09 Aug आंध्र प्रदेश को तेलंगाना के पुलिचिंतला निकट लिफ्ट सिंचाई परियोजना रोकने की अपील: सीपीआई
✎ कृष्णा नदी जल विवाद भारत में अंतर-राज्यीय जल बंटवारे की चुनौतियों को उजागर करता है, जहाँ आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 के तहत स्थापित कृष्णा नदी प्रबंधन बोर्ड (KRMB) की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — भारतीय संविधान, अंतर-राज्यीय संबंध, संघवाद | GS Paper III — जल संसाधन, सिंचाई
- Prelims: कृष्णा नदी, पुलिचंतला परियोजना, राजीव गांधी लिफ्ट सिंचाई योजना, कृष्णा नदी प्रबंधन बोर्ड (KRMB), आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014, अंतर-राज्यीय जल विवाद
- Essay: भारत में अंतर-राज्यीय जल विवादों का समाधान: चुनौतियाँ और आगे की राह, संघवाद और जल संसाधन प्रबंधन: संतुलन की आवश्यकता
त्वरित पुनरावृत्ति: कृष्णा नदी जल विवाद भारत में अंतर-राज्यीय जल बंटवारे की चुनौतियों को उजागर करता है, जहाँ आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 के तहत स्थापित कृष्णा नदी प्रबंधन बोर्ड (KRMB) की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) ने आंध्र प्रदेश सरकार से तेलंगाना द्वारा कृष्णा नदी पर पुलिचंतला परियोजना के पास प्रस्तावित राजीव गांधी लिफ्ट सिंचाई योजना को रोकने का आग्रह किया है। CPI का दावा है कि यह नई परियोजना आंध्र प्रदेश में पुलिचंतला जलाशय पर निर्भर कई मौजूदा लिफ्ट सिंचाई योजनाओं और पेयजल आपूर्ति को प्रतिकूल रूप से प्रभावित कर सकती है, जिससे हजारों किसानों को कठिनाई होगी। इस परियोजना के लिए कृष्णा नदी प्रबंधन बोर्ड (KRMB) और शीर्ष परिषद (Apex Council) की मंजूरी नहीं ली गई है, जो आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 के प्रावधानों का उल्लंघन है।
पृष्ठभूमि
- कृष्णा नदी प्रायद्वीपीय भारत की प्रमुख नदियों में से एक है, जो महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश राज्यों से होकर बहती है।
- इन राज्यों के बीच कृष्णा नदी के जल बंटवारे को लेकर लंबे समय से विवाद रहा है, जिसके समाधान के लिए विभिन्न न्यायाधिकरणों और समझौतों का गठन किया गया है।
- पुलिचंतला परियोजना कृष्णा नदी पर एक महत्वपूर्ण बहुउद्देशीय परियोजना है, जिसे मुख्य रूप से आंध्र प्रदेश के निचले इलाकों में सिंचाई और पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
- आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 (Andhra Pradesh Reorganisation Act, 2014) की धारा 84 और 85 कृष्णा बेसिन में नई सिंचाई परियोजनाओं के लिए कृष्णा नदी प्रबंधन बोर्ड (KRMB) और शीर्ष परिषद की मंजूरी को अनिवार्य करती हैं।
- राजीव गांधी लिफ्ट सिंचाई योजना तेलंगाना सरकार द्वारा प्रस्तावित एक नई परियोजना है, जिसका उद्देश्य मुक्त्याला मेजर ब्रांच नहर प्रणाली के तहत लगभग 14,000 एकड़ भूमि को सिंचाई सुविधा प्रदान करना है।
कृष्णा नदी प्रबंधन बोर्ड (KRMB) और अंतर-राज्यीय जल विवाद
- कृष्णा नदी प्रबंधन बोर्ड (KRMB) का गठन आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 की धारा 85 के तहत किया गया था।
- इसका मुख्य कार्य कृष्णा नदी के जल संसाधनों के प्रबंधन, विनियमन और नियंत्रण को सुनिश्चित करना है, विशेष रूप से आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के बीच।
- बोर्ड का उद्देश्य दोनों राज्यों के बीच जल बंटवारे से संबंधित मुद्दों को सुलझाना और परियोजनाओं के उचित संचालन की निगरानी करना है।
- KRMB केंद्र सरकार के जल शक्ति मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में कार्य करता है।
- अधिनियम के अनुसार, कृष्णा बेसिन में किसी भी नई लिफ्ट सिंचाई योजना को शुरू करने से पहले KRMB और शीर्ष परिषद (Apex Council) की मंजूरी आवश्यक है।
- अंतर-राज्यीय जल विवाद (Inter-State Water Disputes) भारतीय संघवाद की एक जटिल चुनौती है, जिसे संविधान के अनुच्छेद 262 के तहत संसद द्वारा बनाए गए कानूनों के माध्यम से हल किया जाता है।
- संसद ने अंतर-राज्यीय जल विवाद अधिनियम, 1956 (Inter-State Water Disputes Act, 1956) पारित किया है, जो ऐसे विवादों के समाधान के लिए न्यायाधिकरणों के गठन का प्रावधान करता है।
- इन विवादों का समाधान न केवल कानूनी और तकनीकी पहलुओं पर निर्भर करता है, बल्कि राज्यों के बीच सहयोग और राजनीतिक इच्छाशक्ति पर भी आधारित होता है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| पुलीचिंतला परियोजना | कृष्णा नदी पर स्थित, यह डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों को सिंचाई और पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करती है। यह कृष्णा डेल्टा के 13 लाख एकड़ क्षेत्र को सिंचाई सुरक्षा प्रदान करती है। |
| राजीव गांधी लिफ्ट सिंचाई योजना | तेलंगाना सरकार द्वारा प्रस्तावित, इसका उद्देश्य नागार्जुनसागर लेफ्ट नहर प्रणाली के तहत लगभग 14,000 एकड़ क्षेत्र में सिंचाई सुविधाओं को स्थिर करना है। |
| आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 की धारा 84 और 85 | इन धाराओं के तहत कृष्णा बेसिन में किसी भी नई लिफ्ट सिंचाई योजना के लिए शीर्ष परिषद (Apex Council) और कृष्णा नदी प्रबंधन बोर्ड (KRMB) की मंजूरी आवश्यक है। |
| अंतर-राज्यीय जल विवाद | राज्यों के बीच नदी जल के बंटवारे और उपयोग को लेकर उत्पन्न होने वाले विवाद, जो अक्सर कानूनी और प्रशासनिक हस्तक्षेप की मांग करते हैं। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- प्रस्तावित परियोजना से आंध्र प्रदेश में पुलीचिंतला जलाशय पर निर्भर 21 लिफ्ट सिंचाई योजनाएँ और 51 अन्य योजनाएँ प्रभावित हो सकती हैं, जिससे लगभग 50,000 एकड़ कृषि भूमि पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की आशंका है।
- कृष्णा डेल्टा क्षेत्र में लगभग 13 लाख एकड़ कृषि भूमि की सिंचाई सुरक्षा पर संभावित खतरा उत्पन्न हो सकता है, जिससे हजारों किसानों की आजीविका प्रभावित होगी।
राजकीय और प्रशासनिक महत्व
- यह मामला अंतर-राज्यीय जल विवादों के समाधान में शीर्ष परिषद और कृष्णा नदी प्रबंधन बोर्ड (KRMB) की भूमिका को उजागर करता है।
- आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 के प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करने और राज्यों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल देता है।
पर्यावरणीय और सामाजिक महत्व
- ग्रामीण पेयजल आपूर्ति योजनाओं में व्यवधान की संभावना है, जिससे बड़ी संख्या में ग्रामीण आबादी को कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
- जल संसाधनों के न्यायसंगत वितरण और स्थायी उपयोग के महत्व को रेखांकित करता है, विशेष रूप से ऐसे क्षेत्रों में जहाँ कृषि आजीविका का मुख्य आधार है।
चुनौतियाँ
1. अंतर-राज्यीय जल विवाद
- कृष्णा नदी जल के बंटवारे और उपयोग को लेकर आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के बीच चल रहा विवाद।
- राज्यों के बीच सहमति की कमी और जल संसाधनों पर प्रतिस्पर्धी दावे।
यूपीएससी लिंक: संघवाद, अंतर-राज्यीय संबंध
2. नियामक अनुमोदन का अभाव
- तेलंगाना सरकार द्वारा प्रस्तावित राजीव गांधी लिफ्ट सिंचाई योजना के लिए शीर्ष परिषद और कृष्णा नदी प्रबंधन बोर्ड (KRMB) से आवश्यक अनुमोदन प्राप्त न होना।
- आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 के प्रावधानों का उल्लंघन।
यूपीएससी लिंक: अंतर-राज्यीय जल विवाद, संवैधानिक निकाय
3. कृषि और पेयजल आपूर्ति पर प्रभाव
- आंध्र प्रदेश में पुलीचिंतला जलाशय पर निर्भर लिफ्ट सिंचाई योजनाओं और ग्रामीण पेयजल आपूर्ति योजनाओं पर प्रतिकूल प्रभाव की आशंका।
- हजारों किसानों और ग्रामीण आबादी के लिए आजीविका और जीवन की गुणवत्ता पर नकारात्मक परिणाम।
यूपीएससी लिंक: कृषि, जल संसाधन प्रबंधन
4. संघीय ढांचे में सहयोग की कमी
- राज्यों के बीच जल संसाधनों के प्रबंधन में समन्वय और सहयोग की कमी, जिससे विवाद बढ़ रहे हैं।
- केंद्र सरकार और संबंधित बोर्डों की भूमिका को मजबूत करने की आवश्यकता।
यूपीएससी लिंक: संघवाद, केंद्र-राज्य संबंध
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| राजीव गांधी लिफ्ट सिंचाई योजना | बिना आवश्यक अनुमोदन के निर्माण, आंध्र प्रदेश में सिंचाई और पेयजल आपूर्ति को प्रभावित करने की क्षमता। |
| आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 | धारा 84 और 85 का उल्लंघन, जो कृष्णा बेसिन में नई योजनाओं के लिए शीर्ष परिषद और KRMB की मंजूरी अनिवार्य करती हैं। |
| पुलीचिंतला परियोजना पर निर्भरता | आंध्र प्रदेश में कई लिफ्ट सिंचाई योजनाएँ और पेयजल परियोजनाएँ पुलीचिंतला जलाशय पर निर्भर हैं, जो प्रस्तावित तेलंगाना परियोजना से प्रभावित हो सकती हैं। |
| अंतर-राज्यीय जल विवाद समाधान | राज्यों के बीच विवादों के समाधान में शीर्ष परिषद और KRMB की प्रभावशीलता और अधिकार क्षेत्र पर सवाल। |
आगे की राह
- केंद्र सरकार को आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के बीच जल विवाद को हल करने के लिए तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए।
- शीर्ष परिषद (Apex Council) और कृष्णा नदी प्रबंधन बोर्ड (KRMB) को आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए मामले की समीक्षा करनी चाहिए।
- तेलंगाना सरकार को राजीव गांधी लिफ्ट सिंचाई योजना के लिए आवश्यक नियामक अनुमोदन प्राप्त करने तक निर्माण कार्य को रोकना चाहिए।
- दोनों राज्यों को जल संसाधनों के न्यायसंगत और स्थायी उपयोग के लिए बातचीत और सहयोग को प्राथमिकता देनी चाहिए।
- जल विवादों के स्थायी समाधान के लिए एक पारदर्शी और वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए, जिसमें सभी हितधारकों के हितों का ध्यान रखा जाए।
- यदि आवश्यक हो, तो कानूनी कार्रवाई पर विचार किया जाना चाहिए ताकि अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन न हो और आंध्र प्रदेश के किसानों के हितों की रक्षा हो सके।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
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संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 262’, ‘note’: ‘अंतर-राज्यीय नदी जल विवादों का न्यायनिर्णयन’}
अवधारणा प्रवाह
तेलंगाना द्वारा नई लिफ्ट सिंचाई योजना का प्रस्ताव → आवश्यक नियामक अनुमोदन का अभाव → आंध्र प्रदेश में सिंचाई और पेयजल आपूर्ति पर संभावित नकारात्मक प्रभाव → सीपीआई द्वारा आंध्र प्रदेश सरकार से हस्तक्षेप का आग्रह → अंतर-राज्यीय जल विवाद का बढ़ना और समाधान की आवश्यकता
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कृष्णा नदी का उद्गम महाराष्ट्र में महाबलेश्वर के पास होता है।
2. पुलीचिंतला परियोजना कृष्णा नदी पर स्थित एक बहुउद्देशीय परियोजना है।
3. आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 की धारा 84 और 85 कृष्णा बेसिन में नई सिंचाई योजनाओं के लिए सर्वोच्च परिषद और कृष्णा नदी प्रबंधन बोर्ड की मंजूरी को अनिवार्य करती हैं।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है। कृष्णा नदी पश्चिमी घाट में महाबलेश्वर के पास से निकलती है। कथन 2 सही है। पुलीचिंतला परियोजना कृष्णा नदी पर स्थित है और इसका उद्देश्य सिंचाई तथा पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करना है। कथन 3 सही है। आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 की धारा 84 और 85 कृष्णा बेसिन में नई लिफ्ट सिंचाई योजनाओं के लिए सर्वोच्च परिषद और कृष्णा नदी प्रबंधन बोर्ड की मंजूरी को अनिवार्य करती हैं।
Q2. कृष्णा नदी जल विवाद से संबंधित निम्नलिखित निकायों को उनके कार्यों के साथ सुमेलित कीजिए:
सूची-I (निकाय)
A. कृष्णा नदी प्रबंधन बोर्ड (KRMB)
B. सर्वोच्च परिषद (Apex Council)
C. कृष्णा जल विवाद न्यायाधिकरण (KWDT)
सूची-II (कार्य)
1. अंतर-राज्यीय जल विवादों का न्यायनिर्णयन
2. कृष्णा नदी बेसिन में परियोजनाओं का विनियमन और प्रबंधन
3. आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 के तहत जल संसाधनों के प्रबंधन की निगरानी
सही युग्म का चयन कीजिए:
- A-1, B-2, C-3
- A-2, B-3, C-1
- A-3, B-1, C-2
- A-2, B-1, C-3
उत्तर: A-2, B-3, C-1 — कृष्णा नदी प्रबंधन बोर्ड (KRMB) का कार्य कृष्णा नदी बेसिन में परियोजनाओं का विनियमन और प्रबंधन करना है। सर्वोच्च परिषद (Apex Council) आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 के तहत जल संसाधनों के प्रबंधन की निगरानी करती है। कृष्णा जल विवाद न्यायाधिकरण (KWDT) अंतर-राज्यीय जल विवादों का न्यायनिर्णयन करता है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ अंतर-राज्यीय नदी जल विवादों के समाधान में आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 की भूमिका का परीक्षण कीजिए। क्या यह अधिनियम ऐसे विवादों के प्रभावी समाधान के लिए पर्याप्त है? समालोचनात्मक विश्लेषण कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: उत्तर की शुरुआत अंतर-राज्यीय नदी जल विवादों के महत्व और उनकी प्रकृति को संक्षेप में समझाते हुए करें।
**आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 की भूमिका:**
* **धारा 84 और 85:** इन धाराओं का उल्लेख करें जो कृष्णा बेसिन में नई लिफ्ट सिंचाई योजनाओं के लिए सर्वोच्च परिषद (Apex Council) और कृष्णा नदी प्रबंधन बोर्ड (KRMB) की मंजूरी को अनिवार्य करती हैं।
* **सर्वोच्च परिषद:** केंद्रीय जल शक्ति मंत्री की अध्यक्षता में परिषद की संरचना और भूमिका का वर्णन करें, जिसमें दोनों राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल होते हैं। इसका उद्देश्य जल संसाधनों के प्रबंधन और विवादों को सुलझाना है।
* **कृष्णा नदी प्रबंधन बोर्ड (KRMB):** इसके गठन, कार्यों और कृष्णा नदी के जल के विनियमन तथा वितरण में इसकी भूमिका पर प्रकाश डालें।
**अधिनियम की पर्याप्तता का समालोचनात्मक विश्लेषण:**
* **सकारात्मक पहलू:**
* विशिष्ट संस्थागत तंत्रों (सर्वोच्च परिषद, KRMB) का निर्माण, जो विवादों के समाधान के लिए एक मंच प्रदान करते हैं।
* नई परियोजनाओं के लिए पूर्व-अनुमोदन की अनिवार्यता, जिससे भविष्य के विवादों को रोका जा सके।
* केंद्रीय हस्तक्षेप के माध्यम से राज्यों के बीच समन्वय स्थापित करने का प्रयास।
* **नकारात्मक पहलू/चुनौतियाँ:**
* **अधिनियम का उल्लंघन:** हालिया घटना (तेलंगाना की राजीव गांधी लिफ्ट सिंचाई योजना) का उदाहरण दें, जहाँ CPI ने अधिनियम के प्रावधानों के उल्लंघन का आरोप लगाया है।
* **राज्यों के बीच अविश्वास:** अधिनियम के बावजूद राज्यों के बीच अविश्वास और सहयोग की कमी।
* **KRMB की सीमित शक्तियाँ:** KRMB के पास प्रवर्तन और निर्णय लेने की शक्तियों की कमी, जिससे उसके निर्णयों को लागू करने में कठिनाई होती है।
* **राजनीतिकरण:** जल विवादों का राजनीतिकरण, जिससे तकनीकी समाधानों के बजाय राजनीतिक दबाव हावी होता है।
* **न्यायिक हस्तक्षेप की आवश्यकता:** अधिनियम के प्रावधानों के बावजूद, अक्सर मामलों को अदालतों में ले जाना पड़ता है, जो समाधान प्रक्रिया को लंबा खींचता है।
* **जलवायु परिवर्तन और जल उपलब्धता में परिवर्तन:** अधिनियम में इन नए कारकों को पर्याप्त रूप से संबोधित नहीं किया गया है।
**निष्कर्ष:** अधिनियम ने एक ढाँचा प्रदान किया है, लेकिन प्रभावी कार्यान्वयन और राज्यों के बीच सहयोग की कमी के कारण इसकी पर्याप्तता पर सवाल उठते हैं। समाधान के लिए मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति, KRMB को अधिक शक्तियाँ और वैज्ञानिक दृष्टिकोण की आवश्यकता है।
स्रोत: The Hindu
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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