गुजरात में सेमीकंडक्टर फैसिलिटी के लिए 12 घंटे शिफ्ट की अनुमति, जानिए नियम

Gujarat permits Sanand semiconductor facility to operate 12-hour shifts — labelled illustration

गुजरात में सेमीकंडक्टर फैसिलिटी के लिए 12 घंटे शिफ्ट की अनुमति, जानिए नियम

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✎ व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य शर्तें (OSH) संहिता, 2020, भारत में श्रम कानूनों को सुव्यवस्थित करती है, जिसका उद्देश्य श्रमिकों की सुरक्षा और स्वास्थ्य सुनिश्चित करते हुए 'ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस' को बढ़ावा देना है, जिसमें…

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — शासन, सामाजिक न्याय  |  GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधन जुटाना, संवृद्धि, विकास और रोज़गार
  • Prelims: व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य शर्तें संहिता, 2020, श्रम संहिताएँ, सेमीकंडक्टर विनिर्माण, गुजरात औद्योगिक नीति, श्रम अधिकार, ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस
  • Essay: भारत में आर्थिक विकास और श्रम सुधार, औद्योगिक विकास और श्रमिकों का कल्याण: एक संतुलन

त्वरित पुनरावृत्ति: व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य शर्तें (OSH) संहिता, 2020, भारत में श्रम कानूनों को सुव्यवस्थित करती है, जिसका उद्देश्य श्रमिकों की सुरक्षा और स्वास्थ्य सुनिश्चित करते हुए ‘ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस’ को बढ़ावा देना है, जिसमें राज्य सरकारों को कुछ शर्तों के साथ कार्य घंटों में छूट देने का अधिकार है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

गुजरात सरकार ने माइक्रोन सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की सानंद इकाई को 12 घंटे की कार्य-शिफ्ट संचालित करने की अनुमति दी है। यह अनुमति व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य शर्तें (OSH) संहिता, 2020 के प्रावधानों के तहत दी गई है, जिसमें साप्ताहिक कार्य सीमा 48 घंटे बनाए रखी गई है। यह कदम राज्य में सेमीकंडक्टर विनिर्माण को बढ़ावा देने और आर्थिक संवृद्धि तथा रोज़गार सृजन को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

पृष्ठभूमि

  • व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य शर्तें (OSH) संहिता, 2020, भारत में श्रम कानूनों को सुव्यवस्थित करने वाली चार श्रम संहिताओं में से एक है, जिसे 21 नवंबर, 2025 को लागू किया गया था।
  • यह संहिता राज्य सरकारों को कुछ सुरक्षा उपायों के अधीन कारखानों को विशिष्ट प्रावधानों से छूट देने का अधिकार देती है, बशर्ते साप्ताहिक कार्य सीमा का उल्लंघन न हो।
  • सानंद सुविधा को दी गई अनुमति इस शर्त के साथ है कि कुल साप्ताहिक कार्य घंटे 48 घंटे से अधिक नहीं होने चाहिए, जिसमें शेष दिन सवेतन अवकाश के रूप में माने जाएंगे।
  • 12 घंटे की शिफ्ट में काम करने के लिए श्रमिकों की लिखित और स्वैच्छिक सहमति अनिवार्य है।
  • कार्य का कुल फैलाव, जिसमें विश्राम अंतराल भी शामिल है, एक दिन में 12 घंटे से अधिक नहीं होना चाहिए।
  • यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब गुजरात सेमीकंडक्टर क्षेत्र में अपने नेतृत्व को मज़बूत करने का प्रयास कर रहा है, जिसमें फैब्रिकेशन, असेंबली, पैकेजिंग, परीक्षण और उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण शामिल हैं।

व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य शर्तें (OSH) संहिता, 2020

  • OSH संहिता, 2020, भारत में 13 केंद्रीय श्रम कानूनों को समाहित करती है, जिनका उद्देश्य श्रमिकों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य शर्तों को विनियमित करना है।
  • इसका मुख्य उद्देश्य ‘ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस’ (Ease of Doing Business) को बढ़ावा देना और अनुपालन को सरल बनाना है, साथ ही श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा करना भी है।
  • संहिता में अधिकतम 48 घंटे प्रति सप्ताह की कार्य सीमा निर्धारित की गई है, लेकिन यह उपयुक्त सरकार (राज्य सरकार) को कारखानों के मामले में छूट देने का अधिकार देती है।
  • यह संहिता कार्यस्थल पर सुरक्षा मानकों, स्वास्थ्य सुविधाओं, कल्याणकारी प्रावधानों और कार्य घंटों से संबंधित विस्तृत नियम प्रदान करती है।
  • संहिता के तहत, श्रमिकों को ओवरटाइम के लिए उचित मुआवज़ा, नियमित स्वास्थ्य जाँच और सुरक्षित कार्य वातावरण का अधिकार है।
  • यह महिला श्रमिकों के लिए विशेष प्रावधान भी करती है, जिसमें रात की शिफ्ट में काम करने की अनुमति और सुरक्षा उपाय शामिल हैं।
  • संहिता का उद्देश्य औद्योगिक विवादों को कम करना और श्रमिकों तथा नियोक्ताओं के बीच सौहार्दपूर्ण संबंध स्थापित करना है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
12-घंटे की शिफ्ट की अनुमति गुजरात सरकार ने माइक्रोन सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की सानंद इकाई को 12-घंटे की कार्य शिफ्ट संचालित करने की अनुमति दी है।
साप्ताहिक कार्य सीमा 48 घंटे कर्मचारी के लिए वैधानिक साप्ताहिक कार्य सीमा 48 घंटे बनी रहेगी, जिसमें शेष दिनों के लिए सवेतन अवकाश शामिल है।
स्वैच्छिक लिखित सहमति केवल वे कर्मचारी जो स्वेच्छा से लिखित सहमति प्रदान करेंगे, वे ही 12-घंटे की शिफ्ट में काम करने के पात्र होंगे।
व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थिति संहिता, 2020 यह अनुमति व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थिति (OSH) संहिता, 2020 के प्रावधानों के तहत दी गई है, जो 21 नवंबर, 2025 को लागू हुई थी।
विश्राम अंतराल कार्य का कुल फैलाव, जिसमें विश्राम अंतराल शामिल है, एक दिन में 12 घंटे से अधिक नहीं होना चाहिए।
रिकॉर्ड का रखरखाव कंपनियों को अनुमोदित व्यवस्था के तहत काम करने वाले कर्मचारियों का अलग रिकॉर्ड बनाए रखना होगा।

महत्व

आर्थिक संवृद्धि और रोजगार सृजन

  • यह कदम गुजरात में आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) और रोजगार सृजन को बढ़ावा देगा, विशेष रूप से सेमीकंडक्टर क्षेत्र में।
  • सेमीकंडक्टर विनिर्माण में निवेश आकर्षित करने और राज्य को इस क्षेत्र में अग्रणी बनाने में मदद करेगा।

विनिर्माण क्षमता में वृद्धि

  • माइक्रोन टेक्नोलॉजी की सानंद इकाई कंपनी के वैश्विक विनिर्माण नेटवर्क में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी, जिससे भारत की विनिर्माण क्षमता बढ़ेगी।
  • यह इकाई 2026 में लाखों सेमीकंडक्टर चिप्स का संयोजन और परीक्षण करेगी, जिसकी उत्पादन क्षमता 2027 से सालाना करोड़ों चिप्स तक बढ़ने का अनुमान है।

व्यापार सुगमता और अनुपालन

  • व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थिति (OSH) संहिता, 2020 व्यापार सुगमता (Ease of Doing Business) और अनुपालन सुगमता (Ease of Compliance) को बढ़ावा देती है।
  • राज्य सरकारों को कुछ प्रावधानों से कारखानों को छूट देने का अधिकार देती है, जिससे औद्योगिक विकास को गति मिलती है।

सेमीकंडक्टर क्षेत्र में नेतृत्व

  • गुजरात भारत के तेजी से बढ़ते सेमीकंडक्टर क्षेत्र में अपनी नेतृत्व स्थिति को मजबूत करने का प्रयास कर रहा है।
  • यह परियोजना फैब्रिकेशन, असेंबली, पैकेजिंग, परीक्षण और उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण सहित सेमीकंडक्टर निवेश के लिए राज्य को एक प्रमुख गंतव्य बनाती है।

चुनौतियाँ

1. श्रम अधिकार और कल्याण

  • 12-घंटे की शिफ्ट से कर्मचारियों के स्वास्थ्य और कार्य-जीवन संतुलन पर संभावित प्रभाव पड़ सकता है।
  • यह सुनिश्चित करना कि स्वैच्छिक सहमति वास्तव में स्वैच्छिक हो और कर्मचारियों पर कोई अनुचित दबाव न हो।

2. कार्यस्थल सुरक्षा

  • लंबी शिफ्टों से थकान बढ़ सकती है, जिससे कार्यस्थल पर दुर्घटनाओं का जोखिम बढ़ सकता है।
  • OSH संहिता के तहत सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करना।

3. निगरानी और अनुपालन

  • यह सुनिश्चित करना कि कंपनियां निर्धारित शर्तों का पालन करें, जैसे कि 48-घंटे की साप्ताहिक सीमा और विश्राम अंतराल।
  • मुख्य निरीक्षक-सह-सुविधाप्रदाता द्वारा अतिरिक्त शर्तों का प्रभावी ढंग से कार्यान्वयन और उल्लंघन पर कार्रवाई।

4. क्षेत्रीय असमानताएं

  • विभिन्न राज्यों द्वारा OSH संहिता के प्रावधानों का अलग-अलग तरीके से उपयोग करने से औद्योगिक नीतियों में असमानताएं उत्पन्न हो सकती हैं।
  • यह सुनिश्चित करना कि ऐसी छूटें देश भर में एक समान और न्यायसंगत तरीके से लागू हों।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
कर्मचारी कल्याण लंबी शिफ्टों से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
स्वैच्छिक सहमति का दुरुपयोग कर्मचारियों पर 12-घंटे की शिफ्ट स्वीकार करने के लिए दबाव डाला जा सकता है।
कार्यस्थल सुरक्षा जोखिम थकान के कारण दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ सकती है।
नियमों का उल्लंघन कंपनियों द्वारा साप्ताहिक कार्य सीमा और विश्राम अंतराल के नियमों का उल्लंघन हो सकता है।
निगरानी की कमी प्रभावी निगरानी तंत्र के अभाव में शर्तों का पालन सुनिश्चित करना कठिन हो सकता है।
श्रम कानूनों का संतुलन आर्थिक विकास और श्रम अधिकारों के बीच संतुलन बनाए रखना एक चुनौती है।

आगे की राह

  • श्रम कानूनों का प्रभावी प्रवर्तन सुनिश्चित करना, विशेष रूप से साप्ताहिक कार्य सीमा और विश्राम अंतराल के संबंध में।
  • कर्मचारियों के स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए नियमित ऑडिट और निरीक्षण आयोजित करना।
  • स्वैच्छिक सहमति की प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए तंत्र स्थापित करना।
  • कर्मचारियों के लिए शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत करना ताकि वे बिना किसी डर के अपनी चिंताओं को व्यक्त कर सकें।
  • दीर्घकालिक शिफ्टों के प्रभावों का अध्ययन करने और आवश्यक समायोजन करने के लिए शोध और डेटा संग्रह को बढ़ावा देना।
  • उद्योगों को आधुनिक तकनीक और स्वचालन अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना ताकि उत्पादन क्षमता को बढ़ाते हुए कर्मचारियों पर बोझ कम किया जा सके।
  • अन्य राज्यों के साथ समन्वय स्थापित करना ताकि श्रम नीतियों में एकरूपता और सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा किया जा सके।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थिति संहिता, 2020 · श्रम सुधार · औद्योगिक संबंध · श्रम अधिकार · ईज ऑफ डूइंग बिजनेस · सेमीकंडक्टर विनिर्माण · राज्यों की भूमिका · आर्थिक विकास

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 21: जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार
  • अनुच्छेद 23: मानव दुर्व्यापार और बलात्श्रम का प्रतिषेध
  • अनुच्छेद 39: राज्य द्वारा अनुसरणीय नीति के कुछ सिद्धांत (पुरुषों और स्त्रियों को समान कार्य के लिए समान वेतन, श्रमिकों के स्वास्थ्य और शक्ति का दुरुपयोग न हो)
  • अनुच्छेद 42: काम की न्यायसंगत और मानवोचित दशाओं तथा प्रसूति सहायता का उपबंध
  • अनुच्छेद 43: कर्मकारों के लिए निर्वाह मजदूरी आदि

अवधारणा प्रवाह

OSH संहिता, 2020 का अधिनियमन  →  राज्य सरकारों को छूट देने का अधिकार  →  गुजरात सरकार द्वारा 12-घंटे की शिफ्ट की अनुमति  →  सेमीकंडक्टर विनिर्माण को बढ़ावा  →  आर्थिक संवृद्धि और रोजगार सृजन  →  श्रम अधिकारों और कल्याण की चुनौतियाँ  →  प्रभावी निगरानी और अनुपालन की आवश्यकता

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थिति संहिता, 2020 (Occupational Safety, Health and Working Conditions Code, 2020) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. यह संहिता पूरे देश में 21 नवंबर, 2025 को लागू हुई।
2. यह संहिता राज्य सरकारों को कुछ प्रावधानों से कारखानों को छूट देने का अधिकार देती है, बशर्ते साप्ताहिक कार्य सीमा 48 घंटे से अधिक न हो।
3. गुजरात सरकार ने माइक्रोन सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की सानंद सुविधा को 12 घंटे की कार्य शिफ्ट संचालित करने की अनुमति इसी संहिता के प्रावधानों के तहत दी है।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि संहिता 21 नवंबर, 2025 को लागू हुई थी। कथन 2 सही है क्योंकि संहिता राज्य सरकारों को कुछ शर्तों के साथ छूट देने का अधिकार देती है, जिसमें साप्ताहिक 48 घंटे की सीमा का पालन करना शामिल है। कथन 3 भी सही है क्योंकि गुजरात सरकार ने इसी संहिता के तहत यह अनुमति दी है।

Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थिति संहिता, 2020 के तहत दी गई अनुमति के संबंध में सही नहीं है?

  1. कर्मचारी के कुल कार्य घंटे एक सप्ताह में 48 घंटे से अधिक नहीं होने चाहिए।
  2. केवल वे श्रमिक जो स्वेच्छा से लिखित सहमति प्रदान करते हैं, 12 घंटे की शिफ्ट में काम करने के पात्र होंगे।
  3. आराम अंतराल सहित कार्य का कुल विस्तार एक दिन में 12 घंटे से अधिक नहीं होना चाहिए।
  4. कंपनी को अतिरिक्त शर्तों का पालन करने की आवश्यकता नहीं होगी यदि मुख्य निरीक्षक-सह-सुविधाप्रदाता द्वारा कोई शर्त लगाई जाती है।

उत्तर: कंपनी को अतिरिक्त शर्तों का पालन करने की आवश्यकता नहीं होगी यदि मुख्य निरीक्षक-सह-सुविधाप्रदाता द्वारा कोई शर्त लगाई जाती है। — विकल्प D सही नहीं है क्योंकि कंपनी को मुख्य निरीक्षक-सह-सुविधाप्रदाता द्वारा लगाई गई किसी भी अतिरिक्त शर्त का पालन करना होगा। अन्य सभी विकल्प संहिता के तहत दी गई अनुमति की शर्तों के अनुरूप हैं।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थिति संहिता, 2020 (Occupational Safety, Health and Working Conditions Code, 2020) के प्रमुख प्रावधानों पर चर्चा कीजिए। साथ ही, यह भी मूल्यांकन कीजिए कि यह संहिता ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ और श्रमिक अधिकारों के बीच संतुलन बनाने में कितनी सफल रही है। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थिति संहिता, 2020 का संक्षिप्त परिचय, इसके उद्देश्य (श्रम कानूनों का सरलीकरण और आधुनिकीकरण) सहित।
2. **प्रमुख प्रावधान:** संहिता के मुख्य प्रावधानों का विस्तृत वर्णन, जैसे:
* कार्य के घंटे (साप्ताहिक 48 घंटे की सीमा, दैनिक 12 घंटे की शिफ्ट की अनुमति की शर्तें)।
* सुरक्षा और स्वास्थ्य मानक (कार्यस्थल पर सुरक्षा, मशीनरी सुरक्षा, खतरनाक प्रक्रियाओं का प्रबंधन)।
* कल्याणकारी प्रावधान (कैंटीन, प्राथमिक चिकित्सा, आराम कक्ष)।
* महिला श्रमिकों से संबंधित प्रावधान (रात की शिफ्ट, सुरक्षा)।
* निरीक्षण और अनुपालन तंत्र (मुख्य निरीक्षक-सह-सुविधाप्रदाता की भूमिका)।
* राज्य सरकारों की छूट देने की शक्ति।
3. **’ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ पर प्रभाव:** इस बात पर चर्चा कि कैसे संहिता ने व्यावसायिक प्रक्रियाओं को सरल बनाया है, अनुपालन बोझ कम किया है, और निवेश को आकर्षित करने में मदद की है (जैसे गुजरात में माइक्रोन सुविधा का उदाहरण)।
4. **श्रमिक अधिकारों के साथ संतुलन:** इस पहलू का मूल्यांकन कि संहिता ने श्रमिकों के अधिकारों (जैसे साप्ताहिक 48 घंटे की सीमा, स्वैच्छिक सहमति, आराम अंतराल, सवैतनिक अवकाश) को कैसे संरक्षित किया है, जबकि लचीलेपन की अनुमति दी है। संभावित चुनौतियों और आलोचनाओं का भी उल्लेख किया जा सकता है, यदि कोई हो।
5. **निष्कर्ष:** संहिता के समग्र महत्व और भारत के औद्योगिक परिदृश्य पर इसके संभावित दीर्घकालिक प्रभावों का सारांश, जिसमें आर्थिक विकास और रोजगार सृजन में इसकी भूमिका शामिल है।

स्रोत: The Indian Express


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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