अमरूत 2.0: ‘कैच द रेन’ अभियान में सामुदायिक भागीदारी का आह्वान

अमरूत 2.0: ‘कैच द रेन’ अभियान में सामुदायिक भागीदारी का आह्वान

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper I — भूगोल (शहरीकरण, जल संसाधन)  |  GS Paper II — शासन (सरकारी नीतियां और हस्तक्षेप)  |  GS Paper III — पर्यावरण (पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव आकलन)
  • Prelims: अमरूत 2.0, शैलो एक्विफर मैनेजमेंट (SAM) कार्यक्रम, कैच द रेन अभियान, नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ अर्बन अफेयर्स (NIUA), शहरी स्थानीय निकाय (ULBs), भूमिगत जल पुनर्भरण
  • Essay: भारत में जल संकट: समाधान की दिशा में जन आंदोलन की भूमिका, सतत शहरी विकास और जलवायु लचीलापन: चुनौतियाँ और अवसर

त्वरित पुनरावृत्ति: शैलो एक्विफर मैनेजमेंट (SAM) कार्यक्रम, अमरूत 2.0 के तहत एक पहल है, जो ‘कैच द रेन’ अभियान के माध्यम से वैज्ञानिक भूमिगत जल पुनर्भरण और सामुदायिक भागीदारी के साथ शहरी जल सुरक्षा को मजबूत करने पर केंद्रित है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

आवासन और शहरी कार्य राज्य मंत्री श्री तोकन साहू ने अमरूत 2.0 के शैलो एक्विफर मैनेजमेंट (SAM) कार्यक्रम की समीक्षा की। इस बैठक में ‘कैच द रेन’ अभियान के तहत शहरी जल सुरक्षा को मजबूत करने और शहरी बाढ़ के जोखिम को कम करने के लिए वैज्ञानिक भूमिगत जल पुनर्भरण हस्तक्षेपों की योजना और कार्यान्वयन पर चर्चा हुई। मंत्री ने कार्यक्रम में सामुदायिक भागीदारी बढ़ाने का भी आह्वान किया।

पृष्ठभूमि

  • भारत सरकार ने ‘कैच द रेन’ अभियान के तहत जल संरक्षण और सतत शहरी जल प्रबंधन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को सुदृढ़ किया है।
  • अमरूत 2.0 (AMRUT 2.0) मिशन का उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में जल सुरक्षा सुनिश्चित करना है, जिसमें भूमिगत जल प्रबंधन एक महत्वपूर्ण घटक है।
  • शैलो एक्विफर मैनेजमेंट (SAM) कार्यक्रम, अमरूत 2.0 के तहत एक पहल है, जिसका लक्ष्य 75 शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) में वैज्ञानिक भूमिगत जल पुनर्भरण को बढ़ावा देना है।
  • SAM 1.0 को 2022 से 2024 के बीच दस अमरूत शहरों में एक पायलट पहल के रूप में लागू किया गया था, जिसने भूमिगत जल स्तर में सुधार और जन जागरूकता में सफलता दिखाई।
  • पायलट कार्यक्रम की सफलता के आधार पर SAM 2.0 का राष्ट्रव्यापी विस्तार किया गया है।
  • प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने जल संरक्षण को एक ‘जन आंदोलन’ बनाने का आह्वान किया है, जिस पर इस समीक्षा बैठक में भी जोर दिया गया।

शैलो एक्विफर मैनेजमेंट (SAM) कार्यक्रम क्या है?

  • शैलो एक्विफर मैनेजमेंट (SAM) कार्यक्रम आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय की एक पहल है, जिसे अमरूत 2.0 मिशन के तहत लागू किया जा रहा है।
  • इसका मुख्य उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में भूमिगत जल पुनर्भरण (Groundwater Recharge) को बढ़ावा देना और शहरी जल सुरक्षा को मजबूत करना है।
  • यह कार्यक्रम ‘कैच द रेन’ अभियान का एक अभिन्न अंग है, जो वर्षा जल संचयन और जल संरक्षण पर केंद्रित है।
  • SAM कार्यक्रम के तहत, देशभर के 75 शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) में वैज्ञानिक भूमिगत जल पुनर्भरण हस्तक्षेपों की योजना बनाई और कार्यान्वित की जा रही है।
  • इन हस्तक्षेपों में भूमिगत जल स्तर में सुधार, संस्थागत क्षमता में वृद्धि और सतत जल संरक्षण प्रथाओं पर जन जागरूकता बढ़ाना शामिल है।
  • कार्यक्रम आधुनिक भूमिगत जल पुनर्भरण प्रौद्योगिकियों को पारंपरिक और समुदाय-नेतृत्व वाली जल संरक्षण प्रथाओं के साथ जोड़ता है।
  • SAM 2.0 के तहत, 870 साइटों को प्रमुख भूमिगत जल गुणों के लिए मानचित्रित किया गया है और 539 विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPRs) तैयार की गई हैं, जिनकी अनुमानित लागत ₹28 करोड़ से अधिक है।
  • कार्यक्रम की सफलता और दीर्घकालिक स्थिरता के लिए स्थानीय समुदायों, स्व-सहायता समूहों (SHGs), रेज़ीडेंट वेलफेयर एसोसिएशन्स (RWAs) और शैक्षणिक संस्थानों की सक्रिय भागीदारी पर जोर दिया गया है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
शैलो एक्विफर मैनेजमेंट (SAM) कार्यक्रम शहरी क्षेत्रों में वैज्ञानिक भूजल पुनर्भरण हस्तक्षेपों की योजना और कार्यान्वयन के माध्यम से जल सुरक्षा को सुदृढ़ करना तथा शहरी बाढ़ के जोखिम को कम करना।
‘कैच द रेन’ अभियान जल संरक्षण और सतत शहरी जल प्रबंधन के प्रति भारत सरकार की प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करता है।
SAM 1.0 (पायलट चरण) 2022-2024 के बीच दस AMRUT शहरों में लागू किया गया, जिसने वैज्ञानिक भूजल प्रबंधन की प्रभावशीलता प्रदर्शित की और SAM 2.0 के राष्ट्रव्यापी विस्तार की नींव रखी।
SAM 2.0 देशभर के 75 शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) में कार्यान्वित, जिसमें 870 साइटों का मानचित्रण और 539 विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPRs) तैयार की गई हैं।
सामुदायिक भागीदारी स्थानीय समुदायों, स्व-सहायता समूहों (SHGs), रेज़ीडेंट वेलफेयर एसोसिएशन्स (RWAs) और शैक्षणिक संस्थानों को शामिल करके कार्यक्रम की दीर्घकालिक स्थिरता और सफलता सुनिश्चित करना।
वैज्ञानिक नवाचार और पारंपरिक ज्ञान का समन्वय आधुनिक भूजल पुनर्भरण प्रौद्योगिकियों के साथ स्वदेशी, समुदाय-नेतृत्व वाली जल संरक्षण प्रथाओं का दस्तावेजीकरण और संवर्धन।

महत्व

पर्यावरणीय महत्व

  • शहरी भूजल स्तर में सुधार करके जल सुरक्षा को बढ़ाता है, जिससे पानी की कमी की समस्या का समाधान होता है।
  • शहरी बाढ़ के जोखिम को कम करता है, जो जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ती चरम मौसमी घटनाओं के संदर्भ में महत्वपूर्ण है।
  • स्थानीय पारिस्थितिक तंत्रों के संरक्षण में योगदान देता है, जो जल निकायों और संबंधित जैव विविधता के लिए महत्वपूर्ण है।

सामाजिक महत्व

  • सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देकर जल संरक्षण को ‘जन आंदोलन’ बनाता है, जिससे नागरिकों में स्वामित्व और जिम्मेदारी की भावना विकसित होती है।
  • स्व-सहायता समूहों (SHGs) और रेज़ीडेंट वेलफेयर एसोसिएशन्स (RWAs) जैसे जमीनी संगठनों को सशक्त बनाता है, जिससे स्थानीय स्तर पर शासन मजबूत होता है।
  • जल संरक्षण प्रथाओं पर जन जागरूकता बढ़ाता है, जिससे व्यवहार परिवर्तन और सतत जीवनशैली को प्रोत्साहन मिलता है।

आर्थिक महत्व

  • भूजल पुनर्भरण संरचनाओं के कार्यान्वयन से जल आपूर्ति की लागत कम हो सकती है, जिससे शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) पर वित्तीय बोझ कम होगा।
  • शहरी बाढ़ से होने वाले आर्थिक नुकसान को कम करता है, जिसमें बुनियादी ढांचे की क्षति और व्यावसायिक व्यवधान शामिल हैं।
  • जल-कुशल प्रौद्योगिकियों और प्रथाओं को बढ़ावा देकर दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता में योगदान देता है।

शासनिक महत्व

  • वैज्ञानिक भूजल प्रबंधन को बढ़ावा देकर शहरी नियोजन और विकास में डेटा-संचालित दृष्टिकोण को एकीकृत करता है।
  • केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) के बीच समन्वय को मजबूत करता है, जिससे प्रभावी नीति कार्यान्वयन सुनिश्चित होता है।
  • कार्यक्रम की नियमित निगरानी और सर्वोत्तम प्रथाओं के दस्तावेजीकरण से भविष्य की नीतियों और कार्यक्रमों के लिए मूल्यवान सीख मिलती है।

चुनौतियाँ

1. सीमित सामुदायिक भागीदारी

  • कार्यक्रम की दीर्घकालिक सफलता के लिए सामुदायिक भागीदारी महत्वपूर्ण है, लेकिन इसे जमीनी स्तर पर सक्रिय रूप से जुटाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
  • जल संरक्षण के महत्व के बारे में जागरूकता की कमी या भागीदारी के लिए प्रोत्साहन की कमी बाधा बन सकती है।

2. वैज्ञानिक डेटा और तकनीकी विशेषज्ञता की कमी

  • शैलो एक्विफर मैनेजमेंट (SAM) जैसे वैज्ञानिक हस्तक्षेपों के लिए सटीक भूजल डेटा और तकनीकी विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है, जो सभी शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) में उपलब्ध नहीं हो सकती है।
  • वैज्ञानिक नवाचारों को पारंपरिक ज्ञान के साथ एकीकृत करना एक जटिल प्रक्रिया हो सकती है, जिसके लिए सावधानीपूर्वक योजना और कार्यान्वयन की आवश्यकता होती है।

3. वित्तीय और संस्थागत बाधाएँ

  • भूजल पुनर्भरण संरचनाओं के निर्माण और रखरखाव के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधनों की आवश्यकता होती है, जो छोटे शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) के लिए एक चुनौती हो सकती है।
  • कार्यक्रम के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए मजबूत संस्थागत क्षमता और अंतर-विभागीय समन्वय आवश्यक है, जिसमें अक्सर सुधार की आवश्यकता होती है।

4. शहरीकरण और प्रदूषण का दबाव

  • तेजी से शहरीकरण और औद्योगिक गतिविधियों के कारण भूजल पर बढ़ता दबाव और प्रदूषण भूजल पुनर्भरण प्रयासों को बाधित कर सकता है।
  • शहरी क्षेत्रों में भूमिगत जल की गुणवत्ता बनाए रखना एक बड़ी चुनौती है, जिसके लिए व्यापक दृष्टिकोण की आवश्यकता होती है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
सामुदायिक भागीदारी का अभाव कार्यक्रम की दीर्घकालिक स्थिरता और सफलता के लिए सार्वजनिक भागीदारी महत्वपूर्ण है, जिसके बिना यह केवल एक सरकारी पहल बनकर रह सकता है।
वैज्ञानिक डेटा और तकनीकी क्षमता वैज्ञानिक भूजल प्रबंधन के लिए आवश्यक सटीक डेटा संग्रह, विश्लेषण और तकनीकी विशेषज्ञता की कमी कार्यान्वयन को प्रभावित कर सकती है।
वित्तीय संसाधन और रखरखाव भूजल पुनर्भरण संरचनाओं के निर्माण और उनके सतत रखरखाव के लिए पर्याप्त धन और कुशल प्रबंधन सुनिश्चित करना एक चुनौती है।
अंतर-विभागीय समन्वय जल प्रबंधन में विभिन्न सरकारी विभागों और एजेंसियों के बीच प्रभावी समन्वय की कमी कार्यक्रम के सुचारू कार्यान्वयन में बाधा डाल सकती है।
जलवायु परिवर्तन के प्रभाव बदलते वर्षा पैटर्न और चरम मौसमी घटनाएँ भूजल पुनर्भरण की प्रभावशीलता को प्रभावित कर सकती हैं, जिससे अनुकूलन की आवश्यकता होगी।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • अमरूत 2.0 (AMRUT 2.0)
  • ‘कैच द रेन’ अभियान

आगे की राह

  • स्थानीय समुदायों, स्व-सहायता समूहों (SHGs), रेज़ीडेंट वेलफेयर एसोसिएशन्स (RWAs) और शैक्षणिक संस्थानों को सक्रिय रूप से शामिल करके सामुदायिक भागीदारी को मजबूत किया जाए।
  • वैज्ञानिक नवाचारों को पारंपरिक जल संरक्षण प्रथाओं के साथ एकीकृत किया जाए, जिसमें स्थानीय पारिस्थितिक तंत्रों को बनाए रखने वाली स्वदेशी विधियों का दस्तावेजीकरण और संवर्धन शामिल हो।
  • SAM परियोजनाओं की नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए और सर्वोत्तम प्रदर्शन करने वाले शहरों की पहचान कर उनकी सर्वोत्तम प्रथाओं का दस्तावेजीकरण और प्रसार किया जाए।
  • चालू मानसून मौसम के दौरान भूजल पुनर्भरण संरचनाओं के निर्माण में तेजी लाई जाए और शहरी भारत में दोहराए जा सकने वाले नवोन्मेषी, स्केलेबल मॉडलों की पहचान की जाए।
  • शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) की तकनीकी और संस्थागत क्षमता को बढ़ाया जाए ताकि वे वैज्ञानिक भूजल प्रबंधन हस्तक्षेपों की योजना और कार्यान्वयन कर सकें।
  • भूजल डेटा संग्रह और विश्लेषण के लिए आधुनिक प्रौद्योगिकियों (जैसे GIS और रिमोट सेंसिंग) का उपयोग किया जाए ताकि प्रभावी निर्णय लेने में सहायता मिल सके।
  • जल संरक्षण को एक ‘जन आंदोलन’ बनाने के लिए व्यापक जागरूकता अभियान चलाए जाएं, जिसमें विभिन्न हितधारकों को शामिल किया जाए।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

शैलो एक्विफर मैनेजमेंट कार्यक्रम (SAM) · अमरूत 2.0 (AMRUT 2.0) · ‘कैच द रेन’ अभियान · शहरी जल सुरक्षा · भूमिगत जल पुनर्भरण · सामुदायिक भागीदारी · वैज्ञानिक जल प्रबंधन · जलवायु-लचीले शहर · शहरी बाढ़ जोखिम · नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ अर्बन अफेयर्स (NIUA)

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 243W’, ‘note’: ‘शहरी स्थानीय निकायों की शक्तियाँ, प्राधिकार’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 243G’, ‘note’: ‘पंचायतों की शक्तियाँ, प्राधिकार और उत्तरदायित्व’}
  • {‘article’: ‘राज्य सूची (सातवीं अनुसूची)’, ‘note’: ‘जल आपूर्ति, सिंचाई, नहरें, जल निकासी’}
  • {‘article’: ‘समवर्ती सूची (सातवीं अनुसूची)’, ‘note’: ‘पर्यावरण संरक्षण, वन, वन्यजीव’}

अवधारणा प्रवाह

शहरीकरण और जल संसाधनों पर दबाव  →  भूजल स्तर में गिरावट और शहरी बाढ़ का जोखिम  →  SAM कार्यक्रम के तहत वैज्ञानिक भूजल पुनर्भरण  →  सामुदायिक भागीदारी और जागरूकता का महत्व  →  शहरी जल सुरक्षा में वृद्धि और जलवायु लचीले शहर

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. शैलो एक्विफर मैनेजमेंट (SAM) कार्यक्रम के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय की एक पहल है।
2. इसका उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में वैज्ञानिक भूमिगत जल पुनर्भरण हस्तक्षेपों को बढ़ावा देना है।
3. ‘कैच द रेन’ अभियान के तहत यह कार्यक्रम केवल ग्रामीण क्षेत्रों पर केंद्रित है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  1. केवल 1
  2. केवल 2 और 3
  3. केवल 1 और 2
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: केवल 1 और 2 — कथन 1 और 2 सही हैं। SAM कार्यक्रम आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय की पहल है और इसका उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में वैज्ञानिक भूमिगत जल पुनर्भरण को बढ़ावा देना है। कथन 3 गलत है क्योंकि यह कार्यक्रम शहरी जल सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए शहरी क्षेत्रों पर केंद्रित है।

Q2. अमरूत 2.0 (AMRUT 2.0) मिशन के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?

  1. यह केवल शहरी स्वच्छता पर केंद्रित है।
  2. इसका मुख्य उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में जल आपूर्ति और सीवरेज बुनियादी ढाँचे में सुधार करना है।
  3. यह ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि उत्पादकता बढ़ाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
  4. यह केवल शहरी परिवहन प्रणालियों के विकास से संबंधित है।

उत्तर: इसका मुख्य उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में जल आपूर्ति और सीवरेज बुनियादी ढाँचे में सुधार करना है। — अमरूत 2.0 मिशन का मुख्य उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में जल आपूर्ति, सीवरेज और सेप्टेज प्रबंधन सहित बुनियादी ढाँचे में सुधार करना है, ताकि शहरी जल सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और सतत शहरी विकास को बढ़ावा मिल सके।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत में शहरी जल सुरक्षा सुनिश्चित करने और शहरी बाढ़ के जोखिम को कम करने में शैलो एक्विफर मैनेजमेंट (SAM) कार्यक्रम तथा ‘कैच द रेन’ अभियान की भूमिका का समालोचनात्मक विश्लेषण कीजिए। इस संदर्भ में, सामुदायिक भागीदारी के महत्त्व और वैज्ञानिक नवाचारों को पारंपरिक ज्ञान के साथ एकीकृत करने की आवश्यकता पर भी प्रकाश डालिए। (250 शब्द)

रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में, SAM कार्यक्रम और ‘कैच द रेन’ अभियान के उद्देश्यों तथा शहरी जल सुरक्षा व बाढ़ जोखिम प्रबंधन में उनकी भूमिका को स्पष्ट करें। दूसरे भाग में, सामुदायिक भागीदारी के महत्त्व को रेखांकित करें, यह बताते हुए कि कैसे यह कार्यक्रमों की दीर्घकालिक स्थिरता और सफलता के लिए महत्त्वपूर्ण है। अंत में, वैज्ञानिक नवाचारों को स्वदेशी, पारंपरिक जल संरक्षण प्रथाओं के साथ एकीकृत करने की आवश्यकता पर चर्चा करें, जिससे एक समग्र और प्रभावी जल प्रबंधन रणनीति बन सके।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


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