04 Sep सीएआरए की पुणे वर्कशॉप: विशेष ज़रूरतों वाले बच्चों के गोद लेने में क्षेत्रीय सहयोग बढ़ा

✎ CARA भारत में दत्तक ग्रहण प्रक्रिया को विनियमित करने वाला एक वैधानिक निकाय है, जो विशेष आवश्यकताओं वाले बच्चों के लिए परिवार-आधारित देखभाल और गैर-संस्थागत पुनर्वास को बढ़ावा देने पर केंद्रित है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — सामाजिक न्याय: कमजोर वर्गों के लिए कल्याणकारी योजनाएँ, स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधन से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय। | GS Paper II — शासन: विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए सरकार की नीतियाँ और हस्तक्षेप तथा उनके डिज़ाइन और कार्यान्वयन से उत्पन्न होने वाले मुद्दे।
- Prelims: सेंट्रल एडॉप्शन रिसोर्स अथॉरिटी (CARA), राज्य दत्तक ग्रहण संसाधन एजेंसी (SARA), विशेष आवश्यकता वाले बच्चे, गैर-संस्थागत पुनर्वास, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, बाल संरक्षण इकाई (DCPU), दत्तक ग्रहण जागरूकता अभियान
- Essay: भारत में बच्चों के अधिकार और कल्याण: चुनौतियाँ और समाधान, सामाजिक समावेशन और हाशिए पर पड़े वर्गों का सशक्तिकरण
त्वरित पुनरावृत्ति: CARA भारत में दत्तक ग्रहण प्रक्रिया को विनियमित करने वाला एक वैधानिक निकाय है, जो विशेष आवश्यकताओं वाले बच्चों के लिए परिवार-आधारित देखभाल और गैर-संस्थागत पुनर्वास को बढ़ावा देने पर केंद्रित है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
सेंट्रल एडॉप्शन रिसोर्स अथॉरिटी (CARA) ने पुणे, महाराष्ट्र में वेस्टर्न ज़ोन के लिए अपनी चौथी क्षेत्रीय परामर्श कार्यशाला का आयोजन किया। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य विशेष आवश्यकताओं वाले बच्चों (दिव्यांग बच्चों) के लिए गैर-संस्थागत पुनर्वास को बढ़ावा देना और परिवार-आधारित देखभाल तथा दत्तक ग्रहण प्रक्रिया को मज़बूत करना था। इसमें महाराष्ट्र, गुजरात, गोवा और दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव के 74 से अधिक ज़िलों के 150 से अधिक हितधारकों ने भाग लिया, जिन्होंने चुनौतियों, सर्वोत्तम प्रथाओं और कार्यान्वयन योग्य समाधानों पर चर्चा की।
पृष्ठभूमि
- CARA भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (Ministry of Women and Child Development) के तहत एक वैधानिक निकाय है, जो भारतीय बच्चों के दत्तक ग्रहण को विनियमित करने के लिए नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करता है।
- यह ‘गोद लेने के बारे में जागरूकता अभियान 2025’ के तहत निरंतर प्रयासों का हिस्सा है, जिसका विषय ‘विशेष आवश्यकताओं वाले बच्चों (दिव्यांग बच्चों) के लिए गैर-संस्थागत पुनर्वास को बढ़ावा देना’ है।
- अभियान का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि विशेष आवश्यकताओं वाले बच्चों को सुरक्षित, प्यार भरे और सहायक पारिवारिक माहौल में बढ़ने और फलने-फूलने के अवसर मिलें।
- कार्यशाला में राज्य दत्तक ग्रहण संसाधन एजेंसियों (SARAs), विशिष्ट दत्तक ग्रहण एजेंसियों (SAAs), बाल देखभाल संस्थानों (CCIs), जिला बाल संरक्षण इकाइयों (DCPUs), मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (CMOs) और बाल संरक्षण विशेषज्ञों सहित विभिन्न हितधारकों ने भाग लिया।
सेंट्रल एडॉप्शन रिसोर्स अथॉरिटी (CARA) क्या है?
- CARA भारत में बच्चों को गोद लेने के लिए एक नोडल एजेंसी है और यह महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के तहत एक वैधानिक निकाय है।
- यह किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 (Juvenile Justice (Care and Protection of Children) Act, 2015) के प्रावधानों के अनुसार घरेलू दत्तक ग्रहण को विनियमित करने के लिए अनिवार्य है।
- CARA अंतर-देशीय दत्तक ग्रहण को भी नियंत्रित करता है, जो हेग कन्वेंशन ऑन प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन एंड कोऑपरेशन इन रिस्पेक्ट ऑफ इंटरकंट्री एडॉप्शन (Hague Convention on Protection of Children and Co-operation in respect of Intercountry Adoption) के प्रावधानों के अनुसार है।
- इसका मुख्य कार्य अनाथ, परित्यक्त और आत्मसमर्पित बच्चों को दत्तक ग्रहण के माध्यम से परिवार-आधारित देखभाल प्रदान करना है।
- CARA दत्तक ग्रहण प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न दिशानिर्देश और मानक निर्धारित करता है।
- यह राज्य दत्तक ग्रहण संसाधन एजेंसियों (SARAs) और विशिष्ट दत्तक ग्रहण एजेंसियों (SAAs) के माध्यम से अपनी गतिविधियों का समन्वय करता है।
- CARA दत्तक ग्रहण के बारे में जागरूकता बढ़ाने और विशेष आवश्यकताओं वाले बच्चों सहित सभी बच्चों के लिए स्थायी पारिवारिक देखभाल को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न पहल करता है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| क्षेत्रीय परामर्श कार्यशाला | यह कार्यशाला विशेष ज़रूरतों वाले बच्चों को गोद लेने के संबंध में क्षेत्रीय सहयोग को मज़बूत करने के लिए एक मंच प्रदान करती है। |
| पश्चिमी ज़ोन पर ध्यान | महाराष्ट्र, गुजरात, गोवा और दादरा व नगर हवेली तथा दमन व दीव जैसे भौगोलिक रूप से विविध और बड़े क्षेत्र की विशिष्ट चुनौतियों और आवश्यकताओं को संबोधित करती है। |
| बहु-हितधारक भागीदारी | SARA, SAA, CCI, DCPU, CMO और बाल संरक्षण विशेषज्ञों सहित 150 से अधिक हितधारकों की भागीदारी से व्यापक दृष्टिकोण और समाधान प्राप्त होते हैं। |
| जागरूकता अभियान 2025 का हिस्सा | यह ‘गोद लेने के बारे में जागरूकता अभियान 2025’ के तहत एक सतत प्रयास है, जिसका उद्देश्य परिवार-आधारित देखभाल और गैर-संस्थागत पुनर्वास को बढ़ावा देना है। |
| चुनौतियों और समाधानों पर चर्चा | चिकित्सा जांच, कानूनी आवश्यकताओं, वित्तीय पहलुओं और अंतर-विभागीय समन्वय से संबंधित मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया गया, जिससे व्यावहारिक समाधानों की पहचान हुई। |
महत्व
सामाजिक महत्व
- यह कार्यशाला विशेष ज़रूरतों वाले बच्चों के लिए सुरक्षित, प्यार भरे और सहायक पारिवारिक माहौल सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
- यह दिव्यांग बच्चों के गैर-संस्थागत पुनर्वास को बढ़ावा देती है, जिससे उन्हें संस्थागत देखभाल के बजाय परिवार-आधारित देखभाल मिल सके।
- गोद लेने की प्रक्रिया को सुगम बनाकर, यह बच्चों के सर्वोत्तम हितों की रक्षा करती है और उनके सर्वांगीण विकास के अवसर प्रदान करती है।
प्रशासनिक महत्व
- यह विभिन्न हितधारकों जैसे SARA, SAA, CCI, DCPU और स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों के बीच समन्वय और सहयोग को मज़बूत करती है।
- क्षेत्रीय स्तर पर चुनौतियों और सर्वोत्तम प्रथाओं पर चर्चा करके, यह गोद लेने की व्यवस्था में सुधार के लिए नीतिगत सुझावों को जन्म देती है।
- यह गोद लेने की प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाने में मदद करती है, जिससे प्रशासनिक बाधाएं कम होती हैं।
नैतिक महत्व
- यह प्रत्येक बच्चे के गरिमापूर्ण जीवन और परिवार के अधिकार को मान्यता देती है, विशेष रूप से उन बच्चों के लिए जिन्हें अतिरिक्त देखभाल और समर्थन की आवश्यकता होती है।
- यह समाज में दिव्यांग बच्चों के प्रति संवेदनशीलता और स्वीकृति को बढ़ावा देती है, जिससे समावेशी समाज का निर्माण होता है।
- यह बच्चों के अधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र अभिसमय (UN Convention on the Rights of the Child) के सिद्धांतों को बनाए रखती है, जो परिवार-आधारित देखभाल पर ज़ोर देता है।
चुनौतियाँ
1. चिकित्सा जांच और मूल्यांकन
- विशेष ज़रूरतों वाले बच्चों की समय पर और सटीक चिकित्सा जांच सुनिश्चित करना एक चुनौती है।
- चिकित्सा पेशेवरों की कमी और विशिष्ट मूल्यांकन उपकरणों की अनुपलब्धता प्रक्रिया को बाधित कर सकती है।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक मुद्दे: स्वास्थ्य, बाल विकास
2. कानूनी और प्रक्रियात्मक जटिलताएं
- गोद लेने की प्रक्रिया में शामिल कानूनी और प्रक्रियात्मक आवश्यकताएं अक्सर जटिल और समय लेने वाली होती हैं।
- दस्तावेज़ीकरण और अनुपालन में देरी से गोद लेने की प्रक्रिया में बाधा आ सकती है।
यूपीएससी लिंक: शासन: कानून और नीतियां
3. वित्तीय और सहायता संबंधी पहलू
- विशेष ज़रूरतों वाले बच्चों की देखभाल से जुड़े वित्तीय बोझ के कारण संभावित दत्तक माता-पिता हतोत्साहित हो सकते हैं।
- दत्तक परिवारों के लिए पर्याप्त वित्तीय सहायता और परामर्श सेवाओं की कमी एक चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय: कमज़ोर वर्ग
4. अंतर-विभागीय समन्वय का अभाव
- बाल संरक्षण, स्वास्थ्य सेवा और सामाजिक कल्याण विभागों के बीच समन्वय की कमी से प्रक्रिया में बाधा आती है।
- जानकारी साझा करने और एकीकृत दृष्टिकोण की कमी से बच्चों की ज़रूरतों को पूरा करने में देरी हो सकती है।
यूपीएससी लिंक: शासन: अंतर-विभागीय समन्वय
5. जागरूकता और सामाजिक स्वीकार्यता
- विशेष ज़रूरतों वाले बच्चों को गोद लेने के बारे में जागरूकता का अभाव एक बड़ी चुनौती है।
- समाज में दिव्यांग बच्चों को गोद लेने के प्रति पूर्वाग्रह और गलत धारणाएं भी एक बाधा हैं।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक मुद्दे: सामाजिक दृष्टिकोण
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| चिकित्सा जांच में देरी | विशेष ज़रूरतों वाले बच्चों की स्थिति का समय पर और सटीक निदान न होना। |
| कानूनी प्रक्रिया की जटिलता | गोद लेने की प्रक्रिया को अनावश्यक रूप से लंबा और कठिन बनाना। |
| वित्तीय सहायता का अभाव | संभावित दत्तक माता-पिता के लिए वित्तीय बोझ और प्रोत्साहन की कमी। |
| समन्वय की कमी | विभिन्न सरकारी एजेंसियों और हितधारकों के बीच प्रभावी सहयोग का अभाव। |
| जागरूकता की कमी | विशेष ज़रूरतों वाले बच्चों को गोद लेने के लाभों और प्रक्रिया के बारे में जनता को जानकारी न होना। |
| शिकायत निवारण तंत्र | गोद लेने की प्रक्रिया में आने वाली समस्याओं के त्वरित और प्रभावी समाधान का अभाव। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- गोद लेने के बारे में जागरूकता अभियान 2025
आगे की राह
- विशेष ज़रूरतों वाले बच्चों की समय पर और व्यापक चिकित्सा जांच के लिए स्वास्थ्य सेवा प्रणालियों को मज़बूत करना।
- गोद लेने की प्रक्रिया को सरल और सुव्यवस्थित करने के लिए कानूनी और प्रक्रियात्मक आवश्यकताओं की समीक्षा करना।
- दत्तक माता-पिता को वित्तीय सहायता, परामर्श और प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए प्रोत्साहन योजनाएं विकसित करना।
- बाल संरक्षण, स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण विभागों के बीच अंतर-विभागीय समन्वय और डेटा साझाकरण को बढ़ाना।
- विशेष ज़रूरतों वाले बच्चों को गोद लेने के बारे में जागरूकता बढ़ाने और सामाजिक पूर्वाग्रहों को दूर करने के लिए व्यापक अभियान चलाना।
- शिकायत निवारण तंत्र को मज़बूत करना और गोद लेने की प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना।
- क्षेत्रीय कार्यशालाओं और परामर्शों को नियमित रूप से आयोजित करके हितधारकों के बीच निरंतर संवाद और सहयोग को बढ़ावा देना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (CARA) · विशेष आवश्यकता वाले बच्चे · गैर-संस्थागत पुनर्वास · परिवार-आधारित देखभाल · दत्तक ग्रहण जागरूकता अभियान · राज्य दत्तक ग्रहण संसाधन एजेंसियां (SARAs) · बाल संरक्षण · समन्वित प्रयास · महिला एवं बाल विकास मंत्रालय · दत्तक ग्रहण प्रक्रिया
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘अनुच्छेद 21’: ‘जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार’}
- {‘अनुच्छेद 21A’: ‘शिक्षा का अधिकार’}
- {‘अनुच्छेद 39(f)’: ‘बच्चों के स्वस्थ विकास के अवसर’}
- {‘अनुच्छेद 46’: ‘कमज़ोर वर्गों के शैक्षिक और आर्थिक हितों को बढ़ावा’}
अवधारणा प्रवाह
विशेष ज़रूरतों वाले बच्चों की पहचान → गोद लेने की प्रक्रिया में चुनौतियाँ (चिकित्सा, कानूनी, वित्तीय) → क्षेत्रीय कार्यशालाओं के माध्यम से हितधारकों का एकीकरण → चुनौतियों पर चर्चा और समाधानों की पहचान → गोद लेने की प्रक्रिया का सरलीकरण और जागरूकता में वृद्धि → विशेष ज़रूरतों वाले बच्चों के लिए परिवार-आधारित देखभाल का संवर्धन
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (CARA) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. CARA भारत सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त निकाय है।
2. यह भारतीय बच्चों के दत्तक ग्रहण को विनियमित करने के लिए नोडल निकाय के रूप में कार्य करता है।
3. CARA अंतर-देशीय दत्तक ग्रहण के मामलों को भी संभालता है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 गलत है क्योंकि CARA महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त निकाय है। कथन 2 और 3 सही हैं, CARA भारतीय बच्चों के दत्तक ग्रहण को विनियमित करने वाला नोडल निकाय है और अंतर-देशीय दत्तक ग्रहण के मामलों को भी संभालता है।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा/से ‘विशेष आवश्यकता वाले बच्चों’ के लिए गैर-संस्थागत पुनर्वास को बढ़ावा देने के CARA के प्रयासों का एक प्रमुख उद्देश्य है/हैं?
1. यह सुनिश्चित करना कि उन्हें सुरक्षित, प्यार भरा और सहयोगी पारिवारिक माहौल मिले।
2. दत्तक ग्रहण की प्रक्रिया को सरल बनाना।
3. दिव्यांग बच्चों के लिए संस्थागत देखभाल को प्राथमिकता देना।
- केवल 1
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: केवल 1 और 2 — CARA का उद्देश्य विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को सुरक्षित और प्यार भरा पारिवारिक माहौल प्रदान करना तथा दत्तक ग्रहण प्रक्रिया को बढ़ावा देना है। संस्थागत देखभाल को प्राथमिकता देना इसके गैर-संस्थागत पुनर्वास के उद्देश्य के विपरीत है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (CARA) द्वारा विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए परिवार-आधारित देखभाल और गैर-संस्थागत पुनर्वास को बढ़ावा देने में चुनौतियों और समाधानों पर चर्चा कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: CARA और उसके जनादेश का संक्षिप्त परिचय, विशेष रूप से विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के दत्तक ग्रहण के संदर्भ में।
2. चुनौतियाँ: विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के दत्तक ग्रहण में आने वाली प्रमुख चुनौतियों का उल्लेख करें, जैसे:
क. जागरूकता की कमी और सामाजिक पूर्वाग्रह।
ख. चिकित्सा जांच और मूल्यांकन से संबंधित मुद्दे।
ग. कानूनी और प्रक्रियात्मक जटिलताएँ।
घ. वित्तीय पहलू और सहायता प्रणालियों का अभाव।
ङ. विभिन्न हितधारकों (चिकित्सा पेशेवर, बाल संरक्षण इकाइयाँ) के बीच समन्वय की कमी।
3. समाधान और CARA के प्रयास: इन चुनौतियों से निपटने के लिए CARA और अन्य हितधारकों द्वारा किए जा रहे प्रयासों पर प्रकाश डालें, जैसे:
क. जागरूकता अभियान (जैसे ‘दत्तक ग्रहण के बारे में जागरूकता अभियान 2025’)।
ख. क्षेत्रीय परामर्श कार्यशालाएँ और हितधारकों के साथ संवाद।
ग. दत्तक ग्रहण प्रक्रियाओं का सरलीकरण और डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग।
घ. बाल सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवा प्रणालियों के बीच तालमेल को मजबूत करना।
ङ. परिवार-आधारित देखभाल को बढ़ावा देना और संस्थागतकरण को कम करना।
4. निष्कर्ष: विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए स्थायी, प्यार भरा और सहयोगी पारिवारिक माहौल सुनिश्चित करने हेतु निरंतर और समन्वित प्रयासों के महत्व पर बल दें।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
Maharashtra PCS (MPSC) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: सीएआरए (केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण) द्वारा आयोजित ‘वेस्टर्न ज़ोन कंसल्टेटिव वर्कशॉप’ का मुख्य उद्देश्य क्या था?
- A. महाराष्ट्र में बाल कल्याण योजनाओं का मूल्यांकन करना
- B. विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को गोद लेने के लिए क्षेत्रीय सहयोग को मज़बूत करना
- C. पुणे में बाल शिक्षा नीति पर चर्चा आयोजित करना
- D. राज्य सरकारों को गोद लेने संबंधी कानूनी मार्गदर्शन प्रदान करना
उत्तर: B. विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को गोद लेने के लिए क्षेत्रीय सहयोग को मज़बूत करना — सीएआरए द्वारा आयोजित ‘वेस्टर्न ज़ोन कंसल्टेटिव वर्कशॉप’ का मुख्य उद्देश्य विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को गोद लेने के लिए क्षेत्रीय सहयोग को मज़बूत करना था।
Mains: महाराष्ट्र राज्य में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के गोद लेने की प्रक्रिया में आने वाली प्रमुख चुनौतियों की चर्चा कीजिए तथा राज्य सरकार द्वारा इस संबंध में उठाए गए कदमों का वर्णन कीजिए।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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