11 Aug क्षरित वन भूमि पुनर्स्थापन: ग्रीन इंडिया मिशन की उपलब्धियां और चुनौतियाँ 2026
✎ ग्रीन इंडिया मिशन और नगर वन योजना भारत में वन आवरण बढ़ाने, क्षरित भूमि का पुनर्स्थापन करने और शहरी हरियाली में सुधार लाने के लिए महत्वपूर्ण सरकारी पहलें हैं, जो जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में सहायक हैं।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — पर्यावरण और पारिस्थितिकी
- Prelims: ग्रीन इंडिया मिशन (GIM), जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्य योजना (NAPCC), नगर वन योजना (NVY), क्षरित वन भूमि, पारिस्थितिकीय पुनर्स्थापन, संयुक्त वन प्रबंधन समितियां (JFMC), भारतीय वन सर्वेक्षण (FSI), इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट (ISFR)
- Essay: जलवायु परिवर्तन और भारत की हरित पहलें, सतत विकास में सामुदायिक भागीदारी की भूमिका
त्वरित पुनरावृत्ति: ग्रीन इंडिया मिशन और नगर वन योजना भारत में वन आवरण बढ़ाने, क्षरित भूमि का पुनर्स्थापन करने और शहरी हरियाली में सुधार लाने के लिए महत्वपूर्ण सरकारी पहलें हैं, जो जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में सहायक हैं।
यह खबर चर्चा में क्यों?
हाल ही में, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में ‘ग्रीन इंडिया मिशन’ (GIM) और ‘नगर वन योजना’ (NVY) के तहत क्षरित वन भूमि के पुनर्स्थापन और शहरी हरियाली को बढ़ावा देने के प्रयासों की जानकारी दी है। मंत्रालय ने बताया कि GIM के तहत 2015-16 से 17 राज्यों और एक केंद्र-शासित प्रदेश में 1.84 लाख हेक्टेयर से अधिक भूमि पर पारिस्थितिकीय पुनर्स्थापन का कार्य किया गया है, जबकि NVY शहरी क्षेत्रों में 600 नगर वन और 400 नगर वाटिकाएं विकसित करने पर केंद्रित है।
पृष्ठभूमि
- भारत जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील है, और वन आवरण में वृद्धि कार्बन पृथक्करण (Carbon Sequestration) तथा जैव विविधता संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण है।
- शहरीकरण और औद्योगीकरण के कारण शहरी क्षेत्रों में हरियाली का क्षरण हुआ है, जिससे वायु गुणवत्ता और स्थानीय मौसम पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है।
- वन प्रबंधन में स्थानीय समुदायों की भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए संयुक्त वन प्रबंधन (JFM) जैसी अवधारणाएं दशकों से भारत में लागू की जा रही हैं।
- भारतीय वन सर्वेक्षण (FSI) द्विवार्षिक रूप से ‘इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट’ (ISFR) प्रकाशित करता है, जो देश के वन और वृक्ष आवरण की स्थिति का आकलन प्रस्तुत करती है।
ग्रीन इंडिया मिशन (GIM) और नगर वन योजना (NVY) क्या हैं?
- **ग्रीन इंडिया मिशन (GIM):** यह जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्य योजना (NAPCC) के तहत नौ मिशनों में से एक है, जिसे 2015-16 से कार्यान्वित किया जा रहा है।
- **उद्देश्य:** इसका मुख्य उद्देश्य एक एकीकृत भूदृश्य दृष्टिकोण (Integrated Landscape Approach) के माध्यम से क्षरित वन और गैर-वन वाले स्थलों की पुनर्स्थापना करना तथा देश के वन आवरण को बढ़ाना है।
- **कार्यक्षेत्र:** GIM 17 राज्यों और एक केंद्र-शासित प्रदेश में 1,84,467 हेक्टेयर भूमि पर पारिस्थितिकीय पुनर्स्थापन का कार्य कर चुका है।
- **कार्यान्वयन:** वृक्षारोपण और वृक्षों की देखभाल के कार्य स्थानीय संस्थाओं जैसे संयुक्त वन प्रबंधन समितियों (JFMC), ग्राम वन समितियों (VFC) और अन्य समुदाय-आधारित संगठनों के माध्यम से किए जाते हैं।
- **निगरानी:** मिशन में केंद्र और राज्य दोनों की प्रणालियों सहित बहु-स्तरीय निगरानी व्यवस्था है, जिसमें जियो-टैगिंग, GIS-आधारित मैपिंग और ड्रोन-आधारित निगरानी जैसी तकनीकें शामिल हैं। भारतीय वन सर्वेक्षण (FSI) भी रिमोट सेंसिंग और जमीनी स्तर पर जांच का उपयोग करके हर दो साल में वन क्षेत्र का आकलन करता है।
- **नगर वन योजना (NVY):** यह योजना 2020-21 से 2026-27 के दौरान शहरी इलाकों में हरियाली बढ़ाने और पर्यावरण को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से 600 नगर वनों और 400 नगर वाटिकाओं को विकसित करने हेतु कार्यान्वित की जा रही है।
- **लाभ:** ‘नगर वन’ वायु गुणवत्ता और स्थानीय मौसम (Micro-Climate) में सुधार करके पर्यावरणीय परिसंपत्तियाँ सृजित करने में उल्लेखनीय योगदान देने की उम्मीद है।
- **वित्तपोषण:** NVY के तहत वृक्षारोपण और संबंधित कार्यों के लिए राष्ट्रीय प्राधिकरण CAMPA से फंड जारी किए जाते हैं।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| एकीकृत भूदृश्य दृष्टिकोण | क्षरित वन और गैर-वन स्थलों के पुनर्स्थापन हेतु व्यापक रणनीति। |
| बहु-स्तरीय निगरानी | केन्द्र और राज्य प्रणालियों के साथ-साथ तकनीकी उपकरणों (जियो-टैगिंग, जीआईएस) का उपयोग। |
| स्थानीय समुदायों की भागीदारी | संयुक्त वन प्रबंधन समितियां (JFMC), ग्राम वन समितियां (VFC) और स्वयं-सहायता समूह (SHG) के माध्यम से क्रियान्वयन। |
| शहरी हरियाली पर ध्यान | नगर वन योजना (NVY) के तहत शहरी क्षेत्रों में वनीकरण और पर्यावरण सुधार। |
| जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्य योजना (NAPCC) का हिस्सा | जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने और अनुकूलन में योगदान। |
महत्व
पर्यावरणिक महत्व
- वन आवरण में वृद्धि और जैव विविधता का संरक्षण।
- वायु गुणवत्ता में सुधार और स्थानीय सूक्ष्म-जलवायु (Micro-climate) का विनियमन।
- मृदा अपरदन की रोकथाम और जल संरक्षण में सहायक।
सामाजिक महत्व
- स्थानीय समुदायों को आजीविका के अवसर प्रदान करना।
- वन प्रबंधन में सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देना।
- शहरी निवासियों के लिए हरित स्थानों तक पहुंच में सुधार।
शासनिक महत्व
- केन्द्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय स्थापित करना।
- तकनीकी नवाचारों (जैसे जियो-टैगिंग) का उपयोग कर परियोजनाओं की दक्षता बढ़ाना।
- नियमित मूल्यांकन (भारतीय वन सर्वेक्षण द्वारा) के माध्यम से नीति निर्माण को सूचित करना।
चुनौतियाँ
1. भूमि उपलब्धता और अतिक्रमण
- वनीकरण के लिए उपयुक्त भूमि की पहचान और उपलब्धता एक चुनौती है।
- वन भूमि पर अतिक्रमण और अवैध गतिविधियों से पुनर्स्थापन कार्य बाधित होते हैं।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण संरक्षण, भूमि सुधार
2. प्रजाति चयन और उत्तरजीविता दर
- स्थानीय पारिस्थितिकी के अनुकूल प्रजातियों का चयन महत्वपूर्ण है।
- वृक्षारोपण के बाद पौधों की कम उत्तरजीविता दर एक बड़ी चिंता है।
यूपीएससी लिंक: जैव विविधता, पारिस्थितिकी संतुलन
3. स्थानीय भागीदारी और जागरूकता
- स्थानीय समुदायों को वनीकरण प्रयासों में पूरी तरह से शामिल करना।
- पर्यावरण संरक्षण के महत्व के बारे में जागरूकता की कमी।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक वानिकी, सामुदायिक विकास
4. वित्तपोषण और संसाधनों का आवंटन
- वनीकरण परियोजनाओं के लिए पर्याप्त और समय पर धन का आवंटन सुनिश्चित करना।
- मानव संसाधन और तकनीकी विशेषज्ञता की कमी।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण शासन, सतत विकास
5. जलवायु परिवर्तन के प्रभाव
- बदलते जलवायु पैटर्न (जैसे अनियमित वर्षा, सूखे) वनीकरण प्रयासों को प्रभावित करते हैं।
- पुनर्स्थापित वनों को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के प्रति अधिक प्रतिरोधी बनाना।
यूपीएससी लिंक: जलवायु परिवर्तन, आपदा प्रबंधन
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| क्षरित वन भूमि की पहचान | सटीक डेटा और सीमांकन की कमी। |
| वृक्षारोपण के बाद रखरखाव | पौधों की उत्तरजीविता सुनिश्चित करने के लिए निरंतर देखभाल का अभाव। |
| सामुदायिक स्वामित्व | स्थानीय आबादी में वनों के प्रति स्वामित्व की भावना का विकास। |
| शहरी वनीकरण में चुनौतियाँ | शहरी क्षेत्रों में सीमित स्थान और प्रदूषण का उच्च स्तर। |
| निगरानी और मूल्यांकन की प्रभावशीलता | तकनीकी उपकरणों के बावजूद जमीनी स्तर पर कमियाँ। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- ग्रीन इंडिया मिशन (GIM)
- नगर वन योजना (NVY)
आगे की राह
- वनीकरण के लिए उपयुक्त भूमि की पहचान हेतु सुदृढ़ भू-स्थानिक डेटा का उपयोग करना।
- स्थानीय जलवायु और मृदा के अनुकूल स्वदेशी प्रजातियों के वृक्षारोपण को प्राथमिकता देना।
- स्थानीय समुदायों, विशेषकर महिलाओं और स्वयं-सहायता समूहों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना।
- वृक्षारोपण के बाद पौधों की उत्तरजीविता दर बढ़ाने के लिए प्रभावी रखरखाव रणनीतियाँ लागू करना।
- निगरानी और मूल्यांकन प्रणालियों को और अधिक मजबूत करना, जिसमें ड्रोन और AI जैसी उन्नत तकनीकों का उपयोग हो।
- शहरी क्षेत्रों में हरित आवरण बढ़ाने के लिए नगर वन योजना का विस्तार और प्रभावी कार्यान्वयन।
- वनीकरण परियोजनाओं के लिए पर्याप्त और समय पर वित्तपोषण सुनिश्चित करना तथा फंड के उपयोग में पारदर्शिता लाना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
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संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 48A: पर्यावरण का संरक्षण तथा संवर्धन और वन तथा वन्य जीवों की रक्षा।
- अनुच्छेद 51A (g): प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा और उसमें सुधार करना।
अवधारणा प्रवाह
जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभाव → क्षरित वन और गैर-वन क्षेत्रों की पहचान → ग्रीन इंडिया मिशन (GIM) का कार्यान्वयन → वृक्षारोपण और पारिस्थितिकीय पुनर्स्थापन → स्थानीय समुदायों की भागीदारी और निगरानी → वन आवरण में वृद्धि और पर्यावरणीय लाभ
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ग्रीन इंडिया मिशन (GIM) जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्य योजना (NAPCC) के तहत नौ मिशनों में से एक है।
2. GIM का उद्देश्य केवल वन क्षेत्रों में पारिस्थितिकीय पुनर्स्थापन करना है।
3. नगर वन योजना का लक्ष्य शहरी क्षेत्रों में हरियाली बढ़ाना है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है क्योंकि ग्रीन इंडिया मिशन NAPCC के नौ मिशनों में से एक है। कथन 2 गलत है क्योंकि GIM का उद्देश्य क्षरित वन और गैर-वन दोनों स्थलों की पुनर्स्थापना करना है। कथन 3 सही है क्योंकि नगर वन योजना का उद्देश्य शहरी इलाकों में हरियाली बढ़ाना है। अतः, केवल दो कथन सही हैं।
Q2. ग्रीन इंडिया मिशन (GIM) के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है?
- यह 2015-16 से कार्यान्वित किया जा रहा है।
- इसका उद्देश्य एकीकृत भूदृश्य दृष्टिकोण के माध्यम से क्षरित भूमि का पुनर्स्थापन करना है।
- इसके तहत वृक्षारोपण कार्यों की निगरानी केवल केंद्र सरकार की प्रणालियों द्वारा की जाती है।
- यह प्रौद्योगिकी आधारित निगरानी प्रणालियों जैसे जियो-टैगिंग का उपयोग करता है।
उत्तर: इसके तहत वृक्षारोपण कार्यों की निगरानी केवल केंद्र सरकार की प्रणालियों द्वारा की जाती है। — ग्रीन इंडिया मिशन के तहत वृक्षारोपण कार्यों की निगरानी केंद्र और राज्य दोनों की प्रणालियों सहित कई स्तरों वाली व्यवस्था द्वारा की जाती है, न कि केवल केंद्र सरकार द्वारा।
Q3. सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए और सूचियों के नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
सूची-I (मिशन/योजना) सूची-II (मुख्य उद्देश्य)
A. ग्रीन इंडिया मिशन 1. शहरी क्षेत्रों में हरियाली बढ़ाना
B. नगर वन योजना 2. वन क्षेत्र का आकलन और रिपोर्ट प्रकाशन
C. भारतीय वन सर्वेक्षण 3. क्षरित वन और गैर-वन स्थलों की पुनर्स्थापना
कूट:
A B C
- 3 1 2
- 1 2 3
- 2 3 1
- 3 2 1
उत्तर: 3 1 2 — ग्रीन इंडिया मिशन का मुख्य उद्देश्य क्षरित वन और गैर-वन स्थलों की पुनर्स्थापना है। नगर वन योजना का मुख्य उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में हरियाली बढ़ाना है। भारतीय वन सर्वेक्षण का मुख्य कार्य वन क्षेत्र का आकलन करना और इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट प्रकाशित करना है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में वन आवरण को बढ़ाने और क्षरित वन भूमि के पुनर्स्थापन में ‘ग्रीन इंडिया मिशन’ तथा ‘नगर वन योजना’ की भूमिका का मूल्यांकन कीजिए। इस संदर्भ में, सामुदायिक भागीदारी और प्रौद्योगिकी आधारित निगरानी के महत्व पर भी प्रकाश डालिए। (15 Marks)
रूपरेखा: परिचय: ग्रीन इंडिया मिशन (GIM) और नगर वन योजना (NVY) का संक्षिप्त परिचय दें, उनके उद्देश्यों और जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्य योजना (NAPCC) से उनके संबंध का उल्लेख करें।
मुख्य भाग:
1. ग्रीन इंडिया मिशन की भूमिका: क्षरित वन और गैर-वन स्थलों के पुनर्स्थापन में GIM के योगदान का मूल्यांकन करें। 2015-16 से अब तक किए गए पारिस्थितिकीय पुनर्स्थापन के आंकड़ों (1,84,467 हेक्टेयर) और इसके तहत शामिल राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों का उल्लेख करें।
2. नगर वन योजना की भूमिका: शहरी हरियाली बढ़ाने, वायु गुणवत्ता और स्थानीय मौसम में सुधार लाने में NVY के लक्ष्यों (600 नगर वन और 400 नगर वाटिकाएँ) पर चर्चा करें।
3. सामुदायिक भागीदारी का महत्व: संयुक्त वन प्रबंधन समितियों (JFMC), ग्राम वन समितियों (VFC) और स्वयं-सहायता समूहों (SHG) जैसी स्थानीय संस्थाओं की भूमिका पर प्रकाश डालें। वृक्षारोपण, देखभाल, नर्सरी तैयार करने और आजीविका गतिविधियों में उनकी संलग्नता का उल्लेख करें।
4. प्रौद्योगिकी आधारित निगरानी का महत्व: वृक्षारोपण कार्यों की निगरानी में जियो-टैगिंग, GIS-आधारित मैपिंग, जियो-टैग की गई तस्वीरें और ड्रोन-आधारित निगरानी जैसी तकनीकों के उपयोग पर चर्चा करें। भारतीय वन सर्वेक्षण (FSI) द्वारा रिमोट सेंसिंग और जमीनी स्तर पर जांच के माध्यम से वन क्षेत्र के आकलन और इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट (ISFR) के प्रकाशन का भी उल्लेख करें।
निष्कर्ष: इन योजनाओं के माध्यम से सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति और पर्यावरणीय स्थिरता सुनिश्चित करने में उनके समग्र प्रभाव को संक्षेप में प्रस्तुत करें।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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