18 Sep उपराष्ट्रपति ने हैदराबाद मुक्ति दिवस पर राष्ट्र निर्माण की याद दिलाई, जानिए क्यों है खास
✎ हैदराबाद मुक्ति दिवस 17 सितंबर 1948 को 'ऑपरेशन पोलो' के माध्यम से हैदराबाद रियासत के भारतीय संघ में विलय का स्मरण कराता है, जो सरदार वल्लभभाई पटेल के नेतृत्व में राष्ट्रीय एकता और रियासतों के एकीकरण का एक महत्वपूर्ण अध्याय था।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper I — भारतीय इतिहास, स्वतंत्रता संग्राम, स्वतंत्रता के बाद का समेकन और पुनर्गठन | GS Paper II — भारतीय संविधान, संघवाद, राज्यों का पुनर्गठन
- Prelims: हैदराबाद मुक्ति दिवस, ऑपरेशन पोलो, सरदार वल्लभभाई पटेल, रियासतों का एकीकरण, रामजी गोंड, तुर्रेबाज खान, कोमाराम भीम, संघवाद
- Essay: स्वतंत्रता के बाद भारत का एकीकरण: चुनौतियाँ और समाधान, राष्ट्रीय एकता और संवैधानिक लोकतंत्र की भूमिका
त्वरित पुनरावृत्ति: हैदराबाद मुक्ति दिवस 17 सितंबर 1948 को ‘ऑपरेशन पोलो’ के माध्यम से हैदराबाद रियासत के भारतीय संघ में विलय का स्मरण कराता है, जो सरदार वल्लभभाई पटेल के नेतृत्व में राष्ट्रीय एकता और रियासतों के एकीकरण का एक महत्वपूर्ण अध्याय था।
यह खबर चर्चा में क्यों?
उपराष्ट्रपति श्री सीपी राधाकृष्णन ने तेलंगाना के सिकंदराबाद परेड ग्राउंड में आयोजित 79वें हैदराबाद मुक्ति दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया। उन्होंने इस अवसर पर हैदराबाद के भारतीय संघ में विलय को स्वतंत्र भारत के इतिहास का एक निर्णायक अध्याय बताया और राष्ट्रीय एकता, संवैधानिक लोकतंत्र तथा उन देशभक्तों के बलिदान पर प्रकाश डाला जिन्होंने इस संघर्ष में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
पृष्ठभूमि
- 15 अगस्त 1947 को भारत को स्वतंत्रता मिलने के बाद, ब्रिटिश भारत की लगभग 565 रियासतों को यह विकल्प दिया गया था कि वे भारत या पाकिस्तान में शामिल हों, या स्वतंत्र रहें।
- हैदराबाद रियासत, जो भौगोलिक रूप से भारतीय संघ के मध्य में स्थित थी, ने स्वतंत्र रहने का निर्णय लिया था।
- तत्कालीन हैदराबाद राज्य के शासक, निज़ाम उस्मान अली खान, भारतीय संघ में विलय के अनिच्छुक थे, जबकि राज्य की अधिकांश जनता भारत में शामिल होना चाहती थी।
- राज्य में रजाकारों (एक निजी सेना) द्वारा बड़े पैमाने पर हिंसा और अत्याचार किए जा रहे थे, जिससे कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ गई थी।
- भारत सरकार ने, विशेष रूप से गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल के नेतृत्व में, हैदराबाद को भारतीय संघ में एकीकृत करने के लिए कूटनीतिक और अंततः सैन्य कार्रवाई का सहारा लिया।
- 13 सितंबर 1948 को, भारतीय सेना ने ‘ऑपरेशन पोलो’ (Operation Polo) शुरू किया, जिसके परिणामस्वरूप 17 सितंबर 1948 को हैदराबाद का भारतीय संघ में विलय हो गया।
हैदराबाद मुक्ति दिवस क्या है?
- हैदराबाद मुक्ति दिवस प्रतिवर्ष 17 सितंबर को मनाया जाता है, जो 1948 में तत्कालीन हैदराबाद रियासत के भारतीय संघ में विलय की याद दिलाता है।
- यह दिन उन अनगिनत देशभक्तों के साहस और बलिदान को श्रद्धांजलि देता है जिन्होंने हैदराबाद को निज़ाम के शासन से मुक्त कराने और भारत में एकीकृत करने के लिए संघर्ष किया था।
- इस दिन का महत्व केवल एक ऐतिहासिक घटना के स्मरणोत्सव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राष्ट्र निर्माण की यात्रा और उन मूल्यों की याद दिलाता है जो भारत को एकजुट रखते हैं।
- यह सरदार वल्लभभाई पटेल के असाधारण नेतृत्व और दूरदर्शिता का भी प्रतीक है, जिन्होंने स्वतंत्रता के बाद सैकड़ों रियासतों को भारतीय संघ में सफलतापूर्वक एकीकृत किया।
- उपराष्ट्रपति ने इस अवसर पर रामजी गोंड, तुर्रेबाज खान और कोमाराम भीम जैसे स्थानीय नायकों को श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने हैदराबाद के मुक्ति संघर्ष में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
- यह दिवस राष्ट्रीय एकता के महत्व पर जोर देता है, जो केवल भौगोलिक एकीकरण से नहीं, बल्कि समान अधिकारों, समान गरिमा और समान अवसरों के माध्यम से मजबूत होती है, जैसा कि भारतीय संविधान में निहित है।
- केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (Central Armed Police Forces) ने भी रियासतों के एकीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, जिसमें ऑपरेशन पोलो भी शामिल था।
- यह भारत के संवैधानिक लोकतंत्र के निर्माण और प्रत्येक नागरिक के लिए समान स्थान सुनिश्चित करने के व्यापक कार्य का भी स्मरण कराता है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| हैदराबाद मुक्ति दिवस | यह 17 सितंबर, 1948 को तत्कालीन हैदराबाद रियासत के भारतीय संघ में विलय की स्मृति में मनाया जाता है। यह स्वतंत्र भारत के इतिहास में एक निर्णायक अध्याय है। |
| ऑपरेशन पोलो | यह भारतीय सेना द्वारा सितंबर 1948 में हैदराबाद रियासत को भारतीय संघ में एकीकृत करने के लिए चलाया गया सैन्य अभियान था। इसने हैदराबाद के विलय को सुनिश्चित किया। |
| सरदार वल्लभभाई पटेल की भूमिका | उन्होंने भारत के पहले गृह मंत्री और राज्य मंत्री के रूप में सैकड़ों रियासतों के एकीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे एक मजबूत और एकीकृत भारत की नींव रखी गई। |
| राष्ट्रीय एकता | यह दिवस हमें याद दिलाता है कि राष्ट्रीय एकता केवल भौगोलिक एकीकरण से नहीं, बल्कि समान अधिकारों, समान गरिमा और समान अवसरों के माध्यम से मजबूत होती है। |
| जन आंदोलन | हैदराबाद के संघर्ष में छात्रों, बुद्धिजीवियों, किसानों और आम नागरिकों ने भाग लिया, जो दर्शाता है कि इतिहास केवल सरकारों द्वारा नहीं, बल्कि आम लोगों के साहस और बलिदान से भी बनता है। |
महत्व
ऐतिहासिक महत्व
- हैदराबाद मुक्ति दिवस स्वतंत्र भारत के इतिहास में एक महत्वपूर्ण घटना है, जो भारत की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता की स्थापना का प्रतीक है।
- यह भारत के राष्ट्र निर्माण की यात्रा और विभिन्न राजनीतिक परिस्थितियों से उभरे लोगों को एक साथ लाने के प्रयासों को दर्शाता है।
राष्ट्रीय एकता और अखंडता
- यह दिवस राष्ट्रीय एकता के महत्व पर जोर देता है, यह दर्शाता है कि भारत की विविधता में एकता संविधान और नागरिकों के समान अधिकारों के माध्यम से कायम है।
- यह सरदार वल्लभभाई पटेल के दूरदर्शी नेतृत्व को श्रद्धांजलि देता है, जिन्होंने सैकड़ों रियासतों को भारतीय संघ में एकीकृत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
लोकतांत्रिक मूल्यों का सुदृढीकरण
- यह संवैधानिक लोकतंत्र के निर्माण और प्रत्येक नागरिक के लिए समान स्थान सुनिश्चित करने के व्यापक कार्य की याद दिलाता है।
- यह उन आम नागरिकों के साहस और बलिदान को भी याद करता है जिन्होंने अन्याय के खिलाफ संघर्ष किया, यह दर्शाता है कि लोकतंत्र में जनता की संप्रभुता अंततः सर्वोपरि है।
चुनौतियाँ
1. रियासतों का एकीकरण
- स्वतंत्रता के समय भारत में 560 से अधिक रियासतें थीं, जिन्हें भारतीय संघ में एकीकृत करना एक जटिल और चुनौतीपूर्ण कार्य था।
- कुछ रियासतें, जैसे हैदराबाद, जूनागढ़ और जम्मू-कश्मीर, भारत में विलय के लिए अनिच्छुक थीं, जिससे राजनीतिक और सैन्य हस्तक्षेप की आवश्यकता पड़ी।
यूपीएससी लिंक: भारतीय संघ और उसके क्षेत्र – रियासतों का एकीकरण
2. राष्ट्रीय एकता और विविधता
- भारत एक विविध राष्ट्र है जिसमें विभिन्न भाषाएँ, संस्कृतियाँ, धर्म और राजनीतिक विचार हैं, जिन्हें एक साथ बांधे रखना एक सतत चुनौती है।
- क्षेत्रीय आकांक्षाओं और पहचान के मुद्दों को राष्ट्रीय एकता के साथ संतुलित करना महत्वपूर्ण है।
यूपीएससी लिंक: भारतीय समाज – विविधता में एकता
3. ऐतिहासिक घटनाओं की व्याख्या
- ऐतिहासिक घटनाओं, जैसे हैदराबाद का विलय, की व्याख्या विभिन्न दृष्टिकोणों से की जा सकती है, जिससे कभी-कभी विवाद उत्पन्न होते हैं।
- इन घटनाओं को राजनीतिकरण से बचाकर तथ्यात्मक और संतुलित तरीके से प्रस्तुत करना महत्वपूर्ण है।
यूपीएससी लिंक: आधुनिक भारतीय इतिहास – स्वतंत्रता के बाद का समेकन
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| रियासतों का विलय | स्वतंत्रता के समय कई रियासतें भारत में शामिल होने को लेकर अनिच्छुक थीं, जिससे देश की एकता के लिए खतरा उत्पन्न हुआ। |
| क्षेत्रीय पहचान बनाम राष्ट्रीय पहचान | विभिन्न क्षेत्रों की अपनी विशिष्ट पहचान और आकांक्षाएँ होती हैं, जिन्हें राष्ट्रीय पहचान के साथ सामंजस्य बिठाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। |
| ऐतिहासिक विमर्श | ऐतिहासिक घटनाओं की व्याख्या को लेकर विभिन्न समुदायों और क्षेत्रों के बीच मतभेद हो सकते हैं, जिससे सामाजिक सद्भाव प्रभावित हो सकता है। |
| अल्पसंख्यक अधिकारों का संरक्षण | एक बड़े संघ में अल्पसंख्यकों के अधिकारों और हितों का संरक्षण सुनिश्चित करना एक महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक चुनौती है। |
आगे की राह
- राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने के लिए सरदार वल्लभभाई पटेल जैसे नेताओं के योगदान को व्यापक रूप से प्रचारित करना।
- विभिन्न क्षेत्रों और समुदायों की सांस्कृतिक विविधता का सम्मान करते हुए समावेशी विकास को बढ़ावा देना।
- शिक्षा प्रणाली में स्वतंत्रता संग्राम और रियासतों के एकीकरण के सही इतिहास को शामिल करना।
- नागरिकों के बीच समान अधिकारों, समान गरिमा और समान अवसरों के संवैधानिक मूल्यों को सुदृढ़ करना।
- केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की भूमिका को मान्यता देना, जिन्होंने देश की एकता और अखंडता को बनाए रखने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
- क्षेत्रीय आकांक्षाओं को राष्ट्रीय हितों के साथ संतुलित करने के लिए संवाद और सहयोग को बढ़ावा देना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
हैदराबाद मुक्ति दिवस · रियासतों का एकीकरण · ऑपरेशन पोलो · सरदार वल्लभभाई पटेल · राष्ट्रीय एकता · संवैधानिक लोकतंत्र · जन आंदोलन · विकसित भारत 2047 · केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल · समान अधिकार और गरिमा
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 1’, ‘note’: ‘भारत राज्यों का संघ है’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 2’, ‘note’: ‘नए राज्यों का प्रवेश या स्थापना’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 3’, ‘note’: ‘राज्यों के क्षेत्रों, सीमाओं में परिवर्तन’}
- {‘article’: ‘पांचवीं अनुसूची’, ‘note’: ‘अनुसूचित क्षेत्रों और जनजातियों का प्रशासन’}
- {‘article’: ‘छठी अनुसूची’, ‘note’: ‘पूर्वोत्तर राज्यों में जनजातीय क्षेत्रों का प्रशासन’}
अवधारणा प्रवाह
स्वतंत्रता के बाद रियासतों का अस्तित्व → कुछ रियासतों का भारतीय संघ में विलय से इनकार → सरदार पटेल के नेतृत्व में एकीकरण के प्रयास → ऑपरेशन पोलो और हैदराबाद का विलय → भारतीय संघ का सुदृढीकरण और राष्ट्रीय एकता की स्थापना → संवैधानिक लोकतंत्र का विकास और नागरिक अधिकारों का संरक्षण
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हैदराबाद मुक्ति दिवस प्रतिवर्ष 17 सितंबर को मनाया जाता है।
2. ऑपरेशन पोलो का संबंध हैदराबाद रियासत के भारतीय संघ में विलय से है।
3. सरदार वल्लभभाई पटेल ने रियासतों के एकीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीनों
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीनों — कथन 1 सही है क्योंकि हैदराबाद मुक्ति दिवस 17 सितंबर 1948 को हैदराबाद राज्य के भारतीय संघ में विलय की याद में मनाया जाता है। कथन 2 सही है क्योंकि ऑपरेशन पोलो भारतीय सेना द्वारा हैदराबाद को भारत में एकीकृत करने के लिए चलाया गया एक सैन्य अभियान था। कथन 3 भी सही है क्योंकि सरदार वल्लभभाई पटेल ने भारत के पहले गृह मंत्री के रूप में सैकड़ों रियासतों को भारतीय संघ में एकीकृत करने में निर्णायक भूमिका निभाई थी।
Q2. हैदराबाद रियासत के भारतीय संघ में विलय के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही नहीं है?
- हैदराबाद मुक्ति दिवस 17 सितंबर 1948 को मनाया जाता है।
- ऑपरेशन पोलो के माध्यम से हैदराबाद का विलय भारतीय संघ में हुआ।
- तत्कालीन हैदराबाद राज्य के शासक निजाम मीर उस्मान अली खान थे।
- हैदराबाद रियासत भारत में विलय होने वाली पहली रियासत थी।
उत्तर: हैदराबाद रियासत भारत में विलय होने वाली पहली रियासत थी। — हैदराबाद रियासत भारत में विलय होने वाली अंतिम प्रमुख रियासतों में से एक थी, न कि पहली। अन्य सभी कथन सही हैं।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत के राष्ट्रीय एकीकरण में सरदार वल्लभभाई पटेल की भूमिका का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। स्वतंत्रता के बाद रियासतों के एकीकरण की प्रक्रिया में हैदराबाद राज्य के विलय के महत्व पर भी प्रकाश डालिए। (15 Marks)
रूपरेखा: उत्तर में सरदार वल्लभभाई पटेल की भारत के पहले गृह मंत्री के रूप में रियासतों के एकीकरण में निभाई गई निर्णायक भूमिका का उल्लेख करें। उनकी दूरदर्शिता, कूटनीति और दृढ़ संकल्प पर प्रकाश डालें, जिसने भारत को एक मजबूत और एकीकृत राष्ट्र बनाने में मदद की। हैदराबाद राज्य के विलय को एक विशिष्ट उदाहरण के रूप में प्रस्तुत करें, जिसमें ऑपरेशन पोलो और उसके ऐतिहासिक महत्व का वर्णन करें। यह भी बताएं कि कैसे हैदराबाद का विलय राष्ट्रीय एकता और संवैधानिक लोकतंत्र के सिद्धांतों का प्रतीक बना। निष्कर्ष में, पटेल के योगदान को ‘आधुनिक भारत के निर्माता’ के रूप में स्थापित करें।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
Telangana PCS (TGPSC (TSPSC)) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: हाल ही में तेलंगाना में ‘हैदराबाद मुक्ति दिवस’ समारोह की गरिमा किसके द्वारा बढ़ाई गई?
- A. राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू
- B. उपराष्ट्रपति श्री सीपी राधाकृष्णन
- C. प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी
- D. मुख्यमंत्री श्री रेवंत रेड्डी
उत्तर: B. उपराष्ट्रपति श्री सीपी राधाकृष्णन — उपराष्ट्रपति श्री सीपी राधाकृष्णन ने 17 सितंबर 2024 को तेलंगाना में हैदराबाद मुक्ति दिवस समारोह में भाग लिया और इसकी गरिमा बढ़ाई।
Mains: तेलंगाना राज्य के निर्माण में ‘हैदराबाद मुक्ति दिवस’ के ऐतिहासिक महत्व और इसके सामाजिक-राजनीतिक प्रभाव पर प्रकाश डालते हुए, एक निबंध लिखिए।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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