13 Sep अमित शाह मुंबई में हिंदी दिवस 2026 एवं राजभाषा सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे
✎ अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन भारतीय भाषाओं के समन्वय और राजभाषा हिंदी के संवैधानिक प्रावधानों के प्रभावी कार्यान्वयन को बढ़ावा देता है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper I — भारतीय संस्कृति और विरासत | GS Paper II — भारतीय संविधान: ऐतिहासिक आधार, विकास, विशेषताएँ, संशोधन, महत्वपूर्ण प्रावधान और बुनियादी संरचना
- Prelims: राजभाषा, अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन, राजभाषा गौरव पुरस्कार, राजभाषा कीर्ति पुरस्कार, अनुच्छेद 343, अनुच्छेद 351, आठवीं अनुसूची, नगर राजभाषा कार्यान्वयन समितियाँ (नराकास), वन्दे मातरम्
- Essay: भारतीय भाषाओं की एकता और राष्ट्रीय एकीकरण में उनकी भूमिका, सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण और संवर्धन
त्वरित पुनरावृत्ति: अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन भारतीय भाषाओं के समन्वय और राजभाषा हिंदी के संवैधानिक प्रावधानों के प्रभावी कार्यान्वयन को बढ़ावा देता है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने मुंबई में हिंदी दिवस 2026 और छठे अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित किया। इस दो दिवसीय कार्यक्रम में राजभाषा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए ‘राजभाषा गौरव’ और ‘राजभाषा कीर्ति’ पुरस्कार प्रदान किए गए। सम्मेलन में राष्ट्रीय गीत ‘वन्दे मातरम्’ पर केंद्रित एक विशेष विचार-सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें इसके ऐतिहासिक, साहित्यिक और सांस्कृतिक पक्षों पर चर्चा हुई।
पृष्ठभूमि
- गृह मंत्रालय का राजभाषा विभाग वर्ष 2021 से प्रतिवर्ष अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलनों का आयोजन कर रहा है।
- इन सम्मेलनों का उद्देश्य हिंदी के साथ-साथ सभी भारतीय भाषाओं के बीच समन्वय, संवाद और साझेदारी को सुदृढ़ करना है।
- ये सम्मेलन राजभाषा के प्रचार-प्रसार और उसके प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
- ‘राजभाषा गौरव’ और ‘राजभाषा कीर्ति’ पुरस्कार उन संस्थानों और व्यक्तियों को सम्मानित करते हैं जिन्होंने राजभाषा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया है।
- सम्मेलन में विभिन्न मंत्रालयों, विभागों, संगठनों और बैंकों द्वारा राजभाषा के क्षेत्र में किए गए कार्यों को प्रदर्शित करने वाली एक प्रदर्शनी भी लगाई जाती है।
- इस वर्ष का सम्मेलन महाराष्ट्र की समृद्ध भाषाई, सांस्कृतिक और साहित्यिक परंपरा के साथ हिंदी के जीवंत संबंधों को भी रेखांकित करता है।
भारत में राजभाषा का संवैधानिक प्रावधान
- भारतीय संविधान के भाग XVII में अनुच्छेद 343 से 351 तक राजभाषा से संबंधित प्रावधान दिए गए हैं।
- अनुच्छेद 343(1) के अनुसार, संघ की राजभाषा हिंदी और लिपि देवनागरी होगी। अंकों का रूप भारतीय अंकों का अंतर्राष्ट्रीय रूप होगा।
- अनुच्छेद 343(2) में प्रावधान है कि संविधान के प्रारंभ से 15 वर्ष की अवधि के लिए अंग्रेजी का उपयोग राजभाषा के रूप में जारी रहेगा।
- अनुच्छेद 343(3) संसद को विधि द्वारा अंग्रेजी भाषा का या अंकों के देवनागरी रूप का ऐसे प्रयोजनों के लिए उपयोग उपबंधित करने की शक्ति देता है।
- अनुच्छेद 344 राष्ट्रपति को राजभाषा आयोग और संसदीय समिति गठित करने का अधिकार देता है, जो संघ के राजकीय प्रयोजनों के लिए हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग और अंग्रेजी के प्रयोग पर निर्बंधन के संबंध में सिफारिशें करते हैं।
- अनुच्छेद 351 संघ को हिंदी भाषा के विकास के लिए निर्देश देने का अधिकार देता है, ताकि वह भारत की मिश्रित संस्कृति के सभी तत्वों की अभिव्यक्ति का माध्यम बन सके।
- संविधान की आठवीं अनुसूची में भारत की 22 भाषाओं को मान्यता दी गई है, जिनमें हिंदी भी शामिल है।
- नगर राजभाषा कार्यान्वयन समितियाँ (नराकास) केंद्र सरकार के कार्यालयों, उपक्रमों और बैंकों में राजभाषा नीति के कार्यान्वयन की समीक्षा और समन्वय के लिए गठित की जाती हैं।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| छठा अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन | राजभाषा हिंदी के प्रचार-प्रसार और सभी भारतीय भाषाओं के बीच समन्वय को सुदृढ़ करने का मंच। |
| राजभाषा गौरव एवं राजभाषा कीर्ति पुरस्कार | राजभाषा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले व्यक्तियों और संस्थानों को सम्मानित करना, जिससे प्रोत्साहन मिलता है। |
| राष्ट्रीय गीत ‘वन्दे मातरम्’ पर विशेष सत्र | राष्ट्रीय गीत के ऐतिहासिक, साहित्यिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहन विचार-विमर्श, राष्ट्रीय चेतना को बढ़ावा। |
| महत्त्वपूर्ण पुस्तकों एवं प्रकाशनों का लोकार्पण | भारतीय संस्कृति, ज्ञान परंपरा और साहित्य के विविध आयामों को सामने लाना। |
| नगर राजभाषा कार्यान्वयन समितियों (नराकास) की भूमिका पर सत्र | राजभाषा कार्यान्वयन में जमीनी स्तर पर सक्रिय समितियों के महत्व को रेखांकित करना। |
महत्व
भाषाई एवं सांस्कृतिक महत्व
- यह सम्मेलन हिंदी को राजभाषा के रूप में बढ़ावा देने और इसके संवैधानिक प्रावधानों के कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- ‘वन्दे मातरम्’ पर केंद्रित विशेष सत्र राष्ट्रीय गीत के ऐतिहासिक, साहित्यिक और सांस्कृतिक महत्व को उजागर करेगा, जिससे राष्ट्रीय पहचान और विरासत के प्रति जागरूकता बढ़ेगी।
- यह आयोजन महाराष्ट्र की समृद्ध भाषाई और सांस्कृतिक परंपरा के साथ हिंदी के जीवंत संबंधों को रेखांकित करता है, जिससे भाषाई विविधता और समन्वय को बल मिलता है।
प्रशासनिक महत्व
- राजभाषा गौरव और राजभाषा कीर्ति पुरस्कार सरकारी विभागों, मंत्रालयों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को राजभाषा हिंदी के प्रयोग में उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए प्रेरित करते हैं।
- नगर राजभाषा कार्यान्वयन समितियों (नराकास) की भूमिका पर चर्चा राजभाषा नीति के प्रभावी कार्यान्वयन में स्थानीय स्तर पर सरकारी कार्यालयों की भागीदारी को मजबूत करती है।
- गृह मंत्रालय के राजभाषा विभाग द्वारा वार्षिक सम्मेलनों का आयोजन राजभाषा नीति के सतत कार्यान्वयन और समीक्षा के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
सामाजिक महत्व
- सम्मेलन में विभिन्न प्रकाशनों का लोकार्पण, विशेषकर कैदियों की रचनाओं का संकलन, समाज के विभिन्न वर्गों की रचनात्मक अभिव्यक्ति को मंच प्रदान करता है।
- यह आयोजन हिंदी के साथ-साथ सभी भारतीय भाषाओं के बीच समन्वय, संवाद और साझेदारी को सुदृढ़ करने का अवसर प्रदान करता है, जिससे भाषाई सद्भाव बढ़ता है।
- राष्ट्रीय गीत ‘वन्दे मातरम्’ पर चर्चा भारतीय जनमानस में राष्ट्रीय चेतना और देशभक्ति की भावना को पुनर्जीवित करती है।
चुनौतियाँ
1. राजभाषा के रूप में हिंदी की स्वीकार्यता
- गैर-हिंदी भाषी राज्यों में हिंदी को राजभाषा के रूप में स्वीकार करने में प्रतिरोध या झिझक का सामना करना पड़ता है।
- प्रशासनिक और तकनीकी क्षेत्रों में हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए पर्याप्त संसाधनों और प्रशिक्षण की कमी।
यूपीएससी लिंक: भारतीय संघवाद, भाषाई विविधता
2. तकनीकी और डिजिटल माध्यमों में हिंदी का प्रयोग
- डिजिटल प्लेटफॉर्म, सॉफ्टवेयर और तकनीकी उपकरणों में हिंदी के प्रयोग को मानकीकृत और सुलभ बनाने की चुनौती।
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और मशीन लर्निंग (ML) जैसे उभरते क्षेत्रों में हिंदी सामग्री और उपकरणों का विकास।
यूपीएससी लिंक: ई-शासन, डिजिटल साक्षरता
3. अन्य भारतीय भाषाओं के साथ समन्वय
- हिंदी को बढ़ावा देते समय अन्य क्षेत्रीय भाषाओं के महत्व और संवर्धन को सुनिश्चित करना।
- त्रि-भाषा सूत्र (Three-language formula) के प्रभावी कार्यान्वयन में आने वाली चुनौतियाँ।
यूपीएससी लिंक: राष्ट्रीय शिक्षा नीति, भाषाई सद्भाव
4. राजभाषा नीति का प्रभावी कार्यान्वयन
- सरकारी कार्यालयों में राजभाषा नियमों और निर्देशों का पूरी तरह से पालन न होना।
- राजभाषा के प्रयोग को प्रोत्साहन देने के लिए पर्याप्त प्रेरणा और निगरानी तंत्र की कमी।
यूपीएससी लिंक: शासन, लोक प्रशासन
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| भाषाई विविधता का संरक्षण | राजभाषा हिंदी के प्रचार-प्रसार के साथ-साथ अन्य भारतीय भाषाओं के संरक्षण और संवर्धन को सुनिश्चित करना। |
| तकनीकी एकीकरण | डिजिटल और तकनीकी प्लेटफार्मों पर हिंदी के प्रयोग को सहज और व्यापक बनाना। |
| जनभागीदारी का अभाव | राजभाषा के प्रयोग को केवल सरकारी दायित्व न मानकर जन आंदोलन बनाना। |
| मानकीकरण का अभाव | तकनीकी शब्दावली और अनुवाद में एकरूपता और मानकीकरण की कमी। |
| प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण | सरकारी कर्मचारियों को राजभाषा हिंदी में कार्य करने के लिए पर्याप्त प्रशिक्षण और संसाधन उपलब्ध कराना। |
आगे की राह
- राजभाषा हिंदी के प्रचार-प्रसार के साथ-साथ सभी भारतीय भाषाओं के संरक्षण और संवर्धन के लिए संतुलित दृष्टिकोण अपनाना।
- डिजिटल और तकनीकी प्लेटफार्मों पर हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए नवाचार और अनुसंधान को प्रोत्साहित करना।
- सरकारी कर्मचारियों के लिए राजभाषा हिंदी में कार्य करने हेतु नियमित प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों का आयोजन करना।
- राजभाषा नियमों और निर्देशों के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए एक मजबूत निगरानी और मूल्यांकन तंत्र स्थापित करना।
- जनभागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए राजभाषा से संबंधित सांस्कृतिक और साहित्यिक गतिविधियों का आयोजन करना।
- त्रि-भाषा सूत्र को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए राज्यों के साथ समन्वय स्थापित करना।
- राजभाषा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तियों और संस्थानों को नियमित रूप से सम्मानित कर उन्हें प्रेरित करना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
राजभाषा नीति · संवैधानिक प्रावधान · राजभाषा अधिनियम · अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन · राजभाषा पुरस्कार · भाषाई विविधता · राष्ट्रीय एकता · वंदे मातरम् · नगर राजभाषा कार्यान्वयन समितियाँ · राजभाषा विभाग
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 343’, ‘note’: ‘संघ की राजभाषा हिंदी और लिपि देवनागरी’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 344’, ‘note’: ‘राजभाषा पर संसदीय समिति और आयोग’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 345’, ‘note’: ‘राज्य की राजभाषा या राजभाषाएँ’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 348’, ‘note’: ‘उच्चतम न्यायालय आदि में प्रयोग की जाने वाली भाषा’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 351’, ‘note’: ‘हिंदी भाषा के विकास के लिए निर्देश’}
अवधारणा प्रवाह
राजभाषा सम्मेलन का आयोजन → राजभाषा नीति का प्रभावी कार्यान्वयन → हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं में समन्वय → राष्ट्रीय चेतना और सांस्कृतिक विरासत का संवर्धन → भाषाई सद्भाव और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत के संविधान के अनुच्छेद 343 के अनुसार, संघ की राजभाषा हिंदी और लिपि देवनागरी होगी।
2. राजभाषा अधिनियम, 1963, हिंदी के अतिरिक्त अंग्रेजी के प्रयोग को भी संघ के शासकीय प्रयोजनों के लिए जारी रखने का प्रावधान करता है।
3. अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन का आयोजन गृह मंत्रालय का राजभाषा विभाग प्रतिवर्ष करता है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है। अनुच्छेद 343(1) संघ की राजभाषा हिंदी और लिपि देवनागरी को निर्धारित करता है। कथन 2 सही है। राजभाषा अधिनियम, 1963, हिंदी के साथ-साथ अंग्रेजी के प्रयोग को भी जारी रखने का प्रावधान करता है। कथन 3 भी सही है। गृह मंत्रालय का राजभाषा विभाग 2021 से प्रतिवर्ष अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलनों का आयोजन कर रहा है।
Q2. राजभाषा गौरव पुरस्कार और राजभाषा कीर्ति पुरस्कार किस क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए प्रदान किए जाते हैं?
- कला और संस्कृति
- विज्ञान और प्रौद्योगिकी
- राजभाषा के क्षेत्र में
- खेल और युवा कल्याण
उत्तर: राजभाषा के क्षेत्र में — ये पुरस्कार राजभाषा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य और उल्लेखनीय योगदान करने वाले संस्थानों एवं व्यक्तियों को सम्मानित करने के लिए दिए जाते हैं, जैसा कि प्रेस विज्ञप्ति में उल्लेख किया गया है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत की राजभाषा नीति के संवैधानिक प्रावधानों का परीक्षण कीजिए। साथ ही, राजभाषा के प्रचार-प्रसार में अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलनों जैसे आयोजनों की भूमिका का मूल्यांकन कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** भारत की भाषाई विविधता और राजभाषा के महत्व का संक्षिप्त उल्लेख।
2. **संवैधानिक प्रावधान:**
* **भाग XVII:** राजभाषा से संबंधित अनुच्छेद 343 से 351 का उल्लेख।
* **अनुच्छेद 343:** संघ की राजभाषा हिंदी (देवनागरी लिपि) और अंकों का अंतर्राष्ट्रीय स्वरूप। अंग्रेजी के प्रयोग का प्रावधान।
* **अनुच्छेद 344:** राजभाषा पर संसदीय समिति और आयोग।
* **अनुच्छेद 345-347:** क्षेत्रीय भाषाओं से संबंधित प्रावधान।
* **अनुच्छेद 348:** उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों में प्रयोग की जाने वाली भाषा।
* **अनुच्छेद 350:** शिकायतों के निवारण के लिए अभ्यावेदन में प्रयोग की जाने वाली भाषा और भाषाई अल्पसंख्यकों के लिए विशेष प्रावधान।
* **अनुच्छेद 351:** हिंदी भाषा के विकास के लिए निर्देश।
* **आठवीं अनुसूची:** संविधान द्वारा मान्यता प्राप्त 22 भाषाओं का उल्लेख।
3. **राजभाषा अधिनियम, 1963:** अंग्रेजी के प्रयोग को जारी रखने का प्रावधान।
4. **अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलनों की भूमिका का मूल्यांकन:**
* **प्रचार-प्रसार:** हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं के बीच समन्वय, संवाद और साझेदारी को सुदृढ़ करना।
* **जागरूकता:** राजभाषा के प्रति जागरूकता बढ़ाना और उसके प्रयोग को प्रोत्साहित करना।
* **पुरस्कार:** ‘राजभाषा गौरव’ और ‘राजभाषा कीर्ति’ जैसे पुरस्कारों के माध्यम से उत्कृष्ट योगदान को मान्यता देना।
* **विचार-विमर्श:** ‘वंदे मातरम्’ जैसे राष्ट्रीय प्रतीकों पर केंद्रित सत्रों के माध्यम से सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहलुओं पर चर्चा।
* **प्रकाशन:** महत्वपूर्ण पुस्तकों और पत्रिकाओं के लोकार्पण से साहित्य और ज्ञान परंपरा को बढ़ावा।
* **नराकास की भूमिका:** नगर राजभाषा कार्यान्वयन समितियों (नराकास) के कार्यों की समीक्षा और सुदृढ़ीकरण।
* **समन्वय:** विभिन्न मंत्रालयों, विभागों, बैंकों और संगठनों को एक मंच पर लाना।
5. **निष्कर्ष:** राजभाषा नीति के उद्देश्यों की प्राप्ति में इन सम्मेलनों के महत्व और भाषाई सामंजस्य बनाए रखने की आवश्यकता पर बल।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
Maharashtra PCS (MPSC) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह द्वारा 14 सितंबर, 2025 को मुंबई में आयोजित हिंदी दिवस 2026 एवं छठे अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में निम्नलिखित में से किस पर विशेष बल दिया गया था?
- A. महाराष्ट्र में हिंदी भाषा के प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार द्वारा उठाए गए कदम
- B. महाराष्ट्र के सरकारी कार्यालयों में हिंदी को राजभाषा के रूप में पूर्णतः लागू करना
- C. महाराष्ट्र में हिंदी भाषा के विकास एवं संवर्धन हेतु केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित नई राष्ट्रीय नीति
- D. महाराष्ट्र राज्य में हिंदी शिक्षण संस्थानों की स्थापना एवं उनके पाठ्यक्रमों का मानकीकरण
उत्तर: B. महाराष्ट्र के सरकारी कार्यालयों में हिंदी को राजभाषा के रूप में पूर्णतः लागू करना — अमित शाह ने महाराष्ट्र के सरकारी कार्यालयों में हिंदी को राजभाषा के रूप में पूर्णतः लागू करने पर विशेष बल दिया था, ताकि प्रशासनिक कार्य में हिंदी का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित हो सके।
Mains: हिंदी दिवस 2026 एवं छठे अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में महाराष्ट्र राज्य की भूमिका एवं योगदान का विश्लेषण करते हुए, राज्य में हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार एवं प्रशासनिक उपयोगिता को बढ़ावा देने के लिए अपनाई जाने वाली रणनीतियों पर अपने विचार व्यक्त कीजिए।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
- यूपीएससी तैयारी: गांधीनगर में होगा विश्व सर्कुलर इकोनॉमी फोरम 2026, जानें थीम और महत्व - September 13, 2026
- UPSC Alert: India to Host Global Circular Economy Forum 2026 in Gujarat - September 13, 2026
- अमित शाह मुंबई में हिंदी दिवस 2026 एवं राजभाषा सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे - September 13, 2026

No Comments