सुप्रीम कोर्ट ने 19 राज्यों से पूछा: कब होगी कैंसर मरीजों की अनिवार्य रिपोर्टिंग? जानिए पूरा मामला

कैंसर पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: 19 राज्यों से पूछा- कब होगी हर मरीज की अनिवार्य रिपोर्टिंग? — concept mind map

सुप्रीम कोर्ट ने 19 राज्यों से पूछा: कब होगी कैंसर मरीजों की अनिवार्य रिपोर्टिंग? जानिए पूरा मामला

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कैंसर नियंत्रण प्रक्रिया

✎ सर्वोच्च न्यायालय ने कैंसर को 'नोटिफिएबल बीमारी' घोषित करने के लिए राज्यों को निर्देश दिया है, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य निगरानी और कैंसर नियंत्रण प्रयासों के लिए महत्वपूर्ण है।

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — स्वास्थ्य, केंद्र एवं राज्यों के कार्य तथा उत्तरदायित्व  |  GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ; स्वास्थ्य से संबंधित मुद्दे
  • Prelims: नोटिफिएबल बीमारी, कैंसर रजिस्ट्री, जनहित याचिका (PIL), स्वास्थ्य राज्य सूची का विषय, सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश, सार्वजनिक स्वास्थ्य
  • Essay: सार्वजनिक स्वास्थ्य के समक्ष चुनौतियाँ और उनका समाधान, संघवाद और स्वास्थ्य क्षेत्र में केंद्र-राज्य समन्वय

त्वरित पुनरावृत्ति: सर्वोच्च न्यायालय ने कैंसर को ‘नोटिफिएबल बीमारी’ घोषित करने के लिए राज्यों को निर्देश दिया है, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य निगरानी और कैंसर नियंत्रण प्रयासों के लिए महत्वपूर्ण है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) ने हाल ही में 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कैंसर को ‘नोटिफिएबल बीमारी’ (Notifiable Disease) घोषित करने पर उचित निर्णय लेने का निर्देश दिया है। न्यायालय ने कैंसर की अनिवार्य रिपोर्टिंग, शुरुआती पहचान, राष्ट्रीय स्तर की रियल-टाइम डिजिटल कैंसर रजिस्ट्री और देशभर में स्क्रीनिंग व्यवस्था से संबंधित एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया। न्यायालय ने केंद्र सरकार से भी इस संबंध में एक समान नीति बनाने पर विचार करने को कहा है।

पृष्ठभूमि

  • एक जनहित याचिका में देशभर में कैंसर का जल्द पता लगाने और मरीजों को उचित उपचार एवं देखभाल सुनिश्चित करने के लिए इसे ‘नोटिफिएबल बीमारी’ घोषित करने का निर्देश देने की मांग की गई थी।
  • याचिका में मौजूदा कैंसर रजिस्ट्री की सीमित कवरेज और अवैज्ञानिक वैकल्पिक उपचारों के दावों को लेकर भी चिंता जताई गई थी।
  • संसदीय स्थायी समिति की रिपोर्ट में कैंसर को ‘नोटिफिएबल बीमारी’ घोषित करने की सिफारिश की गई थी।
  • देश के 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में से 17 ने पहले ही कैंसर को ‘नोटिफिएबल बीमारी’ घोषित कर दिया है।
  • सर्वोच्च न्यायालय ने 12 दिसंबर 2023 को केंद्र सरकार और सभी राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों को इस मामले पर नोटिस जारी कर जवाब मांगा था।
  • न्यायालय ने इस बात पर जोर दिया है कि कैंसर जैसे गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य मुद्दे पर एक समान नीति होनी चाहिए।
  • भारत में कैंसर के मामलों में लगातार वृद्धि देखी जा रही है, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली पर दबाव बढ़ रहा है।

नोटिफिएबल बीमारी क्या है?

  • एक ‘नोटिफिएबल बीमारी’ वह होती है जिसके मामलों की जानकारी संबंधित सरकारी स्वास्थ्य अधिकारियों को देना अनिवार्य होता है।
  • यह अनिवार्य रिपोर्टिंग सार्वजनिक स्वास्थ्य अधिकारियों को बीमारी के प्रसार की निगरानी करने, प्रकोपों की पहचान करने और प्रभावी नियंत्रण उपाय लागू करने में सहायता करती है।
  • भारत में, विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पास अपनी-अपनी ‘नोटिफिएबल बीमारियों’ की सूची होती है, जो स्थानीय महामारी विज्ञान और स्वास्थ्य प्राथमिकताओं के आधार पर भिन्न हो सकती है।
  • कैंसर को ‘नोटिफिएबल बीमारी’ घोषित करने से इसके मामलों का व्यापक और वास्तविक समय पर डेटा एकत्र करना संभव हो पाएगा।
  • यह डेटा कैंसर के बोझ, भौगोलिक वितरण और विभिन्न जनसांख्यिकीय समूहों में इसकी व्यापकता को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।
  • अनिवार्य रिपोर्टिंग से शुरुआती पहचान और निदान में सुधार हो सकता है, जिससे मरीजों को समय पर उपचार और बेहतर परिणाम मिल सकते हैं।
  • यह नीतिगत हस्तक्षेपों, संसाधन आवंटन और कैंसर नियंत्रण कार्यक्रमों की योजना बनाने के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करेगा।
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भी सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण बीमारियों की अनिवार्य रिपोर्टिंग की वकालत करता है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
कैंसर को ‘नोटिफिएबल बीमारी’ घोषित करना यह सुनिश्चित करता है कि कैंसर के मामलों की जानकारी सरकारी स्वास्थ्य अधिकारियों को अनिवार्य रूप से दी जाए, जिससे डेटा संग्रह और निगरानी में सुधार होता है।
अनिवार्य रिपोर्टिंग कैंसर के मामलों की वास्तविक समय पर जानकारी उपलब्ध कराता है, जो प्रभावी नीति निर्माण और संसाधन आवंटन के लिए महत्वपूर्ण है।
जल्दी पहचान (Early Detection) रोग का शीघ्र निदान बेहतर उपचार परिणामों और रोगियों के लिए जीवन की गुणवत्ता में सुधार की संभावना को बढ़ाता है।
राष्ट्रीय स्तर की रियल-टाइम डिजिटल कैंसर रजिस्ट्री देशभर में कैंसर के मामलों का एक व्यापक और अद्यतन डेटाबेस प्रदान करता है, जो शोध, निगरानी और सार्वजनिक स्वास्थ्य हस्तक्षेपों के लिए आवश्यक है।
देशभर में स्क्रीनिंग व्यवस्था नियमित जांच के माध्यम से कैंसर का शुरुआती चरणों में पता लगाने में मदद करता है, जिससे उपचार की सफलता दर बढ़ती है।

महत्व

सार्वजनिक स्वास्थ्य

  • कैंसर के मामलों की अनिवार्य रिपोर्टिंग से रोग के प्रसार, घटना और भौगोलिक वितरण का सटीक डेटा उपलब्ध होता है, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य रणनीतियों के निर्माण के लिए महत्वपूर्ण है।
  • जल्दी पहचान और बेहतर उपचार तक पहुंच सुनिश्चित करके, यह पहल कैंसर से संबंधित मृत्यु दर और रुग्णता को कम करने में सहायक होगी।
  • एक राष्ट्रीय रजिस्ट्री स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं और शोधकर्ताओं को कैंसर के पैटर्न और जोखिम कारकों को समझने में मदद करेगी, जिससे लक्षित हस्तक्षेपों का विकास हो सकेगा।

शासन और नीति निर्माण

  • सुप्रीम कोर्ट का निर्देश केंद्र और राज्यों के बीच स्वास्थ्य संबंधी मामलों में समन्वय और एक समान नीति अपनाने की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
  • अनिवार्य रिपोर्टिंग से प्राप्त डेटा साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण को बढ़ावा देगा, जिससे कैंसर नियंत्रण कार्यक्रमों के लिए संसाधनों का कुशल आवंटन हो सकेगा।
  • यह पहल स्वास्थ्य सेवा वितरण प्रणालियों में जवाबदेही और पारदर्शिता को बढ़ाएगी, क्योंकि डेटा की उपलब्धता प्रदर्शन मूल्यांकन और सुधारों को सक्षम करेगी।

सामाजिक प्रभाव

  • कैंसर की जल्दी पहचान और बेहतर उपचार की उपलब्धता से रोगियों और उनके परिवारों पर पड़ने वाले वित्तीय और भावनात्मक बोझ को कम करने में मदद मिलेगी।
  • अवैज्ञानिक वैकल्पिक उपचारों के दावों पर चिंता को दूर करके, यह पहल रोगियों को विश्वसनीय और प्रभावी उपचार विकल्पों की ओर निर्देशित करेगी।
  • यह सार्वजनिक जागरूकता और शिक्षा को बढ़ावा देगा, जिससे लोग कैंसर के लक्षणों के प्रति अधिक सतर्क होंगे और समय पर चिकित्सा सहायता प्राप्त करेंगे।

चुनौतियाँ

1. राज्यों के बीच एकरूपता का अभाव

  • कुछ राज्यों द्वारा कैंसर को ‘नोटिफिएबल बीमारी’ घोषित करने में अनिच्छा या देरी से राष्ट्रीय स्तर पर एक समान डेटा संग्रह और निगरानी प्रणाली स्थापित करने में बाधा आती है।
  • स्वास्थ्य ‘राज्य सूची’ का विषय होने के कारण, केंद्र सरकार के लिए सभी राज्यों पर एक समान नीति लागू करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

2. डेटा संग्रह और प्रबंधन

  • देशभर में कैंसर के मामलों की रियल-टाइम डिजिटल रजिस्ट्री स्थापित करने के लिए मजबूत तकनीकी बुनियादी ढांचे और प्रशिक्षित कर्मियों की आवश्यकता होगी।
  • डेटा की गोपनीयता और सुरक्षा सुनिश्चित करना एक महत्वपूर्ण चुनौती होगी, खासकर जब संवेदनशील स्वास्थ्य जानकारी एकत्र की जा रही हो।

3. संसाधन और बुनियादी ढांचा

  • कैंसर की जल्दी पहचान और स्क्रीनिंग कार्यक्रमों को व्यापक रूप से लागू करने के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधनों, प्रशिक्षित चिकित्सा पेशेवरों और आधुनिक उपकरणों की आवश्यकता होगी।
  • ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी एक बड़ी बाधा हो सकती है, जिससे सभी तक स्क्रीनिंग और उपचार की पहुंच सुनिश्चित करना मुश्किल होगा।

4. जागरूकता और शिक्षा

  • जनता के बीच कैंसर के लक्षणों, जल्दी पहचान के महत्व और उपलब्ध उपचार विकल्पों के बारे में जागरूकता की कमी एक चुनौती बनी हुई है।
  • अवैज्ञानिक वैकल्पिक उपचारों के दावों का मुकाबला करना और लोगों को साक्ष्य-आधारित चिकित्सा की ओर निर्देशित करना महत्वपूर्ण है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
अधिसूचित बीमारी (Notifiable Disease) की स्थिति 19 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा कैंसर को अभी तक ‘नोटिफिएबल बीमारी’ घोषित न करना, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर डेटा संग्रह में असमानता है।
डेटा कवरेज और सटीकता मौजूदा कैंसर रजिस्ट्री की सीमित कवरेज और अपर्याप्तता, जिससे कैंसर के वास्तविक बोझ का आकलन करना मुश्किल है।
अवैज्ञानिक वैकल्पिक उपचार अवैज्ञानिक और अप्रभावी वैकल्पिक उपचारों के दावों का प्रसार, जो रोगियों को उचित चिकित्सा देखभाल से दूर कर सकता है।
एक समान नीति का अभाव केंद्र सरकार द्वारा सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के लिए कैंसर नियंत्रण पर अनिवार्य दिशानिर्देशों की कमी, जिससे प्रयासों में बिखराव है।
जल्दी पहचान और स्क्रीनिंग देशभर में कैंसर की जल्दी पहचान और व्यापक स्क्रीनिंग व्यवस्था की कमी, जिससे रोग का निदान अक्सर देर से होता है।

आगे की राह

  • केंद्र सरकार को स्वास्थ्य को ‘राज्य सूची’ का विषय मानते हुए भी, सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के लिए कैंसर को ‘नोटिफिएबल बीमारी’ घोषित करने हेतु एक समान और अनिवार्य दिशानिर्देश जारी करने चाहिए।
  • एक मजबूत राष्ट्रीय डिजिटल कैंसर रजिस्ट्री प्रणाली विकसित की जानी चाहिए जो रियल-टाइम डेटा संग्रह, विश्लेषण और साझाकरण को सक्षम करे, जिसमें डेटा गोपनीयता और सुरक्षा के कड़े प्रावधान हों।
  • देशभर में कैंसर की जल्दी पहचान और स्क्रीनिंग कार्यक्रमों को व्यापक रूप से लागू करने के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर तृतीयक देखभाल सुविधाओं तक बुनियादी ढांचे और मानव संसाधनों को मजबूत किया जाना चाहिए।
  • कैंसर के बारे में सार्वजनिक जागरूकता बढ़ाने और वैज्ञानिक रूप से सिद्ध उपचारों को बढ़ावा देने के लिए व्यापक जन-शिक्षा अभियान चलाए जाने चाहिए, जिसमें अवैज्ञानिक वैकल्पिक उपचारों के खतरों को भी उजागर किया जाए।
  • केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय और सहयोग को मजबूत किया जाना चाहिए ताकि कैंसर नियंत्रण रणनीतियों का प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित हो सके, जिसमें वित्तीय और तकनीकी सहायता का प्रावधान शामिल हो।
  • कैंसर अनुसंधान और विकास को बढ़ावा दिया जाना चाहिए, विशेष रूप से भारत में प्रचलित कैंसर के प्रकारों और उनके उपचार के तरीकों पर ध्यान केंद्रित करते हुए।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

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संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 21: जीवन का अधिकार (स्वास्थ्य का अधिकार निहित)
  • अनुच्छेद 47: पोषाहार स्तर और जीवन स्तर को ऊपर उठाना तथा लोक स्वास्थ्य का सुधार करना राज्य का कर्तव्य

अवधारणा प्रवाह

सुप्रीम कोर्ट का निर्देश (कैंसर को नोटिफिएबल बीमारी घोषित करें)  →  राज्यों द्वारा अनिवार्य रिपोर्टिंग और डेटा संग्रह  →  राष्ट्रीय डिजिटल कैंसर रजिस्ट्री का निर्माण  →  कैंसर के पैटर्न और जोखिम कारकों का विश्लेषण  →  साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण और लक्षित हस्तक्षेप  →  जल्दी पहचान, बेहतर उपचार और सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत में स्वास्थ्य ‘राज्य सूची’ का विषय है।
2. ‘नोटिफिएबल बीमारी’ वह बीमारी होती है जिसके मामलों की जानकारी संबंधित सरकारी स्वास्थ्य अधिकारियों को देना अनिवार्य होता है।
3. सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार को कैंसर को ‘नोटिफिएबल बीमारी’ घोषित करने के लिए सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को अनिवार्य दिशानिर्देश जारी करने का निर्देश दिया है।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 और 2 सही हैं। भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची के तहत स्वास्थ्य ‘राज्य सूची’ का विषय है। ‘नोटिफिएबल बीमारी’ की परिभाषा भी सही है। कथन 3 गलत है क्योंकि सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार से पूछा था कि वह अनिवार्य दिशानिर्देश क्यों जारी नहीं कर रही है, लेकिन उसने सीधे निर्देश नहीं दिया, बल्कि शेष राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को उचित निर्णय लेने का निर्देश दिया।

Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन कैंसर की अनिवार्य रिपोर्टिंग के संदर्भ में सही है?

  1. यह केवल केंद्र सरकार का दायित्व है।
  2. यह राज्य सरकारों को अपनी इच्छा से लागू करने की छूट देता है।
  3. यह सार्वजनिक स्वास्थ्य निगरानी और बेहतर उपचार के लिए महत्वपूर्ण है।
  4. यह केवल निजी अस्पतालों पर लागू होता है।

उत्तर: यह सार्वजनिक स्वास्थ्य निगरानी और बेहतर उपचार के लिए महत्वपूर्ण है। — कैंसर की अनिवार्य रिपोर्टिंग सार्वजनिक स्वास्थ्य निगरानी, डेटा संग्रह, शुरुआती पहचान और मरीजों को बेहतर उपचार व देखभाल उपलब्ध कराने के लिए महत्वपूर्ण है। यह केवल केंद्र या राज्य का दायित्व नहीं है, बल्कि एक समन्वित प्रयास की आवश्यकता है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत में सार्वजनिक स्वास्थ्य ‘राज्य का विषय’ है, फिर भी सर्वोच्च न्यायालय ने कैंसर को ‘नोटिफिएबल बीमारी’ घोषित करने के लिए राज्यों को निर्देश दिया है। इस संदर्भ में, भारत में संघीय ढांचे के तहत सार्वजनिक स्वास्थ्य नीतियों के निर्माण और कार्यान्वयन में केंद्र और राज्यों के बीच सहयोग की आवश्यकता का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** सर्वोच्च न्यायालय के हालिया निर्देश का उल्लेख करें, जिसमें कैंसर को ‘नोटिफिएबल बीमारी’ घोषित करने के लिए राज्यों को कहा गया है, और यह बताएं कि स्वास्थ्य ‘राज्य सूची’ का विषय है।
2. **संघीय ढाँचा और स्वास्थ्य:** संविधान की सातवीं अनुसूची के तहत स्वास्थ्य को राज्य सूची में रखने के निहितार्थों पर चर्चा करें। बताएं कि इससे राज्यों को अपनी विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुसार नीतियां बनाने की स्वायत्तता मिलती है।
3. **न्यायिक सक्रियता का पहलू:** सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश को न्यायिक सक्रियता के उदाहरण के रूप में देखें, जिसका उद्देश्य सार्वजनिक स्वास्थ्य के व्यापक हित में राज्यों को एक समान नीति अपनाने के लिए प्रेरित करना है।
4. **सहयोग की आवश्यकता:** उन कारणों पर प्रकाश डालें जो सार्वजनिक स्वास्थ्य के मुद्दों (जैसे कैंसर) से निपटने के लिए केंद्र और राज्यों के बीच सहयोग को अनिवार्य बनाते हैं:
* महामारी विज्ञान डेटा का राष्ट्रीय स्तर पर संग्रह।
* संसाधनों का कुशल आवंटन।
* एक समान उपचार प्रोटोकॉल और स्क्रीनिंग कार्यक्रम।
* अंतर-राज्यीय समन्वय।
* राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (National Health Mission) जैसे केंद्रीय योजनाओं का प्रभावी कार्यान्वयन।
5. **चुनौतियाँ:** सहयोग में आने वाली चुनौतियों का उल्लेख करें, जैसे राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता, राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी, और विभिन्न राज्यों की प्राथमिकताएं।
6. **आगे की राह/निष्कर्ष:** एक मजबूत संघीय ढांचे के भीतर सार्वजनिक स्वास्थ्य लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) के महत्व पर जोर दें। नीति आयोग (NITI Aayog) जैसी संस्थाओं की भूमिका का उल्लेख करें जो केंद्र-राज्य समन्वय में सहायक हो सकती हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति (National Health Policy) के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए एकीकृत दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल दें।

स्रोत: amarujala.com


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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