18 Sep उत्तराखंड में 100 प्रमुख ट्रेकिंग रूट की जीपीएस-जीआईएस मैपिंग: सीएम धामी ने किया शुभारंभ
✎ उत्तराखंड में 100 प्रमुख ट्रेकिंग रूट्स की GPS/GIS मैपिंग का उद्देश्य पर्यटन को सुरक्षित, सुगम और व्यवस्थित बनाना, स्थानीय रोजगार सृजित करना और आपातकालीन बचाव कार्यों को प्रभावी बनाना है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper I — भूगोल (भारत एवं विश्व का भौतिक, सामाजिक, आर्थिक भूगोल) | GS Paper III — अर्थव्यवस्था (पर्यटन का महत्व, रोजगार सृजन), आपदा प्रबंधन (राहत एवं बचाव कार्य), पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी (संवेदनशील पारिस्थितिकी का संरक्षण)
- Prelims: GPS/GIS मैपिंग, साहसिक पर्यटन, उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद, हिमालयी पारिस्थितिकी, रोजगार सृजन, आपदा प्रबंधन
- Essay: पर्यटन का सतत विकास: आर्थिक संवृद्धि और पर्यावरणीय संतुलन, तकनीक का उपयोग: सुशासन, सुरक्षा और समावेशी विकास
त्वरित पुनरावृत्ति: उत्तराखंड में 100 प्रमुख ट्रेकिंग रूट्स की GPS/GIS मैपिंग का उद्देश्य पर्यटन को सुरक्षित, सुगम और व्यवस्थित बनाना, स्थानीय रोजगार सृजित करना और आपातकालीन बचाव कार्यों को प्रभावी बनाना है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ने राज्य के 100 प्रमुख ट्रेकिंग और हाइक रूट्स की GPS (ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम)/GIS (भौगोलिक सूचना प्रणाली) मैपिंग और तकनीकी सर्वेक्षण के लिए अभियान दल को हरी झंडी दिखाई है। इस पहल का उद्देश्य ट्रेकिंग को अधिक सुरक्षित, सुगम और व्यवस्थित बनाना है, साथ ही दूरस्थ क्षेत्रों में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देना और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित करना है।
पृष्ठभूमि
- उत्तराखंड अपनी विशिष्ट भौगोलिक स्थिति और हिमालयी परिदृश्य के कारण साहसिक पर्यटन, विशेषकर ट्रेकिंग के लिए एक प्रमुख गंतव्य है।
- राज्य में कई प्रसिद्ध ट्रेकिंग क्षेत्र हैं, लेकिन दूरस्थ और कम प्रसिद्ध ट्रेक रूट्स को भी पर्यटन मानचित्र पर लाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
- ट्रेकिंग के दौरान पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और आपातकालीन स्थितियों में प्रभावी राहत एवं बचाव कार्य सुनिश्चित करना राज्य सरकार की प्राथमिकता है।
- पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने के साथ-साथ राज्य की संवेदनशील हिमालयी पारिस्थितिकी (Himalayan ecology) के संरक्षण पर भी ध्यान देना महत्वपूर्ण है।
- आधुनिक तकनीक, जैसे GPS और GIS, का उपयोग ट्रेकिंग रूट्स की सटीक जानकारी प्रदान करने और सुरक्षा उपायों को मजबूत करने में सहायक हो सकता है।
- इस परियोजना से स्थानीय लोगों के लिए गाइडिंग, होमस्टे और पर्यटन से जुड़ी अन्य गतिविधियों में रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर सृजित होने की उम्मीद है।
GPS/GIS मैपिंग और इसका महत्व
- GPS (ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम) एक उपग्रह-आधारित नेविगेशन प्रणाली है जो पृथ्वी पर या उसके निकट किसी भी स्थान पर समय और स्थिति की जानकारी प्रदान करती है।
- GIS (भौगोलिक सूचना प्रणाली) एक ऐसा सिस्टम है जो भौगोलिक डेटा को कैप्चर, स्टोर, विश्लेषण, प्रबंधित और प्रस्तुत करता है। यह विभिन्न भौगोलिक परतों को एक साथ जोड़कर स्थानिक विश्लेषण में मदद करता है।
- ट्रेकिंग रूट्स की GPS/GIS मैपिंग में ट्रेक के मार्ग, ऊंचाई, ढलान, जल स्रोत, कैंप साइट, खतरनाक बिंदु और अन्य महत्वपूर्ण भौगोलिक विशेषताओं का सटीक डेटा एकत्र किया जाता है।
- यह मैपिंग ट्रेकर्स को रास्ते से जुड़ी विस्तृत जानकारी प्रदान करेगी, जिससे वे अपनी यात्रा की बेहतर योजना बना सकेंगे और सुरक्षित रूप से ट्रेक कर सकेंगे।
- आपातकालीन स्थिति में, सटीक मैपिंग डेटा राहत और बचाव कार्यों को अधिक प्रभावी और त्वरित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
- परियोजना के तहत एक ऑफलाइन और ऑनलाइन GPS नेविगेशन ऐप विकसित किया जाएगा, जिससे नेटवर्क कनेक्टिविटी न होने पर भी ट्रेकर्स को मोबाइल फोन पर आवश्यक जानकारी मिल सकेगी।
- मैपिंग के दौरान ट्रेक रूट्स पर कैंप साइट, डस्टबिन और शौचालय के लिए उपयुक्त स्थानों की भी पहचान की जाएगी, जिससे भविष्य में बुनियादी ढांचे के विकास में मदद मिलेगी।
- उत्तराखंड इस तरह का ऐप विकसित करने वाला देश का पहला राज्य बनेगा, जो सभी 100 मैप किए गए ट्रेक मार्गों को कवर करेगा, जिससे यह साहसिक पर्यटन के लिए एक अग्रणी गंतव्य के रूप में उभरेगा।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| GPS/GIS मैपिंग | ट्रेकिंग मार्गों को सुरक्षित, सुगम और व्यवस्थित बनाएगा। |
| तकनीकी सर्वेक्षण | ट्रेक रूट्स की विस्तृत जानकारी एकत्र करेगा, जिसमें कैंप साइट, डस्टबिन और शौचालय के स्थान शामिल हैं। |
| ऑफलाइन और ऑनलाइन GPS नेविगेशन ऐप | नेटवर्क कनेक्टिविटी न होने पर भी ट्रेकर्स को मार्ग संबंधी जानकारी प्रदान करेगा और बचाव कार्यों में सहायता करेगा। |
| दूरस्थ और कम प्रसिद्ध ट्रेक रूट्स का मानचित्रण | पर्यटन मानचित्र पर नए क्षेत्रों को लाएगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देगा। |
| पर्यटकों की सुरक्षा पर जोर | आपात स्थिति में राहत और बचाव कार्यों को अधिक प्रभावी बनाएगा। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
- स्थानीय युवाओं के लिए गाइडिंग, होमस्टे और पर्यटन से जुड़ी अन्य गतिविधियों में रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
सामाजिक महत्व
- स्थानीय समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित होने से उनके जीवन स्तर में सुधार होगा।
- पर्यटन के माध्यम से सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलेगा।
पर्यावरणीय महत्व
- ट्रेकिंग रूट्स पर डस्टबिन और शौचालय के लिए उपयुक्त स्थानों की पहचान से हिमालयी पारिस्थितिकी के संरक्षण में मदद मिलेगी।
- वैज्ञानिक मैपिंग से संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर उनके संरक्षण के लिए बेहतर योजना बनाई जा सकेगी।
प्रशासनिक महत्व
- पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और आपातकालीन स्थितियों में प्रभावी बचाव कार्य करने में सहायता मिलेगी।
- पर्यटन विकास के लिए एक व्यवस्थित और वैज्ञानिक दृष्टिकोण प्रदान करेगा।
चुनौतियाँ
1. बुनियादी ढाँचे का अभाव
- दूरस्थ ट्रेकिंग मार्गों पर कनेक्टिविटी, बिजली और अन्य आवश्यक सुविधाओं की कमी।
- स्थानीय लोगों के लिए होमस्टे और अन्य पर्यटन-संबंधी व्यवसायों को विकसित करने में चुनौतियाँ।
यूपीएससी लिंक: बुनियादी ढाँचा विकास, क्षेत्रीय असंतुलन
2. पर्यावरणीय संवेदनशीलता
- हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र की नाजुकता और पर्यटन गतिविधियों से पड़ने वाला दबाव।
- अपशिष्ट प्रबंधन और प्रदूषण नियंत्रण सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण संरक्षण, सतत विकास
3. सुरक्षा और बचाव
- अप्रत्याशित मौसम की स्थिति और दुर्गम इलाकों में बचाव अभियान चलाना।
- ट्रेकर्स के लिए पर्याप्त चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना।
यूपीएससी लिंक: आपदा प्रबंधन, पर्वतीय क्षेत्र विकास
4. स्थानीय भागीदारी और क्षमता निर्माण
- स्थानीय समुदायों को पर्यटन गतिविधियों में प्रभावी ढंग से शामिल करना।
- गाइडों और अन्य सेवा प्रदाताओं के लिए कौशल विकास और प्रशिक्षण की आवश्यकता।
यूपीएससी लिंक: मानव संसाधन विकास, समावेशी विकास
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| दूरस्थ क्षेत्रों में कनेक्टिविटी | ऑफलाइन ऐप के बावजूद आपातकालीन संचार और डेटा साझाकरण में बाधा। |
| पर्यावरण पर मानवीय प्रभाव | पर्यटकों की बढ़ती संख्या से संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र पर दबाव। |
| स्थानीय समुदायों का विस्थापन | पर्यटन विकास के कारण स्थानीय जीवनशैली और संस्कृति पर नकारात्मक प्रभाव की संभावना। |
| मौसम संबंधी अनिश्चितता | अचानक मौसम परिवर्तन से ट्रेकर्स की सुरक्षा और बचाव कार्यों में चुनौतियाँ। |
| तकनीकी विशेषज्ञता का अभाव | स्थानीय स्तर पर GPS/GIS डेटा के रखरखाव और अपडेट के लिए प्रशिक्षित कर्मियों की कमी। |
आगे की राह
- GPS/GIS मैपिंग डेटा को नियमित रूप से अपडेट किया जाए और उपयोगकर्ताओं के लिए सुलभ बनाया जाए।
- स्थानीय समुदायों को ट्रेकिंग पर्यटन से संबंधित कौशल विकास और उद्यमिता प्रशिक्षण प्रदान किया जाए।
- ट्रेकिंग मार्गों पर अपशिष्ट प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रभावी नीतियाँ और बुनियादी ढाँचा विकसित किया जाए।
- आपातकालीन बचाव दल को आधुनिक उपकरणों और प्रशिक्षण से लैस किया जाए ताकि वे किसी भी स्थिति का सामना कर सकें।
- पर्यटकों के लिए व्यापक जागरूकता अभियान चलाए जाएँ ताकि वे सुरक्षित ट्रेकिंग प्रथाओं और पर्यावरणीय जिम्मेदारी के प्रति जागरूक हों।
- स्थानीय संस्कृति और परंपराओं का सम्मान करते हुए सतत पर्यटन (Sustainable Tourism) मॉडल विकसित किए जाएँ।
- निजी क्षेत्र और स्थानीय स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी को प्रोत्साहित किया जाए ताकि परियोजना की सफलता सुनिश्चित हो सके।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
साहसिक पर्यटन · ट्रेकिंग पर्यटन · GPS/GIS मैपिंग · पर्यटन अवसंरचना · स्थानीय रोजगार · पारिस्थितिकी संरक्षण · आपदा प्रबंधन · सतत पर्यटन · डिजिटल नेविगेशन · राज्य पर्यटन नीति
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 48A’, ‘note’: ‘पर्यावरण का संरक्षण और संवर्धन’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 38’, ‘note’: ‘लोक कल्याण की अभिवृद्धि हेतु राज्य व्यवस्था’}
अवधारणा प्रवाह
उत्तराखंड में साहसिक पर्यटन की क्षमता → GPS/GIS मैपिंग और तकनीकी सर्वेक्षण का निर्णय → सुरक्षित, सुगम और व्यवस्थित ट्रेकिंग मार्ग → पर्यटकों की सुरक्षा और बचाव कार्यों में सुधार → स्थानीय रोजगार और स्वरोजगार के अवसरों का सृजन → हिमालयी पारिस्थितिकी का संरक्षण और सतत पर्यटन
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. GPS (Global Positioning System) एक उपग्रह-आधारित नेविगेशन प्रणाली है जो पृथ्वी पर किसी भी स्थान की स्थिति, वेग और समय की जानकारी प्रदान करती है।
2. GIS (Geographic Information System) एक प्रणाली है जिसे स्थानिक डेटा को कैप्चर करने, संग्रहीत करने, हेरफेर करने, विश्लेषण करने, प्रबंधित करने और प्रस्तुत करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
3. उत्तराखंड सरकार की हालिया पहल के तहत, राज्य के 100 प्रमुख ट्रेक और हाइक रूट्स की GPS/GIS मैपिंग की जाएगी ताकि एक ऑफलाइन और ऑनलाइन नेविगेशन ऐप विकसित किया जा सके।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 और 2 GPS और GIS की सही परिभाषाएँ हैं। कथन 3 भी सही है क्योंकि उत्तराखंड सरकार ने 100 ट्रेकिंग रूट्स की GPS/GIS मैपिंग की पहल की है, जिसका उद्देश्य ऑफलाइन और ऑनलाइन नेविगेशन ऐप विकसित करना है।
Q2. अभिकथन (A): उत्तराखंड में साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए ट्रेकिंग रूट्स की वैज्ञानिक मैपिंग आवश्यक है।
कारण (R): वैज्ञानिक मैपिंग से ट्रेकर्स को रास्ते से जुड़ी जरूरी जानकारी मिलती है और आपात स्थिति में राहत व बचाव कार्यों को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।
उपरोक्त कथनों के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा सही है?
- A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
- A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- A सही है, लेकिन R गलत है।
- A गलत है, लेकिन R सही है।
उत्तर: A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि वैज्ञानिक मैपिंग से ट्रेकिंग को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाया जा सकता है, जो साहसिक पर्यटन के लिए महत्वपूर्ण है। कारण (R) भी सही है और यह A की सही व्याख्या करता है, क्योंकि मैपिंग से प्राप्त जानकारी सुरक्षा बढ़ाती है और बचाव कार्यों में मदद करती है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देने में भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS) और ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (GPS) जैसी आधुनिक तकनीकों की भूमिका का परीक्षण कीजिए। उत्तराखंड सरकार की हालिया पहल के संदर्भ में, इस प्रकार की परियोजनाएँ स्थानीय अर्थव्यवस्था और पारिस्थितिकी संरक्षण को कैसे प्रभावित कर सकती हैं? (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** साहसिक पर्यटन और भारत में इसकी क्षमता का संक्षिप्त परिचय। GIS और GPS जैसी तकनीकों की भूमिका का सामान्य उल्लेख।
2. **GIS और GPS की भूमिका:**
* **सुरक्षा और सुगमता:** ट्रेक रूट्स की सटीक मैपिंग, खतरनाक क्षेत्रों की पहचान, आपातकालीन निकास मार्गों का निर्धारण।
* **नेविगेशन:** ऑफलाइन/ऑनलाइन ऐप के माध्यम से ट्रेकर्स को वास्तविक समय की जानकारी, मार्ग-दर्शन।
* **योजना और प्रबंधन:** पर्यटन अवसंरचना (कैंप साइट, शौचालय, डस्टबिन) के लिए उपयुक्त स्थानों की पहचान।
* **आपदा प्रबंधन:** आपात स्थिति में बचाव और राहत कार्यों की दक्षता में वृद्धि।
* **पर्यटन संवर्धन:** कम प्रसिद्ध रूट्स को पर्यटन मानचित्र पर लाना।
3. **उत्तराखंड की पहल का संदर्भ:**
* राज्य के 100 प्रमुख ट्रेक रूट्स की मैपिंग का विशिष्ट उल्लेख।
* ऑफलाइन और ऑनलाइन GPS नेविगेशन ऐप विकसित करने का लक्ष्य।
* भारत में ऐसा करने वाला पहला राज्य बनने का महत्व।
4. **स्थानीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव:**
* **रोजगार सृजन:** गाइडिंग, होमस्टे, स्थानीय परिवहन, पर्यटन से संबंधित अन्य सेवाओं में स्थानीय युवाओं के लिए अवसर।
* **स्वरोजगार:** स्थानीय उत्पादों और सेवाओं की मांग में वृद्धि।
* **दूरस्थ क्षेत्रों का विकास:** पर्वतीय क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा।
5. **पारिस्थितिकी संरक्षण पर प्रभाव:**
* **संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान:** मैपिंग के माध्यम से संवेदनशील हिमालयी पारिस्थितिकी वाले क्षेत्रों को चिह्नित करना।
* **पर्यटकों का विनियमन:** निर्धारित मार्गों और कैंप साइट्स के माध्यम से अनियंत्रित पर्यटन पर नियंत्रण।
* **अपशिष्ट प्रबंधन:** डस्टबिन और शौचालय के लिए उपयुक्त स्थानों की पहचान कर स्वच्छता बनाए रखना।
* **जागरूकता:** ऐप के माध्यम से पारिस्थितिकी संरक्षण संबंधी जानकारी प्रदान करना।
6. **चुनौतियाँ और समाधान (संक्षेप में):** तकनीकी पहुँच, डेटा अपडेट, स्थानीय क्षमता निर्माण, सतत पर्यटन मॉडल।
7. **निष्कर्ष:** आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर साहसिक पर्यटन को सुरक्षित, व्यवस्थित और सतत बनाने की आवश्यकता पर बल, जो स्थानीय विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करे।
स्रोत: amarujala.com
Uttarakhand PCS (UKPSC) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा हाल ही में देहरादून से रवाना किए गए अभियान दल का मुख्य उद्देश्य क्या है?
- A. प्रदेश के सौ प्रमुख ट्रेकिंग रूट की जीपीएस-जीआईएस मैपिंग करना
- B. राज्य में नए पर्यटन स्थलों की खोज करना
- C. वन्य जीव संरक्षण के लिए अभियान चलाना
- D. राज्य के प्रमुख मंदिरों का जीर्णोद्धार कराना
उत्तर: A. प्रदेश के सौ प्रमुख ट्रेकिंग रूट की जीपीएस-जीआईएस मैपिंग करना — उत्तराखंड सरकार राज्य के सौ प्रमुख ट्रेकिंग रूट की जीपीएस-जीआईएस मैपिंग कर रही है ताकि पर्यटन को बढ़ावा मिल सके और ट्रेकर्स की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
Mains: उत्तराखंड सरकार द्वारा देहरादून से आरंभ किए गए ‘सौ प्रमुख ट्रेकिंग रूट की जीपीएस-जीआईएस मैपिंग’ अभियान के महत्व और इसके संभावित लाभों पर प्रकाश डालते हुए, राज्य के पर्यटन विकास में इसकी भूमिका का विश्लेषण कीजिए।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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