08 Oct झारखंड: जल जीवन मिशन की विफलता, 16 पंचायतों में जांच क्यों?
✎ जल जीवन मिशन का लक्ष्य 2024 तक ग्रामीण भारत के प्रत्येक घर में कार्यात्मक घरेलू नल कनेक्शन के माध्यम से सुरक्षित और पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराना है, जिसमें स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी पर जोर दिया गया है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — शासन, विकास प्रक्रियाएँ, कल्याणकारी योजनाएँ | GS Paper III — आधारभूत संरचना, संसाधन जुटाना
- Prelims: जल जीवन मिशन, हर घर जल, पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय, ग्राम पंचायत, विकेंद्रीकरण, सतत विकास लक्ष्य 6
- Essay: भारत में ग्रामीण विकास और जन-कल्याणकारी योजनाओं की प्रभावशीलता, जल सुरक्षा: चुनौतियाँ और समाधान
त्वरित पुनरावृत्ति: जल जीवन मिशन का लक्ष्य 2024 तक ग्रामीण भारत के प्रत्येक घर में कार्यात्मक घरेलू नल कनेक्शन के माध्यम से सुरक्षित और पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराना है, जिसमें स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी पर जोर दिया गया है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
झारखंड के खूंटी जिले में जल जीवन मिशन (Jal Jeevan Mission) और जल-नल योजनाओं के क्रियान्वयन पर सवाल उठे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद कई गाँवों में नियमित पेयजल आपूर्ति नहीं हो पा रही है। इस स्थिति ने इन योजनाओं के जमीनी स्तर पर प्रभावी होने और उनके रखरखाव से जुड़ी चुनौतियों को उजागर किया है, जिससे 16 पंचायतों में भौतिक सत्यापन की मांग की गई है।
पृष्ठभूमि
- भारत में ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षित और पर्याप्त पेयजल की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती रही है। विभिन्न सरकारी प्रयासों के बावजूद, बड़ी आबादी को अभी भी स्वच्छ पेयजल के लिए दूर जाना पड़ता है या असुरक्षित स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ता है।
- पेयजल की कमी और गुणवत्ता संबंधी समस्याएँ ग्रामीण स्वास्थ्य, स्वच्छता और महिलाओं व बच्चों के जीवन पर नकारात्मक प्रभाव डालती हैं।
- सरकार ने इन चुनौतियों का समाधान करने के लिए कई योजनाएँ शुरू की हैं, जिनमें जल जीवन मिशन एक प्रमुख पहल है। इसका लक्ष्य ग्रामीण भारत के सभी घरों में नल से जल कनेक्शन प्रदान करना है।
- योजनाओं के क्रियान्वयन में अक्सर धन के आवंटन, बुनियादी ढाँचे के निर्माण, रखरखाव और स्थानीय भागीदारी से संबंधित समस्याएँ सामने आती हैं।
- स्थानीय स्तर पर योजनाओं की निगरानी और जवाबदेही सुनिश्चित करना उनकी सफलता के लिए महत्वपूर्ण है।
- जलवायु परिवर्तन और भूजल स्तर में गिरावट जैसी पर्यावरणीय चुनौतियाँ भी पेयजल स्रोतों की स्थिरता को प्रभावित करती हैं।
जल जीवन मिशन क्या है?
- जल जीवन मिशन (JJM) को प्रधानमंत्री द्वारा 15 अगस्त 2019 को घोषित किया गया था, जिसका लक्ष्य 2024 तक ग्रामीण भारत के प्रत्येक घर में कार्यात्मक घरेलू नल कनेक्शन (FHTC) के माध्यम से सुरक्षित और पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराना है।
- इस मिशन का मुख्य उद्देश्य ‘हर घर जल’ सुनिश्चित करना है, जिसमें प्रत्येक ग्रामीण परिवार को प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 55 लीटर पानी उपलब्ध कराया जाएगा।
- यह मिशन जल शक्ति मंत्रालय (Ministry of Jal Shakti) के तहत संचालित है और इसका क्रियान्वयन केंद्र और राज्य सरकारों की साझेदारी में होता है।
- मिशन का दृष्टिकोण विकेंद्रीकृत है, जिसमें ग्राम पंचायतों (Gram Panchayats) और स्थानीय समुदायों को योजना, क्रियान्वयन, प्रबंधन, संचालन और रखरखाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होती है।
- यह योजना न केवल नल कनेक्शन प्रदान करने पर केंद्रित है, बल्कि जल स्रोतों की स्थिरता, जल गुणवत्ता निगरानी और ग्रेवाटर प्रबंधन (Greywater Management) जैसे पहलुओं पर भी ध्यान देती है।
- जल जीवन मिशन सतत विकास लक्ष्य 6 (Sustainable Development Goal 6) — ‘सभी के लिए पानी और स्वच्छता की उपलब्धता और सतत प्रबंधन’ — को प्राप्त करने में भी योगदान देता है।
- मिशन के तहत जल गुणवत्ता परीक्षण प्रयोगशालाओं की स्थापना और उनका उन्नयन भी किया जा रहा है, ताकि आपूर्ति किए जा रहे पानी की गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सके।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| हर घर जल का लक्ष्य | ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्येक घर में नल से सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना, जिससे स्वास्थ्य और स्वच्छता में सुधार हो। |
| सामुदायिक भागीदारी | योजनाओं के नियोजन, कार्यान्वयन, प्रबंधन, संचालन और रखरखाव में स्थानीय समुदायों, विशेषकर ग्राम पंचायतों की सक्रिय भागीदारी को बढ़ावा देना। |
| जल गुणवत्ता निगरानी | पेयजल की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए नियमित परीक्षण और निगरानी पर जोर देना, ताकि जल-जनित बीमारियों को रोका जा सके। |
| बुनियादी ढाँचे का विकास | पाइपलाइन नेटवर्क, पानी की टंकियों, पंपों और अन्य आवश्यक जल आपूर्ति बुनियादी ढाँचे का निर्माण और उन्नयन करना। |
| स्थिरता और दीर्घकालिकता | जल स्रोतों के संरक्षण और प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित करना ताकि पेयजल आपूर्ति की दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित हो सके। |
महत्व
सामाजिक महत्व
- ग्रामीण महिलाओं और बच्चों पर पानी लाने के बोझ को कम करता है, जिससे उनके समय की बचत होती है और वे शिक्षा या अन्य उत्पादक गतिविधियों में संलग्न हो सकते हैं।
- स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता से जल-जनित बीमारियों जैसे हैजा, टाइफाइड और पेचिश में कमी आती है, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार होता है।
- जीवन की गुणवत्ता में सुधार होता है और विशेष रूप से वंचित समुदायों के लिए गरिमापूर्ण जीवन सुनिश्चित होता है।
आर्थिक महत्व
- स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता से स्वास्थ्य व्यय में कमी आती है और कार्यबल की उत्पादकता बढ़ती है।
- ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलता है क्योंकि लोग पानी लाने में लगने वाले समय का उपयोग आय-सृजन गतिविधियों में कर सकते हैं।
शासनिक महत्व
- स्थानीय निकायों, विशेषकर ग्राम पंचायतों को जल आपूर्ति योजनाओं के प्रबंधन में सशक्त करता है, जिससे विकेन्द्रीकृत शासन को बढ़ावा मिलता है।
- योजनाओं के प्रभावी कार्यान्वयन और निगरानी के माध्यम से सरकार की जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ती है।
चुनौतियाँ
1. कार्यान्वयन में कमियाँ
- योजनाओं के कार्यान्वयन में भ्रष्टाचार और धन के दुरुपयोग के आरोप, जिससे आवंटित धनराशि का सही उपयोग नहीं हो पाता है।
- गुणवत्तापूर्ण सामग्री का उपयोग न करना और निर्माण मानकों का पालन न करना, जिससे बुनियादी ढाँचा जल्द खराब हो जाता है।
यूपीएससी लिंक: शासन, पारदर्शिता और जवाबदेही
2. बुनियादी ढाँचे का खराब रखरखाव
- स्थापित मोटर, पाइपलाइन और पानी की टंकियों का उचित रखरखाव न होना, जिससे वे खराब हो जाती हैं और जलापूर्ति बाधित होती है।
- मरम्मत और रखरखाव के लिए पर्याप्त बजट और कुशल कर्मचारियों की कमी।
यूपीएससी लिंक: बुनियादी ढाँचा, संसाधन जुटाना
3. जल स्रोतों की समस्या
- गर्मी के मौसम में नदी और अन्य जल स्रोतों में पानी के स्तर में कमी, जिससे जलापूर्ति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
- अवैध खनन और प्रदूषण के कारण जल स्रोतों का क्षरण।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण
4. बिजली की अनियमित आपूर्ति
- जल-नल योजनाओं में लगे मोटरों के संचालन के लिए बिजली की अनियमित या अपर्याप्त आपूर्ति, जिससे पानी पंप करने में बाधा आती है।
- सौर ऊर्जा जैसे वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों के उपयोग का अभाव।
यूपीएससी लिंक: बुनियादी ढाँचा, ऊर्जा
5. सामुदायिक भागीदारी का अभाव
- योजनाओं के नियोजन और कार्यान्वयन में स्थानीय समुदायों की अपेक्षित भागीदारी का न होना, जिससे स्वामित्व और रखरखाव की भावना कम होती है।
- ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों (VWSC) को सशक्त करने में कमी।
यूपीएससी लिंक: शासन, विकास प्रक्रियाएँ
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| नियमित पेयजल आपूर्ति का अभाव | करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद कई गांवों में नल से पानी नहीं मिल रहा है। |
| खराब बुनियादी ढाँचा | योजनाओं में लगे मोटर खराब, पाइपलाइन क्षतिग्रस्त और पानी की टंकियों का रखरखाव ठीक नहीं। |
| बिजली की अनियमितता | मोटरों के संचालन के लिए बिजली की अपर्याप्त आपूर्ति, जिससे जलापूर्ति बाधित होती है। |
| जल स्रोतों का सूखना | गर्मी में नदी और अन्य जल स्रोतों में पानी का स्तर कम होना, जिससे समस्या और गंभीर होती है। |
| जांच और जवाबदेही की कमी | योजनाओं के भौतिक सत्यापन और लापरवाही के लिए जिम्मेदारी तय करने की मांग उठना। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- जल जीवन मिशन (Jal Jeevan Mission)
आगे की राह
- योजनाओं के कार्यान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए नियमित ऑडिट और भौतिक सत्यापन को अनिवार्य किया जाए।
- स्थानीय समुदायों, विशेषकर ग्राम पंचायतों को जल आपूर्ति योजनाओं के नियोजन, कार्यान्वयन और रखरखाव में सक्रिय रूप से शामिल किया जाए।
- जल गुणवत्ता की नियमित जांच और निगरानी के लिए प्रभावी तंत्र स्थापित किया जाए और परिणामों को सार्वजनिक किया जाए।
- बुनियादी ढाँचे के रखरखाव के लिए पर्याप्त बजट आवंटित किया जाए और कुशल तकनीशियनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।
- बिजली की अनियमित आपूर्ति की समस्या का समाधान करने के लिए सौर ऊर्जा जैसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के उपयोग को बढ़ावा दिया जाए।
- जल स्रोतों के संरक्षण और पुनर्भरण के लिए स्थानीय स्तर पर वर्षा जल संचयन और अन्य पारंपरिक तरीकों को प्रोत्साहित किया जाए।
- शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत किया जाए ताकि ग्रामीण अपनी समस्याओं को आसानी से उठा सकें और उनका समय पर समाधान हो सके।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
जल जीवन मिशन · पेयजल आपूर्ति · ग्रामीण विकास · स्थानीय स्वशासन · योजना क्रियान्वयन · भौतिक सत्यापन · जवाबदेही · सतत विकास लक्ष्य · जल सुरक्षा · केंद्र-राज्य संबंध
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 21’, ‘note’: ‘जीवन के अधिकार में स्वच्छ पानी’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 243G’, ‘note’: ‘पंचायतों की शक्तियाँ, ग्रामीण विकास’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 243W’, ‘note’: ‘नगरपालिकाओं की शक्तियाँ, शहरी विकास’}
- {‘article’: ‘राज्य सूची (सातवीं अनुसूची)’, ‘note’: ‘जल आपूर्ति राज्य का विषय’}
अवधारणा प्रवाह
जल जीवन मिशन का लक्ष्य हर घर नल जल → योजनाओं के कार्यान्वयन में कमियाँ और भ्रष्टाचार → खराब बुनियादी ढाँचा और रखरखाव का अभाव → ग्रामीणों को पेयजल की कमी का सामना करना → सार्वजनिक स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता पर नकारात्मक प्रभाव → योजनाओं की जांच और जवाबदेही की मांग
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. जल जीवन मिशन के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह मिशन वर्ष 2019 में शुरू किया गया था जिसका उद्देश्य 2024 तक प्रत्येक ग्रामीण घर में नल से जल का कनेक्शन उपलब्ध कराना है।
2. यह जल शक्ति मंत्रालय के तहत एक केंद्र प्रायोजित योजना है।
3. इस मिशन के तहत जल गुणवत्ता निगरानी और परीक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है। जल जीवन मिशन (JJM) की शुरुआत अगस्त 2019 में की गई थी, जिसका लक्ष्य 2024 तक देश के प्रत्येक ग्रामीण घर में कार्यात्मक घरेलू नल कनेक्शन (FHTC) के माध्यम से सुरक्षित और पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराना है। कथन 2 सही है। यह जल शक्ति मंत्रालय के तहत एक केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसमें केंद्र और राज्यों के बीच लागत साझा की जाती है। कथन 3 सही है। मिशन का एक प्रमुख घटक जल गुणवत्ता निगरानी और परीक्षण है, जिसमें सामुदायिक भागीदारी को प्रोत्साहित किया जाता है।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन ‘हर घर जल’ कार्यक्रम के उद्देश्यों को सर्वोत्तम रूप से दर्शाता है?
- ग्रामीण क्षेत्रों में केवल सार्वजनिक हैंडपंपों की स्थापना करना।
- शहरी क्षेत्रों में जल शोधन संयंत्रों का निर्माण करना।
- प्रत्येक ग्रामीण घर में नल से स्वच्छ और पर्याप्त पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित करना।
- किसानों को सिंचाई के लिए मुफ्त पानी उपलब्ध कराना।
उत्तर: प्रत्येक ग्रामीण घर में नल से स्वच्छ और पर्याप्त पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित करना। — जल जीवन मिशन के तहत ‘हर घर जल’ कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य 2024 तक प्रत्येक ग्रामीण घर में कार्यात्मक घरेलू नल कनेक्शन (FHTC) के माध्यम से सुरक्षित और पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराना है। यह ग्रामीण क्षेत्रों पर केंद्रित है और नल से जल आपूर्ति पर जोर देता है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ जल जीवन मिशन जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में स्थानीय स्तर पर क्या चुनौतियाँ आती हैं? इन चुनौतियों का समाधान करने के लिए आप क्या उपाय सुझाएँगे? (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: जल जीवन मिशन (JJM) का संक्षिप्त परिचय और इसके उद्देश्यों का उल्लेख।
2. स्थानीय स्तर पर क्रियान्वयन में चुनौतियाँ (कम से कम 5-6 बिंदु):
* धन का दुरुपयोग और भ्रष्टाचार।
* बुनियादी ढाँचे का अभाव (पाइपलाइन, मोटर, टंकी का रखरखाव)।
* बिजली की अनियमित आपूर्ति।
* जल स्रोतों का सूखना या कम होना (विशेषकर गर्मी में)।
* स्थानीय प्रशासन और ठेकेदारों के बीच समन्वय की कमी।
* जल गुणवत्ता परीक्षण और निगरानी का अभाव।
* सामुदायिक भागीदारी की कमी।
* तकनीकी विशेषज्ञता और कुशल श्रमशक्ति का अभाव।
3. समाधान के उपाय (कम से कम 5-6 बिंदु):
* भौतिक सत्यापन और नियमित ऑडिट: योजनाओं का जमीनी स्तर पर कठोर भौतिक सत्यापन।
* जवाबदेही तय करना: लापरवाही के लिए अधिकारियों और ठेकेदारों की जवाबदेही सुनिश्चित करना।
* सामुदायिक भागीदारी: ग्राम पंचायतों और जल समितियों को सशक्त बनाना, उन्हें योजना निर्माण और रखरखाव में शामिल करना।
* जल गुणवत्ता निगरानी: स्थानीय स्तर पर जल परीक्षण किट उपलब्ध कराना और जागरूकता बढ़ाना।
* तकनीकी उन्नयन: सौर ऊर्जा आधारित पंपों का उपयोग, बेहतर पाइपलाइन सामग्री।
* क्षमता निर्माण: स्थानीय कारीगरों और कर्मचारियों को प्रशिक्षण देना।
* शिकायत निवारण तंत्र: प्रभावी और सुलभ शिकायत निवारण प्रणाली स्थापित करना।
* अंतर-विभागीय समन्वय: विभिन्न सरकारी विभागों के बीच बेहतर समन्वय।
4. निष्कर्ष: सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की प्राप्ति में ऐसी योजनाओं के महत्व पर जोर और प्रभावी क्रियान्वयन की आवश्यकता।
स्रोत: amarujala.com
Jharkhand PCS (JPSC) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: झारखंड में ‘जल जीवन मिशन’ के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति की स्थिति को लेकर उठे सवालों के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
- झारखंड सरकार ने जल जीवन मिशन के तहत राज्य के सभी 16 पंचायतों में जल आपूर्ति प्रणाली की जांच के आदेश दिए हैं।
- झारखंड में जल जीवन मिशन के अंतर्गत केवल आदिवासी बहुल क्षेत्रों में ही पेयजल संकट देखा जा रहा है।
- जल जीवन मिशन के तहत झारखंड में पेयजल आपूर्ति की स्थिति संतोषजनक है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी पानी की कमी बनी हुई है।
- झारखंड सरकार ने जल जीवन मिशन के अंतर्गत पेयजल आपूर्ति की स्थिति की समीक्षा के लिए कोई कदम नहीं उठाया है।
उत्तर: झारखंड सरकार ने जल जीवन मिशन के तहत राज्य के सभी 16 पंचायतों में जल आपूर्ति प्रणाली की जांच के आदेश दिए हैं। — झारखंड सरकार ने जल जीवन मिशन के अंतर्गत राज्य के 16 पंचायतों में पेयजल आपूर्ति प्रणाली की जांच के आदेश दिए हैं, क्योंकि इन क्षेत्रों में पानी की कमी की शिकायतें सामने आई हैं।
Mains: झारखंड में ‘जल जीवन मिशन’ के अंतर्गत पेयजल आपूर्ति की स्थिति की समीक्षा करते हुए, राज्य में जल संसाधनों के प्रबंधन एवं ग्रामीण जलापूर्ति प्रणाली में सुधार हेतु किन-किन चुनौतियों का सामना किया जा रहा है? अपने उत्तर में राज्य के आदिवासी एवं पर्वतीय क्षेत्रों के संदर्भ में विश्लेषण कीजिए।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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