ग्रेटर नोएडा से गंगा एक्सप्रेसवे तक नया लिंक, यात्रा समय घटेगा 30-45 मिनट

New Greater Noida-Ganga Expressway link proposed, 30-45 min travel time — labelled illustration

ग्रेटर नोएडा से गंगा एक्सप्रेसवे तक नया लिंक, यात्रा समय घटेगा 30-45 मिनट

✎ ग्रेटर नोएडा-गंगा एक्सप्रेसवे लिंक प्रस्ताव नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे और लॉजिस्टिक्स परियोजनाओं से बढ़ते यातायात को प्रबंधित करने के लिए ग्रेटर नोएडा के मास्टर प्लान 2041 में एक प्रमुख संशोधन है, जिसका उद्देश्य यात्री और…

💬 Doubt on this topic? Ask Aanya, your free AI study-buddy, for an instant explanation. Ask Aanya →

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper I — भूगोल (भारत का भूगोल, अवसंरचना)  |  GS Paper II — शासन (सरकारी नीतियां और हस्तक्षेप)  |  GS Paper III — अर्थव्यवस्था (बुनियादी ढाँचा, औद्योगिक नीतियां, आर्थिक विकास)
  • Prelims: गंगा एक्सप्रेसवे, नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा, मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स हब, समर्पित फ्रेट कॉरिडोर, मास्टर प्लान 2041, ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण
  • Essay: बुनियादी ढाँचा विकास और भारत का आर्थिक भविष्य, शहरी नियोजन और सतत विकास: चुनौतियाँ और समाधान

त्वरित पुनरावृत्ति: ग्रेटर नोएडा-गंगा एक्सप्रेसवे लिंक प्रस्ताव नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे और लॉजिस्टिक्स परियोजनाओं से बढ़ते यातायात को प्रबंधित करने के लिए ग्रेटर नोएडा के मास्टर प्लान 2041 में एक प्रमुख संशोधन है, जिसका उद्देश्य यात्री और माल ढुलाई यातायात को अलग करना और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बढ़ाना है।

💬 Doubt on this topic? Ask Aanya, your free AI study-buddy, for an instant explanation. Ask Aanya →

यह खबर चर्चा में क्यों?

नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के संचालन शुरू होने और ग्रेटर नोएडा में लॉजिस्टिक्स परियोजनाओं के विस्तार के साथ, क्षेत्र में यातायात में वृद्धि की उम्मीद है। इसी को ध्यान में रखते हुए, ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण (GNIDA) ने अपने मास्टर प्लान 2041 में बदलाव का प्रस्ताव दिया है, जिसमें गंगा एक्सप्रेसवे से एक नया लिंक और माल ढुलाई के लिए एक अलग एलिवेटेड मार्ग शामिल है। इन प्रस्तावित परिवर्तनों का उद्देश्य यात्री और माल ढुलाई यातायात को अलग करना और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बढ़ाना है।

पृष्ठभूमि

  • नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा (Noida International Airport) जेवर में जून में खोला गया, जिससे यात्री और कार्गो यातायात दोनों में वृद्धि हुई है।
  • ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण (Greater Noida Industrial Development Authority – GNIDA) क्षेत्र के समग्र विकास और नियोजन के लिए जिम्मेदार है।
  • मास्टर प्लान 2041 (Master Plan 2041) ग्रेटर नोएडा के भविष्य के विकास के लिए एक व्यापक योजना है, जिसमें बुनियादी ढाँचे और शहरी नियोजन शामिल हैं।
  • ग्रेटर नोएडा में 849 एकड़ का मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स हब (Multi-Modal Logistics Hub – MMLH) और बोराकी रेलवे स्टेशन के पास 360 एकड़ का मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट हब (Multi-Modal Transport Hub – MMTH) जैसी प्रमुख परियोजनाएँ प्रस्तावित हैं।
  • क्षेत्र पहले से ही यमुना एक्सप्रेसवे (Yamuna Expressway), ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे (Eastern Peripheral Expressway) और समर्पित फ्रेट कॉरिडोर (Dedicated Freight Corridors) जैसे प्रमुख परिवहन गलियारों से जुड़ा हुआ है।
  • गंगा एक्सप्रेसवे (Ganga Expressway) उत्तर प्रदेश में एक निर्माणाधीन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे है, जो राज्य के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों को जोड़ेगा।
  • समर्पित फ्रेट कॉरिडोर (Dedicated Freight Corridor) माल ढुलाई के लिए विशेष रूप से निर्मित रेलवे लाइनें हैं, जो यात्री यातायात से अलग होती हैं।
  • बुनियादी ढाँचा विकास (Infrastructure Development) किसी क्षेत्र के आर्थिक विकास और कनेक्टिविटी के लिए महत्वपूर्ण है, खासकर औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स केंद्रों के लिए।
  • शहरी नियोजन (Urban Planning) भविष्य की जरूरतों को पूरा करने और भीड़भाड़ को कम करने के लिए शहरों और क्षेत्रों के व्यवस्थित विकास को सुनिश्चित करता है।
  • औद्योगिक विकास मंत्री (Industrial Development Minister) नंद गोपाल गुप्ता नंदी को हाल ही में प्रस्तावित परिवर्तनों पर एक प्रस्तुति दी गई थी, जो सरकारी अनुमोदन प्रक्रिया का हिस्सा है।
  • परियोजना का उद्देश्य माल ढुलाई वाहनों को यात्री सड़कों से दूर रखकर यातायात की भीड़ को कम करना और दक्षता बढ़ाना है।
  • यह पहल ग्रेटर नोएडा को एक प्रमुख औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स केंद्र के रूप में विकसित करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।
  • नया लिंक नोएडा-ग्रेटर नोएडा और गंगा एक्सप्रेसवे के बीच यात्रा के समय को लगभग 30 से 45 मिनट तक कम कर देगा।
  • प्रस्तावित छह-लेन एलिवेटेड रोड मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स हब को जेवर हवाई अड्डे के कार्गो टर्मिनल से जोड़ेगा, जो पश्चिमी समर्पित फ्रेट कॉरिडोर के समानांतर होगा।
  • यह विकास उत्तर प्रदेश में क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

ग्रेटर नोएडा-गंगा एक्सप्रेसवे लिंक प्रस्ताव क्या है?

  • यह प्रस्ताव ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण (GNIDA) के मास्टर प्लान 2041 में प्रस्तावित संशोधनों का हिस्सा है।
  • इसका मुख्य उद्देश्य नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे और ग्रेटर नोएडा की लॉजिस्टिक्स परियोजनाओं से उत्पन्न होने वाले बढ़ते यातायात को प्रबंधित करना है।
  • प्रस्ताव में हापुड़ बाईपास (Hapur bypass) से जुड़ने वाली 105 मीटर चौड़ी सड़क का निर्माण शामिल है।
  • इस कनेक्टिविटी को लगभग 15 किलोमीटर तक बढ़ाकर गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ा जाएगा, जिससे यात्रा का समय काफी कम हो जाएगा।
  • एक छह-लेन एलिवेटेड रोड (elevated road) का भी प्रस्ताव है, जो मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स हब (MMLH) को जेवर हवाई अड्डे के कार्गो टर्मिनल से जोड़ेगा।
  • यह एलिवेटेड रोड पश्चिमी समर्पित फ्रेट कॉरिडोर (Western Dedicated Freight Corridor) के समानांतर बनाया जाएगा, जिससे माल ढुलाई के लिए एक समर्पित मार्ग उपलब्ध होगा।
  • इस पहल का लक्ष्य यात्री और माल ढुलाई यातायात के लिए अलग-अलग बुनियादी ढाँचा प्रदान करना है, ताकि भीड़भाड़ कम हो और दक्षता बढ़े।
  • यह ग्रेटर नोएडा को एक प्रमुख औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स केंद्र के रूप में विकसित करने की व्यापक रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
  • प्रस्तावित परिवर्तनों की समीक्षा और अनुमोदन के बाद जल्द ही एक अधिसूचना जारी होने की संभावना है।
  • यह परियोजना क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूत करेगी और उत्तर प्रदेश के आर्थिक विकास में योगदान देगी।
  • यह मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी (multi-modal connectivity) को बढ़ावा देगा, जिसमें सड़क, रेल और हवाई परिवहन का एकीकरण शामिल है।
  • इसका उद्देश्य वाणिज्यिक वाहनों की आवाजाही को अधिक कुशलता से वितरित करना है, ताकि बढ़ती माल ढुलाई से यात्री सड़कों पर भीड़ न बढ़े।
  • यह क्षेत्र में नियोजित दो प्रमुख परियोजनाओं – मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स हब और मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट हब – के लिए महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचा सहायता प्रदान करेगा।
  • यह प्रस्ताव उत्तर प्रदेश में बुनियादी ढाँचा विकास के लिए सरकार के दृष्टिकोण को दर्शाता है, जिसमें भविष्य की जरूरतों को पूरा करने के लिए अग्रिम योजना शामिल है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
ग्रेटर नोएडा-गंगा एक्सप्रेसवे लिंक नोएडा-ग्रेटर नोएडा और गंगा एक्सप्रेसवे के बीच यात्रा समय को 30-45 मिनट तक कम करेगा।
105 मीटर चौड़ी सड़क हापुड़ बाईपास से कनेक्टिविटी प्रदान करेगी और गंगा एक्सप्रेसवे तक विस्तारित होगी।
छह-लेन एलिवेटेड सड़क मल्टी-मोडल लॉजिस्टिक्स हब (MMLH) को जेवर हवाई अड्डे के कार्गो टर्मिनल से जोड़ेगी, जिससे माल ढुलाई सुगम होगी।
यात्री और माल ढुलाई के लिए अलग मार्ग यात्री सड़कों पर भीड़भाड़ कम करेगा और माल ढुलाई की दक्षता बढ़ाएगा।
मास्टर प्लान 2041 में संशोधन क्षेत्र में बढ़ते यातायात और लॉजिस्टिक्स आवश्यकताओं के लिए ढाँचागत तैयारी।

महत्व

आर्थिक संवृद्धि और विकास

  • बेहतर कनेक्टिविटी से औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा, जिससे क्षेत्र में निवेश आकर्षित होगा।
  • नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे और मल्टी-मोडल लॉजिस्टिक्स हब (MMLH) की क्षमता का पूर्ण उपयोग सुनिश्चित होगा, जो आर्थिक विकास में योगदान देगा।
  • माल ढुलाई की लागत और समय में कमी से व्यापार सुगमता (Ease of Doing Business) में सुधार होगा, जिससे उद्योगों को लाभ मिलेगा।

बुनियादी ढाँचा और शहरी नियोजन

  • यात्री और माल ढुलाई के लिए अलग-अलग मार्ग शहरी भीड़भाड़ को कम करेंगे और यातायात प्रबंधन को बेहतर बनाएंगे।
  • आधुनिक और कुशल परिवहन नेटवर्क का विकास भविष्य की शहरी और औद्योगिक आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायक होगा।
  • समग्र क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा मिलेगा, जिससे ग्रेटर नोएडा एक प्रमुख औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स केंद्र के रूप में उभरेगा।

सामाजिक प्रभाव

  • यात्रियों के लिए यात्रा समय में कमी और सुरक्षा में सुधार होगा।
  • बेहतर कनेक्टिविटी से रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे, जिससे स्थानीय आबादी को लाभ मिलेगा।
  • पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा क्योंकि सुगम यातायात से ईंधन की खपत और प्रदूषण कम हो सकता है।

चुनौतियाँ

1. भूमि अधिग्रहण और पुनर्वास

  • परियोजनाओं के लिए आवश्यक भूमि का अधिग्रहण एक जटिल और समय लेने वाली प्रक्रिया हो सकती है।
  • प्रभावित परिवारों के उचित पुनर्वास और मुआवजे का प्रबंधन एक बड़ी चुनौती है।

2. पर्यावरणीय प्रभाव आकलन

  • बड़े पैमाने पर बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं का पर्यावरण पर महत्वपूर्ण प्रभाव हो सकता है, जिसके लिए गहन आकलन आवश्यक है।
  • वन्यजीवों, जल निकायों और स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ने वाले प्रभावों को कम करने के उपाय करना महत्वपूर्ण है।

3. वित्तीय व्यवहार्यता और संसाधन

  • परियोजनाओं के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधनों की व्यवस्था करना और उनकी दीर्घकालिक व्यवहार्यता सुनिश्चित करना एक चुनौती है।
  • सार्वजनिक-निजी भागीदारी (Public-Private Partnership – PPP) मॉडल के प्रभावी कार्यान्वयन की आवश्यकता है।

4. समन्वय और कार्यान्वयन

  • विभिन्न सरकारी विभागों और एजेंसियों के बीच प्रभावी समन्वय सुनिश्चित करना आवश्यक है।
  • परियोजनाओं का समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण कार्यान्वयन सुनिश्चित करना एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक चुनौती है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
भूमि अधिग्रहण परियोजनाओं के लिए आवश्यक भूमि का अधिग्रहण, किसानों का मुआवजा और पुनर्वास।
पर्यावरणीय मंजूरी निर्माण गतिविधियों से पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभावों का आकलन और आवश्यक स्वीकृतियाँ प्राप्त करना।
वित्तीय प्रबंधन परियोजनाओं के लिए पर्याप्त धन की व्यवस्था और लागत-अतिरेक (Cost Overruns) से बचना।
अंतर-एजेंसी समन्वय विभिन्न सरकारी निकायों और प्राधिकरणों के बीच प्रभावी समन्वय सुनिश्चित करना।
यातायात प्रबंधन निर्माण अवधि के दौरान मौजूदा यातायात प्रवाह को बनाए रखना और व्यवधानों को कम करना।

आगे की राह

  • भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाना, प्रभावित लोगों को उचित मुआवजा और पुनर्वास प्रदान करना।
  • परियोजनाओं के पर्यावरणीय प्रभाव का गहन आकलन करना और स्थायी निर्माण प्रथाओं को अपनाना।
  • परियोजनाओं के लिए पर्याप्त और समय पर वित्तपोषण सुनिश्चित करने हेतु नवीन वित्तीय मॉडलों का अन्वेषण करना।
  • विभिन्न सरकारी विभागों और हितधारकों के बीच प्रभावी समन्वय और सहयोग स्थापित करना।
  • परियोजनाओं के कार्यान्वयन में नवीनतम तकनीकों और सर्वोत्तम प्रथाओं का उपयोग करना।
  • यात्री और माल ढुलाई के लिए अलग-अलग बुनियादी ढाँचे के विकास पर जोर देना ताकि भविष्य की यातायात आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके।
  • क्षेत्रीय विकास योजनाओं को राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति (National Logistics Policy) और गति शक्ति योजना (PM Gati Shakti) जैसे बड़े ढाँचागत पहलों के साथ एकीकृत करना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

बुनियादी ढांचा विकास · मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स हब · मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट हब · माल ढुलाई गलियारे · क्षेत्रीय कनेक्टिविटी · मास्टर प्लान 2041 · आर्थिक संवृद्धि · शहरी नियोजन · यातायात प्रबंधन · औद्योगिक विकास · लॉजिस्टिक्स क्षेत्र · नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा

अवधारणा प्रवाह

नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे का संचालन शुरू  →  क्षेत्र में यात्री और माल ढुलाई में वृद्धि की उम्मीद  →  यातायात प्रबंधन के लिए नए बुनियादी ढाँचे की आवश्यकता  →  ग्रेटर नोएडा मास्टर प्लान 2041 में संशोधन का प्रस्ताव  →  गंगा एक्सप्रेसवे लिंक और एलिवेटेड फ्रेट कॉरिडोर का निर्माण  →  यात्री और माल ढुलाई के लिए अलग-अलग मार्ग  →  क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और आर्थिक दक्षता में सुधार

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स हब (MMLH) मुख्य रूप से यात्री यातायात के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।
2. डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC) विशेष रूप से माल ढुलाई के लिए रेलवे ट्रैक हैं।
3. गंगा एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश में एक प्रस्तावित ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 गलत है क्योंकि मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स हब (MMLH) मुख्य रूप से माल ढुलाई और रसद के लिए होते हैं, जबकि मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट हब (MMTH) यात्री यातायात पर केंद्रित होते हैं। कथन 2 सही है क्योंकि डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC) विशेष रूप से माल ढुलाई के लिए बनाए गए रेलवे ट्रैक हैं। कथन 3 सही है क्योंकि गंगा एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश में एक प्रमुख ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे परियोजना है।

Q2. ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण (GNIDA) के मास्टर प्लान 2041 में प्रस्तावित परिवर्तनों का मुख्य उद्देश्य क्या है?

  1. केवल आवासीय क्षेत्रों का विस्तार करना।
  2. कृषि भूमि को औद्योगिक उपयोग में परिवर्तित करना।
  3. नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे और लॉजिस्टिक्स परियोजनाओं से बढ़ते यातायात का प्रबंधन करना।
  4. पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए नए मनोरंजन स्थलों का निर्माण करना।

उत्तर: नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे और लॉजिस्टिक्स परियोजनाओं से बढ़ते यातायात का प्रबंधन करना। — GNIDA के मास्टर प्लान 2041 में प्रस्तावित परिवर्तनों का मुख्य उद्देश्य नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे और ग्रेटर नोएडा की लॉजिस्टिक्स परियोजनाओं से उत्पन्न होने वाले बढ़ते यात्री और माल यातायात का कुशल प्रबंधन करना है, जिसमें गंगा एक्सप्रेसवे से नया लिंक और माल ढुलाई के लिए एक एलिवेटेड रोड शामिल है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत में आर्थिक विकास को बढ़ावा देने में मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी परियोजनाओं की भूमिका का परीक्षण कीजिए। विशेष रूप से, ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में प्रस्तावित बुनियादी ढांचा विकास किस प्रकार क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स दक्षता को बढ़ाएगा? (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी परियोजनाओं की संक्षिप्त परिभाषा और उनका महत्व।
2. **आर्थिक विकास में भूमिका:**
* **लागत में कमी:** परिवहन लागत और समय में कमी।
* **दक्षता में वृद्धि:** आपूर्ति श्रृंखला (supply chain) और लॉजिस्टिक्स की दक्षता में सुधार।
* **निवेश प्रोत्साहन:** औद्योगिक और वाणिज्यिक निवेश को आकर्षित करना।
* **रोजगार सृजन:** निर्माण और संबद्ध क्षेत्रों में रोजगार के अवसर।
* **क्षेत्रीय असंतुलन में कमी:** दूरदराज के क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ना।
* **निर्यात संवर्धन:** बेहतर कनेक्टिविटी से निर्यात में वृद्धि।
3. **ग्रेटर नोएडा क्षेत्र का विशिष्ट संदर्भ:**
* **नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा:** यात्री और कार्गो यातायात के लिए महत्व।
* **मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स हब (MMLH) और मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट हब (MMTH):** इनकी भूमिका और उद्देश्य।
* **गंगा एक्सप्रेसवे से नया लिंक:** क्षेत्रीय कनेक्टिविटी में सुधार, यात्रा समय में कमी।
* **माल ढुलाई के लिए एलिवेटेड रोड:** यात्री और माल यातायात को अलग करके दक्षता बढ़ाना, भीड़ कम करना।
* **पश्चिमी डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC) से जुड़ाव:** माल ढुलाई की गति और दक्षता में वृद्धि।
4. **निष्कर्ष:** इन परियोजनाओं के माध्यम से क्षेत्र के औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स केंद्र के रूप में विकास की संभावनाओं पर प्रकाश डालते हुए एक संतुलित निष्कर्ष।

स्रोत: The Indian Express

Uttar Pradesh PCS (UPPSC) — राज्य PCS अभ्यास

Prelims: उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्रस्तावित ‘न्यू ग्रेटर नोएडा-गंगा एक्सप्रेसवे लिंक’ के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. यह एक्सप्रेसवे ग्रेटर नोएडा को गंगा नदी के किनारे स्थित प्रमुख तीर्थ स्थलों से जोड़ेगा। 2. प्रस्तावित एक्सप्रेसवे से यात्रा समय 30-45 मिनट तक कम हो जाएगा। 3. यह परियोजना उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल क्षेत्र के विकास में सहायक होगी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 2 और 3
  3. केवल 1 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: 1, 2 और 3 — कथन 1 सही है क्योंकि प्रस्तावित एक्सप्रेसवे ग्रेटर नोएडा को गंगा किनारे स्थित तीर्थ स्थलों से जोड़ेगा। कथन 2 सही है क्योंकि इस एक्सप्रेसवे से यात्रा समय 30-45 मिनट तक कम हो जाएगा। कथन 3 सही है क्योंकि यह परियोजना पूर्वांचल क्षेत्र के विकास में सहायक होगी।

Mains: उत्तर प्रदेश में प्रस्तावित ‘न्यू ग्रेटर नोएडा-गंगा एक्सप्रेसवे लिंक’ परियोजना के संभावित आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय प्रभावों का विश्लेषण कीजिए। साथ ही, इस परियोजना के सफल क्रियान्वयन के लिए आवश्यक प्रशासनिक और तकनीकी चुनौतियों पर प्रकाश डालिए। (उत्तर 200 शब्दों में)


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


Related guides on our sites

No Comments

Post A Comment