हीटवेव से निपटने में सामुदायिक वृक्षारोपण की भूमिका: जानिए सरकारी योजनाएं

हीटवेव से निपटने में सामुदायिक वृक्षारोपण की भूमिका: जानिए सरकारी योजनाएं

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper I — भूगोल (शहरीकरण, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव)  |  GS Paper II — शासन (आपदा प्रबंधन, सरकारी नीतियाँ और हस्तक्षेप)  |  GS Paper III — पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी (जलवायु परिवर्तन, संरक्षण, प्रदूषण)
  • Prelims: हीटवेव (भीषण गर्मी), राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन योजना (एनडीएमपी), राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए), हीट एक्शन प्लान, अटल कायाकल्प और शहरी परिवर्तन मिशन (अमृत), नगर वन योजना, इंडिया कूलिंग एक्शन प्लान (आईसीएपी), एक पेड़ माँ के नाम अभियान
  • Essay: जलवायु परिवर्तन और शहरीकरण के बढ़ते प्रभाव: चुनौतियाँ और समाधान, आपदा प्रबंधन में सामुदायिक भागीदारी की भूमिका, सतत शहरी विकास: हरित अवसंरचना और जलवायु अनुकूलन

त्वरित पुनरावृत्ति: भारत सरकार भीषण गर्मी के प्रभावों से निपटने और शहरी क्षेत्रों में जलवायु अनुकूलन को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन योजनाओं, हीट एक्शन प्लान, ‘अमृत’, ‘नगर वन योजना’ और ‘इंडिया कूलिंग एक्शन प्लान’ जैसी विभिन्न पहलों के माध्यम से हरित आवरण बढ़ाने और सामुदायिक भागीदारी को प्रोत्साहित कर रही है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

सरकार ने भीषण गर्मी की लहरों और बढ़ते तापमान के प्रभावों से निपटने के लिए कई उपाय किए हैं, जिनमें सामुदायिक नेतृत्व वाले वृक्षारोपण अभियान और विभिन्न शहरी हरियाली पहलें शामिल हैं। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने प्रेस सूचना ब्यूरो के माध्यम से इन प्रयासों की जानकारी दी है, जिसमें राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन योजना (एनडीएमपी) और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के साथ-साथ ‘अमृत’, ‘नगर वन योजना’ और ‘इंडिया कूलिंग एक्शन प्लान’ जैसी योजनाओं का उल्लेख किया गया है। ये पहलें शहरी क्षेत्रों में हरित आवरण बढ़ाने और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने पर केंद्रित हैं।

पृष्ठभूमि

  • भारत में ‘हीटवेव’ (भीषण गर्मी) को राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन योजना (एनडीएमपी) के तहत सूचीबद्ध 17 प्रमुख आपदाओं में से एक माना गया है।
  • राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) ने 2016 में ‘हीटवेव की रोकथाम और प्रबंधन के लिए कार्य योजना की तैयारी पर दिशा-निर्देश’ जारी किए थे, जिन्हें 2019 में संशोधित किया गया।
  • ये दिशा-निर्देश हीटवेव के प्रति संवेदनशील राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को राज्य, जिला और शहर स्तरीय हीट एक्शन प्लान तैयार करने में सहायता करते हैं।
  • दिशा-निर्देशों में बुजुर्गों, बच्चों, बाहर काम करने वाले श्रमिकों और शहरी गरीबों जैसे संवेदनशील समूहों की पहचान करने और उनके लिए शमन व तैयारी के उपायों का सुझाव दिया गया है।
  • शहरीकरण के बढ़ते प्रभाव और ‘अर्बन हीट आइलैंड’ (शहरी ऊष्मा द्वीप) प्रभाव को स्वीकार करते हुए, दिशा-निर्देशों में हरित क्षेत्र बढ़ाने, ठंडी छतों और कूल पेवमेंट्स को बढ़ावा देने, जल निकायों का संरक्षण और जलवायु-अनुकूल भवन प्रथाओं को अपनाने की सिफारिश की गई है।
  • बिहार और मध्य प्रदेश सहित कई संवेदनशील राज्यों ने अपने-अपने हीट एक्शन प्लान तैयार कर उन्हें लागू किया है।

भारत में शहरी हरियाली और शीतलन से संबंधित प्रमुख सरकारी पहलें

  • **अटल कायाकल्प और शहरी परिवर्तन मिशन (अमृत) तथा अमृत 2.0:** इन योजनाओं के तहत शहरी जलवायु को सुधारने के लिए पार्क, हरित स्थान और शहरी जल निकायों का विकास किया जा रहा है। ‘अमृत मित्र’ पहल के तहत महिला स्वयं सहायता समूह वृक्षारोपण और पार्कों का रखरखाव करते हैं।
  • **कैपिटल इन्वेस्टमेंट के लिए राज्यों को विशेष सहायता (एसएसएएससीआई) योजना:** यह योजना शहरी हरियाली पहलों का समर्थन करती है, जिसमें बिहार में शहरी हरित स्थानों का विकास भी शामिल है।
  • **नगर वन योजना:** 2020-21 से 2026-27 की अवधि में देश में 600 नगर वन और 400 नगर वाटिकाएँ विकसित करने का लक्ष्य है। इसका उद्देश्य शहरी और शहरी बाहरी इलाकों में पेड़ों और हरियाली को बढ़ाना, जैव-विविधता और पर्यावरणीय लाभों को बढ़ाना है। इस योजना के तहत केंद्रीय अनुदान ‘राष्ट्रीय क्षतिपूर्ति वनरोपण निधि प्रबंधन और योजना प्राधिकरण’ (CAMPA) से दिया जाता है।
  • **इंडिया कूलिंग एक्शन प्लान (आईसीएपी):** यह भारत में विभिन्न क्षेत्रों में शीतलन की मांग को कम करने के लिए एक व्यापक रणनीति प्रदान करता है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन योजना (एनडीएमपी) हीटवेव सहित 17 प्रमुख आपदाओं के लिए व्यापक जिम्मेदारी ढाँचा प्रस्तुत करती है।
हीटवेव की रोकथाम और प्रबंधन के लिए कार्य योजना की तैयारी पर दिशा-निर्देश (एनडीएमए) राज्य, जिला और शहर स्तर पर हीट एक्शन प्लान (Heat Action Plan) तैयार करने में सहायता करते हैं।
संवेदनशील आबादी की पहचान बुजुर्गों, बच्चों, बाहर काम करने वाले श्रमिकों, शहरी गरीबों जैसे जोखिम वाले समूहों के लिए शमन और तैयारी के उपाय सुझाती है।
अर्बन हीट आइलैंड (Urban Heat Island) प्रभाव का मूल्यांकन शहरीकरण के बढ़ते प्रभाव को स्वीकार करते हुए दीर्घकालिक ताप शमन उपायों की सिफारिश करती है।
शहरी नियोजन में दीर्घकालिक ताप शमन उपाय हरित क्षेत्र बढ़ाना, ठंडी छतें, जल निकायों का संरक्षण, बेहतर वेंटिलेशन कॉरिडोर और जलवायु-अनुकूल भवन प्रथाएँ शामिल हैं।
सामुदायिक भागीदारी वृक्षारोपण और हरित आवरण बढ़ाने में नागरिकों की सक्रिय भूमिका को बढ़ावा देती है।

महत्व

पर्यावरणीय महत्व

  • शहरी हरित आवरण में वृद्धि से शहरी क्षेत्रों में तापमान कम होता है, जिससे अर्बन हीट आइलैंड प्रभाव का शमन होता है।
  • वृक्षारोपण जैव-विविधता (Biodiversity) को बढ़ाता है और पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) सेवाओं में सुधार करता है, जैसे वायु गुणवत्ता और जल संरक्षण।
  • जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के प्रभावों, विशेषकर भीषण गर्मी की लहरों से निपटने में मदद करता है।

सामाजिक महत्व

  • संवेदनशील आबादी, जैसे बुजुर्गों, बच्चों और बाहर काम करने वाले श्रमिकों को अत्यधिक गर्मी से सुरक्षा प्रदान करता है।
  • सामुदायिक नेतृत्व वाले अभियान नागरिकों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता और स्वामित्व की भावना पैदा करते हैं।
  • शहरी निवासियों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार होता है, जिससे स्वस्थ और अधिक रहने योग्य शहरी वातावरण बनता है।

शासन और नीतिगत महत्व

  • राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन योजना और एनडीएमए के दिशा-निर्देशों के माध्यम से आपदा प्रबंधन (Disaster Management) के लिए एक संरचित दृष्टिकोण प्रदान करता है।
  • केंद्र, राज्य और स्थानीय स्तर पर विभिन्न मंत्रालयों और प्राधिकरणों के बीच समन्वय और जिम्मेदारियों को स्पष्ट करता है।
  • दीर्घकालिक शहरी नियोजन और विकास में जलवायु-अनुकूल प्रथाओं को एकीकृत करने पर जोर देता है।

चुनौतियाँ

1. शहरीकरण का दबाव

  • तेजी से बढ़ता शहरीकरण हरित स्थानों के लिए उपलब्ध भूमि को कम करता है।
  • कंक्रीट और डामर जैसी सामग्री गर्मी को अवशोषित करती है, जिससे अर्बन हीट आइलैंड प्रभाव बढ़ता है।

2. सामुदायिक भागीदारी का अभाव

  • वृक्षारोपण अभियानों में दीर्घकालिक सामुदायिक जुड़ाव और रखरखाव सुनिश्चित करना एक चुनौती है।
  • जागरूकता की कमी या प्रेरणा का अभाव भागीदारी को सीमित कर सकता है।

3. योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन

  • केंद्र और राज्य स्तर पर बनी योजनाओं का जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना।
  • विभिन्न सरकारी एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी क्रियान्वयन में बाधा डाल सकती है।

4. संसाधन और वित्तपोषण

  • वृक्षारोपण और हरित स्थानों के विकास के लिए पर्याप्त वित्तीय और मानव संसाधनों की आवश्यकता।
  • रखरखाव और दीर्घकालिक प्रबंधन के लिए सतत वित्तपोषण सुनिश्चित करना।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
अर्बन हीट आइलैंड प्रभाव शहरी क्षेत्रों में तापमान में वृद्धि, जिससे स्वास्थ्य जोखिम और ऊर्जा खपत बढ़ती है।
संवेदनशील आबादी का जोखिम बुजुर्गों, बच्चों और बाहर काम करने वाले श्रमिकों पर भीषण गर्मी का प्रतिकूल प्रभाव।
हरित आवरण का क्षरण शहरी विकास के कारण पेड़ों और हरित स्थानों का नुकसान, जिससे पारिस्थितिक संतुलन बिगड़ता है।
दीर्घकालिक रखरखाव लगाए गए पेड़ों और विकसित हरित स्थानों का सतत रखरखाव सुनिश्चित करना एक चुनौती है।
जलवायु-अनुकूल निर्माण प्रथाओं का अभाव ऊर्जा-कुशल और ठंडी इमारतों के निर्माण में धीमी प्रगति।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन योजना (एनडीएमपी)
  • अटल कायाकल्प और शहरी परिवर्तन मिशन (अमृत)
  • अमृत 2.0
  • कैपिटल इन्वेस्टमेंट के लिए राज्यों को विशेष सहायता (एसएसएएससीआई) योजना
  • नगर वन योजना
  • इंडिया कूलिंग एक्शन प्लान (आईसीएपी)

आगे की राह

  • शहरी नियोजन में हरित अवसंरचना (Green Infrastructure) को प्राथमिकता देना और मास्टर प्लान में हरित क्षेत्रों के लिए पर्याप्त प्रावधान सुनिश्चित करना।
  • समुदाय-आधारित संगठनों (Community-Based Organizations) और महिला स्वयं सहायता समूहों (Self Help Groups) को वृक्षारोपण और हरित स्थानों के रखरखाव में सक्रिय रूप से शामिल करना।
  • ऊर्जा संरक्षण भवन संहिता (Energy Conservation Building Code) को सख्ती से लागू करना और ठंडी छतों (Cool Roofs) तथा कूल पेवमेंट्स (Cool Pavements) जैसी नवीन तकनीकों को बढ़ावा देना।
  • हीट एक्शन प्लान को स्थानीय जलवायु परिस्थितियों और संवेदनशील आबादी की विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुरूप बनाना तथा उनका नियमित मूल्यांकन करना।
  • जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए व्यापक जन अभियान चलाना और नागरिकों को पर्यावरण संरक्षण में भाग लेने के लिए प्रेरित करना।
  • कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (Corporate Social Responsibility – CSR) निधियों का उपयोग शहरी हरियाली और ताप शमन परियोजनाओं के लिए करना।
  • शहरी जल निकायों का संरक्षण और पुनरुद्धार करना, क्योंकि वे स्थानीय तापमान को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

सामुदायिक नेतृत्व वाले वृक्षारोपण · शहरी ताप द्वीप प्रभाव · राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन योजना · हीट एक्शन प्लान · अमृत मिशन · नगर वन योजना · इंडिया कूलिंग एक्शन प्लान · जलवायु अनुकूल भवन

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 21: जीवन का अधिकार
  • अनुच्छेद 48ए: पर्यावरण का संरक्षण और सुधार
  • अनुच्छेद 51ए (जी): प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा

अवधारणा प्रवाह

भीषण गर्मी की लहरें और बढ़ता तापमान  →  शहरीकरण से अर्बन हीट आइलैंड प्रभाव में वृद्धि  →  एनडीएमए के दिशा-निर्देशों और हीट एक्शन प्लान का विकास  →  वृक्षारोपण अभियान और हरित आवरण में वृद्धि  →  तापमान में कमी और जीवन की गुणवत्ता में सुधार  →  जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का शमन

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन योजना (एनडीएमपी) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह 17 प्रमुख आपदाओं को सूचीबद्ध करती है, जिनमें ‘हीटवेव’ (भीषण गर्मी) शामिल है।
2. यह केवल केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों की भूमिकाओं और जिम्मेदारियों को रेखांकित करती है।
3. राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) ने हीटवेव की रोकथाम और प्रबंधन के लिए कार्य योजना की तैयारी पर दिशा-निर्देश 2016 में जारी किए थे, जिन्हें 2019 में संशोधित किया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 2 और 3
  3. केवल 1 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: केवल 1 और 3 — कथन 1 सही है क्योंकि राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन योजना 17 प्रमुख आपदाओं को सूचीबद्ध करती है, जिसमें हीटवेव भी शामिल है। कथन 2 गलत है क्योंकि यह केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों के साथ-साथ राज्य सरकारों, जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों और स्थानीय प्राधिकरणों की भूमिकाओं और जिम्मेदारियों को भी रेखांकित करती है। कथन 3 सही है क्योंकि एनडीएमए ने 2016 में दिशा-निर्देश जारी किए थे, जिन्हें 2019 में संशोधित किया गया था।

Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा/से कार्यक्रम/योजना शहरी हरियाली और जलवायु सुधार से संबंधित है/हैं?
1. अटल कायाकल्प और शहरी परिवर्तन मिशन (अमृत)
2. अमृत मित्र पहल
3. नगर वन योजना
4. इंडिया कूलिंग एक्शन प्लान
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 1, 2 और 3
  3. केवल 3 और 4
  4. 1, 2, 3 और 4

उत्तर: केवल 1, 2 और 3 — कथन 1, 2 और 3 सही हैं क्योंकि अमृत मिशन, अमृत मित्र पहल और नगर वन योजना शहरी हरियाली और हरित स्थानों के विकास से संबंधित हैं। कथन 4, इंडिया कूलिंग एक्शन प्लान, इमारतों को ठंडा करने और ऊर्जा दक्षता से संबंधित है, न कि सीधे शहरी हरियाली से।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भीषण गर्मी की लहरों और शहरी ताप द्वीप प्रभाव (Urban Heat Island Effect) के बढ़ते प्रभावों से निपटने में सामुदायिक नेतृत्व वाले वृक्षारोपण अभियान तथा शहरी नियोजन की भूमिका का समालोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए। इस संदर्भ में, सरकार द्वारा शुरू की गई विभिन्न पहलों पर भी प्रकाश डालिए। (250 शब्द)

रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में, भीषण गर्मी की लहरों और शहरी ताप द्वीप प्रभाव से निपटने में सामुदायिक नेतृत्व वाले वृक्षारोपण अभियानों और शहरी नियोजन के महत्व पर चर्चा करें। इसमें हरित क्षेत्र बढ़ाने, ठंडी छतों, जल निकायों के संरक्षण जैसे उपायों को शामिल करें। दूसरे भाग में, सरकार द्वारा शुरू की गई विभिन्न पहलों जैसे राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन योजना, हीट एक्शन प्लान, अमृत मिशन, नगर वन योजना और इंडिया कूलिंग एक्शन प्लान का उल्लेख करें और बताएं कि ये कैसे इन चुनौतियों का समाधान करती हैं। अंत में, एक संक्षिप्त निष्कर्ष दें जो इन प्रयासों के समग्र महत्व को रेखांकित करे।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

No Comments

Post A Comment