06 Aug गगनयान मिशन: भारत के मानव अंतरिक्ष रोडमैप की प्रमुख उपलब्धियां और भविष्य की योजनाएं
✎ गगनयान मिशन भारत का पहला मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम है, जिसका लक्ष्य 2026 की चौथी तिमाही में मानवरहित मिशन और 2035 तक भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन की स्थापना के साथ मानव अंतरिक्ष अन्वेषण में आत्मनिर्भरता प्राप्त करना है।

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (Science and Technology) | GS Paper III — आंतरिक सुरक्षा (Internal Security) — (अंतरिक्ष सुरक्षा के निहितार्थ)
- Prelims: गगनयान मिशन, व्योममित्र, मानव-रेटेड प्रक्षेपण यान (HLVM3), क्रू एस्केप सिस्टम (CES), भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS), ISRO, अंतरिक्ष अन्वेषण, TV-D1 मिशन
- Essay: भारत की वैज्ञानिक प्रगति और आत्मनिर्भरता, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी: विकास और चुनौतियाँ
त्वरित पुनरावृत्ति: गगनयान मिशन भारत का पहला मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम है, जिसका लक्ष्य 2026 की चौथी तिमाही में मानवरहित मिशन और 2035 तक भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन की स्थापना के साथ मानव अंतरिक्ष अन्वेषण में आत्मनिर्भरता प्राप्त करना है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने राज्यसभा को गगनयान मिशन और भारत के मानव अंतरिक्ष अन्वेषण रोडमैप की प्रमुख उपलब्धियों से अवगत कराया है। उन्होंने बताया कि भारत का पहला मानव अंतरिक्ष मिशन ‘गगनयान’ महत्वपूर्ण मानव-रेटिंग उपलब्धियों के साथ वास्तविकता के और निकट पहुँच गया है। इसके साथ ही, भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS) को 2035 तक चालू करने की योजना भी साझा की गई है, जो भारत के दीर्घकालिक अंतरिक्ष अन्वेषण दृष्टिकोण को दर्शाता है।
पृष्ठभूमि
- भारत का पहला मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन ‘गगनयान’ देश के पहले स्वदेशी मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन की दिशा में निरंतर प्रगति कर रहा है।
- मानव-रेटेड प्रक्षेपण यान (HLVM3) के सभी प्रणोदन चरणों और संरचनाओं का विकास तथा ग्राउंड टेस्टिंग पूरी कर ली गई है।
- क्रू मॉड्यूल और सर्विस मॉड्यूल के प्रणोदन प्रणालियों का विकास, परीक्षण और प्रमाणीकरण हो चुका है, साथ ही पर्यावरण नियंत्रण और जीवन समर्थन प्रणाली (ECLSS) का भी सफलतापूर्वक विकास और परीक्षण किया गया है।
- क्रू एस्केप सिस्टम (CES) के लिए आवश्यक सभी पाँच प्रकार के मोटरों का विकास और सफल स्थिर परीक्षण किया गया है, जो अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण है।
- TV-D1 प्रक्षेपण यान मिशन, जिसका उद्देश्य उड़ान के दौरान क्रू एस्केप सिस्टम का सत्यापन करना था, सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है।
गगनयान मिशन क्या है?
- गगनयान मिशन भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) का एक महत्वाकांक्षी कार्यक्रम है जिसका उद्देश्य भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी की निचली कक्षा में भेजना और उन्हें सुरक्षित वापस लाना है।
- इस मिशन के तहत, तीन अंतरिक्ष यात्रियों के एक दल को 400 किलोमीटर की ऊँचाई पर पृथ्वी की निचली कक्षा में तीन दिनों के मिशन के लिए भेजा जाएगा।
- मिशन में उपयोग होने वाले प्रक्षेपण यान को ‘मानव-रेटेड प्रक्षेपण यान’ (HLVM3) कहा जाता है, जो GSLV Mk-III रॉकेट का एक संशोधित संस्करण है।
- मिशन में एक ‘क्रू मॉड्यूल’ होगा जिसमें अंतरिक्ष यात्री रहेंगे और एक ‘सर्विस मॉड्यूल’ होगा जो मिशन के दौरान आवश्यक प्रणालियों को शक्ति प्रदान करेगा।
- अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ‘क्रू एस्केप सिस्टम’ (CES) एक महत्वपूर्ण घटक है, जो आपात स्थिति में क्रू मॉड्यूल को रॉकेट से अलग कर देगा।
- पहला मानवरहित प्रायोगिक गगनयान मिशन, जिसमें ‘व्योममित्र’ (हाफ-ह्यूमनॉइड) अर्ध-मानव को ले जाया जाएगा, 2026 की चौथी तिमाही में लक्षित है।
- भारत का पहला मानव कक्षीय मिशन से पहले 2027 तक पहले क्रू उड़ान के कॉन्फ़िगरेशन में दो अतिरिक्त मानवरहित मिशन का लक्ष्य रखा गया है।
- दीर्घकालिक योजना के तहत, भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS) को 2035 तक चालू करने की योजना है, जिसके पहले मॉड्यूल BAS-01 के विकास और प्रक्षेपण को मंजूरी मिल चुकी है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| मानव-रेटेड प्रक्षेपण यान (HLVM3) | गगनयान मिशन के लिए आवश्यक सुरक्षित और विश्वसनीय प्रक्षेपण क्षमता का आधार। |
| क्रू मॉड्यूल और सर्विस मॉड्यूल प्रणोदन प्रणाली | अंतरिक्ष में अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा और मॉड्यूल की गतिशीलता सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण। |
| पर्यावरण नियंत्रण और जीवन समर्थन प्रणाली (ECLSS) | अंतरिक्ष यात्रियों के लिए एक सुरक्षित और रहने योग्य वातावरण बनाए रखने हेतु अनिवार्य। |
| क्रू एस्केप सिस्टम (CES) | किसी भी आपात स्थिति में अंतरिक्ष यात्रियों की जान बचाने के लिए एक महत्वपूर्ण सुरक्षा तंत्र। |
| व्योममित्र (हाफ-ह्यूमनॉइड) मानवरहित मिशन | मानव अंतरिक्ष उड़ान से पहले महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों और प्रणालियों का सत्यापन। |
| भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS) 2035 तक | भारत के दीर्घकालिक मानव अंतरिक्ष अन्वेषण विजन और अंतरिक्ष में स्थायी उपस्थिति का लक्ष्य। |
महत्व
वैज्ञानिक और तकनीकी महत्व
- मानव अंतरिक्ष उड़ान से संबंधित जटिल प्रौद्योगिकियों का विकास और परीक्षण, जैसे जीवन समर्थन प्रणाली, प्रणोदन प्रणाली और क्रू एस्केप सिस्टम, भारत की वैज्ञानिक और तकनीकी क्षमताओं को बढ़ाता है।
- यह मिशन अंतरिक्ष विज्ञान, खगोल विज्ञान और भौतिकी के क्षेत्र में नए शोध के अवसर प्रदान करेगा, जिससे ब्रह्मांड की हमारी समझ में वृद्धि होगी।
रणनीतिक महत्व
- भारत का मानव अंतरिक्ष अन्वेषण कार्यक्रम उसे वैश्विक अंतरिक्ष शक्ति के रूप में स्थापित करता है, जिससे भू-राजनीतिक प्रभाव और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के अवसर बढ़ते हैं।
- स्वदेशी क्षमताओं का विकास बाहरी निर्भरता को कम करता है और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण रणनीतिक स्वायत्तता प्रदान करता है।
आर्थिक महत्व
- अंतरिक्ष क्षेत्र में निवेश से उच्च प्रौद्योगिकी उद्योगों को बढ़ावा मिलता है, जिससे रोजगार सृजन और आर्थिक संवृद्धि होती है।
- मिशन के लिए विकसित प्रौद्योगिकियों का उपयोग अन्य क्षेत्रों में भी किया जा सकता है, जिससे स्पिन-ऑफ लाभ प्राप्त होते हैं।
सामाजिक महत्व
- गगनयान मिशन युवाओं को विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) क्षेत्रों में करियर बनाने के लिए प्रेरित करेगा, जिससे देश में वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा मिलेगा।
- यह राष्ट्रीय गौरव और आत्मविश्वास की भावना को बढ़ावा देता है, जिससे नागरिकों में एकता और उपलब्धि की भावना मजबूत होती है।
चुनौतियाँ
1. तकनीकी जटिलताएँ
- मानव-रेटेड प्रणालियों का विकास और प्रमाणीकरण अत्यंत जटिल है, जिसमें शून्य त्रुटि की आवश्यकता होती है।
- जीवन समर्थन प्रणाली, तापीय सुरक्षा और पुन:प्रवेश प्रौद्योगिकियों का सफल कार्यान्वयन एक बड़ी चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी – अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी
2. बजटीय और वित्तीय बाधाएँ
- मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम के लिए 20,193 करोड़ रुपये का बड़ा बजटीय आवंटन आवश्यक है, जिसके लिए निरंतर वित्तीय सहायता की आवश्यकता होगी।
- परियोजना की लागत में वृद्धि या देरी से वित्तीय दबाव बढ़ सकता है।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था – राजकोषीय नीति
3. अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और नियामक मुद्दे
- अंतर्राष्ट्रीय भागीदारों के साथ सहयोग (जैसे ESA, ASA, फ्रांसीसी एजेंसियां) समन्वय और डेटा साझाकरण की चुनौतियाँ प्रस्तुत कर सकता है।
- अंतरिक्ष गतिविधियों से संबंधित अंतर्राष्ट्रीय नियमों और संधियों का पालन करना आवश्यक है।
यूपीएससी लिंक: अंतर्राष्ट्रीय संबंध – अंतरिक्ष कूटनीति
4. मानव सुरक्षा और विश्वसनीयता
- अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सर्वोच्च प्राथमिकता है, जिसके लिए कठोर परीक्षण और बैकअप प्रणालियों की आवश्यकता होती है।
- प्रणालीगत विफलता का जोखिम हमेशा बना रहता है, जिसे कम करने के लिए व्यापक सुरक्षा उपाय आवश्यक हैं।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी – आपदा प्रबंधन
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| मानव-रेटिंग प्रमाणीकरण | प्रणालियों की उच्चतम सुरक्षा और विश्वसनीयता सुनिश्चित करना। |
| प्रौद्योगिकी विकास और एकीकरण | जटिल उप-प्रणालियों को एक साथ निर्बाध रूप से काम कराना। |
| मिशन अनुसूची का पालन | निर्धारित समय-सीमा के भीतर सभी परीक्षणों और मिशनों को पूरा करना। |
| अंतरिक्ष यात्रियों का प्रशिक्षण और स्वास्थ्य | अंतरिक्ष के कठोर वातावरण के लिए शारीरिक और मानसिक तैयारी। |
| बजट और संसाधन आवंटन | इतने बड़े और महत्वाकांक्षी कार्यक्रम के लिए निरंतर धन सुनिश्चित करना। |
| अंतर्राष्ट्रीय सहयोग का प्रबंधन | विभिन्न देशों और एजेंसियों के साथ प्रभावी समन्वय। |
आगे की राह
- मानव-रेटेड प्रणालियों के विकास और प्रमाणीकरण में निरंतर निवेश और कठोर परीक्षण प्रोटोकॉल का पालन करना।
- व्योममित्र मिशन और आगामी मानवरहित मिशनों के माध्यम से सभी प्रौद्योगिकियों का चरणबद्ध और व्यापक सत्यापन सुनिश्चित करना।
- अंतरिक्ष यात्रियों के प्रशिक्षण, स्वास्थ्य और सुरक्षा प्रोटोकॉल को अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप और अधिक मजबूत बनाना।
- भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS) के विकास के लिए एक स्पष्ट रोडमैप और पर्याप्त बजटीय आवंटन सुनिश्चित करना।
- अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसियों के साथ सहयोग को और गहरा करना, विशेष रूप से क्रू रिकवरी और नेटवर्क संचालन सहायता जैसे क्षेत्रों में।
- निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देना और अंतरिक्ष स्टार्टअप्स को मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम में योगदान करने के लिए प्रोत्साहित करना।
- अंतरिक्ष मलबे (Space Debris) और अंतरिक्ष यातायात प्रबंधन (Space Traffic Management) जैसी उभरती चुनौतियों का समाधान करने के लिए नीतियां विकसित करना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
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अवधारणा प्रवाह
गगनयान मिशन की घोषणा और प्रारंभिक बजटीय आवंटन → मानव-रेटेड प्रक्षेपण यान और क्रू मॉड्यूल प्रणालियों का विकास → क्रू एस्केप सिस्टम और जीवन समर्थन प्रणाली का सफल परीक्षण → व्योममित्र के साथ मानवरहित प्रायोगिक मिशन (2026 की चौथी तिमाही) → दो अतिरिक्त मानवरहित मिशन (2027 तक) → भारत का पहला मानव कक्षीय मिशन → भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS) की स्थापना (2035 तक)
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. गगनयान मिशन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. गगनयान मिशन का लक्ष्य 2026 की चौथी तिमाही में व्योममित्र नामक अर्ध-मानव को ले जाने वाला पहला मानवरहित प्रायोगिक मिशन भेजना है।
2. भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS) को 2035 तक चालू करने की योजना है।
3. क्रू एस्केप सिस्टम (CES) का सफल परीक्षण गगनयान मिशन की सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 गलत है क्योंकि व्योममित्र को ले जाने वाला पहला मानवरहित प्रायोगिक गगनयान मिशन 2026 की चौथी तिमाही में लक्षित है, लेकिन यह पहला मानव अंतरिक्ष मिशन नहीं है, बल्कि एक प्रायोगिक मिशन है। पहला मानव कक्षीय मिशन इसके बाद 2027 तक दो अतिरिक्त मानवरहित मिशनों के बाद लक्षित है। कथन 2 और 3 सही हैं, भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन को 2035 तक चालू करने की योजना है और क्रू एस्केप सिस्टम का सफल परीक्षण एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन गगनयान मिशन के संबंध में सही नहीं है?
- मानव-रेटेड प्रक्षेपण यान (HLVM3) के सभी प्रणोदन चरणों और संरचनाओं का विकास तथा ग्राउंड टेस्टिंग पूरी हो चुकी है।
- पर्यावरण नियंत्रण और जीवन समर्थन प्रणाली (ECLSS) का सफलतापूर्वक विकास और परीक्षण किया जा चुका है।
- गगनयान मिशन के लिए 20,193 करोड़ रुपये का बजटीय आवंटन सितंबर 2024 में स्वीकृत किया गया था।
- यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) के साथ क्रू और क्रू मॉड्यूल रिकवरी के लिए सहयोग किया जा रहा है।
उत्तर: यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) के साथ क्रू और क्रू मॉड्यूल रिकवरी के लिए सहयोग किया जा रहा है। — विकल्प D गलत है। यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) के साथ नेटवर्क संचालन सहायता के लिए सहयोग किया जा रहा है, जबकि क्रू और क्रू मॉड्यूल रिकवरी के लिए ऑस्ट्रेलियाई अंतरिक्ष एजेंसी (ASA) के साथ सहयोग किया जा रहा है। अन्य सभी कथन सही हैं।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ गगनयान मिशन भारत के मानव अंतरिक्ष अन्वेषण के दीर्घकालिक दृष्टिकोण में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। इस कथन के आलोक में, गगनयान मिशन की प्रमुख उपलब्धियों और भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन की स्थापना की दिशा में सरकार के रोडमैप का विश्लेषण कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: उत्तर में गगनयान मिशन की वर्तमान स्थिति और प्रमुख तकनीकी उपलब्धियों का विस्तृत विश्लेषण शामिल होना चाहिए, जैसे मानव-रेटेड प्रक्षेपण यान, क्रू मॉड्यूल, पर्यावरण नियंत्रण और जीवन समर्थन प्रणाली (ECLSS), क्रू एस्केप सिस्टम (CES) का विकास और परीक्षण। इसमें टीवी-डी1 जैसे परीक्षण यान मिशनों की सफलता का भी उल्लेख होना चाहिए। इसके बाद, भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS) के लिए सरकार के दीर्घकालिक दृष्टिकोण, 2035 तक इसे चालू करने की योजना, पांच मॉड्यूल वाली संरचना और पहले मॉड्यूल BAS-01 के विकास की प्रगति पर प्रकाश डालना चाहिए। अंत में, इन पहलों के रणनीतिक महत्व और भारत के मानव अंतरिक्ष अन्वेषण में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने में उनकी भूमिका पर चर्चा करें।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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