डब्ल्यूटीओ में भारत की 8वीं व्यापार नीति समीक्षा: निर्यात में रिकॉर्ड 863 अरब डॉलर, निरंतर प्रतिबद्धता

डब्ल्यूटीओ में भारत की 8वीं व्यापार नीति समीक्षा: निर्यात में रिकॉर्ड 863 अरब डॉलर, निरंतर प्रतिबद्धता

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — अंतर्राष्ट्रीय संबंध  |  GS Paper III — अर्थव्यवस्था
  • Prelims: विश्व व्यापार संगठन (WTO), व्यापार नीति समीक्षा (TPR), बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली, आत्मनिर्भर भारत, डिजिटल सार्वजनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, मत्स्य पालन सब्सिडी समझौता, विकसित भारत 2047
  • Essay: भारत का आर्थिक उदय और वैश्विक व्यापार में उसकी भूमिका, बहुपक्षीय संस्थानों में सुधार की आवश्यकता और भारत का दृष्टिकोण

त्वरित पुनरावृत्ति: भारत ने WTO की व्यापार नीति समीक्षा में अपनी मजबूत आर्थिक प्रगति और नियमों पर आधारित बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया, जिसमें ‘आत्मनिर्भर भारत’ और डिजिटल सार्वजनिक इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे सुधारों पर विशेष जोर दिया गया।

यह खबर चर्चा में क्यों?

जिनेवा में विश्व व्यापार संगठन (WTO) में भारत की 8वीं व्यापार नीति समीक्षा (TPR) आयोजित की गई। इस समीक्षा में भारत ने एक पारदर्शी, नियमों पर आधारित, समावेशी और विकास-उन्मुख बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। वाणिज्य सचिव ने भारत के मजबूत आर्थिक प्रदर्शन और रिकॉर्ड निर्यात पर प्रकाश डाला, जबकि अन्य सदस्य देशों ने भारत के व्यापार सुधारों और आर्थिक मजबूती की सराहना की।

पृष्ठभूमि

  • व्यापार नीति समीक्षा (TPR) WTO के निगरानी कार्य का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसके तहत सदस्य देशों की व्यापार नीतियों और प्रथाओं की नियमित रूप से समीक्षा की जाती है।
  • यह समीक्षा WTO सदस्यों को 1 जनवरी 2021 से 31 दिसंबर 2025 की अवधि के दौरान भारत की व्यापार और संबंधित नीतियों का आकलन करने का अवसर प्रदान करती है।
  • वाणिज्य सचिव ने बताया कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद, समीक्षा अवधि के दौरान भारत की औसत वार्षिक विकास दर लगभग 8 प्रतिशत रही और 2025-26 में निर्यात 863.1 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया।
  • भारत ने ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के माध्यम से घरेलू क्षमताओं को मजबूत करने और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं के साथ अधिक एकीकरण पर जोर दिया।
  • भारत ने ‘जन विश्वास पहल’, व्यापार सुगमता, डिजिटल कस्टम्स, लॉजिस्टिक्स आधुनिकीकरण, डिजिटल सार्वजनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और क्षेत्रीय व्यापार समझौतों के विस्तार जैसे प्रमुख सुधारों का उल्लेख किया।
  • WTO के सदस्य देशों ने भारत के डिजिटल सार्वजनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, वित्तीय समावेशन और व्यापार सुगमता में सुधारों की सराहना की, साथ ही मत्स्य पालन सब्सिडी पर WTO समझौते को भारत द्वारा स्वीकार किए जाने का भी स्वागत किया।

विश्व व्यापार संगठन (WTO) और व्यापार नीति समीक्षा (TPR) क्या है?

  • विश्व व्यापार संगठन (WTO) एकमात्र वैश्विक अंतर्राष्ट्रीय संगठन है जो राष्ट्रों के बीच व्यापार के नियमों से संबंधित है। इसका मुख्य उद्देश्य व्यापार बाधाओं को कम करना और मुक्त व्यापार को बढ़ावा देना है।
  • WTO की स्थापना 1995 में हुई थी, जो व्यापार और टैरिफ पर सामान्य समझौते (GATT) का उत्तराधिकारी है। इसका मुख्यालय जिनेवा, स्विट्जरलैंड में है।
  • WTO के प्रमुख कार्यों में व्यापार समझौतों का प्रशासन, व्यापार वार्ताओं के लिए एक मंच प्रदान करना, व्यापार विवादों का निपटारा और सदस्य देशों की व्यापार नीतियों की निगरानी करना शामिल है।
  • व्यापार नीति समीक्षा (TPR) WTO के निगरानी कार्यों का एक अनिवार्य घटक है, जिसका उद्देश्य सदस्य देशों की व्यापार नीतियों और प्रथाओं में पारदर्शिता और समझ में सुधार करना है।
  • TPR के तहत, सदस्य देशों की व्यापार नीतियों की नियमित अंतराल पर समीक्षा की जाती है, जिसमें उनकी आर्थिक और व्यापारिक नीतियां, व्यापार से संबंधित कानून और नियम शामिल होते हैं।
  • इस प्रक्रिया में सदस्य देश के व्यापार रिकॉर्ड पर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाती है, जिसके बाद अन्य सदस्य देश प्रश्न पूछते हैं और चर्चा में भाग लेते हैं।
  • TPR का उद्देश्य सदस्य देशों को WTO समझौतों के प्रति अपनी प्रतिबद्धताओं का पालन करने में मदद करना और वैश्विक व्यापार प्रणाली में विश्वास और पारदर्शिता को बढ़ावा देना है।
  • भारत WTO का एक संस्थापक सदस्य है और बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली में विश्वास रखता है, साथ ही विकासशील देशों के हितों की वकालत करता रहा है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
नियम-आधारित बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली वैश्विक व्यापार में स्थिरता, पूर्वानुमेयता और निष्पक्षता सुनिश्चित करती है।
8% औसत वार्षिक विकास दर कठिन वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद भारत की मजबूत आर्थिक स्थिति को दर्शाती है।
863.1 अरब अमेरिकी डॉलर का रिकॉर्ड निर्यात (2025-26) भारत की बढ़ती वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता और उत्पादन क्षमता का प्रमाण।
आत्मनिर्भर भारत पहल घरेलू क्षमताओं को मजबूत करते हुए वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं के साथ एकीकरण को बढ़ावा देती है।
डिजिटल सार्वजनिक इंफ्रास्ट्रक्चर वित्तीय समावेशन और व्यापार सुगमता में सुधार, विकासशील देशों के लिए एक मॉडल।
मत्स्य पालन सब्सिडी पर WTO समझौता सतत विकास और वैश्विक मत्स्य पालन संसाधनों के संरक्षण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • भारत का मजबूत आर्थिक प्रदर्शन और रिकॉर्ड निर्यात वैश्विक अर्थव्यवस्था में देश की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करता है।
  • व्यापार को आसान बनाने के उपाय और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) को बढ़ावा देते हैं और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाते हैं।
  • क्षेत्रीय व्यापार समझौतों का विस्तार भारत के व्यापार संबंधों को विविधता प्रदान करता है और नए बाजार अवसर खोलता है।

सामरिक महत्व

  • नियम-आधारित बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली के प्रति भारत की प्रतिबद्धता वैश्विक व्यापार शासन में स्थिरता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने में सहायक है।
  • ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल घरेलू क्षमताओं को मजबूत करके भारत की सामरिक स्वायत्तता को बढ़ाती है, जबकि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं से जुड़ाव बनाए रखती है।
  • ‘साउथ-साउथ सहयोग’ और ITEC कार्यक्रम विकासशील देशों के बीच साझेदारी और तकनीकी सहायता को बढ़ावा देकर भारत के भू-राजनीतिक प्रभाव को बढ़ाते हैं।

शासन और नीतिगत महत्व

  • जन विश्वास पहल और डिजिटल कस्टम्स जैसे सुधार व्यापार सुगमता (Ease of Doing Business) को बढ़ाते हैं और पारदर्शिता लाते हैं।
  • संतुलित और विकास-केंद्रित WTO सुधारों के लिए भारत का समर्थन बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली को मजबूत करने और विकासशील देशों के हितों की रक्षा करने में महत्वपूर्ण है।
  • डिजिटल सार्वजनिक इंफ्रास्ट्रक्चर में भारत का नेतृत्व वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) और सार्वजनिक सेवा वितरण में सुधार के लिए एक मॉडल प्रस्तुत करता है।

चुनौतियाँ

1. बढ़ता संरक्षणवाद

  • वैश्विक स्तर पर संरक्षणवादी प्रवृत्तियाँ भारत के निर्यात और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में एकीकरण को बाधित कर सकती हैं।
  • व्यापार बाधाएँ और गैर-टैरिफ उपाय भारतीय उत्पादों के लिए बाजार पहुँच को सीमित कर सकते हैं।

2. वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान

  • भू-राजनीतिक तनाव, महामारी और प्राकृतिक आपदाएँ वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को बाधित कर सकती हैं, जिससे भारत के व्यापार और उत्पादन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
  • आपूर्ति श्रृंखलाओं के विविधीकरण और लचीलेपन की आवश्यकता है।

3. तकनीकी बदलाव और नवाचार

  • तेजी से बदलते तकनीकी परिदृश्य में भारतीय उद्योगों को प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए निरंतर नवाचार और अनुकूलन की आवश्यकता है।
  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) और डिजिटल प्रौद्योगिकियों के उपयोग में अंतर को पाटना एक चुनौती है।

4. WTO सुधारों में गतिरोध

  • WTO में सुधारों पर सदस्य देशों के बीच आम सहमति का अभाव बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली की प्रभावशीलता को कमजोर कर सकता है।
  • विकासशील देशों के हितों की रक्षा करते हुए एक संतुलित सुधार एजेंडा प्राप्त करना चुनौतीपूर्ण है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
वैश्विक अनिश्चितता भू-राजनीतिक तनाव, आर्थिक अस्थिरता और व्यापार युद्ध भारत के निर्यात और निवेश प्रवाह को प्रभावित कर सकते हैं।
संरक्षणवादी नीतियाँ कई देशों द्वारा अपनाई जा रही संरक्षणवादी नीतियाँ भारतीय उत्पादों के लिए बाजार पहुँच को प्रतिबंधित कर सकती हैं।
आपूर्ति श्रृंखला में बदलाव वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं का पुनर्गठन भारत के लिए अवसर और चुनौतियाँ दोनों प्रस्तुत करता है, जिसके लिए अनुकूलन की आवश्यकता है।
तकनीकी असमानता उन्नत प्रौद्योगिकियों को अपनाने और डिजिटल कौशल विकसित करने में अंतर भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को प्रभावित कर सकता है।
कृषि क्षेत्र की संवेदनशीलता जलवायु परिवर्तन और वैश्विक मूल्य अस्थिरता कृषि निर्यात और ग्रामीण आजीविका को प्रभावित कर सकती है।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • आत्मनिर्भर भारत
  • जन विश्वास पहल
  • इंडियन टेक्निकल एंड इकोनॉमिक कोऑपरेशन (ITEC) कार्यक्रम

आगे की राह

  • नियम-आधारित बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली को मजबूत करने के लिए WTO में सक्रिय भूमिका निभाना और विकास-केंद्रित सुधारों का समर्थन करना।
  • घरेलू विनिर्माण और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल को और गति देना, साथ ही वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं के साथ एकीकरण को गहरा करना।
  • डिजिटल सार्वजनिक इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार करना और डिजिटल कौशल विकास में निवेश करना ताकि व्यापार सुगमता और वित्तीय समावेशन को और बढ़ाया जा सके।
  • नए क्षेत्रीय व्यापार समझौतों की खोज करना और मौजूदा समझौतों को मजबूत करना ताकि भारतीय निर्यात के लिए विविध बाजार पहुँच सुनिश्चित हो सके।
  • कृषि क्षेत्र में स्थिरता और उत्पादकता बढ़ाने के लिए अनुसंधान और विकास में निवेश करना, साथ ही वैश्विक बाजार में भारतीय कृषि उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाना।
  • लॉजिस्टिक्स और इंफ्रास्ट्रक्चर के आधुनिकीकरण पर ध्यान केंद्रित करना ताकि व्यापार लागत कम हो और दक्षता बढ़े।
  • वैश्विक संरक्षणवाद और आपूर्ति श्रृंखला व्यवधानों से निपटने के लिए व्यापार विविधीकरण और लचीलेपन की रणनीतियों को अपनाना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

विश्व व्यापार संगठन (WTO) · व्यापार नीति समीक्षा (TPR) · बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली · आत्मनिर्भर भारत · डिजिटल सार्वजनिक इंफ्रास्ट्रक्चर · आर्थिक संवृद्धि · निर्यात संवर्धन · संरक्षणवाद · विकसित भारत · मत्स्य पालन सब्सिडी समझौता

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 246’, ‘note’: ‘संघ और राज्यों के बीच विधायी शक्तियों का वितरण’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 265’, ‘note’: ‘कानून के प्राधिकार के बिना कोई कर नहीं’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 301’, ‘note’: ‘व्यापार, वाणिज्य और समागम की स्वतंत्रता’}

अवधारणा प्रवाह

भारत WTO व्यापार नीति समीक्षा में भाग लेता है  →  नियम-आधारित बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई जाती है  →  भारत के मजबूत आर्थिक प्रदर्शन और सुधारों पर प्रकाश डाला जाता है  →  वैश्विक व्यापार में भारत की बढ़ती भूमिका और प्रभाव को दर्शाता है  →  वैश्विक व्यापार शासन में स्थिरता और निष्पक्षता को बढ़ावा देता है  →  भारत के आर्थिक विकास और निर्यात को और गति प्रदान करता है

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. विश्व व्यापार संगठन (WTO) की व्यापार नीति समीक्षा (TPR) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. व्यापार नीति समीक्षा का उद्देश्य सदस्य देशों की व्यापार नीतियों और प्रथाओं का मूल्यांकन करना है ताकि बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली के प्रति उनकी प्रतिबद्धता सुनिश्चित की जा सके।
2. भारत की व्यापार नीति समीक्षा केवल वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा की जाती है।
3. यह समीक्षा सदस्य देशों को अपनी व्यापार नीतियों में सुधार के लिए सुझाव देने का अवसर प्रदान करती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  1. केवल 1
  2. केवल 1 और 3
  3. केवल 2 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: केवल 1 और 3 — कथन 1 सही है। व्यापार नीति समीक्षा (TPR) का मुख्य उद्देश्य सदस्य देशों की व्यापार नीतियों की पारदर्शिता और बहुपक्षीय नियमों के अनुपालन का आकलन करना है। कथन 2 गलत है। भारत की व्यापार नीति समीक्षा WTO के सदस्य देशों द्वारा की जाती है, न कि केवल भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा। कथन 3 सही है। यह समीक्षा सदस्य देशों को अपनी व्यापार नीतियों और संबंधित सुधारों पर चर्चा करने और सुझाव प्राप्त करने का अवसर देती है।

Q2. निम्नलिखित में से कौन-सी पहलें ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के अंतर्गत भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं से जोड़ने और घरेलू क्षमताओं को मजबूत करने में सहायक हैं?
1. जन विश्वास पहल
2. डिजिटल कस्टम्स
3. लॉजिस्टिक्स का आधुनिकीकरण
4. साउथ-साउथ सहयोग
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 2, 3 और 4
  3. केवल 1, 2 और 3
  4. 1, 2, 3 और 4

उत्तर: 1, 2, 3 और 4 — जन विश्वास पहल, डिजिटल कस्टम्स और लॉजिस्टिक्स का आधुनिकीकरण ‘आत्मनिर्भर भारत’ के तहत घरेलू क्षमताओं को मजबूत करने और व्यापार को आसान बनाने के उपाय हैं। साउथ-साउथ सहयोग और इंडियन टेक्निकल एंड इकोनॉमिक कोऑपरेशन (ITEC) कार्यक्रम समावेशी विकास और वैश्विक संबंधों को मजबूत करने से संबंधित हैं, लेकिन सीधे तौर पर ‘आत्मनिर्भर भारत’ के तहत घरेलू क्षमताओं को मजबूत करने से संबंधित नहीं हैं, बल्कि यह भारत की वैश्विक भूमिका को दर्शाता है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ विश्व व्यापार संगठन (WTO) की व्यापार नीति समीक्षा (TPR) क्या है और यह भारत जैसे विकासशील देशों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है? भारत ने अपनी हालिया TPR में किन प्रमुख आर्थिक सुधारों और उपलब्धियों पर प्रकाश डाला है, और ये ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने में कैसे सहायक हैं? (250 शब्द)

रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में WTO की व्यापार नीति समीक्षा (TPR) की अवधारणा और भारत जैसे विकासशील देशों के लिए इसके महत्व को स्पष्ट करें। दूसरे भाग में, भारत द्वारा प्रस्तुत प्रमुख आर्थिक सुधारों (जैसे GST, डिजिटल व्यापार, निर्यात रणनीति, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर) और उपलब्धियों (जैसे उच्च आर्थिक संवृद्धि दर, रिकॉर्ड निर्यात) का उल्लेख करें। अंत में, इन सुधारों और उपलब्धियों का ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य से संबंध स्थापित करें, यह बताते हुए कि कैसे ये लक्ष्य प्राप्ति में योगदान देंगे।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


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