कर्नाटक का लोकसभा सीट फ्रीज का प्रस्ताव: ‘हमारी सफलता हमारी आवाज़ को न घटाए’

Karnataka seeks Lok Sabha seat freeze: ‘Our success mustn’t shrink our voice’ — labelled illustration

कर्नाटक का लोकसभा सीट फ्रीज का प्रस्ताव: ‘हमारी सफलता हमारी आवाज़ को न घटाए’

X-ray view: Karnataka seeks Lok Sabha seat freeze
X-ray view: Karnataka seeks Lok Sabha seat freeze

✎ परिसीमन का उद्देश्य निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं का पुनर्गठन करके जनसंख्या के आधार पर समान राजनीतिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना है, लेकिन जनसंख्या नियंत्रण में सफल राज्यों को प्रतिनिधित्व में कमी का डर है।

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — भारतीय संविधान: संघ एवं राज्यों के कार्य तथा उत्तरदायित्व, संघवाद से संबंधित मुद्दे एवं चुनौतियाँ, स्थानीय निकायों तक शक्तियों और वित्त का हस्तांतरण तथा उसकी चुनौतियाँ।  |  GS Paper II — संसद और राज्य विधायिकाएँ — संरचना, कार्यप्रणाली, कार्य संचालन, शक्तियाँ एवं विशेषाधिकार और इनसे उत्पन्न होने वाले विषय।  |  GS Paper II — विभिन्न क्षेत्रों के विकास के लिए सरकारी नीतियाँ और हस्तक्षेप तथा उनके अभिकल्पन और कार्यान्वयन से उत्पन्न विषय।
  • Prelims: लोकसभा सीटों का परिसीमन, जनसंख्या नियंत्रण नीति, दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद, संघवाद, अनुच्छेद 81, अनुच्छेद 82, महिला आरक्षण
  • Essay: भारत में जनसंख्या नियंत्रण और राजनीतिक प्रतिनिधित्व के बीच संतुलन, संघवाद और क्षेत्रीय असमानताएँ: चुनौतियाँ एवं समाधान

त्वरित पुनरावृत्ति: परिसीमन का उद्देश्य निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं का पुनर्गठन करके जनसंख्या के आधार पर समान राजनीतिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना है, लेकिन जनसंख्या नियंत्रण में सफल राज्यों को प्रतिनिधित्व में कमी का डर है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

हाल ही में दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद (Southern Zonal Council) की बैठक में कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने लोकसभा सीटों की संख्या को वर्तमान स्तर पर ‘फ्रीज’ करने और मौजूदा सीटों के भीतर ही महिला आरक्षण प्रदान करने का प्रस्ताव रखा है। उन्होंने तर्क दिया कि दक्षिणी राज्यों द्वारा जनसंख्या नियंत्रण में हासिल की गई सफलता उनके राजनीतिक प्रतिनिधित्व को कम करने का कारण नहीं बननी चाहिए।

पृष्ठभूमि

  • भारत में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं की सीटों का आवंटन प्रत्येक जनगणना के बाद किए जाने वाले परिसीमन (Delimitation) के माध्यम से होता है।
  • संविधान के अनुच्छेद 81 (Article 81) के अनुसार, लोकसभा में राज्यों को सीटों का आवंटन इस प्रकार किया जाता है कि सीटों की संख्या और राज्य की जनसंख्या का अनुपात सभी राज्यों में यथासंभव समान रहे।
  • जनसंख्या नियंत्रण में दक्षिणी राज्यों की सफलता के कारण, उनकी जनसंख्या वृद्धि दर उत्तरी राज्यों की तुलना में काफी कम रही है।
  • पिछली बार लोकसभा सीटों का परिसीमन 2001 की जनगणना के आधार पर किया गया था, लेकिन सीटों की संख्या को 1971 की जनगणना के स्तर पर ‘फ्रीज’ कर दिया गया था।
  • वर्तमान में, लोकसभा सीटों की संख्या को 2026 तक ‘फ्रीज’ किया गया है।
  • दक्षिणी राज्य इस बात को लेकर चिंतित हैं कि यदि अगला परिसीमन जनसंख्या के नवीनतम आंकड़ों के आधार पर होता है, तो जनसंख्या नियंत्रण में उनकी सफलता के कारण लोकसभा में उनका प्रतिनिधित्व कम हो सकता है।

परिसीमन क्या है?

  • परिसीमन का अर्थ है किसी देश या एक विधायी निकाय वाले प्रांत में क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्रों (लोकसभा या विधानसभा सीटों) की सीमाओं का निर्धारण करना।
  • इसका मुख्य उद्देश्य सभी निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाताओं की संख्या को यथासंभव समान रखना है ताकि प्रत्येक नागरिक के वोट का मूल्य समान हो।
  • भारत में, परिसीमन का कार्य एक स्वतंत्र निकाय, परिसीमन आयोग (Delimitation Commission) द्वारा किया जाता है।
  • परिसीमन आयोग के आदेशों को कानून के समान माना जाता है और उन्हें किसी भी न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती है।
  • परिसीमन आयोग का गठन संसद के एक अधिनियम के तहत किया जाता है। अब तक चार बार (1952, 1963, 1973 और 2002 में) परिसीमन आयोगों का गठन किया गया है।
  • संविधान के अनुच्छेद 82 (Article 82) के तहत संसद प्रत्येक जनगणना के बाद परिसीमन अधिनियम बनाती है।
  • जनसंख्या नियंत्रण को बढ़ावा देने के लिए, 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा लोकसभा और राज्य विधानसभाओं की सीटों की संख्या को 1971 की जनगणना के स्तर पर 2000 तक के लिए ‘फ्रीज’ कर दिया गया था।
  • बाद में, 84वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2001 द्वारा इस ‘फ्रीज’ को 2026 तक बढ़ा दिया गया।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
लोकसभा सीटों का स्थगन जनसंख्या नियंत्रण में सफल राज्यों के प्रतिनिधित्व को बनाए रखने का प्रयास।
महिला आरक्षण मौजूदा सीटों के भीतर महिलाओं के लिए प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की मांग।
दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद केंद्र और राज्यों के बीच साझा हितों पर चर्चा और समाधान के लिए एक मंच।
खनिज और खान (विकास और विनियमन) विधेयक, 2026 राज्यों के खनिज अधिकारों पर कर लगाने की शक्ति से संबंधित विवाद।
मेकेदातु परियोजना अंतर-राज्यीय जल विवाद और जल-साझाकरण के मुद्दे।

महत्व

संघवाद और राज्य प्रतिनिधित्व

  • यह मुद्दा भारत के संघीय ढांचे में राज्यों के प्रतिनिधित्व के महत्व को उजागर करता है, विशेषकर उन राज्यों के लिए जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण में सफलता प्राप्त की है।
  • जनसंख्या के आधार पर सीटों के पुनर्वितरण से दक्षिणी राज्यों का राजनीतिक प्रतिनिधित्व कम हो सकता है, जिससे उनकी ‘आवाज’ और ‘वजन’ प्रभावित होगा।

जनसंख्या नियंत्रण और प्रोत्साहन

  • जनसंख्या नियंत्रण के सफल प्रयासों को दंडित न करने की मांग, बल्कि ऐसे राज्यों को उनके प्रयासों के लिए पुरस्कृत करने की आवश्यकता पर बल देती है।
  • यह राष्ट्रीय नीतियों के दीर्घकालिक प्रभावों और राज्यों पर उनके संभावित नकारात्मक परिणामों पर विचार करने की आवश्यकता को दर्शाता है।

राजकोषीय संघवाद और राज्य स्वायत्तता

  • खनिज और खान विधेयक पर आपत्ति राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता और उनके प्राकृतिक संसाधनों पर कर लगाने के अधिकार से संबंधित है।
  • यह केंद्र और राज्यों के बीच वित्तीय शक्तियों के वितरण और राज्य के राजस्व स्रोतों पर केंद्रीय हस्तक्षेप के प्रभाव पर बहस को पुनर्जीवित करता है।

अंतर-राज्यीय जल विवाद

  • मेकेदातु परियोजना पर चर्चा अंतर-राज्यीय जल विवादों के समाधान की जटिलता और राज्यों के बीच सहयोग की आवश्यकता को दर्शाती है।
  • यह दिखाता है कि कैसे क्षेत्रीय परिषदें ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा के लिए एक मंच प्रदान कर सकती हैं, भले ही समाधान कठिन हो।

चुनौतियाँ

1. जनसंख्या आधारित परिसीमन का प्रभाव

  • जनसंख्या वृद्धि को सफलतापूर्वक नियंत्रित करने वाले राज्यों को लोकसभा में कम प्रतिनिधित्व का सामना करना पड़ सकता है।
  • यह उन राज्यों के लिए एक ‘दंड’ के रूप में देखा जा सकता है जिन्होंने राष्ट्रीय परिवार नियोजन लक्ष्यों में योगदान दिया है।

2. राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता

  • केंद्र सरकार द्वारा खनिज अधिकारों पर कर लगाने की राज्यों की शक्ति को सीमित करने वाले विधेयक से राज्य के राजस्व पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
  • यह राजकोषीय संघवाद के सिद्धांतों और राज्यों के वित्तीय संसाधनों पर नियंत्रण के मुद्दे को उठाता है।

3. अंतर-राज्यीय विवादों का समाधान

  • मेकेदातु जैसे अंतर-राज्यीय जल विवादों का समाधान राजनीतिक इच्छाशक्ति और सहकारी संघवाद पर निर्भर करता है, जो अक्सर चुनौतीपूर्ण होता है।
  • इन विवादों से राज्यों के बीच तनाव बढ़ सकता है और विकास परियोजनाओं में देरी हो सकती है।

4. प्रतिनिधित्व और समानता

  • लोकसभा सीटों को स्थिर करने और मौजूदा सीटों के भीतर महिला आरक्षण प्रदान करने की मांग प्रतिनिधित्व की समानता और समावेशिता के बारे में महत्वपूर्ण प्रश्न उठाती है।
  • यह सुनिश्चित करना कि सभी क्षेत्रों और जनसांख्यिकी का उचित प्रतिनिधित्व हो, एक जटिल संवैधानिक और राजनीतिक चुनौती है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
लोकसभा सीटों का पुनर्वितरण जनसंख्या नियंत्रण में सफल राज्यों का प्रतिनिधित्व कम होना।
खनिज और खान (विकास और विनियमन) विधेयक, 2026 राज्यों के खनिज अधिकारों पर कर लगाने की शक्ति का हनन।
मेकेदातु परियोजना अंतर-राज्यीय जल विवाद और परियोजना का कार्यान्वयन।
महिला आरक्षण का कार्यान्वयन मौजूदा सीटों के भीतर आरक्षण से कुछ निर्वाचन क्षेत्रों में प्रतिनिधित्व का पुनर्गठन।
संघवाद का संतुलन केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों और संसाधनों के वितरण में असंतुलन।

आगे की राह

  • लोकसभा सीटों के पुनर्वितरण के संबंध में एक राष्ट्रीय सहमति बनाने के लिए व्यापक विचार-विमर्श किया जाना चाहिए, जिसमें जनसंख्या नियंत्रण के प्रयासों को मान्यता दी जाए।
  • राज्यों के वित्तीय अधिकारों और स्वायत्तता का सम्मान करते हुए खनिज संसाधनों के प्रबंधन के लिए एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए।
  • अंतर-राज्यीय जल विवादों के समाधान के लिए एक प्रभावी और निष्पक्ष तंत्र स्थापित किया जाना चाहिए, जिसमें मध्यस्थता और बातचीत को प्राथमिकता दी जाए।
  • महिला आरक्षण को लागू करते समय, यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि यह राज्यों के प्रतिनिधित्व को नकारात्मक रूप से प्रभावित न करे और सभी क्षेत्रों को उचित प्रतिनिधित्व मिले।
  • क्षेत्रीय परिषदों को और अधिक सशक्त बनाया जाना चाहिए ताकि वे केंद्र और राज्यों के बीच प्रभावी संवाद और सहयोग के मंच के रूप में कार्य कर सकें।
  • संघवाद के सिद्धांतों को बनाए रखते हुए, केंद्र और राज्यों के बीच विश्वास और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए नियमित उच्च-स्तरीय बैठकें आयोजित की जानी चाहिए।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

लोकसभा सीटों का परिसीमन · जनसंख्या नियंत्रण · संघवाद · राज्यों का प्रतिनिधित्व · दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद · महिला आरक्षण · खान और खनिज (विकास और विनियमन) विधेयक · राज्यों के अधिकार · मेकेदातु परियोजना · अंतर-राज्यीय जल विवाद

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 81’, ‘note’: ‘लोकसभा की संरचना’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 82’, ‘note’: ‘प्रत्येक जनगणना के बाद पुनर्समायोजन’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 246’, ‘note’: ‘संसद और राज्य विधानमंडलों द्वारा बनाए गए कानूनों की विषय-वस्तु’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 263’, ‘note’: ‘अंतर-राज्यीय परिषद के संबंध में प्रावधान’}
  • {‘article’: ‘सातवीं अनुसूची’, ‘note’: ‘संघ, राज्य और समवर्ती सूची’}

अवधारणा प्रवाह

दक्षिणी राज्यों द्वारा जनसंख्या नियंत्रण में सफलता प्राप्त करना।  →  जनसंख्या आधारित परिसीमन से लोकसभा सीटों में कमी का डर।  →  राज्यों द्वारा लोकसभा सीटों को स्थिर करने की मांग।  →  महिला आरक्षण को मौजूदा सीटों के भीतर लागू करने का प्रस्ताव।  →  राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता और अंतर-राज्यीय जल विवादों पर चिंता।

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. भारत के संविधान के अनुच्छेद 82 के तहत, प्रत्येक जनगणना के बाद लोकसभा और विधानसभाओं के निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्समायोजन किया जाता है।
2. दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद एक संवैधानिक निकाय है जिसका गठन राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 के तहत किया गया था।
3. लोकसभा में सीटों के परिसीमन का अंतिम स्थगन 2026 तक के लिए किया गया है।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है। अनुच्छेद 82 परिसीमन से संबंधित है। कथन 2 गलत है। क्षेत्रीय परिषदें सांविधिक निकाय हैं, संवैधानिक नहीं, जिनका गठन राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 के तहत किया गया था। कथन 3 गलत है। लोकसभा में सीटों के परिसीमन का अंतिम स्थगन 2026 तक के लिए किया गया है, न कि 2026 तक।

Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन क्षेत्रीय परिषदों के संबंध में सही नहीं है?

  1. ये सांविधिक निकाय हैं।
  2. इनकी अध्यक्षता केंद्रीय गृह मंत्री करते हैं।
  3. ये राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बीच विवादों को सुलझाने के लिए एक मंच प्रदान करती हैं।
  4. इनका मुख्य उद्देश्य राज्यों के बीच आर्थिक और सामाजिक नियोजन में समन्वय स्थापित करना है।

उत्तर: इनका मुख्य उद्देश्य राज्यों के बीच आर्थिक और सामाजिक नियोजन में समन्वय स्थापित करना है। — क्षेत्रीय परिषदें सांविधिक निकाय हैं और इनकी अध्यक्षता केंद्रीय गृह मंत्री करते हैं। ये राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बीच विवादों को सुलझाने के लिए एक मंच प्रदान करती हैं। हालांकि, इनका मुख्य उद्देश्य राज्यों के बीच आर्थिक और सामाजिक नियोजन में समन्वय स्थापित करना है, लेकिन विकल्प ‘D’ में दिया गया कथन ‘इनका मुख्य उद्देश्य राज्यों के बीच आर्थिक और सामाजिक नियोजन में समन्वय स्थापित करना है’ क्षेत्रीय परिषदों के व्यापक उद्देश्यों में से एक है, लेकिन यह एकमात्र या सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य नहीं है। यह राज्यों के बीच सहयोग और समन्वय को बढ़ावा देने के लिए एक मंच है, जिसमें आर्थिक और सामाजिक नियोजन भी शामिल है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ लोकसभा सीटों के परिसीमन को स्थगित करने की मांग के पीछे के तर्कों का समालोचनात्मक परीक्षण करें। क्या जनसंख्या नियंत्रण में सफल रहे राज्यों को कम प्रतिनिधित्व मिलना संघवाद के सिद्धांतों के अनुरूप है? (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: लोकसभा सीटों के परिसीमन और इसके स्थगन की वर्तमान स्थिति का संक्षिप्त उल्लेख करें। कर्नाटक जैसे दक्षिणी राज्यों द्वारा सीटों को फ्रीज करने की मांग का संदर्भ दें।
2. परिसीमन स्थगन की मांग के पीछे के तर्क: दक्षिणी राज्यों द्वारा जनसंख्या नियंत्रण में सफलता को उजागर करें और तर्क दें कि इस सफलता के लिए उन्हें दंडित नहीं किया जाना चाहिए। आर्थिक योगदान और राजनीतिक प्रतिनिधित्व के बीच संबंध पर प्रकाश डालें।
3. संघवाद के सिद्धांत: भारतीय संघवाद की प्रकृति, विशेष रूप से राज्यों के प्रतिनिधित्व और समानता के सिद्धांतों पर चर्चा करें। जनसंख्या आधारित प्रतिनिधित्व और राज्यों की स्वायत्तता के बीच संतुलन पर विचार करें।
4. जनसंख्या नियंत्रण और प्रतिनिधित्व का द्वंद्व: उन चुनौतियों का विश्लेषण करें जो जनसंख्या नियंत्रण में सफल राज्यों को कम प्रतिनिधित्व मिलने से उत्पन्न होती हैं। क्या यह संघवाद के ‘सहकारी’ पहलू को कमजोर करता है?
5. संभावित समाधान और आगे का रास्ता: महिला आरक्षण को मौजूदा सीटों के भीतर समायोजित करने जैसे सुझाए गए समाधानों पर चर्चा करें। अन्य देशों में अपनाए गए मॉडलों या वैकल्पिक प्रतिनिधित्व प्रणालियों का उल्लेख किया जा सकता है।
6. निष्कर्ष: एक संतुलित दृष्टिकोण प्रस्तुत करें जो जनसंख्या नियंत्रण के महत्व को स्वीकार करता हो और साथ ही राज्यों के उचित प्रतिनिधित्व को भी सुनिश्चित करता हो।

स्रोत: The Indian Express


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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