एसआरआईएसैलम टाइगर रिजर्व में बाघों की मृत्यु: सरकार ने जांच शुरू की

Government launches inquiry into recent tiger deaths in Srisailam Reserve — concept mind map

एसआरआईएसैलम टाइगर रिजर्व में बाघों की मृत्यु: सरकार ने जांच शुरू की

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Tiger death inquiry process

✎ नागार्जुनसागर-श्रीशैलम बाघ अभयारण्य में बाघों की हालिया मृत्यु ने वन्यजीव संरक्षण की चुनौतियों को उजागर किया है, जिसके समाधान के लिए सरकार ने उच्च-स्तरीय जाँच समिति का गठन किया है।

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जैव-विविधता  |  GS Paper III — आपदा प्रबंधन  |  GS Paper II — शासन और सरकारी नीतियाँ
  • Prelims: नागार्जुनसागर-श्रीशैलम बाघ अभयारण्य (NSTR), राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA), वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972, प्रोजेक्ट टाइगर, मानव-वन्यजीव संघर्ष, बाघ गलियारे, वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB)
  • Essay: भारत में वन्यजीव संरक्षण की चुनौतियाँ और समाधान, सतत विकास और पर्यावरण संतुलन: बाघों के संरक्षण का महत्व

त्वरित पुनरावृत्ति: नागार्जुनसागर-श्रीशैलम बाघ अभयारण्य में बाघों की हालिया मृत्यु ने वन्यजीव संरक्षण की चुनौतियों को उजागर किया है, जिसके समाधान के लिए सरकार ने उच्च-स्तरीय जाँच समिति का गठन किया है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

हाल ही में, आंध्र प्रदेश के नागार्जुनसागर-श्रीशैलम बाघ अभयारण्य (NSTR) में कम समय में तीन बाघों की मृत्यु ने वन्यजीव संरक्षण पर नई चिंताएँ बढ़ा दी हैं। राज्य सरकार ने इन घटनाओं की उच्च-स्तरीय जाँच के आदेश दिए हैं और कारणों का पता लगाने तथा दीर्घकालिक संरक्षण उपायों की सिफारिश करने के लिए एक समिति का गठन किया है। इस वर्ष मई से जुलाई के बीच NSTR में कुल चार बाघों की मृत्यु दर्ज की गई है, जिनमें से तीन हाल की घटनाएँ हैं।

पृष्ठभूमि

  • नागार्जुनसागर-श्रीशैलम बाघ अभयारण्य (NSTR) भारत का सबसे बड़ा बाघ अभयारण्य है, जो आंध्र प्रदेश और तेलंगाना राज्यों में फैला हुआ है।
  • यह अभयारण्य नल्लामाला पहाड़ियों के घने जंगलों में स्थित है और कृष्णा नदी इसके बीच से होकर बहती है।
  • भारत में बाघों के संरक्षण के लिए 1973 में ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ (Project Tiger) शुरू किया गया था, जिसका उद्देश्य बाघों और उनके आवासों को बचाना है।
  • राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 (Wildlife (Protection) Act, 1972) के तहत गठित एक वैधानिक निकाय है, जो देश में बाघ संरक्षण की निगरानी करता है।
  • बाघों की मृत्यु के कारणों में प्राकृतिक कारण, अवैध शिकार, मानव-वन्यजीव संघर्ष, आवास का नुकसान और बीमारियों शामिल हो सकते हैं।
  • वन्यजीव संरक्षण में स्थानीय समुदायों की भागीदारी और वैज्ञानिक निगरानी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) क्या है?

  • राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तहत एक वैधानिक निकाय है।
  • इसका गठन वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 में संशोधन के बाद 2006 में किया गया था।
  • NTCA का मुख्य उद्देश्य ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ के कार्यान्वयन की निगरानी करना और बाघ संरक्षण को मजबूत करना है।
  • यह बाघ अभयारण्यों के प्रबंधन मानकों और मूल्यांकन प्रोटोकॉल को निर्धारित करता है।
  • NTCA बाघों की जनगणना और उनके आवासों की स्थिति की निगरानी के लिए वैज्ञानिक विधियों का उपयोग करता है।
  • यह बाघ संरक्षण के लिए राज्य सरकारों को दिशा-निर्देश और वित्तीय सहायता प्रदान करता है।
  • अवैध शिकार को रोकने और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के उपायों की सिफारिश करना भी इसके कार्यों में शामिल है।
  • यह बाघ संरक्षण के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने में भी भूमिका निभाता है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
नागार्जुनसागर श्रीशैलम टाइगर रिजर्व (NSTR) भारत के सबसे बड़े बाघ अभयारण्यों में से एक, आंध्र प्रदेश में स्थित। यह बाघों के संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण है।
उच्च-स्तरीय समिति का गठन बाघों की मृत्यु के कारणों की जाँच और दीर्घकालिक संरक्षण उपायों की सिफारिश करने के लिए। यह सरकार की गंभीरता को दर्शाता है।
राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) भारत में बाघ संरक्षण के लिए शीर्ष वैधानिक निकाय। यह बाघों की मृत्यु का आधिकारिक रिकॉर्ड रखता है और संरक्षण प्रयासों का समन्वय करता है।
मानव-वन्यजीव संघर्ष वन्यजीवों के आवासों के अतिक्रमण और संसाधनों के लिए प्रतिस्पर्धा के कारण उत्पन्न होने वाली एक गंभीर चुनौती, जिससे बाघों की सुरक्षा खतरे में पड़ती है।
वैज्ञानिक निगरानी और सामुदायिक भागीदारी बाघ संरक्षण के लिए आवश्यक उपकरण। वैज्ञानिक डेटा के आधार पर निर्णय लेने और स्थानीय समुदायों को शामिल करने से संरक्षण के प्रयास अधिक प्रभावी होते हैं।

महत्व

पर्यावरण और पारिस्थितिकी

  • बाघ खाद्य श्रृंखला के शीर्ष पर स्थित एक प्रमुख प्रजाति (Keystone Species) हैं, और उनकी आबादी का स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र के समग्र स्वास्थ्य का संकेतक है।
  • बाघों की मृत्यु से जैव विविधता (Biodiversity) का नुकसान होता है और पारिस्थितिकी संतुलन बिगड़ता है, जिससे वन पारिस्थितिकी तंत्र की स्थिरता प्रभावित होती है।

शासन और नीति

  • बाघों की मृत्यु की जाँच सरकारी एजेंसियों की वन्यजीव संरक्षण नीतियों और उनके कार्यान्वयन की प्रभावशीलता पर सवाल उठाती है।
  • यह घटना वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 (Wildlife Protection Act, 1972) के तहत स्थापित सुरक्षा तंत्रों की समीक्षा और सुदृढ़ीकरण की आवश्यकता पर प्रकाश डालती है।

सामाजिक-आर्थिक

  • बाघ अभयारण्य स्थानीय समुदायों के लिए आजीविका के अवसर (जैसे इको-टूरिज्म) प्रदान करते हैं, और बाघों की घटती संख्या इन अवसरों को प्रभावित कर सकती है।
  • मानव-वन्यजीव संघर्ष में वृद्धि से स्थानीय निवासियों और वन्यजीवों दोनों के लिए खतरा पैदा होता है, जिससे सामाजिक अशांति और आर्थिक नुकसान हो सकता है।

चुनौतियाँ

1. अवैध शिकार और वन्यजीव अपराध

  • बाघों के अंगों की अवैध तस्करी एक बड़ा खतरा है, जिससे उनकी आबादी को गंभीर नुकसान पहुँचता है।
  • अपर्याप्त गश्त और निगरानी प्रणाली अवैध शिकारियों को आसानी से अपने कृत्यों को अंजाम देने का अवसर देती है।

2. मानव-वन्यजीव संघर्ष

  • मानव बस्तियों का विस्तार और वन क्षेत्रों में अतिक्रमण से बाघों और मनुष्यों के बीच टकराव बढ़ता है।
  • फसलों को नुकसान और पशुधन पर हमले से स्थानीय समुदायों में बाघों के प्रति नकारात्मक भावनाएँ उत्पन्न होती हैं।

3. पर्यावास का नुकसान और विखंडन

  • विकास परियोजनाओं (जैसे सड़क, रेलवे, खनन) के कारण बाघों के प्राकृतिक आवास नष्ट हो रहे हैं और गलियारे (Corridors) बाधित हो रहे हैं।
  • आवासों के विखंडन से बाघों की आबादी अलग-थलग पड़ जाती है, जिससे आनुवंशिक विविधता कम होती है और प्रजनन क्षमता प्रभावित होती है।

4. वैज्ञानिक निगरानी और डेटा का अभाव

  • बाघों की मृत्यु के कारणों का सटीक पता लगाने और प्रभावी संरक्षण रणनीतियाँ विकसित करने के लिए पर्याप्त वैज्ञानिक डेटा और निगरानी तकनीकों का अभाव है।
  • मृत्यु के बाद के विश्लेषण (Post-mortem analysis) और फोरेंसिक जाँच में देरी या कमी से महत्वपूर्ण सुराग खो जाते हैं।

5. संस्थागत और प्रशासनिक चुनौतियाँ

  • वन विभाग में कर्मचारियों की कमी, प्रशिक्षण का अभाव और संसाधनों की अपर्याप्तता संरक्षण प्रयासों को कमजोर करती है।
  • विभिन्न सरकारी विभागों और हितधारकों के बीच समन्वय की कमी भी प्रभावी वन्यजीव प्रबंधन में बाधा डालती है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
बाघों की लगातार मृत्यु नागार्जुनसागर श्रीशैलम टाइगर रिजर्व में कम समय में कई बाघों की मृत्यु संरक्षण प्रयासों की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल उठाती है।
मृत्यु के कारणों का अस्पष्ट होना प्राकृतिक कारणों से इतर मृत्यु के पीछे के वास्तविक कारणों (जैसे अवैध शिकार, जहर, संघर्ष) का पता न चलना भविष्य के संरक्षण उपायों के लिए चुनौती है।
वन्यजीव संरक्षण में अंतराल यह घटना दर्शाती है कि मौजूदा सुरक्षा तंत्रों, गश्त प्रणालियों और निगरानी में महत्वपूर्ण अंतराल हैं जिन्हें तत्काल भरने की आवश्यकता है।
मानव-वन्यजीव संघर्ष की संभावना यदि बाघों की मृत्यु मानव-जनित कारणों से हुई है, तो यह क्षेत्र में मानव-वन्यजीव संघर्ष के बढ़ते जोखिम को इंगित करता है।
स्थानीय समुदायों की भूमिका संरक्षण में स्थानीय समुदायों की भागीदारी की कमी या उनके मुद्दों को संबोधित न करना भी बाघों की सुरक्षा के लिए एक चिंता का विषय है।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • प्रोजेक्ट टाइगर (Project Tiger)
  • राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (National Tiger Conservation Authority – NTCA)

आगे की राह

  • अवैध शिकार विरोधी अभियानों (Anti-poaching operations) को मजबूत करना और गश्त प्रणालियों में सुधार के लिए आधुनिक तकनीक (जैसे ड्रोन, थर्मल इमेजिंग) का उपयोग करना।
  • मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए प्रभावी रणनीतियाँ विकसित करना, जिसमें प्रभावित समुदायों को मुआवजा और जागरूकता कार्यक्रम शामिल हों।
  • वन्यजीव गलियारों (Wildlife corridors) का संरक्षण और बहाली सुनिश्चित करना ताकि बाघों को निर्बाध आवाजाही मिल सके और आनुवंशिक विविधता बनी रहे।
  • बाघों की वैज्ञानिक निगरानी को बढ़ाना, जिसमें रेडियो-टैगिंग, कैमरा ट्रैपिंग और मृत्यु के कारणों का विस्तृत फोरेंसिक विश्लेषण शामिल हो।
  • स्थानीय समुदायों को संरक्षण प्रयासों में सक्रिय रूप से शामिल करना और उन्हें वैकल्पिक आजीविका के अवसर प्रदान करना ताकि वे वन्यजीव संरक्षण के हितधारक बन सकें।
  • सतत इको-टूरिज्म (Sustainable eco-tourism) को बढ़ावा देना जो स्थानीय अर्थव्यवस्था को लाभ पहुँचाए और संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाए।
  • वन विभाग के कर्मचारियों के लिए क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण कार्यक्रमों को मजबूत करना ताकि वे वन्यजीव अपराधों से प्रभावी ढंग से निपट सकें।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

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संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 48A: पर्यावरण का संरक्षण और संवर्धन तथा वन एवं वन्यजीवों की रक्षा
  • अनुच्छेद 51A (g): प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा और उसमें सुधार करना

अवधारणा प्रवाह

नागार्जुनसागर श्रीशैलम टाइगर रिजर्व में बाघों की मृत्यु की रिपोर्ट  →  राज्य सरकार द्वारा उच्च-स्तरीय जाँच समिति का गठन  →  समिति द्वारा मृत्यु के कारणों और संरक्षण उपायों की सिफारिश  →  राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) द्वारा डेटा का संकलन  →  वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत उपायों की समीक्षा और सुदृढ़ीकरण  →  दीर्घकालिक संरक्षण रणनीतियों का विकास और क्रियान्वयन

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. नागार्जुनसागर श्रीशैलम बाघ अभयारण्य (NSTR) भारत का सबसे बड़ा बाघ अभयारण्य है।
2. यह अभयारण्य आंध्र प्रदेश और तेलंगाना राज्यों में फैला हुआ है।
3. राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तहत एक वैधानिक निकाय है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है। नागार्जुनसागर श्रीशैलम बाघ अभयारण्य वास्तव में भारत का सबसे बड़ा बाघ अभयारण्य है। कथन 2 भी सही है। यह अभयारण्य आंध्र प्रदेश और तेलंगाना दोनों राज्यों के कुछ हिस्सों में फैला हुआ है। कथन 3 भी सही है। NTCA वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत स्थापित एक वैधानिक निकाय है, जिसका उद्देश्य देश में बाघों के संरक्षण को मजबूत करना है।

Q2. अभिकथन (A): हाल ही में नागार्जुनसागर श्रीशैलम बाघ अभयारण्य में बाघों की मृत्यु के मामलों की जांच के लिए एक उच्च-स्तरीय समिति का गठन किया गया है।
कारण (R): बाघों का अवैध शिकार और मानव-वन्यजीव संघर्ष भारत में बाघ संरक्षण के लिए प्रमुख खतरे हैं।
उपरोक्त कथनों के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा सही है?

  1. A और R दोनों सही हैं, और R, A का सही स्पष्टीकरण है।
  2. A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A का सही स्पष्टीकरण नहीं है।
  3. A सही है, लेकिन R गलत है।
  4. A गलत है, लेकिन R सही है।

उत्तर: A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A का सही स्पष्टीकरण नहीं है। — अभिकथन (A) सही है, क्योंकि समाचार के अनुसार आंध्र प्रदेश सरकार ने बाघों की मृत्यु की जांच के लिए एक समिति का गठन किया है। कारण (R) भी सही है, क्योंकि अवैध शिकार और मानव-वन्यजीव संघर्ष वास्तव में भारत में बाघ संरक्षण के लिए गंभीर खतरे हैं। कारण (R) अभिकथन (A) का सही स्पष्टीकरण है क्योंकि इन खतरों के कारण ही बाघों की मृत्यु होती है और उनकी जांच के लिए समिति गठित की जाती है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत में बाघ संरक्षण के समक्ष प्रमुख चुनौतियों का परीक्षण कीजिए। नागार्जुनसागर श्रीशैलम बाघ अभयारण्य में हाल ही में हुई बाघों की मृत्यु के संदर्भ में, इन चुनौतियों से निपटने के लिए सरकार द्वारा उठाए जा सकने वाले प्रभावी उपायों पर चर्चा कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: भारत में बाघों के महत्व और उनकी संरक्षण स्थिति का संक्षिप्त उल्लेख।
2. बाघ संरक्षण के समक्ष प्रमुख चुनौतियाँ (लगभग 100-120 शब्द):
– अवैध शिकार और वन्यजीव उत्पादों का अवैध व्यापार।
– पर्यावास का विखंडन और हानि (मानवीय अतिक्रमण, विकास परियोजनाएँ)।
– मानव-वन्यजीव संघर्ष (बढ़ती आबादी, वन क्षेत्रों के पास कृषि)।
– जलवायु परिवर्तन के प्रभाव।
– वन प्रबंधन में चुनौतियाँ (कर्मचारियों की कमी, अपर्याप्त निगरानी)।
– आनुवंशिक विविधता की कमी।
3. नागार्जुनसागर श्रीशैलम बाघ अभयारण्य में बाघों की मृत्यु का संदर्भ: हाल की घटनाओं का उल्लेख और उनके संभावित कारण (अवैध शिकार, बीमारी, संघर्ष)।
4. प्रभावी उपाय (लगभग 100-120 शब्द):
– अवैध शिकार विरोधी अभियानों को मजबूत करना (गश्त बढ़ाना, प्रौद्योगिकी का उपयोग)।
– वैज्ञानिक निगरानी और डेटा संग्रह में सुधार (कैमरा ट्रैप, रेडियो कॉलर)।
– वन्यजीव गलियारों का संरक्षण और पुनर्स्थापन।
– सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देना (स्थानीय लोगों को संरक्षण प्रयासों में शामिल करना, वैकल्पिक आजीविका)।
– मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए रणनीतियाँ (क्षतिपूर्ति, जागरूकता, त्वरित प्रतिक्रिया दल)।
– स्थायी पर्यावरण पर्यटन को बढ़ावा देना।
– वन कर्मचारियों का प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण।
– राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) और राज्य सरकारों के बीच समन्वय।
5. निष्कर्ष: भारत में बाघ संरक्षण के महत्व को दोहराते हुए एक समग्र दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल।

स्रोत: The Hindu


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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