29 Oct असम में कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा: केंद्र और राज्य सरकार का संयुक्त प्रयास
✎ कल्याणकारी योजनाओं की सफलता का मूल मंत्र अभिसरण है: पात्र लाभार्थी तक पहुँच तभी संभव है जब सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के नेतृत्व में विभाग और लागू करने वाली एजेंसियां समन्वित रूप से काम करें।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — शासन, सामाजिक न्याय और केंद्र-राज्य संबंध (अनुसूचित जाति, नशा निवारण, सफाई कर्मचारी कल्याण) | GS Paper II — सरकारी नीतियों और विकास योजनाओं का क्रियान्वयन तथा उनमें अभिसरण की भूमिका | GS Paper II — संवैधानिक और वैधानिक निकाय (राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग)
- Prelims: नशा मुक्त भारत अभियान (Nasha Mukt Bharat Abhiyaan) — सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा संचालित समयबद्ध अभियान, प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना (PM-AJAY) — पूर्ववर्ती तीन योजनाओं के विलय से बनी योजना, नमस्ते योजना (NAMASTE) — सीवर और सेप्टिक टैंक कर्मचारियों तथा कचरा बीनने वालों के लिए मशीनीकृत सफाई पर केंद्रित, मैनुअल स्कैवेंजिंग निषेध और पुनर्वास अधिनियम, 2013 (Prohibition of Employment as Manual Scavengers and their Rehabilitation Act, 2013), राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग (National Commission for Safai Karamcharis) — वैधानिक निकाय, राष्ट्रीय मादक पदार्थ नियंत्रण ब्यूरो (NCB) और मादक पदार्थ एवं मनःप्रभावी पदार्थ अधिनियम, 1985 (NDPS Act), अनुच्छेद 17 (अस्पृश्यता का उन्मूलन) और अनुच्छेद 46 (दुर्बल वर्गों के हितों की वृद्धि), अनुच्छेद 47 (पोषण स्तर, जन स्वास्थ्य और मादक पेयों व दवाओं के निषेध से संबंधित राज्य का कर्तव्य)
- Essay: कल्याणकारी योजनाओं की सफलता में अभिसरण और अंतर-विभागीय समन्वय का महत्व, सामाजिक न्याय और गरिमा: सफाई कर्मचारियों के मशीनीकरण से सम्मानजनक आजीविका तक
त्वरित पुनरावृत्ति: कल्याणकारी योजनाओं की सफलता का मूल मंत्र अभिसरण है: पात्र लाभार्थी तक पहुँच तभी संभव है जब सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के नेतृत्व में विभाग और लागू करने वाली एजेंसियां समन्वित रूप से काम करें।
यह खबर चर्चा में क्यों?
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के केंद्रीय सचिव श्री सुधांश पंत ने गुवाहाटी में असम में मंत्रालय की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा की। समीक्षा में नशा मुक्त भारत अभियान, प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना और नमस्ते योजना के तहत हुई प्रगति का आकलन किया गया। बैठक में राज्य के वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे और इस बात पर बल दिया गया कि योजनाओं का लाभ पात्र लाभार्थियों तक पहुँचे। इसके लिए विभागों, लागू करने वाली एजेंसियों और राज्य सरकार के बीच निरंतर समन्वय, पहुँच और अभिसरण को आवश्यक बताया गया। यह समीक्षा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि केंद्र प्रायोजित और केंद्रीय क्षेत्र की योजनाओं की सफलता अक्सर राज्य स्तर पर विभागीय तालमेल पर निर्भर करती है।
पृष्ठभूमि
- संविधान के अनुच्छेद 46 के अंतर्गत राज्य से अनुसूचित जातियों के शैक्षिक और आर्थिक हितों की वृद्धि का अपेक्षित है, और यही सामाजिक न्याय संबंधी योजनाओं का संवैधानिक आधार है।
- मैनुअल स्कैवेंजिंग निषेध और पुनर्वास अधिनियम, 2013 के बाद सफाई कर्मचारियों की सुरक्षा और पुनर्वास पर नीति का ध्यान मशीनीकृत सफाई की ओर बढ़ा है, जिसका एक रूप नमस्ते योजना है।
- नशा मुक्त भारत अभियान की शुरुआत 15 अगस्त 2020 को हुई थी। इसका उद्देश्य मांग में कमी, जागरूकता और पुनर्वास के माध्यम से नशे की समस्या का समाधान करना है।
- प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना का गठन पूर्ववर्ती योजनाओं को मिलाकर किया गया, ताकि अनुसूचित जाति बहुल गांवों के एकीकृत विकास पर एक ही ढांचे में काम हो सके।
- केंद्र और राज्य के बीच योजनाओं का क्रियान्वयन सहकारी संघवाद की भावना में होता है, जहाँ कानून-व्यवस्था, स्वास्थ्य और स्थानीय निकाय राज्य सूची या समवर्ती सूची के विषय हैं और केंद्र नीति व वित्तीय सहायता देता है।
अभिसरण आधारित सामाजिक कल्याण प्रशासन क्या है?
- अभिसरण (Convergence) का अर्थ है कि एक ही लाभार्थी या क्षेत्र तक विभिन्न विभागों और योजनाओं की सेवाएं समन्वित रूप से पहुँचें, ताकि संसाधनों का दोहराव न हो और परिणाम बेहतर मिलें।
- अंतर-विभागीय समन्वय के लिए नोडल मंत्रालय की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। इस समीक्षा में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग को संबंधित विभागों और लागू करने वाली एजेंसियों को एक मंच पर लाने वाली भूमिका सौंपी गई।
- नशा मुक्त भारत अभियान में मांग में कमी, जागरूकता, शैक्षणिक संस्थाओं में गतिविधियां, नशा मुक्ति मित्र स्वयंसेवक और पुनर्वास केंद्र शामिल हैं। यह नशे की समस्या को रोकथाम और उपचार दोनों स्तरों पर देखता है।
- प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना के अंतर्गत चुने गए गांवों में आजीविका, सामुदायिक अवसंरचना और खेल सुविधाओं जैसे घटक एकीकृत रूप से चलते हैं, और स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं की भागीदारी पर बल दिया जाता है।
- नमस्ते योजना का लक्ष्य सीवर और सेप्टिक टैंक कर्मचारियों तथा कचरा बीनने वालों की सुरक्षा, सम्मान और कल्याण है। इसमें व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण, स्वास्थ्य कवरेज और मशीनीकृत सफाई पर ध्यान दिया जाता है।
- नमस्ते योजना के अंतर्गत नगरीय स्थानीय निकाय (ULB) स्तर पर कर्मचारियों का विवरण तैयार करना पहला व्यावहारिक कदम है, क्योंकि लक्षित लाभ तभी दिया जा सकता है जब लाभार्थियों की पहचान सत्यापित हो।
- सामाजिक कल्याण योजनाओं में सफलता के मापदंड केवल वित्तीय आवंटन नहीं, बल्कि पात्र लाभार्थियों तक वास्तविक पहुँच, समय पर समाधान और सततता होते हैं।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता (Feature) | महत्व (Significance) |
|---|---|
| समीक्षा का स्वरूप | गुवाहाटी में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन का समग्र आकलन, जिसमें केंद्र और राज्य सरकार की संयुक्त भागीदारी रही |
| नशा मुक्त भारत अभियान (Nasha Mukt Bharat Abhiyaan) | जागरूकता, ई-प्रतिज्ञा और नशा मुक्ति मित्र स्वयंसेवकों के माध्यम से नशीले पदार्थों की मांग में कमी लाने और पुनर्वास को सुदृढ़ करने पर केंद्रित |
| PM-AJAY | 721 अनुसूचित जाति बहुल गांवों का एकीकृत विकास, आजीविका के लिए 5,269 लाभार्थियों की स्वीकृति और ₹26.34 करोड़ का वित्तीय निवेश |
| NAMASTE | सीवर और सेप्टिक टैंक कर्मियों तथा कचरा बीनने वालों का विवरण तैयार करना, व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण, स्वास्थ्य कवरेज और मशीनीकृत सफाई को बढ़ावा देना |
| अभिसरण (Convergence) पर बल | विभिन्न विभागों और कार्यान्वयन एजेंसियों के बीच समन्वय से पात्र लाभार्थियों तक पहुंच सुनिश्चित करना और बाधाओं का समय पर समाधान करना |
महत्व
सामाजिक न्याय (Social Justice)
- अनुसूचित जाति बहुल गांवों में एकीकृत विकास से आजीविका और सामुदायिक अवसंरचना, दोनों का विस्तार होता है, जिससे सामाजिक समावेशन को ठोस आधार मिलता है
- सफाई कर्मियों और कचरा बीनने वालों का औपचारिक पंजीकरण उन्हें योजनाओं की पहुंच के दायरे में लाता है, जो अदृश्य श्रमिकों की पहचान की दिशा में पहला कदम है
- मादक पदार्थों की मांग में कमी और पुनर्वास से उन परिवारों और समुदायों पर पड़ने वाला सामाजिक दबाव घटता है जो नशे की लत से प्रभावित होते हैं
शासन और प्रशासन (Governance)
- अंतर-विभागीय समन्वय और अभिसरण का सिद्धांत यह दर्शाता है कि कल्याणकारी योजनाओं की सफलता केवल योजना-निर्माण पर नहीं, बल्कि कार्यान्वयन की गुणवत्ता पर निर्भर करती है
- नियमित समीक्षा बैठकें सरकारी कार्यक्रमों की प्रगति, लक्ष्य और वास्तविक उपलब्धि के बीच के अंतर को मापने का प्रशासनिक साधन हैं
- सामाजिक न्याय मंत्रालय की समन्वयकारी भूमिका यह बताती है कि नोडल मंत्रालय किस प्रकार विभिन्न विभागों और एजेंसियों को एक मंच पर लाकर जवाबदेही तय करता है
स्वास्थ्य, सुरक्षा और गरिमा (Health, Safety and Dignity)
- सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई में व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण और मशीनीकरण से श्रमिकों के जीवन-जोखिम में कमी लाई जा सकती है
- स्वास्थ्य कवरेज श्रमिकों की आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करता है और काम से जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों के प्रति सुरक्षा कवच का काम करता है
- जागरूकता अभियानों में शैक्षणिक संस्थानों और स्वयंसेवकों की व्यापक भागीदारी से नशा-निवारण को समुदाय-आधारित स्वरूप मिलता है
संघवाद और सहकारी शासन (Federalism and Cooperative Governance)
- केंद्र प्रायोजित योजनाओं का क्रियान्वयन राज्य सरकारों की भागीदारी के बिना संभव नहीं है, इसलिए यह सहकारी संघवाद का व्यावहारिक उदाहरण है
- राज्य सरकार के कोष से संचालित नशा मुक्ति केंद्र और केंद्रीय योजनाओं का समन्वय दोनों स्तरों की वित्तीय और प्रशासनिक भूमिका को दर्शाता है
चुनौतियाँ
1. पुनर्वास के बाद सामाजिक पुनः एकीकरण
- नशा मुक्ति केंद्रों से निकले व्यक्तियों के लिए रोजगार और सामाजिक स्वीकार्यता सुनिश्चित करना एक जटिल कार्य है
- इलाज पूरा होने के बाद फॉलो-अप तंत्र कमजोर होने पर पुनरावृत्ति का खतरा बना रहता है
- जागरूकता गतिविधियों की संख्या और वास्तविक व्यवहार-परिवर्तन के बीच अंतर को मापना कठिन है
यूपीएससी लिंक: सामाजिक क्षेत्र में स्वास्थ्य और सामाजिक न्याय से संबंधित योजनाओं का मूल्यांकन (GS-2)
2. सफाई कर्मियों की सुरक्षा और मशीनीकरण में अंतर
- सीवर और सेप्टिक टैंक में मानव प्रवेश की प्रथा पर रोक के बावजूद व्यवहार में जोखिमपूर्ण सफाई होने की शिकायतें बनी रहती हैं
- हाथ से मैला ढोने का रोजगार प्रतिषेध अधिनियम, 2013 (Prohibition of Employment as Manual Scavengers and their Rehabilitation Act, 2013) के प्रभावी अनुपालन के लिए स्थानीय निकायों की निगरानी आवश्यक है
- मशीनीकृत सफाई के उपकरणों की खरीद, रखरखाव और प्रशिक्षण पर होने वाला खर्च छोटे शहरी स्थानीय निकायों के लिए बोझ बन सकता है
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय, श्रम कल्याण और मानव गरिमा से जुड़े मुद्दे (GS-2)
3. लाभार्थियों की सटीक पहचान और लक्ष्यीकरण
- कचरा बीनने वालों जैसे असंगठित और अस्थायी श्रमिकों की गणना और सत्यापन में कठिनाई आती है
- डेटा की विश्वसनीयता सुनिश्चित न होने पर पात्र व्यक्ति योजनाओं के लाभ से वंचित रह सकते हैं
- सामाजिक-आर्थिक डेटाबेस और स्थानीय स्तर की सूचनाओं के बीच तालमेल आवश्यक है
यूपीएससी लिंक: सार्वजनिक वितरण और लक्षित योजनाओं में लीकेज और समावेशन की चुनौतियां (GS-2)
4. बहु-विभागीय समन्वय और अभिसरण की कमी
- एक ही गांव या समुदाय में कई विभागों की योजनाएं अलग-अलग समय-सारिणी और प्रक्रियाओं से चलती हैं, जिससे अभिसरण कठिन होता है
- राज्य स्तर पर नोडल अधिकारियों की जिम्मेदारी स्पष्ट न होने पर निर्णय में देरी होती है
- केंद्र की दिशा और राज्य की प्राथमिकताओं के बीच तालमेल बनाए रखना आवश्यक है
यूपीएससी लिंक: केंद्र-राज्य संबंध और सहकारी संघवाद की व्यावहारिक चुनौतियां (GS-2)
5. निधि उपयोग और सतत आजीविका
- स्वीकृत लाभार्थियों की संख्या और निधि के उपयोग का भौतिक तथा वित्तीय सत्यापन आवश्यक है
- आजीविका सहायता तभी टिकाऊ होती है जब कौशल प्रशिक्षण, बाजार संपर्क और स्थायी आय स्रोत एक साथ विकसित हों
- स्वयं सहायता समूहों की वित्तीय साक्षरता और बाजार पहुंच में असमानता बनी हुई है
यूपीएससी लिंक: सरकारी योजनाओं के वित्तीय प्रबंधन और सतत विकास लक्ष्य (GS-3 और GS-2)
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा (Issue) | चिंता (Concern) |
|---|---|
| पुनर्वास की गुणवत्ता | इलाज के बाद सामाजिक पुनः एकीकरण और रोजगार का अभाव पुनरावृत्ति का कारण बन सकता है |
| सफाई कार्य में सुरक्षा | सीवर और सेप्टिक टैंक में जोखिमपूर्ण मानव प्रवेश की स्थिति पर पूर्ण नियंत्रण अभी चुनौती है |
| आंकड़ों की विश्वसनीयता | असंगठित श्रमिकों की गणना में त्रुटि से लाभार्थी चयन प्रभावित हो सकता है |
| अंतर-विभागीय तालमेल | विभिन्न विभागों की अलग प्रक्रियाएं अभिसरण में देरी और दोहराव पैदा करती हैं |
| निधि का सतत उपयोग | स्वीकृत निधि का प्रभावी और टिकाऊ उपयोग सुनिश्चित करने हेतु निरंतर निगरानी आवश्यक है |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- नशा मुक्त भारत अभियान (Nasha Mukt Bharat Abhiyaan)
- प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना (PM-AJAY)
- नेशनल एक्शन फॉर मैकेनाइज्ड सैनिटेशन इकोसिस्टम (NAMASTE)
आगे की राह
- पुनर्वास केंद्रों से निकले व्यक्तियों के लिए कौशल प्रशिक्षण, रोजगार और नियमित फॉलो-अप तंत्र को एक साथ जोड़ा जाए
- सीवर और सेप्टिक टैंक सफाई में मानव प्रवेश पर रोक के प्रवर्तन हेतु स्थानीय निकायों की जवाबदेही और निरीक्षण व्यवस्था मजबूत की जाए
- सफाई कर्मियों और कचरा बीनने वालों के डेटा को एक एकीकृत डिजिटल पंजीकरण प्रणाली में लाकर सत्यापन की विश्वसनीयता बढ़ाई जाए
- PM-AJAY के तहत स्वीकृत आजीविका सहायता को कौशल विकास, बाजार संपर्क और स्वयं सहायता समूहों के वित्तीय प्रशिक्षण से जोड़ा जाए
- राज्य स्तर पर नोडल अधिकारी और समयबद्ध समीक्षा तंत्र स्थापित कर अंतर-विभागीय निर्णयों में देरी को कम किया जाए
- मशीनीकृत सफाई उपकरणों की खरीद के लिए छोटे शहरी स्थानीय निकायों को वित्तीय और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जाए
- जागरूकता अभियानों के आउटपुट संकेतकों (जैसे प्रतिज्ञा और गतिविधियों की संख्या) के साथ व्यवहार-परिवर्तन के परिणाम संकेतकों को भी मापा जाए
- स्थानीय समुदायों और स्वयंसेवकों की भागीदारी को निरंतर बनाए रखने हेतु उन्हें नियमित प्रशिक्षण और मान्यता दी जाए
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय (Ministry of Social Justice and Empowerment) · अभिसरण (Convergence) · सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) · केंद्र प्रायोजित योजनाएं (Centrally Sponsored Schemes) · अनुच्छेद 17 और अनुच्छेद 46 (Articles 17 and 46) · मैनुअल स्कैवेंजिंग प्रतिषेध अधिनियम, 2013 (Prohibition of Employment as Manual Scavengers and their Rehabilitation Act, 2013) · पीएम-अजय (PM-AJAY) · नमस्ते योजना (NAMASTE) · नशा मुक्त भारत अभियान (NMBA) · अनुसूचित जाति विकास और सामाजिक सुरक्षा · लक्षित लाभार्थी और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (Targeted Beneficiaries and Direct Benefit Transfer) · शहरी स्थानीय निकाय (Urban Local Bodies)
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 46 (Article 46): दुर्बल वर्गों के शैक्षिक-आर्थिक हितों का संवर्धन
- अनुच्छेद 47 (Article 47): मादक पेयों और हानिकारक नशीली दवाओं पर निषेध
- अनुच्छेद 17 (Article 17): अस्पृश्यता का उन्मूलन, मैला ढोने की प्रथा से संबंध
- अनुच्छेद 21 (Article 21): गरिमापूर्ण जीवन और सुरक्षित कार्य परिस्थितियां
अवधारणा प्रवाह
केंद्रीय सचिव द्वारा असम में मंत्रालय की योजनाओं की समीक्षा और राज्य सरकार के साथ समन्वय बैठक → अंतर-विभागीय अभिसरण के माध्यम से योजनाओं के कार्यान्वयन में बाधाओं की पहचान और समयबद्ध समाधान → नशा मुक्त भारत अभियान के तहत जागरूकता, स्वयंसेवक नेटवर्क और पुनर्वास केंद्रों से मांग में कमी का प्रयास → PM-AJAY के तहत 721 गांवों में एकीकृत विकास, आजीविका सहायता और सामुदायिक खेल अवसंरचना का निर्माण → NAMASTE के तहत सफाई कर्मियों का पंजीकरण, व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण, स्वास्थ्य कवरेज और मशीनीकरण को बढ़ावा → सुरक्षित कार्य परिस्थितियों और आजीविका सुधार से सामाजिक गरिमा और समावेशी विकास के लक्ष्य की ओर प्रगति
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. नमस्ते योजना (NAMASTE) का क्रियान्वयन स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा किया जाता है।
2. नशा मुक्त भारत अभियान (NMBA) सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के समन्वय में चलाया जा रहा है।
3. पीएम-अजय (PM-AJAY) कुछ पूर्ववर्ती योजनाओं के विलय से बनी एक एकीकृत योजना है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- सभी
उत्तर: केवल दो — कथन 1 गलत है: नमस्ते योजना सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की योजना है, स्वास्थ्य मंत्रालय की नहीं, और इसका फोकस सीवर व सेप्टिक टैंक कर्मचारियों की सुरक्षा और मशीनीकरण पर है। कथन 2 सही है: नशा मुक्त भारत अभियान इसी मंत्रालय के अंतर्गत है और असम की समीक्षा में भी इसका उल्लेख था। कथन 3 सही है: पीएम-अजय पूर्ववर्ती योजनाओं के विलय से बनी छत्र योजना (umbrella scheme) है। अतः सही उत्तर ‘केवल दो’ है।
Q2. कथन (A) और तर्क (R) पर विचार कीजिए:
कथन (A): मैनुअल स्कैवेंजिंग प्रतिषेध अधिनियम, 2013 के अंतर्गत बिना सुरक्षा उपकरणों के सीवर या सेप्टिक टैंक की खतरनाक सफाई कराना दंडनीय अपराध है।
तर्क (R): संविधान का अनुच्छेद 17 अस्पृश्यता का अंत करता है और उससे उत्पन्न किसी भी निर्योग्यता के प्रवर्तन को कानून के अनुसार अपराध घोषित करता है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:
- (A) और (R) दोनों सही हैं, और (R), (A) की सही व्याख्या है।
- (A) और (R) दोनों सही हैं, किंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
- (A) सही है, किंतु (R) गलत है।
- (A) गलत है, किंतु (R) सही है।
उत्तर: (A) और (R) दोनों सही हैं, और (R), (A) की सही व्याख्या है। — 2013 का अधिनियम बिना सुरक्षा उपकरणों के सीवर और सेप्टिक टैंक की खतरनाक सफाई पर रोक लगाता है और उल्लंघन को दंडनीय बनाता है। अनुच्छेद 17 अस्पृश्यता उन्मूलन का संवैधानिक आधार है, जिसकी भावना और उद्देश्य इस कानून में परिलक्षित होते हैं। अतः (R), (A) की सही संवैधानिक व्याख्या है।
Q3. निम्नलिखित में से कौन-सा अनुच्छेद राज्य को दुर्बल वर्गों के शैक्षिक और आर्थिक हितों की उन्नति तथा सामाजिक अन्याय से उनके संरक्षण का निर्देश देता है?
- अनुच्छेद 15
- अनुच्छेद 46
- अनुच्छेद 47
- अनुच्छेद 282
उत्तर: अनुच्छेद 46 — अनुच्छेद 46 राज्य नीति के निदेशक तत्वों (भाग IV) में आता है और अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों तथा अन्य दुर्बल वर्गों के हितों की रक्षा का निर्देश देता है। अनुच्छेद 15 मौलिक अधिकार है, अनुच्छेद 47 पोषण और जन स्वास्थ्य से संबंधित है, और अनुच्छेद 282 केंद्र व राज्यों को अनुदान से जुड़ा है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ सामाजिक कल्याण की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में अंतर-विभागीय समन्वय और अभिसरण (Convergence) की भूमिका की समीक्षा कीजिए। केंद्र प्रायोजित योजनाओं में केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय के संवैधानिक तथा वित्तीय आयाम क्या हैं, और इन योजनाओं में अभिसरण में कौन-सी बाधाएं सामने आती हैं? (15 Marks)
रूपरेखा: उत्तर की रूपरेखा: (1) भूमिका: हाल में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की असम समीक्षा का उदाहरण, जिसमें नशा मुक्त भारत अभियान, पीएम-अजय और नमस्ते के बीच अभिसरण पर बल दिया गया। (2) संवैधानिक आधार: अनुच्छेद 46 (दुर्बल वर्गों के हित संरक्षण), अनुच्छेद 17 (अस्पृश्यता उन्मूलन), अनुच्छेद 47 (जन स्वास्थ्य और मादक पदार्थों पर नियंत्रण) और सातवीं अनुसूची के अंतर्गत विषयों का केंद्र-राज्य विभाजन। (3) वित्तीय आयाम: अनुच्छेद 282 के अंतर्गत अनुदान, वित्त आयोग की भूमिका, केंद्र प्रायोजित योजनाओं में राज्य अंश तथा राज्यों की क्षमता का प्रश्न। (4) अभिसरण के पक्ष: एक ही लाभार्थी तक कई योजनाओं का एकीकृत पहुंचना, दोहराव और संसाधनों की बचत, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के साथ जुड़ाव, आजीविका व अवसंरचना का साथ-साथ विकास। (5) बाधाएं: विभिन्न विभागों और एजेंसियों के बीच प्रशासनिक समन्वय, लक्ष्य व रिपोर्टिंग प्रणालियों में असमानता, डेटा का अभाव, नगरपालिका स्तर पर क्षमता की कमी, और बदलते राज्य-प्राथमिकताओं के कारण निरंतरता का संकट। (6) विवेचना: मैनुअल स्कैवेंजिंग से संबंधित Safai Karamchari Andolan बनाम भारत संघ (2014) में सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का उल्लेख, जो पुनर्वास और सुरक्षा के दायित्व पर बल देते हैं। नीति आयोग और विभिन्न समीक्षाओं में सुझाए गए सुधार, जैसे समयबद्ध निगरानी, साझा डैशबोर्ड और जिला स्तर पर एकल समन्वय तंत्र। (7) निष्कर्ष: सहकारी संघवाद के ढांचे में अभिसरण को संस्थागत और वित्तीय दोनों स्तरों पर सुदृढ़ करने की आवश्यकता।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
Assam PCS (APSC) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: केंद्रीय सचिव श्री सुधांश पंत द्वारा हाल ही में असम में कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा कथन असत्य है?
- असम सरकार द्वारा संचालित ‘अबुआ आवास योजना’ की प्रगति की समीक्षा की गई।
- केंद्र सरकार द्वारा असम में कल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु राज्य सरकार के अधिकारियों के साथ बैठक आयोजित की गई।
- असम में कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में डिजिटल प्लेटफॉर्म के उपयोग को बढ़ावा देने पर बल दिया गया।
- समीक्षा बैठक में असम सरकार द्वारा राज्य में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के अंतर्गत लाभार्थियों की संख्या में कमी का उल्लेख किया गया।
उत्तर: समीक्षा बैठक में असम सरकार द्वारा राज्य में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के अंतर्गत लाभार्थियों की संख्या में कमी का उल्लेख किया गया। — असम सरकार द्वारा राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के अंतर्गत लाभार्थियों की संख्या में कमी का उल्लेख नहीं किया गया था, बल्कि कल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर ध्यान केंद्रित किया गया।
Mains: असम में कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाली प्रमुख चुनौतियों का विश्लेषण करते हुए, राज्य सरकार द्वारा इन योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाने के लिए उठाए जाने वाले कदमों का सुझाव दीजिए।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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