15 Oct ‘विशेष अभियान 6’: कोयला मंत्रालय ने स्वच्छता और ई-कचरा प्रबंधन पर तेज किया ध्यान
✎ ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, 2022 के अंतर्गत उत्पादकों पर विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR) लागू होता है, और ई-कचरे के नियामक अनुपालन की केंद्रीय निगरानी केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) करता है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — शासन (सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम, केंद्र सरकार की योजनाएँ और अभियान) | GS Paper III — पर्यावरण (ई-कचरा प्रबंधन, विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व, अपशिष्ट प्रबंधन)
- Prelims: ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, 2022, विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR), पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB), कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) की सहायक कंपनियाँ (ECL, WCL), सिंगरेनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड (SCCL) — संयुक्त स्वामित्व वाला उपक्रम, कोल माइन्स प्रोविडेंट फंड ऑर्गनाइजेशन (CMPFO), सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (CPSE) और उनका प्रशासनिक नियंत्रण
- Essay: सरकारी संस्थाओं में स्वच्छता और कार्यक्षमता: प्रशासनिक सुधार से सतत विकास तक, ई-कचरा: बढ़ता खतरा, विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व और चक्रीय अर्थव्यवस्था की चुनौती
त्वरित पुनरावृत्ति: ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, 2022 के अंतर्गत उत्पादकों पर विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR) लागू होता है, और ई-कचरे के नियामक अनुपालन की केंद्रीय निगरानी केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) करता है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
कोयला मंत्रालय ने ‘विशेष अभियान 6.0’ के कार्यान्वयन चरण के अंतर्गत अपने कार्यालयों और केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में स्वच्छता, स्थान के कुशल उपयोग और जिम्मेदार अपशिष्ट प्रबंधन को बढ़ावा देने के प्रयास तेज किए हैं। 15 अक्टूबर 2026 की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार नई दिल्ली के GPOA-3 की मुख्य प्रवेश लॉबी में ई-कचरा संग्रह अभियान आयोजित हुआ, जिसमें केंद्रीय कोयला और खान मंत्री तथा कोयला और खान राज्य मंत्री ने कियोस्क पर खराब इलेक्ट्रॉनिक सामान जमा किया। मंत्रालय ने CIL, NLCIL, SCCL और CMPFO के नोडल अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर समय-सीमा के भीतर लक्ष्य पूरे करने पर बल दिया। अभियान के मध्य तक 562 स्थलों की सफाई और कायाकल्प की सूचना है, ECL द्वारा पांडवेश्वर क्षेत्र में 15,000 वर्ग फुट में सफाई व सौंदर्यीकरण तथा WCL मुख्यालय में कम उपयोग वाले स्थान को ‘कॉर्पोरेट सुरक्षा कार्यालय’ में बदलने जैसे उदाहरण भी दिए गए।
पृष्ठभूमि
- भारत में सरकारी कार्यालयों और परिसरों में स्वच्छता तथा अनुपयोगी स्थानों के सुधार हेतु समय-समय पर विशेष अभियान चलाए जाते हैं। ‘विशेष अभियान’ की श्रृंखला इसी प्रशासनिक परंपरा का विस्तार है, जिसमें कार्यालयों के भीतर जवाबदेही और कार्य-संस्कृति पर ज़ोर रहता है।
- भारत में इलेक्ट्रॉनिक और विद्युत उपकरणों के बढ़ते उपयोग के साथ ई-कचरे की मात्रा लगातार बढ़ी है। इसमें सीसा, पारा और कैडमियम जैसे विषैले तत्व होते हैं, इसलिए असुरक्षित निपटान से मिट्टी, जल और वायु प्रदूषित होते हैं।
- ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, 2022 में उत्पादकों, पुनर्चक्रणकर्ताओं और उपभोक्ताओं की भूमिकाएँ तय की गई हैं। इसमें विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व के अंतर्गत उत्पादकों पर संग्रह और पुनर्चक्रण के लक्ष्य लागू होते हैं।
- कोयला क्षेत्र के उपक्रम खनन, भूमि और बड़े परिसरों के प्रबंधन से जुड़े हैं, इसलिए वहाँ अपशिष्ट प्रबंधन और भूमि के कुशल उपयोग की चुनौतियाँ भी स्वाभाविक हैं।
- केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (CPSE) प्रशासनिक रूप से संबंधित मंत्रालयों के अधीन कार्य करते हैं, और उनके प्रदर्शन की समीक्षा नोडल अधिकारियों और नियमित बैठकों के माध्यम से होती है।
ई-कचरा प्रबंधन और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम: मूल अवधारणाएँ
- ई-कचरा (E-waste) से आशय उन खराब, अप्रचलित या उपयोग-योग्य न रहे इलेक्ट्रॉनिक और विद्युत उपकरणों से है जिन्हें उपयोगकर्ता फेंक देते हैं। इनमें कंप्यूटर, मोबाइल, बैटरी और घरेलू उपकरण शामिल होते हैं।
- ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, 2022 पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत बनाए गए हैं और 1 अप्रैल 2023 से प्रभावी हुए। इनका उद्देश्य संग्रह, परिवहन, पुनर्चक्रण और निपटान की औपचारिक व्यवस्था बनाना है।
- विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR) में उत्पादक या आयातक अपने उत्पाद के जीवनचक्र के अंत तक जिम्मेदार रहता है। इसके तहत उन्हें निर्धारित मात्रा में ई-कचरा संग्रह और पुनर्चक्रण सुनिश्चित करना होता है।
- ई-कचरे के पुनर्चक्रण से तांबा, सोना, चांदी और एल्यूमीनियम जैसी धातुएँ पुनः प्राप्त होती हैं, जिससे संसाधन दक्षता और चक्रीय अर्थव्यवस्था को बल मिलता है।
- केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) ई-कचरा नियमों के अनुपालन की निगरानी और पंजीकरण से जुड़ी केंद्रीय तकनीकी भूमिका निभाता है। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड राज्य स्तर पर इसकी देखरेख करते हैं।
- कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) भारत की सबसे बड़ी कोयला उत्पादक कंपनी है और उसे महारत्न दर्जा प्राप्त है। ECL और WCL इसकी सहायक कंपनियाँ हैं। SCCL तेलंगाना सरकार और केंद्र सरकार के संयुक्त स्वामित्व वाला उपक्रम है।
- सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (CPSE) सरकारी स्वामित्व वाली कंपनियाँ हैं, जिनका प्रशासनिक नियंत्रण संबंधित मंत्रालय के पास होता है। ऐसे अभियान प्रशासनिक निर्देशों और समीक्षा तंत्र के माध्यम से लागू किए जाते हैं, न कि किसी संवैधानिक बाध्यता से।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता (Feature) | महत्व (Significance) |
|---|---|
| अभियान का स्वरूप | विशेष अभियान 6.0 (Vishesh Abhiyan 6.0) के कार्यान्वयन चरण के अंतर्गत कोयला मंत्रालय, उसके कार्यालयों और केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में स्वच्छता, स्थान के कुशल उपयोग और जिम्मेदार अपशिष्ट प्रबंधन पर एक साथ बल दिया गया है। |
| ई-कचरा संग्रह | नई दिल्ली के GPOA-3 की मुख्य प्रवेश लॉबी में विशेष कियोस्क स्थापित कर खराब इलेक्ट्रॉनिक सामान जमा कराया गया। इससे ई-कचरे के व्यवस्थित संग्रह का व्यावहारिक मॉडल सामने आया। |
| उपक्रमों की भागीदारी | कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) और उसकी सहायक कंपनियों, एनएलसी इंडिया लिमिटेड (NLCIL), सिंगरेनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड (SCCL) तथा कोल माइन्स प्रोविडेंट फंड ऑर्गनाइजेशन (CMPFO) के नोडल अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक हुई। |
| मध्य-चरण की उपलब्धि | कार्यान्वयन चरण के मध्य तक 562 स्थलों की सफाई और कायाकल्प किया गया, जिससे बेकार और अव्यवस्थित स्थानों को कार्यक्षम उपयोग में लाया गया। |
| स्थानिक पुनरुपयोग के उदाहरण | ECL द्वारा पांडवेश्वर क्षेत्र में 15,000 वर्ग फुट के परिसर की सफाई और सौंदर्यीकरण तथा WCL मुख्यालय में कम उपयोग वाले स्थान को ‘कॉर्पोरेट सुरक्षा कार्यालय’ में बदला गया। |
महत्व
पर्यावरणीय महत्व
- ई-कचरे में सीसा, पारा और कैडमियम जैसे विषैले तत्व होते हैं, इसलिए उसका असुरक्षित निपटान भूजल और मृदा को दूषित कर सकता है। संग्रह और वैज्ञानिक पुनर्चक्रण से इस जोखिम को कम किया जा सकता है।
- पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 (Environment (Protection) Act, 1986) के अंतर्गत बनाए गए ई-अपशिष्ट (प्रबंधन) नियम, 2022 (E-Waste (Management) Rules, 2022) में उत्पादकों की विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR) की व्यवस्था है, और सार्वजनिक संस्थाओं द्वारा ई-कचरे का जिम्मेदार निपटान इसी ढांचे के अनुरूप है।
प्रशासनिक और शासन-संबंधी महत्व
- सरकारी कार्यालयों में स्वच्छता और स्थान प्रबंधन को अभियान के रूप में संस्थागत बनाने से सार्वजनिक संसाधनों के दक्ष उपयोग का सिद्धांत व्यवहार में आता है।
- नोडल अधिकारियों की समीक्षा बैठक और तय समय-सीमा के लक्ष्य प्रशासनिक जवाबदेही और निगरानी-तंत्र को मजबूत करते हैं।
सार्वजनिक उपक्रम और परिचालन दक्षता
- कार्यस्थल का सुधार कर्मचारियों की सुरक्षा और कार्य-वातावरण से जुड़ा है, और खदान-क्षेत्र के परिसरों में मलबा तथा झाड़ियां हटाना सुरक्षा-जोखिम घटाने में सहायक है।
- मौजूदा बुनियादी ढांचे का पुनरुपयोग नई निर्माण-लागत के बिना कार्यक्षमता बढ़ाने का तरीका है, जो सार्वजनिक वित्त के विवेकपूर्ण उपयोग से जुड़ा है।
चुनौतियाँ
1. ई-कचरे की अनौपचारिक पुनर्चक्रण व्यवस्था
- भारत में ई-कचरे का बड़ा हिस्सा अनौपचारिक क्षेत्र में, बिना सुरक्षा उपायों के, तोड़ा और जलाया जाता है। इससे श्रमिकों के स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
- केवल संग्रह कियोस्क पर्याप्त नहीं है; आगे की कड़ी प्रमाणित पुनर्चक्रकों तक सुरक्षित परिवहन और रिकॉर्ड-आधारित हस्तांतरण की है।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण संरक्षण; सतत विकास; प्रदूषण नियंत्रण
2. सरकारी कार्यालयों में अभियान-आधारित प्रयासों की स्थिरता
- विशेष अभियान प्रायः एक निश्चित अवधि के लिए चलते हैं। अभियान समाप्त होने के बाद स्वच्छता और कचरा-प्रबंधन की आदतें बनी रहें, यह सुनिश्चित करना कठिन होता है।
- स्वच्छता को केवल सफाई-गतिविधि मानने के बजाय दैनिक कार्य-संस्कृति का हिस्सा बनाना आवश्यक है।
यूपीएससी लिंक: सुशासन; प्रशासनिक सुधार; लोक सेवा में नैतिकता
3. विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व का सीमित क्रियान्वयन
- EPR के अंतर्गत उत्पादकों को संग्रह और पुनर्चक्रण के लक्ष्य पूरे करने होते हैं, परंतु उपभोक्ता-स्तर पर जागरूकता और औपचारिक संग्रह-नेटवर्क अब भी सीमित हैं।
- सार्वजनिक संस्थाओं का अपना ई-कचरा ठीक से दर्ज और हस्तांतरित न होने पर लक्ष्य-आधारित निगरानी कठिन हो जाती है।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण शासन; विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व; उत्पाद-नीति
4. खनन-क्षेत्र में पर्यावरण और सुरक्षा का संतुलन
- कोयला और लिग्नाइट के क्षेत्र में खनन से भूमि-उपयोग, मलबा और अपशिष्ट की समस्याएं गंभीर होती हैं। परिसरों की सफाई और मलबा-निपटान इसी चुनौती का हिस्सा है।
- खनन-स्थलों पर पुनर्वास, वनस्पति-आवरण और मृदा-संरक्षण की दीर्घकालिक योजना आवश्यक है।
यूपीएससी लिंक: ऊर्जा और खनिज संसाधन; पर्यावरणीय प्रभाव आकलन; भूमि-क्षरण
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा (Issue) | चिंता (Concern) |
|---|---|
| ई-कचरे का अनौपचारिक निपटान | स्वास्थ्य और पर्यावरणीय जोखिम; औपचारिक पुनर्चक्रण-तंत्र तक सीमित पहुंच |
| अभियान की अवधि के बाद निरंतरता | कार्य-संस्कृति में स्थायी परिवर्तन की अनिश्चितता |
| उत्पादक-स्तर पर EPR का अनुपालन | लक्ष्य-पूर्ति की निगरानी और रिकॉर्ड की पारदर्शिता |
| सार्वजनिक संस्थाओं का अपना ई-कचरा | दर्ज, सुरक्षित और प्रमाणित हस्तांतरण की व्यवस्था की कमी |
| खनन-क्षेत्र में मलबा और भूमि-क्षरण | सुरक्षा-जोखिम और दीर्घकालिक पुनर्वास की चुनौती |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- विशेष अभियान 6.0 (Vishesh Abhiyan 6.0)
आगे की राह
- ई-कचरे का संग्रह और निपटान केवल प्रचार-गतिविधि तक सीमित न रखकर प्रमाणित पुनर्चक्रकों के साथ औपचारिक हस्तांतरण-व्यवस्था से जोड़ा जाए।
- सरकारी कार्यालयों और सार्वजनिक उपक्रमों के लिए ई-कचरे की मात्रा और उसके निपटान का रिकॉर्ड डिजिटल रूप में रखा जाए, ताकि लक्ष्यों की वास्तविक निगरानी हो सके।
- अभियान के लक्ष्यों को कार्यालय-वार और परिसर-वार मापने योग्य संकेतकों में बदला जाए, जिससे समय-सीमा की समीक्षा तथ्य-आधारित हो।
- स्वच्छता और कचरा-पृथक्करण को नियमित कार्य-व्यवस्था का हिस्सा बनाया जाए, और कर्मचारियों के प्रशिक्षण को इसका स्थायी घटक बनाया जाए।
- EPR के अंतर्गत उत्पादकों और उपभोक्ताओं के बीच संग्रह-केंद्रों की संख्या बढ़ाई जाए और सार्वजनिक जागरूकता अभियान चलाए जाएं।
- खनन-क्षेत्र के परिसरों में मलबा-प्रबंधन और वृक्षारोपण को खदान-पुनर्वास योजनाओं से समन्वित किया जाए।
- अनौपचारिक क्षेत्र के श्रमिकों के लिए औपचारिक पुनर्चक्रण-तंत्र में रोजगार और सुरक्षा-प्रशिक्षण के अवसर विकसित किए जाएं।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
विस्तारित उत्पादक दायित्व (Extended Producer Responsibility – EPR) · ई-अपशिष्ट (E-waste) प्रबंधन नियम, 2022 · पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 · प्रदूषक भुगतान सिद्धांत (Polluter Pays Principle) · सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (Public Sector Undertakings – PSUs) · वृत्ताकार अर्थव्यवस्था (Circular Economy) · अनौपचारिक क्षेत्र और पुनर्चक्रण · स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) (Swachh Bharat Mission – Urban) · अनुच्छेद 21 और स्वच्छ पर्यावरण · अनुच्छेद 48क और मौलिक कर्तव्य (अनुच्छेद 51क(छ)) · केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) · सतत विकास (Sustainable Development)
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 48A (DPSP): पर्यावरण संरक्षण और वन्यजीव की रक्षा का राज्य-दायित्व
- अनुच्छेद 51A(g) (मौलिक कर्तव्य): प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा और संवर्धन का नागरिक कर्तव्य
अवधारणा प्रवाह
ई-कचरे और कार्यालयी अपशिष्ट की बढ़ती मात्रा से स्वच्छता और स्थान-प्रबंधन की आवश्यकता उत्पन्न होती है। → विशेष अभियान 6.0 के अंतर्गत कोयला मंत्रालय और CPSE स्तर पर स्वच्छता, ई-कचरा संग्रह और मौजूदा स्थानों के पुनरुपयोग के लक्ष्य तय किए जाते हैं। → GPOA-3 जैसे स्थानों पर कियोस्क द्वारा ई-कचरे का संग्रह होता है और नोडल अधिकारियों की समीक्षा बैठकों से प्रगति की निगरानी होती है। → मध्य-चरण तक 562 स्थलों की सफाई और कायाकल्प जैसे ठोस परिणाम सामने आते हैं। → संग्रहित ई-कचरे का वैज्ञानिक पुनर्चक्रण और उत्पादकों की EPR-बाध्यताएं पर्यावरणीय सततता सुनिश्चित करती हैं। → अंततः कार्यस्थल की दक्षता, जवाबदेही और पर्यावरणीय संस्कृति का सुदृढ़ीकरण होता है।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ई-अपशिष्ट (प्रबंधन) नियम, 2022 पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत बनाए गए हैं।
2. ई-अपशिष्ट नियमों में उत्पादकों पर विस्तारित उत्पादक दायित्व (EPR) के अंतर्गत ई-अपशिष्ट के संग्रह और पुनर्चक्रण की जिम्मेदारी डाली गई है।
3. विस्तारित उत्पादक दायित्व के अंतर्गत ई-अपशिष्ट के संग्रह की जिम्मेदारी केवल केंद्र सरकार की है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: ई-अपशिष्ट नियम पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 की धारा 6 और 8 के अंतर्गत बनाए गए हैं। कथन 2 सही है: EPR में उत्पादक अपने उत्पाद के जीवन-चक्र के अंत तक संग्रह और पुनर्चक्रण की जिम्मेदारी उठाते हैं। कथन 3 गलत है, क्योंकि EPR की जिम्मेदारी उत्पादकों, आयातकों और पुनर्चक्रकों पर होती है, केवल केंद्र सरकार पर नहीं।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन (A) और कारण (R) का सही युग्म है?
कथन (A): कोयला खान भविष्य निधि संगठन (CMPFO) कोयला खानों के श्रमिकों के भविष्य निधि लाभों का प्रशासन करता है।
कारण (R): कोयला खान भविष्य निधि और विविध उपबंध अधिनियम, 1948 कोयला खानों के श्रमिकों पर लागू होता है।
- (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) का सही स्पष्टीकरण है।
- (A) और (R) दोनों सही हैं, परंतु (R), (A) का सही स्पष्टीकरण नहीं है।
- (A) सही है, परंतु (R) गलत है।
- (A) गलत है, परंतु (R) सही है।
उत्तर: (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) का सही स्पष्टीकरण है। — कोयला खान भविष्य निधि संगठन श्रमिकों के भविष्य निधि का प्रशासन करता है और इसका कानूनी आधार कोयला खान भविष्य निधि और विविध उपबंध अधिनियम, 1948 है। अधिनियम का लागू होना ही संगठन के कार्य-क्षेत्र को वैधानिक आधार देता है, इसलिए (R) (A) की सही व्याख्या है।
Q3. निम्नलिखित सुमेलित कीजिए:
सूची-I (विधि/संधि)
A. पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986
B. ई-अपशिष्ट (प्रबंधन) नियम, 2022
C. कोयला खान भविष्य निधि और विविध उपबंध अधिनियम, 1948
D. खतरनाक अपशिष्टों के सीमापारीय संचलन पर बेसल अभिसमय
सूची-II (विषय)
1. खतरनाक अपशिष्टों का सीमापारीय संचलन नियंत्रित करना
2. कोयला खान श्रमिकों की भविष्य निधि
3. पर्यावरण संरक्षण हेतु छत्र विधि (umbrella legislation)
4. ई-अपशिष्ट के पुनर्चक्रण और EPR का विनियमन
सही उत्तर चुनिए:
- A-3, B-4, C-2, D-1
- A-1, B-2, C-3, D-4
- A-3, B-2, C-4, D-1
- A-4, B-3, C-1, D-2
उत्तर: A-3, B-4, C-2, D-1 — पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 पर्यावरण संरक्षण की छत्र विधि है (A-3)। ई-अपशिष्ट नियम, 2022 पुनर्चक्रण और EPR का विनियमन करते हैं (B-4)। कोयला खान भविष्य निधि अधिनियम, 1948 श्रमिकों की भविष्य निधि से संबंधित है (C-2)। बेसल अभिसमय खतरनाक अपशिष्टों के सीमापारीय संचलन को नियंत्रित करता है (D-1)।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ ‘विस्तारित उत्पादक दायित्व (EPR) को ई-अपशिष्ट प्रबंधन की रीढ़ माना जाता है, किंतु भारत में इसका प्रभावी क्रियान्वयन अब भी सीमित है।’ समीक्षा कीजिए। सरकारी कार्यालयों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में चलाए जाने वाले स्वच्छता अभियान क्या उत्पादक-स्तर के दायित्व का विकल्प बन सकते हैं? तर्क दीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: MODEL-ANSWER SKELETON: (1) परिचय: कोयला मंत्रालय के ‘विशेष अभियान 6’ के अंतर्गत नई दिल्ली के GPOA-3 में ई-अपशिष्ट संग्रह कियोस्क, ईसीएल का पांडवेश्वर क्षेत्र में 15,000 वर्ग फुट की सफाई और डब्ल्यूसीएल द्वारा कम उपयोग वाले स्थान को कॉर्पोरेट सुरक्षा कार्यालय में बदलना, तथा 562 स्थलों की सफाई; इन्हें कार्यस्थल-स्तर की स्वच्छता के रूप में पहचानें। (2) EPR का आधार: ई-अपशिष्ट (प्रबंधन) नियम, 2022 (1 अप्रैल 2023 से प्रभावी); पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 की धाराएं 6 और 8; उत्पादकों द्वारा संग्रह लक्ष्य, पुनर्चक्रण लक्ष्य और EPR प्रमाणपत्रों का व्यापार; CPCB की निगरानी की भूमिका। (3) सैद्धांतिक आधार: प्रदूषक भुगतान सिद्धांत (Vellore Citizens Welfare Forum, 1996 में उल्लेख) और सावधानी सिद्धांत; वृत्ताकार अर्थव्यवस्था की अवधारणा। (4) संवैधानिक आधार: अनुच्छेद 21 में स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार (MC Mehta वाद श्रृंखला तथा Subhash Kumar बनाम बिहार राज्य, 1991); अनुच्छेद 48क (राज्य का दायित्व) और अनुच्छेद 51क(छ) (नागरिकों का मौलिक कर्तव्य)। (5) सरकारी उपक्रमों की भूमिका: CIL, NLC India Limited, सिंगरेनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड (केंद्र और तेलंगाना सरकार की संयुक्त कंपनी) और CMPFO; PSU स्तर पर स्वच्छता को प्रशासनिक नेतृत्व से प्रेरित करना बनाम बाजार-आधारित EPR का दायित्व; स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) का संदर्भ। (6) समीक्षा के मुख्य बिंदु: अनौपचारिक क्षेत्र में ई-अपशिष्ट का असंगठित पुनर्चक्रण और उसके स्वास्थ्य जोखिम; EPR का प्रमाणपत्र-आधारित ढांचा और उसकी पारदर्शिता; स्थल-सफाई और उत्पादक-दायित्व में अंतर (पहला प्रशासनिक परिसर का प्रबंधन है, दूसरा उत्पाद के पूरे जीवन-चक्र का उत्तरदायित्व)। (7) संतुलित दृष्टिकोण और निष्कर्ष: दोनों उपाय पूरक हैं, विकल्प नहीं; अंतिम निष्कर्ष में कानूनी प्रवर्तन, वित्तीय प्रोत्साहन, सार्वजनिक जागरूकता और औपचारिक पुनर्चक्रण क्षेत्र के सशक्तिकरण पर बल।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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