वन्दे मातरम् को कानूनी संरक्षण देने वाले विधेयक का सीपीआई(एम) ने किया विरोध

वन्दे मातरम् को कानूनी संरक्षण देने वाले विधेयक का सीपीआई(एम) ने किया विरोध — CPI(M) Opposition to Vande Mataram Legal Protection Bill

वन्दे मातरम् को कानूनी संरक्षण देने वाले विधेयक का सीपीआई(एम) ने किया विरोध

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — भारतीय संविधान – ऐतिहासिक आधार, विकास, विशेषताएँ, संशोधन, महत्त्वपूर्ण प्रावधान और बुनियादी संरचना  |  GS Paper II — संघ एवं राज्यों के कार्य तथा उत्तरदायित्व, संघीय ढाँचे से संबंधित विषय एवं चुनौतियाँ  |  GS Paper II — विभिन्न घटकों के बीच शक्तियों का पृथक्करण, विवाद निवारण तंत्र तथा संस्थाएँ  |  GS Paper II — मौलिक अधिकार, मौलिक कर्तव्य और राज्य के नीति निदेशक सिद्धांत
  • Prelims: वंदे मातरम, राष्ट्रीय गीत, राष्ट्रीय गान, संविधान सभा, मौलिक कर्तव्य (अनुच्छेद 51A), राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971, अनुच्छेद 14, 19(1)(a), 21, 25, बिजो इमैनुएल बनाम केरल राज्य मामला
  • Essay: राष्ट्रीय प्रतीक और संवैधानिक मूल्य, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राष्ट्रीय सम्मान: संतुलन की चुनौती

त्वरित पुनरावृत्ति: ‘वंदे मातरम’ भारत का राष्ट्रीय गीत है, जिसे 24 जनवरी, 1950 को संविधान सभा द्वारा अपनाया गया था, हालांकि इसे राष्ट्रीय गान के समान संवैधानिक या वैधानिक दंडात्मक सुरक्षा प्राप्त नहीं है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

हाल ही में, CPI(M) सांसद जॉन ब्रिट्टास ने ‘राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026’ को पेश करने का विरोध किया है। इस विधेयक का उद्देश्य राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ को वैधानिक दर्जा और दंडात्मक सुरक्षा प्रदान करना है। CPI(M) का तर्क है कि यह विधेयक राष्ट्रीय गीत की स्थिति पर संवैधानिक समझौते का उल्लंघन करता है और संविधान के कई अनुच्छेदों के साथ असंगत है।

पृष्ठभूमि

  • संविधान सभा ने राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ और राष्ट्रीय गान ‘जन गण मन’ को समान संवैधानिक दर्जा नहीं दिया था। डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने 24 जनवरी, 1950 को घोषणा की थी कि ‘वंदे मातरम’ को ‘जन गण मन’ के समान सम्मान प्राप्त होगा, लेकिन इस संबंध में कोई औपचारिक संवैधानिक प्रस्ताव पारित नहीं किया गया था।
  • वर्तमान में, ‘राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971’ केवल राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रीय गान के अपमान के खिलाफ दंडात्मक सुरक्षा प्रदान करता है, राष्ट्रीय गीत को इसमें शामिल नहीं किया गया है।
  • संविधान का अनुच्छेद 51A(a) नागरिकों के मौलिक कर्तव्यों में संविधान, राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रीय गान का सम्मान करना सूचीबद्ध करता है, लेकिन इसमें राष्ट्रीय गीत का उल्लेख नहीं है।
  • सर्वोच्च न्यायालय ने ‘बिजो इमैनुएल बनाम केरल राज्य’ मामले में फैसला सुनाया था कि किसी व्यक्ति को राष्ट्रीय गान गाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है, यदि यह उसकी धार्मिक मान्यताओं के विरुद्ध हो, बशर्ते वह उसका अनादर न करे।
  • गृह मंत्रालय ने जनवरी 2026 में राष्ट्रीय गीत पर प्रोटोकॉल आदेश जारी किए थे, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय ने इसमें हस्तक्षेप नहीं किया क्योंकि इन प्रोटोकॉल में कोई दंडात्मक परिणाम नहीं थे।
  • विधेयक के विरोध में अनुच्छेद 14 (समता का अधिकार), अनुच्छेद 19(1)(a) (वाक् और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता), अनुच्छेद 21 (प्राण और दैहिक स्वतंत्रता का अधिकार) और अनुच्छेद 25 (धर्म की स्वतंत्रता) का उल्लंघन होने की आशंका व्यक्त की गई है।

‘वंदे मातरम’ और इसका संवैधानिक संदर्भ

  • ‘वंदे मातरम’ भारत का राष्ट्रीय गीत है, जिसकी रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी। यह उनके उपन्यास ‘आनंदमठ’ से लिया गया है।
  • 24 जनवरी, 1950 को संविधान सभा ने ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रीय गीत के रूप में अपनाया। तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने घोषणा की कि इसे राष्ट्रीय गान ‘जन गण मन’ के समान दर्जा प्राप्त होगा।
  • हालांकि, संविधान में राष्ट्रीय गीत के लिए राष्ट्रीय गान के समान कोई विशिष्ट संवैधानिक प्रावधान या दंडात्मक सुरक्षा शामिल नहीं की गई है।
  • राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971, राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रीय गान के अपमान को दंडनीय अपराध बनाता है, लेकिन इसमें राष्ट्रीय गीत को शामिल नहीं किया गया है।
  • सर्वोच्च न्यायालय ने विभिन्न निर्णयों में राष्ट्रीय गीत के सम्मान को लेकर मार्गदर्शन दिया है, लेकिन इसे गाने की अनिवार्यता पर कोई बाध्यकारी निर्णय नहीं दिया है, खासकर जब यह धार्मिक स्वतंत्रता के विरुद्ध हो।
  • विधेयक का उद्देश्य ‘वंदे मातरम’ को वैधानिक दर्जा और दंडात्मक सुरक्षा प्रदान करके इसकी कानूनी स्थिति को राष्ट्रीय गान के बराबर लाना है, जिसे आलोचकों ने संविधान सभा के मूल इरादे के विपरीत बताया है।
  • संविधान के अनुच्छेद 51A(a) के तहत राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रीय गान का सम्मान करना मौलिक कर्तव्य है, जबकि राष्ट्रीय गीत का उल्लेख इसमें नहीं है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
राष्ट्रीय गीत को वैधानिक दर्जा यह विधेयक ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान के समान संवैधानिक दर्जा देने का प्रयास करता है।
अपमान के लिए दंडात्मक सुरक्षा विधेयक राष्ट्रीय गीत के अपमान को आपराधिक अपराध बनाने का प्रस्ताव करता है, जिसके लिए दंड का प्रावधान होगा।
संविधान सभा का निर्णय संविधान सभा ने राष्ट्रीय गीत को राष्ट्रगान के समान संवैधानिक दर्जा नहीं दिया था, जिसे विधेयक बदलने का प्रयास करता है।
मौलिक कर्तव्यों से संबंध विधेयक अनुच्छेद 51A(a) के तहत राष्ट्रीय गीत को शामिल करने की मांग करता है, जिसमें वर्तमान में केवल संविधान, राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान का उल्लेख है।
मौलिक अधिकारों पर प्रभाव राष्ट्रीय गीत से संबंधित आचरण को अपराधीकरण करने से बोलने की स्वतंत्रता, विवेक और धर्म के मौलिक अधिकारों पर प्रतिबंध लग सकता है।

महत्व

संवैधानिक महत्व

  • यह विधेयक राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ के संवैधानिक दर्जे को लेकर एक महत्वपूर्ण बहस छेड़ता है, जो संविधान सभा के मूल इरादों और बाद के न्यायिक निर्णयों से जुड़ा है।
  • यह राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान और मौलिक अधिकारों, विशेष रूप से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और धार्मिक स्वतंत्रता के बीच संतुलन स्थापित करने के महत्व को रेखांकित करता है।

कानूनी और विधायी महत्व

  • विधेयक ‘राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971’ (Prevention of Insults to National Honour Act, 1971) में संशोधन का प्रस्ताव करता है, जो वर्तमान में केवल राष्ट्रगान को दंडात्मक सुरक्षा प्रदान करता है।
  • यह संसद की कानून बनाने की शक्ति और संविधान के मूल ढांचे के सिद्धांतों के बीच संभावित टकराव को उजागर करता है।

सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व

  • यह विधेयक राष्ट्रीय पहचान, देशभक्ति और सांस्कृतिक विरासत के प्रतीकों के प्रति सम्मान के सामाजिक महत्व पर चर्चा को बढ़ावा देता है।
  • यह विभिन्न समुदायों और व्यक्तियों के लिए राष्ट्रीय गीत के अर्थ और व्याख्या से संबंधित संवेदनशील मुद्दों को उठाता है।

चुनौतियाँ

1. संवैधानिक वैधता

  • विधेयक संविधान सभा के उस निर्णय को बदलने का प्रयास करता है, जिसमें राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रगान को समान संवैधानिक दर्जा नहीं दिया गया था।
  • यह अनुच्छेद 51A(a) में राष्ट्रीय गीत को शामिल करने का प्रयास करता है, जबकि यह मूल रूप से वहां सूचीबद्ध नहीं है।

2. मौलिक अधिकारों का उल्लंघन

  • राष्ट्रीय गीत से संबंधित आचरण को अपराधीकरण करने से अनुच्छेद 19(1)(a) (वाक् और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता), अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) और अनुच्छेद 25 (धर्म की स्वतंत्रता) का उल्लंघन हो सकता है।
  • सर्वोच्च न्यायालय के ‘बिजो इमैनुअल बनाम केरल राज्य’ (Bijoe Emmanuel v. State of Kerala) मामले का हवाला दिया गया है, जिसमें धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार को बरकरार रखा गया था।

3. विधायी प्रक्रिया और संवैधानिक समझौता

  • विधेयक साधारण कानून के माध्यम से एक ऐसे संवैधानिक समझौते को बदलने का प्रयास करता है, जिसे संविधान सभा ने जानबूझकर स्थापित किया था।
  • यह संसद की कानून बनाने की शक्ति की सीमाओं और संविधान के मूल सिद्धांतों के सम्मान पर सवाल उठाता है।

4. न्यायिक हस्तक्षेप का पूर्ववृत्त

  • गृह मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय गीत पर प्रोटोकॉल आदेश जारी करने पर सर्वोच्च न्यायालय ने हस्तक्षेप नहीं किया था, क्योंकि उनमें कोई दंडात्मक परिणाम नहीं था। यह विधेयक इस स्थिति को बदल देगा।
  • यह विधेयक न्यायपालिका और विधायिका के बीच शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत पर सवाल उठाता है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
संवैधानिक स्थिति संविधान सभा ने राष्ट्रीय गीत को राष्ट्रगान के समान दर्जा नहीं दिया था।
मौलिक अधिकार अपराधीकरण से वाक्, विवेक और धर्म की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लग सकता है।
अनुच्छेद 51A(a) का दायरा मौलिक कर्तव्यों में राष्ट्रीय गीत का उल्लेख नहीं है, विधेयक इसे शामिल करना चाहता है।
न्यायिक मिसाल सर्वोच्च न्यायालय ने दंडात्मक परिणामों के अभाव में प्रोटोकॉल पर हस्तक्षेप नहीं किया था।
संघीय ढांचा राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के बीच संतुलन।

आगे की राह

  • विधेयक के संवैधानिक निहितार्थों और मौलिक अधिकारों पर इसके संभावित प्रभाव का गहन विश्लेषण किया जाना चाहिए।
  • संसद को संविधान सभा के मूल इरादों और राष्ट्रीय गीत के संबंध में स्थापित संवैधानिक समझौते पर विचार करना चाहिए।
  • विधेयक को ‘राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971’ के साथ-साथ अन्य संबंधित कानूनों के संदर्भ में जांचा जाना चाहिए।
  • नागरिक समाज, कानूनी विशेषज्ञों और विभिन्न हितधारकों के साथ व्यापक परामर्श किया जाना चाहिए ताकि सभी दृष्टिकोणों पर विचार किया जा सके।
  • सर्वोच्च न्यायालय के प्रासंगिक निर्णयों, विशेष रूप से ‘बिजो इमैनुअल बनाम केरल राज्य’ मामले के सिद्धांतों का सम्मान किया जाना चाहिए।
  • राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान को बढ़ावा देने के लिए दंडात्मक प्रावधानों के बजाय शिक्षा और जागरूकता जैसे वैकल्पिक तरीकों पर विचार किया जा सकता है।
  • यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि कोई भी कानून व्यक्तिगत स्वतंत्रता और संवैधानिक मूल्यों के साथ सामंजस्य स्थापित करे।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

वंदे मातरम · राष्ट्रीय गीत · राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971 · संवैधानिक स्थिति · मौलिक कर्तव्य · अनुच्छेद 51A(a) · अनुच्छेद 14 · अनुच्छेद 19(1)(a) · अनुच्छेद 21 · अनुच्छेद 25 · बिजोय इमैनुअल बनाम केरल राज्य · संवैधानिक नैतिकता

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 14’, ‘note’: ‘कानून के समक्ष समानता’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 19(1)(a)’, ‘note’: ‘वाक् और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता’}
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अवधारणा प्रवाह

सरकार ‘राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026’ पेश करती है।  →  विधेयक राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ को वैधानिक दर्जा और दंडात्मक सुरक्षा प्रदान करना चाहता है।  →  CPI(M) सांसद जॉन ब्रिट्टास विधेयक का विरोध करते हैं, इसे असंवैधानिक बताते हैं।  →  विरोध के मुख्य आधार: संविधान सभा का निर्णय, मौलिक अधिकारों का उल्लंघन (अनुच्छेद 14, 19(1)(a), 21, 25), और अनुच्छेद 51A(a) में राष्ट्रीय गीत का उल्लेख न होना।  →  विधेयक ‘बिजो इमैनुअल बनाम केरल राज्य’ जैसे सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों का खंडन करता है, जो मौलिक अधिकारों की रक्षा करते हैं।  →  विधेयक संवैधानिक समझौते को बदलने का प्रयास करता है, जिससे संवैधानिक वैधता पर सवाल उठते हैं।

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत के संविधान में राष्ट्रीय गीत को राष्ट्रीय गान के समान संवैधानिक दर्जा दिया गया है।
2. राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971 (Prevention of Insults to National Honour Act, 1971) राष्ट्रीय गीत को दंडात्मक संरक्षण प्रदान करता है।
3. संविधान का अनुच्छेद 51A(a) राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रीय गान का सम्मान करना मौलिक कर्तव्य के रूप में सूचीबद्ध करता है, लेकिन राष्ट्रीय गीत का उल्लेख नहीं करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 3
  3. केवल 1 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: केवल 3 — कथन 1 गलत है। संविधान सभा ने राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रीय गान को समान संवैधानिक दर्जा नहीं दिया। कथन 2 गलत है। राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971, की धारा 3 के तहत केवल राष्ट्रीय गान को दंडात्मक संरक्षण प्राप्त है। कथन 3 सही है। अनुच्छेद 51A(a) में राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रीय गान का सम्मान मौलिक कर्तव्य है, राष्ट्रीय गीत का नहीं।

Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा वाद (case) राष्ट्रीय गीत से संबंधित आपराधिक कृत्यों को वाक् एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, अंतरात्मा की स्वतंत्रता और धर्म की स्वतंत्रता के उल्लंघन के रूप में संदर्भित करता है?

  1. केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य
  2. मेनका गांधी बनाम भारत संघ
  3. बिजोय इमैनुअल बनाम केरल राज्य
  4. एस.आर. बोम्मई बनाम भारत संघ

उत्तर: बिजोय इमैनुअल बनाम केरल राज्य — बिजोय इमैनुअल बनाम केरल राज्य वाद में सर्वोच्च न्यायालय ने यह निर्णय दिया था कि राष्ट्रीय गान गाने से इनकार करने पर किसी को दंडित नहीं किया जा सकता, यदि वह उसका सम्मान करता है। यह वाद राष्ट्रीय गीत से संबंधित आपराधिक कृत्यों को वाक् एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, अंतरात्मा की स्वतंत्रता और धर्म की स्वतंत्रता के उल्लंघन के रूप में संदर्भित करता है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ को कानूनी संरक्षण प्रदान करने वाले विधेयक के विरोध के आलोक में, राष्ट्रीय गीत की संवैधानिक स्थिति और इससे जुड़े मौलिक अधिकारों के संभावित उल्लंघन पर चर्चा कीजिए। क्या संसद साधारण कानून के माध्यम से संविधान सभा के निर्णय को बदल सकती है? (250 शब्द)

रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ की संवैधानिक स्थिति का उल्लेख करें, जिसमें डॉ. राजेंद्र प्रसाद के वक्तव्य और संविधान सभा के निर्णय को शामिल करें। साथ ही, प्रस्तावित विधेयक के माध्यम से इसके दंडात्मक संरक्षण के प्रयासों और इससे अनुच्छेद 14, 19(1)(a), 21 और 25 जैसे मौलिक अधिकारों के संभावित उल्लंघन पर प्रकाश डालें। दूसरे भाग में, संसद की कानून बनाने की शक्ति और संविधान सभा के निर्णयों के बीच संतुलन पर चर्चा करें, विशेष रूप से ‘बिजोय इमैनुअल बनाम केरल राज्य’ जैसे न्यायिक निर्णयों का उल्लेख करते हुए।

स्रोत: The Hindu


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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