29 Sep स्वच्छता के लिए 50 आदर्श शहर: प्रगति-50 पहल का शुभारंभ
✎ प्रगति-50 पहल स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 के तहत 50 मॉडल शहरों को विकसित करने, शहरी स्वच्छता में सुधार लाने और तकनीकी-सक्षम निगरानी के माध्यम से नवाचार को बढ़ावा देने पर केंद्रित है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — शासन, पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्वपूर्ण पक्ष, नागरिक चार्टर | GS Paper III — पर्यावरण और पारिस्थितिकी, आपदा प्रबंधन
- Prelims: प्रगति-50 पहल, स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0, सीएसआईआर-सीएमईआरआई, आईआईटी कानपुर, रिड्यूस, रियूज एंड रिसाइकल सेंटर, स्वच्छतम पोर्टल, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026, स्वच्छ भारत परीक्षण केंद्र एवं नवाचार केंद्र
- Essay: शहरीकरण और सतत विकास: चुनौतियाँ और समाधान, स्वच्छता एक जन आंदोलन से जीवनशैली तक: भारत की प्रगति
त्वरित पुनरावृत्ति: प्रगति-50 पहल स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 के तहत 50 मॉडल शहरों को विकसित करने, शहरी स्वच्छता में सुधार लाने और तकनीकी-सक्षम निगरानी के माध्यम से नवाचार को बढ़ावा देने पर केंद्रित है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
केंद्रीय आवास और शहरी कार्य मंत्रालय ने ‘प्रगति-50’ पहल का शुभारंभ किया है, जिसके तहत देश के 24 राज्यों से 50 शहरों की पहचान की गई है, जो स्वच्छता के उच्च मानदंडों को प्रदर्शित करते हुए अन्य शहरों के लिए एक आदर्श मॉडल के रूप में उभरेंगे। इस पहल का उद्देश्य शहरी स्वच्छता, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और नागरिक भागीदारी में स्पष्ट सुधार लाना है, जिसके लिए तकनीकी-सक्षम निगरानी और परिणाम-आधारित आकलन का उपयोग किया जाएगा।
पृष्ठभूमि
- प्रधानमंत्री के 51वें प्रगति सम्मेलन के दौरान दिए गए निर्देशों के अनुपालन में, आवास और शहरी कार्य मंत्रालय ने स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 (Swachh Bharat Mission-Urban 2.0) के तहत ‘प्रगति-50’ पहल की शुरुआत की है।
- स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 का लक्ष्य भारत के शहरों को ‘कचरा मुक्त’ और ‘जल सुरक्षित’ बनाना है, जिसमें ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, प्रयुक्त जल प्रबंधन और स्वच्छता को प्राथमिकता दी गई है।
- पिछले एक दशक में, स्वच्छता एक सरकारी कार्यक्रम से विकसित होकर एक जन आंदोलन और जीवनशैली का हिस्सा बन गई है, जिसमें नागरिकों की भागीदारी बढ़ी है।
- भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बनकर उभरा है, और स्वच्छता क्षेत्र में भी नवाचार को बढ़ावा देने के लिए स्टार्टअप्स को शामिल किया जा रहा है।
- मंत्रालय ने निर्माण एवं विध्वंस अपशिष्ट (Construction & Demolition Waste) के द्वितीयक संग्रहण केंद्र की स्थापना हेतु मानक संचालन प्रक्रिया और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 (Solid Waste Management Rules, 2026) के अंतर्गत अनिवार्य नगरपालिका ठोस अपशिष्ट के स्रोत पृथक्करण हेतु दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
- क्षमता निर्माण और निरंतर सीखने को बढ़ावा देने के लिए हितधारकों को तकनीकी दिशा-निर्देश, मॉडल डिज़ाइन और लक्षित सलाह प्रदान की जा रही है।
प्रगति-50 पहल क्या है?
- यह आवास और शहरी कार्य मंत्रालय की एक पहल है, जिसका उद्देश्य स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 के तहत 50 मॉडल शहरों का विकास करना है।
- इन 50 शहरों को 24 राज्यों से चुना गया है, जिनमें प्रमुख शहर, सांस्कृतिक महत्व के शहर, प्रमुख पर्यटन स्थल और आर्थिक केंद्र शामिल हैं।
- पहल का लक्ष्य शहरी स्वच्छता, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, प्रयुक्त जल प्रबंधन, स्वच्छता और नागरिक भागीदारी में निर्धारित समय सीमा के भीतर स्पष्ट सुधार लाना है।
- यह परिणाम-आधारित आकलन और तकनीक-आधारित निगरानी के माध्यम से प्रगति की निरंतर समीक्षा पर केंद्रित है।
- व्यक्तिगत रूप से केंद्रीय मंत्री द्वारा हर दूसरे महीने समीक्षा बैठकों की अध्यक्षता की जाएगी ताकि इन शहरों की प्रगति पर नज़र रखी जा सके।
- कुशल निगरानी सुनिश्चित करने के लिए ‘स्वच्छतम पोर्टल’ पर सक्रिय शासन और समयबद्ध कार्यान्वयन (प्रगति) जैसी डिजिटल समीक्षा प्रणाली स्थापित की गई है।
- आईआईटी कानपुर के सहयोग से स्वच्छता स्टार्टअप्स के तीसरे बैच को शामिल किया गया है, जो मिशन के तहत 75 स्टार्टअप को शामिल करने के राष्ट्रीय लक्ष्य का हिस्सा है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| 50 आदर्श शहरों का चयन | 24 राज्यों से प्रमुख शहरों, सांस्कृतिक महत्व के शहरों, पर्यटन स्थलों और आर्थिक केंद्रों को शामिल किया गया है, जो देश के अन्य हिस्सों के लिए आदर्श बनेंगे। |
| KPI-आधारित कार्रवाई और तकनीकी निगरानी | शहरी स्वच्छता, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, प्रयुक्त जल प्रबंधन और नागरिक भागीदारी में स्पष्ट सुधार लाने के लिए परिणाम-आधारित आकलन और तकनीक-आधारित निगरानी का उपयोग। |
| व्यक्तिगत समीक्षा | केंद्रीय मंत्री द्वारा हर दूसरे महीने व्यक्तिगत रूप से समीक्षा बैठकों की अध्यक्षता, जिससे प्रगति पर कड़ी नजर रखी जा सके। |
| स्वच्छ भारत टेस्ट बेड एवं नवाचार केंद्र | CSIR-CMERI के सहयोग से स्थापित, यह स्वच्छता तकनीक में अनुसंधान, उत्पाद विकास, परीक्षण, सत्यापन और क्षमता निर्माण के लिए एक राष्ट्रीय सुविधा है। |
| स्वच्छता स्टार्टअप्स का तीसरा बैच | IIT कानपुर के सहयोग से 75 स्टार्टअप को शामिल करने और विकसित करने के राष्ट्रीय लक्ष्य की दिशा में एक कदम, जो युवा शक्ति और तकनीक के संमिलन को दर्शाता है। |
| डिजिटल समीक्षा प्रणाली (स्वच्छतम पोर्टल) | कुशल निगरानी और समयबद्ध कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के लिए ‘प्रगति’ जैसी डिजिटल प्रणाली का उपयोग। |
महत्व
सामाजिक महत्व
- स्वच्छता को जन आंदोलन से जीवनशैली में बदलना, जिससे नागरिकों के स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता में सुधार होगा।
- नागरिक भागीदारी को बढ़ावा देना, जिससे स्वच्छता अभियान में समुदाय की सक्रिय भूमिका सुनिश्चित हो सके।
आर्थिक महत्व
- बेहतर स्वच्छता और अपशिष्ट प्रबंधन से शहरों की पर्यटन क्षमता में वृद्धि होगी, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा।
- स्वच्छता स्टार्टअप्स को प्रोत्साहन मिलने से नवाचार और रोजगार सृजन के अवसर पैदा होंगे।
प्रशासनिक महत्व
- परिणाम-आधारित आकलन और तकनीक-आधारित निगरानी से शहरी स्थानीय निकायों की जवाबदेही बढ़ेगी और प्रदर्शन में सुधार होगा।
- क्षमता निर्माण और निरंतर सीखने पर जोर, जिससे शहरी परिवर्तन के लिए आवश्यक कौशल और ज्ञान का विकास होगा।
पर्यावरणीय महत्व
- ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और प्रयुक्त जल प्रबंधन में सुधार से प्रदूषण कम होगा और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण होगा।
- निर्माण एवं विध्वंस अपशिष्ट (C&D) के द्वितीयक संग्रहण केंद्र और स्रोत पृथक्करण हेतु दिशा-निर्देशों से अपशिष्ट के उचित निपटान को बढ़ावा मिलेगा।
चुनौतियाँ
1. व्यवहार परिवर्तन
- नागरिकों और हितधारकों के व्यवहार में स्थायी परिवर्तन लाना एक बड़ी चुनौती है, खासकर स्रोत पर कचरा अलग करने जैसे मामलों में।
- स्वच्छता को केवल एक अभियान के बजाय दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने के लिए निरंतर जागरूकता और शिक्षा की आवश्यकता।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक मुद्दे, शासन
2. बुनियादी ढाँचा और संसाधन
- अपशिष्ट संग्रहण, प्रसंस्करण और निपटान के लिए पर्याप्त बुनियादी ढाँचे का विकास और रखरखाव, विशेषकर छोटे शहरों और कस्बों में।
- स्वच्छता कर्मियों के लिए पर्याप्त प्रशिक्षण, उपकरण और सुरक्षा सुनिश्चित करना।
यूपीएससी लिंक: शहरी विकास, अवसंरचना
3. तकनीकी एकीकरण और नवाचार
- नई स्वच्छता तकनीकों को अपनाने और बड़े पैमाने पर लागू करने में आने वाली लागत और तकनीकी बाधाएँ।
- स्टार्टअप्स को फंडिंग, मेंटरशिप और बाजार तक पहुँच प्रदान करने में चुनौतियाँ।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, नवाचार
4. अंतर-विभागीय समन्वय
- विभिन्न सरकारी विभागों, शहरी स्थानीय निकायों और अन्य हितधारकों के बीच प्रभावी समन्वय सुनिश्चित करना।
- योजनाओं के कार्यान्वयन में राज्यों और शहरी स्थानीय निकायों की सक्रिय भागीदारी और स्वामित्व को बढ़ावा देना।
यूपीएससी लिंक: शासन, संघवाद
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| अपशिष्ट पृथक्करण | घरों और संस्थानों में स्रोत पर कचरे को अलग करने की कम दर, जिससे प्रसंस्करण में बाधा आती है। |
| प्रयुक्त जल प्रबंधन | सीवेज उपचार संयंत्रों की अपर्याप्त क्षमता और अनुपचारित अपशिष्ट जल का पर्यावरण में निष्कासन। |
| वित्तीय स्थिरता | शहरी स्थानीय निकायों के पास स्वच्छता सेवाओं के लिए पर्याप्त और स्थायी वित्तपोषण की कमी। |
| क्षमता निर्माण | शहरी स्थानीय निकायों के अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए स्वच्छता प्रबंधन में विशेषज्ञता की कमी। |
| डेटा की विश्वसनीयता | स्वच्छता संकेतकों की निगरानी और रिपोर्टिंग में डेटा की सटीकता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करना। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 (Swachh Bharat Mission-Urban 2.0)
आगे की राह
- नागरिकों के व्यवहार परिवर्तन के लिए निरंतर और लक्षित जागरूकता अभियान चलाए जाएँ, जिसमें स्थानीय भाषाओं और सांस्कृतिक संदर्भों का उपयोग किया जाए।
- शहरी स्थानीय निकायों को वित्तीय रूप से सशक्त बनाया जाए, ताकि वे स्वच्छता सेवाओं के लिए आवश्यक बुनियादी ढाँचा विकसित और बनाए रख सकें।
- स्वच्छता स्टार्टअप्स को अनुसंधान एवं विकास, प्रोटोटाइप विकास और बाजार तक पहुँच के लिए विशेष प्रोत्साहन और सहायता प्रदान की जाए।
- ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और प्रयुक्त जल प्रबंधन के लिए आधुनिक तकनीकों को अपनाया जाए, जिसमें अपशिष्ट से ऊर्जा (Waste-to-Energy) और जल पुनर्चक्रण (Water Recycling) शामिल हों।
- डेटा-आधारित निगरानी और मूल्यांकन प्रणालियों को और मजबूत किया जाए, जिससे प्रगति को सटीक रूप से ट्रैक किया जा सके और कमियों को दूर किया जा सके।
- स्वच्छता कर्मियों के लिए बेहतर कार्य परिस्थितियाँ, स्वास्थ्य सुरक्षा और कौशल विकास के अवसर सुनिश्चित किए जाएँ।
- स्वच्छता को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाकर बच्चों और युवाओं में बचपन से ही स्वच्छता के प्रति जागरूकता और जिम्मेदारी की भावना विकसित की जाए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
प्रगति-50 पहल · स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 · शहरी स्वच्छता · ठोस अपशिष्ट प्रबंधन · प्रयुक्त जल प्रबंधन · नागरिक भागीदारी · स्वच्छता स्टार्टअप · सीएसआईआर-सीएमईआरआई · स्वच्छ भारत परीक्षण केंद्र · डिजिटल निगरानी
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 243W: शहरी स्थानीय निकायों की शक्तियाँ, प्राधिकार और उत्तरदायित्व
- अनुच्छेद 243G: पंचायतों की शक्तियाँ, प्राधिकार और उत्तरदायित्व (ग्रामीण स्वच्छता के संदर्भ में)
- अनुच्छेद 21: जीवन का अधिकार (स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार इसमें निहित है)
- अनुच्छेद 47: पोषाहार स्तर और जीवन स्तर को ऊँचा करने तथा लोक स्वास्थ्य का सुधार करने का राज्य का कर्तव्य
अवधारणा प्रवाह
प्रधानमंत्री के निर्देश → प्रगति-50 पहल का शुभारंभ → 50 मॉडल शहरों का चयन → KPI-आधारित निगरानी और तकनीकी हस्तक्षेप → शहरी स्वच्छता और अपशिष्ट प्रबंधन में सुधार → अन्य शहरों के लिए आदर्श → स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 के लक्ष्यों की प्राप्ति
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. प्रगति-50 पहल के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस पहल का उद्देश्य स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 के तहत 50 मॉडल शहरों की पहचान करना है।
2. यह पहल केवल प्रमुख शहरों और आर्थिक केंद्रों पर केंद्रित है, सांस्कृतिक महत्व के शहरों को इसमें शामिल नहीं किया गया है।
3. सीएसआईआर-सीएमईआरआई ने स्वच्छता तकनीक में अनुसंधान और विकास के लिए स्वच्छ भारत परीक्षण केंद्र एवं नवाचार केंद्र का शुभारंभ किया है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है। प्रगति-50 पहल का लक्ष्य स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 के अंतर्गत 50 मॉडल शहरों की पहचान करना है। कथन 2 गलत है। इस पहल में प्रमुख शहरों, सांस्कृतिक महत्व के शहरों, प्रमुख पर्यटन स्थलों और आर्थिक केंद्रों को शामिल किया गया है। कथन 3 सही है। सीएसआईआर-सीएमईआरआई के सहयोग से स्वच्छ भारत परीक्षण केंद्र एवं नवाचार केंद्र का शुभारंभ किया गया है, जो स्वच्छता तकनीक में अनुसंधान और विकास के लिए एक राष्ट्रीय सुविधा है।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा/से कदम प्रगति-50 पहल के तहत शहरी स्वच्छता में सुधार के लिए उठाए गए हैं?
1. आईआईटी कानपुर के सहयोग से स्वच्छता स्टार्टअप्स के तीसरे बैच को शामिल करना।
2. निर्माण एवं विध्वंस अपशिष्ट (सी एंड डी) के द्वितीयक संग्रहण केंद्र की स्थापना हेतु मानक संचालन प्रक्रिया जारी करना।
3. ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के अंतर्गत अनिवार्य नगरपालिका ठोस अपशिष्ट के स्रोत पृथक्करण हेतु दिशा-निर्देश जारी करना।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
- केवल 1
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: 1, 2 और 3 — कथन 1 सही है। आईआईटी कानपुर के सहयोग से स्वच्छता स्टार्टअप्स के तीसरे बैच को शामिल किया गया है। कथन 2 सही है। निर्माण एवं विध्वंस अपशिष्ट (सी एंड डी) के द्वितीयक संग्रहण केंद्र की स्थापना हेतु मानक संचालन प्रक्रिया जारी की गई है। कथन 3 सही है। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के अंतर्गत अनिवार्य नगरपालिका ठोस अपशिष्ट के स्रोत पृथक्करण हेतु दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। ये सभी कदम प्रगति-50 पहल के तहत शहरी स्वच्छता में सुधार के लिए उठाए गए हैं।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 के अंतर्गत ‘प्रगति-50 पहल’ के प्रमुख उद्देश्यों और कार्यान्वयन रणनीति का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। यह पहल शहरी स्वच्छता के लक्ष्यों को प्राप्त करने में कितनी प्रभावी सिद्ध हो सकती है? (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: प्रगति-50 पहल का संक्षिप्त परिचय दें, जिसमें इसके शुभारंभ और स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 से इसके जुड़ाव का उल्लेख हो।
2. प्रमुख उद्देश्य: पहल के मुख्य उद्देश्यों को विस्तार से समझाएं, जैसे 50 मॉडल शहरों की पहचान, उच्च प्रदर्शन मानकों का प्रदर्शन, शहरी स्वच्छता, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, प्रयुक्त जल प्रबंधन और नागरिक भागीदारी में सुधार।
3. कार्यान्वयन रणनीति: पहल की कार्यान्वयन रणनीति का वर्णन करें, जिसमें KPI-आधारित कार्रवाई, गहन और तकनीकी-सक्षम निगरानी, परिणाम-आधारित आकलन, डिजिटल समीक्षा प्रणाली (स्वच्छतम पोर्टल), मंत्रालय के अधिकारियों द्वारा पर्यवेक्षण, क्षमता निर्माण और हितधारकों को सशक्त बनाना शामिल है।
4. प्रभावशीलता का आलोचनात्मक परीक्षण: इस खंड में, पहल की संभावित प्रभावशीलता का विश्लेषण करें। इसके सकारात्मक पहलुओं पर प्रकाश डालें, जैसे तकनीक का उपयोग, स्टार्टअप्स को प्रोत्साहन, अनुसंधान और नवाचार केंद्र (सीएसआईआर-सीएमईआरआई), ‘संपूर्ण शहर’ दृष्टिकोण और उच्च-स्तरीय निगरानी। साथ ही, संभावित चुनौतियों और सीमाओं पर भी चर्चा करें, जैसे राज्यों और शहरी स्थानीय निकायों के बीच समन्वय, वित्तीय संसाधन, नागरिक भागीदारी की निरंतरता और दीर्घकालिक स्थिरता।
5. निष्कर्ष: एक संतुलित निष्कर्ष प्रस्तुत करें, जिसमें पहल की क्षमता और शहरी स्वच्छता में इसके संभावित योगदान को रेखांकित किया जाए, साथ ही सतत सफलता के लिए आवश्यक कदमों का भी उल्लेख हो।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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