जल जीवन मिशन द्वितीय चरण: 12वें पेयजल संवाद में नवोन्मेषी प्रथाएं हुईं प्रदर्शित

पेयजल एवं स्वच्छता विभाग द्वारा 12वां जिला कलेक्टर पेयजल संवाद आयोजित — diagram

जल जीवन मिशन द्वितीय चरण: 12वें पेयजल संवाद में नवोन्मेषी प्रथाएं हुईं प्रदर्शित

Map of Madhya Pradesh, Jammu and Kashmir, West Bengal, Chhattisgarh highlighted on the map of India — जल जीवन मिशन…
मानचित्र व माइंड-मैप: जल जीवन मिशन द्वितीय चरण: 12वां जिला कलेक्टर पेयजल संवाद

✎ जल जीवन मिशन का लक्ष्य 2024 तक प्रत्येक ग्रामीण परिवार को नल से कार्यात्मक घरेलू कनेक्शन (FHTC) के माध्यम से सुरक्षित और पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराना है, जिसमें समुदाय की सक्रिय भागीदारी और जल स्रोतों की स्थिरता पर विशेष ध्यान…

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — शासन, पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्वपूर्ण पहलू, केंद्र एवं राज्यों द्वारा जनसंख्या के अति संवेदनशील वर्गों के लिए कल्याणकारी योजनाएँ और इन योजनाओं का कार्य-निष्पादन  |  GS Paper III — बुनियादी ढाँचा: ऊर्जा, बंदरगाह, सड़कें, विमानपत्तन, रेलवे आदि
  • Prelims: जल जीवन मिशन (JJM), पेयजल एवं स्वच्छता विभाग, ग्राम पंचायत, जल अर्पण कार्यक्रम, निर्णय समर्थन प्रणाली (DSS), वर्षा जल संचयन
  • Essay: ग्रामीण भारत में जल सुरक्षा: चुनौतियाँ और समाधान, सहकारी संघवाद और जनभागीदारी के माध्यम से विकास

त्वरित पुनरावृत्ति: जल जीवन मिशन का लक्ष्य 2024 तक प्रत्येक ग्रामीण परिवार को नल से कार्यात्मक घरेलू कनेक्शन (FHTC) के माध्यम से सुरक्षित और पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराना है, जिसमें समुदाय की सक्रिय भागीदारी और जल स्रोतों की स्थिरता पर विशेष ध्यान दिया जाता है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

हाल ही में, जल शक्ति मंत्रालय के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से 12वें जिला कलेक्टर पेयजल संवाद का आयोजन किया। इस संवाद में जल जीवन मिशन (JJM) के दूसरे चरण के कार्यान्वयन में तेजी लाने, सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने और ग्रामीण पेयजल आपूर्ति प्रणालियों की स्थिरता सुनिश्चित करने पर विचार-विमर्श किया गया। छह जिलों ने स्रोत स्थिरता, व्यवहार परिवर्तन, शिकायत निवारण और अभिसरण पर अपनी अभिनव प्रथाओं का प्रदर्शन किया, जिससे अन्य जिलों को सीखने और मिशन को प्रभावी ढंग से लागू करने में सहायता मिली।

पृष्ठभूमि

  • जल जीवन मिशन (JJM) की घोषणा प्रधानमंत्री द्वारा 15 अगस्त, 2019 को की गई थी, जिसका लक्ष्य 2024 तक प्रत्येक ग्रामीण परिवार को नल से कार्यात्मक घरेलू कनेक्शन (FHTC) के माध्यम से सुरक्षित और पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराना है।
  • यह मिशन जल शक्ति मंत्रालय के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के तहत संचालित होता है और इसका उद्देश्य जल गुणवत्ता निगरानी, जल संरक्षण और वर्षा जल संचयन जैसे उपायों के माध्यम से जल स्रोतों की स्थिरता सुनिश्चित करना भी है।
  • मिशन का क्रियान्वयन समुदाय-आधारित दृष्टिकोण पर आधारित है, जिसमें ग्राम पंचायतों और स्थानीय समुदायों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, जिससे स्वामित्व और दीर्घकालिक रखरखाव सुनिश्चित हो सके।
  • जिला कलेक्टर पेयजल संवाद जैसे मंच मिशन के कार्यान्वयन की प्रगति की समीक्षा करने, चुनौतियों पर चर्चा करने और विभिन्न जिलों द्वारा अपनाई गई सफल रणनीतियों को साझा करने के लिए महत्वपूर्ण हैं।
  • इस संवाद में जल अर्पण कार्यक्रम के महत्व पर बल दिया गया, जिसके तहत पूर्ण हो चुकी योजनाओं को ग्राम पंचायतों को सौंपा जाता है, जिससे सामुदायिक स्वामित्व और सतत संचालन एवं रखरखाव को बढ़ावा मिलता है।
  • सांसदों, विधायकों और अन्य जन प्रतिनिधियों को जल अर्पण समारोहों और जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (DISHA) की बैठकों में शामिल करने पर जोर दिया गया, ताकि ग्रामीण जल आपूर्ति प्रणालियों में पारदर्शिता और जन विश्वास बढ़ाया जा सके।

जल जीवन मिशन (JJM) क्या है?

  • जल जीवन मिशन भारत सरकार का एक प्रमुख कार्यक्रम है जिसका उद्देश्य 2024 तक देश के प्रत्येक ग्रामीण परिवार को नल से सुरक्षित और पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराना है।
  • यह मिशन ‘हर घर जल’ के दृष्टिकोण पर आधारित है, जिसका अर्थ है प्रत्येक ग्रामीण घर में नल का पानी उपलब्ध कराना।
  • मिशन का मुख्य जोर जल गुणवत्ता निगरानी, जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting) और भूजल पुनर्भरण (Groundwater Recharge) जैसे उपायों के माध्यम से जल स्रोतों की स्थिरता सुनिश्चित करना है।
  • यह एक समुदाय-आधारित दृष्टिकोण का पालन करता है, जिसमें ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियाँ (VWSC) योजना, कार्यान्वयन, प्रबंधन, संचालन और रखरखाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
  • मिशन के तहत, जल गुणवत्ता परीक्षण प्रयोगशालाओं को मजबूत किया जा रहा है और ग्रामीण महिलाओं को फील्ड टेस्ट किट (FTK) का उपयोग करके पानी की गुणवत्ता का परीक्षण करने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है।
  • यह मिशन केंद्र और राज्य सरकारों के बीच साझेदारी में कार्यान्वित किया जाता है, जिसमें केंद्र सरकार वित्तीय सहायता प्रदान करती है और राज्य सरकारें कार्यान्वयन के लिए जिम्मेदार होती हैं।
  • डिजिटल प्लेटफॉर्म और निर्णय समर्थन प्रणाली (DSS) का उपयोग योजना क्रियान्वयन, निगरानी और रिपोर्टिंग में पारदर्शिता और दक्षता लाने के लिए किया जा रहा है।
  • मिशन का लक्ष्य न केवल पानी उपलब्ध कराना है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि यह पानी नियमित रूप से, दीर्घकालिक रूप से और निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुसार उपलब्ध हो।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
जिला कलेक्टर पेयजल संवाद जल जीवन मिशन (JJM) के कार्यान्वयन में तेजी लाने और सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने के लिए एक मंच।
सामुदायिक स्वामित्व ग्राम पंचायतों को पूर्ण योजनाओं का ‘जल अर्पण’ कार्यक्रम के माध्यम से हस्तांतरण, जिससे दीर्घकालिक संचालन और रखरखाव सुनिश्चित होता है।
जनप्रतिनिधियों की भागीदारी सांसदों, विधायकों और अन्य जन प्रतिनिधियों को बैठकों और समारोहों में शामिल करना, जिससे पारदर्शिता और जन विश्वास बढ़ता है।
निर्णय समर्थन प्रणाली (DSS) का उपयोग जल स्रोत स्थिरता उपायों (जैसे वर्षा जल संचयन और भूजल पुनर्भरण) की योजना बनाने में दक्षता और प्रभावशीलता।
डिजिटल प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन शुल्क संग्रह ओवरहेड टैंक की सफाई, रखरखाव और जल एवं स्वच्छता शुल्क संग्रह में पारदर्शिता, सेवा वितरण और राजस्व संग्रह में सुधार।

महत्व

शासन और नीति निर्माण

  • यह संवाद केंद्र और राज्य/जिला स्तर के बीच समन्वय को मजबूत करता है, जो राष्ट्रीय कार्यक्रमों के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए महत्वपूर्ण है।
  • सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने से अन्य जिलों को JJM के लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद मिलती है, जिससे समग्र राष्ट्रीय प्रगति सुनिश्चित होती है।

सामाजिक प्रभाव

  • ग्रामीण परिवारों को विश्वसनीय और सतत पेयजल उपलब्ध कराना सार्वजनिक स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता में सुधार करता है।
  • सामुदायिक स्वामित्व और जन प्रतिनिधियों की भागीदारी से योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ती है, जिससे स्थानीय स्तर पर सशक्तिकरण होता है।

पर्यावरण और संवहनीयता

  • जल स्रोत स्थिरता उपायों (जैसे वर्षा जल संचयन और भूजल पुनर्भरण) पर जोर जल संसाधनों के दीर्घकालिक प्रबंधन और संरक्षण को बढ़ावा देता है।
  • निर्णय समर्थन प्रणाली (DSS) का उपयोग प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर प्रबंधन और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के प्रति अनुकूलन में सहायक है।

चुनौतियाँ

1. कार्यान्वयन में असमानता

  • विभिन्न जिलों में JJM के कार्यान्वयन की गति और गुणवत्ता में अंतर देखा जा सकता है, जिससे कुछ क्षेत्रों में लक्ष्य प्राप्ति में देरी हो सकती है।
  • भौगोलिक विविधताएं और स्थानीय चुनौतियाँ (जैसे दुर्गम इलाके, भूजल की कमी) सभी क्षेत्रों में समान प्रगति को बाधित कर सकती हैं।

2. जल गुणवत्ता और निगरानी

  • ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की गुणवत्ता सुनिश्चित करना और नियमित निगरानी बनाए रखना एक चुनौती है, खासकर दूरदराज के इलाकों में।
  • परीक्षण सुविधाओं और प्रशिक्षित कर्मियों की कमी जल गुणवत्ता मानकों को बनाए रखने में बाधा डाल सकती है।

3. वित्तीय प्रबंधन और उपयोग

  • JJM निधि का समय पर और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है, क्योंकि अप्रयुक्त या विलंबित धन परियोजना की प्रगति को बाधित कर सकता है।
  • भौतिक और वित्तीय प्रगति की सटीक रिपोर्टिंग में चुनौतियाँ हो सकती हैं, जिससे योजना की वास्तविक स्थिति का आकलन करना मुश्किल हो सकता है।

4. संचालन और रखरखाव की संवहनीयता

  • ग्राम पंचायतों को सौंपे जाने के बाद जल आपूर्ति प्रणालियों का दीर्घकालिक संचालन और रखरखाव सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती है।
  • जल शुल्क संग्रह और स्थानीय स्तर पर तकनीकी विशेषज्ञता की कमी संवहनीयता को प्रभावित कर सकती है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
भूजल स्रोतों पर निर्भरता भूजल स्तर में गिरावट और गुणवत्ता संबंधी समस्याओं का जोखिम, विशेषकर विविध भौगोलिक परिस्थितियों वाले क्षेत्रों में।
योजनाओं का समय पर पूरा न होना परियोजनाओं के पूरा होने में देरी से ग्रामीण आबादी को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लक्ष्य में बाधा।
जनप्रतिनिधियों की अपर्याप्त भागीदारी स्थानीय स्तर पर पारदर्शिता और सामुदायिक स्वामित्व को कमजोर करना, जिससे योजनाओं की स्वीकार्यता प्रभावित हो सकती है।
निधि के उपयोग में विलंब परियोजना कार्यान्वयन की गति को धीमा करना और आवंटित संसाधनों का इष्टतम उपयोग न होना।
सेवा अंतराल की पहचान और सुधार कुछ ग्रामीण परिवारों तक अभी भी पेयजल सेवा न पहुंचना, जिससे समावेशी विकास का लक्ष्य प्रभावित होता है।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • जल जीवन मिशन (JJM)

आगे की राह

  • JJM के कार्यान्वयन में तेजी लाने के लिए जिला जल एवं स्वच्छता मिशन की मासिक बैठकों को नियमित और प्रभावी बनाना।
  • पूर्ण हो चुकी योजनाओं को ‘जल अर्पण’ कार्यक्रम के माध्यम से ग्राम पंचायतों को सौंपने की प्रक्रिया को मानकीकृत और त्वरित करना।
  • सांसदों, विधायकों और अन्य जन प्रतिनिधियों को जल अर्पण समारोहों और समीक्षा बैठकों में सक्रिय रूप से शामिल करना।
  • जल स्रोत स्थिरता उपायों (जैसे वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण) की योजना बनाने में निर्णय समर्थन प्रणाली (DSS) का व्यापक उपयोग करना।
  • JJM निधि के समय पर उपयोग, भौतिक और वित्तीय प्रगति की सटीक रिपोर्टिंग और सेवा अंतराल को दूर करने के लिए जिला एवं राज्य सुधार योजनाओं को तैयार करना।
  • जल गुणवत्ता निगरानी को मजबूत करना और ग्रामीण स्तर पर जल परीक्षण सुविधाओं तथा प्रशिक्षित कर्मियों की उपलब्धता सुनिश्चित करना।
  • डिजिटल प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन भुगतान तंत्र का उपयोग करके जल और स्वच्छता शुल्क संग्रह को बढ़ावा देना, जिससे संचालन और रखरखाव की संवहनीयता बढ़े।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

जल जीवन मिशन · पेयजल एवं स्वच्छता विभाग · सामुदायिक स्वामित्व · जल गुणवत्ता · स्रोत स्थिरता · व्यवहार परिवर्तन · अभिसरण · निर्णय समर्थन प्रणाली (DSS) · ग्राम पंचायत · ग्रामीण जल आपूर्ति

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 21’, ‘note’: ‘स्वच्छ पेयजल का अधिकार, जीवन के अधिकार का हिस्सा’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 243G’, ‘note’: ‘पंचायतों की शक्तियां, प्राधिकार और उत्तरदायित्व’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 243W’, ‘note’: ‘नगरपालिकाओं की शक्तियां, प्राधिकार और उत्तरदायित्व’}

अवधारणा प्रवाह

जिला कलेक्टर पेयजल संवाद का आयोजन  →  JJM कार्यान्वयन की समीक्षा और सर्वोत्तम प्रथाओं का साझाकरण  →  सामुदायिक स्वामित्व और जन भागीदारी को बढ़ावा  →  जल स्रोत स्थिरता और गुणवत्ता निगरानी पर जोर  →  ग्रामीण परिवारों को विश्वसनीय और सतत पेयजल की उपलब्धता  →  सार्वजनिक स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता में सुधार

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. जल जीवन मिशन (JJM) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. जल जीवन मिशन का लक्ष्य 2024 तक प्रत्येक ग्रामीण परिवार को कार्यात्मक घरेलू नल कनेक्शन (FHTC) प्रदान करना है।
2. यह मिशन जल गुणवत्ता निगरानी और परीक्षण के साथ-साथ स्रोत स्थिरता उपायों पर भी ध्यान केंद्रित करता है।
3. ग्राम पंचायतें जल आपूर्ति प्रणालियों के संचालन और रखरखाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1: जल जीवन मिशन का लक्ष्य 2024 तक प्रत्येक ग्रामीण परिवार को कार्यात्मक घरेलू नल कनेक्शन (FHTC) प्रदान करना है, यह सही है।
कथन 2: मिशन जल गुणवत्ता निगरानी और परीक्षण के साथ-साथ स्रोत स्थिरता उपायों, जैसे वर्षा जल संचयन और भूजल पुनर्भरण पर भी ध्यान केंद्रित करता है, यह भी सही है।
कथन 3: ग्राम पंचायतें सामुदायिक स्वामित्व और सतत संचालन एवं रखरखाव को बढ़ावा देने के लिए जल आपूर्ति प्रणालियों के संचालन और रखरखाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, यह भी सही है।

Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा जल जीवन मिशन के प्रमुख उद्देश्यों में से एक नहीं है?

  1. प्रत्येक ग्रामीण परिवार को कार्यात्मक घरेलू नल कनेक्शन प्रदान करना।
  2. ग्रामीण क्षेत्रों में जल-जनित बीमारियों को कम करना।
  3. शहरी क्षेत्रों में जल आपूर्ति अवसंरचना का विकास करना।
  4. जल गुणवत्ता निगरानी और परीक्षण को बढ़ावा देना।

उत्तर: शहरी क्षेत्रों में जल आपूर्ति अवसंरचना का विकास करना। — जल जीवन मिशन (JJM) मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति पर केंद्रित है। शहरी क्षेत्रों में जल आपूर्ति अवसंरचना का विकास इसका प्रत्यक्ष उद्देश्य नहीं है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ जल जीवन मिशन (JJM) ग्रामीण भारत में पेयजल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक परिवर्तनकारी पहल है। इस कथन का समालोचनात्मक परीक्षण करें और मिशन के प्रभावी कार्यान्वयन में जिला प्रशासन की भूमिका पर भी चर्चा करें। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: जल जीवन मिशन (JJM) का संक्षिप्त परिचय, इसके लक्ष्य (2024 तक हर घर नल से जल) और ग्रामीण भारत के लिए इसके महत्व को रेखांकित करें।
2. परिवर्तनकारी पहल के रूप में JJM का समालोचनात्मक परीक्षण:
a. सकारात्मक पहलू: ग्रामीण स्वास्थ्य, महिलाओं के सशक्तिकरण, जीवन की गुणवत्ता में सुधार, जल-जनित बीमारियों में कमी, आर्थिक संवृद्धि पर प्रभाव।
b. चुनौतियाँ/कमियाँ: स्रोत स्थिरता, जल गुणवत्ता, वित्तीय उपयोग, सामुदायिक भागीदारी, भौगोलिक विविधताएँ, संचालन और रखरखाव की दीर्घकालिक चुनौतियाँ।
3. प्रभावी कार्यान्वयन में जिला प्रशासन की भूमिका:
a. योजना और समन्वय: जिला जल एवं स्वच्छता मिशन (DWSM) की नियमित बैठकें, योजना निर्माण, अंतर-विभागीय अभिसरण।
b. निगरानी और रिपोर्टिंग: भौतिक और वित्तीय प्रगति की सटीक रिपोर्टिंग, सेवा अंतराल को दूर करने के लिए सुधार योजनाएँ।
c. सामुदायिक भागीदारी और स्वामित्व: जल अर्पण कार्यक्रम, ग्राम पंचायतों को योजनाओं का हस्तांतरण, जन प्रतिनिधियों को शामिल करना।
d. नवाचार और सर्वोत्तम प्रथाएँ: डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग, ऑनलाइन शुल्क संग्रह, निर्णय समर्थन प्रणाली (DSS) का अनुप्रयोग।
e. शिकायत निवारण और व्यवहार परिवर्तन: सूचना, शिक्षा और संचार (IEC) गतिविधियों के माध्यम से जागरूकता बढ़ाना।
4. निष्कर्ष: JJM की सफलता के लिए सतत प्रयासों, सामुदायिक भागीदारी और मजबूत जिला-स्तरीय नेतृत्व के महत्व पर बल देते हुए एक संतुलित निष्कर्ष प्रस्तुत करें।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


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