24 Aug सुप्रीम कोर्ट ने सीबीएसई की तीन-भाषा नीति पर उठाए सवाल, ‘नेटिव’ शब्द पर क्या कहा?
✎ सर्वोच्च न्यायालय ने सीबीएसई की त्रि-भाषा नीति में 'नेटिव' शब्द के प्रयोग पर सवाल उठाते हुए अंग्रेजी की स्थिति और नीति के संवैधानिक आधार पर विचार करने का संकेत दिया है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — भारतीय संविधान: संघ एवं राज्यों के कार्य और उत्तरदायित्व, संघवाद, शक्तियों का पृथक्करण, विवाद निवारण तंत्र तथा संस्थाएँ। | GS Paper II — शिक्षा, मानव संसाधन से संबंधित विषय।
- Prelims: त्रि-भाषा नीति, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, अनुच्छेद 343, अनुच्छेद 351, आठवीं अनुसूची, सर्वोच्च न्यायालय की न्यायिक समीक्षा
- Essay: भारत में भाषाई विविधता और राष्ट्रीय एकीकरण, शिक्षा नीति का संवैधानिक आधार और क्रियान्वयन की चुनौतियाँ
त्वरित पुनरावृत्ति: सर्वोच्च न्यायालय ने सीबीएसई की त्रि-भाषा नीति में ‘नेटिव’ शब्द के प्रयोग पर सवाल उठाते हुए अंग्रेजी की स्थिति और नीति के संवैधानिक आधार पर विचार करने का संकेत दिया है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
हाल ही में, सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की त्रि-भाषा नीति (Three-Language Policy) को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए ‘नेटिव’ (Native) शब्द के प्रयोग पर गंभीर सवाल उठाए हैं। न्यायालय ने विशेष रूप से यह पूछा कि भारत में अंग्रेजी को किस हद तक ‘गैर-स्वदेशी’ (non-indigenous) भाषा माना जा सकता है और इस वर्गीकरण के संवैधानिक निहितार्थ क्या हैं। इसके अतिरिक्त, न्यायालय ने नीति के क्रियान्वयन से संबंधित व्यावहारिक चुनौतियों, जैसे योग्य शिक्षकों और पर्याप्त संसाधनों की उपलब्धता पर भी चिंता व्यक्त की है।
पृष्ठभूमि
- राष्ट्रीय शिक्षा नीति (National Education Policy – NEP) 2020 के तहत, सीबीएसई ने एक त्रि-भाषा नीति लागू की है।
- इस नीति के अनुसार, कक्षा 5 से 9 तक के विद्यार्थियों को दो भारतीय ‘नेटिव’ भाषाओं के साथ एक तीसरी भाषा पढ़नी होगी।
- याचिकाकर्ताओं ने इस नीति के क्रियान्वयन पर सवाल उठाए हैं, जिसमें स्कूलों में पर्याप्त पाठ्यपुस्तकों, योग्य भाषा शिक्षकों और अन्य आवश्यक संसाधनों की कमी प्रमुख है।
- सर्वोच्च न्यायालय ने ‘नेटिव’ शब्द के औपनिवेशिक (colonial) मूल पर आपत्ति व्यक्त की है और सुझाव दिया है कि इसकी जगह ‘स्वदेशी’ (Indigenous) शब्द का प्रयोग किया जाना चाहिए था।
- न्यायालय ने इस बात पर जोर दिया है कि अंग्रेजी को स्वदेशी या गैर-स्वदेशी मानने का प्रश्न केवल भाषाई वर्गीकरण का नहीं, बल्कि संवैधानिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है।
- यह मामला भारत की भाषाई विविधता, शिक्षा नीति के क्रियान्वयन और संवैधानिक सिद्धांतों के बीच संतुलन स्थापित करने की आवश्यकता को उजागर करता है।
त्रि-भाषा नीति और इसका संवैधानिक संदर्भ
- त्रि-भाषा नीति भारत में शिक्षा के क्षेत्र में भाषा शिक्षण को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसका उद्देश्य भाषाई विविधता को बनाए रखना और बहुभाषावाद को प्रोत्साहित करना है।
- यह नीति पहली बार शिक्षा आयोग (कोठारी आयोग) 1964-66 द्वारा प्रस्तावित की गई थी, जिसमें हिंदी भाषी राज्यों में हिंदी, अंग्रेजी और एक आधुनिक भारतीय भाषा (अधिमानतः दक्षिण भारतीय भाषा) तथा गैर-हिंदी भाषी राज्यों में क्षेत्रीय भाषा, हिंदी और अंग्रेजी पढ़ाने का सुझाव दिया गया था।
- राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 इस सिद्धांत को आगे बढ़ाती है, जिसमें बच्चों को उनकी मातृभाषा/स्थानीय भाषा/क्षेत्रीय भाषा में शिक्षा प्रदान करने पर जोर दिया गया है, विशेष रूप से प्राथमिक स्तर पर।
- भारतीय संविधान का अनुच्छेद 343 संघ की राजभाषा के रूप में हिंदी (देवनागरी लिपि में) को मान्यता देता है, जबकि अनुच्छेद 351 हिंदी भाषा के विकास के लिए निर्देश देता है।
- संविधान की आठवीं अनुसूची (Eighth Schedule) भारत की विभिन्न भाषाओं को सूचीबद्ध करती है, जो देश की भाषाई विविधता का प्रतीक है। वर्तमान में इसमें 22 भाषाएँ शामिल हैं।
- सर्वोच्च न्यायालय की वर्तमान टिप्पणी ‘नेटिव’ बनाम ‘स्वदेशी’ शब्द के प्रयोग पर भाषाई पहचान और औपनिवेशिक विरासत के बीच के जटिल संबंधों को दर्शाती है।
- न्यायालय ने नीति के क्रियान्वयन में आने वाली चुनौतियों, जैसे शिक्षकों की कमी और संसाधनों का अभाव, पर भी ध्यान केंद्रित किया है, जो शिक्षा नीतियों के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए महत्वपूर्ण हैं।
- यह मामला संवैधानिक प्रावधानों, भाषाई नीति और शिक्षा के अधिकार के बीच सामंजस्य स्थापित करने की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| तीन-भाषा नीति | राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (National Education Policy 2020) का एक प्रमुख घटक, जिसका उद्देश्य भाषाई विविधता को बढ़ावा देना है। |
| ‘नेटिव’ शब्द का प्रयोग | सुप्रीम कोर्ट ने इस शब्द के औपनिवेशिक मूल और भारत में अंग्रेजी की स्थिति पर सवाल उठाया। |
| अंग्रेजी की स्थिति | अदालत ने यह विचार करने का संकेत दिया कि क्या अंग्रेजी को संवैधानिक दृष्टिकोण से स्वदेशी या गैर-स्वदेशी भाषा माना जा सकता है। |
| संसाधनों की कमी | याचिकाकर्ताओं ने नीति को लागू करने के लिए पर्याप्त पाठ्यपुस्तकों, योग्य शिक्षकों और प्रशासनिक व्यवस्था की कमी का मुद्दा उठाया। |
| कक्षा 5 से 9 तक का नियम | इस स्तर पर दो भारतीय ‘नेटिव’ भाषाओं के साथ एक तीसरी भाषा का अध्ययन अनिवार्य है। |
महत्व
शैक्षिक महत्व
- यह मामला भारत की भाषाई विविधता और शिक्षा प्रणाली में भाषाओं की भूमिका पर एक व्यापक बहस को जन्म देता है।
- यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के कार्यान्वयन और उसकी व्यावहारिक चुनौतियों पर प्रकाश डालता है।
- यह भाषा शिक्षण के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे और संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल देता है।
संवैधानिक महत्व
- सुप्रीम कोर्ट का यह विचार कि अंग्रेजी की स्थिति को संवैधानिक दृष्टि से देखा जाना चाहिए, भाषा संबंधी संवैधानिक प्रावधानों की पुनर्व्याख्या का मार्ग प्रशस्त कर सकता है।
- यह भाषाई अल्पसंख्यकों के अधिकारों और शिक्षा में उनकी भाषाओं के संरक्षण से संबंधित मुद्दों को भी प्रभावित कर सकता है।
सामाजिक-सांस्कृतिक महत्व
- यह औपनिवेशिक शब्दावली के प्रयोग और उसके समकालीन निहितार्थों पर चिंतन को बढ़ावा देता है।
- यह भारतीय भाषाओं के महत्व और अंग्रेजी के साथ उनके सह-अस्तित्व पर राष्ट्रीय संवाद को प्रोत्साहित करता है।
चुनौतियाँ
1. शब्दों का सटीक प्रयोग
- राष्ट्रीय शिक्षा नीति जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज़ों में ‘नेटिव’ जैसे शब्दों का प्रयोग, जो औपनिवेशिक अर्थों से जुड़े हो सकते हैं, भ्रम पैदा कर सकता है।
- शब्दों के चयन में संवेदनशीलता और संवैधानिक मूल्यों के अनुरूपता सुनिश्चित करना आवश्यक है।
यूपीएससी लिंक: सामान्य अध्ययन पेपर-II: शासन, नीतियां
2. नीति का प्रभावी कार्यान्वयन
- तीन-भाषा नीति को पूरे देश के स्कूलों में समान रूप से लागू करने के लिए पर्याप्त संसाधनों (शिक्षकों, पाठ्यपुस्तकों) की कमी एक बड़ी चुनौती है।
- विभिन्न क्षेत्रों और स्कूलों की विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुरूप नीति को अनुकूलित करना महत्वपूर्ण है।
यूपीएससी लिंक: सामान्य अध्ययन पेपर-II: सामाजिक न्याय, शिक्षा
3. शिक्षकों और प्रशिक्षण की कमी
- निर्धारित भाषाओं को पढ़ाने के लिए योग्य भाषा शिक्षकों की कमी नीति के सफल कार्यान्वयन में बाधा डाल सकती है।
- शिक्षकों के प्रशिक्षण और उनकी क्षमता निर्माण पर ध्यान देना आवश्यक है।
यूपीएससी लिंक: सामान्य अध्ययन पेपर-II: मानव संसाधन विकास
4. अंग्रेजी की संवैधानिक स्थिति
- भारत में अंग्रेजी की स्थिति को ‘स्वदेशी’ या ‘गैर-स्वदेशी’ के रूप में वर्गीकृत करना एक जटिल संवैधानिक और भाषाई मुद्दा है।
- यह वर्गीकरण भविष्य में भाषा नीतियों और शिक्षा प्रणाली को प्रभावित कर सकता है।
यूपीएससी लिंक: सामान्य अध्ययन पेपर-II: संविधान, संघवाद
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| ‘नेटिव’ शब्द का प्रयोग | औपनिवेशिक पृष्ठभूमि और भारत में अंग्रेजी की स्थिति पर संवैधानिक सवाल। |
| पर्याप्त पाठ्यपुस्तकों की अनुपलब्धता | नीति के तहत निर्धारित भाषाओं के लिए आवश्यक शिक्षण सामग्री की कमी। |
| योग्य भाषा शिक्षकों की कमी | विभिन्न भाषाओं को पढ़ाने के लिए प्रशिक्षित और कुशल शिक्षकों का अभाव। |
| प्रशासनिक व्यवस्था की कमी | नीति को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए स्कूलों में आवश्यक प्रशासनिक ढांचे और सहायता का अभाव। |
| संसाधनों का असमान वितरण | शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों के बीच संसाधनों और क्षमताओं में अंतर। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020
आगे की राह
- राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में प्रयुक्त शब्दावली, विशेषकर ‘नेटिव’ जैसे शब्दों की समीक्षा की जानी चाहिए और उन्हें संवैधानिक मूल्यों तथा भारतीय संदर्भ के अनुरूप बनाया जाना चाहिए।
- तीन-भाषा नीति के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए स्कूलों में पर्याप्त योग्य भाषा शिक्षकों की भर्ती और उनके प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।
- सभी निर्धारित भाषाओं के लिए गुणवत्तापूर्ण पाठ्यपुस्तकों और अन्य शिक्षण सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित की जानी चाहिए।
- नीति के कार्यान्वयन के लिए स्कूलों को आवश्यक प्रशासनिक और वित्तीय सहायता प्रदान की जानी चाहिए ताकि वे संसाधनों की कमी का सामना न करें।
- भारत में अंग्रेजी की संवैधानिक स्थिति और उसके ‘स्वदेशी’ या ‘गैर-स्वदेशी’ वर्गीकरण पर एक व्यापक संवैधानिक और भाषाई बहस को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
- नीति के कार्यान्वयन की नियमित निगरानी और मूल्यांकन किया जाना चाहिए ताकि व्यावहारिक चुनौतियों की पहचान की जा सके और समय पर सुधार किए जा सकें।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 · त्रिभाषा सूत्र · भाषा नीति · संवैधानिक प्रावधान · शैक्षिक समानता · सांस्कृतिक बहुलता · न्यायिक समीक्षा · अंग्रेजी भाषा की स्थिति · भारतीय भाषाएँ · संसाधन उपलब्धता
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 343’, ‘note’: ‘संघ की राजभाषा’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 344’, ‘note’: ‘राजभाषा आयोग और समिति’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 345’, ‘note’: ‘राज्यों की राजभाषा’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 348’, ‘note’: ‘उच्चतम न्यायालय आदि की भाषा’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 350A’, ‘note’: ‘प्राथमिक स्तर पर मातृभाषा में शिक्षा’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 351’, ‘note’: ‘हिंदी भाषा के विकास के लिए निर्देश’}
- {‘article’: ‘आठवीं अनुसूची’, ‘note’: ‘भारत की मान्यता प्राप्त भाषाएँ’}
अवधारणा प्रवाह
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 द्वारा तीन-भाषा नीति का प्रस्ताव। → सीबीएसई द्वारा नीति का कार्यान्वयन, जिसमें ‘नेटिव’ शब्द का प्रयोग। → याचिकाकर्ताओं द्वारा सुप्रीम कोर्ट में नीति को चुनौती। → सुप्रीम कोर्ट द्वारा ‘नेटिव’ शब्द और अंग्रेजी की स्थिति पर सवाल। → अदालत द्वारा संवैधानिक दृष्टिकोण से विचार करने का संकेत। → नीति के कार्यान्वयन में संसाधनों की कमी पर चिंताएँ।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) के तहत प्रस्तावित त्रिभाषा सूत्र के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. यह नीति कक्षा 5 से 9 तक के विद्यार्थियों को दो भारतीय ‘नेटिव’ भाषाओं के साथ एक तीसरी भाषा पढ़ने का प्रावधान करती है।
2. नीति में ‘नेटिव’ शब्द के प्रयोग पर सर्वोच्च न्यायालय ने आपत्ति जताई है और ‘इंडिजिनस’ शब्द के प्रयोग का सुझाव दिया है।
3. सर्वोच्च न्यायालय ने अंग्रेजी को भारत में ‘गैर-स्वदेशी’ भाषा मानने की संवैधानिक वैधता पर भी विचार करने का संकेत दिया है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि NEP 2020 के तहत कक्षा 5 से 9 तक के विद्यार्थियों को दो भारतीय भाषाओं के साथ एक तीसरी भाषा पढ़नी होती है, जिसमें ‘नेटिव’ शब्द का प्रयोग किया गया है। कथन 2 सही है क्योंकि सर्वोच्च न्यायालय ने ‘नेटिव’ शब्द पर आपत्ति जताते हुए ‘इंडिजिनस’ शब्द का सुझाव दिया है। कथन 3 भी सही है क्योंकि न्यायालय ने अंग्रेजी की स्वदेशी या गैर-स्वदेशी स्थिति पर संवैधानिक दृष्टिकोण से विचार करने का संकेत दिया है।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा अनुच्छेद भारत में भाषाई अल्पसंख्यकों के हितों के संरक्षण से संबंधित है?
- अनुच्छेद 29
- अनुच्छेद 30
- अनुच्छेद 350A
- उपर्युक्त सभी
उत्तर: उपर्युक्त सभी — अनुच्छेद 29 अल्पसंख्यकों के हितों के संरक्षण से संबंधित है, जिसमें भाषा भी शामिल है। अनुच्छेद 30 अल्पसंख्यकों को शैक्षिक संस्थान स्थापित करने और उनका प्रशासन करने का अधिकार देता है। अनुच्छेद 350A प्राथमिक स्तर पर मातृभाषा में शिक्षा की सुविधा प्रदान करने का निर्देश देता है। इसलिए, उपर्युक्त सभी अनुच्छेद भाषाई अल्पसंख्यकों के हितों के संरक्षण से संबंधित हैं।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) के तहत प्रस्तावित त्रिभाषा सूत्र के क्रियान्वयन से संबंधित चुनौतियों और संवैधानिक निहितार्थों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: परिचय: राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के त्रिभाषा सूत्र का संक्षिप्त परिचय दें और इसके मुख्य उद्देश्य को बताएं।
मुख्य भाग:
1. त्रिभाषा सूत्र का प्रावधान: कक्षा 5 से 9 तक दो भारतीय भाषाओं और एक तीसरी भाषा के अध्ययन का उल्लेख करें।
2. क्रियान्वयन से संबंधित चुनौतियाँ:
– संसाधनों की कमी: पर्याप्त पाठ्यपुस्तकों, योग्य भाषा शिक्षकों और शिक्षण सामग्री की उपलब्धता का अभाव।
– प्रशासनिक व्यवस्था: नीति को लागू करने के लिए आवश्यक प्रशासनिक ढांचे की कमी।
– क्षेत्रीय असमानताएँ: विभिन्न राज्यों और स्कूलों में संसाधनों तथा भाषाओं की उपलब्धता में अंतर।
3. संवैधानिक निहितार्थ और न्यायिक दृष्टिकोण:
– ‘नेटिव’ बनाम ‘इंडिजिनस’ शब्द पर सर्वोच्च न्यायालय की आपत्ति और औपनिवेशिक विरासत का संदर्भ।
– अंग्रेजी भाषा की स्थिति: भारत में अंग्रेजी को स्वदेशी या गैर-स्वदेशी मानने के प्रश्न पर संवैधानिक विचार की आवश्यकता।
– भाषाई अल्पसंख्यकों के अधिकार: अनुच्छेद 29, 30 और 350A जैसे संवैधानिक प्रावधानों के आलोक में नीति का विश्लेषण।
– संघवाद और राज्य की भूमिका: भाषा नीति के क्रियान्वयन में केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय का महत्व।
निष्कर्ष: त्रिभाषा सूत्र के उद्देश्यों की सराहना करते हुए, इसके क्रियान्वयन में आने वाली चुनौतियों का समाधान करने और संवैधानिक सिद्धांतों का पालन सुनिश्चित करने के लिए एक संतुलित दृष्टिकोण प्रस्तुत करें।
स्रोत: amarujala.com
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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