मॉनसून की कमी: खाद्यान्न आयात खुला रखें, रबी फसलों पर संकट टालें

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मॉनसून की कमी: खाद्यान्न आयात खुला रखें, रबी फसलों पर संकट टालें

Map of Maharashtra, Rajasthan, Gujarat, Telangana, Andhra Pradesh, highlighted on the map of India — मॉनसून कमी रबी फसल आयात
मानचित्र व माइंड-मैप: मॉनसून की कमी: सूखे से प्रभावित राज्य और समाधान

✎ कमजोर मानसून और अल नीनो के प्रभाव से भारत की कृषि पैदावार, विशेषकर रबी फसलों पर नकारात्मक असर पड़ने की आशंका है, जिससे खाद्य सुरक्षा और मुद्रास्फीति प्रबंधन के लिए सरकार को आपूर्ति-पक्ष उपाय करने पड़ रहे हैं।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper I — भूगोल (भारतीय भूगोल, जलवायु, कृषि)  |  GS Paper III — अर्थव्यवस्था (कृषि, खाद्य सुरक्षा, मुद्रास्फीति प्रबंधन, आपदा प्रबंधन)
  • Prelims: मानसून, अल नीनो, खरीफ फसलें, रबी फसलें, सूखा, खाद्य सुरक्षा, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, आयात शुल्क
  • Essay: भारत में कृषि संकट और खाद्य सुरक्षा चुनौतियाँ, जलवायु परिवर्तन और भारतीय अर्थव्यवस्था पर इसके प्रभाव

त्वरित पुनरावृत्ति: कमजोर मानसून और अल नीनो के प्रभाव से भारत की कृषि पैदावार, विशेषकर रबी फसलों पर नकारात्मक असर पड़ने की आशंका है, जिससे खाद्य सुरक्षा और मुद्रास्फीति प्रबंधन के लिए सरकार को आपूर्ति-पक्ष उपाय करने पड़ रहे हैं।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

हाल ही में, भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून (South-West Monsoon) सामान्य से कम रहा है, जिससे कई राज्यों, विशेषकर महाराष्ट्र में सूखे जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है। देश के 36 मौसम संबंधी उपखंडों में से 23 में 10 प्रतिशत से अधिक संचयी वर्षा की कमी दर्ज की गई है। इस स्थिति ने खरीफ फसलों की पैदावार और आगामी रबी फसलों की बुवाई पर चिंता बढ़ा दी है, जिससे खाद्य सुरक्षा और मुद्रास्फीति (Inflation) पर संभावित प्रभावों को लेकर सरकार और विशेषज्ञों के बीच चर्चा तेज हो गई है।

पृष्ठभूमि

  • भारतीय कृषि अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से मानसून पर निर्भर करती है, जहाँ लगभग 50 प्रतिशत कृषि भूमि असिंचित है।
  • अल नीनो (El Niño) एक जलवायु पैटर्न है जो प्रशांत महासागर में सतही जल के असामान्य रूप से गर्म होने से जुड़ा है और अक्सर भारतीय मानसून को कमजोर करता है। वर्तमान में अल नीनो अपने मजबूत चरण में है।
  • कमजोर मानसून के कारण जलाशयों, कुओं और भूमिगत जल स्तर में कमी आती है, जिससे रबी फसलों की सिंचाई प्रभावित होती है।
  • भारत सरकार ने खाद्य तेलों और कुछ दालों पर आयात शुल्क (Import Duty) कम करके आपूर्ति-पक्ष प्रबंधन (Supply-side Management) के उपाय किए हैं ताकि घरेलू कमी को पूरा किया जा सके और कीमतों को स्थिर रखा जा सके।
  • महाराष्ट्र जैसे राज्यों ने सूखा प्रबंधन संहिता (Drought Management Code) को सक्रिय कर दिया है, जिसमें फसल हानि का आकलन, भू-राजस्व की माफी और कृषि ऋणों के पुनर्गठन जैसे उपाय शामिल हैं।
  • प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana) जैसी योजनाएं किसानों को फसल नुकसान की स्थिति में वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए महत्वपूर्ण हैं, और इनकी प्रभावशीलता की भी परीक्षा होगी।

मानसून, अल नीनो और कृषि पर प्रभाव

  • भारतीय मानसून: भारत की वार्षिक वर्षा का लगभग 70 प्रतिशत दक्षिण-पश्चिम मानसून से प्राप्त होता है, जो जून से सितंबर तक सक्रिय रहता है और कृषि उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण है।
  • अल नीनो प्रभाव: अल नीनो अक्सर भारतीय उपमहाद्वीप में कमजोर मानसून और शुष्क परिस्थितियों से जुड़ा होता है, जिससे कृषि पैदावार पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
  • खरीफ फसलें: ये मानसूनी वर्षा पर निर्भर करती हैं और जून-जुलाई में बोई जाती हैं तथा सितंबर-अक्टूबर में काटी जाती हैं (जैसे धान, मक्का, बाजरा, सोयाबीन)। कमजोर मानसून से इनकी पैदावार प्रभावित हो सकती है।
  • रबी फसलें: ये शीत ऋतु की फसलें होती हैं, जो अक्टूबर-नवंबर में बोई जाती हैं और मार्च-अप्रैल में काटी जाती हैं (जैसे गेहूं, जौ, चना, सरसों)। मानसून की कमी से भूमिगत जल स्तर कम होने के कारण इनकी सिंचाई प्रभावित हो सकती है।
  • सूखा प्रबंधन संहिता: यह एक दिशानिर्देश है जो राज्यों को सूखे की स्थिति में राहत उपाय लागू करने में मदद करता है, जैसे फसल नुकसान का आकलन, ऋण माफी और ग्रामीण रोजगार योजनाएं।
  • खाद्य सुरक्षा: कमजोर मानसून और फसल उत्पादन में कमी से खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे खाद्य सुरक्षा चुनौतियां उत्पन्न हो सकती हैं और मुद्रास्फीति पर दबाव पड़ सकता है।
  • आयात शुल्क में कमी: सरकार द्वारा खाद्य तेलों और दालों पर आयात शुल्क कम करना आपूर्ति बढ़ाने और घरेलू बाजार में कीमतों को नियंत्रित करने का एक उपाय है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
मानसून की कमी देश के कई हिस्सों में सामान्य से कम वर्षा, जिससे कृषि उत्पादन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की आशंका।
एल नीनो का प्रभाव एल नीनो की मजबूत स्थिति मानसून को कमजोर कर रही है और रबी फसलों के लिए गर्म तथा छोटे सर्दियों का संकेत दे रही है।
सूखा प्रबंधन संहिता महाराष्ट्र द्वारा सूखा प्रबंधन संहिता (Drought Management Code) को सक्रिय करना, जिससे किसानों को राजस्व माफी और ऋण पुनर्गठन जैसी रियायतें मिल सकें।
खाद्य आयात नीति सरकार द्वारा खाद्य तेलों और दालों पर आयात शुल्क में कटौती, जिससे घरेलू बाजार में आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके और कीमतों को नियंत्रित किया जा सके।
खरीफ और रबी फसलों पर प्रभाव कमजोर मानसून के कारण खरीफ की पैदावार प्रभावित होने की संभावना और रबी की फसल पर भी प्रतिकूल असर पड़ने का अनुमान।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • कमजोर मानसून और एल नीनो के कारण कृषि उत्पादन में कमी से खाद्य मुद्रास्फीति (Food Inflation) बढ़ सकती है, जिससे आम जनता पर आर्थिक बोझ पड़ेगा।
  • कृषि क्षेत्र पर निर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी, जिससे किसानों की आय में कमी आ सकती है और ग्रामीण मांग घट सकती है।
  • खाद्य तेलों और दालों के आयात पर निर्भरता बढ़ने से देश का आयात बिल बढ़ सकता है, जिससे व्यापार घाटे पर असर पड़ेगा।

सामाजिक महत्व

  • फसल खराब होने से किसानों में ऋणग्रस्तता और संकट बढ़ सकता है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक अशांति पैदा हो सकती है।
  • खाद्य सुरक्षा (Food Security) सुनिश्चित करने के लिए सरकार पर दबाव बढ़ेगा, विशेषकर कमजोर वर्गों के लिए खाद्य उपलब्धता बनाए रखने हेतु।
  • पानी की कमी से पेयजल संकट और स्वच्छता संबंधी चुनौतियाँ उत्पन्न हो सकती हैं, विशेषकर सूखाग्रस्त क्षेत्रों में।

शासन और नीतिगत महत्व

  • राज्य सरकारों को सूखा प्रबंधन संहिता को प्रभावी ढंग से लागू करने और किसानों को समय पर राहत प्रदान करने की आवश्यकता है।
  • केंद्र सरकार को आपूर्ति-पक्ष प्रबंधन (Supply-side Management) के माध्यम से खाद्य वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने और कीमतों को स्थिर रखने के लिए सक्रिय उपाय करने होंगे।
  • जलवायु परिवर्तन (Climate Change) और एल नीनो जैसी घटनाओं के प्रभावों को कम करने के लिए दीर्घकालिक कृषि नीतियों और जल संरक्षण उपायों पर ध्यान केंद्रित करना महत्वपूर्ण है।

चुनौतियाँ

1. कृषि उत्पादन में कमी

  • कमजोर दक्षिण-पश्चिम मानसून और एल नीनो के प्रभाव से खरीफ और आगामी रबी फसलों की पैदावार में गिरावट की आशंका।
  • कुओं, तालाबों, जलाशयों और भूमिगत जलभृतों में पानी की कमी से सिंचाई प्रभावित होगी, विशेषकर उन क्षेत्रों में जो मानसून पर अधिक निर्भर हैं।

2. खाद्य मुद्रास्फीति का दबाव

  • फसल उत्पादन में गिरावट से खाद्य वस्तुओं, विशेषकर दालों और खाद्य तेलों की कीमतों में वृद्धि हो सकती है।
  • आयात पर बढ़ती निर्भरता और वैश्विक बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव घरेलू मुद्रास्फीति को और बढ़ा सकता है।

3. किसानों का संकट

  • फसल नुकसान के कारण किसानों की आय में कमी आएगी, जिससे उनकी ऋण चुकाने की क्षमता प्रभावित होगी।
  • प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana) जैसी योजनाओं के तहत दावों का त्वरित निपटान सुनिश्चित करना एक चुनौती है।

4. जल संसाधनों का प्रबंधन

  • मानसून की कमी से भूजल स्तर में गिरावट और जलाशयों में पानी का कम होना, जिससे पेयजल और सिंचाई के लिए जल उपलब्धता पर दबाव बढ़ेगा।
  • जल संरक्षण और कुशल जल उपयोग तकनीकों को बढ़ावा देना एक बड़ी चुनौती है।

5. राज्यों के बीच समन्वय

  • सूखा प्रभावित राज्यों में राहत उपायों और सूखा प्रबंधन संहिता को प्रभावी ढंग से लागू करने में राज्यों के बीच समन्वय की आवश्यकता।
  • केंद्र और राज्यों के बीच वित्तीय सहायता और संसाधनों के आवंटन में सामंजस्य स्थापित करना।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
कमजोर मानसून कृषि उत्पादन में गिरावट, खाद्य सुरक्षा पर खतरा।
एल नीनो प्रभाव मानसून का कमजोर होना, गर्म और छोटी सर्दियाँ, रबी फसल को नुकसान।
सूखाग्रस्त क्षेत्र महाराष्ट्र सहित कई राज्यों में सूखे की स्थिति, किसानों का संकट।
खाद्य मुद्रास्फीति दालों और खाद्य तेलों की कीमतों में वृद्धि की संभावना।
जल संकट भूजल स्तर में गिरावट, जलाशयों में पानी की कमी।
आयात पर निर्भरता खाद्य वस्तुओं के आयात में वृद्धि, व्यापार घाटे पर दबाव।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana)

आगे की राह

  • सूखा प्रभावित क्षेत्रों में किसानों को तत्काल राहत प्रदान करने के लिए सूखा प्रबंधन संहिता को सभी राज्यों में प्रभावी ढंग से लागू किया जाए, जिसमें भूमि राजस्व माफी और कृषि ऋणों का पुनर्गठन शामिल हो।
  • खाद्य तेलों और दालों पर आयात शुल्क में और कटौती की जाए या उन्हें शुल्क-मुक्त किया जाए, ताकि घरेलू बाजार में पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित हो सके और कीमतों को स्थिर रखा जा सके।
  • प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत फसल नुकसान के दावों का त्वरित और पारदर्शी निपटान सुनिश्चित किया जाए, ताकि किसानों को समय पर मुआवजा मिल सके।
  • रबी फसलों के लिए सिंचाई के पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु जल संरक्षण उपायों, जैसे वर्षा जल संचयन और सूक्ष्म सिंचाई (Micro-irrigation) को बढ़ावा दिया जाए।
  • किसानों को जलवायु-लचीली फसलों (Climate-resilient Crops) और कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाए, ताकि वे बदलते मौसम पैटर्न का सामना कर सकें।
  • खाद्य वस्तुओं की आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को मजबूत किया जाए और जमाखोरी व कालाबाजारी को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।
  • दीर्घकालिक रणनीति के तहत, कृषि अनुसंधान और विकास में निवेश बढ़ाया जाए ताकि सूखे और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने के लिए नई प्रौद्योगिकियां विकसित की जा सकें।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

मानसून की विफलता · सूखा प्रबंधन संहिता · रबी फसल · खरीफ फसल · अल नीनो · खाद्य सुरक्षा · कृषि ऋण पुनर्गठन · प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना · आयात शुल्क · आपूर्ति-पक्ष प्रबंधन

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 246 (सातवीं अनुसूची)’, ‘note’: ‘कृषि और जल राज्य सूची के विषय’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 282’, ‘note’: ‘केंद्र और राज्यों द्वारा अनुदान का प्रावधान’}

अवधारणा प्रवाह

कमजोर दक्षिण-पश्चिम मानसून और एल नीनो का प्रभाव  →  देश के कई हिस्सों में वर्षा में कमी और सूखे की स्थिति  →  खरीफ और रबी फसलों के उत्पादन में गिरावट की आशंका  →  खाद्य मुद्रास्फीति और किसानों के संकट में वृद्धि  →  सरकार द्वारा आयात शुल्क में कटौती और सूखा राहत उपाय

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. अल नीनो प्रशांत महासागर में सतही जल के असामान्य रूप से गर्म होने की घटना है, जो वैश्विक मौसम पैटर्न को प्रभावित करती है।
2. भारत में अल नीनो का प्रभाव आमतौर पर दक्षिण-पश्चिम मानसून को कमजोर करता है, जिससे वर्षा में कमी आती है।
3. सूखा प्रबंधन संहिता (Drought Management Code) केंद्र सरकार द्वारा जारी एक दिशानिर्देश है, जो राज्यों को सूखे की स्थिति से निपटने के लिए उपाय सुझाता है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 और 2 सही हैं। अल नीनो एक जलवायु घटना है जो प्रशांत महासागर में सतही जल के गर्म होने से जुड़ी है और यह भारत में कमजोर मानसून का कारण बन सकती है। कथन 3 भी सही है। सूखा प्रबंधन संहिता केंद्र सरकार द्वारा जारी एक व्यापक दिशानिर्देश है जो राज्यों को सूखे की घोषणा, आकलन और राहत उपायों के लिए एक ढांचा प्रदान करता है।

Q2. कथन (A): कमजोर मानसून के कारण भारत में खाद्य मुद्रास्फीति (Food Inflation) बढ़ने की संभावना रहती है।
कारण (R): कमजोर मानसून से कृषि उत्पादन प्रभावित होता है, जिससे आपूर्ति में कमी आती है और कीमतें बढ़ती हैं।

  1. A और R दोनों सही हैं, और R, A का सही स्पष्टीकरण है।
  2. A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A का सही स्पष्टीकरण नहीं है।
  3. A सही है, लेकिन R गलत है।
  4. A गलत है, लेकिन R सही है।

उत्तर: A और R दोनों सही हैं, और R, A का सही स्पष्टीकरण है। — कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं और कारण (R) कथन (A) का सही स्पष्टीकरण है। कमजोर मानसून सीधे तौर पर कृषि उत्पादन को प्रभावित करता है, जिससे खाद्य पदार्थों की आपूर्ति कम हो जाती है। आपूर्ति में कमी के कारण बाजार में खाद्य वस्तुओं की कीमतें बढ़ जाती हैं, जिससे खाद्य मुद्रास्फीति में वृद्धि होती है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत में मानसून की विफलता के कृषि क्षेत्र और व्यापक अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभावों का विश्लेषण कीजिए। इन प्रभावों को कम करने के लिए सरकार द्वारा अपनाए जा सकने वाले आपूर्ति-पक्ष और मांग-पक्ष उपायों पर भी चर्चा कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** मानसून की विफलता का संक्षिप्त परिचय और इसका कृषि पर महत्व।
2. **कृषि क्षेत्र पर प्रभाव:**
* खरीफ और रबी फसलों के उत्पादन में कमी (उदाहरण: दालें, तिलहन)।
* किसानों की आय में गिरावट और ग्रामीण संकट।
* कृषि ऋणों की वसूली में समस्या।
* पशुधन पर प्रभाव (चारे की कमी)।
* भूजल स्तर में गिरावट।
3. **व्यापक अर्थव्यवस्था पर प्रभाव:**
* खाद्य मुद्रास्फीति (Inflation) में वृद्धि।
* ग्रामीण मांग में कमी, जिससे औद्योगिक उत्पादन पर नकारात्मक प्रभाव।
* राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit) बढ़ने का जोखिम (राहत उपायों के कारण)।
* निर्यात पर प्रभाव (कृषि उत्पादों के निर्यात में कमी)।
* GDP वृद्धि दर पर नकारात्मक असर।
4. **सरकार द्वारा अपनाए जा सकने वाले उपाय:**
* **आपूर्ति-पक्ष उपाय:**
* आवश्यक खाद्य वस्तुओं पर आयात शुल्क में कमी या शून्य करना (उदाहरण: दालें, खाद्य तेल)।
* सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) को मजबूत करना।
* भंडारण और लॉजिस्टिक्स में सुधार।
* कृषि उत्पादकता बढ़ाने के लिए दीर्घकालिक उपाय (सिंचाई, बीज)।
* **मांग-पक्ष उपाय:**
* सूखा प्रबंधन संहिता का सक्रिय कार्यान्वयन (भूमि राजस्व माफी, कृषि ऋण पुनर्गठन)।
* प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के तहत त्वरित दावों का निपटान।
* ग्रामीण रोजगार गारंटी योजनाओं (जैसे मनरेगा) का विस्तार।
* किसानों को प्रत्यक्ष आय सहायता।
5. **निष्कर्ष:** एक संतुलित दृष्टिकोण प्रस्तुत करें जिसमें अल्पकालिक राहत और दीर्घकालिक जलवायु-लचीली कृषि रणनीतियों पर जोर दिया गया हो।

स्रोत: The Indian Express


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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