कर्नाटक में अमृत भारत स्टेशन योजना: सिर्फ 12 स्टेशन पूर्ण, जानिए पूरा हाल

Work completed in only 12 out of 61 Karnataka stations identified under Amrit Bharat Station Scheme, Rajya Sabha reply r — concept mind map

कर्नाटक में अमृत भारत स्टेशन योजना: सिर्फ 12 स्टेशन पूर्ण, जानिए पूरा हाल

कर्नाटक में अमृत भारत स्टेशन योजना: सिर्फ 12 स्टेशन पूर्ण, जानिए पूरा हाल — Amrit Bharat Station Scheme Progress in Karnataka
आरेख: Amrit Bharat Station Scheme Progress in Karnataka

✎ अमृत भारत स्टेशन योजना भारतीय रेलवे द्वारा स्टेशनों के आधुनिकीकरण और उन्नयन के लिए दिसंबर 2022 में शुरू की गई एक महत्वाकांक्षी पहल है, जिसका उद्देश्य यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाना और स्टेशनों को 'सिटी सेंटर' के रूप में विकसित…

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — शासन, पारदर्शिता एवं जवाबदेही  |  GS Paper III — अवसंरचना (रेलवे)  |  GS Paper IV — लोक प्रशासन में नैतिकता
  • Prelims: अमृत भारत स्टेशन योजना, रेल मंत्रालय, राज्यसभा, आधारभूत संरचना विकास, सार्वजनिक जवाबदेही, योजना क्रियान्वयन
  • Essay: भारत में आधारभूत संरचना विकास: चुनौतियाँ और समाधान, सार्वजनिक परियोजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही का महत्व

त्वरित पुनरावृत्ति: अमृत भारत स्टेशन योजना भारतीय रेलवे द्वारा स्टेशनों के आधुनिकीकरण और उन्नयन के लिए दिसंबर 2022 में शुरू की गई एक महत्वाकांक्षी पहल है, जिसका उद्देश्य यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाना और स्टेशनों को ‘सिटी सेंटर’ के रूप में विकसित करना है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

हाल ही में, राज्यसभा में एक प्रश्न के उत्तर में यह जानकारी सामने आई है कि अमृत भारत स्टेशन योजना (Amrit Bharat Station Scheme) के तहत देश भर में चिह्नित 1,340 रेलवे स्टेशनों में से केवल 261 स्टेशनों पर ही कार्य पूरा हो पाया है। कर्नाटक में भी, चिह्नित 61 स्टेशनों में से केवल 12 स्टेशनों पर ही कार्य पूर्ण हुआ है, जो योजना की धीमी प्रगति और क्रियान्वयन में पारदर्शिता की कमी पर चिंताएँ बढ़ाता है।

पृष्ठभूमि

  • भारत में रेलवे आधारभूत संरचना (Railway Infrastructure) देश के आर्थिक विकास और सामाजिक एकीकरण के लिए महत्वपूर्ण है।
  • सरकार ने रेलवे स्टेशनों के आधुनिकीकरण और उन्नयन के लिए विभिन्न योजनाएँ शुरू की हैं, जिनमें अमृत भारत स्टेशन योजना नवीनतम है।
  • सार्वजनिक परियोजनाओं में विलंब और लागत वृद्धि भारत में एक सामान्य चुनौती रही है, जो अक्सर संसाधनों के अक्षम उपयोग की ओर ले जाती है।
  • संसद में सांसदों द्वारा पूछे गए प्रश्न सरकार की जवाबदेही (Accountability) सुनिश्चित करने और सार्वजनिक धन के उपयोग की निगरानी के लिए एक महत्वपूर्ण तंत्र हैं।
  • आधारभूत संरचना परियोजनाओं की धीमी प्रगति से न केवल जनता को असुविधा होती है, बल्कि यह देश की आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) पर भी नकारात्मक प्रभाव डालती है।
  • पारदर्शिता (Transparency) और जवाबदेही सुशासन (Good Governance) के आवश्यक स्तंभ हैं, विशेषकर जब सार्वजनिक धन का उपयोग किया जा रहा हो।

अमृत भारत स्टेशन योजना क्या है?

  • अमृत भारत स्टेशन योजना भारतीय रेलवे द्वारा दिसंबर 2022 में शुरू की गई एक महत्वाकांक्षी योजना है।
  • इसका मुख्य उद्देश्य देश भर में रेलवे स्टेशनों का आधुनिकीकरण (Modernization) और उन्नयन करना है।
  • इस योजना के तहत स्टेशनों पर यात्रियों के लिए विश्व स्तरीय सुविधाएँ प्रदान करने का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें बेहतर पहुँच, स्वच्छता और यात्रियों के अनुभव को बढ़ाना शामिल है।
  • योजना में स्टेशन भवनों में सुधार, प्लेटफार्मों का विस्तार और उन्नयन, प्रतीक्षा कक्षों का नवीनीकरण, लिफ्ट/एस्केलेटर की स्थापना और बेहतर साइनेज (Signage) जैसी सुविधाएँ शामिल हैं।
  • यह योजना दीर्घकालिक दृष्टिकोण के साथ स्टेशनों के विकास पर केंद्रित है, जिसमें भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखा गया है।
  • इसका उद्देश्य शहरी क्षेत्रों के ‘सिटी सेंटर’ के रूप में रेलवे स्टेशनों को विकसित करना है, जिससे वे केवल यात्रा के केंद्र न रहकर वाणिज्यिक और सामाजिक गतिविधियों के केंद्र भी बन सकें।
  • योजना के तहत प्रत्येक स्टेशन के लिए एक ‘मास्टर प्लान’ तैयार किया जाता है, जिसमें चरणबद्ध तरीके से सुधार कार्यों को लागू किया जाता है।
  • यह योजना ‘एक स्टेशन एक उत्पाद’ (One Station One Product) जैसी पहलों को भी बढ़ावा देती है, जिससे स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा मिल सके।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
स्टेशनों का आधुनिकीकरण यात्रियों के लिए बेहतर सुविधाएँ और अनुभव प्रदान करना, रेलवे को आधुनिक बनाना।
शहरी विकास से जुड़ाव रेलवे स्टेशनों को शहर के केंद्र के रूप में विकसित करना, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिले।
दीर्घकालिक अवसंरचना विकास अगले 20-25 वर्षों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए स्टेशनों का पुनर्विकास।
स्थानीय संस्कृति का समावेश स्टेशन डिज़ाइन में स्थानीय कला, संस्कृति और विरासत को दर्शाना।
हरित पहलें पर्यावरण-अनुकूल निर्माण सामग्री और ऊर्जा-कुशल प्रणालियों का उपयोग।

महत्व

अवसंरचनात्मक महत्व

  • अमृत भारत स्टेशन योजना (Amrit Bharat Station Scheme) का उद्देश्य देश भर में रेलवे स्टेशनों का आधुनिकीकरण और पुनर्विकास करना है, जिससे यात्रियों को विश्व स्तरीय सुविधाएँ मिल सकें।
  • यह योजना रेलवे अवसंरचना (Infrastructure) को सुदृढ़ करके परिवहन नेटवर्क को अधिक कुशल और सुगम बनाने में सहायक है।
  • आधुनिक स्टेशन बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करते हैं, जो व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा देता है।

आर्थिक महत्व

  • स्टेशन पुनर्विकास परियोजनाओं से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर सृजित होते हैं, चाहे वह निर्माण क्षेत्र में हो या सेवा क्षेत्र में।
  • आधुनिक और आकर्षक स्टेशन यात्रियों को आकर्षित करते हैं, जिससे आसपास के क्षेत्रों में वाणिज्यिक गतिविधियों में वृद्धि होती है।
  • बेहतर रेलवे अवसंरचना लॉजिस्टिक्स (Logistics) और माल ढुलाई को अधिक कुशल बनाती है, जिससे आर्थिक विकास को गति मिलती है।

सामाजिक महत्व

  • योजना के तहत स्टेशनों पर दिव्यांगजनों के लिए सुलभता, स्वच्छता और सुरक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं में सुधार किया जाता है, जिससे सभी वर्गों के यात्रियों को लाभ होता है।
  • पुनर्विकसित स्टेशन शहरी विकास के केंद्र बन सकते हैं, जिससे शहर के समग्र सौंदर्य और जीवन की गुणवत्ता में सुधार होता है।
  • यह योजना सार्वजनिक परिवहन के प्रति जनता के विश्वास को बढ़ाती है और यात्रा को अधिक आरामदायक बनाती है।

चुनौतियाँ

1. परियोजना कार्यान्वयन में देरी

  • राज्यों में परियोजनाओं की धीमी प्रगति, जैसा कि कर्नाटक के मामले में देखा गया है, योजना के समग्र लक्ष्यों को प्राप्त करने में बाधा डालती है।
  • देरी से परियोजना लागत में वृद्धि हो सकती है और जनता को अपेक्षित लाभ मिलने में विलंब होता है।

2. पारदर्शिता और जवाबदेही का अभाव

  • परियोजना लागत, अनुबंध आवंटन की तारीखों और वर्ष-वार प्रगति जैसे विवरणों की अनुपलब्धता पारदर्शिता पर सवाल उठाती है।
  • जानकारी के अभाव में संसद और जनता के लिए योजना के प्रदर्शन का मूल्यांकन करना कठिन हो जाता है।

3. निगरानी और मूल्यांकन तंत्र की कमी

  • परियोजनाओं की धीमी गति यह दर्शाती है कि प्रभावी निगरानी और मूल्यांकन तंत्र का अभाव हो सकता है।
  • नियमित और कठोर मूल्यांकन के बिना, समस्याओं की पहचान करना और समय पर सुधारात्मक उपाय करना मुश्किल होता है।

4. संसाधन आवंटन और उपयोग

  • योजना के तहत आवंटित संसाधनों का कुशल और समयबद्ध उपयोग सुनिश्चित करना एक चुनौती है।
  • यदि धन का उपयोग धीमी गति से होता है, तो यह अन्य विकास परियोजनाओं के लिए संसाधनों की उपलब्धता को भी प्रभावित कर सकता है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
धीमी प्रगति परियोजनाओं के पूरा होने में विलंब, जिससे लागत में वृद्धि और अपेक्षित लाभों से वंचित होना।
पारदर्शिता की कमी परियोजना लागत और प्रगति विवरणों का खुलासा न होने से सार्वजनिक जवाबदेही पर प्रश्न।
जवाबदेही का अभाव कार्यान्वयन में देरी के लिए जिम्मेदार पक्षों की पहचान और उन पर कार्रवाई करने में कठिनाई।
घोषणाओं और वास्तविक परिणामों में अंतर बार-बार घोषणाओं के बावजूद जमीनी स्तर पर धीमी प्रगति से जनता का विश्वास कम होना।
प्रभावी निगरानी का अभाव परियोजनाओं की स्थिति और बाधाओं को समय पर पहचानने में विफलता।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • अमृत भारत स्टेशन योजना (Amrit Bharat Station Scheme)

आगे की राह

  • परियोजना कार्यान्वयन की गति में तेजी लाने के लिए एक स्पष्ट समय-सीमा और मील के पत्थर निर्धारित किए जाने चाहिए।
  • योजना के तहत प्रत्येक स्टेशन के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) और कार्य योजना को सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
  • परियोजना लागत, अनुबंध आवंटन और वर्ष-वार प्रगति सहित सभी प्रासंगिक जानकारी को सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कराकर पारदर्शिता बढ़ाई जानी चाहिए।
  • परियोजनाओं की नियमित निगरानी और मूल्यांकन के लिए एक मजबूत तंत्र स्थापित किया जाना चाहिए, जिसमें स्वतंत्र ऑडिट (Audit) भी शामिल हो।
  • राज्यों और रेलवे मंत्रालय के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाना चाहिए ताकि कार्यान्वयन में आने वाली बाधाओं को दूर किया जा सके।
  • सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल की संभावनाओं का पता लगाया जाना चाहिए ताकि परियोजनाओं के लिए अतिरिक्त वित्तपोषण और विशेषज्ञता प्राप्त की जा सके।
  • प्रौद्योगिकी का उपयोग करके परियोजनाओं की प्रगति को ट्रैक किया जाना चाहिए और वास्तविक समय (Real-time) में अपडेट प्रदान किए जाने चाहिए।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

अमृत भारत स्टेशन योजना · रेलवे अवसंरचना विकास · परियोजना कार्यान्वयन में देरी · सार्वजनिक जवाबदेही · पारदर्शिता का अभाव · बुनियादी ढांचा परियोजनाएं · राज्यों में प्रगति · सांसद की भूमिका · संसद में प्रश्नकाल · रेल मंत्रालय

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 282: संघ या राज्य द्वारा अपने राजस्व से अनुदान
  • अनुच्छेद 266: भारत और राज्यों की संचित निधियाँ और लोक लेखे

अवधारणा प्रवाह

केंद्र सरकार द्वारा अमृत भारत स्टेशन योजना की घोषणा  →  योजना के तहत रेलवे स्टेशनों का चयन और विकास कार्य शुरू  →  राज्यसभा में प्रगति पर प्रश्न और जवाब  →  कार्यान्वयन में धीमी गति और पारदर्शिता की कमी का खुलासा  →  परियोजनाओं के समय पर पूरा न होने से अपेक्षित लाभों में विलंब

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. अमृत भारत स्टेशन योजना (Amrit Bharat Station Scheme) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह योजना दिसंबर 2022 में शुरू की गई थी।
2. इसका उद्देश्य देश भर में रेलवे स्टेशनों का आधुनिकीकरण और उन्नयन करना है।
3. यह योजना केवल बड़े महानगरीय स्टेशनों के विकास पर केंद्रित है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है, योजना दिसंबर 2022 में शुरू की गई थी। कथन 2 भी सही है, इसका उद्देश्य देश भर में रेलवे स्टेशनों का आधुनिकीकरण और उन्नयन करना है। कथन 3 गलत है, यह योजना बड़े और छोटे दोनों तरह के स्टेशनों के विकास पर केंद्रित है, न कि केवल महानगरीय स्टेशनों पर।

Q2. अभिकथन (A): अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत परियोजनाओं के कार्यान्वयन की गति अपेक्षा से धीमी रही है।
कारण (R): रेल मंत्रालय ने परियोजना लागत, अनुबंध आवंटन की तारीखों और वर्ष-वार प्रगति जैसे विशिष्ट विवरण उपलब्ध नहीं कराए हैं।
उपर्युक्त कथनों के आलोक में, निम्नलिखित में से कौन सा सही है?

  1. A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या करता है।
  2. A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं करता है।
  3. A सही है, लेकिन R गलत है।
  4. A गलत है, लेकिन R सही है।

उत्तर: A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं करता है। — अभिकथन (A) सही है, क्योंकि राज्यसभा में प्रस्तुत आंकड़ों से पता चलता है कि योजना के तहत काम की प्रगति धीमी है। कारण (R) भी सही है, क्योंकि मंत्रालय ने पारदर्शिता संबंधी चिंताओं के बावजूद विशिष्ट विवरण उपलब्ध नहीं कराए हैं। ये विवरणों की अनुपलब्धता कार्यान्वयन की धीमी गति के मूल्यांकन को कठिन बनाती है, अतः R, A की सही व्याख्या करता है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ अमृत भारत स्टेशन योजना जैसी प्रमुख अवसंरचना परियोजनाओं के कार्यान्वयन में देरी के कारणों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। सार्वजनिक जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए क्या उपाय किए जा सकते हैं? (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** अमृत भारत स्टेशन योजना का संक्षिप्त परिचय और इसके कार्यान्वयन में देरी का संदर्भ।
2. **देरी के कारण:**
* **योजना और समन्वय का अभाव:** प्रारंभिक चरण में अपर्याप्त योजना, विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की कमी।
* **भूमि अधिग्रहण और पर्यावरणीय मंजूरी:** परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण में चुनौतियाँ और पर्यावरणीय स्वीकृतियों में लगने वाला समय।
* **वित्तीय बाधाएँ:** धन की कमी या आवंटन में देरी।
* **ठेकेदारों की अक्षमता:** ठेकेदारों द्वारा काम में देरी, गुणवत्ता संबंधी मुद्दे या तकनीकी क्षमता का अभाव।
* **मानव संसाधन की कमी:** परियोजनाओं की निगरानी और निष्पादन के लिए पर्याप्त कुशल मानव संसाधन का अभाव।
* **प्रशासनिक और नौकरशाही बाधाएँ:** लालफीताशाही, निर्णय लेने में देरी।
* **अप्रत्याशित घटनाएँ:** प्राकृतिक आपदाएँ, महामारी (जैसे COVID-19) या अन्य बाहरी कारक।
3. **सार्वजनिक जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उपाय:**
* **सूचना का अधिकार (RTI) का प्रभावी उपयोग:** परियोजना संबंधी जानकारी को सक्रिय रूप से सार्वजनिक करना।
* **नियमित प्रगति रिपोर्ट:** परियोजना की प्रगति पर त्रैमासिक या वार्षिक रिपोर्ट जारी करना, जिसमें लागत, समय-सीमा और प्राप्त उपलब्धियों का विवरण हो।
* **स्वतंत्र ऑडिट और मूल्यांकन:** परियोजनाओं का स्वतंत्र एजेंसियों द्वारा नियमित ऑडिट और मूल्यांकन।
* **शिकायत निवारण तंत्र:** नागरिकों और हितधारकों के लिए शिकायत दर्ज करने और उनके निवारण के लिए सुलभ तंत्र।
* **तकनीकी का उपयोग:** परियोजनाओं की निगरानी के लिए भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी, ड्रोन और ऑनलाइन डैशबोर्ड का उपयोग।
* **संसदीय निगरानी:** संसद और राज्य विधानसभाओं में परियोजनाओं पर नियमित बहस और प्रश्नकाल के माध्यम से निगरानी।
* **सामाजिक ऑडिट:** स्थानीय समुदायों को परियोजनाओं की निगरानी में शामिल करना।
* **ई-गवर्नेंस पहल:** निविदा प्रक्रिया, अनुबंध आवंटन और भुगतान को ऑनलाइन और पारदर्शी बनाना।
4. **निष्कर्ष:** अवसंरचना परियोजनाओं के समय पर और पारदर्शी कार्यान्वयन का महत्व, और सुशासन के लिए इन उपायों की आवश्यकता पर बल।

स्रोत: The Hindu


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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