24 Jul राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन: 2024-26 में प्रगति और राज्यवार आँकड़े
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — कृषि, पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी | GS Paper III — अर्थव्यवस्था
- Prelims: राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (NMNF), प्राकृतिक खेती, केंद्र प्रायोजित योजना, कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), जैविक खेती, मृदा स्वास्थ्य, जलवायु अनुकूल कृषि, इनपुट लागत
- Essay: सतत कृषि पद्धतियाँ और भारत का भविष्य, पर्यावरण संरक्षण में प्राकृतिक खेती की भूमिका
त्वरित पुनरावृत्ति: राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (NMNF) एक केंद्र प्रायोजित योजना है जो रसायन मुक्त कृषि को बढ़ावा देकर मृदा स्वास्थ्य में सुधार, इनपुट लागत में कमी और जलवायु अनुकूल कृषि को प्रोत्साहित करती है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (National Natural Farming Mission – NMNF) के अंतर्गत प्राकृतिक खेती की प्रगति पर नवीनतम आँकड़े जारी किए हैं। ये आँकड़े मिशन के कार्यान्वयन, किसानों की भागीदारी और प्राकृतिक खेती के अंतर्गत लाए गए क्षेत्र की राज्य/केंद्र शासित प्रदेशवार स्थिति को दर्शाते हैं। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 25 नवंबर 2024 को इस मिशन को एक केंद्र प्रायोजित योजना के रूप में स्वीकृति दी थी, जिसका उद्देश्य पूरे देश में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना है।
पृष्ठभूमि
- भारत में कृषि क्षेत्र एक बड़े वर्ग की आजीविका का आधार है और देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करता है।
- रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से मृदा स्वास्थ्य, जैव विविधता और मानव स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़े हैं।
- जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों के कारण कृषि पद्धतियों में अनुकूलन और लचीलेपन की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
- किसानों की इनपुट लागत में वृद्धि एक प्रमुख चिंता का विषय रही है, जिससे उनकी आय प्रभावित होती है।
- पारंपरिक भारतीय कृषि पद्धतियों में प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करने और रसायनों के उपयोग से बचने पर जोर दिया जाता रहा है।
- सरकार ने सतत कृषि को बढ़ावा देने और किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य के तहत विभिन्न पहलों को शुरू किया है।
राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (NMNF) क्या है?
- राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (NMNF) एक केंद्र प्रायोजित योजना है जिसे 25 नवंबर 2024 को केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकृति दी गई थी।
- इसका मुख्य उद्देश्य पूरे देश में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना और किसानों को रसायन मुक्त कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है।
- प्राकृतिक खेती एक रसायन मुक्त कृषि पद्धति है जिसमें पशुधन-समन्वित प्राकृतिक कृषि विधियाँ और भारतीय पारंपरिक ज्ञान पर आधारित विविध फसल प्रणालियाँ शामिल हैं।
- यह मृदा स्वास्थ्य में सुधार, इकोसिस्टम (Ecosystem) के पुनर्स्थापन और किसानों की इनपुट लागत को कम करने पर केंद्रित है।
- मिशन के तहत, क्लस्टर स्तर पर कार्यान्वयन में सहयोग के लिए कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), कृषि विश्वविद्यालय (AU) और स्थानीय प्राकृतिक कृषि संस्थान (LNFI) जैसे संस्थानों को चिन्हित किया गया है।
- किसानों और अधिकारियों को प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए प्राकृतिक कृषि संस्थानों के केंद्र (CoNF) स्थापित किए गए हैं, जो मास्टर प्रशिक्षकों को प्रशिक्षित करते हैं।
- सामुदायिक संसाधन व्यक्तियों (CRP) को क्लस्टर स्तर पर किसानों को प्राकृतिक कृषि पद्धतियों पर मार्गदर्शन देने के लिए तैनात किया गया है।
- यह मिशन मृदा, जल, सूक्ष्मजीव, पौधों, पशु, जलवायु और मनुष्य की आवश्यकताओं के बीच प्राकृतिक इकोसिस्टम की परस्पर निर्भरता को महत्व देता है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| रसायन मुक्त कृषि पद्धति | मृदा स्वास्थ्य में सुधार और पर्यावरणीय स्थिरता को बढ़ावा। |
| पशुधन-समन्वित प्राकृतिक कृषि विधियाँ | जैविक विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) के पुनर्स्थापन में सहायक। |
| भारतीय पारंपरिक ज्ञान पर आधारित | स्थानीय परिस्थितियों और ज्ञान के अनुरूप कृषि पद्धतियों का विकास। |
| विविध फसल प्रणालियाँ | फसल विविधीकरण (Crop Diversification) के माध्यम से जोखिम कम करना और पोषण सुरक्षा बढ़ाना। |
| किसानों की इनपुट लागत में कमी | रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों पर निर्भरता कम होने से किसानों की आय में वृद्धि। |
| जलवायु परिवर्तन के प्रति अनुकूलता | प्राकृतिक कृषि पद्धतियाँ जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को झेलने में अधिक सक्षम। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- किसानों की इनपुट लागत (Input Cost) में कमी आती है, जिससे उनकी शुद्ध आय (Net Income) में वृद्धि होती है।
- रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के आयात पर निर्भरता कम होती है, जिससे विदेशी मुद्रा (Foreign Exchange) की बचत होती है।
- जैविक उत्पादों की बढ़ती मांग को पूरा करके निर्यात के अवसर पैदा होते हैं।
पर्यावरणीय महत्व
- मृदा स्वास्थ्य में सुधार होता है, जिससे मृदा अपरदन (Soil Erosion) और मरुस्थलीकरण (Desertification) रुकता है।
- रासायनिक प्रदूषण कम होता है, जिससे जल निकायों और जैव विविधता (Biodiversity) का संरक्षण होता है।
- कार्बन पृथक्करण (Carbon Sequestration) में वृद्धि होती है, जो जलवायु परिवर्तन के शमन में सहायक है।
सामाजिक महत्व
- किसानों और उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य में सुधार होता है, क्योंकि रासायनिक अवशेषों से मुक्त भोजन उपलब्ध होता है।
- ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा होते हैं, विशेषकर स्थानीय संसाधनों के उपयोग और प्रसंस्करण में।
- पारंपरिक कृषि ज्ञान और पद्धतियों का पुनरुद्धार होता है, जिससे सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण होता है।
चुनौतियाँ
1. जागरूकता और प्रशिक्षण का अभाव
- किसानों के बीच प्राकृतिक खेती के लाभों और तकनीकों के बारे में जागरूकता की कमी।
- प्रभावी प्रशिक्षण कार्यक्रमों और विस्तार सेवाओं की सीमित उपलब्धता।
यूपीएससी लिंक: कृषि क्षेत्र में चुनौतियाँ
2. प्रारंभिक उपज में कमी का डर
- प्राकृतिक खेती में संक्रमण के शुरुआती वर्षों में उपज में संभावित कमी का भय।
- किसानों को वित्तीय सहायता और जोखिम शमन तंत्र की आवश्यकता।
यूपीएससी लिंक: कृषि उत्पादकता और स्थिरता
3. बाजार और प्रमाणन की समस्याएँ
- प्राकृतिक उत्पादों के लिए अलग बाजार और उचित मूल्य निर्धारण तंत्र का अभाव।
- प्राकृतिक उत्पादों के प्रमाणन (Certification) की प्रक्रिया जटिल और महंगी।
यूपीएससी लिंक: कृषि विपणन और मूल्य श्रृंखला
4. अनुसंधान और विकास की कमी
- विभिन्न कृषि-जलवायु क्षेत्रों के लिए उपयुक्त प्राकृतिक खेती मॉडल पर अपर्याप्त अनुसंधान।
- स्थानीय संसाधनों और पारंपरिक ज्ञान के वैज्ञानिक सत्यापन की आवश्यकता।
यूपीएससी लिंक: कृषि अनुसंधान और नवाचार
5. नीतिगत समर्थन और समन्वय
- केंद्र और राज्य सरकारों के बीच नीतियों के प्रभावी समन्वय का अभाव।
- विभिन्न विभागों और हितधारकों के बीच सहयोग की कमी।
यूपीएससी लिंक: कृषि नीतियाँ और शासन
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| संक्रमण काल में उपज | प्राकृतिक खेती अपनाने के शुरुआती चरणों में उपज में संभावित गिरावट किसानों के लिए एक बड़ी चिंता है। |
| तकनीकी ज्ञान का प्रसार | प्राकृतिक खेती की विशिष्ट तकनीकों और पद्धतियों को बड़ी संख्या में किसानों तक प्रभावी ढंग से पहुँचाना एक चुनौती है। |
| बाजार संपर्क | प्राकृतिक उत्पादों के लिए एक सुदृढ़ बाजार श्रृंखला और उचित मूल्य सुनिश्चित करना आवश्यक है ताकि किसानों को प्रोत्साहन मिल सके। |
| प्रमाणीकरण लागत | प्राकृतिक उत्पादों के प्रमाणीकरण की उच्च लागत छोटे और सीमांत किसानों के लिए एक बाधा बन सकती है। |
| बुनियादी ढाँचा | प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक बुनियादी ढाँचे, जैसे कि प्रशिक्षण केंद्र और प्रदर्शन इकाइयाँ, की कमी। |
| नीतिगत स्थिरता | दीर्घकालिक नीतिगत समर्थन और वित्तीय प्रोत्साहन की आवश्यकता ताकि किसान आत्मविश्वास के साथ प्राकृतिक खेती अपना सकें। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (National Natural Farming Mission – NMNF)
आगे की राह
- किसानों के लिए व्यापक जागरूकता अभियान और क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित किए जाएँ।
- प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसानों को संक्रमण काल के लिए वित्तीय सहायता और प्रोत्साहन प्रदान किए जाएँ।
- प्राकृतिक उत्पादों के लिए एक सुदृढ़ बाजार तंत्र और प्रमाणन प्रक्रिया को सरल एवं किफायती बनाया जाए।
- विभिन्न कृषि-जलवायु क्षेत्रों के लिए उपयुक्त प्राकृतिक खेती मॉडल पर अनुसंधान और विकास को बढ़ावा दिया जाए।
- कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK), कृषि विश्वविद्यालयों (AU) और स्थानीय प्राकृतिक कृषि संस्थानों (LNFI) की भूमिका को मजबूत किया जाए।
- केंद्र और राज्य सरकारों के बीच नीतियों का प्रभावी समन्वय सुनिश्चित किया जाए तथा हितधारकों के बीच सहयोग बढ़ाया जाए।
- प्राकृतिक खेती के सफल मॉडलों का प्रदर्शन किया जाए ताकि अन्य किसान उनसे प्रेरणा ले सकें।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन · केंद्र प्रायोजित योजना · रसायन मुक्त कृषि · मृदा स्वास्थ्य · पारंपरिक कृषि ज्ञान · जलवायु अनुकूलता · कृषि विज्ञान केंद्र · सामुदायिक संसाधन व्यक्ति · किसानों की आय · सतत कृषि
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 48’, ‘note’: ‘राज्य कृषि और पशुपालन को संगठित करेगा’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 48A’, ‘note’: ‘पर्यावरण का संरक्षण और संवर्धन’}
अवधारणा प्रवाह
रासायनिक खेती के पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संबंधी दुष्प्रभाव → राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन की शुरुआत → किसानों को प्रशिक्षण और सहायता प्रदान करना → प्राकृतिक खेती पद्धतियों को अपनाना → मृदा स्वास्थ्य में सुधार और इनपुट लागत में कमी → किसानों की आय में वृद्धि और पर्यावरणीय स्थिरता
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (NMNF) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. यह एक केंद्र प्रायोजित योजना है जिसे 25 नवंबर 2024 को केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकृति दी गई थी।
2. इस मिशन का मुख्य उद्देश्य रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के उपयोग को बढ़ावा देना है।
3. प्राकृतिक कृषि पद्धतियों में पशुधन-समन्वित विधियाँ और भारतीय पारंपरिक ज्ञान पर आधारित विविध फसल प्रणालियाँ शामिल हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- केवल 1
- केवल 1 और 2
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: केवल 1 और 3 — कथन 1 सही है क्योंकि NMNF को 25 नवंबर 2024 को केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा एक केंद्र प्रायोजित योजना के रूप में स्वीकृति मिली थी। कथन 2 गलत है क्योंकि मिशन का उद्देश्य रसायन मुक्त कृषि को बढ़ावा देना है, न कि रासायनिक उर्वरकों को। कथन 3 सही है क्योंकि प्राकृतिक कृषि में पशुधन-समन्वित विधियाँ और पारंपरिक ज्ञान पर आधारित फसल प्रणालियाँ शामिल हैं।
Q2. राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (NMNF) के कार्यान्वयन में निम्नलिखित में से कौन-सी संस्थाएँ शामिल हैं?
1. कृषि विज्ञान केंद्र (KVK)
2. कृषि विश्वविद्यालय (AU)
3. स्थानीय प्राकृतिक कृषि संस्थान (LNFI)
4. सामुदायिक संसाधन व्यक्ति (CRP)
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
- केवल 1 और 2
- केवल 2, 3 और 4
- केवल 1, 3 और 4
- 1, 2, 3 और 4
उत्तर: 1, 2, 3 और 4 — कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), कृषि विश्वविद्यालय (AU), स्थानीय प्राकृतिक कृषि संस्थान (LNFI) और सामुदायिक संसाधन व्यक्ति (CRP) सभी इस मिशन के कार्यान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। KVK, AU और LNFI प्रशिक्षण प्रदान करते हैं, जबकि CRP किसानों को मार्गदर्शन देते हैं।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (NMNF) के उद्देश्यों और कार्यान्वयन रणनीति का आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिए। यह मिशन भारत में सतत कृषि (Sustainable Agriculture) को बढ़ावा देने में किस प्रकार सहायक हो सकता है?
रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में, राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (NMNF) के प्रमुख उद्देश्यों, जैसे रसायन मुक्त कृषि, मृदा स्वास्थ्य में सुधार, किसानों की लागत में कमी और जलवायु अनुकूलता को बढ़ावा देना, पर प्रकाश डालें। इसके बाद, इसके कार्यान्वयन की रणनीति, जिसमें कृषि विज्ञान केंद्रों, कृषि विश्वविद्यालयों, स्थानीय प्राकृतिक कृषि संस्थानों और सामुदायिक संसाधन व्यक्तियों की भूमिका शामिल है, का विस्तृत वर्णन करें। दूसरे भाग में, इस मिशन के संभावित लाभों और चुनौतियों का मूल्यांकन करते हुए, यह समझाएँ कि यह भारत में सतत कृषि पद्धतियों को कैसे बढ़ावा दे सकता है। इसमें पर्यावरणीय लाभ, किसानों की आय पर प्रभाव और खाद्य सुरक्षा में योगदान जैसे बिंदुओं को शामिल करें।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
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