10 Aug विश्व आदिवासी दिवस: अराकू घाटी में सांस्कृतिक उत्साह, आदिवासी शिल्प प्रदर्शनी
✎ विश्व आदिवासी दिवस जनजातीय समुदायों के अधिकारों, संस्कृति और समावेशी विकास के महत्व को रेखांकित करता है, जिसके लिए सरकार विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से प्रयासरत है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper I — भारतीय समाज, जनजातीय संस्कृति | GS Paper II — सामाजिक न्याय, कल्याणकारी योजनाएँ, शासन | GS Paper III — आर्थिक विकास, समावेशी संवृद्धि
- Prelims: विश्व आदिवासी दिवस, जनजातीय कल्याण योजनाएँ, स्वयं सहायता समूह, मातृ मृत्यु दर, राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन
- Essay: समावेशी विकास: जनजातीय पहचान और मुख्यधारा का संगम, भारत में जनजातीय समुदायों का सशक्तिकरण: चुनौतियाँ और समाधान
त्वरित पुनरावृत्ति: विश्व आदिवासी दिवस जनजातीय समुदायों के अधिकारों, संस्कृति और समावेशी विकास के महत्व को रेखांकित करता है, जिसके लिए सरकार विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से प्रयासरत है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
हाल ही में, विश्व आदिवासी दिवस (World Adivasi Day) पूरे देश में सांस्कृतिक उत्साह के साथ मनाया गया, जिसमें जनजातीय हस्तशिल्प और व्यंजनों की प्रदर्शनियाँ आयोजित की गईं। इस अवसर पर, विभिन्न सरकारी अधिकारियों और प्रतिनिधियों ने जनजातीय समुदायों के समावेशी विकास (inclusive development) और उनकी पहचान, संस्कृति तथा परंपराओं के संरक्षण के लिए चल रही पहलों पर प्रकाश डाला।
पृष्ठभूमि
- भारत में जनजातीय समुदाय देश की जनसंख्या का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और उनकी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत है।
- संविधान के अनुच्छेद 342 के तहत राष्ट्रपति द्वारा अधिसूचित समुदायों को अनुसूचित जनजाति (Scheduled Tribes – STs) के रूप में जाना जाता है।
- सरकार ने जनजातीय समुदायों के सामाजिक-आर्थिक उत्थान के लिए विभिन्न योजनाएँ और कार्यक्रम शुरू किए हैं, जिनमें शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका और अवसंरचना विकास शामिल हैं।
- जनजातीय क्षेत्रों में विकास अक्सर भौगोलिक बाधाओं, अवसंरचना की कमी और मुख्यधारा से अलगाव के कारण चुनौतियों का सामना करता है।
- जनजातीय पहचान, संस्कृति और परंपराओं का संरक्षण समावेशी विकास के लिए महत्वपूर्ण है, ताकि वे अपनी विशिष्टता बनाए रखते हुए प्रगति कर सकें।
- स्वयं सहायता समूह (Self-Help Groups – SHGs) जनजातीय महिलाओं के सशक्तिकरण और वित्तीय समावेशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
विश्व आदिवासी दिवस क्या है और इसका महत्व क्या है?
- यह दिन विश्व के स्वदेशी लोगों के अधिकारों को बढ़ावा देने और उनकी रक्षा करने के लिए मनाया जाता है।
- संयुक्त राष्ट्र महासभा (United Nations General Assembly) ने दिसंबर 1994 में इस दिवस की घोषणा की थी।
- यह दिन 1982 में स्वदेशी आबादी पर संयुक्त राष्ट्र कार्य समूह (UN Working Group on Indigenous Populations) की पहली बैठक की तिथि को चिह्नित करता है।
- इस दिवस का उद्देश्य स्वदेशी समुदायों के सामने आने वाले मुद्दों जैसे गरीबी, भेदभाव, मानवाधिकारों का उल्लंघन और पर्यावरण क्षरण के बारे में जागरूकता बढ़ाना है।
- यह दिन स्वदेशी लोगों की समृद्ध संस्कृतियों, परंपराओं और ज्ञान प्रणालियों का सम्मान करने का अवसर भी प्रदान करता है।
- भारत में, यह दिवस जनजातीय समुदायों की सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करने और उनके कल्याण के लिए सरकारी प्रयासों को उजागर करने के लिए महत्वपूर्ण है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| विश्व आदिवासी दिवस का आयोजन | आदिवासी समुदायों की सांस्कृतिक पहचान, परंपराओं और विरासत को मान्यता देना तथा उनके अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाना। |
| सांस्कृतिक प्रदर्शन और हस्तशिल्प प्रदर्शनी | आदिवासी कला, संस्कृति और जीवन शैली का प्रदर्शन, जिससे उनकी समृद्ध विरासत को बढ़ावा मिलता है और आर्थिक अवसर भी सृजित होते हैं। |
| समावेशी विकास पर जोर | आदिवासी पहचान और संस्कृति को बनाए रखते हुए उनके सामाजिक-आर्थिक उत्थान के लिए सरकारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। |
| विभिन्न सरकारी योजनाओं का उल्लेख | आदिवासी समुदायों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका और बुनियादी ढांचे के विकास हेतु सरकार के प्रयासों को उजागर करना। |
| महिला स्वयं सहायता समूहों को वित्तीय सहायता | आदिवासी महिलाओं के सशक्तिकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में उनकी भागीदारी को बढ़ावा देना। |
महत्व
सामाजिक-सांस्कृतिक महत्व
- विश्व आदिवासी दिवस आदिवासी समुदायों की अद्वितीय सांस्कृतिक पहचान, परंपराओं और भाषाओं के संरक्षण तथा संवर्धन के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करता है।
- यह आयोजन आदिवासी कला, संगीत, नृत्य और हस्तशिल्प को प्रदर्शित करके सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देता है, जिससे मुख्यधारा के समाज में उनकी समझ और सम्मान बढ़ता है।
- यह आदिवासी अधिकारों, जैसे भूमि, संसाधन और आत्मनिर्णय के अधिकार, के बारे में जागरूकता बढ़ाने में मदद करता है, जो उनके गरिमापूर्ण जीवन के लिए आवश्यक हैं।
आर्थिक महत्व
- आदिवासी हस्तशिल्प और उत्पादों की प्रदर्शनी इन समुदायों के लिए आर्थिक अवसर पैदा करती है, जिससे उनकी आजीविका में सुधार होता है।
- स्वयं सहायता समूहों (Self-Help Groups) को वित्तीय सहायता प्रदान करने से आदिवासी महिलाओं को उद्यमिता और आर्थिक स्वतंत्रता की दिशा में सशक्त बनाया जाता है।
- कृषि ऋण मेले और रोजगार प्रकोष्ठ जैसी पहलें आदिवासी किसानों और युवाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में सहायता करती हैं।
शासन और नीतिगत महत्व
- यह दिवस सरकार को आदिवासी कल्याण के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराने और चल रही पहलों की समीक्षा करने का अवसर प्रदान करता है।
- विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों का उल्लेख आदिवासी विकास के लिए एक समग्र दृष्टिकोण को दर्शाता है, जिसमें स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क संपर्क और आजीविका शामिल हैं।
- यह समावेशी विकास के महत्व पर जोर देता है, जहाँ विकास प्रक्रिया में आदिवासी पहचान और संस्कृति का सम्मान किया जाता है और उसे संरक्षित किया जाता है।
चुनौतियाँ
1. आजीविका और आर्थिक सशक्तिकरण
- आदिवासी समुदायों के लिए स्थायी आजीविका के अवसरों की कमी, विशेषकर वन-आधारित आजीविका पर निर्भरता।
- बाजार तक पहुंच, कौशल विकास और वित्तीय समावेशन में चुनौतियाँ, जिससे उन्हें आर्थिक रूप से कमजोर होना पड़ता है।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय, समावेशी विकास
2. स्वास्थ्य और पोषण
- दूरस्थ क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं तक सीमित पहुंच और मातृ मृत्यु दर जैसी स्वास्थ्य चुनौतियों का सामना करना।
- कुपोषण और स्वच्छता संबंधी समस्याओं के कारण स्वास्थ्य संबंधी गंभीर मुद्दे।
यूपीएससी लिंक: मानव विकास, स्वास्थ्य सेवा
3. शिक्षा और कौशल विकास
- आदिवासी बच्चों के लिए शिक्षा तक पहुंच, गुणवत्ता और प्रासंगिकता में चुनौतियाँ, जिससे उच्च शिक्षा और रोजगार के अवसर प्रभावित होते हैं।
- आधुनिक अर्थव्यवस्था की आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल विकास कार्यक्रमों की कमी।
यूपीएससी लिंक: शिक्षा, मानव संसाधन विकास
4. सांस्कृतिक संरक्षण और पहचान
- आधुनिकता और बाहरी प्रभावों के कारण आदिवासी भाषाओं, परंपराओं और सांस्कृतिक प्रथाओं के क्षरण का खतरा।
- विकास परियोजनाओं के कारण विस्थापन और पारंपरिक भूमि तथा संसाधनों से अलगाव, जिससे उनकी सांस्कृतिक पहचान पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
यूपीएससी लिंक: संस्कृति, जनजातीय मामले
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| भूमि और वन अधिकार | वन अधिकार अधिनियम (Forest Rights Act) के प्रभावी कार्यान्वयन में चुनौतियाँ और पारंपरिक भूमि पर अतिक्रमण। |
| बुनियादी ढाँचा | दूरस्थ आदिवासी क्षेत्रों में सड़क, बिजली और संचार जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी। |
| सामाजिक बहिष्कार | भेदभाव और मुख्यधारा के समाज से अलगाव, जिससे उनके सामाजिक-आर्थिक विकास में बाधा आती है। |
| प्रशासनिक चुनौतियाँ | आदिवासी कल्याण योजनाओं के कार्यान्वयन में नौकरशाही की बाधाएँ और भ्रष्टाचार। |
| जलवायु परिवर्तन का प्रभाव | जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय क्षरण का आदिवासी समुदायों की आजीविका और पारंपरिक जीवन शैली पर प्रतिकूल प्रभाव। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- फूड इन PGRS योजना
- खेत बचाओ अभियान ऋण मेला
- ASR लक्ष्यम रोजगार प्रकोष्ठ
- जीरो मैटरनल मोर्टेलिटी रेट पहल
- अडावी थल्ली बाटा सड़क संपर्क कार्यक्रम
- फीडर एम्बुलेंस सेवाएँ
- उत्कृष्टता विद्यालय (Schools of Excellence)
आगे की राह
- आदिवासी समुदायों की विशिष्ट आवश्यकताओं और आकांक्षाओं के अनुरूप लक्षित और संवेदनशील नीतियों का निर्माण तथा कार्यान्वयन किया जाए।
- आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और बुनियादी ढांचे के विकास में निवेश बढ़ाया जाए, विशेषकर दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में।
- आदिवासी कला, संस्कृति, भाषाओं और पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण तथा संवर्धन के लिए विशेष कार्यक्रम चलाए जाएं।
- वन-आधारित आजीविका को मजबूत करने, कौशल विकास प्रदान करने और बाजार से जुड़ाव स्थापित करने के माध्यम से आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा दिया जाए।
- स्वयं सहायता समूहों और सामुदायिक संगठनों को मजबूत करके जमीनी स्तर पर भागीदारी और सशक्तिकरण सुनिश्चित किया जाए।
- आदिवासी अधिकारों, विशेषकर भूमि और वन अधिकारों के प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित किया जाए और उनके पारंपरिक संसाधनों तक पहुंच को सुरक्षित किया जाए।
- आदिवासी समुदायों के प्रतिनिधियों को विकास योजना और कार्यान्वयन प्रक्रियाओं में सक्रिय रूप से शामिल किया जाए, जिससे उनकी आवाज और दृष्टिकोण को महत्व मिले।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
आदिवासी संस्कृति · समावेशी विकास · जनजातीय कल्याण योजनाएँ · स्वयं सहायता समूह · मातृ मृत्यु दर · सड़क संपर्क कार्यक्रम · शिक्षा पहल · जनजातीय हस्तशिल्प · राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन · अनुच्छेद 46
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 46: अनुसूचित जातियों और जनजातियों के शैक्षिक व आर्थिक हितों को बढ़ावा देना।
- अनुच्छेद 244: अनुसूचित क्षेत्रों और जनजातीय क्षेत्रों का प्रशासन।
- पांचवीं अनुसूची: असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम को छोड़कर अन्य राज्यों में अनुसूचित क्षेत्रों और अनुसूचित जनजातियों के प्रशासन तथा नियंत्रण से संबंधित प्रावधान।
- छठी अनुसूची: असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम राज्यों में जनजातीय क्षेत्रों के प्रशासन से संबंधित प्रावधान।
अवधारणा प्रवाह
विश्व आदिवासी दिवस का आयोजन → आदिवासी संस्कृति और पहचान का प्रदर्शन → सरकारी योजनाओं और पहलों का उल्लेख → आदिवासी समुदायों का समावेशी विकास → सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण और कल्याण
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. विश्व आदिवासी दिवस प्रतिवर्ष 9 अगस्त को मनाया जाता है।
2. भारत का संविधान जनजातीय समुदायों के लिए विशेष प्रावधानों का उल्लेख नहीं करता है।
3. राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन का उद्देश्य भारत में हरित हाइड्रोजन उत्पादन को बढ़ावा देना है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है। विश्व आदिवासी दिवस प्रतिवर्ष 9 अगस्त को मनाया जाता है। कथन 2 गलत है, क्योंकि भारत का संविधान जनजातीय समुदायों के लिए विशेष प्रावधानों का उल्लेख करता है, जैसे अनुच्छेद 46। कथन 3 सही है।
Q2. कथन (A): जनजातीय क्षेत्रों में मातृ मृत्यु दर (Maternal Mortality Rate) को कम करने के लिए विशेष स्वास्थ्य पहलें महत्वपूर्ण हैं।
कारण (R): जनजातीय क्षेत्रों में अक्सर स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच और जागरूकता की कमी होती है।
उपरोक्त कथनों के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा सही है?
- कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, और कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
- कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, लेकिन कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।
- कथन (A) सही है, लेकिन कारण (R) गलत है।
- कथन (A) गलत है, लेकिन कारण (R) सही है।
उत्तर: कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, और कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या करता है। — कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं और कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या करता है। जनजातीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की कमी के कारण मातृ मृत्यु दर अधिक होती है, इसलिए विशेष पहलें आवश्यक हैं।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में जनजातीय समुदायों के समावेशी विकास के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों पर चर्चा कीजिए। इन पहलों के बावजूद, जनजातीय समुदायों के सामने आने वाली प्रमुख चुनौतियाँ क्या हैं? (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** भारत में जनजातीय समुदायों की स्थिति और उनके समावेशी विकास के महत्व पर संक्षिप्त परिचय।
2. **सरकारी पहलें:**
* **संवैधानिक प्रावधान:** अनुच्छेद 46 (राज्य का दायित्व), पाँचवीं और छठी अनुसूची।
* **कल्याणकारी योजनाएँ:** शिक्षा (उत्कृष्टता के विद्यालय), स्वास्थ्य (ज़ीरो मातृ मृत्यु दर पहल, फीडर एम्बुलेंस सेवाएँ), आजीविका (स्वयं सहायता समूहों को वित्तीय सहायता, खेत बचाओ अभियान ऋण मेले, ASR लक्ष्यम रोजगार प्रकोष्ठ), अवसंरचना (अडावी थाली बाटा सड़क संपर्क कार्यक्रम)।
* **सांस्कृतिक संरक्षण:** जनजातीय कला, हस्तशिल्प और व्यंजनों को बढ़ावा देना (जैसे विश्व आदिवासी दिवस पर प्रदर्शनियाँ)।
3. **प्रमुख चुनौतियाँ:**
* **स्वास्थ्य:** दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं तक सीमित पहुंच, कुपोषण, मातृ एवं शिशु मृत्यु दर।
* **शिक्षा:** शिक्षा की गुणवत्ता, ड्रॉपआउट दर, भाषा संबंधी बाधाएँ।
* **आजीविका:** वन उत्पादों पर निर्भरता, भूमि विस्थापन, बाजार तक पहुंच की कमी।
* **अवसंरचना:** सड़क, बिजली, पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव।
* **सांस्कृतिक क्षरण:** आधुनिकीकरण और बाहरी प्रभावों के कारण पारंपरिक पहचान का नुकसान।
* **प्रशासनिक चुनौतियाँ:** योजनाओं के कार्यान्वयन में देरी, भ्रष्टाचार, जागरूकता की कमी।
4. **निष्कर्ष:** समावेशी और सतत विकास के लिए एक समग्र दृष्टिकोण की आवश्यकता, जिसमें जनजातीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी और उनकी विशिष्ट आवश्यकताओं का ध्यान रखा जाए।
स्रोत: The Hindu
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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