खान मंत्रालय के विशेष अभियान 6 में सतत विकास की पहलें: जानें UPSC दृष्टिकोण

खान मंत्रालय के विशेष अभियान 6 में सतत विकास की पहलें: जानें UPSC दृष्टिकोण

खान मंत्रालय के विशेष अभियान 6 में सतत विकास की पहलें: जानें UPSC दृष्टिकोण

ई-कचरा प्रबंधन प्रक्रियासंग्रहई-कचरा एकत्रपृथक्करणखतरनाक व मूल्यवान अलगपुनर्चक्रणखनिज पुनर्प्राप्तिनिपटानउत्तरदायी निस्तारणचक्रीय अर्थव्यवस्थासंसाधन पुनः उपयोग
ई-कचरा प्रबंधन प्रक्रिया

✎ ई-कचरे का वैज्ञानिक संग्रह और पुनर्चक्रण (ई-अपशिष्ट (प्रबंधन) नियम, 2022 के अंतर्गत EPR के माध्यम से) पर्यावरण-संरक्षण के साथ महत्वपूर्ण खनिजों की पुनर्प्राप्ति और चक्रीय अर्थव्यवस्था, दोनों को सुदृढ़ करता है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — पर्यावरण (ई-कचरा प्रबंधन, संसाधन संरक्षण, जल संरक्षण)  |  GS Paper III — अर्थव्यवस्था (महत्वपूर्ण खनिज, चक्रीय अर्थव्यवस्था, खनन क्षेत्र)  |  GS Paper II — शासन (मंत्रालयों और सार्वजनिक उपक्रमों की भूमिका, नीति-निर्माण और क्रियान्वयन)
  • Prelims: ई-अपशिष्ट (प्रबंधन) नियम, 2022 (E-Waste (Management) Rules, 2022) और विस्तारित उत्पादक दायित्व (EPR), राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन (National Critical Mineral Mission), खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 (MMDR Act, 1957), भारतीय खान ब्यूरो (Indian Bureau of Mines) और भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) का कार्य-क्षेत्र, खतरनाक एवं अन्य अपशिष्ट (प्रबंधन और सीमा-पार संचलन) नियम, 2016, बेसल कन्वेंशन (Basel Convention) और ई-कचरे का सीमा-पार संचलन, शहरी खनन (Urban Mining) की अवधारणा, हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड (HCL) और नेशनल एल्युमिनियम कंपनी (NALCO) — सार्वजनिक क्षेत्र के खनिज उपक्रम
  • Essay: ‘कचरे से संसाधन’: चक्रीय अर्थव्यवस्था और शहरी खनन की संभावनाएँ, सार्वजनिक संस्थाओं में सतत आचरण: नीति से व्यवहार तक की चुनौती

त्वरित पुनरावृत्ति: ई-कचरे का वैज्ञानिक संग्रह और पुनर्चक्रण (ई-अपशिष्ट (प्रबंधन) नियम, 2022 के अंतर्गत EPR के माध्यम से) पर्यावरण-संरक्षण के साथ महत्वपूर्ण खनिजों की पुनर्प्राप्ति और चक्रीय अर्थव्यवस्था, दोनों को सुदृढ़ करता है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

खान मंत्रालय और उसके क्षेत्रीय कार्यालयों ने 2 अक्टूबर 2026 को शुरू हुए विशेष अभियान 6.0 के पहले पखवाड़े में सतत विकास, स्वच्छता और जिम्मेदार संसाधन प्रबंधन को बढ़ावा देने वाली कई पहलें लागू कीं। इनमें ई-कचरे का संग्रह, पृथक्करण और निपटान प्रमुख रहा। जेएनएआरडीडीसी ने एमआरएआई के सहयोग से अब तक 3,020 किलोग्राम ई-कचरा एकत्र किया है और पुनर्चक्रणकर्ताओं को ₹3,07,855 का भुगतान किया गया है। एकत्रित ई-कचरे को जिम्मेदार पुनर्चक्रण और महत्वपूर्ण खनिजों की पुनर्प्राप्ति के लिए भेजा जाएगा, जिससे चक्रीय अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा। साथ ही जल संचयन, वृक्षारोपण, एकल-उपयोग प्लास्टिक के त्याग और कार्यस्थल स्वच्छता जैसी पहलें भी की गईं।

पृष्ठभूमि

  • ई-कचरा तेज़ी से बढ़ता ठोस अपशिष्ट है, जिसमें सीसा, पारा और कैडमियम जैसे घातक तत्वों के साथ तांबा, सोना, चांदी और कोबाल्ट जैसे मूल्यवान धातु भी होते हैं। इसलिए इसका वैज्ञानिक संग्रह और पुनर्चक्रण पर्यावरण तथा संसाधन, दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
  • भारत में ई-कचरा प्रबंधन का वर्तमान ढांचा ई-अपशिष्ट (प्रबंधन) नियम, 2022 के अंतर्गत है, जिसमें विस्तारित उत्पादक दायित्व (EPR) के माध्यम से उत्पादकों, आयातकों और पुनर्चक्रणकर्ताओं की जिम्मेदारी तय की गई है।
  • महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति सुरक्षा भारत की आर्थिक और औद्योगिक नीति का केंद्रीय विषय है। राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन के अंतर्गत द्वितीयक स्रोतों, जैसे ई-कचरे और खनन-अपशिष्ट, से खनिज पुनर्प्राप्ति को प्राथमिकता दी गई है।
  • खान मंत्रालय के अधीन भारतीय खान ब्यूरो और भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण खनिज संसाधनों के सर्वेक्षण, संरक्षण और प्रबंधन से जुड़े प्रमुख संस्थान हैं। खनिज संरक्षण और सतत खनन की व्यवस्था खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 के ढांचे में आती है।
  • सरकारी कार्यालयों में एकल-उपयोग प्लास्टिक पर रोक और स्वच्छता अभियान, जैसे समय-समय पर चलाए जाने वाले विशेष अभियान, प्रशासनिक स्तर पर पर्यावरणीय आचरण को संस्थागत बनाने के प्रयास हैं।

विशेष अभियान 6.0 और ई-कचरा प्रबंधन क्या है?

  • विशेष अभियान एक निर्धारित अवधि का कार्यक्रम होता है, जिसमें मंत्रालय और उसके अधीन संगठन लंबित कार्यों के निपटान, स्वच्छता और सतत आचरण पर केंद्रित गतिविधियाँ चलाते हैं। यह अभियान 2 अक्टूबर 2026 को आरंभ हुआ।
  • ई-कचरे का प्रबंधन चार चरणों, संग्रह, पृथक्करण, पुनर्चक्रण और निपटान, में होता है। केवल अधिकृत पुनर्चक्रणकर्ताओं के माध्यम से ही इसका निपटान वैधानिक और पर्यावरण-सम्मत माना जाता है।
  • विस्तारित उत्पादक दायित्व (EPR) के अंतर्गत उत्पादकों को अपने उत्पादों के जीवन-चक्र के अंत तक उनके संग्रह और पुनर्चक्रण की जिम्मेदारी उठानी होती है।
  • चक्रीय अर्थव्यवस्था (Circular Economy) वह मॉडल है जिसमें संसाधनों का उपयोग, पुनरुपयोग और पुनर्चक्रण करके अपशिष्ट को न्यूनतम किया जाता है। ई-कचरे से धातु-पुनर्प्राप्ति इसी अवधारणा का व्यावहारिक रूप है।
  • शहरी खनन (Urban Mining) में पुराने इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और निर्माण-अपशिष्ट से धातुएँ निकाली जाती हैं। इससे प्राकृतिक खनन पर दबाव घटता है और आयात पर निर्भरता में कमी आ सकती है।
  • जल संरक्षण के अंतर्गत वर्षा जल संचयन जैसी पहलें भूजल-स्तर के संरक्षण और खनन-क्षेत्रों में जल-संतुलन बनाए रखने में सहायक होती हैं।
  • हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड और नेशनल एल्युमिनियम कंपनी जैसे सार्वजनिक उपक्रम खान मंत्रालय के अधीन हैं और खनन-धातु उद्योग में कार्यस्थल-उत्कृष्टता व पर्यावरण-प्रबंधन की भूमिका निभाते हैं।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
अभियान की अवधि विशेष अभियान 6.0 का आरंभ 2 अक्टूबर 2026 को हुआ; यह विवरण इसके पहले पखवाड़े की प्रगति बताता है
ई-कचरा संग्रह 3,020 किलोग्राम ई-कचरा एकत्र; पुनर्चक्रणकर्ताओं को ₹3,07,855 का भुगतान किया गया
जल संरक्षण हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड (HCL) ने राजस्थान के खेत्री कॉपर कॉम्प्लेक्स (KCC) में वर्षा जल संचयन पहल का उद्घाटन किया
एकल-उपयोग प्लास्टिक पर रोक भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (Geological Survey of India, GSI) ने बैठकों में प्लास्टिक की बोतलों की जगह स्टेनलेस स्टील/धातु की बोतलें और कांच के जग अपनाए
कार्यस्थल और कर्मचारी स्तर की पहल नेशनल एल्युमिनियम कंपनी लिमिटेड (NALCO) की स्वच्छ डेस्क प्रतियोगिता और ‘एक कर्मचारी, एक हरित’ पहल; भारतीय खान ब्यूरो (Indian Bureau of Mines, IBM) की अपशिष्ट से धन पहलें
ई-कचरे से खनिज पुनर्प्राप्ति जवाहरलाल नेहरू एल्युमिनियम अनुसंधान विकास एवं डिजाइन केंद्र (JNARDDC) और मैटेरियल्स रिसाइक्लिंग एसोसिएशन ऑफ इंडिया (MRAI) के सहयोग से महत्वपूर्ण खनिजों की पुनर्प्राप्ति और चक्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा

महत्व

पर्यावरणीय महत्व

  • ई-कचरे में सीसा, पारा और कैडमियम जैसे विषैले तत्व होते हैं; असुरक्षित निपटान से मिट्टी और भूजल प्रदूषित होता है। संग्रह और पृथक्करण इस जोखिम को सीमित करता है।
  • वर्षा जल संचयन से भूजल का पुनर्भरण होता है, जो जल-तनाव वाले राजस्थान जैसे क्षेत्रों में विशेष रूप से उपयोगी है।
  • वृक्षारोपण और अपशिष्ट से हरित स्थल बनाने की पहलें खनन-प्रधान परिसरों में हरित आवरण बढ़ाने में सहायक हैं।

संसाधन और आर्थिक महत्व

  • ई-कचरे से तांबा, एल्युमिनियम और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों की पुनर्प्राप्ति से प्राथमिक खनन पर निर्भरता घटती है और आयात पर दबाव कम होता है।
  • चक्रीय अर्थव्यवस्था में अपशिष्ट को संसाधन माना जाता है, जिससे पुनर्चक्रण क्षेत्र में रोजगार और औपचारिक व्यापार के अवसर बनते हैं।
  • पुनर्चक्रणकर्ताओं को किया गया भुगतान यह दिखाता है कि अपशिष्ट का आर्थिक मूल्य भी है, जो संग्रह को प्रोत्साहन देता है।

शासन और संस्थागत महत्व

  • मंत्रालय और उसके क्षेत्रीय संगठनों द्वारा स्थानीय स्तर पर पहलें करना विकेंद्रीकृत कार्यान्वयन का उदाहरण है।
  • कार्यस्थल स्तर पर स्वच्छता और व्यवहार परिवर्तन से सरकारी कार्यालयों में एकल-उपयोग प्लास्टिक जैसी आदतों में सुधार होता है।
  • विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (Extended Producer Responsibility, EPR) की व्यवस्था के अंतर्गत निर्माताओं और पुनर्चक्रणकर्ताओं के बीच समन्वय इस तरह के प्रयासों से मजबूत होता है।

चुनौतियाँ

1. ई-कचरे का अनौपचारिक क्षेत्र

  • ई-कचरे का बड़ा हिस्सा असंगठित क्षेत्र में पृथक्करण और निपटान से गुजरता है, जहाँ मानक सुरक्षा और पर्यावरणीय नियंत्रण कमजोर हैं।
  • औपचारिक संग्रह केंद्रों तक ई-कचरा पहुँचाने के लिए उपभोक्ता जागरूकता और सुविधाजनक व्यवस्था आवश्यक है।

2. अभियान-आधारित प्रयासों की निरंतरता

  • विशेष अभियान समयबद्ध होते हैं; पखवाड़े के बाद गतिविधियों का स्थायी बने रहना अलग प्रशासनिक व्यवस्था पर निर्भर करता है।
  • अलग-अलग संगठनों के बीच मानकीकृत रिपोर्टिंग और निगरानी का अभाव प्रभाव के मूल्यांकन को कठिन बनाता है।

3. खनन क्षेत्र का पारिस्थितिक प्रभाव

  • खनन से भूमि अवक्रमण, वनावरण की हानि और अपशिष्ट ढेर बनने की समस्या उत्पन्न होती है; खान बंद होने के बाद भूमि पुनरुद्धार अनिवार्य है।
  • खनिज निष्कर्षण और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाना विकास और पारिस्थितिकी दोनों के हित में आवश्यक है।

4. जल-तनाव और भूजल का दोहन

  • खनन और औद्योगिक इकाइयों में जल की माँग अधिक होती है; वर्षा जल संचयन जैसी पहलें इसका आंशिक समाधान हैं, पूर्ण नहीं।
  • भूजल स्तर में गिरावट वाले क्षेत्रों में जल पुनर्भरण की वैज्ञानिक योजना और मापन आवश्यक है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

समस्या चिंता
अनौपचारिक पुनर्चक्रण असुरक्षित तरीकों से विषैले धातु मिट्टी और जल में पहुँचते हैं
संग्रह का सीमित पैमाना 3,020 किलोग्राम की मात्रा देश में उत्पन्न होने वाले ई-कचरे के सामने बहुत कम है
एकल-उपयोग प्लास्टिक का व्यापक चलन सीमित संस्थानों में प्रतिबंध से पूरे तंत्र में बदलाव नहीं आता
डेटा और जवाबदेही संग्रह, भुगतान और पुनर्चक्रण की मात्रा का सार्वजनिक और मानकीकृत आँकड़ा उपलब्ध न होना
खनिज पुनर्प्राप्ति की तकनीकी क्षमता पुनर्चक्रण से महत्वपूर्ण खनिजों की शुद्ध और लागत-प्रभावी पुनर्प्राप्ति के लिए उन्नत तकनीक आवश्यक

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • एक पेड़ मां के नाम (संगठन-स्तरीय वृक्षारोपण पहल)
  • एक कर्मचारी, एक हरित (कार्मिक-स्तरीय पर्यावरण पहल)
  • राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन (National Critical Mineral Mission)

आगे की राह

  • ई-कचरा संग्रह को औपचारिक पुनर्चक्रण तंत्र से जोड़कर विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व के अनुपालन की निगरानी मजबूत की जाए।
  • असंगठित क्षेत्र के पुनर्चक्रणकर्ताओं को प्रशिक्षण, प्रमाणन और सुरक्षित उपकरण देकर औपचारिक ढांचे में शामिल किया जाए।
  • संग्रह, पृथक्करण और खनिज पुनर्प्राप्ति के आँकड़े एक मानकीकृत डिजिटल प्रणाली में दर्ज कर सार्वजनिक किए जाएँ।
  • खनन क्षेत्रों में भूमि पुनरुद्धार और वृक्षारोपण को खनन योजना का अनिवार्य हिस्सा बनाया जाए।
  • वर्षा जल संचयन जैसी पहलों को स्थानीय भूजल स्थिति के वैज्ञानिक आकलन के आधार पर विस्तारित किया जाए।
  • सरकारी कार्यालयों में एकल-उपयोग प्लास्टिक के विकल्प को नियमित खरीद और निगरानी के साथ लागू किया जाए, ताकि पहल स्थायी बने।
  • अभियानों के बाद भी गतिविधियाँ जारी रहें, इसके लिए संगठनों के वार्षिक लक्ष्य और प्रदर्शन-आधारित मूल्यांकन तय किए जाएँ।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

ई-कचरा प्रबंधन · विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (Extended Producer Responsibility) · चक्रीय अर्थव्यवस्था (Circular Economy) · शहरी खनन (Urban Mining) · महत्वपूर्ण खनिज (Critical Minerals) · राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन (National Critical Mineral Mission) · खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 · सतत खनन (Sustainable Mining) · जल संरक्षण और वर्षा जल संचयन · आयात निर्भरता में कमी · असंगठित क्षेत्र का औपचारिकीकरण · सर्वोत्तम प्रथाएँ और कार्यस्थल उत्कृष्टता

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 48A — राज्य का पर्यावरण संरक्षण दायित्व
  • अनुच्छेद 51A(g) — प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा कर्तव्य
  • अनुच्छेद 21 — स्वच्छ पर्यावरण का न्यायिक अधिकार
  • सातवीं अनुसूची, संघ सूची प्रविष्टि 54 — खान विनियमन का अधिकार

अवधारणा प्रवाह

ई-कचरे और खनन अपशिष्ट से पर्यावरणीय जोखिम उत्पन्न होता है  →  विशेष अभियान 6.0 के अंतर्गत संगठन संग्रह, जल संरक्षण और वृक्षारोपण की पहल शुरू करते हैं  →  ई-कचरे का पृथक्करण और पुनर्चक्रणकर्ताओं को भुगतान संग्रह को प्रोत्साहित करता है  →  JNARDDC और MRAI के सहयोग से पुनर्चक्रण केंद्रों तक सामग्री पहुँचती है  →  महत्वपूर्ण खनिजों की पुनर्प्राप्ति से प्राथमिक खनन और आयात पर निर्भरता घटती है  →  चक्रीय अर्थव्यवस्था बनती है, जिससे पर्यावरणीय जिम्मेदारी और संसाधन संरक्षण दोनों सुदृढ़ होते हैं

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ई-अपशिष्ट (प्रबंधन) नियम, 2022 में उत्पादकों पर विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR) का सिद्धांत लागू किया गया है।
2. ई-कचरे के पुनर्चक्रण से तांबा, एल्युमिनियम और अन्य मूल्यवान धातुओं की पुनर्प्राप्ति संभव है।
3. भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) खान मंत्रालय के अधीन कार्य करने वाला संगठन है।

उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. उपर्युक्त में से कोई नहीं

उत्तर: केवल तीन — कथन 1 सही है: ई-अपशिष्ट नियम, 2022 में EPR आधारित ढाँचा है, जिसमें उत्पादकों को संग्रहण और पुनर्चक्रण के लक्ष्य पूरे करने होते हैं। कथन 2 सही है: ई-कचरे में तांबा, एल्युमिनियम, सोना और चाँदी जैसी धातुएँ पुनर्प्राप्त की जा सकती हैं। कथन 3 सही है: GSI खान मंत्रालय के अधीन भूविज्ञान और खनिज सर्वेक्षण का प्रमुख संगठन है, जिसका केंद्रीय मुख्यालय कोलकाता में है।

Q2. निम्नलिखित में से प्रत्येक कथन A (अभिकथन) और R (कारण) के रूप में दिया गया है:
A (अभिकथन): ई-कचरे से महत्वपूर्ण खनिजों की पुनर्प्राप्ति भारत की खनिज आयात पर निर्भरता को कम करने में सहायक हो सकती है।
R (कारण): ई-कचरे में कई महत्वपूर्ण और मूल्यवान धातुएँ अपेक्षाकृत उच्च सांद्रता में पाई जाती हैं, जिन्हें वैज्ञानिक पुनर्चक्रण से वापस प्राप्त किया जा सकता है।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:

  1. A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है
  2. A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है
  3. A सही है, लेकिन R गलत है
  4. A गलत है, लेकिन R सही है

उत्तर: A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है — A और R दोनों सही हैं। ई-कचरे में पुनर्प्राप्त करने योग्य धातुओं की सांद्रता प्राकृतिक अयस्क से कई गुना अधिक हो सकती है, इसलिए यह ‘शहरी खनन’ का स्रोत है। यही कारण A की व्याख्या करता है कि पुनर्चक्रण से आयात-निर्भरता घटती है।

Q3. निम्नलिखित सुमेलों पर विचार कीजिए:

सूची I (अवधारणा) सूची II (अर्थ)
1. चक्रीय अर्थव्यवस्था A. उत्पादक द्वारा उत्पाद के जीवन-चक्र के अंत तक निपटान की जिम्मेदारी
2. विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व B. संसाधनों का बार-बार उपयोग, पुनर्चक्रण और अपशिष्ट को न्यूनतम करने वाला आर्थिक मॉडल
3. शहरी खनन C. बेकार इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से धातुओं की पुनर्प्राप्ति

सही सुमेलन का चयन कीजिए:

  1. 1-B, 2-A, 3-C
  2. 1-A, 2-B, 3-C
  3. 1-B, 2-C, 3-A
  4. 1-C, 2-A, 3-B

उत्तर: 1-B, 2-A, 3-C — चक्रीय अर्थव्यवस्था (1) संसाधनों के पुनः उपयोग और अपशिष्ट न्यूनीकरण का मॉडल है, अतः 1-B। विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (2) में उत्पादक का अपने उत्पाद के अंत तक का दायित्व होता है, अतः 2-A। शहरी खनन (3) बेकार उपकरणों से धातु निकालने की प्रक्रिया है, अतः 3-C।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ ई-कचरे के पुनर्चक्रण से महत्वपूर्ण खनिजों की पुनर्प्राप्ति भारत की खनिज सुरक्षा और चक्रीय अर्थव्यवस्था को किस प्रकार सुदृढ़ कर सकती है? भारत की वर्तमान ई-कचरा प्रबंधन नीति के संदर्भ में इसकी सीमाओं का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. भूमिका: ई-कचरे को ‘शहरी खनन’ का स्रोत मानने की अवधारणा तथा विशेष अभियान 6.0 में खान मंत्रालय और उसके संगठनों (HCL, NALCO, IBM, GSI, JNARDDC) की पहलें; JNARDDC द्वारा MRAI के सहयोग से 3,020 किलोग्राम ई-कचरा संग्रह और ₹3,07,855 के भुगतान का उल्लेख।
2. खनिज सुरक्षा का आयाम: महत्वपूर्ण खनिजों (लिथियम, कोबाल्ट, निकल, तांबा आदि) की आयात-निर्भरता; राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन (National Critical Mineral Mission) का लक्ष्य; पुनर्चक्रण को प्राथमिक खनन के पूरक के रूप में देखना।
3. चक्रीय अर्थव्यवस्था का आयाम: संसाधन-दक्षता, अपशिष्ट न्यूनीकरण और ‘कूड़े से धन’ (Waste to Wealth) मॉडल; पर्यावरणीय न्याय के लिए ‘प्रदूषक भुगतान सिद्धांत’ (Polluter Pays Principle) और ‘सावधानी सिद्धांत’ (Precautionary Principle)।
4. वैधानिक ढाँचा: ई-अपशिष्ट (प्रबंधन) नियम, 2022 (EPR, उत्पादकों का पंजीकरण, संग्रह और पुनर्चक्रण लक्ष्य); खतरनाक अपशिष्ट (प्रबंधन, प्रक्रियाकरण और सीमापार आवागमन) नियम, 2016; बेसल कन्वेंशन (Basel Convention) के अंतर्गत सीमापार अपशिष्ट आवागमन पर भारत की प्रतिबद्धताएँ; पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986; खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 के दायरे में खनन और पुनर्चक्रण का संबंध।
5. सीमाएँ/समालोचना: (क) असंगठित क्षेत्र (कबाड़ी और अनौपचारिक श्रमिक) का विशाल हिस्सा, जिससे संग्रह के आँकड़ों और सुरक्षित प्रक्रिया में अंतर; (ख) छोटे पैमाने पर संग्रहण अभियानों की सीमित मात्रा बनाम अनुमानित वार्षिक ई-कचरा; (ग) EPR लक्ष्यों की निगरानी और अनुपालन की चुनौती; (घ) पुनर्चक्रण तकनीक में निवेश तथा खतरनाक पदार्थों (पारा, सीसा, कैडमियम) के सुरक्षित निपटान की चुनौती; (ङ) बिना आधुनिक तकनीक के अनौपचारिक तरीकों से होने वाला पर्यावरणीय और स्वास्थ्य नुकसान।
6. संतुलित दृष्टिकोण: औपचारिक पुनर्चक्रण क्षेत्र के विकास से रोजगार और असंगठित श्रमिकों के कौशल-उन्नयन के अवसर; PSU-आधारित प्रायोगिक पहलों को नीति-क्रियान्वयन की दृष्टि से देखना; वैश्विक अनुभव (यूरोपीय संघ के EPR मॉडल) से सीख।
7. निष्कर्ष: ई-कचरा पुनर्चक्रण को खनिज-नीति, पर्यावरण-नीति और रोजगार-नीति के समन्वय के रूप में देखते हुए, केवल अभियान-आधारित प्रयासों के बजाय संस्थागत निगरानी, डेटा-पारदर्शिता और औपचारिकीकरण पर बल देना।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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