01 Nov राजस्थान सरकार ने 3,319 पार्कों के रखरखाव के लिए प्रस्तुत की नई योजना

✎ 5,000 वर्ग मीटर से बड़े पार्क नगरीय निकाय के पास और छोटे पार्क RWA व सामुदायिक संस्थाओं के पास, तीन वर्ष के समझौते और SOP के साथ — यही विकेंद्रीकृत रखरखाव मॉडल का सार है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — शासन (स्थानीय शासन, संवैधानिक प्रावधान, नगरीय निकायों की भूमिका और सार्वजनिक सेवाओं के वितरण में सामुदायिक भागीदारी) | GS Paper II — राजव्यवस्था (न्यायपालिका की भूमिका, न्यायालय द्वारा कार्यपालिका के अनुपालन की निगरानी) | GS Paper I — समाज (शहरीकरण से उत्पन्न चुनौतियाँ और शहरी जीवन की गुणवत्ता) | GS Paper III — पर्यावरण (नगरीय पारिस्थितिकी, हरित क्षेत्र का संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े संवैधानिक दायित्व)
- Prelims: 74वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 (74th Constitutional Amendment Act, 1992), अनुच्छेद 243W (नगरपालिकाओं की शक्तियाँ, प्राधिकार और उत्तरदायित्व), 12वीं अनुसूची (नगरपालिकाओं के कार्यात्मक विषय, जिनमें नगरीय वानिकी और पर्यावरण संरक्षण शामिल हैं), अनुच्छेद 51क(छ) — नहीं, सही प्रावधान अनुच्छेद 51क(ж) नहीं, बल्कि अनुच्छेद 51क(छ) के स्थान पर अनुच्छेद 51क(छ) — (नागरिकों का मूल कर्तव्य: प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा और उसका संवर्धन), अनुच्छेद 48क (राज्य के नीति निदेशक तत्व: पर्यावरण और वन्य जीवों की रक्षा), अनुच्छेद 21 (प्रदूषण-मुक्त और स्वस्थ पर्यावरण के अधिकार की न्यायिक व्याख्या), जनहित याचिका (Public Interest Litigation – PIL) और निरंतर परमादेश (Continuing Mandamus), मानक संचालन प्रक्रिया (Standard Operating Procedure – SOP), रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (Resident Welfare Association – RWA)
- Essay: शहरी हरित क्षेत्र के संरक्षण में स्थानीय निकाय और सामुदायिक भागीदारी की भूमिका, स्वस्थ पर्यावरण का अधिकार: न्यायिक निगरानी से प्रशासनिक जवाबदेही तक
त्वरित पुनरावृत्ति: 5,000 वर्ग मीटर से बड़े पार्क नगरीय निकाय के पास और छोटे पार्क RWA व सामुदायिक संस्थाओं के पास, तीन वर्ष के समझौते और SOP के साथ — यही विकेंद्रीकृत रखरखाव मॉडल का सार है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
राजस्थान सरकार ने राज्यस्तरीय सर्वे के आधार पर शहरी निकायों के 3,319 पार्कों का डेटाबेस तैयार करने के बाद उच्च न्यायालय में इनके संरक्षण और रखरखाव की कार्ययोजना पेश की है। इस योजना के अनुसार 5,000 वर्ग मीटर से बड़े पार्कों का प्रबंधन संबंधित नगरीय निकाय करेंगे, जबकि छोटे पार्कों की देखरेख में रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन, मोहल्ला विकास समितियों और पंजीकृत संस्थाओं को शामिल किया जाएगा। इसके लिए तीन वर्ष की अवधि का समझौता किया जाएगा। यह रिपोर्ट न्यायालय के पूर्व निर्देशों के क्रम में दाखिल की गई है, इसलिए इसका संदर्भ न्यायिक निगरानी में चल रही अनुपालना प्रक्रिया से जुड़ा है। जोधपुर में 504 पार्कों की पहचान, ‘स्वच्छता ही सेवा-2026’ अभियान के तहत 300 से अधिक पार्कों की सफाई और ऐतिहासिक उम्मेद उद्यान के लिए 15 करोड़ रुपये के मास्टर प्लान का उल्लेख भी इसी योजना का हिस्सा है।
पृष्ठभूमि
- भारत में पार्क और उद्यान राज्य सूची के विषय ‘स्थानीय शासन’ के अंतर्गत आने वाली नगरीय सेवाओं से जुड़े हैं, और 74वें संविधान संशोधन के बाद नगरपालिकाओं को आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय की योजनाएँ बनाने का संवैधानिक आधार मिला।
- 12वीं अनुसूची में नगरीय वानिकी, पर्यावरण संरक्षण और सार्वजनिक सुविधाओं जैसे विषय नगरपालिकाओं के कार्यात्मक क्षेत्र में रखे गए हैं।
- भारतीय न्यायालयों ने अनुच्छेद 21 के अंतर्गत स्वस्थ पर्यावरण के अधिकार को जीवन के अधिकार का हिस्सा माना है, और राज्य के उत्तरदायित्व को अनुच्छेद 48क तथा नागरिकों के कर्तव्य को अनुच्छेद 51क(छ) से जोड़ा गया है।
- सार्वजनिक हित से जुड़े मामलों में न्यायालय अक्सर निरंतर परमादेश के माध्यम से सरकार से समय-समय पर अनुपालना रिपोर्ट मँगवाता है, ताकि निर्देशों के क्रियान्वयन पर निगरानी बनी रहे।
- शहरी विस्तार के साथ खुले हरित क्षेत्र घटने की समस्या बढ़ी है, जिससे पार्कों के रखरखाव के लिए स्थायी वित्तीय और प्रशासनिक मॉडल की आवश्यकता महसूस हुई है।
पार्कों के विकेंद्रीकृत रखरखाव मॉडल से क्या अभिप्राय है?
- यह ऐसी व्यवस्था है जिसमें पार्कों के आकार के आधार पर उनकी देखरेख की जिम्मेदारी अलग-अलग संस्थाओं को सौंपी जाती है: बड़े पार्क नगरीय निकाय के पास और छोटे पार्क समुदाय-आधारित संस्थाओं के पास।
- क्षेत्रफल को मानदंड बनाना प्रशासनिक रूप से सरल है, क्योंकि बड़े उद्यानों में पेशेवर रखरखाव, बड़े बजट और तकनीकी दक्षता की आवश्यकता होती है, जबकि छोटे पार्कों की नियमित सफाई और बागवानी स्थानीय सहभागिता से संभव है।
- सामुदायिक भागीदारी में रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन, मोहल्ला विकास समितियाँ और पंजीकृत स्वयंसेवी संस्थाएँ शामिल होती हैं, जो स्थानीय जनता और प्रशासन के बीच सेतु का काम करती हैं।
- तीन वर्ष का समझौता पत्र ऐसी व्यवस्था है जिसमें भूमिकाएँ, दायित्व और प्रदर्शन की शर्तें लिखित रूप में तय की जाती हैं, ताकि जवाबदेही स्पष्ट रहे।
- मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) किसी कार्य को करने के चरणबद्ध तरीके, समय-सीमा और गुणवत्ता मानकों को निर्धारित करती है, जिससे सफाई और रखरखाव में एकरूपता आती है।
- इस प्रकार की व्यवस्था में नगरीय निकाय की भूमिका नियामक और संसाधन-प्रदाता के रूप में भी होती है, जबकि दैनिक देखरेख का कार्य स्थानीय संस्थाएँ करती हैं।
- सार्वजनिक पार्क नगरीय पारिस्थितिकी के महत्त्वपूर्ण घटक हैं, जो वायु गुणवत्ता, जल-संचयन, तापमान नियंत्रण और सामाजिक मेलजोल में योगदान देते हैं।
- ऐसे मॉडल की सफलता के लिए पारदर्शी निगरानी, नियमित मूल्यांकन और वित्तीय व्यवस्था की स्पष्टता आवश्यक है, अन्यथा सामुदायिक भागीदारी कमज़ोर पड़ सकती है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| 3,319 पार्कों का राज्यस्तरीय डेटाबेस | नगरीय निकायों के पार्कों की गणना और वर्गीकरण से रखरखाव की जिम्मेदारी तय करने का वैज्ञानिक आधार बनता है। |
| क्षेत्रफल-आधारित विभाजन (5,000 वर्ग मीटर से बड़े और छोटे पार्क) | बड़े पार्कों का प्रबंधन नगरीय निकाय करेंगे और छोटे पार्कों की देखरेख समुदाय-आधारित संस्थाओं को सौंपी जाएगी। इससे प्रशासनिक बोझ का वितरण होता है। |
| समुदाय की भागीदारी (RWA, मोहल्ला विकास समितियां और पंजीकृत संस्थाएं) | स्थानीय नागरिक संस्थाओं को सक्रिय करने से सहभागी शासन (Participatory Governance) को बल मिलता है। |
| तीन वर्षीय समझौता पत्र | दीर्घकालिक अनुबंध से रखरखाव में निरंतरता आती है और प्रत्येक वर्ष नई व्यवस्था बनाने की आवश्यकता कम होती है। |
| मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) | कार्य के एक समान मानदंड तय होने से विभिन्न निकायों में गुणवत्ता और जवाबदेही सुनिश्चित होती है। |
| उम्मेद उद्यान का कायाकल्प (15 करोड़ रुपये का मास्टर प्लान) | ऐतिहासिक धरोहर-स्थल के संरक्षण के साथ नगरीय हरित क्षेत्र का विस्तार होता है। |
महत्व
पर्यावरणीय महत्व
- शहरी पार्क नगरीय हरित आवरण का प्रमुख घटक हैं, जो वायु की गुणवत्ता सुधारने और तापमान को संतुलित रखने में सहायक होते हैं।
- सफाई अभियान में 465 टन से अधिक कचरा, प्लास्टिक और मलबा हटाया गया, जिससे ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के व्यावहारिक पक्ष की झलक मिलती है।
शासन और प्रशासनिक महत्व
- नगरीय निकायों और स्थानीय समुदाय के बीच कार्य-विभाजन से बहु-स्तरीय शासन का व्यावहारिक मॉडल सामने आता है।
- न्यायालय के निर्देशों के क्रम में अनुपालना रिपोर्ट पेश होने से न्यायिक निगरानी और कार्यपालिका की जवाबदेही का उदाहरण मिलता है।
सामाजिक और सार्वजनिक स्वास्थ्य महत्व
- खुले और स्वच्छ सार्वजनिक स्थल शारीरिक गतिविधि, सामाजिक मेल-जोल और मनोरंजन के अवसर देते हैं।
- नियमित सफाई और बागवानी से स्वच्छता संबंधी जोखिम घटते हैं और नागरिक सुविधाएं बेहतर होती हैं।
सांस्कृतिक और विरासत महत्व
- जोधपुर का ऐतिहासिक उम्मेद उद्यान विरासत-संरक्षण और शहरी नियोजन के समन्वय का उदाहरण है।
चुनौतियाँ
1. रखरखाव की वित्तीय व्यवस्था
- नगरीय निकायों की राजस्व क्षमता सीमित होने से पार्कों के नियमित रखरखाव के लिए पर्याप्त धन जुटाना कठिन हो सकता है।
- 15 करोड़ रुपये जैसी बड़ी परियोजनाओं के लिए केवल अनुदान पर निर्भरता दीर्घकालिक स्थिरता को प्रभावित कर सकती है।
यूपीएससी लिंक: नगरीय स्थानीय निकायों की वित्तीय स्थिति और राज्य वित्त (GS-2 / GS-3)
2. कार्य-विभाजन और प्रशासनिक समन्वय
- बड़े और छोटे पार्कों के बीच विभाजन का आधार क्षेत्रफल रखा गया है, जिससे सीमा-क्षेत्र के मामलों में स्पष्टता की आवश्यकता होगी।
- नगरीय निकाय, RWA और पंजीकृत संस्थाओं के बीच जिम्मेदारियों का सामंजस्य बनाए रखना चुनौतीपूर्ण है।
यूपीएससी लिंक: शासन में समन्वय और बहु-स्तरीय शासन (GS-2)
3. सामुदायिक संस्थाओं की क्षमता और निगरानी
- सभी क्षेत्रों में RWA और मोहल्ला समितियां समान रूप से सक्रिय नहीं होतीं, इसलिए सेवा-गुणवत्ता में असमानता आ सकती है।
- पंजीकृत संस्थाओं के चयन और उनके कार्य का मूल्यांकन पारदर्शी ढंग से करना आवश्यक है।
यूपीएससी लिंक: सहभागी शासन और सिविल सोसाइटी की भूमिका (GS-2)
4. सार्वजनिक संपत्ति का अनुरक्षण और सामाजिक व्यवहार
- सफाई अभियानों के बावजूद प्लास्टिक और मलबे का बार-बार फेंका जाना दर्शाता है कि केवल भौतिक सफाई पर्याप्त नहीं है।
- नागरिकों में सार्वजनिक संपत्ति के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना दीर्घकालिक चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: नागरिक कर्तव्य और सार्वजनिक स्वच्छता (GS-4 / निबंध)
5. विरासत-स्थल के संरक्षण और आधुनिक सुविधाओं में संतुलन
- उम्मेद उद्यान जैसे ऐतिहासिक स्थलों के कायाकल्प में मूल स्वरूप की रक्षा और आधुनिक सुविधाओं के विस्तार के बीच संतुलन आवश्यक है।
यूपीएससी लिंक: सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण (GS-1 / संस्कृति)
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| वित्तीय संसाधन | नगरीय निकायों की सीमित आय से नियमित रखरखाव प्रभावित हो सकता है। |
| जिम्मेदारी का विभाजन | क्षेत्रफल-आधारित विभाजन से सीमांत और मिश्रित स्थितियों में विवाद उत्पन्न हो सकते हैं। |
| सामुदायिक संस्थाओं की क्षमता | सभी मोहल्लों में समान सक्रियता न होने से सेवा-स्तर में असमानता आ सकती है। |
| निगरानी और मूल्यांकन | बड़ी संख्या में पार्कों के लिए नियमित और पारदर्शी निरीक्षण व्यवस्था बनाना कठिन है। |
| सफाई का टिकाऊपन | अभियान-आधारित सफाई के बाद कचरे का पुनः जमा होना स्थायी समाधान की कमी दर्शाता है। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) (Swachh Bharat Mission – Urban)
आगे की राह
- सभी 3,319 पार्कों का भू-स्थानिक (GIS) आधारित डिजिटल रजिस्टर बनाकर उनकी स्थिति की नियमित अद्यतन व्यवस्था की जाए।
- मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) में सफाई, बागवानी और सुरक्षा के न्यूनतम मानक स्पष्ट रूप से परिभाषित किए जाएं।
- RWA, मोहल्ला विकास समितियों और पंजीकृत संस्थाओं के चयन के लिए पारदर्शी मानदंड और सार्वजनिक सूची तैयार की जाए।
- तीन वर्षीय समझौता पत्र में प्रदर्शन-आधारित मूल्यांकन और दंड-पुरस्कार के प्रावधान शामिल किए जाएं।
- पार्क रखरखाव के लिए अलग बजट-प्रावधान और रखरखाव-निधि की व्यवस्था की जाए, ताकि अनुदान पर अत्यधिक निर्भरता कम हो।
- जोधपुर के अनुभव को अन्य नगरीय निकायों के लिए मॉडल के रूप में दस्तावेज़ीकृत कर प्रसारित किया जाए।
- नागरिक जागरूकता अभियानों के माध्यम से सार्वजनिक स्थलों की सफाई में स्थानीय भागीदारी को प्रोत्साहित किया जाए।
- उम्मेद उद्यान के कायाकल्प में विरासत-संरक्षण विशेषज्ञों की सलाह को मास्टर प्लान का अनिवार्य भाग बनाया जाए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
शहरी स्थानीय निकाय · सार्वजनिक पार्क · शहरी नियोजन · स्वच्छता अभियान · नागरिक सहभागिता · न्यायिक सक्रियता · पर्यावरण संरक्षण · स्थानीय शासन · डेटाबेस प्रबंधन · मानक संचालन प्रक्रिया
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 243W – नगरपालिकाओं को पार्क और उद्यान प्रबंधन के कार्य सौंपना
- बारहवीं अनुसूची – पार्कों, उद्यानों और खेल मैदानों जैसी नगरीय सुविधाएं
- अनुच्छेद 226 – उच्च न्यायालय द्वारा कार्यपालिका की निगरानी
- अनुच्छेद 51A(छ) – प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा और सुधार का कर्तव्य
अवधारणा प्रवाह
राज्यस्तरीय सर्वे से 3,319 पार्कों का डेटाबेस तैयार होता है। → पार्कों का क्षेत्रफल (5,000 वर्ग मीटर की सीमा) आधार बनाकर जिम्मेदारी का विभाजन तय होता है। → बड़े पार्क नगरीय निकायों और छोटे पार्क RWA, मोहल्ला समितियों व पंजीकृत संस्थाओं को सौंपे जाते हैं। → तीन वर्षीय समझौता पत्र और मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) से व्यवस्था औपचारिक रूप लेती है। → उच्च न्यायालय में अनुपालना और प्रगति रिपोर्ट पेश होने से न्यायिक निगरानी सुनिश्चित होती है। → सफाई, बागवानी और मास्टर प्लान से पार्कों की गुणवत्ता और नगरीय हरित आवरण में सुधार की अपेक्षा की जाती है।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राजस्थान सरकार ने शहरी निकायों के सभी पार्कों के रखरखाव की जिम्मेदारी रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) को सौंपी है।
2. ‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान का उद्देश्य शहरी उद्यानों में विशेष सफाई अभियान चलाना है।
3. 5,000 वर्ग मीटर से बड़े पार्कों का प्रबंधन संबंधित नगरीय निकाय करेंगे।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 गलत है क्योंकि RWA को केवल छोटे पार्कों की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जबकि बड़े पार्कों की जिम्मेदारी नगरीय निकायों को दी गई है। कथन 2 सही है क्योंकि ‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान के तहत शहरी उद्यानों में विशेष सफाई अभियान चलाया गया था। कथन 3 सही है क्योंकि नई व्यवस्था के तहत 5,000 वर्ग मीटर से बड़े पार्कों का प्रबंधन संबंधित नगरीय निकाय करेंगे।
Q2. राजस्थान उच्च न्यायालय में सार्वजनिक पार्कों के रखरखाव की कार्ययोजना किस संदर्भ में पेश की गई है?
- राज्य सरकार की स्वैच्छिक पहल के रूप में
- केंद्र सरकार के निर्देश पर
- अदालत द्वारा पहले दिए गए निर्देशों के अनुपालन में
- स्थानीय निकायों के अनुरोध पर
उत्तर: अदालत द्वारा पहले दिए गए निर्देशों के अनुपालन में — राज्य सरकार ने यह कार्ययोजना उच्च न्यायालय द्वारा पहले दिए गए निर्देशों के अनुपालन एवं प्रगति रिपोर्ट के रूप में पेश की है। यह न्यायिक सक्रियता का एक उदाहरण है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ सार्वजनिक पार्कों के प्रभावी प्रबंधन में शहरी स्थानीय निकायों और नागरिक समाज संगठनों की भूमिका का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। इस संदर्भ में, न्यायिक सक्रियता किस प्रकार शहरी शासन में सुधार ला सकती है? (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** सार्वजनिक पार्कों के महत्व (पर्यावरण, सामाजिक, स्वास्थ्य) और उनके प्रबंधन की चुनौतियों पर संक्षिप्त चर्चा।
2. **शहरी स्थानीय निकायों की भूमिका:**
* **सकारात्मक:** बड़े पार्कों का प्रबंधन, वित्तीय संसाधन, योजना निर्माण, बुनियादी ढांचा विकास (जैसे राजस्थान में 5,000 वर्ग मीटर से बड़े पार्कों की जिम्मेदारी)।
* **चुनौतियाँ:** सीमित संसाधन, भ्रष्टाचार, राजनीतिक हस्तक्षेप, विशेषज्ञता की कमी, नागरिक भागीदारी का अभाव।
3. **नागरिक समाज संगठनों (RWA, मोहल्ला समितियाँ) की भूमिका:**
* **सकारात्मक:** छोटे पार्कों का दैनिक रखरखाव, स्थानीय निगरानी, समुदाय की भागीदारी, जवाबदेही बढ़ाना (जैसे राजस्थान में छोटे पार्कों के लिए तीन साल का समझौता)।
* **चुनौतियाँ:** सीमित क्षमता, धन की कमी, सभी सदस्यों की भागीदारी सुनिश्चित करना, दीर्घकालिक स्थिरता।
4. **न्यायिक सक्रियता की भूमिका:**
* **सकारात्मक:** सरकार को जवाबदेह बनाना, नीतिगत निष्क्रियता को चुनौती देना, पर्यावरण संरक्षण और नागरिक अधिकारों को सुनिश्चित करना (जैसे राजस्थान उच्च न्यायालय द्वारा रखरखाव योजना प्रस्तुत करने का निर्देश)।
* **सीमाएँ:** कार्यपालिका के क्षेत्र में हस्तक्षेप, विशेषज्ञता का अभाव, न्यायिक अतिरेक का जोखिम।
5. **समालोचनात्मक विश्लेषण:** दोनों की भूमिकाओं का संतुलन, सहयोगात्मक मॉडल की आवश्यकता, चुनौतियों का समाधान।
6. **निष्कर्ष:** शहरी शासन में सुधार के लिए बहु-हितधारक दृष्टिकोण (सरकार, नागरिक समाज, न्यायपालिका) की आवश्यकता पर बल।
स्रोत: amarujala.com
Rajasthan PCS (RPSC / RAS) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: राजस्थान सरकार द्वारा प्रस्तुत ‘3,319 पार्कों के रखरखाव की योजना’ को उच्च न्यायालय में किस उद्देश्य से पेश किया गया है?
- A. पार्कों के रखरखाव के लिए नई तकनीकों का उपयोग
- B. पार्कों के रखरखाव हेतु एकीकृत प्रणाली विकसित करना
- C. पार्कों के रखरखाव के लिए बजट आवंटन बढ़ाना
- D. पार्कों को निजीकरण के लिए प्रस्तावित करना
उत्तर: B. पार्कों के रखरखाव हेतु एकीकृत प्रणाली विकसित करना — योजना का उद्देश्य 3,319 पार्कों के रखरखाव के लिए एकीकृत प्रणाली विकसित करना है, जिससे उनकी व्यवस्था एवं रखरखाव में पारदर्शिता और दक्षता आएगी।
Mains: राजस्थान सरकार द्वारा प्रस्तुत ‘3,319 पार्कों के रखरखाव की योजना’ में शामिल प्रमुख चुनौतियों एवं उनके समाधान पर प्रकाश डालते हुए, राज्य के शहरी विकास एवं पर्यावरण संरक्षण में इसके संभावित प्रभाव का विश्लेषण कीजिए।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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