11 Aug संसदीय पैनल ने पीएमआईएस के लिए समयबद्ध कार्य योजना की मांग की: जानिए पूरा मामला

✎ प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना का उद्देश्य युवाओं को व्यावहारिक कार्य अनुभव और कौशल प्रदान करके उनकी रोज़गार क्षमता को बढ़ाना है, लेकिन इसके पायलट चरण में धन के कम उपयोग और कम भागीदारी जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — शासन, पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्वपूर्ण पक्ष; केंद्र एवं राज्यों द्वारा जनसंख्या के अति संवेदनशील वर्गों के लिए कल्याणकारी योजनाएँ और इन योजनाओं का कार्य-निष्पादन | GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय
- Prelims: प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना (PMIS), संसदीय स्थायी समिति, बजट आवंटन, फंड का कम उपयोग, युवा रोज़गार, कौशल विकास
- Essay: भारत में युवा रोज़गार और कौशल विकास की चुनौतियाँ एवं समाधान, सरकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन: मुद्दे और आगे की राह
त्वरित पुनरावृत्ति: प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना का उद्देश्य युवाओं को व्यावहारिक कार्य अनुभव और कौशल प्रदान करके उनकी रोज़गार क्षमता को बढ़ाना है, लेकिन इसके पायलट चरण में धन के कम उपयोग और कम भागीदारी जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
एक संसदीय समिति ने प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना (PMIS) के पायलट चरण में धन के कम उपयोग और कम भागीदारी पर चिंता व्यक्त की है। समिति ने योजना के पूर्ण पैमाने पर क्रियान्वयन से पहले एक समयबद्ध कार्य योजना, प्रदर्शन संकेतक और विशेष रूप से महिला उम्मीदवारों तथा ग्रामीण युवाओं के लिए यात्रा, स्थानांतरण एवं आवास हेतु एक संरचित सहायता प्रणाली की मांग की है।
पृष्ठभूमि
- प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना (PMIS) की घोषणा केंद्रीय बजट 2024-25 में की गई थी, जिसमें मुख्य योजना के लिए पाँच वर्षों में 63,000 करोड़ रुपये का कुल परिव्यय प्रस्तावित था।
- योजना के पायलट चरण के लिए वित्त वर्ष 2025 में 2,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे, लेकिन वास्तविक व्यय केवल 29.29 करोड़ रुपये रहा, जो आवंटित राशि का बहुत कम हिस्सा है।
- पायलट चरण के दौरान 2.45 लाख से अधिक इंटर्नशिप के अवसर उपलब्ध कराए गए और 350 से अधिक कंपनियों ने भाग लिया, लेकिन केवल 16,060 उम्मीदवारों ने ही योजना में शामिल हुए।
- पायलट चरण के पहले दौर में ड्रॉपआउट दर 53.6 प्रतिशत जितनी अधिक थी, जो योजना के क्रियान्वयन में गंभीर चुनौतियों का संकेत देती है।
- मार्च 2026 में, कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय (MCA) ने PMIS के दिशानिर्देशों को संशोधित किया, जिसमें पात्रता मानदंड को 21-24 वर्ष से बढ़ाकर 18-25 वर्ष किया गया, मासिक सहायता को 9,000 रुपये तक बढ़ाया गया और इंटर्नशिप की अवधि को 6 से 9 महीने तक लचीला बनाया गया।
- संसदीय समिति ने मंत्रालय से पायलट चरण से प्राप्त सीखों के आधार पर योजना का व्यापक पुनर्गठन करने और पूर्ण पैमाने पर क्रियान्वयन से पहले एक विस्तृत, समयबद्ध कार्य योजना प्रस्तुत करने का आग्रह किया है।
प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना (PMIS) क्या है?
- प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना (PMIS) भारत सरकार की एक पहल है जिसका उद्देश्य युवाओं को विभिन्न क्षेत्रों में व्यावहारिक कार्य अनुभव प्रदान करना है।
- इस योजना का लक्ष्य छात्रों और युवा स्नातकों को उद्योगों, सरकारी विभागों और अन्य संगठनों में इंटर्नशिप के अवसर प्रदान करके उनकी रोज़गार क्षमता (Employability) को बढ़ाना है।
- यह योजना कौशल विकास (Skill Development) और व्यावसायिक प्रशिक्षण पर केंद्रित है, जिससे युवाओं को वास्तविक दुनिया के कार्य वातावरण में आवश्यक कौशल सीखने और लागू करने में मदद मिलती है।
- PMIS के तहत, इंटर्न को मासिक सहायता प्रदान की जाती है ताकि वे इंटर्नशिप के दौरान अपने खर्चों को पूरा कर सकें। संशोधित दिशानिर्देशों के अनुसार यह सहायता 9,000 रुपये है।
- योजना में इंटर्नशिप की अवधि को लचीला रखा गया है, जो इंटर्नशिप की प्रकृति के आधार पर 6 से 9 महीने तक हो सकती है।
- पात्रता मानदंड को 18 से 25 वर्ष के आयु वर्ग के युवाओं तक विस्तारित किया गया है, जिससे अधिक युवा इस योजना का लाभ उठा सकें।
- योजना का उद्देश्य देश के युवाओं को सशक्त बनाना और उन्हें भविष्य के कार्यबल के लिए तैयार करना है, जिससे भारत की आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) में योगदान मिल सके।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| प्रधान मंत्री इंटर्नशिप योजना (PMIS) | युवाओं को व्यावहारिक अनुभव और कौशल प्रदान करने के लिए एक राष्ट्रव्यापी पहल। |
| बजट 2024-25 में घोषणा | योजना के लिए सरकार की प्रतिबद्धता और इसके संभावित पैमाने को दर्शाता है। |
| कुल परिव्यय ₹63,000 करोड़ (पांच वर्ष) | योजना के महत्वाकांक्षी लक्ष्यों और बड़े पैमाने पर कार्यान्वयन के इरादे को दर्शाता है। |
| पायलट चरण का कार्यान्वयन | पूर्ण पैमाने पर रोलआउट से पहले योजना की प्रभावशीलता और चुनौतियों का परीक्षण करने का अवसर। |
| संशोधित दिशानिर्देश (12 मार्च, 2026) | योजना को अधिक समावेशी और आकर्षक बनाने के लिए पात्रता मानदंड, मासिक सहायता और अवधि में सुधार। |
| संसदीय समिति की सिफारिशें | योजना के प्रभावी कार्यान्वयन, जवाबदेही और प्रदर्शन मूल्यांकन के लिए महत्वपूर्ण। |
महत्व
मानव संसाधन विकास
- PMIS युवाओं को व्यावहारिक कौशल और कार्य अनुभव प्रदान करके उनकी रोजगार क्षमता को बढ़ाता है, जो भारत के जनसांख्यिकीय लाभांश का लाभ उठाने के लिए महत्वपूर्ण है।
- यह योजना शैक्षणिक ज्ञान और उद्योग की आवश्यकताओं के बीच के अंतर को पाटती है, जिससे स्नातकों को कार्यबल के लिए बेहतर ढंग से तैयार किया जा सके।
आर्थिक संवृद्धि
- एक कुशल कार्यबल आर्थिक उत्पादकता और नवाचार को बढ़ावा देता है, जिससे देश की समग्र आर्थिक संवृद्धि में योगदान होता है।
- बेरोजगारी को कम करने और युवाओं के बीच उद्यमिता को बढ़ावा देने में मदद कर सकता है, जिससे अर्थव्यवस्था में नई ऊर्जा का संचार होगा।
सामाजिक समावेशन
- विशेष रूप से महिला उम्मीदवारों और ग्रामीण युवाओं के लिए यात्रा, स्थानांतरण और आवास के लिए संरचित सहायता प्रणाली का प्रावधान सामाजिक-आर्थिक बाधाओं को कम करता है।
- यह योजना समाज के विभिन्न वर्गों के युवाओं को समान अवसर प्रदान करती है, जिससे समावेशी विकास को बढ़ावा मिलता है।
शासन और नीति निर्माण
- संसदीय समिति की सिफारिशें नीति कार्यान्वयन में जवाबदेही, दक्षता और प्रदर्शन-आधारित मूल्यांकन के महत्व को रेखांकित करती हैं।
- पायलट चरण से सीखे गए सबक के आधार पर योजना का पुनर्गठन भविष्य की सरकारी नीतियों के लिए एक मॉडल प्रदान करता है।
चुनौतियाँ
1. निधियों का कम उपयोग
- पायलट चरण के लिए आवंटित ₹2,000 करोड़ में से केवल ₹29.29 करोड़ का वास्तविक व्यय हुआ, जो कार्यान्वयन में अक्षमता को दर्शाता है।
- यह दर्शाता है कि बजट अनुमानों का यथार्थवादी अवशोषण क्षमता और चरणबद्ध रोलआउट योजनाओं के साथ पर्याप्त संरेखण नहीं किया गया था।
यूपीएससी लिंक: शासन, पारदर्शिता और जवाबदेही
2. धीमा कार्यान्वयन और अत्यधिक अनुमान
- समिति ने अवशोषण क्षमता के अत्यधिक अनुमान और अपेक्षा से धीमी कार्यान्वयन गति पर ध्यान दिया।
- यह योजना के प्रारंभिक चरण में योजना और निष्पादन में कमियों को इंगित करता है।
यूपीएससी लिंक: सरकारी नीतियों और हस्तक्षेपों का डिजाइन और कार्यान्वयन
3. कम भागीदारी और उच्च ड्रॉपआउट दर
- 2.45 लाख से अधिक इंटर्नशिप के अवसरों के बावजूद, केवल 16,060 उम्मीदवारों ने योजना में भाग लिया, और पहले दौर में ड्रॉपआउट दर 53.6 प्रतिशत जितनी अधिक थी।
- यह योजना की अपील, पहुंच या उम्मीदवारों के लिए समर्थन प्रणाली में संभावित कमियों को दर्शाता है।
यूपीएससी लिंक: मानव संसाधन का विकास
4. संरचित समर्थन प्रणाली का अभाव
- विशेष रूप से महिला उम्मीदवारों और ग्रामीण युवाओं के लिए यात्रा, स्थानांतरण और आवास के लिए एक संरचित समर्थन प्रणाली की कमी एक बाधा है।
- यह विभिन्न पृष्ठभूमि के उम्मीदवारों के लिए इंटर्नशिप को दुर्गम बना सकता है।
यूपीएससी लिंक: कमजोर वर्गों का कल्याण
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| निधियों का कम उपयोग | योजना के उद्देश्यों को प्राप्त करने में अक्षमता और संसाधनों का अप्रभावी आवंटन। |
| अत्यधिक अनुमानित अवशोषण क्षमता | योजना के लिए अवास्तविक लक्ष्य निर्धारित करना, जिससे धीमी प्रगति और बजट का कम उपयोग होता है। |
| उच्च ड्रॉपआउट दर | योजना की प्रभावशीलता और उम्मीदवारों को बनाए रखने की क्षमता पर सवाल उठाता है। |
| संरचित समर्थन प्रणाली का अभाव | महिलाओं और ग्रामीण युवाओं जैसे कमजोर समूहों के लिए भागीदारी में बाधाएँ पैदा करता है। |
| पायलट चरण से सीख का अपर्याप्त उपयोग | पूर्ण पैमाने पर कार्यान्वयन से पहले योजना में आवश्यक सुधारों को लागू करने में विफलता। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- प्रधान मंत्री इंटर्नशिप योजना (PMIS)
आगे की राह
- पायलट चरण से प्राप्त सीख के आधार पर योजना का व्यापक पुनर्गठन किया जाए।
- मापनीय प्रदर्शन संकेतकों के साथ एक विस्तृत, समयबद्ध कार्य योजना तैयार की जाए।
- बजट अनुमानों को यथार्थवादी अवशोषण क्षमता और चरणबद्ध रोलआउट योजनाओं के साथ संरेखित किया जाए।
- महिला उम्मीदवारों और ग्रामीण युवाओं के लिए यात्रा, स्थानांतरण और आवास के लिए एक संरचित समर्थन प्रणाली विकसित की जाए।
- इंटर्नशिप के अवसरों की गुणवत्ता और प्रासंगिकता में सुधार किया जाए ताकि ड्रॉपआउट दर को कम किया जा सके।
- योजना की पहुंच और जागरूकता बढ़ाने के लिए प्रभावी संचार और आउटरीच रणनीतियाँ अपनाई जाएँ।
- नियमित निगरानी और मूल्यांकन तंत्र स्थापित किए जाएँ ताकि योजना की प्रगति और प्रभावशीलता का आकलन किया जा सके।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना · संसदीय समिति · निधि का कम उपयोग · कार्यान्वयन चुनौतियाँ · कौशल विकास · युवा सशक्तिकरण · बजट आवंटन · प्रदर्शन संकेतक · नीतिगत सुधार · पायलट परियोजना · रोजगार सृजन · मानव संसाधन विकास
अवधारणा प्रवाह
PMIS की घोषणा और बजट आवंटन → पायलट चरण का कार्यान्वयन और निधियों का कम उपयोग → कम भागीदारी और उच्च ड्रॉपआउट दर → संसदीय समिति द्वारा चिंताओं का अवलोकन → योजना के पुनर्गठन और समयबद्ध कार्य योजना की मांग → मानव संसाधन विकास और आर्थिक संवृद्धि की दिशा में कदम
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना (PMIS) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. इस योजना की घोषणा बजट 2024-25 में की गई थी, जिसके लिए पाँच वर्षों में ₹63,000 करोड़ का कुल परिव्यय निर्धारित किया गया है।
2. योजना के पायलट चरण के लिए वित्त वर्ष 2025 में ₹2,000 करोड़ आवंटित किए गए थे, जिसमें से ₹29.29 करोड़ का वास्तविक व्यय हुआ।
3. संसदीय समिति ने योजना में महिला उम्मीदवारों और ग्रामीण युवाओं के लिए यात्रा, स्थानांतरण और आवास हेतु संरचित सहायता प्रणाली की सिफारिश की है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना की घोषणा बजट 2024-25 में की गई थी और इसके लिए पाँच वर्षों में ₹63,000 करोड़ का कुल परिव्यय निर्धारित किया गया है। कथन 2 सही है क्योंकि वित्त वर्ष 2025 में पायलट चरण के लिए ₹2,000 करोड़ आवंटित किए गए थे, जिसमें से वास्तविक व्यय केवल ₹29.29 करोड़ था, जो निधि के कम उपयोग को दर्शाता है। कथन 3 सही है क्योंकि संसदीय समिति ने विशेष रूप से महिला उम्मीदवारों और ग्रामीण युवाओं के लिए यात्रा, स्थानांतरण और आवास हेतु संरचित सहायता प्रणाली की सिफारिश की है।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना (PMIS) के संबंध में सही नहीं है?
- यह योजना वर्तमान में अपने पूर्ण पैमाने पर कार्यान्वयन चरण में है।
- पायलट चरण में 2.45 लाख से अधिक इंटर्नशिप के अवसर पोस्ट किए गए थे।
- योजना के लिए पात्रता मानदंड 18-25 वर्ष तक बढ़ा दिया गया है।
- मासिक सहायता राशि ₹9,000 तक बढ़ा दी गई है।
उत्तर: यह योजना वर्तमान में अपने पूर्ण पैमाने पर कार्यान्वयन चरण में है। — कथन ‘यह योजना वर्तमान में अपने पूर्ण पैमाने पर कार्यान्वयन चरण में है’ सही नहीं है। समाचार के अनुसार, यह योजना अभी भी अपने पायलट चरण में चल रही है और पूर्ण पैमाने पर कार्यान्वयन अभी शुरू नहीं हुआ है। अन्य सभी कथन सही हैं।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना (PMIS) के कार्यान्वयन में संसदीय समिति द्वारा उजागर की गई प्रमुख चुनौतियों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। इन चुनौतियों का समाधान करने के लिए क्या उपाय किए जा सकते हैं? (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना (PMIS) का संक्षिप्त परिचय दें, इसकी घोषणा, उद्देश्य और कुल परिव्यय का उल्लेख करें।
2. **संसदीय समिति द्वारा उजागर की गई प्रमुख चुनौतियाँ:**
* **निधि का कम उपयोग:** पायलट चरण में आवंटित निधि (₹2,000 करोड़) की तुलना में वास्तविक व्यय (₹29.29 करोड़) का उल्लेख करें, जो कार्यान्वयन की धीमी गति को दर्शाता है।
* **अवशोषक क्षमता का अत्यधिक अनुमान:** समिति द्वारा व्यक्त चिंता पर प्रकाश डालें कि मंत्रालय ने ‘अवशोषक क्षमता’ का अत्यधिक अनुमान लगाया था।
* **कम भागीदारी दर:** 2.45 लाख से अधिक अवसरों के मुकाबले केवल 16,060 उम्मीदवारों के शामिल होने और पहले दौर में 53.6% की उच्च ड्रॉपआउट दर का उल्लेख करें।
* **संरचित सहायता प्रणाली का अभाव:** महिला उम्मीदवारों और ग्रामीण युवाओं के लिए यात्रा, स्थानांतरण और आवास हेतु पर्याप्त सहायता प्रणाली की कमी।
* **यथार्थवादी रोल-आउट योजनाओं का अभाव:** बजट अनुमानों और वास्तविक क्षमता के बीच असंतुलन।
3. **चुनौतियों का समाधान करने के लिए उपाय:**
* **योजना का व्यापक पुनर्गठन:** पायलट चरण से प्राप्त सीखों के आधार पर योजना के पुनर्गठन की आवश्यकता।
* **समयबद्ध कार्य योजना:** मापने योग्य प्रदर्शन संकेतकों (KPIs) के साथ एक विस्तृत और समयबद्ध कार्य योजना का विकास।
* **संरचित सहायता प्रणाली:** महिला उम्मीदवारों और ग्रामीण युवाओं के लिए विशेष रूप से यात्रा, आवास और स्थानांतरण के लिए मजबूत सहायता प्रणाली का प्रावधान।
* **पात्रता मानदंड और मासिक सहायता में सुधार:** संशोधित दिशानिर्देशों (18-25 वर्ष की आयु, ₹9,000 मासिक सहायता, लचीली अवधि) को प्रभावी ढंग से लागू करना और उनका प्रचार करना।
* **जागरूकता और आउटरीच कार्यक्रम:** योजना के लाभों और अवसरों के बारे में युवाओं, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में, जागरूकता बढ़ाने के लिए व्यापक अभियान।
* **उद्योग सहभागिता:** अधिक कंपनियों को आकर्षित करने और इंटर्नशिप की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए उद्योग के साथ बेहतर समन्वय।
* **नियमित निगरानी और मूल्यांकन:** निधि के उपयोग, भागीदारी दर और परिणामों की नियमित निगरानी और मूल्यांकन तंत्र स्थापित करना।
4. **निष्कर्ष:** युवा सशक्तिकरण और कौशल विकास में ऐसी योजनाओं के महत्व पर जोर दें और प्रभावी कार्यान्वयन के माध्यम से भारत की जनसांख्यिकीय लाभांश क्षमता का अधिकतम उपयोग करने की आवश्यकता पर बल दें।
स्रोत: Business Standard
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