21 Sep एनएससी ने हरियाणा में कुरुक्षेत्र आईटीआई क्लस्टर के लिए ₹320 करोड़ मंजूर किए, जिंदल नवीन साझेदार

✎ PM-SETU योजना का लक्ष्य औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITI) को आधुनिक, उद्योग-संचालित 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' में बदलना है, जिससे युवाओं के लिए रोजगार के मजबूत रास्ते बन सकें।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — सरकारी नीतियां और हस्तक्षेप | GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था और नियोजन, संसाधन जुटाना, वृद्धि, विकास और रोजगार
- Prelims: PM-SETU योजना, कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय, राष्ट्रीय संचालन समिति (NSC), औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (ITI), हब-एंड-स्पोक मॉडल, जिंदल नवीन अवसर लिमिटेड, व्यावसायिक प्रशिक्षण, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस
- Essay: भारत में कौशल विकास का महत्व और चुनौतियाँ, युवा रोजगार और आर्थिक विकास में व्यावसायिक शिक्षा की भूमिका
त्वरित पुनरावृत्ति: PM-SETU योजना का लक्ष्य औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITI) को आधुनिक, उद्योग-संचालित ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ में बदलना है, जिससे युवाओं के लिए रोजगार के मजबूत रास्ते बन सकें।
यह खबर चर्चा में क्यों?
कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) की राष्ट्रीय संचालन समिति (NSC) ने प्रधानमंत्री स्किलिंग एंड एम्प्लॉयबिलिटी ट्रांसफॉर्मेशन थ्रू अपग्रेडेड आईटीआई (PM-SETU) योजना के तहत हरियाणा में कुरुक्षेत्र आईटीआई क्लस्टर के लिए ₹320 करोड़ की रणनीतिक निवेश योजना (SIP) को मंजूरी दी है। जिंदल नवीन अवसर लिमिटेड इस क्लस्टर के लिए प्रमुख उद्योग भागीदार के रूप में हरियाणा सरकार के साथ साझेदारी करेगा। इस मंजूरी के साथ, PM-SETU के तहत स्वीकृत कुल निवेश 10 आईटीआई क्लस्टरों में बढ़कर ₹2,491 करोड़ हो गया है, जो देश भर में आधुनिक, उद्योग-आधारित और भविष्य के लिए तैयार व्यावसायिक प्रशिक्षण संस्थानों के निर्माण को बढ़ावा दे रहा है।
पृष्ठभूमि
- भारत में कौशल विकास और रोजगार सृजन को बढ़ावा देने के लिए सरकार विभिन्न योजनाएँ चला रही है।
- औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (ITI) देश में व्यावसायिक शिक्षा प्रदान करने वाले महत्वपूर्ण संस्थान हैं।
- उभरती हुई प्रौद्योगिकियों और श्रम बाजार की बदलती मांगों के कारण आईटीआई के आधुनिकीकरण की आवश्यकता महसूस की गई है।
- उद्योग-अकादमिक साझेदारी को मजबूत करना व्यावसायिक प्रशिक्षण को अधिक प्रासंगिक और रोजगारोन्मुखी बनाने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
- PM-SETU योजना का उद्देश्य आईटीआई को उद्योग-संचालित, भविष्य के लिए तैयार ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ में बदलना है।
- यह पहल युवाओं को आवश्यक कौशल, अनुभव और अवसरों से लैस करके भारत की विकास गाथा में सार्थक रूप से भाग लेने में मदद करेगी।
PM-SETU योजना क्या है?
- PM-SETU का पूर्ण रूप ‘प्रधानमंत्री स्किलिंग एंड एम्प्लॉयबिलिटी ट्रांसफॉर्मेशन थ्रू अपग्रेडेड आईटीआई’ है।
- यह भारत सरकार की एक प्रमुख पहल है जिसका उद्देश्य औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITI) का आधुनिकीकरण करना है।
- योजना का लक्ष्य आईटीआई को उद्योग-संचालित, भविष्य के लिए तैयार ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ में बदलना है जो उभरती हुई कार्यबल आवश्यकताओं के अनुकूल हों।
- यह योजना ‘हब-एंड-स्पोक मॉडल’ पर आधारित है, जहाँ एक ‘हब आईटीआई’ होता है और कई ‘स्पोक आईटीआई’ उससे जुड़े होते हैं।
- PM-SETU के तहत, उद्योग भागीदार पाठ्यक्रम विकास, बुनियादी ढाँचे में सुधार, प्रशिक्षण प्रदान करने, संकाय को शामिल करने, अप्रेंटिसशिप, उद्योग एक्सपोजर और प्लेसमेंट सहायता में केंद्रीय भूमिका निभाते हैं।
- योजना का उद्देश्य आधुनिक बुनियादी ढाँचा, उन्नत प्रयोगशालाएँ और उपकरण, उद्योग के अनुरूप पाठ्यक्रम और उभरते क्षेत्रों में नए पाठ्यक्रमों की शुरुआत करना है।
- यह व्यावसायिक प्रशिक्षण को उभरती हुई तकनीकों और श्रम बाजार की बदलती मांगों के अनुरूप बनाए रखने पर केंद्रित है।
- जिंदल नवीन अवसर लिमिटेड जैसे उद्योग भागीदार हरियाणा में आईटीआई क्लस्टरों के आधुनिकीकरण में सक्रिय रूप से शामिल हैं।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| कुरुक्षेत्र आईटीआई क्लस्टर को ₹320 करोड़ की मंजूरी | यह निवेश हरियाणा में व्यावसायिक प्रशिक्षण के आधुनिकीकरण और उद्योग की बदलती जरूरतों के अनुरूप कौशल विकास को बढ़ावा देगा। |
| जिंदल नवीन अवसर लिमिटेड प्रमुख उद्योग भागीदार | उद्योग की सक्रिय भागीदारी से पाठ्यक्रम, प्रशिक्षण और प्लेसमेंट में सुधार होगा, जिससे युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। |
| हब-एंड-स्पोक मॉडल | एक हब आईटीआई (कुरुक्षेत्र) और छह स्पोक आईटीआई (कैथल, पेहोवा, पबनावा, अंबाला सिटी में) का आधुनिकीकरण किया जाएगा, जिससे व्यापक क्षेत्रीय विकास सुनिश्चित होगा। |
| PM-SETU के तहत कुल निवेश ₹2,491 करोड़ | यह देश भर में 10 आईटीआई क्लस्टरों में व्यावसायिक प्रशिक्षण संस्थानों को उद्योग-संचालित उत्कृष्टता केंद्रों में बदलने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। |
| उद्योग-नेतृत्व वाला परिवर्तन | यह योजना सुनिश्चित करती है कि व्यावसायिक प्रशिक्षण उभरती प्रौद्योगिकियों और श्रम बाजार की मांगों के अनुरूप रहे, जिससे प्रशिक्षित युवाओं की रोजगार क्षमता बढ़े। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- बेहतर कौशल से युवाओं की रोजगार क्षमता बढ़ेगी, जिससे आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) को बढ़ावा मिलेगा।
- उद्योग-संबंधित प्रशिक्षण से श्रम बाजार की मांगों को पूरा करने में मदद मिलेगी, जिससे उत्पादकता और प्रतिस्पर्धात्मकता में वृद्धि होगी।
- यह पहल स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं को मजबूत करेगी, क्योंकि प्रशिक्षित श्रमिक स्थानीय उद्योगों में योगदान कर सकेंगे।
सामाजिक महत्व
- युवाओं को गुणवत्तापूर्ण व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान करके सामाजिक समावेशन (Social Inclusion) को बढ़ावा मिलेगा, विशेषकर ग्रामीण और वंचित क्षेत्रों के युवाओं के लिए।
- बेहतर रोजगार के अवसर युवाओं को सशक्त बनाएंगे और उनके जीवन स्तर में सुधार लाएंगे।
- कौशल विकास से बेरोजगारी कम करने और सामाजिक असमानताओं को दूर करने में मदद मिलेगी।
शासनिक महत्व
- यह योजना कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (Ministry of Skill Development and Entrepreneurship) की ‘स्किल इंडिया’ पहल के तहत सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
- सार्वजनिक-निजी भागीदारी (Public-Private Partnership) मॉडल के माध्यम से संसाधनों का कुशल उपयोग सुनिश्चित होता है और योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन संभव होता है।
- यह पहल नीति निर्माण और क्रियान्वयन में केंद्र और राज्य सरकारों के बीच सहयोग को मजबूत करती है।
चुनौतियाँ
1. गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण का अभाव
- कई आईटीआई में अभी भी आधुनिक उपकरण, अद्यतन पाठ्यक्रम और प्रशिक्षित संकाय की कमी है।
- उद्योग की बदलती जरूरतों के साथ प्रशिक्षण मानकों को बनाए रखना एक चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: मानव संसाधन विकास, कौशल विकास
2. उद्योग-संस्थान संबंध
- उद्योग और प्रशिक्षण संस्थानों के बीच प्रभावी समन्वय और सहयोग स्थापित करना अक्सर मुश्किल होता है।
- अप्रेंटिसशिप (Apprenticeship) और उद्योग एक्सपोजर के अवसरों की उपलब्धता सुनिश्चित करना एक चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: उद्योग और कौशल विकास
3. रोजगार के अवसर
- प्रशिक्षण के बाद भी सभी प्रशिक्षित युवाओं के लिए पर्याप्त और उपयुक्त रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना एक चुनौती है।
- उभरते क्षेत्रों में कौशल की मांग और आपूर्ति के बीच अंतर को पाटना आवश्यक है।
यूपीएससी लिंक: बेरोजगारी, आर्थिक विकास
4. क्षेत्रीय असमानताएं
- देश के विभिन्न क्षेत्रों में कौशल विकास के बुनियादी ढांचे और अवसरों में असमानताएं मौजूद हैं।
- सभी क्षेत्रों में समान रूप से गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: क्षेत्रीय विकास, सामाजिक न्याय
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| अप्रचलित पाठ्यक्रम | कई आईटीआई में पाठ्यक्रम अभी भी पुराने हैं और उद्योग की वर्तमान मांगों के अनुरूप नहीं हैं, जिससे प्रशिक्षित युवाओं की रोजगार क्षमता प्रभावित होती है। |
| संकाय प्रशिक्षण | प्रशिक्षण देने वाले संकाय सदस्यों को नवीनतम तकनीकों और शिक्षण पद्धतियों में अद्यतन प्रशिक्षण की आवश्यकता है, ताकि वे छात्रों को प्रभावी ढंग से तैयार कर सकें। |
| बुनियादी ढाँचा और उपकरण | कई आईटीआई में आधुनिक प्रयोगशालाओं और उपकरणों की कमी है, जिससे छात्रों को व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करने में बाधा आती है। |
| निगरानी और मूल्यांकन | PM-SETU जैसी योजनाओं के तहत किए गए निवेश और प्रशिक्षण परिणामों की प्रभावी निगरानी और मूल्यांकन प्रणाली की कमी हो सकती है, जिससे जवाबदेही प्रभावित होती है। |
| छात्रों की रुचि | व्यावसायिक प्रशिक्षण के प्रति छात्रों की धारणा और रुचि को बढ़ाना एक चुनौती है, क्योंकि अक्सर इसे उच्च शिक्षा से कमतर आंका जाता है। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- प्रधानमंत्री स्किलिंग एंड एम्प्लॉयबिलिटी ट्रांसफॉर्मेशन थ्रू अपग्रेडेड आईटीआई (PM-SETU)
आगे की राह
- उद्योग-संस्थान संबंधों को और मजबूत करना, जिसमें उद्योग के विशेषज्ञों को पाठ्यक्रम विकास और प्रशिक्षण में शामिल किया जाए।
- आईटीआई संकाय के लिए नियमित अद्यतन प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करना, ताकि वे नवीनतम तकनीकों और शिक्षण पद्धतियों से अवगत रहें।
- उभरती प्रौद्योगिकियों (Emerging Technologies) जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence), मशीन लर्निंग (Machine Learning) और रोबोटिक्स (Robotics) में नए पाठ्यक्रम शुरू करना।
- प्रशिक्षित युवाओं के लिए अप्रेंटिसशिप और प्लेसमेंट के अवसरों को बढ़ाने के लिए एक मजबूत तंत्र स्थापित करना।
- कौशल विकास के परिणामों की नियमित निगरानी और मूल्यांकन करना, ताकि योजना के प्रभाव का आकलन किया जा सके और आवश्यक सुधार किए जा सकें।
- व्यावसायिक शिक्षा के प्रति सामाजिक धारणा को बेहतर बनाने के लिए जागरूकता अभियान चलाना और इसके महत्व पर जोर देना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
प्रधानमंत्री स्किलिंग एंड एम्प्लॉयबिलिटी ट्रांसफॉर्मेशन थ्रू अपग्रेडेड आईटीआई (PM-SETU) योजना · औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (ITI) · कौशल विकास · उद्योग-साझेदारी मॉडल · हब-एंड-स्पोक मॉडल · व्यावसायिक प्रशिक्षण · रोजगार सृजन · आर्थिक संवृद्धि · युवा सशक्तिकरण · राष्ट्रीय कौशल विकास मिशन
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 21A: शिक्षा का अधिकार
- अनुच्छेद 41: काम, शिक्षा का अधिकार
- अनुच्छेद 46: अनुसूचित जातियों आदि की शिक्षा
अवधारणा प्रवाह
PM-SETU योजना की मंजूरी → आईटीआई क्लस्टरों में निवेश और आधुनिकीकरण → उद्योग-संस्थान साझेदारी का सुदृढ़ीकरण → अद्यतन पाठ्यक्रम और बेहतर प्रशिक्षण → युवाओं के लिए बढ़ी हुई रोजगार क्षमता → आर्थिक संवृद्धि और सामाजिक विकास
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. प्रधानमंत्री स्किलिंग एंड एम्प्लॉयबिलिटी ट्रांसफॉर्मेशन थ्रू अपग्रेडेड आईटीआई (PM-SETU) योजना के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह योजना कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) के तहत संचालित है।
2. इसका उद्देश्य औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITI) को उद्योग-संचालित उत्कृष्टता केंद्रों में बदलना है।
3. यह हब-एंड-स्पोक मॉडल पर आधारित है, जिसमें एक हब आईटीआई और कई स्पोक आईटीआई शामिल होते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि PM-SETU योजना कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय द्वारा क्रियान्वित की जाती है। कथन 2 सही है क्योंकि योजना का मुख्य उद्देश्य ITI को आधुनिक और उद्योग-अनुकूल प्रशिक्षण संस्थानों में परिवर्तित करना है। कथन 3 भी सही है क्योंकि यह योजना हब-एंड-स्पोक मॉडल पर आधारित है, जैसा कि कुरुक्षेत्र क्लस्टर के उदाहरण में देखा गया है।
Q2. प्रधानमंत्री स्किलिंग एंड एम्प्लॉयबिलिटी ट्रांसफॉर्मेशन थ्रू अपग्रेडेड आईटीआई (PM-SETU) योजना का प्राथमिक उद्देश्य क्या है?
- केवल ग्रामीण क्षेत्रों में नए आईटीआई स्थापित करना।
- आईटीआई में केवल बुनियादी ढाँचे का आधुनिकीकरण करना।
- उद्योग-संचालित व्यावसायिक प्रशिक्षण इकोसिस्टम का निर्माण करना और रोजगार क्षमता बढ़ाना।
- केवल महिला प्रशिक्षुओं के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रदान करना।
उत्तर: उद्योग-संचालित व्यावसायिक प्रशिक्षण इकोसिस्टम का निर्माण करना और रोजगार क्षमता बढ़ाना। — PM-SETU योजना का प्राथमिक उद्देश्य आईटीआई को उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप आधुनिक बनाना, पाठ्यक्रम को अद्यतन करना, प्रशिक्षण सुविधाओं में सुधार करना और उद्योग भागीदारी के माध्यम से युवाओं के लिए रोजगार के अवसरों को मजबूत करना है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ प्रधानमंत्री स्किलिंग एंड एम्प्लॉयबिलिटी ट्रांसफॉर्मेशन थ्रू अपग्रेडेड आईटीआई (PM-SETU) योजना के प्रमुख उद्देश्यों और कार्यप्रणाली का विस्तार से वर्णन कीजिए। यह योजना भारत में कौशल विकास और रोजगार सृजन में किस प्रकार सहायक सिद्ध हो सकती है? (15 Marks)
रूपरेखा: परिचय: PM-SETU योजना का संक्षिप्त परिचय, इसके मंत्रालय और मुख्य लक्ष्य का उल्लेख।
प्रमुख उद्देश्य: योजना के मुख्य उद्देश्यों को बिंदुवार स्पष्ट करना, जैसे ITI का आधुनिकीकरण, उद्योग-अनुकूल पाठ्यक्रम, रोजगार क्षमता वृद्धि, उत्कृष्टता केंद्रों का निर्माण।
कार्यप्रणाली: हब-एंड-स्पोक मॉडल, उद्योग भागीदारी की भूमिका (पाठ्यक्रम विकास, प्रशिक्षण, प्लेसमेंट), वित्तीय आवंटन और क्लस्टर-आधारित दृष्टिकोण का विस्तृत वर्णन।
कौशल विकास और रोजगार सृजन में सहायता: यह योजना कैसे युवाओं को प्रासंगिक कौशल प्रदान करती है, उद्योग की मांग और आपूर्ति के अंतर को कैसे कम करती है, अप्रेंटिसशिप और प्लेसमेंट के अवसर कैसे बढ़ाती है, और अंततः आर्थिक संवृद्धि में कैसे योगदान करती है, इसका विश्लेषण।
चुनौतियाँ और आगे की राह: योजना के सफल क्रियान्वयन में संभावित चुनौतियों (जैसे उद्योग-शिक्षा समन्वय, प्रशिक्षकों का प्रशिक्षण) और उन्हें दूर करने के उपायों पर संक्षिप्त चर्चा।
निष्कर्ष: योजना के महत्व और भारत के जनसांख्यिकीय लाभांश को भुनाने में इसकी भूमिका का सारांश।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
Haryana PCS (HPSC / HCS) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: हरियाणा के कुरुक्षेत्र आईटीआई क्लस्टर के आधुनिकीकरण के लिए राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (NSDC) द्वारा स्वीकृत पीएम-सेतु (PM-SETU) योजना के अंतर्गत स्वीकृत राशि कितनी है?
- ₹320 करोड़
- ₹250 करोड़
- ₹400 करोड़
- ₹180 करोड़
उत्तर: ₹320 करोड़ — राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (NSDC) द्वारा हरियाणा के कुरुक्षेत्र आईटीआई क्लस्टर के आधुनिकीकरण हेतु पीएम-सेतु योजना के तहत ₹320 करोड़ स्वीकृत किए गए हैं।
Mains: हरियाणा में आईटीआई क्लस्टरों के आधुनिकीकरण के लिए पीएम-सेतु योजना के महत्व और इसके संभावित प्रभावों पर चर्चा कीजिए।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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