29 Jul विकसित ग्राम पंचायत योजना: ग्रामीण विकास में नया अध्याय, जानें कैसे तैयार होगी योजना
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — शासन, संविधान, राजव्यवस्था, सामाजिक न्याय और अंतर्राष्ट्रीय संबंध | GS Paper III — आर्थिक विकास, प्रौद्योगिकी, जैव विविधता, पर्यावरण, सुरक्षा और आपदा प्रबंधन
- Prelims: विकसित ग्राम पंचायत योजना (VGPP), VB-G RAM JI अधिनियम, 2025, ग्राम सभा, युक्तधारा पोर्टल, पंचायती राज संस्थाएँ, सहभागी नियोजन, क्षमता निर्माण, ग्रामीण विकास मंत्रालय
- Essay: भारत में ग्रामीण विकास: चुनौतियाँ और समाधान, स्थानीय स्वशासन और सहभागी लोकतंत्र का महत्व
त्वरित पुनरावृत्ति: विकसित ग्राम पंचायत योजना (VGPP) VB-G RAM JI अधिनियम, 2025 के तहत ग्राम सभाओं की भागीदारी से ग्रामीण विकास के लिए एक जीआईएस-आधारित, वैज्ञानिक और एकीकृत नियोजन प्रक्रिया है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री श्री कमलेश पासवान ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में ‘विकसित भारत – रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण): वीबी-जी राम जी अधिनियम, 2025’ के अंतर्गत ‘विकसित ग्राम पंचायत योजना (VGPP)’ के प्रावधानों और कार्यान्वयन की जानकारी दी। यह योजना ग्रामीण स्तर पर सहभागी नियोजन और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के माध्यम से समग्र विकास को बढ़ावा देने पर केंद्रित है, जिससे यह ग्रामीण भारत के सशक्तिकरण के लिए एक महत्वपूर्ण पहल बन जाती है।
पृष्ठभूमि
- भारत में ग्रामीण विकास हमेशा से एक प्राथमिकता रही है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन की गुणवत्ता में सुधार करना है।
- पंचायती राज संस्थाएँ (Panchayati Raj Institutions) भारतीय संविधान के 73वें संशोधन अधिनियम, 1992 के माध्यम से संवैधानिक दर्जा प्राप्त करने के बाद से ग्रामीण स्थानीय स्वशासन की आधारशिला रही हैं।
- इन संस्थाओं को ग्रामीण विकास योजनाओं के नियोजन और कार्यान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का अधिकार दिया गया है।
- हालांकि, प्रभावी नियोजन और कार्यान्वयन के लिए अक्सर तकनीकी सहायता और क्षमता निर्माण की आवश्यकता महसूस की जाती रही है।
- ‘विकसित भारत – रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण): वीबी-जी राम जी अधिनियम, 2025’ ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आजीविका के अवसरों को सुरक्षित करने के लिए एक व्यापक कानूनी ढाँचा प्रदान करता है।
- यह अधिनियम सहभागी नियोजन को बढ़ावा देता है, जिसमें ग्राम सभाओं को विकास कार्यों की पहचान और प्राथमिकता तय करने में केंद्रीय भूमिका दी गई है।
विकसित ग्राम पंचायत योजना (VGPP) क्या है?
- विकसित ग्राम पंचायत योजना (VGPP) ‘विकसित भारत – रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण): वीबी-जी राम जी अधिनियम, 2025’ की धारा 16 के अंतर्गत प्रत्येक ग्राम पंचायत द्वारा तैयार की जाने वाली एक सहभागी आधारित योजना है।
- इसका मुख्य उद्देश्य ग्राम पंचायत के समग्र विकास के लिए आवश्यक कार्यों की पहचान करना, उन्हें प्राथमिकता देना और योजनाबद्ध तरीके से उनका क्रियान्वयन करना है।
- ग्राम सभा इस योजना प्रक्रिया में केंद्रीय भूमिका निभाती है, जहाँ ग्राम पंचायत के समग्र विकास के लिए अनुमेय कार्यों की पहचान और उनकी प्राथमिकता निर्धारित की जाती है।
- अनुमोदित VGPP को बाद में मध्यवर्ती (ब्लॉक) और जिला पंचायत स्तरों पर एकीकृत किया जाता है, जिससे समग्र ब्लॉक और जिला योजनाएँ तैयार की जा सकें।
- योजना निर्माण में वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देने के लिए ‘युक्तधारा’ नामक एक जीआईएस-आधारित (GIS-based) योजना सहायक उपकरण का उपयोग किया जाता है। यह भू-स्थानिक जानकारी और विश्लेषणात्मक इनपुट प्रदान करता है।
- इस योजना के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए राष्ट्रीय, राज्य, जिला, ब्लॉक और ग्राम पंचायत स्तरों पर क्षमता निर्माण (Capacity Building) और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
- राज्य सरकारों पर जिला कार्यक्रम समन्वयक और कार्यक्रम अधिकारी को प्रभावी कार्यान्वयन हेतु आवश्यक कार्मिक एवं तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराने का दायित्व है, जिसमें रोजगार सहायकों और कंप्यूटर ऑपरेटरों की नियुक्ति भी शामिल है।
- योजना में संलग्न मेट (Mate) को अर्ध-कुशल श्रमिकों की वेतन दर पर भुगतान किया जाता है, जिसका निर्धारण संबंधित राज्य सरकार/संघ राज्य क्षेत्र प्रशासन द्वारा किया जाता है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| भागीदारी आधारित योजना प्रक्रिया | ग्राम सभा द्वारा कार्यों की पहचान और प्राथमिकता निर्धारण, जिससे स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप विकास सुनिश्चित होता है। |
| VB-GRAM-जी अधिनियम, 2025 की धारा 16 | प्रत्येक ग्राम पंचायत के लिए विकसित ग्राम पंचायत योजना (VGPP) तैयार करना अनिवार्य बनाती है। |
| युक्तधारा पोर्टल | वैज्ञानिक योजना निर्माण के लिए भू-स्थानिक जानकारी और विश्लेषणात्मक इनपुट प्रदान करने वाला GIS-आधारित उपकरण। |
| योजनाओं का एकीकरण | अनुमोदित VGPP को मध्यवर्ती और जिला पंचायत स्तरों पर एकीकृत करना, जिससे समग्र ब्लॉक और जिला योजनाएँ बन सकें। |
| क्षमता निर्माण पर जोर | राष्ट्रीय से ग्राम पंचायत स्तर तक प्रशिक्षण कार्यक्रम, जिसमें VGPP तैयारी और प्रौद्योगिकी उपयोग शामिल है। |
| मेट को भुगतान | योजना में संलग्न मेट को अर्ध-कुशल श्रमिकों की वेतन दर पर भुगतान, जो राज्य सरकारों द्वारा निर्धारित होता है। |
महत्व
शासन और विकेंद्रीकरण
- यह योजना स्थानीय स्वशासन को मजबूत करती है, क्योंकि ग्राम सभा और ग्राम पंचायतें सीधे अपनी विकास योजनाओं में शामिल होती हैं।
- भागीदारी आधारित दृष्टिकोण से निर्णय लेने की प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ती है, जिससे जमीनी स्तर पर सुशासन को बढ़ावा मिलता है।
- पंचायती राज संस्थाओं (PRIs) को सशक्त बनाता है, जो 73वें संविधान संशोधन अधिनियम का मूल उद्देश्य है।
आर्थिक और सामाजिक विकास
- स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार योजनाएँ बनने से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आजीविका के अवसरों का सृजन होता है।
- बुनियादी ढाँचे के विकास और सेवाओं की उपलब्धता में सुधार होता है, जिससे ग्रामीण जीवन स्तर ऊपर उठता है।
- युक्तधारा जैसे तकनीकी उपकरणों का उपयोग संसाधनों के कुशल आवंटन और विकास परियोजनाओं की प्रभावशीलता को बढ़ाता है।
प्रौद्योगिकी और क्षमता निर्माण
- GIS-आधारित युक्तधारा पोर्टल वैज्ञानिक और डेटा-संचालित योजना निर्माण को बढ़ावा देता है, जिससे निर्णय लेने में सटीकता आती है।
- विभिन्न स्तरों पर व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम पदाधिकारियों और कर्मचारियों की दक्षता बढ़ाते हैं, जिससे योजना का प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित होता है।
- डिजिटल शिक्षण संसाधन और तकनीकी सहायता राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को योजना के सफल क्रियान्वयन में मदद करते हैं।
चुनौतियाँ
1. क्षमता निर्माण और जागरूकता
- ग्राम पंचायत स्तर पर पदाधिकारियों और ग्राम सभा के सदस्यों के बीच योजना प्रक्रिया, युक्तधारा पोर्टल और तकनीकी उपकरणों के उपयोग के बारे में पर्याप्त जागरूकता और प्रशिक्षण की कमी एक चुनौती हो सकती है।
- प्रशिक्षण कार्यक्रमों की गुणवत्ता और पहुँच सुनिश्चित करना, विशेषकर दूरदराज के क्षेत्रों में, महत्वपूर्ण है।
यूपीएससी लिंक: शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही
2. संसाधन और वित्तीय स्वायत्तता
- ग्राम पंचायतों के पास योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधन और मानव शक्ति की कमी हो सकती है।
- राज्य सरकारों द्वारा समय पर धन का आवंटन और मेट जैसे कर्मचारियों के वेतन का भुगतान सुनिश्चित करना आवश्यक है।
यूपीएससी लिंक: पंचायती राज संस्थाओं का वित्तपोषण
3. डेटा की उपलब्धता और गुणवत्ता
- युक्तधारा जैसे GIS-आधारित उपकरण के लिए सटीक और अद्यतन भू-स्थानिक डेटा की उपलब्धता महत्वपूर्ण है, जिसकी गुणवत्ता ग्रामीण क्षेत्रों में एक चुनौती हो सकती है।
- डेटा संग्रह और सत्यापन की प्रक्रिया को सुदृढ़ करना आवश्यक है।
यूपीएससी लिंक: ई-गवर्नेंस और डेटा प्रबंधन
4. अंतर-स्तरीय समन्वय
- ग्राम पंचायत, मध्यवर्ती पंचायत और जिला पंचायत स्तरों के बीच योजनाओं के एकीकरण और समन्वय में चुनौतियाँ आ सकती हैं।
- विभिन्न सरकारी विभागों और एजेंसियों के बीच सहयोग सुनिश्चित करना भी महत्वपूर्ण है।
यूपीएससी लिंक: संघवाद और केंद्र-राज्य संबंध
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| तकनीकी पहुँच और उपयोग | ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी और डिजिटल साक्षरता की कमी युक्तधारा पोर्टल के प्रभावी उपयोग में बाधा बन सकती है। |
| राजनीतिक हस्तक्षेप | स्थानीय स्तर पर राजनीतिक हस्तक्षेप योजना निर्माण और कार्यान्वयन की निष्पक्षता और प्रभावशीलता को प्रभावित कर सकता है। |
| ग्राम सभा की सक्रिय भागीदारी | ग्राम सभा की बैठकों में कोरम और सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना, विशेषकर कमजोर वर्गों की, एक चुनौती है। |
| योजनाओं का दोहराव | विभिन्न केंद्रीय और राज्य योजनाओं के बीच दोहराव या असंगति से संसाधनों का अपव्यय हो सकता है। |
| निगरानी और मूल्यांकन | योजना के कार्यान्वयन की प्रभावी निगरानी और मूल्यांकन तंत्र की कमी से जवाबदेही प्रभावित हो सकती है। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- विकसित भारत – रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण): VB-GRAM-जी
आगे की राह
- ग्राम सभाओं की नियमित और प्रभावी बैठकों को सुनिश्चित करने के लिए जागरूकता अभियान चलाए जाएँ और कमजोर वर्गों की भागीदारी को प्रोत्साहित किया जाए।
- युक्तधारा पोर्टल के उपयोग को सरल बनाने और ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल साक्षरता बढ़ाने के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम और सहायता केंद्र स्थापित किए जाएँ।
- ग्राम पंचायतों को पर्याप्त वित्तीय संसाधन और मानव शक्ति (जैसे रोजगार सहायक और कंप्यूटर ऑपरेटर) प्रदान किए जाएँ, और उनके वेतन का समय पर भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
- योजनाओं के कार्यान्वयन की प्रगति की निगरानी के लिए एक मजबूत, पारदर्शी और वास्तविक समय पर आधारित निगरानी तंत्र विकसित किया जाए।
- विभिन्न स्तरों पर पंचायती राज संस्थाओं और संबंधित सरकारी विभागों के बीच प्रभावी समन्वय और सहयोग स्थापित किया जाए।
- क्षमता निर्माण कार्यक्रमों को निरंतर जारी रखा जाए और उन्हें स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप अद्यतन किया जाए, जिसमें डिजिटल शिक्षण संसाधनों का अधिकतम उपयोग हो।
- ग्राम पंचायतों को अपनी विशिष्ट आवश्यकताओं के आधार पर योजनाएँ बनाने और लागू करने में अधिक स्वायत्तता प्रदान की जाए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
विकसित ग्राम पंचायत योजना · वीबी-जी राम जी अधिनियम, 2025 · ग्राम सभा · भागीदारी आधारित योजना · युक्तधारा पोर्टल · क्षमता निर्माण · विकेंद्रीकृत योजना · स्थानीय स्वशासन
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 40: ग्राम पंचायतों का संगठन
- अनुच्छेद 243: पंचायती राज की परिभाषाएँ
- अनुच्छेद 243A: ग्राम सभा
- अनुच्छेद 243G: पंचायतों की शक्तियाँ, प्राधिकार और उत्तरदायित्व
- ग्यारहवीं अनुसूची: पंचायतों के कार्यक्षेत्र
अवधारणा प्रवाह
VB-GRAM-जी अधिनियम, 2025 की धारा 16 → प्रत्येक ग्राम पंचायत द्वारा भागीदारी आधारित VGPP तैयार करना → ग्राम सभा द्वारा कार्यों की पहचान और प्राथमिकता निर्धारण → युक्तधारा पोर्टल का उपयोग कर वैज्ञानिक योजना निर्माण → अनुमोदित VGPP का मध्यवर्ती/जिला स्तर पर एकीकरण → समग्र ब्लॉक एवं जिला योजनाओं का निर्माण
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. विकसित ग्राम पंचायत योजना (वीजीपीपी) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वीबी-जी राम जी अधिनियम, 2025 की धारा 16 के अंतर्गत प्रत्येक ग्राम पंचायत को वीजीपीपी तैयार करनी होगी।
2. युक्तधारा एक जीआईएस-आधारित योजना सहायक उपकरण है जो केवल केंद्र सरकार के अधिकारियों के लिए उपलब्ध है।
3. वीजीपीपी का अनुमोदन ग्राम सभा द्वारा किया जाता है और उसके बाद इसे मध्यवर्ती एवं जिला पंचायत स्तरों पर समेकित किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है क्योंकि वीबी-जी राम जी अधिनियम, 2025 की धारा 16 के अंतर्गत प्रत्येक ग्राम पंचायत को भागीदारी आधारित योजना प्रक्रिया के माध्यम से वीजीपीपी तैयार करनी होगी। कथन 2 गलत है क्योंकि युक्तधारा पोर्टल तक पहुँच केवल उन अधिकृत पदाधिकारियों को दी जाती है जिन्हें संबंधित राज्य सरकारों/संघ राज्य क्षेत्र प्रशासनों द्वारा नियुक्त किया जाता है, न कि केवल केंद्र सरकार के अधिकारियों को। कथन 3 गलत है क्योंकि ग्राम सभा अनुमेय कार्यों की पहचान और प्राथमिकता निर्धारित करती है, जबकि ग्राम पंचायत अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार वीजीपीपी तैयार करती है। अनुमोदित वीजीपीपी को मध्यवर्ती एवं जिला पंचायत स्तरों पर समेकित किया जाता है।
Q2. विकसित भारत – रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण) (वीबी-जी राम जी) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वीबी-जी राम जी अधिनियम, 2025 की धारा 21 के अनुसार, राज्य सरकार पर यह दायित्व है कि वह प्रभावी कार्यान्वयन हेतु आवश्यक कार्मिक एवं तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराए।
2. इस मिशन के अंतर्गत योजना में संलग्न मेट को अर्ध-कुशल श्रमिकों की वेतन दर पर भुगतान किया जाता है।
3. क्षमता निर्माण इस मिशन का एक महत्वपूर्ण घटक नहीं है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- केवल 1
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 2
- केवल 3
उत्तर: केवल 1 और 2 — कथन 1 सही है क्योंकि वीबी-जी राम जी अधिनियम, 2025 की धारा 21 के अनुसार, राज्य सरकार पर यह दायित्व है कि वह जिला कार्यक्रम समन्वयक और कार्यक्रम अधिकारी को प्रभावी कार्यान्वयन हेतु आवश्यक कार्मिक एवं तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराए। कथन 2 सही है क्योंकि मिशन के अंतर्गत योजना में संलग्न मेट को अर्ध-कुशल श्रमिकों की वेतन दर पर भुगतान किया जाता है। कथन 3 गलत है क्योंकि क्षमता निर्माण को ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा अत्यधिक प्राथमिकता दी जाती है ताकि वीबी-जी राम जी का प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित हो सके।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ विकसित ग्राम पंचायत योजना (वीजीपीपी) स्थानीय स्वशासन को सशक्त बनाने और ग्रामीण विकास को बढ़ावा देने में किस प्रकार सहायक है? इस योजना के प्रभावी कार्यान्वयन में आने वाली चुनौतियों और उनके संभावित समाधानों पर चर्चा कीजिए। (250 शब्द)
रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में वीजीपीपी की भूमिका को रेखांकित करें कि यह कैसे ग्राम सभा की भागीदारी, वैज्ञानिक योजना निर्माण (युक्तधारा के माध्यम से) और विकेन्द्रीकृत नियोजन को बढ़ावा देकर स्थानीय स्वशासन को सशक्त करती है। दूसरे भाग में, कार्यान्वयन में आने वाली चुनौतियों जैसे क्षमता निर्माण की आवश्यकता, तकनीकी पहुँच, कार्मिकों की उपलब्धता और अंतर-स्तरीय समन्वय की कमी पर चर्चा करें। अंत में, इन चुनौतियों के समाधान के लिए प्रशिक्षण, डिजिटल साक्षरता, पर्याप्त वित्तीय और मानव संसाधन आवंटन तथा मजबूत निगरानी तंत्र जैसे उपायों का सुझाव दें।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
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