ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य के पास ‘प्रतिबंधित क्षेत्र’ की घोषणा, जानिए पूरा मामला

Iran to announce ‘restricted zone’ near Hormuz Strait in coming days: Mohsen Rezaei — labelled illustration

ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य के पास ‘प्रतिबंधित क्षेत्र’ की घोषणा, जानिए पूरा मामला

✎ होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी को जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, जो वैश्विक तेल व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है और अक्सर भू-राजनीतिक तनावों का केंद्र रहता है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — अंतर्राष्ट्रीय संबंध  |  GS Paper III — अर्थव्यवस्था
  • Prelims: होर्मुज जलडमरूमध्य, फारस की खाड़ी, ओमान की खाड़ी, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मार्ग, समुद्री सुरक्षा, ईरान-अमेरिका संबंध, तेल परिवहन, सामरिक चोकपॉइंट
  • Essay: अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मार्गों का भू-राजनीति पर प्रभाव, मध्य पूर्व में स्थिरता और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा

त्वरित पुनरावृत्ति: होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी को जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, जो वैश्विक तेल व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है और अक्सर भू-राजनीतिक तनावों का केंद्र रहता है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

ईरान ने हाल ही में होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के पास एक ‘प्रतिबंधित क्षेत्र’ (restricted zone) घोषित करने की अपनी योजना की घोषणा की है। ईरान के सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसिन रेजाई ने कहा कि इस क्षेत्र में प्रवेश करने वाले किसी भी जहाज को ईरान की प्रतिबंध सूची में डाल दिया जाएगा। इस कदम को अमेरिका पर दबाव बढ़ाने की ईरान की व्यापक रणनीति के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है।

पृष्ठभूमि

  • होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी (Persian Gulf) और ओमान की खाड़ी (Gulf of Oman) के बीच स्थित एक संकरा समुद्री मार्ग है।
  • यह विश्व के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन चोकपॉइंट्स (Chokepoints) में से एक है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है।
  • ईरान और अमेरिका के बीच तनाव का इतिहास रहा है, जिसमें परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय प्रभाव जैसे मुद्दे शामिल हैं।
  • फरवरी 2026 में अमेरिका-इज़रायल के ईरान पर हमलों के बाद, तेहरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से मार्ग को प्रतिबंधित कर दिया था, जबकि अमेरिकी सेना ने ईरानी बंदरगाहों से आने-जाने वाले जहाजों को लक्षित करते हुए नौसैनिक नाकाबंदी (naval blockade) लगा दी थी।
  • ईरान का दावा है कि उसने हाल ही में एक अमेरिकी विमानवाहक पोत के ऊपर एक स्वदेशी एंटी-डिस्ट्रॉयर मिसाइल का परीक्षण किया है, जिसे उसने अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी की भेद्यता (vulnerability) के प्रति चेतावनी बताया है।

होर्मुज जलडमरूमध्य क्या है?

  • होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है।
  • यह लगभग 39 किलोमीटर चौड़ा है, लेकिन नौगम्य (navigable) चैनल केवल लगभग 10 किलोमीटर चौड़े हैं, जो इसे एक महत्वपूर्ण चोकपॉइंट बनाते हैं।
  • यह जलडमरूमध्य ईरान के दक्षिण-पश्चिमी तट और ओमान के मुसंडम प्रायद्वीप (Musandam Peninsula) के बीच स्थित है।
  • विश्व के कच्चे तेल (crude oil) और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (liquefied natural gas – LNG) के एक बड़े हिस्से का परिवहन इसी मार्ग से होता है, जिससे यह वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
  • सऊदी अरब, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत और इराक जैसे प्रमुख तेल उत्पादक देशों के लिए यह समुद्री मार्ग अंतर्राष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचने का प्राथमिक साधन है।
  • इसकी सामरिक स्थिति के कारण, यह क्षेत्र अक्सर भू-राजनीतिक तनावों का केंद्र रहा है, विशेषकर ईरान और पश्चिमी देशों के बीच।
  • जलडमरूमध्य में किसी भी प्रकार की बाधा या अस्थिरता का वैश्विक तेल कीमतों और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
प्रतिबंधित क्षेत्र की घोषणा यह होर्मुज जलडमरूमध्य के पास ईरान की संप्रभुता और नियंत्रण को मजबूत करने का प्रयास है।
अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी से होर्मुज जलडमरूमध्य तक विस्तार यह क्षेत्र अमेरिकी उपस्थिति के जवाब में ईरान की रणनीतिक प्रतिक्रिया को दर्शाता है।
ईरान के साथ समन्वय के बिना जहाजों पर प्रतिबंध यह कदम वैश्विक शिपिंग और बीमा उद्योग के लिए महत्वपूर्ण निहितार्थ रखता है, जिससे व्यापार मार्गों पर अनिश्चितता बढ़ती है।
घरेलू स्तर पर विकसित एंटी-डिस्ट्रॉयर मिसाइल का परीक्षण यह ईरान की सैन्य क्षमताओं और अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी की भेद्यता को उजागर करने का एक प्रदर्शन है।
ईरान और ओमान द्वारा नया अंतर्राष्ट्रीय गलियारा यह एक वैकल्पिक शिपिंग मार्ग स्थापित करने का प्रयास है, जिसका प्रबंधन ईरान द्वारा किया जाएगा, जिससे क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा पर प्रभाव पड़ेगा।

महत्व

भू-राजनीतिक महत्व

  • होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए एक महत्वपूर्ण चोकपॉइंट (Chokepoint) है, और इस क्षेत्र में किसी भी प्रतिबंध का अंतर्राष्ट्रीय तेल व्यापार पर गहरा प्रभाव पड़ सकता है।
  • ईरान का यह कदम वाशिंगटन पर दबाव बढ़ाने और क्षेत्र में अपनी रणनीतिक स्थिति को मजबूत करने के व्यापक प्रयास का हिस्सा है।
  • यह घोषणा ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव को दर्शाती है, जिससे क्षेत्रीय अस्थिरता का जोखिम बढ़ गया है।

आर्थिक निहितार्थ

  • प्रतिबंधित क्षेत्र और प्रतिबंधों की धमकी से इस महत्वपूर्ण जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों के लिए बीमा लागत बढ़ सकती है।
  • यह वैश्विक तेल की कीमतों में अस्थिरता पैदा कर सकता है, क्योंकि व्यापारी आपूर्ति में संभावित व्यवधानों पर प्रतिक्रिया देंगे।
  • भारत सहित तेल आयात पर निर्भर देशों के लिए ऊर्जा सुरक्षा संबंधी चिंताएँ बढ़ सकती हैं।

अंतर्राष्ट्रीय कानून और समुद्री सुरक्षा

  • अंतर्राष्ट्रीय समुद्री कानून, विशेष रूप से समुद्र के कानून पर संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन (UNCLOS), जलडमरूमध्य के माध्यम से निर्बाध मार्ग की गारंटी देता है। ईरान का कदम इन प्रावधानों के साथ संघर्ष कर सकता है।
  • यह घोषणा अंतर्राष्ट्रीय शिपिंग समुदाय के लिए एक मिसाल कायम कर सकती है, जिससे अन्य रणनीतिक जलमार्गों में इसी तरह के प्रतिबंधों की संभावना बढ़ सकती है।
  • यह कदम समुद्री सुरक्षा और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के लिए एक गंभीर चुनौती प्रस्तुत करता है, जिससे वैश्विक व्यापार मार्गों की सुरक्षा पर चिंताएँ बढ़ जाती हैं।

चुनौतियाँ

1. अंतर्राष्ट्रीय समुद्री कानून का उल्लंघन

  • होर्मुज जलडमरूमध्य अंतर्राष्ट्रीय शिपिंग के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग है, और ईरान द्वारा लगाए गए प्रतिबंध समुद्र के कानून पर संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन (UNCLOS) के तहत ‘निर्दोष मार्ग’ (Innocent Passage) के अधिकार का उल्लंघन कर सकते हैं।
  • यह अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के लिए एक कानूनी और राजनयिक चुनौती पेश करता है, क्योंकि यह अंतर्राष्ट्रीय जलमार्गों की स्वतंत्रता को प्रभावित करता है।

2. वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर प्रभाव

  • होर्मुज जलडमरूमध्य से वैश्विक तेल का लगभग पाँचवाँ हिस्सा गुजरता है। इस क्षेत्र में किसी भी व्यवधान से तेल की कीमतों में वृद्धि और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में कमी आ सकती है।
  • यह भारत जैसे प्रमुख तेल आयातक देशों के लिए ऊर्जा सुरक्षा संबंधी चिंताएँ बढ़ाता है, जो अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए इस क्षेत्र पर बहुत अधिक निर्भर करते हैं।

3. क्षेत्रीय अस्थिरता और सैन्य टकराव का जोखिम

  • ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच तनाव बढ़ने से क्षेत्र में सैन्य टकराव का जोखिम बढ़ जाता है, जिससे व्यापक क्षेत्रीय अस्थिरता हो सकती है।
  • ईरान द्वारा मिसाइल परीक्षण और अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी की भेद्यता पर जोर देने से स्थिति और बिगड़ सकती है।

4. अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और बीमा पर प्रभाव

  • प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश करने वाले जहाजों पर प्रतिबंध और बीमा कवरेज को प्रभावित करने की धमकी से शिपिंग लागत बढ़ सकती है और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में व्यवधान आ सकता है।
  • यह वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को प्रभावित कर सकता है और व्यापारिक गतिविधियों के लिए अनिश्चितता पैदा कर सकता है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
समुद्री मार्ग की स्वतंत्रता अंतर्राष्ट्रीय जलमार्गों के माध्यम से निर्बाध मार्ग के सिद्धांत का उल्लंघन।
वैश्विक तेल आपूर्ति होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले तेल के प्रवाह में संभावित व्यवधान।
क्षेत्रीय सुरक्षा ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव से सैन्य टकराव का जोखिम।
अंतर्राष्ट्रीय व्यापार शिपिंग लागत में वृद्धि और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधान की संभावना।
पर्यावरणीय जोखिम किसी भी सैन्य टकराव या दुर्घटना से समुद्री पर्यावरण को संभावित नुकसान।

आगे की राह

  • अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री मार्ग की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए राजनयिक समाधान खोजने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
  • संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतर्राष्ट्रीय संगठनों को ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच मध्यस्थता करने और तनाव कम करने में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
  • सभी संबंधित पक्षों को अंतर्राष्ट्रीय समुद्री कानून, विशेष रूप से UNCLOS के सिद्धांतों का सम्मान करना चाहिए।
  • भारत जैसे देशों को अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों और आपूर्ति मार्गों की खोज करनी चाहिए।
  • क्षेत्रीय सुरक्षा संवादों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए ताकि विश्वास निर्माण के उपाय किए जा सकें और गलतफहमी को कम किया जा सके।
  • वैश्विक व्यापार और शिपिंग उद्योग को संभावित व्यवधानों के लिए आकस्मिक योजनाएँ विकसित करनी चाहिए।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

होर्मुज जलडमरूमध्य · अंतर्राष्ट्रीय समुद्री कानून · समुद्री सुरक्षा · ईरान-अमेरिका संबंध · भू-राजनीतिक तनाव · ऊर्जा सुरक्षा · व्यापार मार्ग · संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि (UNCLOS) · प्रतिबंध · क्षेत्रीय स्थिरता

अवधारणा प्रवाह

ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य के पास ‘प्रतिबंधित क्षेत्र’ की घोषणा।  →  ईरान के साथ समन्वय के बिना जहाजों पर प्रतिबंध और प्रतिबंधों की धमकी।  →  वैश्विक शिपिंग और बीमा उद्योग पर प्रभाव।  →  अंतर्राष्ट्रीय तेल व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा पर संभावित प्रभाव।  →  ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव।  →  क्षेत्रीय अस्थिरता और सैन्य टकराव का जोखिम।

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी (Persian Gulf) को ओमान की खाड़ी (Gulf of Oman) और अरब सागर (Arabian Sea) से जोड़ता है।
2. यह विश्व के सबसे महत्वपूर्ण तेल पारगमन बिंदुओं में से एक है।
3. संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि (UNCLOS) के तहत, होर्मुज जलडमरूमध्य एक ‘अंतर्राष्ट्रीय जलडमरूमध्य’ है, जो सभी जहाजों के लिए निर्बाध पारगमन मार्ग का अधिकार सुनिश्चित करता है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है। होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है, जो एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। कथन 2 सही है। यह वैश्विक तेल व्यापार के लिए एक महत्वपूर्ण चोकपॉइंट है, जिससे बड़ी मात्रा में तेल और गैस का परिवहन होता है। कथन 3 सही है। UNCLOS के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य एक अंतर्राष्ट्रीय जलडमरूमध्य है जहां सभी जहाजों को ‘पारगमन मार्ग’ का अधिकार प्राप्त है, जिसका अर्थ है कि वे बिना किसी बाधा के गुजर सकते हैं, भले ही यह किसी तटीय राज्य के क्षेत्रीय जल से होकर गुजरता हो।

Q2. अभिकथन (A): ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य के पास ‘प्रतिबंधित क्षेत्र’ की घोषणा अंतर्राष्ट्रीय समुद्री कानून का उल्लंघन कर सकती है।
कारण (R): संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि (UNCLOS) के तहत, अंतर्राष्ट्रीय जलडमरूमध्य में सभी जहाजों को निर्बाध पारगमन मार्ग का अधिकार प्राप्त है।
उपरोक्त कथनों के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा सही है?

  1. A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
  2. A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
  3. A सही है, लेकिन R गलत है।
  4. A गलत है, लेकिन R सही है।

उत्तर: A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि ईरान द्वारा किसी ‘प्रतिबंधित क्षेत्र’ की एकतरफा घोषणा अंतर्राष्ट्रीय समुद्री कानून, विशेष रूप से UNCLOS के प्रावधानों का उल्लंघन कर सकती है, जो अंतर्राष्ट्रीय जलडमरूमध्य में निर्बाध पारगमन मार्ग के अधिकार को सुनिश्चित करता है। कारण (R) भी सही है और A की सही व्याख्या करता है। UNCLOS के अनुच्छेद 38 के तहत, अंतर्राष्ट्रीय जलडमरूमध्य से गुजरने वाले सभी जहाजों को ‘पारगमन मार्ग’ का अधिकार है, जिसका अर्थ है कि उन्हें बिना किसी बाधा के गुजरने की अनुमति है। ईरान का कदम इस सिद्धांत का उल्लंघन करेगा।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ होर्मुज जलडमरूमध्य के सामरिक महत्व का विश्लेषण कीजिए और ईरान द्वारा इस क्षेत्र में ‘प्रतिबंधित क्षेत्र’ की घोषणा के संभावित भू-राजनीतिक और आर्थिक प्रभावों पर चर्चा कीजिए। (15 अंक)

रूपरेखा: एक आदर्श उत्तर में निम्नलिखित बिंदु शामिल होने चाहिए:
1. **परिचय:** होर्मुज जलडमरूमध्य का संक्षिप्त परिचय, इसकी भौगोलिक स्थिति और वैश्विक व्यापार में इसकी भूमिका।
2. **सामरिक महत्व:**
* **ऊर्जा सुरक्षा:** वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण चोकपॉइंट (Chokepoint), विशेष रूप से मध्य पूर्व से निर्यात के लिए।
* **वैश्विक व्यापार:** अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मार्गों के लिए एक महत्वपूर्ण कड़ी, एशिया, यूरोप और अफ्रीका को जोड़ना।
* **भू-राजनीतिक संवेदनशीलता:** ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और अमेरिका जैसे प्रमुख खिलाड़ियों की उपस्थिति के कारण उच्च सैन्य और राजनीतिक तनाव का क्षेत्र।
* **सैन्य महत्व:** नौसैनिक संचालन और क्षेत्रीय शक्ति संतुलन के लिए महत्वपूर्ण।
3. **ईरान की घोषणा के संभावित प्रभाव:**
* **अंतर्राष्ट्रीय समुद्री कानून का उल्लंघन:** संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि (UNCLOS) के तहत ‘पारगमन मार्ग’ के अधिकार का उल्लंघन, जिससे अंतर्राष्ट्रीय समुदाय में चिंताएं बढ़ेंगी।
* **भू-राजनीतिक तनाव में वृद्धि:** अमेरिका और उसके सहयोगियों के साथ ईरान के संबंधों में और अधिक तनाव, संभावित सैन्य टकराव का जोखिम।
* **ऊर्जा बाजारों पर प्रभाव:** तेल और गैस की कीमतों में वृद्धि, वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधान का डर।
* **व्यापार और शिपिंग पर प्रभाव:** बीमा लागत में वृद्धि, शिपिंग कंपनियों के लिए जोखिम, और वैकल्पिक मार्गों की तलाश।
* **क्षेत्रीय स्थिरता:** मध्य पूर्व में अस्थिरता को बढ़ावा, अन्य क्षेत्रीय शक्तियों के साथ संबंधों पर नकारात्मक प्रभाव।
* **कूटनीतिक प्रतिक्रियाएं:** संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतर्राष्ट्रीय संगठनों द्वारा संभावित निंदा और मध्यस्थता के प्रयास।
4. **निष्कर्ष:** ईरान के इस कदम के दूरगामी परिणाम हो सकते हैं, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था और क्षेत्रीय सुरक्षा को प्रभावित करेंगे, और अंतर्राष्ट्रीय कानूनों के पालन की आवश्यकता पर जोर देंगे।

स्रोत: orissapost.com


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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