आंध्र प्रदेश सरकार से अपील: तेलंगाना का पुलिचिंतला के पास लिफ्ट सिंचाई परियोजना रोकें, सीपीआई ने किया आग्रह

CPI urges Andhra Pradesh government to stop Telangana from taking up lift irrigation project near Pulichintala — concept mind map

आंध्र प्रदेश सरकार से अपील: तेलंगाना का पुलिचिंतला के पास लिफ्ट सिंचाई परियोजना रोकें, सीपीआई ने किया आग्रह

Map of Andhra Pradesh, Telangana highlighted on the map of India — Krishna River lift irrigation dispute Andhra Pradesh…
मानचित्र व माइंड-मैप: Telangana-Andhra Pradesh irrigation dispute near Pulichintala

✎ अंतर-राज्यीय नदी जल विवादों का समाधान भारतीय संघवाद के लिए महत्वपूर्ण है, और कृष्णा नदी प्रबंधन बोर्ड (KRMB) तथा सर्वोच्च परिषद (Apex Council) जैसी संस्थाएँ कृष्णा नदी बेसिन में जल बंटवारे के मुद्दों को संबोधित करने में…

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — भारतीय संविधान: संघवाद, केंद्र-राज्य संबंध, अंतर-राज्यीय जल विवाद  |  GS Paper III — सिंचाई परियोजनाएँ, जल संसाधन
  • Prelims: कृष्णा नदी, पुलिचिंतला परियोजना, राजीव गांधी लिफ्ट सिंचाई योजना, कृष्णा नदी प्रबंधन बोर्ड (KRMB), आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014, अंतर-राज्यीय जल विवाद अधिनियम, 1956, सर्वोच्च परिषद
  • Essay: भारत में अंतर-राज्यीय जल विवाद: संघवाद के समक्ष चुनौतियाँ और समाधान, जल सुरक्षा और सतत विकास: अंतर-राज्यीय सहयोग का महत्व

त्वरित पुनरावृत्ति: अंतर-राज्यीय नदी जल विवादों का समाधान भारतीय संघवाद के लिए महत्वपूर्ण है, और कृष्णा नदी प्रबंधन बोर्ड (KRMB) तथा सर्वोच्च परिषद (Apex Council) जैसी संस्थाएँ कृष्णा नदी बेसिन में जल बंटवारे के मुद्दों को संबोधित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

यह खबर चर्चा में क्यों?

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) ने आंध्र प्रदेश सरकार से तेलंगाना सरकार द्वारा कृष्णा नदी पर पुलिचिंतला परियोजना के पास प्रस्तावित राजीव गांधी लिफ्ट सिंचाई योजना को रोकने का आग्रह किया है। CPI का तर्क है कि यह नई परियोजना आंध्र प्रदेश में पुलिचिंतला जलाशय पर निर्भर कई मौजूदा लिफ्ट सिंचाई योजनाओं और पेयजल आपूर्ति को प्रतिकूल रूप से प्रभावित कर सकती है, साथ ही आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 के प्रावधानों का उल्लंघन भी करती है।

पृष्ठभूमि

  • पुलिचिंतला परियोजना कृष्णा नदी पर स्थित एक महत्वपूर्ण परियोजना है, जिसे आंध्र प्रदेश के गुंटूर, पालनाडु, प्रकाशम, बापटला, कृष्णा, NTR और एलुरु जिलों में लगभग 1.3 मिलियन एकड़ कृष्णा डेल्टा अयाकट (कमान क्षेत्र) को सिंचाई सुरक्षा प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
  • तेलंगाना सरकार द्वारा प्रस्तावित राजीव गांधी लिफ्ट सिंचाई योजना का उद्देश्य सूर्यापेट जिले के चिंतालापलेम मंडल में लगभग 14,000 एकड़ क्षेत्र में सिंचाई सुविधाओं को स्थिर करना है।
  • CPI के अनुसार, यह नई योजना प्रतिदिन 2,500 क्यूसेक पानी उठाने की क्षमता रखती है और इसके निर्माण के लिए कृष्णा नदी प्रबंधन बोर्ड (KRMB) और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री की अध्यक्षता वाली सर्वोच्च परिषद (Apex Council) की अनुमति नहीं ली गई है।
  • आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 (Andhra Pradesh Reorganisation Act, 2014) की धारा 84 और 85 के तहत कृष्णा बेसिन में किसी भी नई लिफ्ट सिंचाई योजना को शुरू करने से पहले KRMB और सर्वोच्च परिषद की मंजूरी अनिवार्य है।
  • आंध्र प्रदेश का दावा है कि यह परियोजना उसके 21 लिफ्ट सिंचाई योजनाओं और 51 अन्य योजनाओं को प्रभावित करेगी, जिससे हजारों किसानों को कठिनाई होगी और लगभग 50,000 एकड़ कृषि भूमि पर असर पड़ेगा।
  • अंतर-राज्यीय जल विवाद भारत में एक जटिल मुद्दा रहा है, जिसमें विभिन्न राज्यों के बीच नदी जल के बंटवारे को लेकर अक्सर विवाद उत्पन्न होते रहते हैं।

अंतर-राज्यीय नदी जल विवाद और कृष्णा नदी प्रबंधन बोर्ड (KRMB)

  • भारतीय संविधान का अनुच्छेद 262 (Article 262) संसद को अंतर-राज्यीय नदी जल विवादों के न्यायनिर्णयन के लिए कानून बनाने का अधिकार देता है।
  • इसी अनुच्छेद के तहत, संसद ने नदी बोर्ड अधिनियम, 1956 (River Boards Act, 1956) और अंतर-राज्यीय जल विवाद अधिनियम, 1956 (Inter-State River Water Disputes Act, 1956) अधिनियमित किए।
  • अंतर-राज्यीय जल विवाद अधिनियम, 1956 केंद्र सरकार को राज्यों के बीच नदी जल विवादों को सुलझाने के लिए एक न्यायाधिकरण (Tribunal) स्थापित करने का अधिकार देता है।
  • कृष्णा नदी जल विवाद भारत के सबसे पुराने और सबसे जटिल नदी जल विवादों में से एक है, जिसमें महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना जैसे राज्य शामिल हैं।
  • कृष्णा नदी प्रबंधन बोर्ड (KRMB) का गठन आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 के तहत किया गया था, जिसका मुख्य उद्देश्य कृष्णा नदी के जल संसाधनों के प्रबंधन, विनियमन और नियंत्रण को सुनिश्चित करना है।
  • KRMB का कार्य कृष्णा नदी में परियोजनाओं के संचालन, जल वितरण और परियोजनाओं की निगरानी करना है, ताकि संबंधित राज्यों के बीच जल बंटवारे के समझौतों का पालन हो सके।
  • सर्वोच्च परिषद (Apex Council) भी आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 के तहत स्थापित की गई थी, जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय जल शक्ति मंत्री करते हैं और इसमें आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के मुख्यमंत्री सदस्य होते हैं। इसका कार्य KRMB के निर्णयों की समीक्षा करना और अंतर-राज्यीय जल विवादों को सुलझाना है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
पुलीचिंतला परियोजना कृष्णा नदी पर स्थित यह परियोजना डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों को सिंचाई और पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करती है। यह कृष्णा डेल्टा के लगभग 13 लाख एकड़ क्षेत्र को सिंचाई सुरक्षा प्रदान करती है।
राजीव गांधी लिफ्ट सिंचाई योजना तेलंगाना सरकार द्वारा प्रस्तावित यह योजना प्रतिदिन 2,500 क्यूसेक पानी उठाने की क्षमता रखती है। इसका उद्देश्य नागार्जुनसागर लेफ्ट नहर प्रणाली के तहत लगभग 14,000 एकड़ क्षेत्र में सिंचाई सुविधाओं को स्थिर करना है।
आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 की धारा 84 और 85 ये धाराएँ कृष्णा बेसिन में किसी भी नई लिफ्ट सिंचाई योजना को शुरू करने से पहले शीर्ष परिषद (Apex Council) और कृष्णा नदी प्रबंधन बोर्ड (Krishna River Management Board – KRMB) की मंजूरी को अनिवार्य बनाती हैं।
अंतर-राज्यीय जल विवाद यह मामला दो राज्यों, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के बीच नदी जल के बँटवारे और उपयोग से संबंधित है, जो भारत में संघीय ढाँचे के भीतर एक सामान्य चुनौती है।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • प्रस्तावित योजना से आंध्र प्रदेश के पाल्नाडु, एनटीआर जिलों में लगभग 50,000 एकड़ कृषि भूमि और हजारों किसानों के प्रभावित होने की आशंका है, जिससे कृषि उत्पादन और ग्रामीण आजीविका पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
  • सिंचाई सुविधाओं में व्यवधान से फसल की पैदावार कम हो सकती है, जिससे किसानों की आय प्रभावित होगी और खाद्य सुरक्षा पर भी असर पड़ सकता है।

सामाजिक महत्व

  • पेयजल आपूर्ति योजनाओं में संभावित व्यवधान से हजारों ग्रामीण निवासियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है, जिससे उनके स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता प्रभावित होगी।
  • जल विवादों से स्थानीय समुदायों के बीच तनाव बढ़ सकता है, जिससे सामाजिक सद्भाव पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

शासन और संघीय ढाँचा

  • यह मुद्दा अंतर-राज्यीय नदी जल विवादों के प्रबंधन में केंद्र सरकार और संबंधित नदी प्रबंधन बोर्डों की भूमिका को रेखांकित करता है।
  • आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 के प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करना संघीय सिद्धांतों और कानून के शासन को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है।

पर्यावरण महत्व

  • नदी के पानी के अत्यधिक उपयोग या डायवर्जन से नदी के पारिस्थितिकी तंत्र, जलीय जीवन और डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

चुनौतियाँ

1. अंतर-राज्यीय जल विवाद

  • राज्यों के बीच नदी जल के बँटवारे और उपयोग को लेकर अक्सर विवाद उत्पन्न होते हैं, जिससे विकास परियोजनाओं में देरी होती है और संघीय संबंधों में तनाव आता है।
  • विभिन्न राज्यों की बढ़ती जल आवश्यकताएँ और सीमित जल संसाधन इन विवादों को और जटिल बनाते हैं।

2. नियामक अनुमोदन और अनुपालन

  • नदी बेसिन में नई परियोजनाओं के लिए शीर्ष परिषद और KRMB जैसे नियामक निकायों से अनुमोदन प्राप्त करने में देरी या उनका उल्लंघन कानूनी और प्रशासनिक चुनौतियाँ पैदा करता है।
  • अधिनियमों और नियमों का उचित अनुपालन सुनिश्चित करना जल संसाधनों के न्यायसंगत और टिकाऊ प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण है।

3. पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभाव आकलन

  • बड़ी सिंचाई परियोजनाओं के पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभावों का पर्याप्त आकलन न होने से पारिस्थितिक असंतुलन और स्थानीय समुदायों के विस्थापन जैसी समस्याएँ हो सकती हैं।
  • परियोजनाओं के दीर्घकालिक प्रभावों पर विचार किए बिना त्वरित कार्यान्वयन से भविष्य में गंभीर समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं।

4. जल संसाधनों का कुशल प्रबंधन

  • बढ़ती जनसंख्या और कृषि आवश्यकताओं के कारण जल संसाधनों पर दबाव बढ़ रहा है, जिससे कुशल जल प्रबंधन और संरक्षण तकनीकों को अपनाना आवश्यक हो जाता है।
  • पुरानी सिंचाई प्रणालियों और जल-गहन कृषि पद्धतियों के कारण जल की बर्बादी एक बड़ी चुनौती है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
राजीव गांधी लिफ्ट सिंचाई योजना का निर्माण तेलंगाना सरकार द्वारा बिना अपेक्षित अनुमोदन के परियोजना का निर्माण, आंध्र प्रदेश के हितों को प्रभावित कर सकता है।
पुलीचिंतला जलाशय पर निर्भरता आंध्र प्रदेश की 70 से अधिक लिफ्ट सिंचाई योजनाएँ और पेयजल योजनाएँ पुलीचिंतला जलाशय पर निर्भर हैं, जो प्रस्तावित योजना से प्रभावित हो सकती हैं।
कृष्णा नदी प्रबंधन बोर्ड की भूमिका KRMB की मंजूरी के बिना परियोजना का निर्माण आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 का उल्लंघन है।
कृषि और पेयजल आपूर्ति पर प्रभाव आंध्र प्रदेश में लगभग 50,000 एकड़ कृषि भूमि और हजारों किसानों के लिए पेयजल आपूर्ति बाधित होने की आशंका।

आगे की राह

  • केंद्र सरकार को आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 के तहत गठित शीर्ष परिषद (Apex Council) और कृष्णा नदी प्रबंधन बोर्ड (KRMB) को तत्काल हस्तक्षेप करने का निर्देश देना चाहिए।
  • तेलंगाना सरकार को परियोजना के लिए आवश्यक सभी नियामक अनुमोदनों को प्राप्त करने तक निर्माण कार्य रोकने का निर्देश दिया जाना चाहिए।
  • दोनों राज्यों के बीच जल बँटवारे से संबंधित मुद्दों को सुलझाने के लिए एक पारदर्शी और निष्पक्ष वार्ता प्रक्रिया स्थापित की जानी चाहिए।
  • KRMB को कृष्णा बेसिन में सभी नई सिंचाई परियोजनाओं की निगरानी और अनुमोदन प्रक्रिया को सख्ती से लागू करना चाहिए।
  • अंतर-राज्यीय नदी जल विवादों के समाधान के लिए एक स्थायी तंत्र विकसित किया जाना चाहिए, जिसमें तकनीकी विशेषज्ञता और कानूनी स्पष्टता शामिल हो।
  • जल संसाधनों के कुशल उपयोग और संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए दोनों राज्यों को मिलकर काम करना चाहिए, जिसमें जल-बचत सिंचाई तकनीकों को अपनाना शामिल है।
  • परियोजनाओं के पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभाव आकलन (Environmental and Social Impact Assessment) को अनिवार्य किया जाना चाहिए और हितधारकों की भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

अंतर-राज्यीय जल विवाद · कृष्णा नदी जल विवाद · आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 · राज्यों के बीच जल बँटवारा · नदी घाटी परियोजनाएँ · कृष्णा नदी प्रबंधन बोर्ड (KRMB) · एपेक्स काउंसिल · सहकारी संघवाद · संघीय ढाँचा · सिंचाई परियोजनाएँ · जल सुरक्षा · पर्यावरण प्रभाव आकलन

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 262’, ‘note’: ‘अंतर-राज्यीय नदी जल विवादों का न्यायनिर्णयन’}
  • {‘article’: ‘सातवीं अनुसूची (सूची II, प्रविष्टि 17)’, ‘note’: ‘राज्यों के भीतर जल का प्रबंधन’}

अवधारणा प्रवाह

तेलंगाना द्वारा राजीव गांधी लिफ्ट सिंचाई योजना का प्रस्ताव  →  बिना अनुमोदन के निर्माण से आंध्र प्रदेश को चिंता  →  आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 का संभावित उल्लंघन  →  कृष्णा नदी प्रबंधन बोर्ड की भूमिका का आह्वान  →  कृषि और पेयजल आपूर्ति पर संभावित नकारात्मक प्रभाव  →  अंतर-राज्यीय जल विवाद का बढ़ना  →  केंद्र सरकार और नियामक निकायों से हस्तक्षेप की मांग

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कृष्णा नदी प्रबंधन बोर्ड (KRMB) का गठन आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 के तहत किया गया था।
2. एपेक्स काउंसिल की अध्यक्षता केंद्रीय जल शक्ति मंत्री करते हैं।
3. पुलिचंतला परियोजना कृष्णा नदी पर स्थित है और इसका उद्देश्य केवल आंध्र प्रदेश के डेल्टा क्षेत्रों को सिंचाई प्रदान करना है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है क्योंकि KRMB का गठन आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 के तहत कृष्णा नदी के जल के प्रबंधन के लिए किया गया था। कथन 2 भी सही है, एपेक्स काउंसिल की अध्यक्षता केंद्रीय जल शक्ति मंत्री करते हैं। कथन 3 गलत है क्योंकि पुलिचंतला परियोजना का उद्देश्य सिंचाई के साथ-साथ पेयजल आपूर्ति भी सुनिश्चित करना है, और यह केवल आंध्र प्रदेश के डेल्टा क्षेत्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि निचले क्षेत्रों को भी लाभ पहुँचाती है।

Q2. आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 की धारा 84 और 85 किससे संबंधित हैं?

  1. राज्यों के बीच संपत्ति के बँटवारे से
  2. कृष्णा बेसिन में नई सिंचाई परियोजनाओं के लिए अनुमोदन से
  3. दोनों राज्यों के लिए उच्च न्यायालय के क्षेत्राधिकार से
  4. तेलंगाना को विशेष राज्य का दर्जा देने से

उत्तर: कृष्णा बेसिन में नई सिंचाई परियोजनाओं के लिए अनुमोदन से — आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 की धारा 84 और 85 कृष्णा बेसिन में किसी भी नई लिफ्ट सिंचाई योजना को शुरू करने से पहले एपेक्स काउंसिल और कृष्णा नदी प्रबंधन बोर्ड (KRMB) के अनुमोदन की आवश्यकता से संबंधित हैं।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ अंतर-राज्यीय नदी जल विवादों के समाधान में कृष्णा नदी प्रबंधन बोर्ड (KRMB) और एपेक्स काउंसिल की भूमिका का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। क्या ये संस्थाएँ आंध्र प्रदेश और तेलंगाना जैसे राज्यों के बीच जल-साझाकरण के मुद्दों को प्रभावी ढंग से संबोधित करने में सफल रही हैं? (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** अंतर-राज्यीय नदी जल विवादों के संदर्भ में KRMB और एपेक्स काउंसिल के महत्व को रेखांकित करें, विशेष रूप से आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 के बाद कृष्णा नदी बेसिन में उनकी स्थापना का उल्लेख करें।
2. **KRMB की भूमिका:**
* **गठन और उद्देश्य:** आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 की धारा 85 के तहत इसका गठन, कृष्णा नदी के जल का प्रबंधन, परियोजनाओं का संचालन और रखरखाव।
* **कार्य:** जल वितरण, परियोजनाओं की निगरानी, जल उपलब्धता का आकलन, विवादों का समाधान।
3. **एपेक्स काउंसिल की भूमिका:**
* **गठन और उद्देश्य:** अधिनियम की धारा 84 के तहत स्थापित, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री की अध्यक्षता में।
* **कार्य:** KRMB के निर्णयों की समीक्षा, अंतर-राज्यीय विवादों का समाधान, नई परियोजनाओं को अनुमोदन प्रदान करना।
4. **प्रभावशीलता का आलोचनात्मक परीक्षण:**
* **सफलताएँ:** कुछ हद तक जल वितरण में समन्वय स्थापित करना, तकनीकी विशेषज्ञता प्रदान करना।
* **चुनौतियाँ/कमियाँ:**
* **राज्यों का असहयोग:** राज्यों द्वारा निर्णयों को स्वीकार करने में अनिच्छा, राजनीतिक हस्तक्षेप।
* **सीमित शक्तियाँ:** प्रवर्तन शक्तियों का अभाव, केवल सिफारिशें करने की क्षमता।
* **कानूनी चुनौतियाँ:** परियोजनाओं के अनुमोदन में देरी या उल्लंघन, जैसा कि हालिया राजीव गांधी लिफ्ट सिंचाई योजना के मामले में देखा गया।
* **पुराने जल बँटवारे के मुद्दे:** पूर्ववर्ती न्यायाधिकरणों (जैसे ब्रजेश कुमार न्यायाधिकरण) के निर्णयों का प्रभावी कार्यान्वयन।
* **जल उपलब्धता में कमी:** जलवायु परिवर्तन और बढ़ती माँग के कारण जल संसाधनों पर दबाव।
5. **सुझाव:** विवाद समाधान तंत्र को मजबूत करना, राज्यों के बीच विश्वास बहाली, KRMB को अधिक अधिकार देना, तकनीकी डेटा साझाकरण में पारदर्शिता।
6. **निष्कर्ष:** सहकारी संघवाद के सिद्धांतों को बनाए रखते हुए इन संस्थाओं को अधिक प्रभावी बनाने की आवश्यकता पर बल दें ताकि जल विवादों का स्थायी समाधान सुनिश्चित किया जा सके।

स्रोत: The Hindu


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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