद और सहकारी संघवाद की भावना; अनुच्छेद 351 की ‘कर्तव्य’ प्रकृति की बाध्यता की सीमा; अनुवाद की गुणवत्ता और तकनीकी शब्दावली की समस्या।
7. संतुलित निष्कर्ष: बहुभाषिकता के सिद्धांत के साथ राजभाषा नीति का समन्वय; अनुपालन-आधारित मूल्यांकन, प्रशिक्षण, तकनीकी अनुवाद उपकरण और नागरिक-केंद्रित सेवा-वितरण के माध्यम से अर्थपूर्ण कार्यान्वयन।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


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