30 Jul रेरा के सफल कार्यान्वयन से घर खरीदारों को मिलेगा बड़ा लाभ, जानें कैसे
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — भारतीय संविधान: संघ एवं राज्यों के कार्य तथा उत्तरदायित्व, संघवाद से संबंधित मुद्दे एवं चुनौतियाँ, स्थानीय स्तर पर शक्तियों और वित्त का हस्तांतरण तथा उसकी चुनौतियाँ | GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय, सरकारी बजटिंग
- Prelims: रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 (रेरा), सातवीं अनुसूची (राज्य सूची, समवर्ती सूची), रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण, सेंट्रल एडवाइजरी काउंसिल (CAC), फास्ट-ट्रैक विवाद निपटान तंत्र, घर खरीदारों के हित
- Essay: भारत में शहरीकरण और आवास की चुनौतियाँ: नियामक ढाँचे की भूमिका, सुशासन और पारदर्शिता: आर्थिक विकास में नियामक निकायों का महत्व
त्वरित पुनरावृत्ति: रेरा (RERA) रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता, जवाबदेही और घर खरीदारों के हितों की रक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण नियामक ढाँचा है, जो परियोजनाओं के पंजीकरण, धन के प्रबंधन और विवादों के त्वरित निपटान को अनिवार्य बनाता है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय ने रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 (रेरा) के कार्यान्वयन की स्थिति पर जानकारी प्रदान की है। मंत्रालय ने रेरा के प्रभावी कार्यान्वयन, नियामक प्राधिकरणों की स्वायत्तता को सुदृढ़ करने तथा हितधारकों के साथ नियमित विचार-विमर्श पर प्रकाश डाला है। यह जानकारी लोकसभा में एक लिखित उत्तर के माध्यम से दी गई, जिसमें रेरा के तहत घर खरीदारों के हितों के संरक्षण और रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता व जवाबदेही सुनिश्चित करने के उपायों का उल्लेख किया गया है।
पृष्ठभूमि
- भारत में रियल एस्टेट क्षेत्र एक महत्वपूर्ण आर्थिक चालक है, लेकिन ऐतिहासिक रूप से इसमें पारदर्शिता की कमी और घर खरीदारों के हितों की उपेक्षा जैसी चुनौतियाँ रही हैं।
- परियोजनाओं में देरी, धन के दुरुपयोग और बिल्डरों द्वारा वादों का उल्लंघन आम समस्याएँ थीं, जिससे घर खरीदारों को भारी नुकसान होता था।
- इन समस्याओं के समाधान और क्षेत्र में विश्वास बहाल करने के लिए एक मजबूत नियामक ढाँचे की आवश्यकता महसूस की गई।
- भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची की सूची-II (राज्य सूची) की प्रविष्टि 18 के अनुसार ‘भूमि’ तथा ‘उपनिवेशन’ राज्य के विषय हैं।
- हालांकि, संसद ने संविधान की सातवीं अनुसूची की सूची-III (समवर्ती सूची) की प्रविष्टि 6, 7 तथा 46 से प्राप्त शक्तियों के आधार पर रेरा अधिनियमित किया।
- रेरा का अधिनियमन रियल एस्टेट क्षेत्र में एक ऐतिहासिक सुधार था, जिसका उद्देश्य इसे अधिक संगठित और उपभोक्ता-केंद्रित बनाना था।
रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 (रेरा) क्या है?
- रेरा एक संसदीय अधिनियम है जिसे वर्ष 2016 में रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता, जवाबदेही और दक्षता सुनिश्चित करने तथा घर खरीदारों के हितों की रक्षा के उद्देश्य से अधिनियमित किया गया था।
- यह अधिनियम प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (Regulatory Authority) की स्थापना का प्रावधान करता है।
- किसी भी रियल एस्टेट परियोजना के विज्ञापन, मार्केटिंग, बुकिंग या बिक्री से पहले नियामक प्राधिकरण के साथ उसका पंजीकरण अनिवार्य है।
- प्रमोटरों के लिए परियोजना से संबंधित सभी आवश्यक विवरणों और स्वीकृतियों का प्रकटीकरण (Disclosure) करना अनिवार्य है।
- घर खरीदारों से प्राप्त राशि का 70 प्रतिशत एक पृथक बैंक खाते में जमा करना अनिवार्य है, जिसका उपयोग केवल भूमि लागत और परियोजना निर्माण के लिए किया जा सकता है।
- रेरा में फास्ट-ट्रैक विवाद निपटान तंत्र का प्रावधान है, जिसके अंतर्गत मामलों के निपटारे के लिए 60 दिनों की समय-सीमा निर्धारित की गई है।
- अधिनियम की धारा 40 के अनुसार, प्रमोटर से देय ब्याज, जुर्माना अथवा प्रतिकर की वसूली भू-राजस्व के बकाये के रूप में की जा सकती है।
- रेरा की धारा 41 के अनुसार, आवासन और शहरी कार्य मंत्री की अध्यक्षता में सेंट्रल एडवाइजरी काउंसिल (CAC) का गठन किया गया है, जो अधिनियम के कार्यान्वयन से संबंधित विषयों पर केंद्र सरकार को सलाह देती है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| परियोजना पंजीकरण अनिवार्य | किसी भी रियल एस्टेट परियोजना के विज्ञापन, मार्केटिंग या बिक्री से पहले नियामक प्राधिकरण (Regulatory Authority) के साथ पंजीकरण आवश्यक है, जिससे पारदर्शिता सुनिश्चित होती है। |
| पृथक बैंक खाता | प्रमोटरों को घर खरीदारों से प्राप्त राशि का 70 प्रतिशत एक अलग बैंक खाते में जमा करना होता है, जिसका उपयोग केवल भूमि लागत और परियोजना निर्माण के लिए किया जा सकता है। यह धन के दुरुपयोग को रोकता है। |
| तीव्र विवाद निपटान तंत्र | रेरा में 60 दिनों की समय-सीमा के साथ मामलों के निपटारे के लिए एक फास्ट-ट्रैक विवाद निपटान तंत्र का प्रावधान है, जिससे घर खरीदारों को त्वरित न्याय मिलता है। |
| प्रमोटर पर जुर्माना | पंजीकरण प्रावधानों का उल्लंघन करने पर प्रमोटर पर परियोजना की अनुमानित लागत के 10 प्रतिशत तक का जुर्माना लगाया जा सकता है, जिससे नियमों का पालन सुनिश्चित होता है। |
| केंद्रीय सलाहकार परिषद (CAC) | आवासन और शहरी कार्य मंत्री की अध्यक्षता में गठित यह परिषद अधिनियम के कार्यान्वयन और घर खरीदारों के हितों के संरक्षण पर केंद्र सरकार को सलाह देती है। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- रियल एस्टेट क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा: पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ने से घर खरीदारों का विश्वास बढ़ता है, जिससे रियल एस्टेट क्षेत्र में निवेश आकर्षित होता है।
- क्षेत्रीय विकास को प्रोत्साहन: रियल एस्टेट क्षेत्र में सुदृढ़ विनियमन से संगठित विकास होता है, जिससे शहरी और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्थाओं को बल मिलता है।
सामाजिक महत्व
- घर खरीदारों के हितों का संरक्षण: रेरा घर खरीदारों को धोखाधड़ी और देरी से बचाता है, जिससे उनके निवेश की सुरक्षा सुनिश्चित होती है।
- पारदर्शिता और जवाबदेही: यह अधिनियम रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता और प्रमोटरों की जवाबदेही को बढ़ावा देता है, जिससे उपभोक्ता सशक्त होते हैं।
शासनिक महत्व
- संघवाद का उदाहरण: ‘भूमि’ राज्य सूची का विषय होने के बावजूद, संसद ने समवर्ती सूची की प्रविष्टियों का उपयोग करके यह अधिनियम बनाया, जो सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) का एक उदाहरण है।
- विवाद समाधान: तीव्र विवाद निपटान तंत्र कानूनी प्रक्रियाओं को सरल बनाता है और न्याय तक पहुंच में सुधार करता है।
चुनौतियाँ
1. राज्यों द्वारा कार्यान्वयन में असमानता
- कुछ राज्यों में रेरा प्राधिकरणों का गठन नहीं हुआ है या वे पूरी तरह से कार्यशील नहीं हैं।
- नियमों और विनियमों को लागू करने में राज्यों के बीच भिन्नता है, जिससे अधिनियम की एकरूपता प्रभावित होती है।
यूपीएससी लिंक: भारतीय राजव्यवस्था: संघवाद, केंद्र-राज्य संबंध
2. नियामक प्राधिकरणों की स्वायत्तता और क्षमता
- कई नियामक प्राधिकरणों को कार्यात्मक और प्रशासनिक स्वायत्तता की कमी का सामना करना पड़ता है।
- पर्याप्त कार्मिकों और विशेषज्ञता की कमी प्रभावी कार्यान्वयन में बाधा डालती है।
यूपीएससी लिंक: शासन: नियामक निकाय, जवाबदेही
3. परियोजना पंजीकरण में चुनौतियाँ
- पात्र परियोजनाओं के पंजीकरण में देरी या बाधाएँ आती हैं, जिससे प्रमोटरों और घर खरीदारों दोनों को समस्या होती है।
- कुछ प्रमोटर पंजीकरण प्रावधानों का उल्लंघन करते हैं, जिससे घर खरीदारों के हितों को खतरा होता है।
यूपीएससी लिंक: आर्थिक विकास: रियल एस्टेट क्षेत्र, विनियमन
4. विवाद निपटान में देरी
- हालांकि 60 दिनों की समय-सीमा निर्धारित है, फिर भी कुछ मामलों में विवाद निपटान में देरी होती है।
- न्यायिक प्रणाली पर बढ़ते बोझ के कारण भी रेरा के तहत मामलों के निपटान में समय लग सकता है।
यूपीएससी लिंक: भारतीय राजव्यवस्था: न्यायपालिका, विवाद समाधान तंत्र
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| राज्य कार्यान्वयन में भिन्नता | रेरा नियमों के एक समान और प्रभावी अनुप्रयोग में बाधा। |
| नियामक क्षमता की कमी | पर्याप्त स्टाफ और विशेषज्ञता के अभाव में प्राधिकरणों की अक्षमता। |
| पंजीकरण प्रक्रिया की जटिलता | प्रमोटरों के लिए अनुपालन में कठिनाई और संभावित देरी। |
| फास्ट-ट्रैक निपटान में देरी | निर्धारित समय-सीमा के बावजूद मामलों के निपटान में लगने वाला अतिरिक्त समय। |
| प्रमोटरों द्वारा अनुपालन का अभाव | कुछ प्रमोटरों द्वारा नियमों का उल्लंघन, जिससे घर खरीदारों का शोषण। |
आगे की राह
- सभी राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों में रेरा प्राधिकरणों का पूर्ण गठन और उन्हें कार्यात्मक तथा प्रशासनिक स्वायत्तता प्रदान करना।
- नियामक प्राधिकरणों में पर्याप्त और प्रशिक्षित कार्मिकों की तैनाती सुनिश्चित करना, विशेषकर कानूनी और तकनीकी विशेषज्ञता वाले।
- परियोजना पंजीकरण प्रक्रिया को सरल और अधिक कुशल बनाना, ताकि पात्र परियोजनाओं का समय पर पंजीकरण हो सके।
- रेरा के प्रावधानों के बारे में घर खरीदारों और प्रमोटरों दोनों के बीच जागरूकता बढ़ाना।
- अधिनियम में आवश्यक संशोधनों पर नियमित हितधारक परामर्श जारी रखना, ताकि उभरती चुनौतियों का समाधान किया जा सके।
- विवाद निपटान तंत्र को और मजबूत करना और निर्धारित समय-सीमा का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करना।
- प्रमोटरों द्वारा अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए कड़े प्रवर्तन उपाय और प्रभावी निगरानी प्रणाली स्थापित करना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 (रेरा) · घर खरीदार संरक्षण · रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण · पारदर्शिता और जवाबदेही · समवर्ती सूची · फास्ट-ट्रैक विवाद निपटान · केंद्रीय सलाहकार परिषद (CAC) · राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों का कार्यान्वयन
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘सातवीं अनुसूची, सूची-II, प्रविष्टि 18’, ‘note’: ‘भूमि और उपनिवेशन राज्य सूची के विषय’}
- {‘article’: ‘सातवीं अनुसूची, सूची-III, प्रविष्टि 6’, ‘note’: ‘अनुबंध समवर्ती सूची का विषय’}
- {‘article’: ‘सातवीं अनुसूची, सूची-III, प्रविष्टि 7’, ‘note’: ‘संविदा समवर्ती सूची का विषय’}
- {‘article’: ‘सातवीं अनुसूची, सूची-III, प्रविष्टि 46’, ‘note’: ‘न्यायिक कार्यवाही समवर्ती सूची का विषय’}
अवधारणा प्रवाह
भूमि और उपनिवेशन राज्य सूची के विषय हैं। → संसद ने समवर्ती सूची की शक्तियों का उपयोग कर रेरा अधिनियमित किया। → रेरा का उद्देश्य रियल एस्टेट में पारदर्शिता और जवाबदेही लाना है। → परियोजना पंजीकरण, पृथक बैंक खाता और विवाद निपटान तंत्र अनिवार्य हैं। → इससे घर खरीदारों के हितों का संरक्षण होता है और क्षेत्र में विश्वास बढ़ता है।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 (रेरा) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. रेरा भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची की सूची-II (राज्य सूची) के तहत ‘भूमि’ और ‘उपनिवेशन’ विषयों पर संसद द्वारा अधिनियमित किया गया है।
2. रेरा के तहत, प्रमोटर को होमबायर्स से प्राप्त राशि का 70 प्रतिशत एक अलग बैंक खाते में जमा करना अनिवार्य है, जिसका उपयोग केवल भूमि लागत और परियोजना निर्माण के लिए किया जा सकता है।
3. रेरा में विवादों के निपटारे के लिए 60 दिनों की समय-सीमा के साथ एक फास्ट-ट्रैक विवाद निपटान तंत्र का प्रावधान है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 गलत है। रेरा भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची की सूची-III (समवर्ती सूची) की प्रविष्टि 6, 7 तथा 46 से प्राप्त शक्तियों के आधार पर संसद द्वारा अधिनियमित किया गया है, न कि राज्य सूची से। कथन 2 सही है। रेरा के तहत, प्रमोटर को होमबायर्स से प्राप्त राशि का 70 प्रतिशत एक अलग बैंक खाते में जमा करना अनिवार्य है, जिसका उपयोग केवल भूमि लागत और परियोजना निर्माण के लिए किया जा सकता है। कथन 3 सही है। रेरा में फास्ट-ट्रैक विवाद निपटान तंत्र का प्रावधान है, जिसके अंतर्गत मामलों के निपटारे के लिए 60 दिनों की समय-सीमा निर्धारित की गई है।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा/से रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 (रेरा) का/के प्रमुख उद्देश्य है/हैं?
1. रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना।
2. होमबायर्स के हितों का संरक्षण करना।
3. रियल एस्टेट परियोजनाओं के विज्ञापन और बिक्री से पहले नियामक प्राधिकरण के साथ पंजीकरण अनिवार्य करना।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: 1, 2 और 3 — रेरा का प्राथमिक उद्देश्य रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना तथा होमबायर्स के हितों का संरक्षण करना है। इसके अतिरिक्त, किसी भी रियल एस्टेट प्रोजेक्ट के विज्ञापन, मार्केटिंग, बुकिंग अथवा बिक्री से पहले उसका नियामक प्राधिकरण के साथ पंजीकरण अनिवार्य करना भी रेरा का एक प्रमुख प्रावधान है, जो इन उद्देश्यों की पूर्ति करता है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 (रेरा) रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने में किस हद तक सफल रहा है? इसके कार्यान्वयन में आने वाली चुनौतियों और उन्हें दूर करने के लिए आवश्यक उपायों पर भी चर्चा कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** रेरा अधिनियम (2016) का संक्षिप्त परिचय, इसके मुख्य उद्देश्य (पारदर्शिता, जवाबदेही, होमबायर्स संरक्षण) और संवैधानिक आधार (समवर्ती सूची) का उल्लेख।
2. **रेरा की सफलता के बिंदु:**
* **पंजीकरण अनिवार्यता:** परियोजनाओं का नियामक प्राधिकरण के साथ पंजीकरण अनिवार्य होने से अनधिकृत परियोजनाओं पर रोक।
* **वित्तीय अनुशासन:** होमबायर्स से प्राप्त 70% राशि को अलग बैंक खाते में जमा करने का प्रावधान (धारा 4)।
* **सूचना का प्रकटीकरण:** प्रमोटरों के लिए परियोजना से संबंधित सभी विवरण और स्वीकृतियों का प्रकटीकरण अनिवार्य।
* **विवाद निपटान:** 60 दिनों की समय-सीमा के साथ फास्ट-ट्रैक विवाद निपटान तंत्र।
* **दंडात्मक प्रावधान:** उल्लंघन पर प्रमोटरों पर जुर्माना और भू-राजस्व के बकाये के रूप में वसूली का प्रावधान (धारा 40)।
* **केंद्रीय सलाहकार परिषद (CAC):** अधिनियम के कार्यान्वयन पर केंद्र सरकार को सलाह देने वाली संस्था (धारा 41)।
3. **कार्यान्वयन में चुनौतियाँ:**
* **राज्य सरकारों का असमान कार्यान्वयन:** ‘भूमि’ राज्य का विषय होने के कारण राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों में नियमों और प्राधिकरणों के गठन में भिन्नता।
* **नियामक प्राधिकरणों की स्वायत्तता और क्षमता:** कई राज्यों में नियामक प्राधिकरणों की कार्यात्मक और प्रशासनिक स्वायत्तता की कमी, पर्याप्त कार्मिकों का अभाव।
* **पंजीकरण प्रक्रिया में जटिलता:** पात्र परियोजनाओं के पंजीकरण में आने वाली चुनौतियाँ, जिससे कुछ परियोजनाएँ रेरा के दायरे से बाहर रह जाती हैं।
* **प्रमोटरों द्वारा नियमों का उल्लंघन:** कुछ प्रमोटरों द्वारा अभी भी नियमों का पूर्णतः पालन न करना, विशेषकर वित्तीय पारदर्शिता के संबंध में।
* **जागरूकता का अभाव:** होमबायर्स और छोटे प्रमोटरों के बीच रेरा के प्रावधानों और अधिकारों के प्रति जागरूकता की कमी।
4. **आगे के उपाय:**
* **नियामक प्राधिकरणों का सशक्तिकरण:** राज्यों में नियामक प्राधिकरणों को अधिक कार्यात्मक और प्रशासनिक स्वायत्तता प्रदान करना, पर्याप्त वित्तीय और मानव संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करना।
* **मानक संचालन प्रक्रियाएँ (SOPs):** रेरा के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए मानक संचालन प्रक्रियाओं का विकास और सभी राज्यों में उनका एक समान पालन।
* **नियमित संवाद और समन्वय:** आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा राज्य सरकारों तथा हितधारकों के साथ नियमित विचार-विमर्श।
* **प्रौद्योगिकी का उपयोग:** पंजीकरण और शिकायत निवारण प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म का अधिक उपयोग।
* **जागरूकता अभियान:** होमबायर्स और प्रमोटरों के लिए रेरा के प्रावधानों के बारे में व्यापक जागरूकता अभियान।
5. **निष्कर्ष:** रेरा ने रियल एस्टेट क्षेत्र में महत्वपूर्ण सुधार लाए हैं, लेकिन इसके पूर्ण प्रभावी कार्यान्वयन के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के बीच निरंतर समन्वय और नियामक निकायों को मजबूत करना आवश्यक है।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
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