11 Aug राष्ट्रीय कृषि मशीनीकरण नीति 2026: किसानों के लिए तकनीकी क्रांति, जानिए पूरा प्लान

✎ राष्ट्रीय कृषि मशीनीकरण नीति का उद्देश्य 'कृषि मशीनीकरण उप-मिशन' (SMAM) जैसी योजनाओं के माध्यम से छोटे और सीमांत किसानों तक आधुनिक कृषि मशीनरी की पहुँच बढ़ाना, कस्टम हायरिंग सेंटर्स को बढ़ावा देना और कृषि उत्पादकता में वृद्धि…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय। | GS Paper III — कृषि मुख्य फसलें- देश के विभिन्न भागों में फसलों का पैटर्न- सिंचाई के विभिन्न प्रकार एवं सिंचाई प्रणाली- कृषि उत्पाद का भंडारण, परिवहन तथा विपणन तथा संबंधित विषय एवं बाधाएँ; किसानों की सहायता के लिये ई-प्रौद्योगिकी।
- Prelims: कृषि मशीनीकरण उप-मिशन (SMAM), कस्टम हायरिंग सेंटर्स (CHCs), कृषि मशीनरी बैंक (FMB), फसल अवशेष प्रबंधन (CRM) योजना, एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (AIF), एकीकृत बागवानी विकास मिशन (MIDH), भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY)
- Essay: भारत में कृषि क्षेत्र का आधुनिकीकरण: चुनौतियाँ और अवसर, तकनीकी नवाचार और किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य
त्वरित पुनरावृत्ति: राष्ट्रीय कृषि मशीनीकरण नीति का उद्देश्य ‘कृषि मशीनीकरण उप-मिशन’ (SMAM) जैसी योजनाओं के माध्यम से छोटे और सीमांत किसानों तक आधुनिक कृषि मशीनरी की पहुँच बढ़ाना, कस्टम हायरिंग सेंटर्स को बढ़ावा देना और कृषि उत्पादकता में वृद्धि करना है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
हाल ही में, कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय ने राष्ट्रीय कृषि मशीनीकरण नीति के संबंध में जानकारी प्रदान की है। सरकार दक्षिण कोरिया, जापान, संयुक्त राज्य अमेरिका, इज़राइल और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से सर्वोत्तम वैश्विक प्रथाओं को अपनाते हुए एक व्यापक नीति तैयार करने पर विचार कर रही है। इसका उद्देश्य विशेष रूप से सीमांत किसानों के लिए मशीनीकरण को गति देना, इंटेलिजेंट कृषि रोबोट, महिला-अनुकूल कृषि उपकरणों और कौशल विकास को बढ़ावा देना है।
पृष्ठभूमि
- भारत में कृषि क्षेत्र में मशीनीकरण का स्तर अभी भी कई विकसित देशों की तुलना में कम है, विशेषकर छोटे और सीमांत किसानों के बीच।
- कृषि मशीनीकरण से कृषि उत्पादकता में वृद्धि, श्रम लागत में कमी और फसल कटाई के बाद के नुकसान को कम करने में मदद मिलती है।
- छोटे भू-जोत और कृषि मशीनों के व्यक्तिगत स्वामित्व की उच्च लागत भारत में मशीनीकरण के मार्ग में प्रमुख बाधाएँ हैं।
- सरकार ने इन चुनौतियों का समाधान करने के लिए विभिन्न योजनाएँ और पहलें शुरू की हैं, जिनमें ‘कृषि मशीनीकरण उप-मिशन’ (SMAM) प्रमुख है।
- फसल अवशेष जलाने की समस्या से निपटने और वायु प्रदूषण को कम करने के लिए फसल अवशेष प्रबंधन (CRM) जैसी योजनाएँ भी महत्वपूर्ण हैं।
- अनुसंधान और विकास (R&D) कृषि मशीनीकरण के क्षेत्र में नवाचार और तकनीकी प्रगति के लिए आवश्यक है।
राष्ट्रीय कृषि मशीनीकरण नीति और संबंधित पहलें
- राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY) के अंतर्गत ‘कृषि मशीनीकरण उप-मिशन’ (SMAM) एक केंद्र प्रायोजित योजना है जिसका उद्देश्य लघु एवं सीमांत किसानों तक कृषि मशीनीकरण की पहुँच बढ़ाना है।
- SMAM के तहत किसानों को कृषि मशीनरी और उपकरण खरीदने के लिए मशीनों की लागत का 40-50% तक वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
- यह योजना ‘कस्टम हायरिंग सेंटर्स’ (CHCs) और ‘कृषि मशीनरी बैंक’ (FMB) की स्थापना में भी सहायता करती है, जिससे छोटे भू-जोत वाले किसानों को मशीनों तक पहुँच मिल सके।
- SMAM प्रिसिजन कृषि हेतु उपकरण, ड्रोन और महिला-अनुकूल कृषि उपकरण सहित आधुनिक कृषि मशीनरी को अपनाने को प्रोत्साहित करता है।
- फसल अवशेष प्रबंधन (CRM) योजना पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में पराली जलाने को कम करने के लिए रियायती कृषि मशीनरी और कस्टम हायरिंग सेंटर्स उपलब्ध कराती है।
- एकीकृत बागवानी विकास मिशन (MIDH) बागवानी मशीनीकरण को बढ़ावा देता है, जिसमें पौध संरक्षण उपकरणों और बिजली से चलने वाली मशीनों की खरीद के लिए सहायता शामिल है।
- एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (AIF) कस्टम हायरिंग सेंटर्स और कृषि मशीनरी बैंक जैसी पात्र कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के लिए ब्याज अनुदान, ऋण गारंटी कवरेज और मध्यम से दीर्घकालिक ऋण वित्तपोषण प्रदान करता है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| कृषि मशीनीकरण उप-मिशन (SMAM) | लघु एवं सीमांत किसानों तक कृषि मशीनीकरण की पहुंच बढ़ाना और ‘कस्टम हायरिंग सेंटर्स’ (Custom Hiring Centers) को बढ़ावा देना। |
| वित्तीय सहायता | किसानों को कृषि मशीनरी और उपकरण खरीदने के लिए मशीनों की लागत का 40-50% तक अनुदान प्रदान करना। |
| कस्टम हायरिंग सेंटर (CHC) और कृषि मशीनरी बैंक (FMB) की स्थापना | छोटे भू-जोत और कृषि मशीनों के व्यक्तिगत स्वामित्व की उच्च लागत की समस्या का समाधान करना, साथ ही पूर्वोत्तर राज्यों के लिए विशेष वित्तीय सहायता। |
| आधुनिक कृषि मशीनरियों को प्रोत्साहन | प्रिसिजन कृषि (Precision Agriculture) हेतु उपकरण, ड्रोन, महिला-अनुकूल कृषि उपकरण और अन्य उन्नत प्रौद्योगिकियों को अपनाना। |
| फसल अवशेष प्रबंधन (CRM) योजना | पराली जलाने को कम करने के लिए रियायती कृषि मशीनरी और कस्टम हायरिंग सेंटर उपलब्ध कराकर सतत फसल अवशेष प्रबंधन को बढ़ावा देना। |
| अनुसंधान एवं विकास (R&D) | भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के माध्यम से कृषि मशीनरी के क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देना। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- कृषि उत्पादकता में वृद्धि: मशीनीकरण से कृषि कार्यों में दक्षता आती है, जिससे उत्पादन बढ़ता है और किसानों की आय में सुधार होता है।
- लागत में कमी: कुशल मशीनों के उपयोग से श्रम लागत और समय की बचत होती है, जिससे किसानों की परिचालन लागत कम होती है।
- ग्रामीण रोजगार सृजन: कस्टम हायरिंग सेंटर और कृषि मशीनरी बैंकों की स्थापना से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होते हैं।
सामाजिक महत्व
- किसानों का सशक्तिकरण: विशेष रूप से लघु एवं सीमांत किसानों को आधुनिक कृषि उपकरणों तक पहुंच प्रदान कर उन्हें सशक्त बनाना।
- महिला किसानों का उत्थान: महिला-अनुकूल कृषि उपकरणों को बढ़ावा देकर कृषि में महिलाओं की भागीदारी और कार्यक्षमता में सुधार करना।
- जीवन स्तर में सुधार: कृषि आय में वृद्धि से किसानों के जीवन स्तर में सुधार होता है और ग्रामीण गरीबी कम होती है।
पर्यावरणीय महत्व
- सतत कृषि को बढ़ावा: फसल अवशेष प्रबंधन योजना के माध्यम से पराली जलाने जैसी हानिकारक प्रथाओं को कम करना, जिससे वायु प्रदूषण और मृदा स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
- संसाधन दक्षता: प्रिसिजन कृषि प्रौद्योगिकियों के उपयोग से जल, उर्वरक और अन्य संसाधनों का कुशल उपयोग सुनिश्चित होता है।
तकनीकी महत्व
- आधुनिक प्रौद्योगिकियों का एकीकरण: ड्रोन, रोबोटिक्स और अन्य उन्नत मशीनीकरण प्रौद्योगिकियों को कृषि में एकीकृत करना।
- कौशल विकास: कृषि मशीनों के संचालन और रखरखाव के लिए किसानों और ग्रामीण युवाओं के कौशल का विकास करना।
चुनौतियाँ
1. छोटे भू-जोत का आकार
- भारत में अधिकांश किसानों के पास छोटे और खंडित भू-जोत हैं, जिससे बड़ी कृषि मशीनों का उपयोग अव्यावहारिक हो जाता है।
- छोटे भू-जोत के कारण मशीनों का पूरा उपयोग नहीं हो पाता, जिससे निवेश पर प्रतिफल (Return on Investment) कम होता है।
यूपीएससी लिंक: कृषि क्षेत्र की चुनौतियाँ
2. उच्च लागत और वित्तीय पहुंच
- आधुनिक कृषि मशीनरी की खरीद लागत अधिक होती है, जो लघु और सीमांत किसानों की पहुंच से बाहर होती है।
- किसानों के लिए ऋण और वित्तीय सहायता तक पहुंच में कमी भी एक बड़ी बाधा है।
यूपीएससी लिंक: कृषि वित्त और ऋण
3. जागरूकता और कौशल की कमी
- कई किसानों को आधुनिक कृषि मशीनों और उनके लाभों के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं है।
- मशीनों के संचालन, रखरखाव और मरम्मत के लिए आवश्यक कौशल की कमी भी मशीनीकरण को बाधित करती है।
यूपीएससी लिंक: कौशल विकास और कृषि
4. बुनियादी ढांचे का अभाव
- ग्रामीण क्षेत्रों में पर्याप्त कस्टम हायरिंग सेंटर, मरम्मत सुविधाएं और स्पेयर पार्ट्स की उपलब्धता का अभाव है।
- बिजली और सड़क कनेक्टिविटी जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी भी मशीनीकरण को प्रभावित करती है।
यूपीएससी लिंक: ग्रामीण अवसंरचना विकास
5. अनुसंधान एवं विकास का धीमा प्रसार
- कृषि मशीनरी के क्षेत्र में अनुसंधान और विकास के परिणाम अक्सर किसानों तक पहुंचने में देरी करते हैं।
- स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल मशीनों के विकास में कमी भी एक चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: कृषि अनुसंधान और नवाचार
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| छोटे और खंडित खेत | बड़ी मशीनों के उपयोग में अक्षमता और निवेश पर कम प्रतिफल। |
| उच्च प्रारंभिक लागत | लघु एवं सीमांत किसानों के लिए आधुनिक मशीनों की खरीद में बाधा। |
| तकनीकी ज्ञान का अभाव | किसानों द्वारा आधुनिक उपकरणों के प्रभावी उपयोग और रखरखाव में कठिनाई। |
| कस्टम हायरिंग सेंटर्स की सीमित पहुंच | सभी क्षेत्रों में पर्याप्त संख्या में सीएचसी की अनुपलब्धता। |
| अनुसंधान और नवाचार का धीमा प्रसार | नवीनतम तकनीकों को किसानों तक पहुंचने में देरी। |
| पर्याप्त वित्तीय सहायता का अभाव | किसानों के लिए ऋण और सब्सिडी तक पहुंच में चुनौतियाँ। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- कृषि मशीनीकरण उप-मिशन (SMAM)
- राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY)
- फसल अवशेष प्रबंधन (CRM) योजना
- एकीकृत बागवानी विकास मिशन (MIDH)
- एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (AIF)
आगे की राह
- छोटे भू-जोत के अनुकूल मशीनों का विकास और उन्हें बढ़ावा देना।
- कस्टम हायरिंग सेंटर्स (CHCs) और कृषि मशीनरी बैंकों (FMBs) के नेटवर्क का विस्तार और उन्हें मजबूत करना।
- किसानों, विशेषकर महिला किसानों के लिए कृषि मशीनों के संचालन और रखरखाव हेतु व्यापक कौशल विकास कार्यक्रम चलाना।
- कृषि मशीनरी की खरीद के लिए वित्तीय सहायता और ऋण तक पहुंच को और अधिक सुलभ बनाना।
- कृषि मशीनरी के क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देना और वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाना।
- डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग करके कृषि मशीनों की उपलब्धता और किराए पर लेने की प्रक्रिया को सरल बनाना।
- निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित करना ताकि कृषि मशीनीकरण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत किया जा सके।
- कृषि-तकनीकी स्टार्टअप्स को समर्थन देना जो नवीन और लागत प्रभावी मशीनीकरण समाधान प्रदान करते हैं।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
कृषि मशीनीकरण · कृषि मशीनीकरण पर उप-मिशन (SMAM) · सीमांत किसान · कस्टम हायरिंग सेंटर (CHC) · कृषि मशीनरी बैंक (FMB) · फसल अवशेष प्रबंधन (CRM) · एकीकृत बागवानी विकास मिशन (MIDH) · एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (AIF) · भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) · कृषि उत्पादकता
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 38’, ‘note’: ‘राज्य लोक कल्याण की अभिवृद्धि का प्रयास करेगा’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 39’, ‘note’: ‘राज्य द्वारा अनुसरणीय कुछ नीति सिद्धांत’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 46’, ‘note’: ‘दुर्बल वर्गों के शैक्षिक और आर्थिक हितों की अभिवृद्धि’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 48’, ‘note’: ‘कृषि और पशुपालन का संगठन’}
अवधारणा प्रवाह
कृषि में कम मशीनीकरण → उत्पादकता में कमी और उच्च श्रम लागत → सरकार द्वारा ‘कृषि मशीनीकरण उप-मिशन’ (SMAM) जैसी योजनाएं → किसानों को वित्तीय सहायता और कस्टम हायरिंग सेंटर्स का विकास → आधुनिक कृषि मशीनों तक पहुंच में वृद्धि → कृषि उत्पादकता और किसानों की आय में सुधार
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कृषि मशीनीकरण पर उप-मिशन (SMAM) का उद्देश्य लघु एवं सीमांत किसानों तक कृषि मशीनीकरण की पहुंच बढ़ाना है।
2. इस योजना के तहत किसानों को कृषि मशीनरी और उपकरण खरीदने के लिए मशीनों की लागत का 75% तक वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
3. कस्टम हायरिंग सेंटर (CHC) की स्थापना के लिए परियोजना लागत का 40% तक वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है। SMAM का एक प्रमुख उद्देश्य लघु एवं सीमांत किसानों और कम फार्म पावर उपलब्धता वाले क्षेत्रों तक कृषि मशीनीकरण की पहुंच बढ़ाना है। कथन 2 गलत है। इस योजना के तहत किसानों को मशीनों की लागत के 40-50% तक वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। कथन 3 सही है। CHC की स्थापना के लिए 250 लाख रुपये तक की लागत वाली परियोजनाओं के लिए परियोजना लागत के 40% की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
Q2. एकीकृत बागवानी विकास मिशन (MIDH) के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
1. यह कृषि दक्षता में सुधार और कृषि कार्यबल की शारीरिक मेहनत को कम करने के लिए बागवानी मशीनीकरण को बढ़ावा देता है।
2. इसके तहत पौध संरक्षण उपकरणों सहित बिजली से चलने वाली मशीनों और औजारों की खरीद के लिए सहायता प्रदान की जाती है।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
- केवल 1
- केवल 2
- 1 और 2 दोनों
- न तो 1 और न ही 2
उत्तर: 1 और 2 दोनों — कथन 1 और 2 दोनों सही हैं। MIDH बागवानी मशीनीकरण को बढ़ावा देता है और इसके तहत पौध संरक्षण उपकरणों सहित बिजली से चलने वाली मशीनों और औजारों की खरीद के लिए सहायता प्रदान की जाती है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में कृषि मशीनीकरण को बढ़ावा देने में ‘कृषि मशीनीकरण पर उप-मिशन (SMAM)’ की भूमिका का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। क्या यह योजना सीमांत किसानों की विशिष्ट आवश्यकताओं को पूरा करने में पर्याप्त है? (15 Marks)
रूपरेखा: उत्तर की शुरुआत कृषि मशीनीकरण के महत्व और भारत में इसकी वर्तमान स्थिति के संक्षिप्त परिचय से करें। फिर, कृषि मशीनीकरण पर उप-मिशन (SMAM) के प्रमुख उद्देश्यों, घटकों और कार्यान्वयन तंत्रों का विस्तार से वर्णन करें, जिसमें लघु एवं सीमांत किसानों के लिए वित्तीय सहायता, कस्टम हायरिंग सेंटर (CHC) और कृषि मशीनरी बैंक (FMB) की स्थापना, और आधुनिक कृषि प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देना शामिल हो। इसके बाद, योजना की सफलताओं और सीमाओं का समालोचनात्मक विश्लेषण करें, विशेष रूप से सीमांत किसानों तक इसकी पहुंच, सब्सिडी की पर्याप्तता, जागरूकता की कमी और छोटे भू-जोत के कारण आने वाली चुनौतियों पर ध्यान केंद्रित करें। निष्कर्ष में, कृषि मशीनीकरण को और अधिक समावेशी और प्रभावी बनाने के लिए नीतिगत सुझाव दें, जैसे कि स्थानीय नवाचार, कौशल विकास, महिला-अनुकूल उपकरणों पर जोर और निजी निवेश को प्रोत्साहित करना।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
- सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: 19 राज्यों से पूछा- कब लागू होगी कैंसर रोगियों की अनिवार्य रिपोर्टिंग? - August 11, 2026
- Supreme Court Directs 19 States to Implement Mandatory Cancer Reporting Soon - August 11, 2026
- डिजिटल सामान्य फसल अनुमान सर्वेक्षण: UPSC परीक्षा के लिए अर्थव्यवस्था एवं शासन विषय पर नवीनतम अपडेट - August 11, 2026

No Comments