12 Aug लोकसभा ने बिना बहस के खनिज कानून संशोधन विधेयक पारित किया, जानिए क्या है बदलाव
✎ खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 का उद्देश्य खनिज अधिकारों पर राज्य सरकारों द्वारा लगाए जाने वाले अतिरिक्त करों को प्रतिबंधित करके और खनिज क्षेत्र में केंद्र के नियंत्रण को बढ़ाकर राजकोषीय स्थिरता लाना है, जिससे…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — भारतीय संविधान: संघ और राज्यों के कार्य और उत्तरदायित्व, संघवाद से संबंधित मुद्दे और चुनौतियाँ, स्थानीय स्तर तक शक्तियों और वित्त का हस्तांतरण तथा उसकी चुनौतियाँ। | GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाना, संवृद्धि, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय।
- Prelims: खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957, MMDR अधिनियम संशोधन, खनिज अधिकार, राज्य सरकारों द्वारा कर लगाने की शक्ति, संघवाद, आर्थिक संवृद्धि, आत्मनिर्भर भारत, विकसित भारत 2047
- Essay: भारत में संघवाद की बदलती प्रकृति और केंद्र-राज्य वित्तीय संबंध, खनिज संसाधनों का सतत विकास और राष्ट्रीय आर्थिक संवृद्धि
त्वरित पुनरावृत्ति: खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 का उद्देश्य खनिज अधिकारों पर राज्य सरकारों द्वारा लगाए जाने वाले अतिरिक्त करों को प्रतिबंधित करके और खनिज क्षेत्र में केंद्र के नियंत्रण को बढ़ाकर राजकोषीय स्थिरता लाना है, जिससे राष्ट्रीय आर्थिक संवृद्धि को बढ़ावा मिलेगा।
यह खबर चर्चा में क्यों?
लोकसभा ने हाल ही में खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को बिना किसी बहस के ध्वनि मत से पारित कर दिया।
पृष्ठभूमि
- यह अधिनियम खनिजों के विकास और विनियमन के लिए केंद्र और राज्य सरकारों की शक्तियों को परिभाषित करता है।
- संविधान की सातवीं अनुसूची के तहत, खनन और खनिजों का विनियमन समवर्ती सूची में आता है, जहाँ केंद्र और राज्य दोनों कानून बना सकते हैं।
- राज्य सरकारें अतीत में खनिज अधिकारों या खनिज-युक्त भूमि पर विभिन्न प्रकार के कर, उपकर या अन्य शुल्क लगाती रही हैं।
- केंद्र सरकार का तर्क है कि राज्य सरकारों द्वारा लगाए गए ये अतिरिक्त शुल्क खनिज क्षेत्र में अनिश्चितता पैदा करते हैं और राष्ट्रीय आर्थिक संवृद्धि को बाधित करते हैं।
- यह संशोधन आत्मनिर्भर भारत और 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्यों को प्राप्त करने के उद्देश्य से खनिज क्षेत्र में राजकोषीय स्थिरता और पूर्वानुमेयता लाने का प्रयास करता है।
खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 क्या है?
- इसका मुख्य प्रावधान यह है कि कोई भी राज्य सरकार खनिज अधिकारों पर कोई कर, उपकर या अन्य शुल्क (किसी भी नाम से) नहीं लगाएगी।
- यह प्रावधान खनिज-युक्त भूमि पर भी लागू होगा, चाहे वह खनिज मात्रा, खनिज मूल्य, रॉयल्टी या किसी अन्य आधार पर हो, सिवाय केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित शर्तों या प्रतिबंधों के।
- विधेयक MMDR अधिनियम में एक नई धारा डालने का प्रस्ताव करता है जो इस प्रतिबंध को कानूनी रूप देगी।
- यह भी प्रस्तावित है कि इस संशोधन अधिनियम के प्रारंभ होने से पहले राज्य सरकार के पास जमा नहीं किए गए या उसके द्वारा वसूल नहीं किए गए ऐसे किसी भी कर, उपकर या अन्य शुल्क को सभी महत्वपूर्ण समय पर अमान्य माना जाएगा।
- हालांकि, संशोधन अधिनियम के प्रारंभ होने से पहले राज्य सरकार के पास पहले से जमा किए गए या उसके द्वारा वसूल किए गए ऐसे किसी भी कर, उपकर या अन्य शुल्क को वापस नहीं किया जाएगा।
- विधेयक का उद्देश्य खनिज क्षेत्र में राजकोषीय व्यवस्था में निश्चितता, स्थिरता और पूर्वानुमेयता प्रदान करना है, जिससे राष्ट्रीय आर्थिक संवृद्धि को बढ़ावा मिलेगा।
- यह विधेयक केंद्र सरकार को MMDR अधिनियम के तहत निर्धारित मापदंडों के अनुसार खनिज-युक्त भूमि के विनियमन को अपने नियंत्रण में लेने की शक्ति भी प्रदान करता है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| राज्य सरकारों द्वारा खनिज अधिकारों पर अतिरिक्त कर लगाने पर प्रतिबंध | खनिज क्षेत्र में राजकोषीय स्थिरता और निश्चितता सुनिश्चित करना। |
| केंद्र सरकार द्वारा खनिज-युक्त भूमि का विनियमन | खनिज विकास और विनियमन (MMDR) अधिनियम के तहत संघ के नियंत्रण को सुदृढ़ करना। |
| राज्य द्वारा लगाए गए किसी भी कर, उपकर या अन्य लेवी को अमान्य घोषित करना | खनिज क्षेत्र में एक समान कराधान व्यवस्था स्थापित करना। |
| पहले से जमा/वसूले गए करों की वापसी नहीं | राज्यों के राजस्व हितों की रक्षा करना, जबकि भविष्य के लिए एक नई व्यवस्था स्थापित करना। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- यह विधेयक खनिज क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देगा, जिससे राष्ट्रीय आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) को गति मिलेगी।
- राजकोषीय व्यवस्था में स्थिरता और निश्चितता से ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद मिलेगी।
- खनिजों पर करों और लेवी में क्षेत्रीय असमानताओं को कम करके, यह विधेयक घरेलू खनिज आपूर्ति को बढ़ावा देगा और आयात पर निर्भरता कम करेगा।
संघवाद और केंद्र-राज्य संबंध
- यह विधेयक खनिज अधिकारों पर राज्यों की कराधान शक्ति को सीमित करता है, जिससे केंद्र सरकार का नियंत्रण बढ़ता है।
- खनिज-युक्त भूमि के विनियमन पर केंद्र का अधिक नियंत्रण संघवाद (Federalism) के सिद्धांतों पर बहस को जन्म दे सकता है।
शासन और नीतिगत प्रभाव
- यह खनिज क्षेत्र में नीतिगत स्थिरता प्रदान करेगा, जिससे उद्योग के लिए दीर्घकालिक योजना बनाना आसान होगा।
- एक समान कराधान व्यवस्था से व्यापार करने में आसानी होगी और खनिज संसाधनों के कुशल उपयोग को बढ़ावा मिलेगा।
चुनौतियाँ
1. राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता पर प्रभाव
- खनिज अधिकारों पर कर लगाने की शक्ति के प्रतिबंध से राज्यों के राजस्व में कमी आ सकती है, जिससे उनकी वित्तीय स्वायत्तता (Financial Autonomy) प्रभावित होगी।
- यह केंद्र-राज्य वित्तीय संबंधों में तनाव पैदा कर सकता है, खासकर उन राज्यों के लिए जो खनिज राजस्व पर अत्यधिक निर्भर हैं।
यूपीएससी लिंक: राजकोषीय संघवाद, केंद्र-राज्य संबंध
2. संसदीय बहस का अभाव
- लोकसभा में बिना बहस के विधेयक पारित होने से लोकतांत्रिक प्रक्रिया की गुणवत्ता पर सवाल उठते हैं।
- महत्वपूर्ण विधेयकों पर पर्याप्त चर्चा के अभाव से नीति निर्माण में पारदर्शिता और जवाबदेही कम हो सकती है।
यूपीएससी लिंक: संसदीय प्रक्रिया, लोकतांत्रिक शासन
3. संघवाद के सिद्धांत
- खनिज-युक्त भूमि के विनियमन पर केंद्र का बढ़ता नियंत्रण संघवाद के सिद्धांतों के अनुरूप राज्यों की भूमिका पर प्रश्नचिह्न लगाता है।
- संविधान की सातवीं अनुसूची के तहत खनन से संबंधित विषयों पर केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों का संतुलन महत्वपूर्ण है।
यूपीएससी लिंक: संघवाद, केंद्र-राज्य विधायी संबंध
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| राज्यों के राजस्व का नुकसान | खनिज अधिकारों पर कर लगाने की शक्ति के प्रतिबंध से राज्यों की आय में कमी आएगी। |
| केंद्र-राज्य संबंधों में तनाव | राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता पर प्रभाव से संघवाद पर बहस और विवाद बढ़ सकता है। |
| लोकतांत्रिक प्रक्रिया की गुणवत्ता | बिना बहस के महत्वपूर्ण विधेयक पारित होने से संसदीय लोकतंत्र की भावना कमजोर होती है। |
| खनिज संसाधनों पर नियंत्रण | खनिज-युक्त भूमि के विनियमन पर केंद्र का बढ़ता नियंत्रण राज्यों की भूमिका को कम कर सकता है। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (National Green Hydrogen Mission)
आगे की राह
- केंद्र और राज्यों के बीच खनिज राजस्व साझाकरण के लिए एक पारदर्शी और न्यायसंगत तंत्र विकसित किया जाना चाहिए।
- महत्वपूर्ण विधेयकों पर संसद में पर्याप्त बहस और चर्चा सुनिश्चित की जानी चाहिए ताकि सभी हितधारकों के विचारों को शामिल किया जा सके।
- खनिज क्षेत्र में केंद्र और राज्यों के बीच सहयोग और समन्वय को बढ़ावा दिया जाना चाहिए ताकि राष्ट्रीय लक्ष्यों को प्राप्त किया जा सके।
- राज्यों को खनिज संसाधनों के कुशल प्रबंधन और सतत विकास के लिए तकनीकी और वित्तीय सहायता प्रदान की जानी चाहिए।
- खनिज क्षेत्र में निवेश को आकर्षित करने के लिए एक स्थिर और पूर्वानुमानित नीतिगत ढाँचा बनाए रखना चाहिए, जिसमें राज्यों के हितों का भी ध्यान रखा जाए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक · संघवाद · राजकोषीय संघवाद · खनिज क्षेत्र में कराधान · राज्य और केंद्र के संबंध · आत्मनिर्भर भारत · विकसित भारत 2047 · आर्थिक संवृद्धि · संवैधानिक प्रावधान · खनन विनियमन · राजस्व बंटवारा · विधायी प्रक्रिया
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 246: संघ और राज्यों के बीच विधायी शक्तियों का वितरण
- सातवीं अनुसूची: संघ, राज्य और समवर्ती सूचियाँ
- अनुच्छेद 268: संघ द्वारा लगाए गए, किंतु राज्यों द्वारा संगृहीत और विनियोजित शुल्क
- अनुच्छेद 282: संघ या राज्य द्वारा अपने राजस्व से व्यय
अवधारणा प्रवाह
खनिज विकास और विनियमन (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित → राज्य सरकारों द्वारा खनिज अधिकारों पर अतिरिक्त कर लगाने पर प्रतिबंध → खनिज क्षेत्र में राजकोषीय स्थिरता और निश्चितता → घरेलू खनिज आपूर्ति को प्रोत्साहन और आयात में कमी → राष्ट्रीय आर्थिक संवृद्धि और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य की प्राप्ति
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 भारत में खनन क्षेत्र को नियंत्रित करने वाला प्राथमिक कानून है।
2. भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची के तहत ‘खनिज’ समवर्ती सूची का विषय है, जिससे केंद्र और राज्य दोनों कानून बना सकते हैं।
3. हालिया संशोधन विधेयक राज्यों को खनिज अधिकारों पर अतिरिक्त कर लगाने से प्रतिबंधित करता है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है। खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 (Mines and Minerals (Development and Regulation) Act, 1957) भारत में खनन क्षेत्र को नियंत्रित करने वाला प्राथमिक कानून है। कथन 2 गलत है। भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची के तहत ‘खनिज’ राज्य सूची का विषय नहीं है, बल्कि ‘खान और खनिजों का विनियमन और विकास’ संघ सूची की प्रविष्टि 54 के तहत आता है, जिससे केंद्र सरकार को इस पर कानून बनाने की शक्ति मिलती है। कथन 3 सही है। हालिया संशोधन विधेयक राज्यों को खनिज अधिकारों पर अतिरिक्त कर, उपकर या अन्य लेवी लगाने से प्रतिबंधित करता है।
Q2. अभिकथन (A): खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 का उद्देश्य खनिज क्षेत्र में राजकोषीय शासन में निश्चितता और स्थिरता लाना है।
कारण (R): राज्यों द्वारा खनिजों पर असंतुलित कर लगाने से क्षेत्रीय असमानताएँ बढ़ती हैं और राष्ट्रीय आर्थिक संवृद्धि बाधित होती है।
- A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
- A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
- A असत्य है, लेकिन R सत्य है।
उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है, क्योंकि विधेयक का एक मुख्य उद्देश्य खनिज क्षेत्र में राजकोषीय शासन को स्थिर और अनुमानित बनाना है। कारण (R) भी सही है, क्योंकि राज्यों द्वारा लगाए गए असंतुलित करों से क्षेत्रीय असमानताएँ उत्पन्न हो सकती हैं, जिससे घरेलू खनिज आपूर्ति महंगी हो सकती है और आयात में वृद्धि हो सकती है, जो अंततः राष्ट्रीय आर्थिक संवृद्धि को प्रभावित कर सकता है। कारण (R) अभिकथन (A) की सही व्याख्या करता है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ हाल ही में पारित खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 के प्रमुख प्रावधानों का विश्लेषण कीजिए। यह विधेयक भारत में संघवाद, विशेषकर राजकोषीय संघवाद, को किस प्रकार प्रभावित करता है? (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 का संक्षिप्त उल्लेख और हालिया संशोधन विधेयक, 2026 के पारित होने का संदर्भ।
2. विधेयक के प्रमुख प्रावधान: राज्यों द्वारा खनिज अधिकारों पर अतिरिक्त कर/उपकर लगाने पर प्रतिबंध, केंद्र द्वारा खनिज-युक्त भूमि के विनियमन पर नियंत्रण का विस्तार, और पहले से जमा/वसूले गए करों की वापसी न होने का प्रावधान।
3. संघवाद पर प्रभाव: संघ सूची की प्रविष्टि 54 के तहत केंद्र की विधायी शक्ति का उल्लेख। केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों के संतुलन पर प्रभाव का विश्लेषण।
4. राजकोषीय संघवाद पर प्रभाव: राज्यों के राजस्व स्रोतों पर प्रभाव, केंद्र और राज्यों के बीच वित्तीय संबंधों में संभावित तनाव, और खनिज क्षेत्र में एकरूप राजकोषीय नीति के तर्क का मूल्यांकन।
5. विधेयक के निहितार्थ: ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्यों को प्राप्त करने में खनिज क्षेत्र की भूमिका, निवेश और आर्थिक संवृद्धि पर संभावित प्रभाव, और क्षेत्रीय असमानताओं को कम करने का तर्क।
6. निष्कर्ष: केंद्र और राज्यों के बीच सहयोग और समन्वय के महत्व पर बल देते हुए एक संतुलित निष्कर्ष।
स्रोत: The Hindu
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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