03 Aug सुप्रीम कोर्ट का आदेश: SAC एटलस में पहचाने गए आर्द्रभूमि का सत्यापन और सीमांकन 2 महीने में करें राज्य
✎ सर्वोच्च न्यायालय ने SAC एटलस में चिह्नित आर्द्रभूमियों के भौतिक सत्यापन और सीमांकन के लिए राज्यों को दो महीने की समय-सीमा दी है, जो आर्द्रभूमि (संरक्षण और प्रबंधन) नियम, 2017 के तहत एक वैधानिक दायित्व है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जैव-विविधता | GS Paper II — भारतीय संविधान, शासन और न्यायपालिका
- Prelims: आर्द्रभूमि (Wetlands), आर्द्रभूमि (संरक्षण और प्रबंधन) नियम, 2017, SAC एटलस, सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश, पर्यावरण संरक्षण, न्यायिक सक्रियता
- Essay: पर्यावरण संरक्षण में न्यायपालिका की भूमिका, सतत विकास और आर्द्रभूमि का महत्व
त्वरित पुनरावृत्ति: सर्वोच्च न्यायालय ने SAC एटलस में चिह्नित आर्द्रभूमियों के भौतिक सत्यापन और सीमांकन के लिए राज्यों को दो महीने की समय-सीमा दी है, जो आर्द्रभूमि (संरक्षण और प्रबंधन) नियम, 2017 के तहत एक वैधानिक दायित्व है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
सर्वोच्च न्यायालय ने हाल ही में केंद्र, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को Space Applications Centre (SAC) एटलस में चिह्नित सभी आर्द्रभूमियों का दो महीने के भीतर भौतिक सत्यापन (physical verification) और सीमांकन (demarcation) करने का निर्देश दिया है। न्यायालय ने चेतावनी दी है कि यदि यह कार्य केवल कागजों तक सीमित रहा, तो संबंधित मंत्रालयों के सचिवों और राज्य आर्द्रभूमि प्राधिकरणों के उपाध्यक्षों को व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में उपस्थित होना होगा। यह निर्देश आर्द्रभूमि (संरक्षण और प्रबंधन) नियम, 2017 के तहत ‘ग्राउंड-ट्रूथिंग’ और सीमांकन के वैधानिक दायित्व को सुनिश्चित करने के लिए दिया गया है।
पृष्ठभूमि
- भारत में आर्द्रभूमि संरक्षण एक महत्वपूर्ण पर्यावरणीय मुद्दा रहा है, क्योंकि ये पारिस्थितिक तंत्र जैव-विविधता, जल विनियमन और जलवायु परिवर्तन शमन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
- वर्ष 2017 में, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (Ministry of Environment, Forest and Climate Change) ने आर्द्रभूमि (संरक्षण और प्रबंधन) नियम, 2017 (Wetlands (Conservation and Management) Rules, 2017) अधिसूचित किए थे, जिनका उद्देश्य आर्द्रभूमियों के प्रभावी संरक्षण और प्रबंधन के लिए एक नियामक ढाँचा प्रदान करना था।
- इन नियमों के तहत, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अपनी-अपनी आर्द्रभूमि प्राधिकरणों (Wetland Authorities) का गठन करना और आर्द्रभूमियों की पहचान, सीमांकन तथा संरक्षण योजनाएँ तैयार करना अनिवार्य है।
- SAC एटलस, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के Space Applications Centre द्वारा तैयार किया गया है, जो देश भर में आर्द्रभूमियों की पहचान और मैपिंग के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ दस्तावेज है।
- सर्वोच्च न्यायालय 2018 से देश भर में आर्द्रभूमियों की पहचान, अधिसूचना और संरक्षण सुनिश्चित करने के लिए इस मामले की निगरानी कर रहा है। पूर्व में भी न्यायालय ने ‘ग्राउंड-ट्रूथिंग’ और सीमांकन के निर्देश दिए थे, जिनकी अनुपालना में कमी पाई गई है।
- न्यायालय का यह नवीनतम निर्देश, पूर्व के आदेशों की अवहेलना और आर्द्रभूमि संरक्षण के प्रति राज्यों की शिथिलता को देखते हुए आया है, जो न्यायिक सक्रियता (judicial activism) का एक उदाहरण है।
आर्द्रभूमि (Wetlands) क्या हैं?
- आर्द्रभूमि ऐसे क्षेत्र हैं जहाँ जल पर्यावरण का प्राथमिक नियंत्रक कारक है और जो इसके संबंधित पौधों और पशु जीवन को निर्धारित करता है।
- इनमें दलदल, फेंस, पीटभूमि या जल के क्षेत्र, चाहे प्राकृतिक या कृत्रिम, स्थायी या अस्थायी, स्थिर या बहने वाले जल के साथ, ताजे, खारे या नमकीन जल सहित समुद्री जल के क्षेत्र शामिल हैं जिनकी गहराई कम ज्वार में छह मीटर से अधिक नहीं होती।
- आर्द्रभूमियाँ पारिस्थितिकी तंत्र की महत्वपूर्ण सेवाएँ प्रदान करती हैं, जैसे कि जल शोधन, बाढ़ नियंत्रण, भूजल पुनर्भरण, तटीय स्थिरीकरण और जैव-विविधता का समर्थन।
- ये कई प्रजातियों के लिए महत्वपूर्ण आवास प्रदान करती हैं, जिनमें प्रवासी पक्षी और जलीय जीव शामिल हैं, जिससे ये जैव-विविधता के हॉटस्पॉट बन जाती हैं।
- आर्द्रभूमियाँ कार्बन पृथक्करण (carbon sequestration) में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, जिससे जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में मदद मिलती है।
- भारत में आर्द्रभूमियों को आर्द्रभूमि (संरक्षण और प्रबंधन) नियम, 2017 के तहत विनियमित किया जाता है, जो उनके संरक्षण और विवेकपूर्ण उपयोग के लिए एक कानूनी ढाँचा प्रदान करते हैं।
- रामसर अभिसमय (Ramsar Convention) एक अंतर्राष्ट्रीय संधि है जिसका उद्देश्य आर्द्रभूमियों के संरक्षण और उनके संसाधनों के सतत उपयोग को बढ़ावा देना है; भारत भी इसका एक हस्ताक्षरकर्ता देश है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| आर्द्रभूमि (Wetlands) की परिभाषा | आर्द्रभूमि ऐसे क्षेत्र हैं जहाँ पानी पर्यावरण और संबंधित पौधों और जानवरों के जीवन को नियंत्रित करने वाला प्राथमिक कारक है। इनमें दलदल, कच्छभूमि, पीटभूमि और जल के ऐसे क्षेत्र शामिल हैं, चाहे वे प्राकृतिक हों या कृत्रिम, स्थायी हों या अस्थायी, जिनमें स्थिर या बहता हुआ जल हो, जो ताज़ा, खारा या नमकीन हो, जिसमें समुद्री जल के ऐसे क्षेत्र भी शामिल हों जिनकी गहराई कम ज्वार में छह मीटर से अधिक न हो। |
| SAC एटलस | भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र (Space Applications Centre – SAC) द्वारा तैयार किया गया यह एटलस देश भर में आर्द्रभूमियों की पहचान और मैपिंग करता है, जो उनके संरक्षण और प्रबंधन के लिए एक महत्वपूर्ण आधार प्रदान करता है। |
| ग्राउंड-ट्रूथिंग (Ground-truthing) | यह SAC एटलस में पहचानी गई आर्द्रभूमियों का भौतिक सत्यापन है, जिसमें उनकी सीमाओं का जमीनी स्तर पर सीमांकन शामिल है। यह सुनिश्चित करता है कि कागजी कार्रवाई वास्तविक स्थिति से मेल खाती है। |
| आर्द्रभूमि (संरक्षण और प्रबंधन) नियम, 2017 | ये नियम आर्द्रभूमियों के संरक्षण, प्रबंधन और बुद्धिमत्तापूर्ण उपयोग के लिए एक वैधानिक ढाँचा प्रदान करते हैं, जिसमें राज्य आर्द्रभूमि प्राधिकरणों (State Wetland Authorities) की स्थापना और उनके कार्यों को परिभाषित किया गया है। |
| न्यायिक सक्रियता | सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) का यह निर्देश आर्द्रभूमि संरक्षण के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जहाँ वह सरकारी अधिकारियों को वैधानिक दायित्वों का पालन करने के लिए जवाबदेह ठहरा रहा है। |
महत्व
पर्यावरणीय महत्व
- आर्द्रभूमियाँ जैव विविधता (Biodiversity) के हॉटस्पॉट हैं, जो विभिन्न प्रकार की पौधों और जानवरों की प्रजातियों को आवास प्रदान करती हैं।
- ये प्राकृतिक जल शोधक के रूप में कार्य करती हैं, प्रदूषकों को हटाकर जल की गुणवत्ता में सुधार करती हैं।
- आर्द्रभूमियाँ बाढ़ नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, अतिरिक्त जल को अवशोषित करके निचले इलाकों को बचाती हैं।
- ये कार्बन पृथक्करण (Carbon Sequestration) में भी सहायक हैं, जिससे जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के प्रभावों को कम करने में मदद मिलती है।
सामाजिक-आर्थिक महत्व
- कई समुदायों के लिए आर्द्रभूमियाँ आजीविका का स्रोत हैं, विशेषकर मत्स्य पालन और कृषि के माध्यम से।
- ये भूजल पुनर्भरण (Groundwater Recharge) में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं, जो पेयजल और सिंचाई के लिए आवश्यक है।
- आर्द्रभूमियाँ पर्यटन और मनोरंजन के अवसर प्रदान करती हैं, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलता है।
शासन और विधि का शासन
- सर्वोच्च न्यायालय का निर्देश यह सुनिश्चित करता है कि आर्द्रभूमि (संरक्षण और प्रबंधन) नियम, 2017 जैसे वैधानिक प्रावधानों का ईमानदारी से पालन किया जाए।
- यह केंद्र और राज्य सरकारों के बीच सहयोगात्मक संघवाद (Cooperative Federalism) को बढ़ावा देता है, जहाँ दोनों को पर्यावरण संरक्षण के लिए मिलकर काम करना होता है।
- यह न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) के सिद्धांत को मजबूत करता है, जहाँ न्यायपालिका कार्यपालिका की निष्क्रियता या गैर-अनुपालन पर अंकुश लगाती है।
चुनौतियाँ
1. आर्द्रभूमि अतिक्रमण और क्षरण
- शहरीकरण, कृषि विस्तार और औद्योगिक गतिविधियों के कारण आर्द्रभूमियों का अतिक्रमण और उन्हें भरा जाना एक बड़ी चुनौती है।
- प्रदूषण, जल निकासी और जलवायु परिवर्तन के कारण आर्द्रभूमियों का पारिस्थितिक संतुलन बिगड़ रहा है।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण संरक्षण, भूमि क्षरण
2. डेटा और सीमांकन की कमी
- कई आर्द्रभूमियों की सही पहचान और उनकी सीमाओं का स्पष्ट सीमांकन अभी भी एक चुनौती है, जिससे उनके प्रबंधन में बाधा आती है।
- SAC एटलस के बावजूद, जमीनी स्तर पर सत्यापन और सीमांकन में देरी हो रही है।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण प्रबंधन, डेटा शासन
3. संस्थागत क्षमता और समन्वय
- राज्य आर्द्रभूमि प्राधिकरणों के पास अक्सर पर्याप्त मानव संसाधन, तकनीकी विशेषज्ञता और वित्तीय संसाधनों की कमी होती है।
- विभिन्न सरकारी विभागों और एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी भी संरक्षण प्रयासों को प्रभावित करती है।
यूपीएससी लिंक: शासन, संस्थागत सुधार
4. कानूनों का कमजोर प्रवर्तन
- आर्द्रभूमि संरक्षण से संबंधित कानूनों और नियमों का प्रवर्तन अक्सर कमजोर होता है, जिससे उल्लंघनकर्ताओं को दंडित नहीं किया जा पाता है।
- जन जागरूकता की कमी भी संरक्षण प्रयासों में बाधा डालती है।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण कानून, विधि का शासन
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| भौतिक सत्यापन में देरी | राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा SAC एटलस में पहचानी गई आर्द्रभूमियों का जमीनी स्तर पर सत्यापन और सीमांकन करने में लगातार देरी हो रही है। |
| कागजी कार्रवाई तक सीमित कार्यवाही | सर्वोच्च न्यायालय ने चिंता व्यक्त की है कि ‘ग्राउंड-ट्रूथिंग’ और सीमांकन की वैधानिक प्रक्रिया केवल कागजों तक ही सीमित रह गई है, वास्तविक धरातल पर क्रियान्वयन नहीं हो रहा है। |
| अधिकारियों की जवाबदेही का अभाव | पहले के निर्देशों के बावजूद गैर-अनुपालन के कारण सर्वोच्च न्यायालय को मंत्रालयों के सचिवों और राज्य आर्द्रभूमि प्राधिकरणों के उपाध्यक्षों को व्यक्तिगत रूप से तलब करने की चेतावनी देनी पड़ी है। |
| आर्द्रभूमि (संरक्षण और प्रबंधन) नियम, 2017 का उल्लंघन | निर्देशों का पालन न करना इन नियमों के तहत निर्धारित वैधानिक दायित्वों का उल्लंघन है, जिससे आर्द्रभूमि संरक्षण के प्रयासों को धक्का लगता है। |
| पर्यावरण क्षरण का जोखिम | असुरक्षित और गैर-सीमांकित आर्द्रभूमियाँ अतिक्रमण, प्रदूषण और अनियोजित विकास के प्रति अधिक संवेदनशील होती हैं, जिससे उनके पारिस्थितिकीय कार्य प्रभावित होते हैं। |
आगे की राह
- सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का त्वरित और प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित किया जाए, जिसमें दो महीने की समय-सीमा का पालन शामिल है।
- राज्य आर्द्रभूमि प्राधिकरणों की क्षमता निर्माण (Capacity Building) की जाए, जिसमें उन्हें पर्याप्त मानव संसाधन, तकनीकी विशेषज्ञता और वित्तीय सहायता प्रदान की जाए।
- आर्द्रभूमि संरक्षण के लिए एक व्यापक राष्ट्रीय नीति विकसित की जाए, जो विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के बीच समन्वय को बढ़ावा दे।
- आर्द्रभूमि अतिक्रमण और प्रदूषण को रोकने के लिए कानूनों का सख्त प्रवर्तन किया जाए और उल्लंघनकर्ताओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
- स्थानीय समुदायों और हितधारकों को आर्द्रभूमि संरक्षण प्रयासों में शामिल किया जाए, क्योंकि वे इन पारिस्थितिक तंत्रों के सबसे करीब होते हैं।
- आर्द्रभूमि के महत्व के बारे में जन जागरूकता अभियान चलाए जाएं, ताकि नागरिकों में संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित हो।
- आर्द्रभूमि की निगरानी और मूल्यांकन के लिए आधुनिक तकनीकों, जैसे रिमोट सेंसिंग और GIS, का प्रभावी ढंग से उपयोग किया जाए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
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संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 21’, ‘note’: ‘स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 48A’, ‘note’: ‘पर्यावरण संरक्षण और संवर्धन’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 51A (g)’, ‘note’: ‘प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा का कर्तव्य’}
अवधारणा प्रवाह
SAC एटलस द्वारा आर्द्रभूमियों की पहचान → आर्द्रभूमि (संरक्षण और प्रबंधन) नियम, 2017 के तहत ‘ग्राउंड-ट्रूथिंग’ का वैधानिक दायित्व → राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा भौतिक सत्यापन और सीमांकन में देरी → सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्देशों का गैर-अनुपालन पर चिंता → सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दो महीने में सत्यापन और सीमांकन का निर्देश → गैर-अनुपालन पर अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से तलब करने की चेतावनी → आर्द्रभूमि संरक्षण और प्रबंधन में सुधार की आवश्यकता
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. आर्द्रभूमि (संरक्षण और प्रबंधन) नियम, 2017 पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत बनाए गए हैं।
2. SAC एटलस, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र (Space Applications Centre) द्वारा तैयार किया गया है, जो भारत में आर्द्रभूमियों की पहचान करता है।
3. रामसर कन्वेंशन (Ramsar Convention) एक अंतर-सरकारी संधि है जो आर्द्रभूमि के संरक्षण और उनके संसाधनों के बुद्धिमत्तापूर्ण उपयोग के लिए राष्ट्रीय कार्रवाई और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के लिए ढांचा प्रदान करती है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है। आर्द्रभूमि (संरक्षण और प्रबंधन) नियम, 2017, पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत अधिसूचित किए गए हैं।
कथन 2 सही है। SAC एटलस, जिसे अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र (SAC) द्वारा विकसित किया गया है, भारत की आर्द्रभूमियों का एक व्यापक डेटाबेस प्रदान करता है।
कथन 3 सही है। रामसर कन्वेंशन आर्द्रभूमि के संरक्षण और सतत उपयोग के लिए एक अंतरराष्ट्रीय संधि है, जिस पर 1971 में ईरान के रामसर शहर में हस्ताक्षर किए गए थे।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन आर्द्रभूमि के पारिस्थितिक महत्व का सबसे अच्छा वर्णन करता है?
- वे केवल प्रवासी पक्षियों के लिए प्रजनन स्थल प्रदान करती हैं।
- वे केवल बाढ़ नियंत्रण में सहायता करती हैं।
- वे जल शोधन, जैव विविधता संरक्षण, बाढ़ नियंत्रण और भूजल पुनर्भरण जैसे कई पारिस्थितिकी तंत्र सेवाएं प्रदान करती हैं।
- वे केवल कृषि के लिए उपजाऊ भूमि प्रदान करती हैं।
उत्तर: वे जल शोधन, जैव विविधता संरक्षण, बाढ़ नियंत्रण और भूजल पुनर्भरण जैसे कई पारिस्थितिकी तंत्र सेवाएं प्रदान करती हैं। — आर्द्रभूमि विभिन्न प्रकार की पारिस्थितिकी तंत्र सेवाएं प्रदान करती हैं, जिनमें जल शोधन, जैव विविधता का समर्थन, बाढ़ नियंत्रण, भूजल पुनर्भरण, कार्बन पृथक्करण और स्थानीय जलवायु का विनियमन शामिल है। ये केवल एक या दो कार्य तक सीमित नहीं हैं।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में आर्द्रभूमि के संरक्षण में सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के महत्व का परीक्षण कीजिए। आर्द्रभूमि (संरक्षण और प्रबंधन) नियम, 2017 के तहत ‘ग्राउंड-ट्रूथिंग’ और सीमांकन की वैधानिक अनिवार्यता को भी स्पष्ट कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** आर्द्रभूमि के महत्व और उनके संरक्षण की आवश्यकता पर संक्षिप्त प्रकाश डालिए। सर्वोच्च न्यायालय के हालिया निर्देशों का संदर्भ दीजिए।
2. **सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का महत्व:**
* **न्यायिक सक्रियता:** पर्यावरण संरक्षण में न्यायपालिका की सक्रिय भूमिका को दर्शाता है।
* **जवाबदेही सुनिश्चित करना:** राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को SAC एटलस में पहचान की गई आर्द्रभूमियों का भौतिक सत्यापन और सीमांकन करने के लिए बाध्य करना।
* **समयबद्ध कार्यान्वयन:** दो महीने की समय-सीमा निर्धारित करना और गैर-अनुपालन पर गंभीर परिणामों की चेतावनी देना।
* **पर्यावरण शासन में सुधार:** नियमों के प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए दबाव बनाना।
* **जैव विविधता संरक्षण:** आर्द्रभूमि के पारिस्थितिक महत्व को रेखांकित करना और उनके संरक्षण को बढ़ावा देना।
3. **आर्द्रभूमि (संरक्षण और प्रबंधन) नियम, 2017:**
* **नियमों का उद्देश्य:** आर्द्रभूमि के संरक्षण, प्रबंधन और बुद्धिमत्तापूर्ण उपयोग के लिए एक नियामक ढांचा प्रदान करना।
* **’ग्राउंड-ट्रूथिंग’ और सीमांकन:** इन नियमों के तहत यह एक वैधानिक अनिवार्यता है। इसका अर्थ है कि केवल कागजी कार्रवाई के बजाय, आर्द्रभूमियों की भौतिक रूप से पहचान करना, उनकी सीमाओं का निर्धारण करना और उन्हें अधिसूचित करना।
* **राज्य आर्द्रभूमि प्राधिकरण:** नियमों के तहत गठित इन प्राधिकरणों की भूमिका और जिम्मेदारियां।
* **निषिद्ध गतिविधियां:** नियमों के तहत आर्द्रभूमि में निषिद्ध गतिविधियों का उल्लेख।
4. **चुनौतियाँ और आगे की राह:** कार्यान्वयन में आने वाली संभावित चुनौतियाँ (जैसे संसाधनों की कमी, राजनीतिक इच्छाशक्ति का अभाव) और उनके समाधान के लिए सुझाव।
5. **निष्कर्ष:** आर्द्रभूमि संरक्षण के लिए सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के दूरगामी प्रभावों और सतत विकास के लिए उनके महत्व पर बल दीजिए।
स्रोत: Hindustan Times
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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